शुक्रवार, 27 मार्च 2026

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम 


 क्या मोदी सत्ता ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को भ्रष्टाचार करने की खुले आम छूट दे रखी है लगातार खबर आ रही है चाहे रेलवे क्यों ना हो वंदे भारत एक्सप्रेस की छत से पानी टपकने की खबर आ रही है तो दूसरे तरफ पूलों के लगातार ढहने की खबर दिल्ली के प्रगति मैदान की भी तो खबर हैं तो दूसरी तरफ जिस तरीके से  कैग ने रिपोर्ट दी थी चाहे आयुष्मान भारत कार्ड योजना हो या फिर ा स करोड़ रुपए में एक किलोमीटर सड़क निर्माण की बात हो सब तरफ भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है लेकिन अब जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से खबर रही है वह भी हैरान कर देने वाली रायपुर स्थित एम्स  अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान  वहां से जो टेंडर घोटाले की खबर आ रही है वह हैरान कर देने वाली है कि किस तरीके से दिल्ली से आए स्टाफ ने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए किस किस तरीके का खेल नहीं खेला सब कुछ कागजों में कैद है और आरटीआई के माध्यम से और भी जानकारी इकट्ठी की जा रही है लेकिन जो प्रारंभिक जानकारी मिली है वह साफ संकेत दे रही है कि चहते ठेकेदार को टेंडर देने ठेका देने मनमाने ढंग से घपले बाजी की गई है घोटाले की गई है 

इस घोटाले को लेकर जो खबर आ रही है व हैरान कर देने वाली इसलिए भी है क्योंकि रायपुर एम्स जो कई कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के आगमन के कार्यक्रम भी होते हैं मंत्रियों के कार्यक्रम होते इसके लिए इवेंट कंपनियों को काम दिया जाता है ऐसा ही एक काम का टेंडर निकला था जिसे 30 मई को खोला जाना था इस टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया था जिसम से एक कंपनी को यह टेंडर मिल गया था लेकिन वह कंपनी चहेता कंपनी नहीं था इसलिए यह टेंडर रदद कर दिया गया कि इन कंपलीट फाइनेंस की होने की वजह से 

जबकि इसे जिस तरह के रेट  आए थे या जो ए कंपनी थी व य 30 लाख में काम करने को तैयार थी तो जो दूसरी कंपनिया थी वह कोई 40 लाख तो कोई 60 लाख तक का टेंडर भरा था ऐसे में उस फाइनेंशियल कीट के जो खाने छूटे हुए थे उसे भरकर आसानी से टेंडर जारी किया जा सकता था लेकिन वर्क आर्डर नहीं दिया गया और तमाम टेंडर निरस्त करके फिर से टेंडर जारी कर दिया गया यह पूरा ऑनलाइन प्रक्रिया है लेकिन किस तरीके से इसमें भी खेल होता है यह समझिए जब दूसरी बार टेंडर जारी हुआ और 26 तारीख को उसे 26 जून को इसे खोला जाना था तब छ कंपनियो ने इस में हिस्सा लिया कंपने प्रजेंटेशन नहीं दिया तो उनका फम रिजेक्ट कर दिया गया अब सिर्फ दो कंपनिया बची थी एक री दूसरा और इन दोनों कंपनियों का टेंडर खोला जाना था और जिसका एल वन होता उसे टेंडर दे दिया जाना था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से  टेंडर खोला ही नहीं क्योंकि  टेंडर देना था यह शिकायत भी हुई है क्योंकि जिस बना पर मेरी टेडर किया नहीं खोला गया है व पहले जब टेंडर हुआ था उसम प्रेजेंटेशन व दे चुके थे और यह कर दिया गया को की आपका जो प्रेजेंटेशन है अप टू द मार्क पर नहीं है जबक इसी प्रेजेंटेशन पर पहली बार टेंडर उसे मिल चुका था जिसे निरस्त किया गया था ऐसी परिस्थिति में जब हमारी टीम ने इस शिकायत पर जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उपलब्ध नहीं थे लेकिन जो जानकारी मिली है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है क्योंकि टेंडर की शर्तो में एक महत्वपूर्ण शर्त यह था कि टर्न ओवर एक करोड़  होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को यह टेंडर जारी कर दिया गया उसका टर्न ओवर 50 लाख से भी ज्यादा नहीं है और कारण यह बताया गया क्योंकि वह  एमएसएनई कंपनी है इसलिए उसे छूट दी जा रही है और यही बात यदि टेंडर जारी करते समय कर दी जाती कि एमएसएमई  सेक्टर वालो को छूट दी जाएगी तो यकीन मानिए कि कई लोग स्टैंडर में भाग लेते हैं यानी एक करोड़ टन की शर्त लगाकर एमएसए के कई कंपनियों को रोक दिया गया और एमएस की छूट के नाम पर अपने चहते कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में जबरदस्त ढंग से खेल हुआ है और यही नहीं अब तो जो कंपनिया इवेंट का काम करती है फ्लावर लगाने का टेंट लगाने का लगाने का व कंपनिया आशंकित इसलिए भी है क्योंकि एम्स में हर साल करोड़ अरब रुपए का काम निकलता है तो एक शुरुआत थी इस साल की उसमें ही यदि इस तरीके की घपले बाजी हो रही है तो आने वाले दिनों में क्या कुछ होगा कहना मुश्किल है देखना है कि इस मामले को लेकर अब किस तरीके की कारवाई होगी क्योंकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ पार्टी इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने वाली है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/uXzRZRUhjLw?si=_zis7qUm9KlXBTBE

