गुरुवार, 19 मार्च 2026

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे 


 देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर घोटाले में फंस गए हैं घोटाला क्या है सीधे-सीधे सरकार को चूना लगाना हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद ना तो गौतम अडानी का ही मुश्किल कम हो रहा है और ना ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरअसल यह रिश्ता क्या कहलाता है यह सवाल इतना बड़ा हो चुका है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब बौखलाने  लाने लगे हैं और शायद जिस गौतम अडानी को लेकर या हिडन बर्ग की रिपोर्ट को लेकर समूची मोदी सत्ता विपक्ष पर हमलावर थी गौतम अदानी को पाक साफ बताते नहीं थकती थी और चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी  कहने लग गए कि अदानी और अंबानी के पास भरपूर काला धन है और वे टेंपो भर भर के कांग्रेस को पहुंचा रहे हैं इसलिए कांग्रेस ने गौतम अडानी या अंबानी का नाम लेना बंद कर दिया तेलंगाना की धरती से पूछना चाहता हूं जरा य शहजादे घोषित करें कि चुनाव में ये अंबानी अडानी थे कितना माल उठाया है काले धन के कितने बोरे भर कर के रुपए मारे हैं क्या टेंपो भर कर के नोटे कांग्रेस के लिए पहुंची है क्या क्या सौदा हुआ है ऐसे में उन समर्थकों का सोचिए या उन हिंदू वादियों का सोचिए या ऐसे बांगड़ बिल्लों का सोचिए जो अब मुंह छुपाते घूम रहे हैं कि वे जिस गौतम अदानी के लिए खड़े हुए थे उन्हें ही जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्ट कह दिया काला धन वाला कह दिया तो फिर उनके पास क्या बचता है लेकिन लगता है कि यह मित्र प्रेम का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और शायद यही वजह है कि कल दुनिया के सब सबसे बड़े अखबार 20 देशों से निकलते हैं फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की कोयला घोटाले को लेकर और गौतम अडानी पर कोयला घोटाले का आरोप पहली बार नहीं लगा है खदानों को देने के मामले में हो या फिर दूसरे देशों से कोयला मंगाकर यहां के विद्युत कंपनियों को मनमाने कीमत पर यानी कई गुना कीमत वसूलने को लेकर गौतम अडानी हमेशा ही विवाद में रहे हैं लेकिन इस बार जो विवाद है वह यह है कि घटिया क्वालिटी का कोयला नंबर एक क्वालिटी के नाम पर विद्युत कंपनियों को खपा गया जिसके चलते ना केवल विद्युत कंपनियों को नुकसान हुआ बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान प क्योंकि घटिया दर्जे की कोयला यदि जलाई जाएगी बिजली उत्पादन के लिए तो ज्यादा जलाना पड़ेगा और उतना ही पर्यावरण को नुकसान होगा इस पर कांग्रेस ने खुलकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया ऐसा कोई दिन नहीं आता जिस दिन अडानी जी का कोई महा घोटाला सामने ना आए अब एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आ रहा है कोयले को लेकर सही सुना आपने खटिया सस्ते दाम के कोयले को अच्छी गु गुणवत्ता का बताकर मनमाने डाम पर अडानी जी ने हिंदुस्तान की एक सरकारी कंपनी को चूना लगाकर बेचा यह बात तब की है जब अडानी जी ने इंडोनेशिया से कोयला लिया $28 प्रति टन पे ये कोयला 3500 कैलोरी वाला कोयला था हिंदुस्तान आते-आते लेकिन जादू हो गया ये 3500 कैलोरी वाला कोयला अपने आप 6000 कैलोरी वाला