गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

जब चौकी प्रभारी को ईमानदारी की सज़ा

जब चौकी प्रभारी को ईमानदारी की सज़ा 

 छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार और उसके गृह मंत्री से कानून व्यवस्था तो संभल नहीं रही है और अब कानून व्यवस्था संभालने में निकली पुलिस को ही यदि निलंबित कर दिया जाए तो इसे आप क्या कहेंगे और वह भी आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते आदिवासी प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया जाता है क्योंकि उसने बस स्टैंड में खुलेआम कार में बैठकर शराब पीने वालों को गिरफ्तार करके चौकी तक ले आया था देवनारायण नेताम प्रधान आरक्षक यही नेता में आदिवासी समाज के और उन्होंने जब खुलेआम शराब खोरी को लेकर सवाल जवाब किया तो शराब पीने वाला एक युवक ने स्वयं को मंत्री का जेठ बताने लगा महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं आप सोचिए कि किस तरीके की मंत्री है और उनका जेठ जो पुलिस को धमकाने लगा लेकिन देवनारायण नेताम उनकी धमकी में नहीं आकर उन्हें चौकी में ले आए जहां चौकी में भी उसने अपने रुतबे का इस्तेमाल करते हुए ना केवल देवनारायण नेताम के साथ धक्का मुक्की की बल्कि छीना झपटी में देवनारायण नेताम की वर्दी फट गई या बिल्ला निकल गया और उसके बाद जो कुछ खेल हुआ व हैरानी की बात नहीं है कहा जाता है कि इसकी खबर ल ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और एसपी ने देवनारायण नेताम को आदिवासी है उसे अटैच कर दिया लाइन अटैच कर दिया और उस युवक को थाने से ही छोड़ दिया बगैर कारवाही की क्योंकि वह महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का जेट बताया जा रहा और इतना ही नहीं उस प्रधान आरक्षक को जिस तरीके से लगातार धमकी मिल रही है वह भी हैरानी की बात है उन्हें किसी स्थान का नाम लेकर कहा जा रहा है कि यहां आइए फिर बताते हैं कि तुम्हारी पुलिस क्या करती है यानी आप सोचिए कि किस तरीके से छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार चल रही है प्रदेश में अपराध के आंकड़े आसमान छू रहे हैं नशाखोरी को लेकर तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बताया कि किस तरीके से गांजा जैसे मामले में 36 गढ़ किसी भी दूसरे राज्य से औसतन डबल स्थिति में है यानी मनमाने गांजा की बिक्री हो रही है नशाखोरी को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे और राजधानी में लगातार नसेर द्वारा अपराध को अंजाम दिया जा रहा है ऐसे में चौकी प्रभारी ने जब शराब पीते खुलेआम शराब पीते दो लोगों को पकड़ा और थाने तक लाया तो उनके साथ किस तरीके से सत्ता में बैठे लोगों ने करतूत किया यह किसी से छिपा नहीं है सवाल क्या सिर्फ इतना है कि देवनारायण नेता आदिवासी समाज के हैं इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री आदिवासी है इसलिए हिम्मत दिखा दी थी और उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है आगे क्या होगा देवनारायण नेताम के साथ कहना बेहद मुश्किल है हालांकि एसएसपी का दावा है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और सबके खिलाफ कारवाही होगी तो क्या ये इस तरह की कारवाही होगी कि एक प्रधान आरक्षक जो अपनी ड्यूटी बजा रहा है और मंत्री का जेठ बताने के बाद भी चौकी तक ले आया उस प्रधान आरक्षक को ईमानदारी का इनाम देने की बजाय उसे लाइन अटैच कर देना यह किस तरीके का डबल इंजन है और गृह मंत्री विजय शर्मा दावा करते हैं कि अपराध क्याम हो रहे और जिस तरीके का खेल राजनीति में इन तीनों छत्तीसगढ़ में चल रहा है वह क्या कम चौकाने वाला है जो ईमानदारी से ड्यूटी बजाने वालों के साथ कारवाई की जा रही ऐसे में कौन पुलिस वाला भला ऐसे नसेड़ी और अपराधियों के खिलाफ कारवाही करने की हिम्मत जुटा सकता है किसे अपनी नौकरी प्यारी नहीं है तब सवाल यह है कि क्या इस मामले में उच्च स्तरी जांच करके अपराधियों के खिलाफ कड़ी कारवाही नहीं की जानी चाहिए किसके दबाव में आकर एसपी ने लाइन अटैच किया देवनारायण नेताम को क्या उसकी भी गंभीरता से जांच नहीं होनी चाहिए विष्णु देव सय स्वयं को आदिवासी समाज का कि मुखिया बताने सेव हम को नहीं थकते और एक आदिवासी प्रधान आरक्षक को सिर्फ इसलिए लाइन अटैच कर देना कि वह शराब खोरी कर रहे युवको को चौकी तक ले आया देखना होगा इस मामले में क्या कुछ होता है अभी तक कांग्रेस की किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन मामला बेहद गंभीर है क्योंकि मंत्री से जुड़ा मामला है और मंत्री एक मात्र महिला मंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्री उनके कई तरह के मामले अब सामने आने लगे हैं हम हमारी टीम लगी हुई है विस्तार से आपको पूरी जानकारी देंगे !

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https://youtu.be/Q_HI8mTE31g?si=p1TLZ-5Gg5Xjn8O0

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

भूपेश को घेरने के चक्कर में बीजेपी नेताओं की मुसीबत बढ़ी

 

भूपेश को घेरने के चक्कर में बीजेपी नेताओं की मुसीबत बढ़ी

सत्ता में आते ही भारतीय जनता पार्टी डबल इंजन की सरकार विष्णु देव साय की सरकार ने जिस तरीके से एकएक मामले को सीबीआई को सौंपना शुरू किया है क्या उससे भ्रष्टाचार मिट पाएगा या अधिक मामले को सीबीआई को सौंपा गया है क्या उसका का परिणाम सुखद आएगा क्योंकि सीबीआई का जो परसेप्शन रहा है वह न्यायालय में जाकर टाय टाए फिस हो जाने वाला रहा है और इस दौर में तो सीबीआई हो ईडी हो या तमाम तरह की इस तरह की जितनी भी संस्थाएं हैं सब पर राजनीतिक द्वेष के साथ कारवाई करने का आरोप लगता रहा है ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस महादेव सट्टा को सौंपा है उसे लेकर बेहद बवाल मचा था इससे पहले हम बता देते हैं कि दो और मामले सीबीआई को सौपे गए जिसमें से एक बीरपुर हत्या का मामला था जो चुनावी राजनीति में बड़ा मुद्दा था और इसके चलते दुर्ग जिले में कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया था और कद्दावर मंत्री र चौवे ताम्र साहू रुद्र गुरु सब चुनाव हार गए थे और इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया है क्या कुछ कारवाई हो रही है अभी किसी की जानकारी में नहीं दूसरा मामला था यह भी चुनाव में खूब हल्ला हुआ था पीएससी घोटाले का जिसमें राज्यपाल के यहां तैनात अधिकारियों पीएससी अध्यक्ष पीएससी सचिव और कई कांग्रेस के नेताओं के रिश्तेदारों का चैन का मामला था भर्ती पीएससी ने निकाली थी इस मामले को भी सौंप दिया गया है कारवाही कहां तक हो रही है किस तरीके से गिरफ्तारी होगी अभी कहना मुश्किल है अब तीसरा मामला महादेव सट्टा एक्ट का है इस मामले को लेकर बहुत बवाल मचा बवाल तो यहां तक मचा कि जो मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर है उस उसके साथ भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं की तस्वीर तक कांग्रेस ने जारी कर दी थी जिसमें डॉक्टर रमन सिंह थे प्रेम प्रकाश पांडे थे और भी बहुत सारे भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ महादेव सट्टा संचालित करने वाले सौरभ चंद्राकर की तस्वीर थी कहा जा रहा है कि इस मामले में कई आईपीएस घेरे में है हालांकि अभी तक जितने भी बड़े मामले सामने आए हैं चाहे कोयला घोटाला हो या शराब घोटाला हो सब में नाम तो रहे आईपीएस अधिकारियों के लेकिन किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई गिरफ्तारी केवल आईपीएस लोगों की हुई तो क्या महादेव सट्टा ए में जिस तरीके से दुर्ग रायपुर जैसे शहरों में उस दौरान पदस्थ आईपीएस लोगों के नाम थे क्या उनकी गिरफ्तारी होगी यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए है क्योंकि छोटे मछलियां तो गिरफ्तार हुई है अब तक कोई बड़ी मछली गिरफ्तार नहीं हुई क्योंकि संचालक करने वाले लोग दुबई में जाके बैठे हैं और अभी तक महादेव सट्टा ए पर प्रतिबंध भी नहीं लगा है कारवाही की बात की जाए तो 300 से ऊपर गिरफ्तारी हो चुकी है देश भर के कई थानों में अपराध दर्ज है और ओडब्ल्यू ने जो रिपोर्ट लिखी है उसमें भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम इसके अलावा भी कई पुलिस अधिकारियों के नाम है कई बड़े अधिकारी हैं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का तो हमने बताया कि जब यह मामला उठा था तो किस तरीके से कांग्रेस ने बकायदा पत्रकार वार्ता लेकर सौरभ चंद्राकर के संबंधों का खुलासा करते हुए भाजपा नेताओं के साथ उनकी तस्वीर जारी की थी तो क्या इस जांच में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता भी आएंगे जिनके साथ उनकी तस्वीर है क्या उनकी भी गिरफ्तारी होगी बहरहाल कहा जा रहा है कि यह पूरा मामला भूपेश बघेल पर दबाव बनाने के लिए है देखना है कि सीबीआई इस मामले को क्या करती है !

