रविवार, 19 अप्रैल 2026

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

 

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

अदानी के लिए हसदेव को दांव पर लगाने को लेकर बुरी तरीके से घिरी विष्णुदेव साय सरकार अब अंबिकापुर में भू माफियाओं के द्वारा 100 एकड़ जंगल काटे जाने को लेकर निशाने पर है कहा जा रहा है कि अंबिकापुर से सटे गांव बुधिया चुआ गांव का यही नाम है वहां भू माफिया लगातार जंगल काट रहे हैं और 100 एकड़ जंगल काट चुके हैं इसे लेकर पिछले दिनों जब लोगों ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता टीएस बाबा के पास पहुंचे तो बाबा आग बबूला हो गए उन्होंने का दौरा भी किया और पत्रकारों से बताया से कहा कि लंबे अरसे से शासन से लगातार शिकायत की जा रही है कलेक्टर कर क्या रहे हैं आखिर इस पूरे घटनाक्रम में क्या शासन का संरक्षण है क्योंकि लगातार इस मामले को लेकर वहां गांव वाले आवाज उठाते रहे हैं शिकायत करते रहे लिखित में और इसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान तो हो रहा है इस करोड़ों रुपए की जमीन का भी बंदर बांट हो रहा है टी एस बाबा ने विस्तार से यह सब बात कहते हुए धमकी भी दी कि ऐसी स्थिति  क्यों लाई जा रही है कि उन्हें भूख हड़ताल पर बैठना पड़े पहले बाबा ने क्या कुछ कहा वह सुन ली वो वहां तक ऐसे फैल के वो नीचे तक और लगभग गुमला नेशनल हाईवे तक जहां सिसोदिया जी का पेट्रोल पंप लोग बता रहे हैं उसके 500 मीटर तक का पूरा क्षेत्र एक के बाद एक काटा जा रहा है और आप स्वयं देख सकते हैं कि मेड़ के आकार भी दिख रहे हैं यहां कुछ नहीं है जोध कोट भी ऐसा नहीं दिख रहा है और मेड़ बना के लोगों ने क्षेत्र को आपस में बांट लिया है यह रिजर्व फॉरेस्ट है जो कलेक्टर ने 20161 में अन्य अधिकारियों के साथ सेटल भी किया उसके आदेश भी है और बावजूद उसके यह स्थिति बनी मैं बाहर था दिल्ली में था तो गांव से खबर आई कि बाबा यहां दिक्कत हो रही है कुछ वन अधिकार पत्र है वह हमको अभी तक नहीं मिले हैं आजादी के पहले से जो लोग काबिज हैं उनके वन अधिकार पत्र नहीं मिले हैं नए लोगों को कुछ वन अधिकार पत्र मिले हैं कुछ वह भी प्रक्रिया अधूरी है और कुछ लोग हैं जो खरीद बिक्री भी कर रहे हैं यह सारी बातें सामने कि जो वनाधिकार पत्र मिले हैं उनकी खरीद बिक्री उनके कब समझाए भी कि