गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं

स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं

 एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड योजना ला रहे हैं और आम लोगों को तकलीफ ना हो इसलिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए काम करने का दावा किया जा रहा है लेकिन दूसरी छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार की दीमक का भेट चढ़ चुका है हर खरीदी में भ्रष्टाचार डॉक्टर रमन  सिंह के जमाने में याद कीजिए डॉपलर से लेकर किस तरीके से मशीनों की खरीदी में जबरदस्त घोटाला हुआ था और अब भी लगातार घोटाला हो रहा है तो क्या इसके पीछे कोई माफिया का खेल चल रहा है किस तरीके से दवा कंपनी सप्लायर और विभागीय तंत्र इस पूरे खेल में शामिल होकर क्या सरकार को तो चुना लगा ही रहे हैं लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं पिछले दिनों विधानसभा में यह मामला गुंजा जिसमें दवाइयां मशीन रिएजेंट और ट्यूब खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का मामला उठा खूब हंगामा तीखी बहस भी हुई है मंत्री और सदस्यों के बीच अमर अग्रवाल बिलासपुर के विधायक हैं कभी रमन सरकार में वित्त मंत्री भी रहे उन्होंने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल को बुरी तरीके से खेल दिया और श्याम बिहारी जयसवाल ने इस मामले की जांच कराने की घोषणा तो कर दी है ध्यान आकर्षण सूचना के जरिए इस मामले को सबसे पहले बल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने उठाया और उन्होंने बताया कि किस तरीके से बिना बिना डिमांड के ही करोड़ों रुपए की खरीदी की गई जिसमें रिएजेंट दवाएं उपकन स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि जिन अस्पतालों को जरूरत नहीं थी जिसकी मांग नहीं थी वहां भी जबरदस्ती यह ग्रिया भेजी गई जहां मशीन नहीं है वहां रिएजेंट की सप्लाई हो रही है ऐसी दवाओं की आपूर्ति कर दी गई है जिसका एक्सपायरी सितंबर और नवंबर 2024 में होना है सीएजी की रिपोर्ट में भी इसे इस इसे लेकर अनियमितता उजागर हो चुकी है ी में जो दवाई की खरीदी की गई है मशीन की खरीदी की गई है रिजेंट की खरीदी की गई है ट्यूब की खरीदी की गई है और उसमें जिस प्रकार से रेट तय किए हैं बाजार में उससे सस्ते में उपलब्ध है और उससे ज्यादा रेट में जो खरीदी की गई है इसको लेकर के मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है और इसमें मुख्य रूप से जो मोक्षित मेडिकेयर साथ ही ना इंडिया के द्वारा जो खरीदी की गई है इसमें डी ईडीटी ए ट्यूब साथ ही इसमें डी डाइमर फुली ऑटो एनालाइजर मशीन और उसके साथ में रिजेंट दवाइयां यह जो खरीदी की गई है निश्चित रूप से इसमें बड़ा करप्शन का मामला है भ्रष्टाचार का मामला है और यह महालेखा कार के उसमें भी आया है जिसका निर्णय अभी तक नहीं हुआ है यह कंपनी के द्वारा कर सीज के द्वारा कराई नहीं गई है साथ ही किसी प्र इसमें जांच जो होनी चाहिए हुई नहीं आज इस मामले को लेकर के उठाया गया और इसमें मंत्री जी के द्वारा सदन में घोषणा की गई है एसीएस के अध्यक्षता में दो आईएस और मिलाकर के तीन लोग की कमेटी में इसकी जांच की जाएगी और उसकी रिपोर्ट तीन महीने के अंदर जांच कमेटी के द्वारा प्रस्तुत की जाएगी जहां पर डिमांड नहीं है जहां पर मांग नहीं है वहां दवाई की सप्लाई जहां पर व मशीन नहीं है वहां पर रिजेंट के आपको जो सप्लाई करना और इस प्रकार से जो एक बड़े स्तर पर जो बिना डिमांड के जो उसमें सप्लाई की गई है और जिस प्रकार से उसमें मिली भगत के द्वारा जो टेंडर लगा कर के ठेकेदार के द्वारा जो उसमें डिमांड की गई तो एक बड़ा मामला इससे उजागर होगा और प्रदेश में प्रकार से जनता के बीच में जो यह लगातार मामले आते रहे हैं इस मामले पर जांच होने के बाद में उनके ऊपर शक्ति से शक्ति कारवाई हो इसके लिए हमने मांग किया था मंत्री जी ने जांच के आदेश दिए हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से अपनी जेब भरने के लिए स्वास्थ जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग में भी भ्रष्टाचार का दीमक पहुंच गया है आम लोगों के जीवन के साथ किस तरीके से खिलवाड़ किया जा रहा है एक्सपायरी डेट की दवाएं जो जल्दी एक्सपायरी होने वाली है ऐसी दवाओं की सप्लाई करके किस तरीके का खेल हो रहा है !

रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में

रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में

 केंद्र के सरकार द्वारा यानी मोदी सत्ता के द्वारा लगातार 36 गढ़ की हो रही उपेक्षा की खबरों के बीच एक और चौकाने वाली खबर आई है महत्वकांक्षी योजना 45 हजार करोड़ की इस योजना को भी मोदी सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है हालांकि यह योजना नितिन गडकरी के विभाग की है सड़क निर्माण से संबंधित है लेकिन अचानक ही जिस तरीके से दैनिक प्रगति रिपोर्ट ही बंद करने की बात कर दी गई है पत्र लिख दिया गया है बकायदा उसके बाद इस महत्वकांक्षी योजना जो छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होता खासकर यहां से बड़ी संख्या में लोग हैदराबाद जाते हैं इलाज के लिए और इस योजना के बंद होने से किस तरह का नुकसान होगा इसकी भी कोई कल्पना नहीं कर सकता 4500 की यह योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर राजनांदगांव होते हुए यह योज यह सड़क हैदराबाद तक जाना था महत्त्वपूर्ण योजना लेकिन कहा जा रहा है कि इस योजना में जो 45 हज करोड़ रुपए लगने थे शायद उसे बचाया गया है क्योंकि बिहार और आंध्र प्रदेश को इस बार बजट में बड़ी राशि दी गई है हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव होने हैं उ से लेकर भी बजट में लंबे चौड़े प्रावधान किए गए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ को क्या मिल रहा है यह सबसे बड़ा सवाल है डबल इंजन की सरकार है उसके बाद भी लगातार राज्य बनने के बाद लगातार 10 सीटें देने वाली भारतीय जनता पार्टी को यदि कैबिनेट मिनिस्टर के लायक भी कोई नहीं लग रहा है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठे सिर्फ एक राज्य मंत्री मिला है तो खन साहू के रूप में लेकिन अब जो खबरें आ रही है वह बेहद ही चौकाने वाली खबर इसलिए है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ को बहुत बड़ा फायदा होने वाला था रायपुर राजनाथ गांव गढ़ चिरौरी गोमी परी आदिलाबाद रामा करीम नगर होते हुए यह सड़क हैदराबाद को जोड़ती थी जिसमें छत्तीसगढ़ में 101 किलोमीटर सड़क बनना था तो महाराष्ट्र में 70 किलोमीटर और बचे 388 किलोमीटर सड़क आंध्र प्रदेश में है और इसे अचानक क्यों ठंडे वस्त डाल दिया गया है इसे लेकर अभी तक सरकारी स्तर पर कोई भी जवाब नहीं आया है कहा जाता है कि इस सड़क मार्ग में वन भी पढ़ते हैं मोहला मानपुर और गढ़ चलो गढ़ चिरौली का क्षेत्र आता है जहां अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया था हालांकि दिक्कत थी अधिग्रहण में क्योंकि वन भूमि को अधिग्रहण करने का जो एनजीटी जो मापदंड है उसकी वजह से कुछ दिक्कत थी लेकिन लगातार दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाए जा रहे थे और कल ही अचानक दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाने का काम रोक देने का पत्र भी जारी कर दिया गया डीपीआर बंद करने के इस पत्र के बाद हड़कंप मचा हुआ है जो इस परियोजना में लगे हुए थे इस योजना में लगे हुए थे सरकारी अधिकारी बकायदा सर्वे हो रहे थे कि किस तरीके से सड़क बन छत्तीसगढ़ में जो 101 किलोमीटर सड़क बनना है उसके रास्ते क्या होंगे यह सब भारत माला प्रोजेक्ट के तहत हो रहा था तब सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कब तक होते रहेगी और अब जब इस परियोजना को साढे हजार करोड़ के इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है तो इसकी शुरुआत अब कब होगी !