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https://youtu.be/W8ElSBP_OgI?si=uodJqRK-mTtk3-Z0

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

चौधरी को लेकर क्यो नाराज़ है कर्मचारी

 चौधरी को लेकर क्यो नाराज़ है कर्मचारी 


छत्तीसगढ़ के सबसे दमदार मंत्री माने जाने वाले ओपी चौधरी ने एक बार फिर कर्मचारियों को लेकर जो बात कही  उसे लेकर विवाद शुरू हो गया है दरअसल ओपी चौधरी का विवादों से पुराना नाता है जब वे कलेक्टर थे तब भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप के चलते हुए विवादों में आए थे उसके बाद उन्होंने आनंद फानंद में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली थी लेकिन 2018 का चुनाव वे हार गए थे   फिर उन्हें टिकट मिली और अमित शाह को आकर कहना पड़ा कि ओपी चौधरी को जिता हो हम इन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे और इसके बाद जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो उन्हें सबसे महत्त्वपूर्ण विभाग वित्त विभाग दिया गया वित्त विभाग के मिलते ही जिस तरीके से वे विवादों में आए हैं उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं सबसे पहले तो उन्होंने 33000 शिक्षकों की भर्ती के मामले में जिस तरह से कहा कि अभी फंड नहीं है फिलहाल शिक्षकों की भर्ती पर कोई विचार नहीं किया जा रहा उसे लेकर ओपी चौधरी विवादों में रहे और बेरोजगारों का गुस्सा आज तक सोशल मीडिया में फूट रहा तब कर्मचारियों को लेकर ओपी चौधरी ने जो बात कही उससे लेकर कर्मचारी संगठनों में भी आक्रोश है हालांकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारी पहले से ही ओपी चौधरी की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और विभिन्न संगठन खासकर शिक्षक समुदाय तो लगातार आंदोलन कर रहे हैं युक्तिकरण के खिलाफ दरअसल यह पूरा खेल शिक्षक भर्ती पर बंदिश लगाने का है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा क्योंकि स्कूलों में शिक्षक की कमी है लेकिन युक्तिकरण के नाम पर जिस तरीके से स्कूल ही बंद करने की योजना बना ली गई है उसे लेकर शिक्षक संघों में भारी आक्रोश है लेकिन नया मामला है यूपीएस का यूपीएस यानी नई एकीकृत पेंशन योजना यह केंद्र सरकार ने प्रस्ताव बनाकर लागू कर दिया है 1 अप्रैल 2025 से और इसमें फायदा जो 25 साल नौकरी कर चुके हैं उन्हीं कर्मचारियों को ज्यादा मिलेगा अभी ओपीएसओ पेंशन स्कीम और एनपीएस न्यू पेंशन स्कीम को लेकर जबरदस्त बवाल है और कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा काम कर रहा था और इसी से घबराकर केंद्र सरकार ने नहीं एकीकृत पेंशन योजना लाई है यूपीएस जिसका नाम दिया गया और राज्य सरकारों से कहा गया है कि कर्मचारियों को इस बात के लिए तैयार करें इस पेंशन को बनाने वालों का दावा है कि इस योजना का लाभ 90 लाख कर्मचारियों को होगा लेकिन छत्तीसगढ़ में इस योजना को लागू करने का कोई विचार नहीं है मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह बात वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साफ तौर पर कह दिए उन्होंने प्रतिष्ठित अखबार नव भारत से चर्चा करते हुए यह बात कही है तो क्या इस नई पेंशन स्कीम पर कोई विचार नहीं किया जाएगा और कर्मचारियों को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि जब विचार ही नहीं होगा तो फायदा कहां से मिलेगा लेकिन इससे इधर छत्तीसगढ़ की क्या स्थिति है छत्तीसगढ़ में ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग को लेकर लंबे आंदोलन जब हुए तो पूर्ववर्ती सरकार कांग्रेस की जो सरकार थी भूपेश बघेल की उन्हो ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर दिया और इसके चलते यहां के बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने ओल्ड पेंशन स्कीम के लिए आवेदन भी दे दिया उनके आवेदन स्वीकृत भी हो गए लेकिन मामला फंडिंग का है जो केंद्र सरकार पर एनपीएस का जो फंडिंग है वह अटका पड़ा हुआ है और उसे छत्तीसगढ़ को मिलेगा नहीं मिलेगा कब मिलेगा यह कहना बेहद मुश्किल भरा सवाल है और कब होगा यह भी आसानी से सुलझ का मामला नहीं दिख रहा है ऐसी परिस्थिति में मजबूरी में जो कर्मचारी एनपीएस के साथ खड़े हैं उनके लिए यह एक सुनारा मौका हो सकता था नई पेंशन स्कीम यानी यूपीएस लेकिन अब जब प्रदेश सरकार इस पर विचार करने को तैयार नहीं है तब देखना है कि कर्मचारी संगठनों का क्या रवैया होता है हालांकि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग पर कायम है केंद्र सरकार की यूनिफाइड योजना ओ पीएस जैसी लाभदायक नहीं है यानी ओल्ड पेंशन स्कीम की तरह य लाभकारी नहीं है इसलिए इस तरफ कर्मचारियों का जरा भी ध्यान नहीं है वह तो वल्ड पेंशन योजना पर ही पूरा ध्यान लगाए हुए हैं यह बात फेडरेशन के जो संयोजक है कमल वर्मा ने यह बात मीडिया से कही है ऐसी परिस्थिति में जब कुछ कर्मचारियों को उम्मीद थी कि छत्तीसगढ़ सर सरकार यूपीएस लागू करेगी तो उन्हें फायदा मिलेगा जिनकी सर्विस 25 साल से अधिक हो जाएगी लेकिन अब वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साफ तौर पर कह दिया है कि इस योजना पर अभी विचार नहीं किया जाएगा देखना है कि कर्मचारी संगठन ओपी चौधरी के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं !

डॉ पुनीत गुप्ता के बहाली का सच

डॉ पुनीत गुप्ता के बहाली का सच 


 सत्ता बदलते ही भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के रिश्तेदारों की निकल पड़ी है उन्हें ठेके भी बड़े पैमाने पर मिल रहे हैं तो उच्च पदों पर भी बिठाने का खेल चल रहा है तो जो लोग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप थे उन के निलंबन भी बहाली में तब्दील होने लगा है इसमें सबसे चर्चित नाम है डॉक्टर पुनीत गुप्ता का यह बताने की जरूरत नहीं है कि वे डॉक्टर रमन सिंह के कितने करीबी रिश्तेदार हैं और उन पर किसकिस तरह के गंभीर आरोप लगे थे डीकेएस हॉस्पिटल के वे प्रभारी रहे हैं यानी सब कुछ उन्हीं के जिम्मे था वहां निर्माण से लेकर दुकान आबंटन तक कई तरह के उन पर गंभीर आरोप लगे थे और गोल बाजार थाने में उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज हुई थी भूपेश सरकार ने सत्ता में आते ही इस मामले की जांच करते हुए डॉक्टर पुनीत गुप्ता को निलंबित कर दिया था और 5 साल वे लगातार निलंबित रह थे और अचानक सत्ता बदलते हुए उन्होंने आवेदन दिया और उनके आवेदन पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तत्काल बहाली का आदेश जारी कर दिया क्या यह ब ली का आदेश डॉक्टर रमन सिंह के कहने पर हुआ है या फिर स्वास्थ्य मंत्री के कहने पर हुआ है इसे लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति गर्म इसलिए है क्योंकि डॉक्टर पुनीत गुप्ता को लेकर कई तरह के विवाद चर्चा पारिवारिक रूप से और भी बहुत कुछ है उस पर हम फिर कभी विस्तार से चर्चा करेंगे लेकिन उनकी बहाली को लेकर जिस तरीके से राजनीति गर्म है और जिस आनंद फनन में उनकी बहाली की गई है उसे लेकर प्रदेश सरकार निशाने पर है कहा जा रहा है कि इसी तरह का खेल कई मामले में कई विभागों में हो चुका है कई निलंबित लोगों की बहाली हुई है कई लोगों को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया गया जो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के रिश्तेदार हैं कहां तो यहां तक जा रहा है कि डीकेएस फिर डॉक्टर पुनीत गुप्ता को सौंप दिया जाएगा हालांकि जो पारिवारिक कला है उसे लेकर इस पर संशय है जरूर लेकिन जिस तरीके से आनंद फानंद में पुनीत गुप्ता की बहाली की गई है उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ र और कहा जा रहा है कि भारतीय जनता के पार्टी के अंदरूनी राजनीति भी एक बड़ी वजह है और डॉक्टर रमन सिंह से जिनकी नहीं पढती है उन लोगों ने यह पूरा खेल डॉक्टर रमन सिंह को बदनाम कर करने के लिए किया गया है क्योंकि डॉक्टर रमण सिंह इन दिनों पुनीत गुप्ता से दूरी बना चुके हैं ऐसी परिस्थिति में हमारी टीम लगी हुई है इस पूरे मामले की जानकारी इकट्ठी की जा रही है आखिर डॉक्टर पुनीत गुप्ता की बहाली के पीछे किसका हाथ है और किस तरीके से आनंद फानंद में उसकी बहाली कर दी गई है और गोल बाजार में जो प्राथमिकी दर्ज है डॉक्टर पुनीत गुप्ता के खिलाफ उसका क्या हुआ ।

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https://youtu.be/aTXiJXrmPe0?si=3iAgRDM5R1NLK78w