एक देखिए वनाधिकार पट्टा नहीं है यह वनाधिकार पत्र है पट्टा आपको अधिकार देता है खरीद बिक्री का भी वनाधिकार पत्र में बेचने के अधिकार नहीं है और यदि आप बेचते हैं तो यह जमीन वापस शासन को चली जाएगी तो प्रजातंत्र के इस चौथे स्तंभ के माध्यम से हम लोग चाहेंगे कि लोगों के सामने सच्चाई कम से कम पहु कदम अगला कदम इसको रोकने का होगा यह नौबत तो नहीं आनी चाहिए कि यहां के मैं भूख हड़ताल में बैठू यह तो अति हो जाएगी बैठूंगा यह तो अति हो जाएगी तो या हल्का पन है क्या हमारी व्यवस्था ऐसी है कि यह सब करना पड़ेगा तब एक जानकारी आए और अगर वह बात सही है पक्ष विपक्ष इसमें कुछ नहीं है नियम और कानून है नियम और कानून के विपरीत हो रहा है तो आप कारवाही करिए आखिरी में प्रजातंत्र में क्या होता है जनमत का संग्रह है तो वो तो बहुत ही हल्का पन हो जाएगा कि अगर यही नहीं गांव के जो उपसरपंच है उन्होंने भी पूरी बात विस्तार से मीडिया को बताया बड़ा-बड़ा पेड़ था सब कटाई हो गया और निरंतर गांव वाले से शिकायत करते रहे कलेक्टर को भी फॉरेस्ट को भी लेकिन इसमें कभी कब्जा नहीं रोका गया किसी प्रकार का गांव में आक्रोशित है कि हम लोग का नि स्तारी है और जंगल से निस्तार है और जंगल रहने पर हम लोग का आगे भविष्य में हर प्रकार का ऑक्सीजन मिलेगा और हम लोग का सुख सुविधा मिलेगा कहके सब सब लोग को आक्रोशित हो रहा है कि वह नष्ट हो रहा है तो यह तो बड़ी मतलब थोड़ा सा गौर करने की बात है और प्रशासन इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है लोग का कहना है जब इसको बराबर किया जा रहा था उस समय आप लोगों ने कोई उचित कम नहीं उस समय हम लोग जब से शुरुआत हुआ है तब से हम लोग इसका विरोध करते आ रहे हैं पूरे गांव के लोग विरोध करते आ रहे हैं मगर नियंत यानी आप सोचिए कि किस तरीके से शासन प्रशासन के पर जंगल की जमीन तक को लूटा जा रहा है और शिकायत के बाद भी यदि सत्ता खामोश है तो क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार भू माफियाओं से मिली हुई है और वह जानबूझकर कारवाही को टाल रही है जबकि वह अच्छी तरीके से जानती है कि इस 100 एकड़ जमीन में जो जंगल है गांव की निस्तार उस पर निर्भर है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि शासन कुछ कारवाही करती है या फिर टीएस बाबा को भूख हड़ताल में बैठना पड़ेगा!


