शुक्रवार, 27 मार्च 2026

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम 


 क्या मोदी सत्ता ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को भ्रष्टाचार करने की खुले आम छूट दे रखी है लगातार खबर आ रही है चाहे रेलवे क्यों ना हो वंदे भारत एक्सप्रेस की छत से पानी टपकने की खबर आ रही है तो दूसरे तरफ पूलों के लगातार ढहने की खबर दिल्ली के प्रगति मैदान की भी तो खबर हैं तो दूसरी तरफ जिस तरीके से  कैग ने रिपोर्ट दी थी चाहे आयुष्मान भारत कार्ड योजना हो या फिर ा स करोड़ रुपए में एक किलोमीटर सड़क निर्माण की बात हो सब तरफ भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है लेकिन अब जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से खबर रही है वह भी हैरान कर देने वाली रायपुर स्थित एम्स  अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान  वहां से जो टेंडर घोटाले की खबर आ रही है वह हैरान कर देने वाली है कि किस तरीके से दिल्ली से आए स्टाफ ने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए किस किस तरीके का खेल नहीं खेला सब कुछ कागजों में कैद है और आरटीआई के माध्यम से और भी जानकारी इकट्ठी की जा रही है लेकिन जो प्रारंभिक जानकारी मिली है वह साफ संकेत दे रही है कि चहते ठेकेदार को टेंडर देने ठेका देने मनमाने ढंग से घपले बाजी की गई है घोटाले की गई है 

इस घोटाले को लेकर जो खबर आ रही है व हैरान कर देने वाली इसलिए भी है क्योंकि रायपुर एम्स जो कई कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के आगमन के कार्यक्रम भी होते हैं मंत्रियों के कार्यक्रम होते इसके लिए इवेंट कंपनियों को काम दिया जाता है ऐसा ही एक काम का टेंडर निकला था जिसे 30 मई को खोला जाना था इस टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया था जिसम से एक कंपनी को यह टेंडर मिल गया था लेकिन वह कंपनी चहेता कंपनी नहीं था इसलिए यह टेंडर रदद कर दिया गया कि इन कंपलीट फाइनेंस की होने की वजह से 

जबकि इसे जिस तरह के रेट  आए थे या जो ए कंपनी थी व य 30 लाख में काम करने को तैयार थी तो जो दूसरी कंपनिया थी वह कोई 40 लाख तो कोई 60 लाख तक का टेंडर भरा था ऐसे में उस फाइनेंशियल कीट के जो खाने छूटे हुए थे उसे भरकर आसानी से टेंडर जारी किया जा सकता था लेकिन वर्क आर्डर नहीं दिया गया और तमाम टेंडर निरस्त करके फिर से टेंडर जारी कर दिया गया यह पूरा ऑनलाइन प्रक्रिया है लेकिन किस तरीके से इसमें भी खेल होता है यह समझिए जब दूसरी बार टेंडर जारी हुआ और 26 तारीख को उसे 26 जून को इसे खोला जाना था तब छ कंपनियो ने इस में हिस्सा लिया कंपने प्रजेंटेशन नहीं दिया तो उनका फम रिजेक्ट कर दिया गया अब सिर्फ दो कंपनिया बची थी एक री दूसरा और इन दोनों कंपनियों का टेंडर खोला जाना था और जिसका एल वन होता उसे टेंडर दे दिया जाना था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से  टेंडर खोला ही नहीं क्योंकि  टेंडर देना था यह शिकायत भी हुई है क्योंकि जिस बना पर मेरी टेडर किया नहीं खोला गया है व पहले जब टेंडर हुआ था उसम प्रेजेंटेशन व दे चुके थे और यह कर दिया गया को की आपका जो प्रेजेंटेशन है अप टू द मार्क पर नहीं है जबक इसी प्रेजेंटेशन पर पहली बार टेंडर उसे मिल चुका था जिसे निरस्त किया गया था ऐसी परिस्थिति में जब हमारी टीम ने इस शिकायत पर जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उपलब्ध नहीं थे लेकिन जो जानकारी मिली है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है क्योंकि टेंडर की शर्तो में एक महत्वपूर्ण शर्त यह था कि टर्न ओवर एक करोड़  होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को यह टेंडर जारी कर दिया गया उसका टर्न ओवर 50 लाख से भी ज्यादा नहीं है और कारण यह बताया गया क्योंकि वह  एमएसएनई कंपनी है इसलिए उसे छूट दी जा रही है और यही बात यदि टेंडर जारी करते समय कर दी जाती कि एमएसएमई  सेक्टर वालो को छूट दी जाएगी तो यकीन मानिए कि कई लोग स्टैंडर में भाग लेते हैं यानी एक करोड़ टन की शर्त लगाकर एमएसए के कई कंपनियों को रोक दिया गया और एमएस की छूट के नाम पर अपने चहते कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में जबरदस्त ढंग से खेल हुआ है और यही नहीं अब तो जो कंपनिया इवेंट का काम करती है फ्लावर लगाने का टेंट लगाने का लगाने का व कंपनिया आशंकित इसलिए भी है क्योंकि एम्स में हर साल करोड़ अरब रुपए का काम निकलता है तो एक शुरुआत थी इस साल की उसमें ही यदि इस तरीके की घपले बाजी हो रही है तो आने वाले दिनों में क्या कुछ होगा कहना मुश्किल है देखना है कि इस मामले को लेकर अब किस तरीके की कारवाई होगी क्योंकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ पार्टी इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने वाली है !

