मंगलवार, 10 मार्च 2026

मौत का सामान बन रहा तरबूज

 मौत का सामान बन रहा तरबूज 


गर्मी तेज पड़ने लगी है और इसके साथ ही तरबूज की मांग भी बढ़ गई लोगों को अच्छे तरबूज चाहिए लाल रंग के तरबूज चाहिए और शायद इसका फायदा उठाते हुए बहुत सारे तरबूज के व्यापारी खाने का रंग खाद्य और औषधि प्रशासन द्वारा अनुमति मिला हुआ है एरिथ सन नामक यह खाद्य रंग कितना हाम फूल है कितना फायदे जनक है इसे लेकर कई तरह के विवाद हमेशा ही उठते रहे हैं 

पुलिस भी इंजेक्शन के जरिए तरबूज मेंलाल रंग करने वालों को गिरफ्तार भी करती है कारवाही भी करती है लेकिन पुलिस क्यों नहीं पहुंच पाती असली व्यापारी तक केवल इंजेक्शन लगाने वाले नौकरों तक ही क्यों सीमित हो जाती यह एक अलग सवाल है दरअसलएरिथ सन को खाद्य एवं औषधि प्रशासन से अनुमति मिली हुई है इसके बाद भी यदि इसे तरबूज में मिलाने के बाद लोगों की तकलीफ शुरू हो जाती है उल्टी दस्त पेट दर्द और अब तो मौत तक की खबर आने लगी तब क्या लोगों को इस बात का ध्यान नहीं रखना चाहिए कि वे ऐसी तरबूज ना खरीदे बड़ा सरल सा परीक्षण है इसके आप तरबूज को कटवा लीजिए और कॉटन रुई से आप उस लाल रंग में काटन और रुई को फेरिए तो यदि वह लाल हो जाता है तो उसमें एरिथ सिन मिलाई गई है लेकिन लोगों को तो साबुत तरबूज घर ले जाना है तब उनके सामने क्या उपाय कई बार इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं 1990 के दशक में तो वाशिंगटन पोस्ट ने यानी अमेरिका के उस बड़े चर्चित अखबार में इसके प्रतिबंध लगाने की भी खबरें प्रसारित कर दी गई थी लेकिन बार-बार रिसर्च के बाद भी यह कहा जाता है कि यह मनुष्य के लिए नुकसानदायक नहीं है चूहे में प्रयोग हुआ था उसके कुछ

लक्षण आए थे एक तो दूसरी तरफ विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि बड़े लंबे समय तक सेवन करने के बाद ही इसमें में कैंसर या थायराइड जैसी बीमारी हो सकती है के लक्षणपाए गए हैं तब सवाल यह है कि आखिर जो खबरें आ रही है उत्तर प्रदेश की खबरें हैं एक लड़की अपने घर की सबसे बड़ीथी और उसने तरबूज खाया उसके बाद उसे पेट में दर्द हुआ उल्टी हुआ अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई इसी तरह की और भी खबरें कुछ लोग ठीक भी हुए हैं तो क्या इंजेक्शन लगाने के दौरान एहतियात नहीं बढ़ता जाता है जब वैज्ञानिकों ने कह दिया कि यह बहुत ज्यादा हार्मफुल नहीं है और लाखों लोगों में से एक आक को थायराइड याकैंसर जैसी बीमारी हो सकती है तब यदि घटना हो रही है तो क्या इससे बचा जाना नहीं चाहिए यकीनन बचा जाना चाहिए पुलिस ने पिछले दिनों कुछ लोगों को गिरफ्तार भीकिया इंजेक्शन लगाते हुए बकायदा लेकिन वे नौकर थे वे कह रहे हैं कि उन्हें मालिक नौकरी पर रखा और मालिक जैसा आदेश देंगे वे करेंगे लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही यदि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अनुमति है कि यह खाने की चीजों में मिलाई जा सकती है तब इसे क्या कहा जाए या इसका क्या किया जाए फिलहाल तो हम अपने पाठकों को यही सलाह दे सकते हैं या दर्शकों को यही सलाह दे सकतेहैं कि वे इस तरीके से मिश्रित चीजों से बचे शुद्धता वाली चीजों पर ही भरोसा करें

वीडियो देखें 


https://youtu.be/3JD66t-Wl24?si=-XqLWiTqWmH_fLZE

रविवार, 8 मार्च 2026

करोड़ों रुपये के जप्त ड्रग्स गायब

करोड़ों रुपये के जप्त ड्रग्स गायब 


छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भाजपा नेता के द्वारा अफ़ीम की खेती को लेकर बवाल मचा हुआ है , नशे के कारोबार में लिप्त भाजपा नेताओं की संलिप्तता नई नहीं है लेकिन यह मामला पार्टी के लिए नए तरह का संकट खड़ा कर सकता है , तब ड्रग्स को लेकर मोदी सत्ता पर उठते सवाल को लेकर एक रिपोर्ट 