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https://youtu.be/3SlxCVTSQFg?si=Z9Quonkt0b75NYW-



शनिवार, 18 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा 

 छत्तीसगढ़ में सत्ता आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया तो साथ ही दो दो उप मुख्यमंत्री बनाए अरुण साव और विजय शर्मा को लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि सुपर सीएम कौन है क्या विष्णुदेव साय सरकार के ऊपर भी कोई सीएम हालांकि जन चर्चा जो है उसके हिसाब से जो सुपर सीएम का तमगा या पद जिसके पास है वह भारतीय जनता पार्टी का वह नेता जो आईएएस से राजनीति में आया है और देश के गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी और खास माने जाते हैं ओपी चौधरी ओपी चौधरी को आम बोलचाल की भाषा में यानी अधिकारी वर्ग में कर्मचारी वर्ग में सुपर सीएम कहा जाता है यहां तक कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी ओपी चौधरी को सुपर सीएम की संज्ञा दी जाती है और बेहद ताकतवर बताया जाता है और कहा जा रहा है कि सरकार वही चला रहे हैं लेकिन अब विवाद इसलिए उठने लगा है क्योंकि विष्णु देव साय की धर्म पत्नी कौशल्या देवी ने खुद को सुपर सीएम बता दिया है मीडिया के सामने उन्होंने क्या कुछ कहा पहले वह सुन लीजिए और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं तो कोई क की मैं उन पदाधिकारियों से जो टिकट लेकर लड़े ठीक है सांसद बन गए विधायक बन गए मैं बिना टिकट मांगे बिना लड़े दूसरो को है और आज मैं एकत्र की विधायक और एक लोकसभा की सांसद भी हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो ऐसे में सुपर सीएम को लेकर जो दावा किया जा रहा था कि ओपी चौधरी है उस दावे का क्या होगा और छत्तीसगढ़ की राजनीति किस तरह से चल रही है क्या सचमुच ओपी चौधरी इतने ताकतवर हैं कि सभी फाइल उनकी ही निगरानी में हस्ताक्षर हो रहे हैं सभी फाइलों को क्या वेही देख रहे हैं यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के पहले 33000 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला था उसे ओपी चौधरी ने एक झटके में समाप्त करते हुए कह दिया कि अभी वित्तीय स्थिति उतनी मजबूत नहीं है और इसे लेकर सोशल मीडिया में कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं और ओपी चौधरी के खिलाफ विश् वमन भी हो रहे हैं कहा जाए तो गलत नहीं होगा दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि जो बैठक व्यवस्था बदली है कैबिनेट की हमने कल ही बताया कि पहले कैबिनेट की बैठक व्यवस्था कैसे होती थी कैसे मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्री बैठा करते थे लेकिन कल जो कैबिनेट की बैठक हुई उसमें बैठक व्यवस्था बदल दी गई और इस बैठक व्यवस्था में अब दोनों उप मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ बैठेंगे तो क्या यह परिवर्तन भी ओपी चौधरी के कहने पर अधिकारियों ने करवाया है यह महत्त्वपूर्ण है यह जांच का विषय हो सकता है हमारी टीम लगी है कि आखिर सचमुच विष्णुदेव साय अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह सब खेल खेल रहे हैं या फिर ओपी चौधरी को मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्रियों का बैठना रास नहीं आ रहा था यह जांच का विषय है यह भाजपा की अंदरूनी राजनीति का मामला है लेकिन दूसरे तरफ कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो मंत्रिमंडल के विस्तार का मामला है या निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति का मामला है इसमें भी ओपी चौधरी का ही पेच फसा हुआ है वे चाहते हैं कि उनके समर्थक ज्यादा से ज्यादा इन पदों पर रहे तब दूसरा सवाल उपचुनाव का भी ले है जो बृजमोहन अग्रवाल के स्थि फे के बाद खाली हुआ है रायपुर दक्षिण का सीट वहां क्या ओपी चौधरी के पसंद का उम्मीदवार उतारा जाएगा ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन अभी जो सवा बड़ा हो चुका है वह सुपर सीएम का है और जब खुद मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी ने आगे आकर कह दिया है कि वे ही सुपर सीएम है और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं हालांकि अब तक जो परंपरा रही है या मजाक में लोग बोल कहते रहे हैं कि गृह मंत्री जैसे पद मिलते रहा है पत्नियों को तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि इस सुपर सीएम को लेकर जो दावे और राजनीति हो रही थी उस पर क्या असर पड़ता है इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा है भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने कौशल्या देवी साय के बयान को लेकर टिप्पणी की है आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस सुपर सीएम का मामला का क्या होता है।