रविवार, 26 अप्रैल 2026

माल गाड़ी चालु है तो यात्री गाड़ी क्यों बंद, मोदी सत्ता का ये कैसा खेल

माल गाड़ी चालु है तो यात्री गाड़ी क्यों बंद, मोदी सत्ता का ये कैसा खेल

 छत्तीसगढ़ में रेल यात्रियों की मुसीबत लगातार बढ़ रही है कम होने का नाम ही नहीं ले रही है यहां तक कि रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जब यात्री ट्रेनों को रद्द करने का मामला संसद में उठाया तो उसके बाद और भी करीब 42 45 ट्रेन रद्द कर दी गई यानी उन सवाल का कोई मतलब नहीं है लोग मरे क्या करें इसका कहीं कोई हिसाब किताब इस दौर में नहीं दिखाई देता बढ़ती महंगाई बेरोजगारी से त्रस्त लोगों के लिए यदि आवागमन की सुविधा भी सहज और सरल कम कीमत पर उपलब्ध ना हो तो लोगों के सामने एक नया संकट खड़ा हो जाता है और पिछले साल से देखें आप तो लगभग 3 सौ से अधिक ट्रेनें रद्द की जा चुकी है यात्री परेशान है और पेट्रोल डीजल में जो मनमाना खून निचोड़ वाला टैक्स वसूला जा रहा है उसके शिकार हो रहे हैं क्योंकि यदि यात्री ट्रेनें रद्द रहेंगी तो निजी वाहनों से प्राइवेट वाहनों से उन्हें सफर करना पड़ेगा और इन परिस्थितियों से जूझ रहे छत्तीसगढ़ का सच क्या है क्या सचमुच मेंटेनेंस के नाम पर विस्तारीकरण के नाम पर ट्रेन रद्द की गई है तब फिर सिर्फ माल गाड़ी क्यों चल रहा है यदि कोरवा मंडल की बात करें तो एक ट्रेन चल रही है सुबह की और यहां से 45 ट्रेन मालगाड़ी की कोयला भर भर कर निकल रही है यानी दिक्कत सरकार को सिर्फ यात्री ट्रेनों से माल गाड़ियों से नहीं है लगातार इस तरह की शिकायत आ रही है कि करोना काल के बाद जो परिस्थितियां निर्मित हुई थी उसका फायदा उठाते हुए यानी आपदा में अवसर की तलाश जिस तरीके से की गई है उसमें यात्री ट्रेन बुरी तरीके से प्रभावित हुई मालगाड़ी नहीं हुई है प्रभावित मालगाड़ी अपनी रफ्तार से चली जा रही है खूब कमाई भी हो रही है बिलासपुर रेल मंडल को लेकिन यात्रियों को सुविधा के नाम पर जिस तरीके से बरगलाया गया जिस तरीके से उन्हें अंधेरे में रखा गया उसके चलते आम आदमी का जीवन मुश्किल होता जा रहा है अब तो ट्रेन में सफर करना कितना मुश्किल भरा काम हो गया हो गया है यह आप किसी रेगुलर यात्री से पूछ सकते हैं लेकिन सरकार चुप्पी ओड़ी हुई और छत्तीसगढ़ जिसने 10 सांसद भारतीय जनता पार्टी को दिए उनके सांसद भी लोकसभा में रेल मंत्री के जवाब के बाद खामोशी ड़ लिए या सवाल करके अपनी जिम्मेदारी का इति सी कर लिए शायद यदि केंद्र में कांग्रेस की सरकार होती तो यह सांसद सड़कों पर निकल पड़ते हैं लेकिन यह मोदी सरकार है यह मोदी शाह की सरकार है जिसके सामने अच्छे-अच्छे लोगों की बोलती बंद हो जाती है तब क्या इसी तरीके की परिस्थितियों से छत्तीसगढ़ के लोगों को दो चार होना पड़ेगा !

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https://youtu.be/qB8igMrrOUs?si=CikU7y0Jv4BryMeb

रेत माफियाओ से सत्ता के गठजोड़ पर भड़की कांग्रेस

रेत माफियाओ से सत्ता के गठजोड़ पर भड़की कांग्रेस


 रेत माफियाओं अधिकारियों और नेताओं के गठजोड़ से जिस तरीके से बस्तर में चार पत्रकारों को गांजा के मामले में फसाने की कोशिश की गई उससे थानेदार तो नब गए अजय सोनकर लेकिन अब कांग्रेस इस मुद्दे में विष्णुदेव साय सरकार को अच्छी तरीके से घेरने में लगी हुई है पूरे प्रदेश में जिस तरीके से रेत माफियाओं का बोलबाला है और जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की संलिप्तता सामने आ रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं तो क्या सचमुच डबल इंजन की सरकार रेत माफियाओं के चुंगल में है यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष दीपक बैज ने पत्रकार वार्ता लेकर सीधे-सीधे सरकार पर मिली भगत का आरोप लगाया है उन्होंने क्या कुछ कहा पहले सुन लीजिए की नाकामियों को बसर की जनता छत्तीसगढ़ प्रदेश की जनता तक सामने लाए और वहां के ई पुलिस अधिकारी मिले हुए माइनिंग विभाग मिला हुआ जिला प्रशासन मिला हुआरे सरकार के नुमाइंदे पूरे मिले हुए लोग है जो सरे उत्खनन अवध परिवन की पैसा सबके पास पहुंच रही है कोंटा से लेकर रायपुर तक उसी कारण है कि उस निर्दोष पत्रकारों को आवाज उठाने के बजाय में कारवाई करने की जगह एक अपनी गाड़ी में गाजा रख दिया जाता है गाजा केस उसको अंदर भेज दिया जाता है आखिर क्यों कौन है इसका षड्यंत्रकारी कौन है इसका मास्टर माइंड यह बस्तर की जनता देखना चाह रहा है छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री इस पर कोई भी संज्ञान नहीं लेते दूसरा चीज आंध्र प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी यहां आपकी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है आंध्र प्रदेश में आपकी एनडीए गवर्नमेंट की सहयोगी पार्टी है मतलब वहां पर मौसेरे भाई की सरकार है आपने क्यों बात नहीं की क्यों संवाद नहीं किया उनसे यह दूसरा सवाल तीसरा सवाल पत्रकारों के दबाव में कोंटा टीआई पर आई आर आप दर्ज करते और उनको कारवाई करते इसका मतलब साफ साफ है कि इस केस में सिर्फ कोंटा टीआई स्पष्ट रूप से जिम्मेदार है दोषी है साथ ही इसके पीछे एक कहीं कहीं बड़ा लाभी काम करता है बड़ा लाभी काम कर रही है नेताजी कौन है जो ई लिखते फेसबुक कमेंट में नेताजी को बता देना काम हो गया व नेताजी कौन है बस्तर की जनता जानना चाह रही है आखिर किसके संरक्षण में कोटाई ने इतना ब कदम उठाया कुको गाड़ी में गांजा रख दिया जाता है और उसको फसा दिया जाता है आखिर होटल का सीसीटीवी फुटेज क्यों उसको डिलीट कर दिया जाता है सवाल ये है इसलिए आदरणीय साथियों इस सवालों का जवाब शासन को देना चाहिए यानी आप सोचिए कि छत्तीसगढ़ में रेत माफियाओं के आगे सरकार किस कदर घुटने लेके हुए हैं धमतरी हो महासमुंद हो बिलासपुर हो कहीं से भी आपको इस तरह की खबरें आसानी से सुनाई दे जाएगी कि अवैध परिवहन हो रहे हैं अवैध उत्खनन हो रहे हैं खनिज विभाग के अधिकारी पैसा वसूलने में लगे हैं और सरकार खामोशी से बैठे हुए हैं यह मामला विधानसभा में भी उठा लेकिन सरकार ने केवल आश्वासन दिया कि रेत माफियाओं को बक्स नहीं जाएगा लेकिन हकीकत जिस तरीके से सामने आ रही है वह छत्तीसगढ़ में रेत माफियाओं के बोल बाले को इंगित तो करता ही है साथ ही पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में जिस तरीके से खनिज माफिया अधिकारियों को डराते धमकाते हैं या हत्या तक कर देते हैं क्या वैसी स्थिति छत्तीसगढ़ में आ जाएगी देखना होगा !


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https://youtu.be/YBOv_ywk1uU?si=pKLNOPJWYcd4F0V3

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026

सीएम हाऊस के गेट पर महिलाओं का अपमान हुआ

 

जब सीएम हाऊस के गेट पर महिलाओं का अपमान हुआ 


आधी आबादी को साधने के खेल में लगी राजनीतिक पार्टियां किस तरीके से लोकलुभावन नारे देकर महिलाओं का वोट हासिल करना चाहती है लेकिन इसके इतर किस तरीके से समय पड़ने पर उनका अपमान भी कर देती है यह मामला तब सामने आया जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पोला उत्सव के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंच गई सीएम हाउस में शायद उम्मीद नहीं रही होगी कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाएं सीएम हाउस पहुंच जाएंगी और उन्हें गेट में ही रोक दिया गया महिलाओं का जिस तरीके से मुख्यमंत्री निवास के बाहर अपमान किया गया जिस तरीके से सुरक्षा कर्मियों ने गेट बंद करके उन्हें हकालने की कोशिश की कहा तो यहां तक जाता है कि कई महिलाओं के साथ गाली गलोज भी की गई तो कई महिलाओं को धक्का देकर हटाने की भी कोशिश की गई ड़ इस अपमान को लेकर महिलाएं किस तरीके से उद्वेलित हुई यह एक अलग मसला है लेकिन इस मामले में कांग्रेस की चुप्पी भी कम हैरान करने वाली नहीं हालांकि उन्होंने कुछ वीडियो जारी किए हैं और महिलाओं के अपमान की बात कही है लेकिन इस पर कोई कड़ी प्रतिक्रिया कांग्रेस के बड़े नेताओं की नहीं रही है तो दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने निवास स्थान पर पोला उत्सव मनाया धूम रही क्योंकि हाल में ही वे सत्ता से बाहर हुए हैं उनका प्रभा मंडल अभी शायद कायम है बड़ी संख्या में वहां भी लोग जूठे और भूपेश बघेर के इस आयोजन में तो कांग्रेस की राष्ट्रीय नेत्री भी पहुंची थी चाहे वह सुप्रिया सुने हो या मीनाक्षी लेखी और भी प्रदेश कांग्रेस के बड़े पदाधिकारी जो महिला नेतिया सब पहुंची थी इस पोला उत्सव में लेकिन छत्तीसगढ़ में महिलाओं के अपराध को लेकर विष्णुदेव साय की असंवेदनशील भी कम नहीं है सवाल सिर्फ सीएम हाउस में भीड़ बढ़ जाने से महिलाओं को हका देने का नहीं है सवाल तो उस न्याय का है कि इस दौर में किस तरीके से छत्तीसगढ़ में अचानक बलात्कार की घटनाएं बढ़ गई सामूहिक बलात्कार भी हो रहे हैं बड़ी संख्या में और जिस तरीके डीपीएस भिलाई में एक मासूम बच्ची के साथ छेड़खानी की घटना को दबाने की कोशिश की गई है या लीपापोती का खेल किया गया वह बेहद ही शर्मनाक और इस मामले को लेकर राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने भी विष्णु देव साय सरकार को आड़े हाथ लिया इस देश की बेटी हूं और कई बार अपने आपसे यह सवाल पूछती हूं यह देश किसका है क्या यह देश आधी आबादी का है क्या इस देश में औरतों का कोई हक है क्या इस देश में खेत में काम करने वाली अनपढ़ मजदूर स्कूल की नाबालिक बच्ची दफ्तर में काम करने वाली महिला बस में चढ़ने वाली ग्रहणी और यहां तक कि अस्पताल तक में कार्यरत एक डॉक्टर सुरक्षित है और दुख के साथ कहती हूं त्यौहार का हर्ष त्यौहार का उल्लास एक तरफ ऐसा प्रतीत होता है कि आधी आबादी के लिए औरतों के लिए इस देश में कोई जगह ही नहीं बची है आज पूरा देश आक्रोशित है आज पूरा देश आंदोलित है और होना भी चाहिए जिस तरह की जघन्य घटना बंगाल में हुई जो विभ तस्वीरें सामने आई जो हैवानियत और दरिंदगी हमने देखी वाकई में रूह काप जाती है लेकिन मैं उसे निर्भया टू नहीं बुलाती हूं कितनी निर्भया चाहिए इस देश को कितनी निर्भया की कुर्बानी होगी जब यह देश जागेगा जब सत्ता का संरक्षण खत्म होगा मैं सिहर उठती हूं जब मैं बदलापुर के बारे में पढ़ती हूं मैं वहां गई दो छोटी चार साल की बच्चियों का यो शोषण और उस पर लीपा पोती की कोशिश और इससे अछूता आपका छत्तीसगढ़ भी नहीं है चाहे वह रायपुर के बस स्टेशन पर सामूहिक बलात्कार का मामला हो चाहे वह भिलाई के डीपीएस स्कूल में चार साल की बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न का मामला हो चाहे वो रायगढ़ के पुसौर में एक आदिवासी महिला के साथ 14 लोगों के दुष्कर्म का मामला हो चाहे वह फिर से जशपुर में एक पोक्सो का नाबालिक बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार किया गया हो कोंडा गांव में एक महिला की के साथ जो दुष्कर्म किए गए सामूहिक दुष्कर्म छतीसगढ़ भी नहीं किसी भी महिला के खिलाफ उत्पीड़न उसका शोषण उसके बलात्कार का मामला पूरे आधी आबादी के खिलाफ का मामला है और यह सभ्य समाज पर धब्बा है आप लोगों पर धब्बा है पुरुषों तक पर धब्बा है धब्बा इसलिए क्योंकि आपके घर में बेटिया है बहन है पत्नी है मां है सुप्रिया सिनेट ने जमकर विष्णु देसाय पर आरोप लगाते हुए यहां तक कह दिया कि वह अपराधियों को बलात्कारियों को संरक्षण दे रहे हैं हालांकि इस पर भारतीय जनता पार्टी की भी प्रतिक्रिया आई है और उन्होंने कुछ आंकड़े पेश करते हुए यहां तक कह दिया है कि भूपेश राज में महिलाओं के साथ अत्याचार के मामले ज्यादा हो रहे थे लेकिन इस आरोप प्रत्यारोप के बीच क्या डीपीएस भिलाई की उस मासूम बच्ची को न्याय मिलेगा या जिस तरह की घटनाएं बढ़ रही है बलात्कार की या दूसरे अपराधों के उसे गृह मंत्री विजय शर्मा रोक पाएंगे अब तो यह बात चर्चा में आने लगी है कि रिमोट पर चल रही डबल इंजन सरकार के गृह मंत्री कानून व्यवस्था के मामले को लेकर पूरी तरीके से फेल हो गए तब सुप्रिया श्रीनेत के आरोप और उस पर पलटवार से क्या महिलाओं का जो अपमान का खेल हो रहा है या महिला अपराधों में जो वृद्धि हो रही है वह रुक पाएगा !

