गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

रेत माफियाओं को खुले आम संरक्षण

रेत माफियाओं को खुले आम संरक्षण, आ गया नाम 


 क्या छत्तीसगढ़ में माफिया राज हावी होने लगा है क्या रेत माफियाओं के कहर के आगे जनप्रतिनिधि ही नहीं शासकीय अधिकारी भी नतमस्तक है दरअसल रेत की नीलामी के बाद पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी रेत खनन का काम बेतहाशा चल रहा है और क्या यह पूरा खेल उच्च स्तर पर चल रहा है यह सवाल इसलिए उठाये जा रहे है क्योंकि जिस तरीके से प्रतिबंध लगने के बाद भी छत्तीसगढ़ की नदियों से लगातार रेत का उत्खनन किया जा रहा है और हाईवा भर भर के सड़कों पर बेतहाशा दौड़ाई जा रही है जिससे लोगों की जान भी खतरे में आ गया है तब सवाल यह है  कि रेत माफियाओं के हौसले कितने बुलंद  है कि  धमतरी जिला पंचायत के उपाध्यक्ष जब एक कार्यक्रम से लौट रहे थे तो एक हाईवा तेज गति से आ रही थी और वे चपेट में आने से बाल-बाल बच गए हालांकि कई सारी घटनाएं हुई हैं छत्तीसगढ़ में इस दौर में जब हाईवा की चपेट में आकर लोग काल कलवी तक हुए हैं और लगातार शिकायत आ रही है कि कई खासकर धमतरी जिला महासमुंद जिला रायपुर जिला और बलौदा बाजार जिले से सर्वाधिक रेत की काला बाजारी की खबर आ रही है रेत के अवैध परिवहन को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं लेकिन जब प्रदेश के मुखिया के पास ही खनिज विभाग हो तब सवाल यह है कि क्या रेत माफिया का जो खेल चल रहा है अवैध उत्खनन का वह क्या मुख्यमंत्री के इशारे पर चल रहा है या रेत माफियाओं ने इतना अपना कद इतना बढ़ा लिया कि कारवाई करने में खनिज अधिकारियों के हाथ पैर काप जाते हैं छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध उत्खनन का इतिहास यदि राज्य बनने के बाद देखा जाए तो याद कीजिए आप कि किस तरीके से जोगी शासन काल में कोई जैन और तिवारी के गठजोड़ ने किस तरह सी धमा चौकड़ी मचाई थी और उसके बाद डॉक्टर रमन सिंह के सरकार में भी चलता रहा केवल नाम बदल गया बाकी खेल उसी तरीके से चलते रहा और अब भी वही खेल चल रहा है भूपेश सरकार के दौरान भी रेत माफियाओं के गुंडागर्दी दादागिरी को लेकर सवाल उठते रहे और अब जब प्रतिबंधित समय बारिश के मौसम में नदियों में रेत उत्खनन प्रतिबंधित लगा कर दिया जाता है उस परिस्थिति में भी यदि बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन चल रहा है तो क्या इन्हें राजनैतिक संरक्षण है इन्हें अधिकारियों का संरक्षण और कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस खेल में कई जनप्रतिनिधि भी शामिल और लोगों को आशंका है कि यही स्थिति चलते रही तो कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है क्योंकि जिस ढंग से रेट माफिया ताकतवर होते जा रहे हैं वह आने वाले दिनों में प्रशासन और शासन दोनों के लिए मुश्किल हालात पैदा कर सकते हैं हालांकि चर्चा इस बात का भी है कि इस इन खेलों में कई जनप्रतिनिधि में सरपंच जिला पंचायत सदस्य या जनपद सदस्य और विधायक तक शामिल है तब देखना है कि जो धमतरी में घटना हुई है उसको प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है हालांकि धमतरी में एक और ऑडियो वायरल हो रहा है एक अधिकारी है नायब तहसीलदार ज्योति सिंह और जिला पंचायत के सदस्य खूब लाल ध्रुव के जो बहस हुई है इसी रेत मामले को लेकर वह खूब वायरल हो रहा है लेकिन अभी तक कारवाही नहीं रही है और कहा जा रहा है कि कारवाही के नाम में केवल खाना पूर्ति होती है और छोड़ दिया जाता है जुर्माना लिया जाता है नहीं लिया जाता है एक अलग विषय हो सकता है लेकिन जिस तरीके से रेत माफियाओं ने जाल बिछाया और रात भर बेहिसाब अवैध उत्खनन किया जाता है और हाईवा में भर भर के तेज गति से दौड़ाई जाती उससे आम लोगों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है देखना है कि शासन अब धमतरी में जो घटना हुई है धरना दिया गया था रात उसे लेकर कितनी गंभीरता से लेती है और कारवाई करती है 