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https://youtu.be/qQb5AAfbTxw?si=Uo58Db5qOWvOOk83

घोटालेबाज़ को वीआईपी सुविधा देने का मामला तूल पकड़ा, जुर्म दर्ज

 

घोटालेबाज़ को वीआईपी सुविधा देने का मामला तूल पकड़ा, जुर्म दर्ज

जो  सरकार में बैठे लोग  सत्ता में आने से पहले घोटाले बाजों को उल्टा लटका कर सीधा करने का दावा करते नहीं थकते यदि उसी सरकार में घोटाले बाजों को वीआईपी संरक्षण मिल रहा है सब तरह की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है जेल में भी अस्पताल में भी और उससे इतर होटलों में भी तब इसे आप क्या कहेंगे

 मामला छत्तीसगढ़ का है डबल इंजन की सरकार का है जहां चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी के नेता और देश के गृह मंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कहा था कि भ्रष्टाचारियों को बक्सा नहीं जाएगा लेकिन हाल यह है कि अब सारा खेल सब कुछ वही विष्णु देव साय सरकार कर रही है जिस आरोप के आसरे वह चुनाव जीती है मामला कस्टम मिलिंग का है कोयला घोटाला और शराब घोटाले का मामला छोड़ दीजिए क्योंकि कहा तो यह जा रहा है कि जो काम भूपेश सरकार में हो रहा था वही काम अब भी कोयला और शराब मामले में हो रहा है केवल चेहरे बदल गए हैं लेकिन कस्टम मिलिंग में जो आरोपी गिरफ्तार हुआ है करोड़ों रुपए का मामला है रोशन चंद्राकर मुख्य आरोपी है साजिश करता है यहां तक कि उस पर आरोप है कि भूपेश सरकार के दौरान उसने ही प्रति क्विंटल 20-20 का कमीशन सत्ता तक पहुंचाया है यदि उस आरोपी को वीआईपी ट्रीट मिले और मामले का खुलासा होने के बाद केवल आरक्षक को निलंबित करके मामले की लीपापोती जांच के नाम पर की जाए तो फिर इसे आप क्या कहेंगे घोटाले बाजों को दमाद की तरह वीआईपी ट्रीटमेंट देने का मामला नया नहीं है पहले भी अपराधियों को आरोपियों को इस तरह से वीआईपी सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर हर सत्ता विवादों में रही है लेकिन जो ताजा मामला आया है वह बेहद ही हैरान कर देने वाला इसलिए है क्योंकि सत्ता में आने के पहले इस डबल इंजन की सरकार ने लोगों से क्या-क्या वादे नहीं किए थे कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस पूरे मामले में पहले से ही खबर चल रही थी रोशन चंद्राकर को जेल में वीआईपी सुविधा दी जा रही है लेकिन सरकार इस बात को मानने को तैयार नहीं थी गृह मंत्री विजय शर्मा तो इस प्रदेश में अपराध की कमी का दावा करते हैं जबकि कांग्रेस लगातार अपराध के मामले उठा रही है और यही नहीं लोग भी त्रस्त है चोरी डकैती लूट जैसे मामले लगातार सामने आ रही है खुलेआम हत्या हो रही है हालांकि कुछ लोग पकड़े भी जा रहे हैं लेकिन जिस तरह से वारदातें बढ़ गई है वह हैरान कर देने वाली है तब रोशन चंद्राकर के मामले में आखिर हुआ क्या रोशन चंद्राकर को वीआईपी सुविधा देने का दावा पहले से किया जाता रहा है कई बार मीडिया में यह खबरें प्रकाशित हुई लेकिन सरकार हर बार खंडन कर देती थी लेकिन पिछले दिनों जब एक तस्वीर वायरल होना शुरू हुआ रो चंद्राकर को एक बड़े होटल से निकलते देखा गया और बताया गया कि सिपाही उसे किस तरीके से होटल में लाया था और वे किस तरीके से अपने परिवार वालों रिश्तेदारों से मिला माल भी उनके बच्चे को सिपाही ही घुमाते रहा जैसे खबरें जब सामने आई तो आनंद पानंद में डीजी जेल राजेश मिश्रा ने जेलर को फटकार लगाई और जेलर ने विवाद बढ़ता देखकर सिपाही जायसवाल है उसे निलंबित करके जांच करने की घोषणा कर दी जबक पहली ही दृष्टि में यह साफ तौर पर दिख रहा है कि रोशन चंद्राकर को इस सुविधा देने के नाम पर लेनदेन हुआ है फिर छापे की कारवाही क्यों की गई पैसे बरामद क्यों नहीं किए गए एफआईआर क्यों नहीं की गई जांच के नाम पर क्या इस मामले की भी लीपापोती की जा रही है ऐसे कई सवाल उठ रहे हैं सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि जिस सिपाही को सस्पेंड किया गया है उस वह इतनी बड़ी हिमाकत कर ही नहीं सकता था कि करोड़ों रुपए के आरोपी को अस्पताल में जांच के नाम पर ले जाने की बजाय होटल पहुंचाते बड़े उच्चाधिकारियों का इसमें हाथ है कुछ नेताओं के भी नाम सामने आ रहे हैं देखना है कि के नाम पर जो खेल खेला जा रहा है उसमें यह सब मामला आता है कि नहीं एफआईआर होती है कि नहीं लेकिन कहा जा रहा है कि विजय शर्मा जब से ग्रह मंत्री बने हैं कानून व्यवस्था को लेकर सवाल तो उठ रहे हैं अब जेलों में जो बंद है आरोपी अपराधी उन्हें भी वीआईपी सुविधा देने का मामला सामने आ गया है देखना है कि इस पूरे मामले में सरकार की क्या भूमिका होती है !