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https://youtu.be/ZEYTewgaQRo?si=NtMxHW4UBvHzX05Z

गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

बलात्कारियों-छिछोरों का जमावड़ा क्यों बढ़ रहा, ऐसे-कैसे छवि गढ़ने की कोशिश…

बलात्कारियों-छिछोरों का जमावड़ा क्यों बढ़ रहा, ऐसे-कैसे छवि गढ़ने की कोशिश…

 जिस तरीके से मोदी सरकार चल रही है और जिस तरीके से समूची भाजपा में अपराधियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है वह इस देश के लिए क्या चिंता का सबब नहीं होना चाहिए सत्ता बचाने के लिए या सत्ता में बने रहने के लिए भारतीय जनता पार्टी और आईटी सेल किस-किस तरीके से विज्ञापन प्रसारित नहीं करते हैं असंभव को संभव कर देने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में विश्व गुरु की राह पर चलने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में सबसे बड़ी मूर्ति बनाने वाले देश के प्रधानमंत्री और दुनिया में सबसे ऊंचे स्थान पर सड़क बनाने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकिन यह पूरा खेल क्या संघ के संस्कार से निकल कर आया है यह सवाल संघ पर इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि पिछले दिनों यानी हाल के दिनों में या फिर यूं कहे मोदी सरकार के आने के बाद जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी में बलात्कारियों छिछोरों और अपराधियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है जमावड़ा तो विपक्ष के नेताओं का भी बढ़ता जा रहा है जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उन छिछोरों और बलात्कारियों का याद कीजिए बीएचयू में तीन भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के नेता बंदूक की नोक पर बला बकार करते हैं उनकी गिरफ्तारी होती है और कायदा बताती है कि यह अपराधिक छवि के लोग हैं और उसके बाद उनकी जब जमानत होती है तो किस तरीके से उनके घर वाले उन बलात्कारियों का स्वागत सत्कार करते हैं और केक तक काटा जाता है यानी आप सोच सकते हैं इस दौर में जब बलात्कार के मामले को लेकर पूरा देश चिंतित है उस दौर में बलात्कारियों का स्वागत और ऐसा पहली बार नहीं हुआ कठुआ का मामला याद कीजिए आपकी मासूम बच्ची से बलात्कार करने वाले जब इसी तरीके से जमानत से बाहर आए थे तो किस तरीके से स्वागत सत्कार हुआ था गुजरात में बिल्किस बानू के बलात्कारियों की समयपुर रिहाई जब हुई तो किस तरीके से स्वागत सत्कार किया गया था तो क्या भारतीय जनता पार्टी ब कायों को पसंद करती है यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाए उसी ट्रेन में किस तरीके से बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार किया और साफ तौर पर जो वीडियो वायरल हो रहा है वह भारतीय जनता पार्टी के लिए शर्मसार कर देने वाला है लेकिन मजाक है वह आज भी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कुछ बोल दे जो देश का गौरव देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों की छाती पर बड़ी बेशर्मी से हाथ धरने करर सत्ता का संरक्षण ले रहा था ऐसे कई सारे सवाल है टिकट का तो हमने काकर का बताया कि किस तरीके से कांकेर में महिला अपराध में शामिल व्यक्ति को टिकट दे दिया गया किस तरीके से रायगढ़ में यन शोषण के आरोपी को जिलाध्यक्ष बनाकर रखा गया था तो क्या भारतीय जनता पार्टी में अब इसी तरह के लोग रहेंगे जो देश के लिए ही नहीं समाज के लिए भी खतरा बनता जा रहा है ऐसे कई सारे उदाहरण आपके सामने होंगे राज्य दर राज्य जब आप जाएंगे तो आपको ढेरों उदाहरण मिलेंगे जब बलात्कारी यौन शोषण के अपराधी छीछोरे और दूसरे तरह के अपराधियों को भारतीय जनता पार्टी में संरक्षण मिल र और ऐसा नहीं है कि दूसरी पार्टियां नहीं दे रही लेकिन इस दौर में जिस तरीके से भाजपा में यह बड़ी है वह चौकाने वाला है संसद में भी उनके सांसदों की फेहरिस्त सबसे ज्यादा है आप कहेंगे सबसे ज्यादा जीते हैं इसलिए सबसे ज्यादा लेकिन जिस तरीके से प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है और शायद यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी अपने विज्ञापन में जिस विकास का दंब भरती है वह विकास किस तरीके से दम तोड़ने लगा सड़कों से लेकर मूर्तियों तक अयोध्या से लेकर संसद भवन तक सब कुछ तो साफ दिखाई देने लग और सत्ता में बने रहने के लिए चंदा वसूली का भी तो इलेक्ट्रोल बांड ने सब कुछ खुलासा कर दिया है और पीएम केयर फंड से बड़ा कोई भ्रष्टाचार हो सकता है नोटबंदी को लेकर भी तो भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगते रहे इसके अलावा जो दूसरी पार्टियों के भ्रष्ट लोग है अपराधिक लोग हैं उन्हें भी अपनी पार्टी में लाने के लिए किसकिस तरीके से जा पा एजेंसियों का सहारा लिया जाता है वह भी किसी से छिपा नहीं है तब क्या भारतीय जनता पार्टी को जो संघ से मिले संस्कार वह सत्ता मिलते ही दिखने लगा है!

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https://youtu.be/YYBTYf4Rtno?si=g2iGRC9DnoLjClTk

बुधवार, 22 अप्रैल 2026

क़र्ज़ से लदे है साय सरकार के कई मंत्री, लाखों का क़र्ज़

 