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https://youtu.be/uXzRZRUhjLw?si=_zis7qUm9KlXBTBE

प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था

 प्रदेश में क्यो बदतर हो रही क़ानून व्यवस्था 


क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार पूरी तरीके से फेल हो चुकी है और उसके सामने इस प्रदेश के कानून व्यवस्था को संभालने का कोई रास्ता नहीं बचा है या फिर प्रदेश की सरकार को किसानों की भी चिंता नहीं है , हालत बदतर होते जा रहा है महंगाई को जमा खोर ने और बढ़ा दिया है जमकर जमाखोरी हो रही है छत्तीसगढ़ में और बेरोजगारी का यह आलम है कि एक वैकेंसी निकलती है और लाखों बच्चे टूट पड़ते हैं उसकी नौकरी पाने के लिए तब ऐसी परिस्थिति में डबल इंजन की सरकार कर क्या रही है यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि अपनी पूरी कैबिनेट के साथ विष्णु देव साय सरकार  रामलला के दर्शन करने गए थे, वे अपने साथ बेर भी ले गए हैं सबरी का बेर बहुत चर्चित रहा है पूरे राम कथा में उस बेर को लेकर गए हैं शिवरी नारायण से तो विष्णु भोग चाव यह भी छत्तीसगढ़ की एक अपनी पहचान है कोंसा वस्त्र कारी लड्डू अनरसा और सीताफल सब कुछ लेकर गए थे,रामलला को खुश करने के लिए लेकिन क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि जब वह रामलला के दर्शन की रवानगी कर रही थी तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की राजधानी में सरेआम गोलीबारी हो रही थी हवाई फायर किए गए हैं कार को गोली लगी है तब कानून व्यवस्था की स्थिति किस हद तक बदतर है और किस तरीके से लोगों में पुलिस का डर खत्म हो गया है यह लगातार देखने को मिल रहा है लगातार हत्याएं हो रही है सवाल सिर्फ बलौदा बाजार के उस घटना का नहीं है जिसमें पुलिस कप्तान के कार्यालय को जला दिया गया और कलेक्टोरेट में तोड़फोड़ किया गया उसके बाद पुलिस पकड़ धकड़ कर रही है कहा जा रहा है कि जो लोग इस घटना में शामिल नहीं थे उनकी भी गिरफ्तारी हो रही है भीम आर्मी भी निशाने में है तो कांग्रेस के नेता भी निशाने में है लेकिन यदि प्रदेश भर में लगातार हत्याएं हो रही है याद कीजिए कि किस तरीके से सरेआम एक लड़की को बीच बाजार में चाकू मार दिया गया था सरगुजा क्षेत्र में तो दूसरी तरफ जगदलपुर में जो घटना हुई है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है सरकार भले ही दुनिया भर का दावा कर ले लेकिन महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों का जीवन नार की बना दिया और नशे के कारोबार में जिस तरीके से सरकार भी लिप्त हो गई है जिस तरीके से अवैध शराब बिक रहे हैं जिस तरीके से नशे की गोलियां राजधानी के कई क्षेत्रों में बिक रही है उसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार केवल पैसा पैसा पैसा कर रही है क्योंकि वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भी साफ कह दिया है कि योजनाओं में पैसे खर्च हो रहे हैं रोज बेरोजगार युवक पकौड़ा तलने यह सीधे नहीं कहा है लेकिन इसी तरह का आशा है उन्होंने साफ तौर पर कह दिया कि वैकेंसी नहीं निकलेगी तब ऐसी परिस्थिति में जब अपराध पढ़ रहे हैं राजधानी में ही लगातार नशे के कारोबार फल फूल रहे हैं जुआ सट्टा का जोर है और खुलेआम गोलीबारी हो रही हो तब सवाल यह है कि आखिर बस्तर में जो जगदलपुर में जो दोहरा हत्याकांड हुआ उसका सच क्या है क्या उसके पीछे महंगाई बड़ी वजह है कहा भी जा रहा है कि जिस युवक ने अपने मां और बड़े भाई की हत्या की वह पूरी तरीके से कर्ज में डूबा था उनके घर में आए दिन पैसे को लेकर विवाद होता था और घर चलाना मुश्किल होता जा रहा था एक छोटी सी किराने की दुकान थी आप सोच रहे होंगे कि अपनी मां और भाई की हत्या करते वक्त उस हत्यारे भाई का हाथ क्या नहीं खापा होगा लेकिन क्या महंगाई और कर्जे का बोझ इतना बड़ा हो चला था कि उसके हाथ अपनी मां और भाई के गर्दन तक जा पहुंचा सवाल सवाल आप इस दौर में कुछ भी उठा ले लेकिन यदि सब कुछ धर्म के आधार पर ही राजनीति को हका जाएगा तो फिर आम आदमी की तकलीफ कैसे दूर होगी यह सबसे बड़ा सवाल है जिस तरीके से तेली बांधा क्षेत्र राजधानी के महत्त्वपूर्ण क्षेत्र है भीड़भाड़ वाले इलाके में सरेआम कोयला कारोबारी पर गोली दागी गई हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ लेकिन क्या यह कानून व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा नहीं करता है आप खुद सोचिए कि एक तरफ कानून व्यवस्था की स्थिति बदतर है किसानों की हालत खराब है और दूसरी तरफ यदि सत्ता सरकारी खर्चे से यदि पूरे कैबिनेट के साथ राम लला का दर्शन करने जा रहे हैं तो यह किस तरह की राजनीति की जा रही है आप खुद सोचिए !