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https://youtu.be/2U5jYlGFnHA?si=kN-_BS3W3QFrqbqC


शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

बेरोज़गारों से विष्णुदेव साय सरकार कैसे छल कर रही है…?

 

बेरोज़गारों से विष्णुदेव साय सरकार कैसे छल कर रही है…? iE82PEDPw6FGH26b

अपने नए-नए फरमान से अपनी ही पीठ थपथपाने में लगी छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार यानी विष्णु देव साय सरकार बेरोजगारी के मामले में जिस तरीके से निष्ठुरता से काम कर रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल में ही बिजली विभाग में फिर भर्ती का विज्ञापन निकला है और इसमें नियुक्ति कब होगी इसकी कोई समय सीमा नहीं है सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि छ महीने पहले भी विद्युत विभाग में जूनियर इंजीनियर और असिस्टेंट इंजीनियर सहित विभिन्न पदों की भर्ती निकली थी हालांकि इसमें परीक्षा शुल्क नहीं लिया गया था ले लेकिन बड़ी संख्या में याने हजारों की संख्या में 500 के आसपास विद्यार्थियों ने बेरोजगारों ने यह परीक्षा दी थी मॉडल आंसर भी जारी कर दिया गया इंटरव्यू भी हो गए लेकिन भर्ती नहीं होने से जो परीक्षा देने वाले बेरोजगार हैं उनके सामने संशय की स्थिति है कि वे दूसरे परीक्षा की तैयारी कैसे करें हजारों की संख्या में बेरोजगारों के साथ क्या यह छल नहीं है और उसकी भर्ती हुई नहीं है फिर एक बार विज्ञापन निकालकर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही है यह किस तरह का खेल है विष्णु देव साय सरकार की यह लोगों में चर्चा का विषय है बेरोजगार युवक आक्रोशित है क्योंकि चुनाव में जिस तरीके से 33000 शिक्षकों की भर्ती की बात की गई थी गारंटी दी गई थी हालांकि मोदी की गारंटी तो कई तरह की थी उनमें से कुछ ही गारंटी पूरी हुई है लेकिन 33000 शिक्षकों की भर्ती तो की नहीं जा रही है शिक्षकों की कमी है शाला भवन जरजर है बच्चों को स्कूल जाने में बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है और दूसरी तरफ सरकार के वित्त मंत्री पैसा नहीं होने का रोना रोते हैं तो विष्णु देव शायद सरकार पालक टीचर मीटिंग कराने का फरमान जारी कर देते हैं इसे लेकर हमने स्टोरी बनाई है पीटीएम को लेकर बेतुका फरमान के नाम से और उसके कमेंट्स बॉक्स में आप जाकर कमेंट्स लोगों के पढ़ेंगे तो आपको हैरानी होगी कि लोग किस तरीके से विष्णु देव साय सरकार से नाराज चल रहे हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से बेरोजगारों को छला जा रहा है और यह स्थिति सभी विभाग में कि किस तरीके से पद रिक्त है लेकिन उसे भरा नहीं जा रहा है और पीएससी घोटाला तो सबके सामने ही है कि किस तरीके से युवाओं के साथ छल किया गया और उसके मुख्य आरोपियों को बचाने की भी कोशिश की गई है तब सवाल यह है कि क्या बेरोजगारी के मामले को लेकर विष्णुदेव सरकार ठंडा पड़ गई है और केंद्र की तरह याद कीजिए आप 2014 में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देंगे और उसकी क्या स्थिति बनी थी यानी उसी तर्ज पर क्या विष्णुदेव साय की सरकार भी जुमलेबाजी पर उतर आई है अपनी पीठ थपथपा के लिए नए-नए फरमान जारी करती है नई नई घोषणा कर देती है अभी पूर्ववर्ती सरकार ने डॉक्टर रमन सिंह सरकार की जो दो योजनाओं को बंद किया था चरण पादुका योजना इस योजना में भारी भ्रष्टाचार और जूते दे देने की तो बात थी लेकिन चप्पल तक ठीक से नहीं मिल रहा था यही हाल सरस्वती साइकिल योजना का था छात्राओं को यह लाभ मिलता था लेकिन स्थिति यह बन गई थी कि जमकर भ्रष्टाचार हुआ था और साइकिल किस तरीके से दिए जा रहे थे या किस तरीके से पड़े पड़े सड़ रहे थे किस तरीके से सप्लाई के साथ सेटिंग थी यह एक अलग मामला और फिर उस योजना को चालू करके विष्णु देव साय सरकार अपनी पीठ थपा चाहती है और दूसरी तरफ संविदा कर्मचारी अनियमित कर्मचारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं ठेका कर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं किस तरीके से ठेकेदारी प्रथा लागू करने के करने की वजह से युवाओं का शोषण हो रहा है वह भी किसी से छिपा नहीं है अनियमित कर्मचारियों ने तो धरना दिया था हालांकि सरकार ने दो टूक कह दिया है कि अभी इस तरह की कोई कार्य योजना नहीं बनी य अलग बात है कि विधानसभा चुनाव के पहले उनके धरना प्रदर्शन के कार्यक्रमों में जा जाकर भारतीय जनता पार्टी के नेता दावा करते थे कि हमारी सरकार आएगी तो हम संविदा नियुक्ति और अनियमित कर्मचारियों को नियमित कर देंगे लेकिन हालत यह है कि आठ माह बीत जाने के बाद भी सरकार बेरोजगारों के साथ छल करते दिखाई दे रही है!

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https://youtu.be/JRcpbwRTjdw?si=


गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

मोदी के चहेतों के इस रिकार्ड्स देख चौंक जाएँगे आप भी…



 मोदी सरकार बुरी तरीके से घिर गई है एक समय था जब मीडिया उनके हर कदम को मास्टर स्ट्रोक बताते नहीं थकती थी लेकिन इस सरकार में अब यह मोदी सरकार नहीं है और ना ही यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है यह एनडीए की सरकार हो चुकी है खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार किया है इसे तब इस सरकार को लेकर मीडिया की भूमिका क्या बदल गई है इसलिए अब मीडिया कर्मियों और पत्रकारों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जा रहा है उन्हें पिंजड़े में बंद कर दिया जा रहा है दावा तो इसी तरह का है और राहुल गांधी ने मीडिया को लेकर सरकार की भूमिका को लेकर किस तरीके से लोकसभा में सवाल उठाए और कहा कि इस सरकार ने मीडिया वालों को  पिंजरे में बंद कर दिया सर उनको बाहर निकाल दीजिए मीडिया वालो को सर आपने पिंजरे में बंद कर दिया सर उनको बाहर निकाल यही नहीं अब तो हर घटना पर मीडिया की भूमिका कुछ बदली हुई नजर आ रही है या सुर बदले हुए हैं और इसके बाद भी शायद सोशल मीडिया में जो सक्रिय हैं उन लोगों को गोदी मीडिया जिसे कहा जाता है उस पर भरोसा नहीं रह गया इसलिए अपने ढंग से नए-नए तरह से मोदी सरकार के रिकॉर्ड को सामने ला रहे हैं यह रिकॉर्ड चौकाने वाला भी है और इतिहास के पन्नों में दर्ज भी हो रहा है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा हावड़ा मुंबई रेल दुर्घटना झारखंड में जो हुई उसके बाद जिस तरह की तस्वीरें सामने आई वह मोदी सरकार ही नहीं आरएसएस के लिए भी बेचैनी भरा हो सकता है यह एक अलग बात है कि आरएसएस इन दिनों दबाव बना रही है मोदी सरकार पर नकेल कसने के लिए और उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र हरियाणा और झारखंड की राजनीती में संघ के सक्रिय हो जाने से अलग तरह की हो गई है जो जेपी नड्डा लोकसभा चुनाव के दौरान कहा करते थे कि अब संघ की जरूरत नहीं है उन्हें संघ की बैठकों में जाना पड़ रहा है  जो मीडिया में चल रहा हावड़ा मुंबई मेल दुर्घटना के बाद तीन तस्वीर के साथ यह सोशल मीडिया में ज वायरल हो रहा है कि मोदी सत्ता का रिकॉर्ड देखें जिसमें पहली तस्वीर लगी है धर्मेंद्र प्रधान की जो मोदी सरकार में शिक्षा मंत्री है और 2014 से लेकर अब तक 70 बार से अधिक पेपर लीक के मामले हुए हैं पेपर लीक के मामले को लेकर जिस तरह के सवाल उठे हैं वह सवाल बेहद ही चौकाने वाले हैं सरकार ने परीक्षा लेने के नाम पर बेरोजगारों से जमकर कमाई की है करोड़ों अरबों रुपए कमाए हैं आप सोचिए कि एक परीक्षा फार्म की जो कीमत है वह तो है ही है यात्रा से लेकर ठहरने तक में युवाओं के पैसे खर्चे हुए हैं और सरकार को उससे जीएसटी मिली इस देश में एक दौर था जब एक भी रेल दुर्घटना होती थी रेल मंत्री को इस्तीफा दे देना पड़ता था नैतिकता के आधार पर तो यहां तो लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रही है और सुविधा के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है बुजुर्गों को लेकर जो सुविधा थी उसे बंद कर दिया गया है यही नहीं मालगाड़ी धुलाई की प्राथमिकता है यात्री ट्रेन इस दौर में जिस तरीके से रद्द हुई इतिहास में कभी रद्द नहीं हुई और कहा तो यहां तक जाता है कि वंदे भारत को सफल बनाने के लिए जिस तरीके से यात्री ट्रेनों को रद्द किया गया ताकि गरीब व्यक्ति ज्यादा पैसा देकर वंदे भारत में सफर करें वह भी मोदी सत्ता के आपदा में अवसर को चिन्हा करने की चर्चा है तब दूसरी तस्वीर नीतीश कुमार की है नीतीश कुमार के राज में किस तरीके से पुल पुलिए ढह रहे हैं गिर रहे हैं लगातार लेकिन कोई यह नहीं कहेगा कि नीतीश सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त है आप कहेंगे कि नीतीश स सरकार का भाजपा से क्या लेना देना लेकिन हकीकत तो यह है कि नीतीश सरकार यदि आज बिहार में काबिज है तो उसकी वजह भारतीय जनता पार्टी है और तीसरे नंबर पर जो तस्वीरें वायरल हो रही है वह अश्विनी वैन की है रेल मंत्री की लगातार रेल दुर्घटनाएं हो रही हैं तब सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार पेपर लीक रेल दुर्घटना और पूल पलियो के मामले में रिकॉर्ड बना चुकी है !

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https://youtu.be/fzPeVaS5KH4?si=Di_J6f4C2z9ocJLU

बुधवार, 15 अप्रैल 2026

महादेव सट्टा से जुड़े नेता-अफ़सरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

महादेव सट्टा से जुड़े नेता-अफ़सरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

