बुधवार, 22 अप्रैल 2026

क़र्ज़ से लदे है साय सरकार के कई मंत्री, लाखों का क़र्ज़

 

क़र्ज़ से लदे है साय सरकार के कई मंत्री, लाखों का क़र्ज़

एक तरफ विष्णु देव साय मंत्रिमंडल में फेरबदल लेकर कई तरह की चर्चाए सामने आ रही है कहा जा रहा है कि मोदी शाह अनुमति ही नहीं दे रहे हैं और विष्णु देव साय लगातार दिल्ली का चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं तो दूसरी तरफ निगम मंडल आयोग में नियुक्ति को लेकर भी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त रोष है कहा जा रहा है कि इसे लेकर दिल्ली तक शिकायत की जा चुकी है और इसे देखते हुए बड़ी बैठक  के बाद ही कोई निर्णय होगा  लेकिन इस सबसे दूर आज हम बात कर रहे हैं विष्णु देव साय सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्य के द्वारा लिए गए कर्जे का 11 मंत्री है वर्तमान में बृजमोहन अग्रवाल जो शिक्षा मंत्री थे उन्हें केंद्र की राजनीति में भेज दिया गया और उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा जबकि वे दावा कर रहे थे कि छ महीने तक वे रह सकते हैं लेकिन आनंद फानंद में उनसे इस्तीफा ले लिया गया या उन्होंने इस्तीफा दे दिया तब सवाल यह है कि विष्णु दे साय सरकार के मंत्रिमंडल का क्या हाल है परसेप्शन सबके सामने है कि किस तरीके से खेल खेला जा रहा है मोदी की गारंटी पूरा करने के वादे के साथ सत्ता में आई सरकार किस तरीके से उद्योगपति की सरकार बन गई है अडानी की सरकार बन गई है उसे लेकर भी कई तरह के आरोप है लेकिन आज हम चर्चा कर रहे हैं विष्णु देव साय सरकार के कितने मन यो पर कर्ज और कौन कौन से मंत्री हैं जो कर्ज से मुक्त है यह पूरी जानकारी हम चुनाव आयोग के दिए गए जानकारी के आधार पर दे रहे हैं विष्णुदेव साय सरकार के जो सबसे बड़े कर्ज लेने वाले कोई मंत्री वे है श्याम बिहारी जायसवाल सरगुजा क्षेत्र से आते हैं और इन पर 5 करोड़ से अधिक कर्ज है बैंक में इनकी पत्नी भी सम्मिलित कर्ज में शामिल है 5 करोड़ 16 लाख 8477 रप के कर्जदार है ये तो दूसरे नंबर पर जिनका नाम है वे है खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जिन पर 65 819 ₹ का कर्ज है तो तीसरे नंबर पर ओपी चौधरी है विष्णु देसाय से थोड़ा ही कम कर्जदार हैं वे 525000 के कर्जदार हैं हालांकि वे बड़े-बड़े दावा करते हैं कि किस तरीके से उ उन्होंने 2 करोड़ रुपए को 24 करोड़ बना लिया और पता नहीं किस किस तरह की बात करते हैं सुपर सीएम भी कहलाते हैं उन पर 65 करोड़ 25000 का कर्जा है तो राम विचार नेताम दमदार मंत्री हैं आदिवासी समाज से आते हैं यह भी सरगुजा क्षेत्र के विधायक हैं और रमन सरकार में भी मंत्री रहे इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले को लेकर भी वे चर्चा में रहे कि सबसे नार्को टेस्ट जो कथित नार्को टेस्ट है