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https://youtu.be/C42uGXjDaB4?si=pib-0Tiw-v1lahmD

बुधवार, 25 मार्च 2026

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग 


 छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार के मंत्रियों की करतूत एकएक करके बाहर आने लगी है हमने आपको बताया कि किस तरीके से सीजीपीएससी घोटाले में ओपी चौधरी की भूमिका सामने आई है तो शिक्षा विभाग के घोटाले को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं ट्रांसफर पोस्टिंग पदोन्नति जिसमें देखिए आप गड़बड़ छाला है लेकिन आज हम बात कर रहे हैं कृषि विभाग का क्योंकि अब मानसून छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है और यहां के किसान खेती किसानी में जूट गए हैं धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की अपनी अहमियत है कृषि को लेकर और विभाग को लेकर शायद यही वजह है कि एक समय में डॉक्टर रमन सिंह ने इसके लिए अलग से बजट तक की बात कर दी थी लेकिन अब इस दौर में किस तरीके का खेल यहां चल रहा है कहना मुश्किल है कृषि विभाग आखिर है किसके हवाले कहने को तो इसके मंत्री राम विचार नेताम को बनाया गया है लेकिन राम विचार नेता काम को लेकर कई तरह के सवाल हमेशा ही उठते रहे हैं खासकर इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले में राम विचार ताम का नाम सामने आया था नारको टेस्ट की कथित सीडी में जिस तरीके से पैसे की लेनदेन को लेकर बातें सामने आई थी उसमें राम विचार नेताम का नाम भी सामने था इसके अलावा भी उनके गृह मंत्री रहते जब रमन सरकार में वे गृह मंत्री थे तब भी उन के खेल को लेकर सवाल उठते रहे लेकिन इस बार विष्णु देव साय की सरकार ने उन्हें कृषि विभाग दिया है सबसे बड़ा बजट वाला विभाग कहा जाए तो गलत नहीं होगा और इस विभाग में किसका खेल चल रहा है यह विभाग आखिर चला कौन रहा है क्या कृषि मंत्री राम विचार नेताम चला रहे हैं या आईएएस जो बैठे हैं भुनेश यादव वे चला रहे हैं राजस्थान से आते हैं भुनेश यादव और उनकी एक अपनी कहानी है कि किस तरीके से वे बिजनेस करते आईएएस बने दूसरे अटें में उन्होंने पास किया था लेकिन सत्ता बदलते हु उन्हें एपीओ में रख दिया गया था कोई विभाग नहीं दिया गया था फिर कई तरह के विभाग मिले भूपेश बघेल सरकार के नाक के बाल भी कहे जाते थे भूने यादव हालांकि उन पर अभी तक घपले घोटाले के कोई चार्ज नहीं लगे हैं लेकिन जिस तरीके का रवैया चल रहा है कृषि विभाग में उसमें भुनेश यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है तब क्या कोई राकेश अग्रवाल नाम का व्यक्ति चला रहा है कृषि यह बेहद ही गंभीर सवाल है क्योंकि जो मीडिया रिपोर्ट आ रही है उसमें सीधे अग्रवाल का नाम तो सामने नहीं आ रहा है हमारी टीम ने जब पता किया कि मीडिया रिपोर्ट में जिस लक्ष्मी पुत्र की बात की जा रही है या जिस दलाल की बात की जा रही है वह है कौन तब उसमें कुछ नाम सामने आए और सबसे बड़े नाम जो सामने आए वह राकेश अग्रवाल का नाम है तो क्या कृषि विभाग को राकेश अग्रवाल के सुपुर्द कर दिया गया यह बेहद गंभीर सवाल हालांकि हमने राकेश अग्रवाल से बात करने की कोशिश की लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे इस पूरे मामले को लेकर लेकिन कहा जा रहा है कि पूरा दफ्तर वहीं से चल रहा है तब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बीच निगम में चल क्या रहा है टेंडर को लेकर गड़बड़ियों की खबर तो लगातार आ रही है यही नहीं किसानों को दिए जाने वाली योजनाओं में भी जो ठेका दिया जाता है उसे लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि किसान त्रस्त है नकली बीज नकली खाद का मामला तो पहले भी उठता रहा है लेकिन सप्लाई के काम में जिस तरह की भर्रा साही की खबरें सामने आ रही है या मीडिया रिपोर्ट सामने आ रहे हैं कि किस तरीके का खेल हो रहा है वहां पहले कमीशन दो और कमीशन भी कितना 40 फीदी कमी की बात सामने आ रही है जो प्रदेश में किसी भी विभाग में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है हालांकि कमीशन के मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग हो या नगर निगम कई तरह के विभाग जो है वोह हमेशा ही चर्चा में रहे हैं पीएचई में जल जीवन मिशन को लेकर घोटाले की लगातार खबरें आ रही है कुछ इंजीनियरों को सस्पेंड भी किया गया हम इस पर विस्तार से फिर कभी चर्चा करेंगे लेकिन कृषि विभाग है किसके पास यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि जो खबरें आ रही हैं वह हैरान कर देने वाली है कि आखिर राम विचार नेताओ ने चुप्पी क्यों ओढ ली है या इन खबरों को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है यह भी समझ में नहीं आ रहा है बीज निगम से लेकर उद्यान की विभाग तक गड़बड़ झाला की जो खबरें आ रही है वह हैरान कर देने वाली है हम हमारे रिपोर्टर्स लगे हुए हैं इस पूरे मामले की पता साझी करने के लिए देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है !