क़र्ज़ से लदे है साय सरकार के कई मंत्री, लाखों का क़र्ज़

एक तरफ विष्णु देव साय मंत्रिमंडल में फेरबदल लेकर कई तरह की चर्चाए सामने आ रही है कहा जा रहा है कि मोदी शाह अनुमति ही नहीं दे रहे हैं और विष्णु देव साय लगातार दिल्ली का चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं तो दूसरी तरफ निगम मंडल आयोग में नियुक्ति को लेकर भी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त रोष है कहा जा रहा है कि इसे लेकर दिल्ली तक शिकायत की जा चुकी है और इसे देखते हुए बड़ी बैठक  के बाद ही कोई निर्णय होगा  लेकिन इस सबसे दूर आज हम बात कर रहे हैं विष्णु देव साय सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्य के द्वारा लिए गए कर्जे का 11 मंत्री है वर्तमान में बृजमोहन अग्रवाल जो शिक्षा मंत्री थे उन्हें केंद्र की राजनीति में भेज दिया गया और उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा जबकि वे दावा कर रहे थे कि छ महीने तक वे रह सकते हैं लेकिन आनंद फानंद में उनसे इस्तीफा ले लिया गया या उन्होंने इस्तीफा दे दिया तब सवाल यह है कि विष्णु दे साय सरकार के मंत्रिमंडल का क्या हाल है परसेप्शन सबके सामने है कि किस तरीके से खेल खेला जा रहा है मोदी की गारंटी पूरा करने के वादे के साथ सत्ता में आई सरकार किस तरीके से उद्योगपति की सरकार बन गई है अडानी की सरकार बन गई है उसे लेकर भी कई तरह के आरोप है लेकिन आज हम चर्चा कर रहे हैं विष्णु देव साय सरकार के कितने मन यो पर कर्ज और कौन कौन से मंत्री हैं जो कर्ज से मुक्त है यह पूरी जानकारी हम चुनाव आयोग के दिए गए जानकारी के आधार पर दे रहे हैं विष्णुदेव साय सरकार के जो सबसे बड़े कर्ज लेने वाले कोई मंत्री वे है श्याम बिहारी जायसवाल सरगुजा क्षेत्र से आते हैं और इन पर 5 करोड़ से अधिक कर्ज है बैंक में इनकी पत्नी भी सम्मिलित कर्ज में शामिल है 5 करोड़ 16 लाख 8477 रप के कर्जदार है ये तो दूसरे नंबर पर जिनका नाम है वे है खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जिन पर 65 819 ₹ का कर्ज है तो तीसरे नंबर पर ओपी चौधरी है विष्णु देसाय से थोड़ा ही कम कर्जदार हैं वे 525000 के कर्जदार हैं हालांकि वे बड़े-बड़े दावा करते हैं कि किस तरीके से उ उन्होंने 2 करोड़ रुपए को 24 करोड़ बना लिया और पता नहीं किस किस तरह की बात करते हैं सुपर सीएम भी कहलाते हैं उन पर 65 करोड़ 25000 का कर्जा है तो राम विचार नेताम दमदार मंत्री हैं आदिवासी समाज से आते हैं यह भी सरगुजा क्षेत्र के विधायक हैं और रमन सरकार में भी मंत्री रहे इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले को लेकर भी वे चर्चा में रहे कि सबसे नार्को टेस्ट जो कथित नार्को टेस्ट है उसमें सबसे ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप राम विचार नेताम पर रहा है और वर्तमान में वे कृषि मंत्री हैं और कृषि विभाग कौन चला रहा है इसे लेकर भी संशय कई लोग तो किसी राकेश अग्रवाल का नाम लेते हैं तब उन पर 49 8276 रप का कर्जा है तो उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा पहली बार विधायक बने हैं और सीधे उप मुख्यमंत्री बना दिए गए गृह मंत्री जैसा महत्त्वपूर्ण विभाग उनके पास है उन पर 12 लाख से ऊपर कर्जा है एक मात्र महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी कर्जदार है उन पर 8 लाख रपए का र्चा है इसमें उनके पति भी साथ में हैं और यह कर्जा कुछ पटाल दिए हैं कि बढ़ गए हैं यह इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है लेकिन दयाल दास बघेल सुरक्षित सीट नवागढ़ से जीते हैं वे पूर्व मंत्री रुद्र गुरु को हराए हैं उन पर भी 40 90 हज से अधिक रुप का कर्चा है केदार कश्यप बस्तर के बड़े नेता है रमन सरकार में मंत्री जब जब चुनाव जीते हैं तब तब मंत्री रहे तीसरी बार वे मंत्री बने हैं उन पर भी 25 लाख का कर्जा है लेकिन इन कर्जदार मंत्रियों से भी इतर तीन ऐसे मंत्री हैं जिन पर कोई कर्जा नहीं है या उन्होंने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है उसमें बताया कि उन पर कोई नहीं है इनमें कोरबा के महापौर रहे चर्चित है बेहर एक विमला कांड को लेकर उनकी चर्चा बहुत जबरदस्त होते रही और हाल में वे चर्चा में तब आए जब विधानसभा में उन्हें उद्योगों में सुरक्षा को लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनु शर्मा नेही सवाल उठाया था इसके अलावा जो बारूद फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था पटवा के रिश्तेदारों की बारूद फैक्ट्री में उसमें उसे लेकर वे चर्चा में आए थे उन पर भी कोई कर्जा नहीं है तो पीए गिरी करते हुए मंत्री तक पहुंचे टंक राम वर्मा बलौदा बाजार के विधायक हैं उन्होंने शैलेश नितिन त्रिवेदी को हराया पहली बार विधायक बने और राजस्व मंत्रालय खेल मंत्रालय उनके पास है और किस तरीके से खेल विभाग में अंधा बा रेवड़ी अपन अपन को देवाले किससे चर्चित है ऐसे मंत्री टंक राम वर्मा पर भी कोई कर्जा नहीं है तो जो मुख्यमंत्री के दौड़ में सबसे आगे थे और अभी भी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए हैं संघ के सबसे करीबी और विधायक पहली बार बने उससे पहले वे सांसद रहे और पहली बार विधायक बनते ही मुख्यमंत्री तक जा पहुंचे हैं ऐसे नेता अरुण साव पर भी कोई र्चा नहीं है ये पूरी जानकारी चुनाव आयोग को चुनाव लड़ने से पहले जो दी जाती है उनके आधार पर हो सकता है कि इनमें से कुछ लोगों ने कर्जा पटा दिया होगा या कई लोगों के कर्जे बढ़ गए होंगे यह देखने की बात है हमारी टीम लगी हुई कि स्थिति क्या है !

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https://youtu.be/B7ECf91Mw9Q?si=Qqw35hohda-vVo7a

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली 


देश के प्रधानमंत्री से लेकर तमाम बीजेपी नेता बंगाल चुनाव में बलात्कार का मुद्दा उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ बलात्कारियों को सत्ता के संरक्षण का मामला भी गरमाने लगा है एक रिपोर्ट-

कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए  रेप कांड ने एक बार फिर समूचे देश को झकझोर के रख दिया था  इसलिए देश भर के तमाम डॉक्टर सड़कों पर उतर आए थे, न्याय के लिए याद कीजिए आप 12 साल पहले जब निर्भया कांड हुआ था तब इसी तरीके से समूचा देश सड़कों पर था और उसके बाद सरकार ने कानून भी बनाए थे और लगने लगा था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह नहीं देख पाए कि सत्ता किस तरीके से बलात्कारियों का संरक्षक बनी बैठी है यदि एनसीआरबी के आंकड़े को देखें तो आप चौक जाएंगे कि हर रोज इस देश में 87 महिलाओं की युवतियों की बलात्कार होती है हर रोज इतनी बड़ी तादाद में यदि यौन उत्पीड़न से महिलाएं पीड़ित हैं तब यह हंगामा कलकाता रेप केस के बाद क्यों और उसके बाद भी क्या यह अपराध थम गया है याद कीजिए आप उत्तराखंड में किस तरीके से युवती के साथ बस चालकों ने बलात्कार किया और बिहार से खबर आई कि एक दलित छात्रा के साथ किस तरीके से विभ तरीके से बलात्कार किया नाबालिक छात्रा से यानी ना तो बलात्कार का सिलसिला रुक पा रहा है और रोज हो रहे बलात्कार के आंकड़े ही कम हो रहे हैं कि और ना ही राजनीतिक दलों का खेल सवाल यह नहीं है कि कलकाता कांड को लेकर डॉक्टर आज सड़कों पर है उनके साथ तमाम लोग जुड़े हुए हैं क्योंकि महिला उत्पीड़न का मामला है तब सवाल यह है कि क्या इस अपराध को रोका जाना चाहिए और को रोकने के लिए अब नए सीरे से इस देश को आंदोलन के लिए खड़ा होना चाहिए यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि लोगों ने आश्चर्यजनक ढंग से निर्भया के बाद चुप्पी ड़ ली थी गुस्सा बेहद है इस मामले को लेकर लेकिन किस पर करें गुस्सा उस सरकार पर जो खुलेआम बृजभूषण सरण सि जैसे लोगों को संरक्षण देती है या उस सरकार पर जो हर चुनाव के पहले राम रहीम जैसे बलात्कारियों को पैरोल पर छोड़ देती है एक दो बार नहीं दर्जन बार से अधिक राम रहीम को पैरोल पर छोड़ा जा चुका है या उस सरकार पर जो बिलकिस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर स्वागत समारोह में तालियां पीटती नजर आती है या तालियां पीटने वालों के साथ खड़ी होती क्या विनेश फोगाट साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जब सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे थे उस छिछोरे बृजभूषण शरण सिंह को लेकर तब उन्हें छिनाल कह दिया गया था और यह लोग तमाम जो आज नारा लगाते घूम रहे हैं उठो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे पिछले एक हफ्ते से यह टैग लाइन चल रहा है सब तरफ उन लोगों ने खामोशी क्यों ड़ ली थी जब बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ वे महिला पहलवान रोती कलपी सड़कों पर घसीट जा रही थी या फिर वे लोग कहां चले जाते हैं जब राम रहीम जैसे बलात्कारियों को दर्जन भर बाद पैरोल में छोड़ा जाता क्या उनके खिलाफ सड़क पर नहीं उतरना चाहिए कि आखिर ऐसे बलात्कारी जिसकी सजा की पुष्टि हो चुकी है उन्हें कैसे पेरोल पर छोड़ सकती है कोई सरकार और एक दो बार नहीं दर्जन भर से अधिक और लोगों की खामोशी क्या सिर्फ राजनीतिक नफा नुकसान के साथ जुड़ गई है यह सवाल तो ब कि बानों के बलात्कारियों की रिहाई को लेकर भी उठनी चाहिए थी और सड़क पर लोगों को उतर जाना चाहिए था लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह भूल जाते हैं कि यदि कल किसी के साथ इस तरह की घटना हुई है तो अगली बारी उनकी अपनी है तब सवाल यह है कि क्या सिर्फ कलकाता रेप केस में हंगामा खड़ा कर देने से बलात्कार के मामले रुक जाएंगे क्योंकि हर रोज इस देश में 87 बलात्कार हो रहे हैं और इस घटना के बाद भी लगातार बलात्कार की घटनाएं सुनाई दे रही है वह भी विभ बलात्कार की घटनाएं उत्तराखंड की घटनाएं कम विभ नहीं है क्या कोलकात्ता कांड के साय तरे उसे छुपा लिया जाएगा या कल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुई नाबालिक छात्रा के साथ की घटना को क्या कलकाता कांड के साथ छुपा लिया जाएगा ऐसे कई सवाल है आप खुद सोचिए कि आप किस तरीके से राजनीतिक फायदे नफा नुकसान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं क्यों नहीं उठना चाहिए राम रहीम को पैरोल पे छोड़ने के खिलाफ सड़क की आवाज लोगों की आवाज क्यों नहीं उठनी चाहिए क्या राजनीति ने भी बलात्कार जैसे विवस मामले को बांट दिया है और लोग नफा नुकसान देखकर आंदोलन करते हैं ऐसे कई सवाल है लेकिन एक बड़ा सवाल है कि यदि जब तक राम रहीम या बृजभूषण शरण सिंह या बिल्किस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर या उन्हें बचा की कोशिश पर यह देश चुप्पी ड़ के बैठे रहेगा तब तक इस तरह की घटनाएं होते रहेगी और इन सब बातों के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से बलात्कार को लेकर भाषण बाजी करना अब समय की मांग है जिनको सजा होती है उसकी व्यापक चर्चा हो ताकि ऐसा पाप करने वालो र पैदा हो पाप करने की होती है फं पर ल पता है क्या आम लोगों का मुह चिढ़ाना नहीं है !