जब  से मोदी सरकार ने सत्ता संभाली है क्या ड्रग माफियाओं की चांदी हो गई है यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि  दिल्ली हाई कोर्ट में जो याचिका लगाई गई है उसके मुताबिक 7 हज़ार किलो ड्रग गायब हो गए इसकी कीमत लगभग 5 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है और इतने अरबों खरबों के ड्रग यदि गायब हो रहे हैं तो कहां हो रहे हैं जल सेना के जवानों ने लगातार दूसरे देशों से आने वाले ड्रग रोकने के लिए क्या कुछ जतन नहीं करती है सभी बंदरगाह अडानी के पास है जल सेना के इन प्रयासों के बाद भी यदि ड्रग भारत में आ रहा है और करोड़ों अरबों रुपए के पकड़ाए जा रहे हैं तो इसके पीछे की क्या कहानी उड़ता पंजाब को लेकर तो फिल्म तक बन गई थी नसा से सरा बोर पंजाब के युवा किस तरीके से बर्बाद हो रहे थे तब ऐसी परिस्थिति में जब सरकार के पासड्रग जप्त करने आती है तो जो नियम कहते हैं उसके अनुसार उसे नष्ट भी किया जाता है लेकिन यदि एनसीआरबी यानी केंद्रीय अपराध ब्यूरो और ग्री मंत्रालय के रिपोर्ट में जो आंकड़े उन्होंने जारी किए हैं 18 से लेकर 2022 तक उसमें अनेक विसंगतियां है और इस विसंगतियों के बीच 70 हज किलो से यदि अधिक ड्रग गायब हो गए हैं तो क्या इसे तस्करों के हवाले लेनदेन कर या सेटिंग कर सौंप दी गई है 

यह बड़ा सवाल है और इसे ही लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, याचिकाकर्ता ने साफ तौर पर कहा है कि जिस पैमाने पर अनियमितता दिख रही है उससे समाज में अराजकता फैलने की आशंका है और यकीनन क्योंकि अपराध की पहली जननी झूठ बोलना है तो ड्रग और नशा भी है ड्रग और नशे के चक्कर में किस तरीके से अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं और ऐसी परिस्थिति में यदि अपराध ब्यूरो और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में अलग-अलग दिखाईविसंगतियां दिखाई दे रही है और 7 हज किलो यानी लगभग 5 लाख करोड़ रुपए के ड्रग गायब है इसमें हीरोइन है और बहुत दूसरे प्रकार के ड्रग है तब क्या इस बढ़ते अपराध के लिए कहीं ना कहीं सरकार दोषी नहीं 

सवाल आप कई उठा सकते हैं याचिका करता ने तो बड़ी लंबी चौड़ी सूची दी और इसकी वजह से समाज में अराजकता फैलने की आशंका भी जाहिर करती है निश्चित तौर पर कल ही हमने छत्तीसगढ़ मेंबताया कि इससे पहले शराब बंदी को लेकर किस तरीके से बवाल मचता था और किस तरीके से घोटाले का पर्दा फास हुआ और सरकार बदल गई इसी घोटाले की वजह से लेकिन व्यवस्था नहीं बदली एक व्यक्ति के हाथ से दूसरे व्यक्ति के हाथ में चले गए और अहाता चलाने शराब दुकानों पर मनमाने सप्लाई को लेकर कई नेता सक्रीय हैं और उनमें से तो एक चर्चित मंत्री विवादास्पद मंत्री का भाई को तीन जिले की जिम्मेदारी दे देने तक की चर्चा सरकार अहाता खोल रही है यानी शराब दुकान के बाजू में ही बैठकर पिलाया जाएगा तब ऐसी परिस्थिति में यदि दिल्ली हाई कोर्ट में जो याचिका लगी है क्या वह मोदी सत्ता के क्रियाकलापों पर उंगली नहीं उठाती है देश सुरक्षित हाथों में है कहकरकिस तरीके से इस दौर में खेल हुआ है यानी सवाल सिर्फ ड्रग का नहीं यदि आप मोटे तौर पर इस 10 साल के कार्यकाल में देखें तो उन दवा कंपनियों से भी चुनावी बांड वसूला गया या चंदा लिया गया जिनकी दवा जांच में घटिया पाई गई थी जांच रोक दी गई कोरोनिल का मामला तो है कि किस तरीके से कंपनी ने बाजार से सारा कोरोनिल वापस मंगवा लिया है किस तरीके से लोग मरे हैं करोना काल में और किस तरीके से बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों का जीवन हराम कर दिया और ऐसी परिस्थिति मेंयदि लोगों को ड्रग भी आसानी से उपलब्ध हो जाए या सरकार के द्वारा जपत किए गए ड्रग ही गायब हो जाए तो फिर इसे क्या कहेंगे !

छत्तीसगढ़ में ड्रग की खेती पर वीडियो 


वीडियो देखें