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https://youtu.be/36X_nwujrko?si=IvoMnqz5Ift3g1Am

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी 


 डबल इंजन की सरकार बने अभी दो साल ही पूरे  हुए हैं और पार्टी के विधायकों और कई पदाधिकारियों पर वसूली के आरोप लगने लगे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में अभी तक ना तो संगठन कोई कारवाही कर रही है ना नोटिस दी है और ना ही सरकार की तरफ से ही कोई बयान आया है मामला सिर्फ शराब को लेकर नहीं है या अहाता को लेकर नहीं है या फिर कोयला घोटाले को लेकर नहीं है सवाल तो अब सीधे-सीधे मामले को दबाने के लिए वसूली का है और यह मामला कहीं और से नहीं साझा विधानसभा क्षेत्र के जो विधा पहली बार बने हैं गरीब विधायक के रूप में प्रचारित प्रसारित किया गया उनके द्वारा एक मामले को दबाने के लिए दो लाख रुपए वसूलने की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई है और इस मामले के सामने आते ही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमकर हमला बोला है सरकार पर और कहा जा रहा है कि कई विधायकों के नाम है पंडरिया की विधायक भावना बोहरा पर तो तीन ट्रक खादी उतरवा लेने का आरोप लगाया गया इसके अलावा भी कई तरह के आरोप है भावना बोहरा को डॉक्टर रमन सिंह की रिश्तेदार बताई जाती है और पहली बार वे भी विधायक बनी है इसके अलावा भैयालाल राजवाड़े को लेकर स्वास्थ्य विभाग में वसूली की शिकायत भी किए जाने की चर्चा है तो कई पदाधिकारी हैं संगठन से जुड़े उनके खिलाफ भी इसी तरह की वसूली बाजी के मामले सामने आने लगे हैं मामला सिर्फ वसूली का नहीं है मामला तो धमकी चमकी का भी है याद होगा आपको कि किस तरीके से शुरुआती दौर में ही महतारी वंदन योजना का लाभ दिलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने एक महिला को भला फुसलाकर बलात्कार तक कर दिया था रायगढ़ के जिला अध्यक्ष के खिलाफ किस तरह के मामले थे नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के पुत्र के खिलाफ किस तरह के मामले थे किसी से छिपा नहीं है लेकिन अब जिस तरीके से सत्ता में आने के बाद विधायकों के और संगठन के पदाधिकारियों पर आरोप लगने लगे हैं वसूली के वह हैरानी की बात तो है ही चिंता की भी बात क्योंकि मामला कई सारे हैं कहा जा रहा है सरगुजा क्षेत्र के दो विधायकों के खिलाफ शिकायत है तो बस्तर क्षेत्र के एक विधायक के खिलाफ शिकायत है यही नहीं रायपुर जिले के एक विधायक के खिलाफ तो उद्योगों में वसूली करने का मामला सामने आया है हम विस्तार से इन सारी घटनाओं को आपके सामने रखेंगे लेकिन एक बात तो हम बता देते हैं कि जिस तरीके से नव निर्वाचित विधायकों में आधा दर्जन विधायकों के नाम सामने आए हैं संगठन के भी लगभग चार पदाधिकारियों के नाम सामने आए हैं प्रवक्ता है एक उनके बारे में तो सर्व विधित है कहा जाता है कि उनके वसूली बाजी की वजह से पार्टी के नेता भी परेशान रहे हैं वे हर बार टिकट मांगने पहुंच जाते हैं महापौर की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं कभी तो कभी विधायक की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं लेकिन उनके खिलाफ जो शिकायतें हैं उनके इसी रवैया की वजह से अभी तक उन्हें केवल छोटे-मोटे चुनाव में ही टिकट दी गई है बड़े चुनाव से वंचित रखा गया है तो दूसरी तरफ ईश्वर साहू का मामला बड़ा होता जा रहा है और कहा जा रहा है कि इसे लेकर मामला विधानसभा में भी उठाने की तैयारी हालांकि ईश्वर साहू ने इस मामले को लेकर सफाई दी है लेकिन विधानसभा में य मामला तय है उठना और विधानसभा में तो भावना बोहरा के खिलाफ भी मामला उठाए जाने की चर्चा है कहा जा रहा है कि वहां जो पराजित प्रत्याशी है नीलकंठ वर्मा उन्होंने पिछले दिनों प्रदर्शन भी किया भावना बोरा के रहने को लेकर और खाद वाले मामले को लेकर तब ऐसी परिस्थिति में विष्णु देव साय सरकार या किरण देव जो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष है वे क्या करते हैं हालांकि यह भी कहा जा रहा है किरण देव अब पद पर बने रहना नहीं चाहते हैं वे मंत्री बनना चाहते हैं लेकिन यह भाजपा है नया भाजपा है जहां सिर्फ मोदी शाह की चलती है और वे चाहेंगे वही मंत्री बनेंगे तब ऐसी परिस्थिति में कुछ होना!