वीडियो देखें 


https://youtu.be/IFR2gI8GHFE?si=_u1Ui_f0hA3P2GeO!

बुधवार, 1 अप्रैल 2026

क्या बिजली दरों में बढ़ोतरी अदानी को फ़ायदा पहुँचाने

क्या बिजली दरों में बढ़ोतरी अदानी को फ़ायदा पहुँचाने 


 छत्तीसगढ़ में एक तरफ देश के सबसे बड़े उद्योगपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र गौतम अदानी के काम को गति मिली है तेज विस्तार हो रहा है खासकर पावर सेक्टर को लेकर तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के लघु उद्योगों खासकर जो स्टील क्षेत्र के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग है री रोलिंग मिल है इन पर बंद होने का खतरा मंडराता जा रहा है और तब सवाल यह है कि क्या इन दोनों खबरों में कोई तालमेल है यह सबसे बड़ा सवाल क्योंकि जिस तरीके से छत्तीसगढ़ की सरकार सत्ता में आते ही यानी डबल इंजन की सरकार बनते ही जिस तरीके से छत्तीसगढ़ में अडानी की भूमिका बढ़ गई है हसदेव काटे जाने लगे राजस्थान को बिजली देने के लिए जमकर कटाई हुई है और उसे लेकर जबरदस्त आंदोलन भी हुआ है तो पावर प्लांट के विस्तार के लिए भी जन सुनवाई में जो अफसरों की भूमिका है वह भी संदेह के घेरे में है किसान जमीन नहीं देना चाहते सरकार सरकारी जमीन दे दी लगातार विरोध हो रहा है रायपुर के तिल्दा ब्लॉक स्थित अडानी पावर प्लांट की बात हो या रायगढ़ में स्थित अडानी पावर प्लांट की बात तिल्दा का जो प्लांट था पहले जीएमआर ग्रुप के पास था उसे नी ने खरीद लिया अधिग्रहित कर लिया अब उसका विस्तार हो रहा है जिसे लेकर जो जन सुनवाई हुई उसमें जबरदस्त हंगामा मचा विरोध हुआ लेकिन सरकार का दावा है कि सब कुछ ठीक हो गया है और जन सुनवाई में अदानी के विस्तार को लेकर लोग खुश है हकीकत क्या है कहना बेहद मुश्किल है तो दूसरी तरफ सरकार ने बिजली के दरों में बढ़ोतरी की है आम आदमी को तो इससे दो चार होना पड़ ही रहा उन्हें ठीक से बिजली नहीं मिल रही है लगातार बिजली कटौती और अनियमित बिजली सप्लाई को लेकर कई जगह आंदोलन हुए हैं बिजली दफ्तर के कर्मचारियों को भागना तक पड़ा तो उद्योग समूह से जुड़े जो उद्योगपति हैं वे भी अचानक बढ़ोतरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं मुख्यमंत्री को ज्ञापन तक सौप गए हैं लेकिन अभी तक इस माम में कोई विचार नहीं होने से उद्योगपतियों में बेचैनी खबर यह भी है कि बिजली दर में बढ़ोतरी से परेशान कई उद्योगों ने अन्य विकल्पों की तलाश भी शुरू कर दी य विकल्प क्या हो सकते हैं सीधी सधी सी बात है कि जिन्हें उद्योग चलाना है वह सस्ती बिजली के लिए निजी जो कंपनियां है उनके पास जाएगी उनसे समझौता करेगी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में जो कंपनी है सरकारी वह बिजली दे रही है वह सब टैक्स मिलाकर ₹ 60 पैसे पर यूनिट उद्योगों को बिजली दे रही है इस बढ़ोतरी के बाद जबकि यही पर यूनिट बिजली निजी कंपनी से तमाम टैक्स के बाद भी रुप प्रति यूनिट में मिल रहा है तब क्या महंगी बिजली खरीदेंगे और उद्योग क्या निजी कंपनी की ओ नहीं जाएगा और यह निजी कंपनी कौन है स्वाभाविक रूप से गौतम अडानी की कंपनी है जिससे बातचीत चल रही है और उद्योगपतियों ने नाम लेकर कहा कि वे अडानी से