प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था

 प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था 


क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार पूरी तरीके से फेल हो चुकी है और उसके सामने इस प्रदेश के कानून व्यवस्था को संभालने का कोई रास्ता नहीं बचा है या फिर प्रदेश की सरकार को किसानों की भी चिंता नहीं है , हालत बदतर होते जा रहा है महंगाई को जमा खोर ने और बढ़ा दिया है जमकर जमाखोरी हो रही है छत्तीसगढ़ में और बेरोजगारी का यह आलम है कि एक वैकेंसी निकलती है और लाखों बच्चे टूट पड़ते हैं उसकी नौकरी पाने के लिए तब ऐसी परिस्थिति में डबल इंजन की सरकार कर क्या रही है यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि अपनी पूरी कैबिनेट के साथ विष्णु देव साय सरकार  रामलला के दर्शन करने गए थे, वे अपने साथ बेर भी ले गए हैं सबरी का बेर बहुत चर्चित रहा है पूरे राम कथा में उस बेर को लेकर गए हैं शिवरी नारायण से तो विष्णु भोग चाव यह भी छत्तीसगढ़ की एक अपनी पहचान है कोंसा वस्त्र कारी लड्डू अनरसा और सीताफल सब कुछ लेकर गए थे,रामलला को खुश करने के लिए लेकिन क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि जब वह रामलला के दर्शन की रवानगी कर रही थी तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरेआम गोलीबारी हो रही थी हवाई फायर किए गए हैं कार को गोली लगी है तब कानून व्यवस्था की स्थिति किस हद तक बदतर है और किस तरीके से लोगों में पुलिस का डर खत्म हो गया है यह लगातार देखने को मिल रहा है लगातार हत्याएं हो रही है सवाल सिर्फ बलौदा बाजार के उस घटना का नहीं है जिसमें पुलिस कप्तान के कार्यालय को जला दिया गया और कलेक्टोरेट में तोड़फोड़ किया गया उसके बाद पुलिस पकड़ धकड़ कर रही है कहा जा रहा है कि जो लोग इस घटना में शामिल नहीं थे उनकी भी गिरफ्तारी हो रही है भीम आर्मी भी निशाने में है तो कांग्रेस के नेता भी निशाने में है लेकिन यदि प्रदेश भर में लगातार हत्याएं हो रही है याद कीजिए कि किस तरीके से सरेआम एक लड़की को बीच बाजार में चाकू मार दिया गया था सरगुजा क्षेत्र में तो दूसरी तरफ जगदलपुर में जो घटना हुई है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है सरकार भले ही दुनिया भर का दावा कर ले लेकिन महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों का जीवन नार की बना दिया और नशे के कारोबार में जिस तरीके से सरकार भी लिप्त हो गई है जिस तरीके से अवैध शराब बिक रहे हैं जिस तरीके से नशे की गोलियां राजधानी के कई क्षेत्रों में बिक रही है उसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार केवल पैसा पैसा पैसा कर रही है क्योंकि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी साफ कह दिया है कि योजनाओं में पैसे खर्च हो रहे हैं रोज बेरोजगार युवक पकौड़ा तलने यह सीधे नहीं कहा है लेकिन इसी तरह का आशा है उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि वैकेंसी नहीं निकलेगी तब ऐसी परिस्थिति में जब अपराध पढ़ रहे हैं राजधानी में ही लगातार नशे के कारोबार फल फूल रहे हैं जुआ सट्टा का जोर है और खुलेआम गोलीबारी हो रही हो तब सवाल यह है कि आखिर बस्तर में जो जगदलपुर में जो दोहरा हत्याकांड हुआ उसका सच क्या है क्या उसके पीछे महंगाई बड़ी वजह है कहा भी जा रहा है कि जिस युवक ने अपने मां और बड़े भाई की हत्या की वह पूरी तरीके से कर्ज में डूबा था उनके घर में आए दिन पैसे को लेकर विवाद होता था और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा था एक छोटी सी किराने की दुकान थी आप सोच रहे होंगे कि अपनी मां और भाई की हत्या करते वक्त उस हत्यारे भाई का हाथ क्या नहीं खापा होगा लेकिन क्या महंगाई और कर्जे का बोझ इतना बड़ा हो चला था कि उसके हाथ अपनी मां और भाई के गर्दन तक जा पहुंचा सवाल सवाल आप इस दौर में कुछ भी उठा ले लेकिन यदि सब कुछ धर्म के आधार पर ही राजनीति को हका जाएगा तो फिर आम आदमी की तकलीफ कैसे दूर होगी यह सबसे बड़ा सवाल है जिस तरीके से तेली बांधा क्षेत्र राजधानी के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है भीड़भाड़ वाले इलाके में सरेआम कोयला कारोबारी पर गोली दागी गई हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन क्या यह कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा नहीं करता है आप खुद सोचिए कि एक तरफ कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर है किसानों की हालत खराब है और दूसरी तरफ यदि सत्ता सरकारी खर्चे से यदि पूरे कैबिनेट के साथ राम लला का दर्शन करने जा रहे हैं तो यह किस तरह की राजनीति की जा रही है आप खुद सोचिए !

Video देखें 

https://youtu.be/C42uGXjDaB4?si=pib-0Tiw-v1lahmD