कोयला बन गया और दाम $28 प्रति टन से बढ़कर $92 प्रति टन हो गए 28 से बढ़ के 92 3500 कैलोरी अपने आप बढ़कर 6000 सैलरी हो गई यह कोयला अडानी ने इंडोनेशिया की एक कंपनी पीटी जोलिन से लिया था और यह तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी टन जटको को बेचा गया था ये कोयला जोने जो कंपनी है इंडोनेशिया की उसने अदानी को $28 प्रति टन में दिया पेपर में पूरी तरह से साफ है कि एंड कस्टमर टाइम जेट को है अदनी अदानी जो थे वो मध्यस्थता कर रहे थे ये कोयला का जो बिल काटा गया वो काटा गया ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित सुप्रीम यूनियन समूह के नाम उसने सिंगापुर में बिल काटा अडानी के नाम और उस कोयले को 3500 कैलोरी का तो रहने दिया लेकिन $4 प्रति टन दाम लगा दिया अब यही कोयला जब तमिलनाडु पहुंचता है भारत के छोड़ में आता है तो अडानी जी इसको 92 प्रति टन और जादू से 000 कैलोरी का बनाकर बेच देते हैं करीब 000 करोड़ रप का चूना लगाया उन्होंने भारत की एक कंपनी को तो इस पूरे मामले में अडानी जी ने एक भारतीय कंपनी से सरकारी कंपनी से धोखाधड़ी करी राजस्व की चोरी की बिजली के दाम बढ़ाए उपभोग ताओं के लिए क्योंकि महंगा कोयला आएगा तो महंगा जनरेशन होगा महंगा डिस्ट्रीब्यूशन होगा और यही नहीं उन्होंने पर्यावरण के साथ-साथ हिंदुस्तान के लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया करीब 22 लाख लोगों की हिंदुस्तान में वायु प्रदूषण से हर साल मौत होती है जिसमें से ज्यादातर बच्चे हैं तो दिक्कत की बात यह है कि आरानी जी ये सब तब कर रहे हैं जब आपको रिन्यूएबल एनर्जी में एक बड़ा प्लेयर बनाने जा रहे हैं ये अलग बात है कि कोयले की आयात करने वाली भारतीय समूह में से वो शायद एक या दूसरे नंबर पर होंगे तो मोदी जी से कुछ सवाल कि डायरेक्टरेट ऑ रेवन्यू इंटेलिजेंस को तो चलिए आपने छानबीन नहीं करने दी संस्थाओं के आपने हाथ बांध दिए आंखों पर पट्टी बांध द लेकिन अब क्या कीजिएगा क्योंकि आप ही ने कहा है कि टेंपो में भर भर कर काला धन बांटा जा रहा है वो टेंपो अडानी के पकड़े कब जाएंगे और ये काले कोयले की जो काली चोरी थी इसका क्या नतीजा है यह देश जानना चाहता है इसका अभिप्राय क्या है इसका एक ही मतलब है कि गौतम अडानी के पास भरपूर काला धन है जिसकी जानकारी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी है तब क्या घटिया कोयला सप्लाई का मामला तूल पकड़ेगा क्या इस मामले की जांच होगी यकीनन होगी यह जांच तो होगी लेकिन तब जब सत्ता बदलेगी क्योंकि राहुल गांधी ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि जिस तरह के घपले घोटाले अदानी समूह के आने लगे हैं वे सत्ता में आए यानी इंडिया गठबंधन सत्ता में आई तो हर मामले की विस्तार से जांच की जाएगी तब क्या मोदी सरकार के रहते यह जांच नहीं होगी क्योंकि जिस तरीके से सिर्फ अदानी का नाम ले लेने से ही इस दौर में उन लोगों को प्रताड़ित किया गया संसद की सदस्यता तक समाप्त करने की बात सामने आई है या आरोप लगे हैं मोदी सरकार पर तब इस सत्ता के रहते तो अदानी समूह पर कोई कारवाई होगी या जांच भी होगी कहना मुश्किल है तब देखना है कि जो कोयला घोटाले को लेकर या घटिया कोयला सप्लाई को लेकर जो मामला सामने आया है वह आम लोगों को कितना समझ में आता है !