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https://youtu.be/FDEL7LjZ7V8?si=2RH0ZsmkQ9MDZQeM

मंगलवार, 24 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी

 छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी 


नाम बदलने में माहिर विष्णु देव साय की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार क्या अब छत्तीसगढ़ की पहचान भी मिटा देना चाहती है कई योजनाओं का नाम उन्होंने आते ही बदल दिया था जो भूपेश सरकार ने रखी थी और और अब जो काम किया जा रहा वह बेहद ही चौकाने वाला है यह चौकाने वाला इसलिए है क्योंकि इस योजना को भूपेश बघेल जब मुख्यमंत्री थे तब भी लाया गया था लेकिन मामला सिर्फ इसलिए रुका था क्योंकि नाम का संकट था केंद्र सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ हाट का नाम बदल दिया जाए और उसका नाम पीएम एकता माल कर दिया जाए और उसमें दूसरे राज्यों के हस्त शिल्प उत्पादकों को भी दुकान दिया जाए दूसरे राज्यों के हस्तशिल्प  को दुकान तो दिया ही जा रहा था लेकिन जो रायपुर की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ हाट जमीन से जुड़ा हुआ नाम है उसे आखिर विष्णुदेव साय क्यों बदल देना चाहती है क्या केंद्र की योजना से नाम भी बदलना जरूरी है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके का खेल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालन मंडल के कंधे पर रखकर किया गया है या कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया है वह स्वयं को बचाने के लिए भी है कहा जाए तो गलत नहीं हो अभी निगम मंडल आयोग सब में नियुक्तियां होनी है उससे पहले छत्तीसगढ़ हाट का नाम पीएम एकता माल रख दिया जाएगा या रख देने का प्रस्ताव पारित हो गया और इसको तोड़कर फिर से नए सीरे से बनाने की बात की जा रही है बिल्कुल बनाना चाहिए यदि कहीं कोई कमी है तो नए सीरे से बनाया जा सकता है लेकिन नाम बदलने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या डबल इंजन की सरकार सब कुछ बदल देगी और छत्तीसगढ़ की पहचान को भी मिटा देगी छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित महत्त्वपूर्ण जगह में स्थित इस हाट का नाम लोगों को जोड़ता है एक दूसरे से तब ऐसी परिस्थिति में कल आरडीए के संचालन मंडल की बैठक में जो छत्तीसगढ़ हाट की जगह पीएम एकता माल बनाने की बात कही जा रही है प्रस्ताव पारित किया गया है वह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा छत्तीसगढ़ हाट की पहचान यहां विभिन्न हस्त शिल्प और दूसरे उत्पाद है ग्रामीण उत्पाद उसको लेकर बनी हुई है और लोग जाते हैं यहां और यहां ऐसा नहीं है कि केवल गढ़ के लोग ही स्टाल लगाते हैं बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोगों का भी स्टाल लगता है तब नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी यह सबसे बड़ा सवाल सिटी सेंटर माल के पीछे छत्तीसगढ़ हाट बाजार को तोड़कर माल बनाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी यह केंद्र सरकार की योजना है कांग्रेस सरकार के दौरान यह योजना सिर्फ नाम को लेकर भूपेश सरकार अड़ी हुई थी कि वे पीएम एकता माल नाम नहीं रख सकते छत्तीसगढ़ हाट इस राजधानी की पहचान बन चुकी है वह नाम नहीं बदला जाएगा आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव तथा प्राधिकरण की अध्यक्ष आर संगीता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एकता माल निर्माण के लिए निविदा दर की स्वीकृति कर ली गई है और इसको अनुमोदित भी कर लिया गया क्यों हड़बड़ी थी आखिर अभी आरडीए का अध्यक्ष बनाना आरडीए का अध्यक्ष बनना है उसके लिए मारामारी हो रही है इस विभाग के मंत्री ओपी चौधरी हैं जो रायगढ़ से विधायक हैं और प्रदेश सरकार में दमदार माने जाते हैं और यह भी माने जाते हैं कि वे अमित शाह के निर्देशन पर ही सब काम करते हैं तो क्या यह काम भी अमित शाह पसंद नहीं है यह नाम छत्तीसगढ़ इसलिए नाम बदला जा रहा है कई सवाल उठाए जा रहे हैं छत्तीसगढ़ हाट का सुपर बिल्ड अप एरिया जो है वह 73 392 वर्ग फुट है तथा निर्माण लागत करीब 1 स लाख रुपए होनी है एकता माल बनाने का जिम्मा मेसर्स दीपक पांडे डी एनवी प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है इसका निर्माण लग दो साल के भीतर किया जाएगा यह अनुमोदित कर दिया गया प्रस्ताव पारित गया इतनी बड़ी राशि को संचालक मंडल ने एक झटके में पास कर दिया और साय सरकार के निर्देश पर ही किया गया है कहा जाए तो गलत नहीं होगा या ओपी चौधरी के निर्देश पर यह हुआ है छत्तीसगढ़ की अपनी पहचान है इस पहचान को लेकर लोगों ने कितना संघर्ष किया है और आज राजधानी के उस छत्तीसगढ़ हाट जो लोगों की जन भावना से जुड़ा हुआ है उसका नाम बदल दिया जाएगा है ना हैरानी की बात देखना है कि इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधि किस तरह की आवाज उठाते हैं और विष्णु देव साय सरकार आगे किस किस छत्तीसगढ़ नाम से जुड़े योजनाओं का नाम केंद्र सरकार के निर्देश पर बदलती है!

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https://youtu.be/1WB6tIW0P9w?si=Igq7Hy6KcEMhD03u