 महादेव सट्टा  को लेकर विष्णुदेव साय की सरकार क्या जनता से जो वादे किए थे मोदी ने जो गारंटी दी थी क्या उससे इतर काम हो रहा है क्या इस मामले में लिप्त अपराधियों को बचाया जा रहा है, केवल छोटी मछलियों को ही पकड़ा जा रहा है क्या वाशिंग मशीन बन चुकी है इस मामले को लेकर विष्णु देव साय सरकार पर यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे क्योंकि जिस तरीके से एसीबी और ईओडब्ल्यू ने चालान पेश किया है वह कम चौकाने वाला नहीं है अब तक राज्य में और राज्य से बाहर 300 से अधिक गिरफ्तारी हो चुकी कई व्यापारी वर्ग के लोग भी इस मामले में गिरफ्तार होकर जेल की सलाखों में है सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले को लेकर ईडी ने जो सवाल उठाए थे या ईडी ने जो दावा किया था ईओडब्ल्यू और एसीसीबी की टीम वैसा कुछ नहीं कर पा रही है तो क्या बड़े अफसरों और राजनेताओं को बचा लिया गया है यह बेहद ही महत्त्वपूर्ण सवाल क्योंकि इस मामले में जिस तरह के बड़े अधिकारियों पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों के नाम खुलकर सामने आए थे केवल सिपाही हवालदार जैसों पर कार्रवाई की गई जो पैसे इधर से उधर पहुंचाते थे लेकिन जिनका प्रमुख संरक्षण था इस पूरे मामले में वे अफसर क्या बचा लिए गए हैं क्या उन्हें फिर से मलाईदार पदों पर बिठाया जा चुका है या क्या उन अफसरों से जो सेटिंग पूर्ववर्ती सरकार की बताई जा रही थी उस तरह की सेटिंग वर्तमान सरकार ने कर ली है प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा असम दौरे को लेकर सवालों के घेरे में है इस पर हम फिर कभी विस्तार से बताएंगे कि असम दौरे का पूरा खेल क्या है लेकिन उससे पहले हम बता देते हैं कि महादेव सट्टा प में जिस तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले को भी निशाने पर लिया गया था वर्मा बघेल कई तरह के दावे किए गए थे और पूरे विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी इस मामले को जोर शोर से उठाती रही है लेकिन सरकार बने सात आठ माह हो गए अभी तक कोई भी बड़े अधिकारी घेरे में नहीं आए और ना राजनेता ही घेरे में आए यानी क्या सेटिंग हो चुकी है क्या जिस तरीके से आरोप लगे थे पूर्ववर्ती सरकार को करोड़ों रुपए मिलने के क्या वर्तमान सरकार में बैठे कुछ लोगों को यह राशि मिल रही है इसलिए वे खामोश है हालांकि दावा तो इस बात का किया गया था कि महादेव सट्टा ए पर प्रतिबंध लगा दिया गया लेकिन सट्टा अभी भी चल रहा है अभी भी पुलिस कारवाही कर रही है एसीबी भी छापेमारी की कारवाही कर रही है लेकिन इन सारे मामले से क्यों अफसरों को बचा लिया गया है कई अफसर थे रायपुर में भी पदस्थ अफसरों के नाम थे तो दुर्ग में भी पदस्थ अफसरों के नाम थे और यह सारे अफसर आईपीएस है कहा तो यहां तक जा रहा है कि यदि कोयला घोटाला शराब घोटाला और महादेव सट्टा एप को लेकर ईडी की कारवाही को देखा जाए तो उसने केवल आईएएस पर ही कारवाई की है आईपीएस लाबी को पूरी तरीके से छोड़ दिया गया जबकि नाम कई बड़े बड़े थे जिनसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था उसमें दीपांशु काबरा जैसे अधिकारी भी थे तो भोजराज पटेल और पारुल माथुर जैसे आईपीएस लोगों के भी नाम थे लेकिन जब चालान पेश किया महादेव सट्टा को लेकर एसीबी और डब्लू ने तो हैरान कर देने वाली बात यह थी कि ईडी ने जिन अफसरों पर संदेह व्यक्त किया था उन अफसरों पर भी ना तो किसी तरह की पूछता हुई ना किसी तरह की कार्रवाई हुई जिन राजनेताओं के नाम लिए गए थे पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले को ही घेरे में लिया गया था कई बड़े-बड़े नाम थे उसमें पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकारों के भी नाम थे लेकिन अब क्या यह कारवाई केवल छोटी मछलियों तक ही सिमट गई है हम आपको विस्तार से बताएंगे हमारी टीम पूरी लगी हुई है कि अब महादेव सट्टा प को लेकर विष्णुदेव साय सरकार की भूमिका क्या है और गृह मंत्री विजय शर्मा किस तरीके का खेल खेल रहे हैं !

