शराब कांड - छापा-छापा का खेल, कब होगी गिरफ़्तारी…
एक तरफ छत्तीसगढ़ में राजनीतिक गर्मी उफान पर है तो दूसरी तरफ ईडी सीबीआई एसीबी ईओ डब्लू की भूमिका भी अब अचानक तेज हो गई है और जिस तरीके से पिछले दिनों शराब घोटाले के मामले को लेकर आपकारी विभाग के 15 अफसरों से पूछताछ की गई क्या उनकी गिरफ्तारी होगी यह बड़ा सवाल है करोड़ों अरबों रुपए के शराब घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर है और सत्ता जाने की बड़ी वजह में से एक वजह शराब घोटाला भी रहा हालांकि इस पूरे मामले में राजनीति के जानकारों का कहना है कि भूपेश बघेल की गिरफ्तारी शायद इस मामले में ना हो क्योंकि उन्होंने जिस तरीके से शराब घोटाले के मामले को अंजाम दिया है उसमें उनकी संलिप्तता पाना बड़ा मुश्किल है उनके खिलाफ सबूत जुटाना बेहद मुश्किल है कोई मुंह खोल दे तो बात अलग है जो आरोपी धरे गए हैं
शराब घोटाले में अनवर ढेबर अनिल टुटेजा सौम्या चौरसिया यानी इन बड़े आरोपियों में से कोई यदि मुंह खोल दे तब ही भूपेश बघेल की मुसीबत बढ़ सकती है लेकिन जो वर्तमान परिस्थिति है और जिस तरीके से ईडी पर भी वसूली के आरोप लगे हैं एसीबी और ईओडब्ल्यू पर भी पहचान देख देख देख कर कारवाही करने का आरोप लगाए उसके बाद जिस तरीके से अचानक आपकारी विभाग के 15 अफसरों से जो पूछताछ की गई है क्या वे अफसर धरे जाएंगे हालांकि आपकारी विभाग के तत्कालीन प्रमुख निरंजन दास अभी जेल की सलाखों के पीछे और कहा जा रहा है कि वे तो सिर्फ एक मोहरा थे असल मास्टर माइंड तो अना तो अनिल टुटेजा है ना अनोवर ढेबर है बल्कि जो आरोप पत्र दाखिल हुए उनके अनुसार तो विवेक ढांड की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे लेकिन अभी तक विवेक ढांड से ना तो कोई पूछताछ हुई है और ना ही कोई कारवाही की पहल हुई ऐसे में क्या विवेक ढांड ने सेटिंग कर ली क्योंकि इस दौर में जिस तरीके की खबरें आ रही है उसमें हमें सेटिंग शब्द का इस्तेमाल करने मजबूर होना पड़ रहा है राम गपाल अग्रवाल का मामला सेट हो गया यही चर्चा है जो आम लोगों में चर्चा है वह यही चर्चा है और कांग्रेस तो बिना कोष अध्यक्ष के संगठन चला रही है राम गोपाल अग्रवाल कहां है इसका किसी को पता नहीं इसके अलावा भी जो आईपीएस अधिकारी थे जिनसे बकायदा ईडी ने पूछताछ की थी और कहा जाता है कि उनके खिलाफ गंभीर तरह के सबूत भी मिले थे लेकिन ना तो भोजराज पटेल के खिलाफ जुर्म दर्ज हुआ ना उनकी गिरफ्तारी हुई ना तो पारुल माथुर को लेकर किसी तरह की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है इसके अलावा दीपांशु काबरा से तो परिवहन घोटाले के मामले में भी पूछताछ की खबरें आते रही महादेव सट्टा से भी कई आईपीएस अधिकारियों के नाम रहे ऐसी परिस्थिति में जब इन लोगों के खिलाफ ना तो कोई जुर्म दर्ज हो रहा है और ना ही गिरफ्तारी हो रही है ना पूछताछ हो रही है तो क्या यह पूरा मामला एक तरह से सेट हो चुका है यह कई तरह के सवाल हैं और यह जन चर्चा का विषय है कि आखिर यह लगातार छापे की कारवाई जमानत नहीं देना हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि पीएमएलए कानून जो है वह भी अब जमानत के अधीन आ गया है यानी जमानत अधिकार है और जेल अपवाद तब ऐसी परिस्थिति में छत्तीसगढ़ में जो 15 अपकारी अधिकारियों के यहां छापेमारी की कारवाई हुई है या पूछताछ की जो कारवाई हुई है उसे लेकर भी तो सेटिंग की खबरें आ रही तो क्या सिर्फ वसूली के लिए दबाव बनाने का खेल चल रहा है लोगों को बड़ी उम्मीद थी जब अमित शाह ने भरी चुनावी सभा में कहा था कि भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे शासन में आएंगे त भ्रष्टाचार करने वा को लेकिन जो परिस्थितियां इन आ न में बनी है आठ महीने से ऊपर हो रहे हैं विष्णु देव साय सरकार को यानी इस डबल इंजन सरकार को और जो परिस्थितियां निर्मित हो रही है वह कारवाही के नाम पर खाना पूर्ति की अधिक दिखाई दे रही है तब इन 15 आपकारी अफसर जो इन दिनों निशाने पर है उनके खिलाफ क्या होगा !
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