बिजली लेने को मजबूर हो जाएंगे यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो तो क्या सरकार ने पिछले दरवाजे से अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली दर में बढ़ोतरी की है यह सबसे बड़ा सवाल और यह सवाल इसलिए उठ रहा है क् कि लगातार पूरे देश में जिस तरीके से अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सत्ता लगी रही हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई सेबी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे और मित्र प्रेम इस कदर हावी रहा कि संसद तक में हंगामा हुआ और आरोप तो यहां तक लगाया गया कि कई सदस्यों की सदस्यता सिर्फ इसलिए समाप्त कर दी गई क्योंकि अडानी को बचाना था तब ऐसी परिस्थिति में क्या छत्तीसगढ़ की सरकार अब पूरी तरीके से एक्सपोज हो गई है कि अडानी को वह किस हद तक मदद कर रही है सवाल सिर्फ हसदेव की कटाई का नहीं है सवाल राजस्थान को उजाला देकर छत्तीसगढ़ को अंधेरे में करने का भी है सवाल अदानी पावर प्लांट के विस्तार का नहीं है सवाल तो उस जन सुनवाई का है जो फर्जी करार दिया जाता है बाद में किसानों की सहमति के बगैर भूमि उद्योगों को सौंप दी जाती है दादागिरी के साथ उद्योग कब्जा कर लेते हैं कई सारे मामले हैं मोनेट वंदना कई कई लोगों पर इस तरह के आरोप लगते रहे कि उन्होंने जबरिया जमीन कब्जा की है सरकारी जमीन भी और निजी जमीन तब ऐसे में जो तब री रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी का कहना है कि एका एक बिजली की कीमत बढ़ा देने से लागत 300 से 500 रप टन बढ़ गया तो मिनी स्टील प्लांट के महासचिव मनीष धुप का कहना है कि य उद्योगों के लिए गंभीर मसला है और उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी उद्योग सीधा सरकार से बैल लेना नहीं चाहते इसलिए जब वह प्रेस के सामने बोलती है तो कुछ और बोलती क्योंकि इस दौर में जिसने भी अदानी समूह को फायदा पहुंचाने की सत्ता की कोशिश के खिलाफ आवाज बुलंद की है उसके खिलाफ क्या कुछ नहीं हुआ या किसी से छिपा नहीं इधर चर्चा इस बात की भी है कि निजी बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ही यह सारा खेल खेला गया है रचा गया है और निजी कंपनी में अडानी ऐसा है जो यहां बिजली सप्लाई आसानी से करेगा ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या उद्योगपतियों के पास जब अदानी से बिजली खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं है तब 3स गढ़ की जो विद्युत कंपनी है जो बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन कर रही है उन बिजली को क्या दूसरे राज्यों में बेचा जाएगा किस तरीके का घोटाला डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान सामने आया था जिंदल को लेकर और दूसरे राज्यों को बिजली देने को लेकर किस तरह के घोटाले थे उनकी कोई जांच वांच कभी नहीं हुई केवल आरोप तक सीमित होकर रह गए थे तब ऐसी परिस्थिति में जो स्थिति निर्मित हो रही है वह साफ संकेत दे रही है कि छत्तीसगढ़ में जो डबल इंजन की सरकार है वह अदानी के लिए सब कुछ कर लेना चाहती है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/jInmVvth5DM?si=nMtS0YPep2NyD31_