रविवार, 22 मार्च 2026

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार 


 छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही अडानी यानी गौतम अडानी की कंपनियों के काम में तेजी आ गई है एक तरफ हसदेव अरण्य को धड़ल्ले से काटा जा रहा है पेड़ काटने की अनुमति दी जा रही है वहां पर्यावरण को लेकर जिस तरह के सवाल उसकी अनदेखी की जा रही है तो दूसरी तरफ तिल्दा राजधानी रायपुर से लगे क्षेत्र में अडानी पावर के विस्तार को लेकर जन सुनवाई कल हुई इस जन सुनवाई के विरोध में गांव वाले एक राय होकर पहले ही सरकार को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके थे कि जन सुनवाई रोक दी जाए पहले ही जीएमआर पावर कंपनी ने जो द किया था गांव वालों से उसे पूरा नहीं किया गया और गांव की आबोहवा अलग खराब हो रही है ऐसे में विस्तार के लिए जो 885 एकड़ जमीन चाहिए वे नहीं देंगे लेकिन यह विष्णुदेव साय की सरकार है यह डबल इंजन की सरकार है और कहा जा रहा है कि सरकार तो पूरी तरीके से अदानी की गोद में जा बैठे यानी जैसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र के लिए क वही सब कुछ विष्णु देव साय की सरकार करेगी और यही वजह है कि जब ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा था कि यह जन सुनवाई टाल दी जाए स्थगित कर दी जाए उसकी अनदेखी करके कल जन सुनवाई की गई लदा विकासखंड के तहत रायखेड़ा गांव में स्थापित अडानी पावर लिमिटेड के पावर ग्रेड 370 मेगावाट प्लान के विस्तार हेतु प्रस्तावित 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति हेतु जन सुनवाई थी और प्रचारित प्रसारित यह किया जा रहा है कि जन सुनवाई में लोगों ने समर्थन दिया है लेकिन हकीकत तो यह है कि कल जमकर विवाद हुआ है विरोध हुआ है कांग्रेस ही नहीं दूसरे दलों के नेता जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेता भी पहुंचे थे विरोध के लिए जिसमें रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ग्रामीण जिलाध्यक्ष है उधो राम वर्मा जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के मुखिया अमित बघेल सहित कई लोग यहां पहुंचे थे और इस बात का विरोध कर रहे थे कि कंपनी जमीन लेते समय तो सब वादा कर देती है लेकिन जमीन हासिल होने के बाद गांव वालों की मुसीबत बढ़ जाती ऐसी परिस्थिति में अब सवाल यह उठ रहा है कि हसदेव कितना बच पाएगा और अब रायखेड़ा क्षेत्र के लोग पर्यावरण के प्रदूषण से अपने को कैसे बचा पाएंगे किस तरीके का विरोध प्रदर्शन हुआ है या किसी से छिपा नहीं है लेकिन मीडिया में खबर छपाई जा रही है कि समर्थन में लोग खड़े हैं ऐसे में सवाल यह है कि क्या सचमुच विष्णुदेव साय की सरकार अदानी की गोद में जा बैठी और कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में फिर जमीन खरीदी की जा रही है बड़े पैमाने पर अदानी द्वारा खासकर राजधानी और बड़े शहरों के नजदीकी जमीन ताकि वहां बड़े पैमाने पर गोदाम बनाया जा सके यानी मध्य प्रदेश की तर्ज पर क्या अब एफसीआई में रखने की बजाय धान जो खरीदती है छत्तीसगढ़ की सरकार वह अदान के गोदामों में रखेगी ऐसे कई सवाल हैं हम आपको बताते रहेंगे अभी तो जन सुनवाई एक बार हुई और कितने बार करती है या इस तरीके से हसदेव अरण्य को काटे जाने को लेकर जिस फर्जी जन सुनवाई हुई है कहा जा रहा है उस तरह से क्या फर्जी जन सुनवाई करके विस्तार के लिए अनुमति दे दी जाएगी पर्यावरण की अनदेखी कर  कर दी जाएगी जिसका प्रभाव राजधानी में भी पढना तय है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है!

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https://youtu.be/xuFtq-pr7wE?si=QZR5Gr9LzmfxCniE