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https://youtu.be/HnBPdIp0Wys?si=5xFmgfsHNStQbMEw

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल

 सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल 


छत्तीसगढ़ की राजधानी सुंदर हो यह कौन नहीं चाहेगा लेकिन विकास के नाम पर यदि उन बिल्डिंगों को गिरा दिया जाए जो वर्षों पुराने हैं हेरिटेज की श्रेणी में आते हैं जिसकी खूबसूरती को लोग आज भी आंख भर भर कर देखते हैं तब इसे सत्ता का कौन सा विकास कहा जाएगा और अब इस पर हो रहे नए निर्माण का ठेका भी उसी ठेकेदार ने हासिल कर लिया है जिसने इससे पहले नए सर्किट हाउस का निर्माण किया था और सेंट्रिंग गिरने के विवाद में फँसा था क्या है खेल , कौन अधिकारी रिटायर्ड होने के पहले दो पाँच करोड़ कमाना चाहता है यह हम फिर कभी बतायेंगे ।

लेकिन आज सिविल लाइन के उस सर्किट हाउस का है जिसकी बिल्डिंग बेहद पुरानी है कहा जा रहा है अंग्रेजों के जमाने की वह बिल्डिंग है और उस बिल्डिंग को इन दिनों गिराया जा चुका है हैरानी की बात तो यह है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की सरकार मंत्रियों के बंगले अधिकारियों के बंगले सब कुछ नया रायपुर में शिफ्ट करने जा रही है अधिकारी भी लगातार एक-एक करके शिफ्ट होते जा रहे हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति में जो हेरिटेज के रूप में माना जाता है उस बिल्डिंग को जमीन दोज कर देना क्या सरकार के मंसूबों पर सवाल नहीं उठाता है कहा तो यहां तक जा रहा है कि उस बिल्डिंग को गिराकर वहां पार्किंग बनाई जाएगी क्योंकि जो सर्किट हाउस की वर्तमान पार्किंग है कॉफी हाउस वहां है इस वजह से पार्किंग हच पच रहती है भीड़ बढ़ जाती है तब ऐसी परिस्थिति में क्या उस बिल्डिंग को गिराकर कोई नया खेल खेला जा रहा है किस तरीके से वहां कीमती फर्नीचर लग और इस सर्किट हाउस में लोग ठहर भी रहे थे यानी सब कुछ बहुत बढ़िया था ऐसा भी नहीं कि बिल्डिंग जड़ जड़ थी इसलिए गिरा दिया गया मजबूत बिल्डिंग थी पुराने जमाने की बनी यह बिल्डिंग डेढ़ फीट दीवार वाली बिल्डिंग थी मजबूती से खड़ी थी और हाल में ही इस पर लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके इसे सजाया भी गया था टाइ लगाई गई थी बिस्तर बदले गए थे दरवाजे भी नए स्टाइल में लगाए गए थे एसी सहित किचन सब कुछ नया बनाया गया था यानी करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब सरकार को लगने लगा है कि यह बिल्डिंग अब कोई काम की नहीं है क्योंकि सर्किट हाउस में पर्याप्त जगह है इसलिए इस बिल्डिंग को गिराया जाना चाहिए और वह गिरा रही है इस मामले में हमारी एक्टिविस्ट राकेश च से बात हुई है उनका क्या कहना है सुन लीजिए पुराना सर्किट हाउस सिविल लाइन को जो तोड़े जाने की अचानक निर्णय लिया गया वह निर्णय विधि विरुद्ध है और मुझे तो यह लग रहा है कि इसके तोड़े जाने के पीछे कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का एक अमला काम करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत कार्य प्रारंभ कर रही है जो नहीं होना चाहिए हमारे धरहर को बचाने के लिए हम लगातार संघर्ष करते रहते हैं ऐसे में ये बहुत ही प्राचीन और पुरानी धरोहर थी जिसको बचाया जाना चाहिए था और इसको रोकने के लिए सरकार को खुद आगे आना चाहिए था जो सरकार आगे आती दिखती नहीं क्योंकि इस वक्त नया रायपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री मंत्रियों के निवास बन चुके हैं ऐसे में इसे पार्किंग या अन्य किसी रूप में डेवलप करना फंड की बर्बादी है हमारे टैक्स के पेयर लोगों की पैसों की बर्बादी है इसे रोका जाना चाहिए अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में जिस विभाग का यह जुम्मा है उस विभाग के खिलाफ मामला न्यायालय में ले जाएंगे या संबंधित फोरम में जरूर शिकायत करेंगे क्योंकि मुझे तो लग रहा है कि यह नियम विरु कार्य को संचालन किया जा रहा है यानी सोचिए कि किस तरीके का खेल सरकार कर रही है किस तरीके से टैक्स पेरो की पैसे की बर्बादी की जा रही है और पहले ही नींद में सो चुके इस शहर को इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है !

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https://youtu.be/XH-kMHpNoPY?si=R5uxCn8rbKjzFfbn

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

पत्रकारों को फँसाने की साज़िश करने वाला थाना प्रभारी को जेल, नेता को कब

पत्रकारों को फँसाने की साज़िश करने वाला थाना प्रभारी को जेल, नेता को कब

 छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार आने के बाद किस तरीके से नेताओं के हौसले बुलंद है किस तरीके से सरकारी तंत्र इन नेताओं के इशारे पर किसी को भी फसा देने का कुचक्र रचते हैं और इस पूरे खेल में क्या सत्ता में बैठे प्रमुख लोग भी शामिल हैं ऐसे कई सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों कोंटा से जो खबरें आई है बस्तर में स्थित है वहां तत्कालीन टीआई थे अजय सोनकर उन्होंने एक नेताजी के कहने पर चार पत्रकारों को फसाने की साजिश रची उनके कार में गांजा रखकर उन्हें प्रताड़ित किया उन्हें गिरफ्तार किया तो क्या यह खेल दूसरे स्थानों पर भी हो रहा है और पूरा मामला रेत माफियाओं से जुड़ा हुआ है आंध्र प्रदेश का बॉर्डर जहां बड़ी संख्या में अवैध रूप से रेत उत्खनन किए जा रहे हैं और इसे दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है इसकी खबर पर चार पत्रकार पहुंचे थे और जब इन अवैध उत्खनन की तस्वीर ली जा रही थी तब इनके कार में गांजा रख दिया गया था जिसकी शिकायत जब एसपी से की गई और लगातार पत्रकार प्रदर्शन कर रहे थे कि किस तरीके से पत्रकारों को फंसाया गया है और इस आरोप के बाद जब जांच शुरू हुई तो वह वीडियो फुटेज भी सामने आ गया जिसमें टीआई इन पत्रकार की गाड़ियों में गांजा रखते देखे जा रहे थे जांच हुई तो सारे सबूत सामने आ गए लेकिन क्या यह काम केवल टीआई रेत माफियाओं के इशारे पर कर रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा हाथ टीआई अजय सोनकर को सस्पेंड करके जेल भेज दिया गया लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि ठीक गिरफ्तारी के पहले टीआई अजय सोनकर ने अपने फुक अकाउंट में यह दावा की यह लिख दिया कि नेताजी को बता देना कौन है वह नेताजी इसे लेकर कई तरह की चर्चा है क्या वह सत्ता से जुड़ा है या पूर्व मंत्री से जुड़ा हुआ है यह सवाल जांच में सामने आ पाएगा यह कहना कठिन है लेकिन छत्तीसगढ़ में जिस तरीके से र का अवैध उत्खनन हो रहा है वह हैरान कर देने वाला है और कई स्थानों पर खासकर धमतरी महासमुंद जैसे क्षेत्रों में तो सीधे-सीधे इस मामले में राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल है तो क्या कोंटा जिले में भी जो रेत का अवैध उत्खनन हो रहा था उसमें भी किसी बड़े नेता का हाथ है यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण हो गया है और जिस तरीके से पत्रकारों को इस पूरे मामले में टीआई के द्वारा प्रताड़ित किया गया उससे भी स्पष्ट हो रहा है कि इसन घटनाओं के पीछे कोई बड़ा हाथ है सबसे हैरानी की बात तो यह है कि सरकार ने टीआई को सस्पेंड कर जेल तो भेज दिया है लेकिन खनन माफियाओं को संरक्षण देने वाले खनिज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अभी तक किसी तरह की कारवाही नहीं हुई सब कुछ आईना की तरह स्पष्ट है लेकिन जो खेल नेता अधिकारी और माफिया कर रहे हैं वह हैरान कर देने वाला है छत्तीसगढ़ में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह इस तरह के माफियाओं का सत्ता तक पहुंच है हालांकि टीआई को सस्पेंड कर जेल भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है लेकिन देख ना है कि आने वाले दिनों में उस नेता तक सरकार पहुंच पाती है या नहीं !