मंगलवार, 31 मार्च 2026

याद है वर्दी वाली खलनायिका


 याद है वर्दी वाली खलनायिका 

यह है वेद मती दरियो वर्दीधारी इनकी वर्दी की धमक अपराधियों पर कितनी है यह कहना कठिन है लेकिन इनके खिलाफ पीड़ित ही प्रताड़ित थाने में रिपोर्ट करने के लिए आने वालो को ही धमकाने में बहुत मजा आता है राजधानी के इकलौते महिला थाना के प्रभारी थी तब  इनके सामने अच्छे अच्छों की गिग्गी बन जाती और दहेज प्रताड़ित द्वारा वसूली का नया रिकॉर्ड कायम करने की भी चर्चा रही और यही नहीं इनके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले थे और घेरा घारी करके  जब एसीबी ने रंगे हाथों गिरफ्तार किया तो इनकी ठसक देखने लायक थी ऐसा नहीं है कि एसीबी ने सिर्फ इस महिला वर्दीधारी जो प्रताड़ित लोगों के लिए खलनायिका बन चुकी थी को ही गिरफ्तार किया बल्कि धमतरी जिले में भी एसीबी ने कारवाही करके तहसीलदार को पकड़ा हमने विस्तार से बताया कि किस तरीके से इसके पहले एसीबी ने भागीरथ खांडे को गिरफ्तार किया था जो एसडीएम थे अब तक के सबसे बड़े अधिकारी को चपेट में लिया था एसीबी ने लेकिन वेद मती दरियों की अपनी कहानी है राजधानी के इकलौते महिला थाना के इस प्रभारी रही  के खेल को आप सुनेंगे तो चौक जाएंगे कि किस तरीके से जो पीड़ित पक्ष उन्हीं से यह पैसा वसूल की थी और कहा तो यहां तक जाता है कि यह प्रताड़ित पक्ष से यानी जो प्रताड़ित करने वाले हैं या जो अपराधी पक्ष है उनसे सेटिंग कर लेती थी और यह खेल बड़े लंबे समय से चल रहा था लगातार एसीबी को शिकायत मिल रही थी लेकिन और ऐसा नहीं है कि इसकी खबर जिले के अफसर या नेताओं को नहीं थी कई नेता भी इसको अपनी तरह से दरियो से अपने हित के काम के लिए उपयोग भी करते थे कहा तो यहां तक जाता है कि मंत्री तक इनकी पकड़ थी इसमें कितनी सच्चाई हम नहीं कह सकते लेकिन जिस तरीके से उसके खिलाफ लगातार आरोप लग रहे थे मीडिया में भी खबरें छप रही थी कि महिला थाने में किस तरह की भर्रा साही चल रही है उसके बाद भी पुलिस कप्तान इसे नहीं हटा रहे थे तो क्या उनका भी संरक्षण था या राजनीतिक दबाव की वजह से पुलिस कप्तान कुछ नहीं कर पा रहे थे यह एक अलग कहानी है लेकिन मैडम दरियो के नाम से ना केवल महिला थाना आने वाले थर थर कापते थे चाहे वे रिपोर्ट लिखाने ही क्यों ना आए हो और महिला परामर्श केंद्र जहां घरेलू झगड़े को निपटाया जाता है वहां भी इनकी धमक जबरदस्त ी कहा जाता है कि परामर्श केंद्र में जो महिला परामर्श वाली हैं जो महिलाओं को परामर्श देती हैं घरेलू विवाद निपटा हैं ऐसे लोगों में भी इनकी धमक थी और उनकी रिपोर्ट के विपरीत जाकर काम करती थी और वे महिला परामर्श में बैठने वाली महिलाएं समाजसेवी का चुप हो जाती थी क्योंकि इनकी अपनी धमक थी कहा जाता है कि मोआ की एक पीड़ित दहेज प्रतारक महिला ने एसीबी से शिकायत की और इस बात के लिए तैयार हो गई कि हां रिश्वत की राशि को लेकर वह एबी के कार्यशैली को अपना लेगी और इसी तरह से जब प्रीति बंजारे पैसा लेकर पहुंची तो एसीबी की टीम ने वेद मती दरियों को रंगे हाथों रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया 