उसमें सबसे ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप राम विचार नेताम पर रहा है और वर्तमान में वे कृषि मंत्री हैं और कृषि विभाग कौन चला रहा है इसे लेकर भी संशय कई लोग तो किसी राकेश अग्रवाल का नाम लेते हैं तब उन पर 49 8276 रप का कर्जा है तो उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा पहली बार विधायक बने हैं और सीधे उप मुख्यमंत्री बना दिए गए गृह मंत्री जैसा महत्त्वपूर्ण विभाग उनके पास है उन पर 12 लाख से ऊपर कर्जा है एक मात्र महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी कर्जदार है उन पर 8 लाख रपए का र्चा है इसमें उनके पति भी साथ में हैं और यह कर्जा कुछ पटाल दिए हैं कि बढ़ गए हैं यह इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है लेकिन दयाल दास बघेल सुरक्षित सीट नवागढ़ से जीते हैं वे पूर्व मंत्री रुद्र गुरु को हराए हैं उन पर भी 40 90 हज से अधिक रुप का कर्चा है केदार कश्यप बस्तर के बड़े नेता है रमन सरकार में मंत्री जब जब चुनाव जीते हैं तब तब मंत्री रहे तीसरी बार वे मंत्री बने हैं उन पर भी 25 लाख का कर्जा है लेकिन इन कर्जदार मंत्रियों से भी इतर तीन ऐसे मंत्री हैं जिन पर कोई कर्जा नहीं है या उन्होंने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है उसमें बताया कि उन पर कोई नहीं है इनमें कोरबा के महापौर रहे चर्चित है बेहर एक विमला कांड को लेकर उनकी चर्चा बहुत जबरदस्त होते रही और हाल में वे चर्चा में तब आए जब विधानसभा में उन्हें उद्योगों में सुरक्षा को लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनु शर्मा नेही सवाल उठाया था इसके अलावा जो बारूद फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था पटवा के रिश्तेदारों की बारूद फैक्ट्री में उसमें उसे लेकर वे चर्चा में आए थे उन पर भी कोई कर्जा नहीं है तो पीए गिरी करते हुए मंत्री तक पहुंचे टंक राम वर्मा बलौदा बाजार के विधायक हैं उन्होंने शैलेश नितिन त्रिवेदी को हराया पहली बार विधायक बने और राजस्व मंत्रालय खेल मंत्रालय उनके पास है और किस तरीके से खेल विभाग में अंधा बा रेवड़ी अपन अपन को देवाले किससे चर्चित है ऐसे मंत्री टंक राम वर्मा पर भी कोई कर्जा नहीं है तो जो मुख्यमंत्री के दौड़ में सबसे आगे थे और अभी भी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए हैं संघ के सबसे करीबी और विधायक पहली बार बने उससे पहले वे सांसद रहे और पहली बार विधायक बनते ही मुख्यमंत्री तक जा पहुंचे हैं ऐसे नेता अरुण साव पर भी कोई र्चा नहीं है ये पूरी जानकारी चुनाव आयोग को चुनाव लड़ने से पहले जो दी जाती है उनके आधार पर हो सकता है कि इनमें से कुछ लोगों ने कर्जा पटा दिया होगा या कई लोगों के कर्जे बढ़ गए होंगे यह देखने की बात है हमारी टीम लगी हुई कि स्थिति क्या है !