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https://youtu.be/vKaKL2jE2r8?si=w9A78j6KAAeiYqvU

रविवार, 19 अप्रैल 2026

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

 

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

अदानी के लिए हसदेव को दांव पर लगाने को लेकर बुरी तरीके से घिरी विष्णुदेव साय सरकार अब अंबिकापुर में भू माफियाओं के द्वारा 100 एकड़ जंगल काटे जाने को लेकर निशाने पर है कहा जा रहा है कि अंबिकापुर से सटे गांव बुधिया चुआ गांव का यही नाम है वहां भू माफिया लगातार जंगल काट रहे हैं और 100 एकड़ जंगल काट चुके हैं इसे लेकर पिछले दिनों जब लोगों ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता टीएस बाबा के पास पहुंचे तो बाबा आग बबूला हो गए उन्होंने का दौरा भी किया और पत्रकारों से बताया से कहा कि लंबे अरसे से शासन से लगातार शिकायत की जा रही है कलेक्टर कर क्या रहे हैं आखिर इस पूरे घटनाक्रम में क्या शासन का संरक्षण है क्योंकि लगातार इस मामले को लेकर वहां गांव वाले आवाज उठाते रहे हैं शिकायत करते रहे लिखित में और इसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान तो हो रहा है इस करोड़ों रुपए की जमीन का भी बंदर बांट हो रहा है टी एस बाबा ने विस्तार से यह सब बात कहते हुए धमकी भी दी कि ऐसी स्थिति  क्यों लाई जा रही है कि उन्हें भूख हड़ताल पर बैठना पड़े पहले बाबा ने क्या कुछ कहा वह सुन ली वो वहां तक ऐसे फैल के वो नीचे तक और लगभग गुमला नेशनल हाईवे तक जहां सिसोदिया जी का पेट्रोल पंप लोग बता रहे हैं उसके 500 मीटर तक का पूरा क्षेत्र एक के बाद एक काटा जा रहा है और आप स्वयं देख सकते हैं कि मेड़ के आकार भी दिख रहे हैं यहां कुछ नहीं है जोध कोट भी ऐसा नहीं दिख रहा है और मेड़ बना के लोगों ने क्षेत्र को आपस में बांट लिया है यह रिजर्व फॉरेस्ट है जो कलेक्टर ने 20161 में अन्य अधिकारियों के साथ सेटल भी किया उसके आदेश भी है और बावजूद उसके यह स्थिति बनी मैं बाहर था दिल्ली में था तो गांव से खबर आई कि बाबा यहां दिक्कत हो रही है कुछ वन अधिकार पत्र है वह हमको अभी तक नहीं मिले हैं आजादी के पहले से जो लोग काबिज हैं उनके वन अधिकार पत्र नहीं मिले हैं नए लोगों को कुछ वन अधिकार पत्र मिले हैं कुछ वह भी प्रक्रिया अधूरी है और कुछ लोग हैं जो खरीद बिक्री भी कर रहे हैं यह सारी बातें सामने कि जो वनाधिकार पत्र मिले हैं उनकी खरीद बिक्री उनके कब समझाए भी कि एक देखिए वनाधिकार पट्टा नहीं है यह वनाधिकार पत्र है पट्टा आपको अधिकार देता है खरीद बिक्री का भी वनाधिकार पत्र में बेचने के अधिकार नहीं है और यदि आप बेचते हैं तो यह जमीन वापस शासन को चली जाएगी तो प्रजातंत्र के इस चौथे स्तंभ के माध्यम से हम लोग चाहेंगे कि लोगों के सामने सच्चाई कम से कम पहु कदम अगला कदम इसको रोकने का होगा यह नौबत तो नहीं आनी चाहिए कि यहां के मैं भूख हड़ताल में बैठू यह तो अति हो जाएगी बैठूंगा यह तो अति हो जाएगी तो या हल्का पन है क्या हमारी व्यवस्था ऐसी है कि यह सब करना पड़ेगा तब एक जानकारी आए और अगर वह बात सही है पक्ष विपक्ष इसमें कुछ नहीं है नियम और कानून है नियम और कानून के विपरीत हो रहा है तो आप कारवाही करिए आखिरी में प्रजातंत्र में क्या होता है जनमत का संग्रह है तो वो तो बहुत ही हल्का पन हो जाएगा कि अगर यही नहीं गांव के जो उपसरपंच है उन्होंने भी पूरी बात विस्तार से मीडिया को बताया बड़ा-बड़ा पेड़ था सब कटाई हो गया और निरंतर गांव वाले से शिकायत करते रहे कलेक्टर को भी फॉरेस्ट को भी लेकिन इसमें कभी कब्जा नहीं रोका गया किसी प्रकार का गांव में आक्रोशित है कि हम लोग का नि स्तारी है और जंगल से निस्तार है और जंगल रहने पर हम लोग का आगे भविष्य में हर प्रकार का ऑक्सीजन मिलेगा और हम लोग का सुख सुविधा मिलेगा कहके सब सब लोग को आक्रोशित हो रहा है कि वह नष्ट हो रहा है तो यह तो बड़ी मतलब थोड़ा सा गौर करने की बात है और प्रशासन इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है लोग का कहना है जब इसको बराबर किया जा रहा था उस समय आप लोगों ने कोई उचित कम नहीं उस समय हम लोग जब से शुरुआत हुआ है तब से हम लोग इसका विरोध करते आ रहे हैं पूरे गांव के लोग विरोध करते आ रहे हैं मगर नियंत यानी आप सोचिए कि किस तरीके से शासन प्रशासन के पर जंगल की जमीन तक को लूटा जा रहा है और शिकायत के बाद भी यदि सत्ता खामोश है तो क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार भू माफियाओं से मिली हुई है और वह जानबूझकर कारवाही को टाल रही है जबकि वह अच्छी तरीके से जानती है कि इस 100 एकड़ जमीन में जो जंगल है गांव की निस्तार उस पर निर्भर है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि शासन कुछ कारवाही करती है या फिर टीएस बाबा को भूख हड़ताल में बैठना पड़ेगा!


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https://youtu.be/3SlxCVTSQFg?si=Z9Quonkt0b75NYW-



शनिवार, 18 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा 

 छत्तीसगढ़ में सत्ता आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया तो साथ ही दो दो उप मुख्यमंत्री बनाए अरुण साव और विजय शर्मा को लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि सुपर सीएम कौन है क्या विष्णुदेव साय सरकार के ऊपर भी कोई सीएम हालांकि जन चर्चा जो है उसके हिसाब से जो सुपर सीएम का तमगा या पद जिसके पास है वह भारतीय जनता पार्टी का वह नेता जो आईएएस से राजनीति में आया है और देश के गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी और खास माने जाते हैं ओपी चौधरी ओपी चौधरी को आम बोलचाल की भाषा में यानी अधिकारी वर्ग में कर्मचारी वर्ग में सुपर सीएम कहा जाता है यहां तक कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी ओपी चौधरी को सुपर सीएम की संज्ञा दी जाती है और बेहद ताकतवर बताया जाता है और कहा जा रहा है कि सरकार वही चला रहे हैं लेकिन अब विवाद इसलिए उठने लगा है क्योंकि विष्णु देव साय की धर्म पत्नी कौशल्या देवी ने खुद को सुपर सीएम बता दिया है मीडिया के सामने उन्होंने क्या कुछ कहा पहले वह सुन लीजिए और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं तो कोई क की मैं उन पदाधिकारियों से जो टिकट लेकर लड़े ठीक है सांसद बन गए विधायक बन गए मैं बिना टिकट मांगे बिना लड़े दूसरो को है और आज मैं एकत्र की विधायक और एक लोकसभा की सांसद भी हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो ऐसे में सुपर सीएम को लेकर जो दावा किया जा रहा था कि ओपी चौधरी है उस दावे का क्या होगा और छत्तीसगढ़ की राजनीति किस तरह से चल रही है क्या सचमुच ओपी चौधरी इतने ताकतवर हैं कि सभी फाइल उनकी ही निगरानी में हस्ताक्षर हो रहे हैं सभी फाइलों को क्या वेही देख रहे हैं यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के पहले 33000 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला था उसे ओपी चौधरी ने एक झटके में समाप्त करते हुए कह दिया कि अभी वित्तीय स्थिति उतनी मजबूत नहीं है और इसे लेकर सोशल मीडिया में कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं और ओपी चौधरी के खिलाफ विश् वमन भी हो रहे हैं कहा जाए तो गलत नहीं होगा दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि जो बैठक व्यवस्था बदली है कैबिनेट की हमने कल ही बताया कि पहले कैबिनेट की बैठक व्यवस्था कैसे होती थी कैसे मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्री बैठा करते थे लेकिन कल जो कैबिनेट की बैठक हुई उसमें बैठक व्यवस्था बदल दी गई और इस बैठक व्यवस्था में अब दोनों उप मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ बैठेंगे तो क्या यह परिवर्तन भी ओपी चौधरी के कहने पर अधिकारियों ने करवाया है यह महत्त्वपूर्ण है यह जांच का विषय हो सकता है हमारी टीम लगी है कि आखिर सचमुच विष्णुदेव साय अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह सब खेल खेल रहे हैं या फिर ओपी चौधरी को मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्रियों का बैठना रास नहीं आ रहा था यह जांच का विषय है यह भाजपा की अंदरूनी राजनीति का मामला है लेकिन दूसरे तरफ कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो मंत्रिमंडल के विस्तार का मामला है या निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति का मामला है इसमें भी ओपी चौधरी का ही पेच फसा हुआ है वे चाहते हैं कि उनके समर्थक ज्यादा से ज्यादा इन पदों पर रहे तब दूसरा सवाल उपचुनाव का भी ले है जो बृजमोहन अग्रवाल के स्थि फे के बाद खाली हुआ है रायपुर दक्षिण का सीट वहां क्या ओपी चौधरी के पसंद का उम्मीदवार उतारा जाएगा ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन अभी जो सवा बड़ा हो चुका है वह सुपर सीएम का है और जब खुद मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी ने आगे आकर कह दिया है कि वे ही सुपर सीएम है और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं हालांकि अब तक जो परंपरा रही है या मजाक में लोग बोल कहते रहे हैं कि गृह मंत्री जैसे पद मिलते रहा है पत्नियों को तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि इस सुपर सीएम को लेकर जो दावे और राजनीति हो रही थी उस पर क्या असर पड़ता है इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा है भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने कौशल्या देवी साय के बयान को लेकर टिप्पणी की है आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस सुपर सीएम का मामला का क्या होता है।

वीडियो देखें 


https://youtu.be/qQb5AAfbTxw?si=Uo58Db5qOWvOOk83

घोटालेबाज़ को वीआईपी सुविधा देने का मामला तूल पकड़ा, जुर्म दर्ज

 

घोटालेबाज़ को वीआईपी सुविधा देने का मामला तूल पकड़ा, जुर्म दर्ज

जो  सरकार में बैठे लोग  सत्ता में आने से पहले घोटाले बाजों को उल्टा लटका कर सीधा करने का दावा करते नहीं थकते यदि उसी सरकार में घोटाले बाजों को वीआईपी संरक्षण मिल रहा है सब तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है जेल में भी अस्पताल में भी और उससे इतर होटलों में भी तब इसे आप क्या कहेंगे