कहना बेहद कठिन है क्योंकि इस दौर में राजनीतिक पहुंचने यही सब तो किया तब जो धमतरी में गिरफ्तार हुए हैं एसीबी की टीम ने जिसे गिरफ्तार किया है वे तहसीलदार है कीर सागर बघेल यही नाम है उनका एक किसान से नामांतरण को लेकर उन्होंने रिश्वत मांगी थी किसान बहुत गिड़गिड़ा है इनके सामने लेकिन वे साफ कह दिए थे कि पैसे के बगैर कोई काम नहीं होगा और यही वजह है कि उस किसान ने त्रस्त होकर एसीबी में शिकायत की थी और एसीबी ने पूरी टीम के साथ इस तहसीलदार बघेल को रंगे हाथों की रफ्तार की हमने आपको बताया था कि किस तरीके से दो हफ्ते पहले ही सूरजपुर क्षेत्र में एसडीएम भागीरथी खांडे को एसीबी की टीम ने पकड़ा था और खुद तो वे पकड़ाई अपने साथ वे बाबू चपरासी सबको ले डूबे थे देखना है कि इस मामले में क्या कुछ होता है क्योंकि जिस तेजी के साथ सरकार बद है उसी तेजी के साथ भ्रष्टाचार के मामले लगातार आ रहे हैं और इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि मुख्यमंत्री के जनदर्शन में पहुंचने वाले ज्यादातर लोग इसी तरीके से प्रताड़ित लोग हैं शासन प्रशासन से प्रताड़ित लोगों की संख्या बड़ी बढ़ते जा रही है और मुख्यमंत्री इलाज के लिए पैसा देकर ट्राई साइकिल देकर वाहवाही लूटने में लगे हैं कि जन दर्शन में पहुंचने वालों की तकलीफें दूर की जा रही है लेकिन हकीकत तो यह है कि जिस तरीके से राजनैतिक हस्तक्षेप के साथ भ्रष्टाचार ही नहीं अफसरों की मनमानी भी बड़ी है उससे आम लोगों की तकलीफ बढ़ चुकी है देखना है कि इन तमाम मामलों में जो मुख्यमंत्री जनदर्शन में भी शिकायत लेकर आ रहे हैं उन पर किस तरह के कारवाई होती है !

Vidio देखें 


https://youtu.be/T-xppzHlF7k?si=U3QhOp0znCBkFM7P

सोमवार, 30 मार्च 2026

जब चौधरी ने बताया था दो करोड़ को चौबीस करोड़ बनाना

जब चौधरी ने बताया था दो करोड़ को चौबीस करोड़ बनाना 


देश के गृहमंत्री अमित शाह के लाड़ले और छत्तीसगढ़ प्रदेश के वित्त मंत्री ओ पी चौधरी का पैसा कमाने का अपना फंडा है,  2 करोड़ रुपया को  करोड़ रुप बना लेते है, और हो सकता है कि अमित शाह के लाड़ले ओपी चौधरी इसलिए बने हैं क्योंकि उनके पास पैसा कमाने का सभी तरह का फंडा है कहा जाए तो भी गलत नहीं होगा