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https://youtu.be/A-Q6cNns0xw?si=RUwo50AtZXGSslBV

मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था

जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था 


 अपनी पीठ थपथपा में लगी छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साहे सरकार कई तरह के ऐसे फरमान जारी करने लगी है जिसे लेकर चर्चा गर्म है ऐसा ही एक फरमान शिक्षा विभाग में भी जारी किया लगातार शिक्षा को लेकर और उसकी गुणवत्ता को लेकर जरजर स्कूल भवन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं उन सवालों से ध्यान भटकाने के लिए विष्णुदेव साय सरकार ने कई तरह के फरमान जारी किए हैं जिसमें से एक फरमान तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस का भी है जिसे लेकर अभी कई तरह के सवाल उठ ही रहे थे कि फिर एक बार नया फरमान जारी कर दिया गया है कि निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी पीटीएम होगी यानी पालक टीचर्स मीटिंग हो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के हाई कोर्ट ने स्वतः संजन लेकर शिक्षा सचिव को जवाब देने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जो जरजर स्कूल भवन है जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं वैसे स्कूलों के लिए सरकार क्या कर रही है लगातार छोटी-मोटी घटनाएं सामने आई है अभी तक गंभीर घटनाएं नहीं हुई कहीं छज्ज टूटकर बच्चों के ऊपर गिर रहा है तो कहीं रसोई में बच्चे जल रहे हैं और स्कूलों की साफ सफाई में बच्चों को नौकरों की तरह घसीटा जा रहा है ऐसे कई सवाल यही नहीं इन बारिश के दिनों में तो जिस तरह की तस्वीर सामने आई है वह छत्तीसगढ़ सरकार के मुंह पर काली पोतने वाली है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा किस तरीके से नौनिहालों को स्कूल जाने में संघर्ष करना पड़ रहा है उफनती नदी पार करनी पड़ रही है तो कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है ऐसी परिस्थिति में पीटीएम का आयोजन या पालक टीचर मीटिंग को लेकर दिशा निर्देश क्या साय सरकार का बेत का फरमान नहीं यदि आप प्रदेश की स्थिति देखेंगे तो चौक जाएंगे छत्तीसगढ़ की सरकार अपने तरफ से कुछ भी नहीं करना चाहती कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा क्योंकि पिछली सरकार ने सरकारी स्कूलों को सुधारने के लिए आत्मानंद स्कूल के नाम से एक योजना शुरू की थी जिसमें बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही थी स्कूल चकाचक किए जा रहे बैठक व्यवस्था जोरदार ढंग से बिल्कुल आधुनिकरण किए जा रहे थे उन स्कूलों को पीएम श्री योजना में शामिल कर लिया गया यानी वाहवाही लूटने का कोई मौका यह सरकार छोड़ना नहीं चाहती प्रदेश की यदि स्कूलों की बात किया जाए तो खुद विष्णुदेव साय सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश के 300 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है हज से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो एक शिक्षक के भरोसे हैं और शिक्षा विभाग में ही 1954 पद रिक्त है यह स्कूली शिक्षा विभाग का हाल है और हायर एजुकेशन में याने कॉलेज की शिक्षा उच्च शिक्षा में तो और भी बुरी स्थिति है अतिथि शिक्षकों के माध्यम से ले देकर पढ़ाई हो रही है और शोध कार्य विद्यालयों में एक ढंग से बंद है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा और ऐसे में शिक्षा विभाग का यह फरमान किस तरीके से ला हालांकि इसे लेकर लंबी चौड़ी योजनाएं बनाई गई है 12 बिंदु पर यह मीटिंग होगी जिसमें पालकों के सवालों का जवाब शिक्षक देंगे या उनसे बेहतर जो उपाय हो सकते हैं वह सलाह भी लेंगे और सबसे बड़ी बात है फरमान जारी होने के पाच छ दिन बाद यानी 6 अगस्त से इस योजना को अमली जामा पहनाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं कि सरकार का यह कहना है कि जो स्कूलों को लेकर जो योजना बनी है उनकी जानकारी पालकों को दी जाएगी जिससे पालक स्कूल विभाग के निर्देश से जो उनकी जो योजना है उसका फायदा उठा सकते हैं लेकिन आप सोचिए कि जड़ जर भवन का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है बच्चे कैसे स्कूल जा रहे हैं इसका भी कोई ठौर ठिकाना नहीं है यानी ट्रैफिक यातायात की अलग समस्या है किस तरीके से आए दिन यह सुनने में मिलता है कि स्कूली बच्चे स्कूल जाते समय या स्कूल से घर लौटते समय सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं किस तरीके से स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और ऐसी परिस्थिति में निजी स्कूलों की तर्ज पर यह इस फरमान को लेकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मचाए देखना है कि पीठ थपथपा नहीं वाली इस योजना कितने दिनों तक चलती है l


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https://youtu.be/l8is3ihBSSM?si=fTwitiUbdWmvRE_T