 मामला छत्तीसगढ़ का है डबल इंजन की सरकार का है जहां चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता और देश के गृह मंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कहा था कि भ्रष्टाचारियों को बक्सा नहीं जाएगा लेकिन हाल यह है कि अब सारा खेल सब कुछ वही विष्णु देव साय सरकार कर रही है जिस आरोप के आसरे वह चुनाव जीती है मामला कस्टम मिलिंग का है कोयला घोटाला और शराब घोटाले का मामला छोड़ दीजिए क्योंकि कहा तो यह जा रहा है कि जो काम भूपेश सरकार में हो रहा था वही काम अब भी कोयला और शराब मामले में हो रहा है केवल चेहरे बदल गए हैं लेकिन कस्टम मिलिंग में जो आरोपी गिरफ्तार हुआ है करोड़ों रुपए का मामला है रोशन चंद्राकर मुख्य आरोपी है साजिश करता है यहां तक कि उस पर आरोप है कि भूपेश सरकार के दौरान उसने ही प्रति क्विंटल 20-20 का कमीशन सत्ता तक पहुंचाया है यदि उस आरोपी को वीआईपी ट्रीट मिले और मामले का खुलासा होने के बाद केवल आरक्षक को निलंबित करके मामले की लीपापोती जांच के नाम पर की जाए तो फिर इसे आप क्या कहेंगे घोटाले बाजों को दमाद की तरह वीआईपी ट्रीटमेंट देने का मामला नया नहीं है पहले भी अपराधियों को आरोपियों को इस तरह से वीआईपी सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर हर सत्ता विवादों में रही है लेकिन जो ताजा मामला आया है वह बेहद ही हैरान कर देने वाला इसलिए है क्योंकि सत्ता में आने के पहले इस डबल इंजन की सरकार ने लोगों से क्या-क्या वादे नहीं किए थे कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस पूरे मामले में पहले से ही खबर चल रही थी रोशन चंद्राकर को जेल में वीआईपी सुविधा दी जा रही है लेकिन सरकार इस बात को मानने को तैयार नहीं थी गृह मंत्री विजय शर्मा तो इस प्रदेश में अपराध की कमी का दावा करते हैं जबकि कांग्रेस लगातार अपराध के मामले उठा रही है और यही नहीं लोग भी त्रस्त है चोरी डकैती लूट जैसे मामले लगातार सामने आ रही है खुलेआम हत्या हो रही है हालांकि कुछ लोग पकड़े भी जा रहे हैं लेकिन जिस तरह से वारदातें बढ़ गई है वह हैरान कर देने वाली है तब रोशन चंद्राकर के मामले में आखिर हुआ क्या रोशन चंद्राकर को वीआईपी सुविधा देने का दावा पहले से किया जाता रहा है कई बार मीडिया में यह खबरें प्रकाशित हुई लेकिन सरकार हर बार खंडन कर देती थी लेकिन पिछले दिनों जब एक तस्वीर वायरल होना शुरू हुआ रो चंद्राकर को एक बड़े होटल से निकलते देखा गया और बताया गया कि सिपाही उसे किस तरीके से होटल में लाया था और वे किस तरीके से अपने परिवार वालों रिश्तेदारों से मिला माल भी उनके बच्चे को सिपाही ही घुमाते रहा जैसे खबरें जब सामने आई तो आनंद पानंद में डीजी जेल राजेश मिश्रा ने जेलर को फटकार लगाई और जेलर ने विवाद बढ़ता देखकर सिपाही जायसवाल है उसे निलंबित करके जांच करने की घोषणा कर दी जबक पहली ही दृष्टि में यह साफ तौर पर दिख रहा है कि रोशन चंद्राकर को इस सुविधा देने के नाम पर लेनदेन हुआ है फिर छापे की कारवाही क्यों की गई पैसे बरामद क्यों नहीं किए गए एफआईआर क्यों नहीं की गई जांच के नाम पर क्या इस मामले की भी लीपापोती की जा रही है ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि जिस सिपाही को सस्पेंड किया गया है उस वह इतनी बड़ी हिमाकत कर ही नहीं सकता था कि करोड़ों रुपए के आरोपी को अस्पताल में जांच के नाम पर ले जाने की बजाय होटल पहुंचाते बड़े उच्चाधिकारियों का इसमें हाथ है कुछ नेताओं के भी नाम सामने आ रहे हैं देखना है कि के नाम पर जो खेल खेला जा रहा है उसमें यह सब मामला आता है कि नहीं एफआईआर होती है कि नहीं लेकिन कहा जा रहा है कि विजय शर्मा जब से ग्रह मंत्री बने हैं कानून व्यवस्था को लेकर सवाल तो उठ रहे हैं अब जेलों में जो बंद है आरोपी अपराधी उन्हें भी वीआईपी सुविधा देने का मामला सामने आ गया है देखना है कि इस पूरे मामले में सरकार की क्या भूमिका होती है !

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https://youtu.be/2U5jYlGFnHA?si=kN-_BS3W3QFrqbqC


शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

बेरोज़गारों से विष्णुदेव साय सरकार कैसे छल कर रही है…?

 

बेरोज़गारों से विष्णुदेव साय सरकार कैसे छल कर रही है…? iE82PEDPw6FGH26b

अपने नए-नए फरमान से अपनी ही पीठ थपथपाने में लगी छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार यानी विष्णु देव साय सरकार बेरोजगारी के मामले में जिस तरीके से निष्ठुरता से काम कर रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल में ही बिजली विभाग में फिर भर्ती का विज्ञापन निकला है और इसमें नियुक्ति कब होगी इसकी कोई समय सीमा नहीं है सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि छ महीने पहले भी विद्युत विभाग में जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर सहित विभिन्न पदों की भर्ती निकली थी हालांकि इसमें परीक्षा शुल्क नहीं लिया गया था ले लेकिन बड़ी संख्या में याने हजारों की संख्या में 500 के आसपास विद्यार्थियों ने बेरोजगारों ने यह परीक्षा दी थी मॉडल आंसर भी जारी कर दिया गया इंटरव्यू भी हो गए लेकिन भर्ती नहीं होने से जो परीक्षा देने वाले बेरोजगार हैं उनके सामने संशय की स्थिति है कि वे दूसरे परीक्षा की तैयारी कैसे करें हजारों की संख्या में बेरोजगारों के साथ क्या यह छल नहीं है और उसकी भर्ती हुई नहीं है फिर एक बार विज्ञापन निकालकर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है यह किस तरह का खेल है विष्णु देव साय सरकार की यह लोगों में चर्चा का विषय है बेरोजगार युवक आक्रोशित है क्योंकि चुनाव में जिस तरीके से 33000 शिक्षकों की भर्ती की बात की गई थी गारंटी दी गई थी हालांकि मोदी की गारंटी तो कई तरह की थी उनमें से कुछ ही गारंटी पूरी हुई है लेकिन 33000 शिक्षकों की भर्ती तो की नहीं जा रही है शिक्षकों की कमी है शाला भवन जरजर है बच्चों को स्कूल जाने में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है और दूसरी तरफ सरकार के वित्त मंत्री पैसा नहीं होने का रोना रोते हैं तो विष्णु देव शायद सरकार पालक टीचर मीटिंग कराने का फरमान जारी कर देते हैं इसे लेकर हमने स्टोरी बनाई है पीटीएम को लेकर बेतुका फरमान के नाम से और उसके कमेंट्स बॉक्स में आप जाकर कमेंट्स लोगों के पढ़ेंगे तो आपको हैरानी होगी कि लोग किस तरीके से विष्णु देव साय सरकार से नाराज चल रहे हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से बेरोजगारों को छला जा रहा है और यह स्थिति सभी विभाग में कि किस तरीके से पद रिक्त है लेकिन उसे भरा नहीं जा रहा है और पीएससी घोटाला तो सबके सामने ही है कि किस तरीके से युवाओं के साथ छल किया गया और उसके मुख्य आरोपियों को बचाने की भी कोशिश की गई है तब सवाल यह है कि क्या बेरोजगारी के मामले को लेकर विष्णुदेव सरकार ठंडा पड़ गई है और केंद्र की तरह याद कीजिए आप 2014 में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देंगे और उसकी क्या स्थिति बनी थी यानी उसी तर्ज पर क्या विष्णुदेव साय की सरकार भी जुमलेबाजी पर उतर आई है अपनी पीठ थपथपा के लिए नए-नए फरमान जारी करती है नई नई घोषणा कर देती है अभी पूर्ववर्ती सरकार ने डॉक्टर रमन सिंह सरकार की जो दो योजनाओं को बंद किया था चरण पादुका योजना इस योजना में भारी भ्रष्टाचार और जूते दे देने की तो बात थी लेकिन चप्पल तक ठीक से नहीं मिल रहा था यही हाल सरस्वती साइकिल योजना का था छात्राओं को यह लाभ मिलता था लेकिन स्थिति यह बन गई थी कि जमकर भ्रष्टाचार हुआ था और साइकिल किस तरीके से दिए जा रहे थे या किस तरीके से पड़े पड़े सड़ रहे थे किस तरीके से सप्लाई के साथ सेटिंग थी यह एक अलग मामला और फिर उस योजना को चालू करके विष्णु देव साय सरकार अपनी पीठ थपा चाहती है और दूसरी तरफ संविदा कर्मचारी अनियमित कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं ठेका कर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं किस तरीके से ठेकेदारी प्रथा लागू करने के करने की वजह से युवाओं का शोषण हो रहा है वह भी किसी से छिपा नहीं है अनियमित कर्मचारियों ने तो धरना दिया था हालांकि सरकार ने दो टूक कह दिया है कि अभी इस तरह की कोई कार्य योजना नहीं बनी य अलग बात है कि विधानसभा चुनाव के पहले उनके धरना प्रदर्शन के कार्यक्रमों में जा जाकर भारतीय जनता पार्टी के नेता दावा करते थे कि हमारी सरकार आएगी तो हम संविदा नियुक्ति और अनियमित कर्मचारियों को नियमित कर देंगे लेकिन हालत यह है कि आठ माह बीत जाने के बाद भी सरकार बेरोजगारों के साथ छल करते दिखाई दे रही है!

Video देखे


https://youtu.be/JRcpbwRTjdw?si=