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़

 क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़ 


हिंदू धर्म का ठेकेदार बनने वाले लोगों को तब साप सूंघ जाता है जब इस ठेकेदार के समर्थकों में से कोई एक धर्म के साथ खिलवाड़ करता है चाहे वह संवित पात्रा का मामला हो या फिर दूसरे किसी और भारतीय जनता पार्टी के विधायक का मामला जब जब धर्म के साथ ऐसे लोग खिलवाड़ करते हैं उन्हें नजर अंदाज कर दिया जाता है और इससे भी छोटी बात पर यदि विपक्ष के नेता गिरफ्त में आ गए तो पूरे देश में भवाल मचा देते हैं उन्हें हिंदू विरोधी का तमगा देने से भी नहीं कतराते हैं यहां तक कि शंकराचार्य की अवहेलना राम मंदिर प्रांत प्रतिष्ठा समारोह में हुई तब भी कोई उन्हें कांग्रेसी बताने लगा तो कोई आलोचना करने लगा जबकि हमने बार-बार बताया कि यदि इतने सर्वोच्च गुरु किसी दूसरे धर्म के होते और बोल देते तो बवाल मज गया होता लेकिन यह दौर मोदी का दौर है यह दौर भगवान बनाने का दौर है यह दौर अवतार बताने का दौर है और बाप बनाने का और इसी चक्कर में शायद पूरी से चुनाव लड़ रहे हैं भाजपा के बड़े दिग्गज नेता माने जाते हैं संत पात्रा ने भगवान जगन्नाथ को ही मोदी का भक्त बता दिया ल लो मोदी भक्त जगन्नाथ मोदी भक्त जगन्नाथ मोद भक्त जगन्नाथ सब मोद परिवार हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका जुबान फिसल गया था लेकिन याद कीजिए कि जुबान एक बार फिसलती है बार-बार नहीं फिसलती और जुबान इन लोगों की क्यों फिसलती क्योंकि इसी संदीप पात्र ने एक समय कन्हैया कुमार से बहस के दौरान मोदी को देश का पाप भी बता दिया था उसके लिए माफी इससे पहले भी कई ऐसे मामले आए जिसके लिए कभी माफी नहीं मांगी गई और यह माफी शायद सिर्फ इसलिए मांगी गई क्योंकि वे चुनाव लड़ रहे हैं और चुनाव में इसका प्रभाव विपरीत पड़ सकता है जगन्नाथ स्वामी कलयुग के सबसे बड़े अवतार माने जाते हैं सबसे बड़े देवता माने जाते हैं सबसे प्रमुख देवता माने जाते हैं और उन्हें लेकर इस तरह से जुबान फिसल जाने की बात कहना आश्चर्य जनक है क्योंकि जो लोग यदि धर्म में 24 घंटे जुड़े हुए हैं धर्म को लेकर 24 घंटे चिंतित है तो फिर जुबान कैसे फिसल सकती है यह बड़ा सवाल आप खुद सोचिए लेकिन सवाल सिर्फ संवित पात्रा का नहीं है इस दौर में मोदी को भगवान बताने का जो खेल चला उसमें क्या स्वयं दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं थे यानी धर्म के इस पूरे खेल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी या उन हिंदूवादी संगठनों के लोग शामिल नहीं थे जिन्हें लगता है कि मोदी ही हिंदू धर्म की रक्षा कर सकते हैं और कोई दूसरा कर ही नहीं सकता और शायद यही वजह है कि कोई मंदिर बना रहा है तो कोई उन्हें विष्णु का अवतार बता रहा है और हैरान की बात तो यह है कि धर्म के