वीडियो देखें 


https://youtu.be/e7HjSQARqkY?si=qeW-dvU-OUVzve0z

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

 युद्ध की विभीषिका को लेकर कितने ही सवाल उठते रहे हैं। भारत पाकिस्तान का युद्ध हो या फिर ईरान और इजराइल के बीच मचे युद्ध के बाद किस तरह से आपाधापी मची पूरे इजराइल में या ईरान में लोग अपने काम छोड़कर अपने वतन की वापसी के लिए किस तरह से संघर्ष किए। आज हम बात करेंगे इजराइल में कार्यरत साइंटिस्ट हैं हमारे छत्तीसगढ़ के राजधानी के लाडले देवव्रत दुबे जी। उनसे हम बात करेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध में किस तरीके से प्रभाव पड़ा इजराइल में या जहां वे काम कर रहे थे उस शहर में और क्या परिस्थिति बनी जिसकी वजह से उन्हें वतन यानी भारत आना पड़ा रायपुर आना पड़ा पूरा एक-एक बात हम समझने और जानने की कोशिश करेंगे इजराइल और ईरान के बीच बीच जो युद्ध का माहौल बना या युद्ध हुआ तो आप लोगों ने क्या देखा समझा ये थोड़ा सा बताएंगे। टेंशनंस तो पहले से थे ही पूरे मिडिल ईस्ट में। उसके बाद ईरान के न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज बम बनाने के नजदीक पहुंच रही थी। जिसको रोकने के लिए इजराइल ने अटैक किया और फिर ईरान से रिस्पांस आना शुरू हुआ मिसाइल्स का। मिसाइल्स जब आती थी तो सायरेंस बजते थे अलग-अलग एरिया में और जब हमारे एरिया में साइरस बजते थे तो हम शेल्टर में चले जाते थे। ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि वापस आना पड़ा? क्या सरकार ने कहा कि आप लोगों ने स्वयं निर्णय लिया। एंबेसी की एडवाइज़री आ रही इजराइल में एक होम फ्रंट कमांड है जो वहां पर जो भी रहते हैं उन सबको अलर्ट करती रहती है। तो एंबेसी की एडवाइज़री थी कि होम फ्रंट कमांड का जो भी गाइडेंस आए वो फॉलो कीजिए और ज्यादा ओपन एरियाज में मत घूमिए। ज्यादा भीड़ होम फ्रंट ने मना किया था जमा होने से। सारे यूनिवर्सिटीज और स्कूल्स भी बंद हो चुके थे। सब कुछ वर्क फ्रॉम होम मोड में चल रहा था। उसके बाद कुछ मिसाइल्स जो हुई जो हाईफा का अटैक हुआ। फिर वीरशिश में जब एक हॉस्पिटल पर अटैक हुआ उसके बाद एंबेसी ने यह एक ऑप्शन दिया था कि एक इवाकुएशन हो रहा है ऑपरेशन से जो जाना चाहते हैं वो अपना नाम एनरोल करवा सकते हैं। तो उसमें हम लोगों ने एनरोल किया और आ गए। कितना संघर्ष भरा महसूस हो रहा था उस दौरान जब ईरान का अटैक हुआ तो आप लोग क्या महसूस कर रहे थे? संघर्ष वैसे कुछ खास नहीं था क्योंकि जब रॉकेट्स आते थे वो पीरियड हमने देखा है। हुथस्ट की मिसाइल जब यमन से आती थी तब भी हम साइरेंस में चले जाते थे। ईरान के साथ भी जब सब कुछ शुरू हुआ तब भी हम शेल्टर्स में चले जाते थे गाइडेंस के हिसाब से। पर उसके बाद जब ये हुआ कि अटैक सिविलियन एरियाज पे होने लगे। जैसे हॉस्पिटल पे अटैक हुआ, वाइसमैन इंस्टट्यूट में अटैक हुआ। जब सिविलियन एरियाज पे अटैक होने लगे तब फिर हमने सोचना शुरू किया कि शायद निकल जाना चाहिए। इजराइल से भारत पहुंचते तक क्या महसूस कर रहे थे थोड़ा सा वो तो चल रहे थे हम तेलवी से लैंड बॉर्डर क्रॉस करके जॉर्डन गए वहां जॉर्डन के अमान एयरपोर्ट से कुवैत आए तो जब लैंड बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे तब भी जब हम बस से जा रहे थे तब भी दो बार साइंस बजे और बस रोक के हमको सड़क के किनारे खेत में जाकर रुकना पड़ा उसके बाद जब हम कुवैत से दिल्ली के लिए निकल गए थे तब शायद ईरान ने कतर पे अटैक किया और यूएई ने एयर स्पेस क्लोज कर दिया तो हमारा प्लेन वापस कुवैत गया और उसके 4 घंटे बाद फिर से टेक ऑफ किया दिल्ली और अभी सिचुएशन नॉर्मल हो गई है तो 15 दिन में तो हम शायद वापस भी चले जाएंगे जब कुवैत से हम निकले थे दिल्ली के लिए और रास्ते में थे तो प्लेन रिटर्न होने के पहले मैं तो विंडो सीट पे नहीं था पर जो लोग विंडो सीट पे थे उन लोगों ने मिसाइल्स और इंटरसेप्ट र्स दोनों ल्च होते हुए देखे जो हम इजराइल में देखते रहते थे मिसाइल्स वगैरह बट एयरप्लेन से पहली बार उन लोगों ने देखा जो कुछ लोगों ने वीडियोस लिए इजराइल में रहते हुए क्या महसूस कर रहे थे आप जो सभी जो दूसरे देशों से थे वहां जो काम कर रहे थे या आप भी तो क्या लग रहा था कि क्या कुछ होगा अभी तक तो इजराइल वन में था उसका अपना मिडिल ईस्ट में खाक रहा है जो परसेप्शन रहा है लेकिन जब ईरान के मिसाइल गिरने लगे तो क्या सोचे आपको यहां हम लोग इतने चैतन्य नहीं रहते हैं अलर्ट नहीं रहते हैं बट इजराइल में जब से हम रह रहे हैं तो हम किसी भी मोमेंट पे रेडी रहते हैं कि आप तिलवी में है या वीर शिवा में है या हफा में है तो आप जिस शहर में हैं उसके हिसाब से एक टाइमिंग होती है कि 30 सेकंड में आपको शेल्टर में पहुंचना है या 1ढ़ मिनट में आपको शेल्टर में पहुंचना है सायरन बजने के बाद तो वीरसेवा जैसे ये एक मिनट था और इतने में आप शेल्टर में पहुंच सकते हैं क्योंकि आप जहां भी हैं जिस भी बिल्डिंग में है या सड़क के किनारे हैं तो उतनी दूर में कहीं ना कहीं आपको शेल्टर्स मिल ही जाएंगे या घर भी है तो घर के अंदर भी सेफ रूम्स होते हैं। तो उसके लिए हम प्रिपयर्ड ही थे। बट ईरान की जो बैलस्टिक मिसाइल्स आई जो कुछ ऐसी थी जो इंटरसेप्ट नहीं हुई एरो से और सिविलियन एरियाज पर जो ब्लास्ट हुए उसके बाद थोड़ा सा डर लगना शुरू हुआ!

वीडियो देखें 


https://youtu.be/mCdclPK7G1E?si=6xaAuKKEWVndjJfX