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https://youtu.be/B7ECf91Mw9Q?si=Qqw35hohda-vVo7a

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली 


देश के प्रधानमंत्री से लेकर तमाम बीजेपी नेता बंगाल चुनाव में बलात्कार का मुद्दा उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ बलात्कारियों को सत्ता के संरक्षण का मामला भी गरमाने लगा है एक रिपोर्ट-

कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए  रेप कांड ने एक बार फिर समूचे देश को झकझोर के रख दिया था  इसलिए देश भर के तमाम डॉक्टर सड़कों पर उतर आए थे, न्याय के लिए याद कीजिए आप 12 साल पहले जब निर्भया कांड हुआ था तब इसी तरीके से समूचा देश सड़कों पर था और उसके बाद सरकार ने कानून भी बनाए थे और लगने लगा था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह नहीं देख पाए कि सत्ता किस तरीके से बलात्कारियों का संरक्षक बनी बैठी है यदि एनसीआरबी के आंकड़े को देखें तो आप चौक जाएंगे कि हर रोज इस देश में 87 महिलाओं की युवतियों की बलात्कार होती है हर रोज इतनी बड़ी तादाद में यदि यौन उत्पीड़न से महिलाएं पीड़ित हैं तब यह हंगामा कलकाता रेप केस के बाद क्यों और उसके बाद भी क्या यह अपराध थम गया है याद कीजिए आप उत्तराखंड में किस तरीके से युवती के साथ बस चालकों ने बलात्कार किया और बिहार से खबर आई कि एक दलित छात्रा के साथ किस तरीके से विभ तरीके से बलात्कार किया नाबालिक छात्रा से यानी ना तो बलात्कार का सिलसिला रुक पा रहा है और रोज हो रहे बलात्कार के आंकड़े ही कम हो रहे हैं कि और ना ही राजनीतिक दलों का खेल सवाल यह नहीं है कि कलकाता कांड को लेकर डॉक्टर आज सड़कों पर है उनके साथ तमाम लोग जुड़े हुए हैं क्योंकि महिला उत्पीड़न का मामला है तब सवाल यह है कि क्या इस अपराध को रोका जाना चाहिए और को रोकने के लिए अब नए सीरे से इस देश को आंदोलन के लिए खड़ा होना चाहिए यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि लोगों ने आश्चर्यजनक ढंग से निर्भया के बाद चुप्पी ड़ ली थी गुस्सा बेहद है इस मामले को लेकर लेकिन किस पर करें गुस्सा उस सरकार पर जो खुलेआम बृजभूषण सरण सि जैसे लोगों को संरक्षण देती है या उस सरकार पर जो हर चुनाव के पहले राम रहीम जैसे बलात्कारियों को पैरोल पर छोड़ देती है एक दो बार नहीं दर्जन बार से अधिक राम रहीम को पैरोल पर छोड़ा जा चुका है या उस सरकार पर जो बिलकिस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर स्वागत समारोह में तालियां पीटती नजर आती है या तालियां पीटने वालों के साथ खड़ी होती क्या विनेश फोगाट साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जब सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे थे उस छिछोरे बृजभूषण शरण सिंह को लेकर तब उन्हें छिनाल कह दिया गया था और यह लोग तमाम जो आज नारा लगाते घूम रहे हैं उठो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे पिछले एक हफ्ते से यह टैग लाइन चल रहा है सब तरफ उन लोगों ने खामोशी क्यों ड़ ली थी जब बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ वे महिला पहलवान रोती कलपी सड़कों पर घसीट जा रही थी या फिर वे लोग कहां चले जाते हैं जब राम रहीम जैसे बलात्कारियों को दर्जन भर बाद पैरोल में छोड़ा जाता क्या उनके खिलाफ सड़क पर नहीं उतरना चाहिए कि आखिर ऐसे बलात्कारी जिसकी सजा की पुष्टि हो चुकी है उन्हें कैसे पेरोल पर छोड़ सकती है कोई सरकार और एक दो बार नहीं दर्जन भर से अधिक और लोगों की खामोशी क्या सिर्फ राजनीतिक नफा नुकसान के साथ जुड़ गई है यह सवाल तो ब कि बानों के बलात्कारियों की रिहाई को लेकर भी उठनी चाहिए थी और सड़क पर लोगों को उतर जाना चाहिए था लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह भूल जाते हैं कि यदि कल किसी के साथ इस तरह की घटना हुई है तो अगली बारी उनकी अपनी है तब सवाल यह है कि क्या सिर्फ कलकाता रेप केस में हंगामा खड़ा कर देने से बलात्कार के मामले रुक जाएंगे क्योंकि हर रोज इस देश में 87 बलात्कार हो रहे हैं और इस घटना के बाद भी लगातार बलात्कार की घटनाएं सुनाई दे रही है वह भी विभ बलात्कार की घटनाएं उत्तराखंड की घटनाएं कम विभ नहीं है क्या कोलकात्ता कांड के साय तरे उसे छुपा लिया जाएगा या कल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुई नाबालिक छात्रा के साथ की घटना को क्या कलकाता कांड के साथ छुपा लिया जाएगा ऐसे कई सवाल है आप खुद सोचिए कि आप किस तरीके से राजनीतिक फायदे नफा नुकसान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं क्यों नहीं उठना चाहिए राम रहीम को पैरोल पे छोड़ने के खिलाफ सड़क की आवाज लोगों की आवाज क्यों नहीं उठनी चाहिए क्या राजनीति ने भी बलात्कार जैसे विवस मामले को बांट दिया है और लोग नफा नुकसान देखकर आंदोलन करते हैं ऐसे कई सवाल है लेकिन एक बड़ा सवाल है कि यदि जब तक राम रहीम या बृजभूषण शरण सिंह या बिल्किस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर या उन्हें बचा की कोशिश पर यह देश चुप्पी ड़ के बैठे रहेगा तब तक इस तरह की घटनाएं होते रहेगी और इन सब बातों के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से बलात्कार को लेकर भाषण बाजी करना अब समय की मांग है जिनको सजा होती है उसकी व्यापक चर्चा हो ताकि ऐसा पाप करने वालो र पैदा हो पाप करने की होती है फं पर ल पता है क्या आम लोगों का मुह चिढ़ाना नहीं है !

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https://youtu.be/HnBPdIp0Wys?si=5xFmgfsHNStQbMEw