इस खिलवाड़ में बीजेपी खुद शामिल है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि भगवान वेंकटेश्वर का रूप दिखाते हुए खुद बीजेपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से यह तस्वीर रिलीज की थी और क्या कुछ नहीं लिखा था नमो नमो वगैरह वगैरह आप हैरान हो जाएंगे तब भी किसी को आपत्ति नहीं हुई थी और यही बात कोई राहुल गांधी या सोनिया गांधी या और किसी को भगवान बनाकर प्रस्तुत कर दिया गया होता तो अभी तक इस देश में पता नहीं किस किस तरह के भवाल मचा दिए जाते उदाहरण कई है यदि हम आपको उदाहरण बताएंगे तो आप खुद हैरान हो जाएंगे कि धर्म के खिलवाड़ के को लेकर किस तरीके से यह लोग लगे हुए थे भारतीय जनता पार्टी के एमएलए मधुबनी से उन्होंने तो भगवान विश्वकर्मा का ही रूप दे दिया था भगवान विश्वकर्मा की जयंती के समय तो कंगना रानावत मंडी से लोकसभा की प्रत्याशी हैं और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विष्णु का अवतार बताया था और कहा जा रहा है कि वही अवतार बताने की वजह से ही उन्हें टिकिट दी गई थी यानी धर्म का खिलवाड़ करने की वजह से उन्हें टिकट दी गई थी तब ऐसे में बीएचयू में जो फोटो प्रदर्शनी लगाई गई किसने लगाई थी क्या एबीपी ने लगाई थी या कोई और इसी तरह के संगठन ने लगाई थी उसमें भी देश के प्रधानमंत्री के चित्र को किस रूप में दिखाया गया था आप खुद देखिए और सोचिए कि क्या कुछ खेल हुआ मेरठ में भी तो इसी तरह का भव्य मंदिर बनाकर स्थापित करने का खेल हुआ है तो महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता ने अवधूत बाग नाम है उन्होंने भी तो कहा था कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विष्णु के 11वें अवतार हैं और एक गोयल है जिन्होंने किताब लिखी और एक शिवाजी महाराज पर किताब लिखी गई और शिवाजी की मोदी वाली एक तस्वीर जब सामने आई तो उन्होंने कहा कि यह तस्वीर उन्हें पहले मिल जाती तो वे इसे ही किताब का कवर पेज बनाते आज के शिवाजी के लिए यह तस्वीर सबसे उपयुक्त है यह उस गोयल ने कहा था जो शिवाजी पर किताब लिख रहे थे ऐसे कई उदाहरण आपके सामने खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसकिस वेशभूषा  धरते हैं यह भी तो इस देश ने देखा है कभी वे सन्यासी बन जाते हैं तो कभी कुछ और एक बार तो उन्होंने जिस तरीके से रुद्राक्ष धारण किया था यहां तक कहा गया कि महाकाल का वेशभूषा धारण कर लिया यानी उसी तरीके से श्रृंगार करवाए थे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके का श्रृंगार महाकाल का होता है तब ऐसे में धर्म के साथ खिलवाड़ कौन कर रहा है कौन धर्म का ठेकेदार बना बैठा है और किस किस तरह से आने वाले दिनों में धर्म के साथ खिलवाड़ होगा !

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https://youtu.be/FH8VX23Fnqc?si=FPAWVdWwJ-QrgrIq