 पिछले दिनों साला उत्सव के कार्यक्रम में जब ओपी चौधरी ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बताया बच्चों को या सिखाया कि किस तरीके से उन्होंने दो करोड़ रुपए को 24 करोड़ बना दिया । शाला उत्सव के इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी ओपी चौधरी की बात सुनकर ताली बजाते नजर आए दरअसल छत्तीसगढ़ में हर साल  शाला  प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम चलता है जगह-जगह प्राय सभी स्कूलों में जनप्रतिनिधि विधायक मंत्री इसी तरह के कार्यक्रम में व्यस्त रहते  है बच्चों का स्वागत कर रहे हैं सम्मान कर रहे हैं ऐसे ही एक कार्यक्रम बगीचा में हुआ जो मुख्यमंत्री का गृह क्षेत्र है और यहां ओपी चौधरी ने किस तरीके से पैसा कमाने का फंडा बताया वह बच्चों को क्या सीखना चाहिए यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए है क्योंकि ओपी चौधरी ने बताया कि बगैर शिक्षकों के या शिक्षकों के अभाव में उन्होंने पढ़ाई को  प्राथमिकता देते हुए आईएएस बने यह ओपी चौधरी बता रहे थे प्रदेश सरकार के सबसे होशियार मंत्री माने जाने वाले ओपी चौधरी ने जब बताया कि किस तरीके से शिक्षकों के अभाव में वे पढ़ाई कर रहे थे वे बच्चों से कह रहे थे कि पढ़ाई शिक्षा ही जीवन में काम आता है क्योंकि राइस मिल लगाने से लेकर दूसरे तमाम धंधे के लिए पैसा चाहिए अगर लाइफ में आप कुछ करना चाहता जिंदगी में आगे बढ़ना चाहता हो तो शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ाओ आप क्रेसर खोले जाया तो दिक्कत आ सकते है राइस मिल खोले जाया तो पैसा नहीं है तो घर में नहीं खोल सका आज पेट्रोल पंप चालू कर किया तो एक सामान्य घर के लड़का नहीं कर सके लेकिन पढ़ाई आप मन जरूर कर सकते हो और पढ़ाई के माध्यम से जीवन लापन के बदल सका था लेकिन शिक्षा के लिए पैसा नहीं पैसे की जरूरत नहीं होती केवल मन लगाने की जरूरत होती है और उन्होंने बताया कि जब वे 2018 का चुनाव हार गए तो उन्होंने किस तरीके से अपने दोस्तों से उधारी लेकर शेयर मार्केट का गहन अध्ययन करके दो करोड़ रुपए को 24 करोड़ रुपए बनाया एक तरह से कहा जाए तो शेयर मार्केट को लोग आम बोलचाल की भाषा में सट्टा बाजार भी कहते हैं वहां पैसा लगाकर ओपी चौधरी ने कई गुना किया अपने पैसे को उधारी उन्होंने चुकाया नहीं चुकाया इस पर उन्होंने कोई बात नहीं की लेकिन यह गजब का फंडा है पैसा कमाने का जो बच्चों को बताया जा रहा था कि शेयर मार्केट में पैसा लगाकर कई गुना ज्यादा पैसा कमाया जा सकता है।

जब कलेक्ट्री की नौकरी छोड़ दे रहे तो आदमी मन सोचे कैसे जीवन यापन करी का करी कैसे करी इकोनॉमिक समय मो थोड़ ठीक ठाक पकड़ रही तो मैं स्टॉक मार्केट के पढ़ाई करो 20089 से देखो थोड़ बहुत का का का होते करके तो जब मैं नौकरी छोड़ दे तो स्टॉक मार्केट के बहुत गहनता के साथ अध्ययन करें और दो करोड़ रुपया में उधारी ले अलग अलग दोस्त मंे मिला जुला के और चार साल में सरस्वती मां के ही कृपा से दो करोड़ रुप 24 करोड़ रुपया बना दो करोड़ रुप 24 करोड़ रुप बना हालाकि ओपी चौधरी की चौधरा हट को लेकर कई तरह की चर्चा है और कई लोग तो उन्हें सुपर सीएम भी कहते हैं खासकर आईएएस आईपीएस लाबी में ओपी चौधरी की धमक है और कहा तो यहां तक जाता है कि ओपी चौधरी ही तमाम प्रशासन को चलाते हैं वि देव साय को मुख्यमंत्री बनाया है मोदी शाह ने लेकिन ओपी चौधरी को तो चुनाव प्रचार के दौरान ही अमित शाह ने बड़ा आदमी बनाने की बात कह दी थी तब शायद अमित शाह को यह बात मालूम नहीं रहा होगा कि ओपी चौधरी तो बड़ा आदमी बन चुके हैं उन्होंने शेयर मार्केट से दो करोड़ को 24 करोड़ बना दिया अब देखना है कि इस बयान को लेकर ओपी चौधरी का जो वीडियो है वह खूब वायरल हो रहा है देखना है कि आने वाले दिनों में स्कूली बच्चे इस पैसा कमाने के फंडे को किस तरीके से लेते हैं!

वीडियो देखे 


https://youtu.be/mnR6Vhd0qro?si=I5_A6zPiWKL7AYcC

रविवार, 29 मार्च 2026

अब इस कोल घोटाले पर बिफरे ननकीराम, सीबीआई जाँच की माँग

अब इस कोल घोटाले पर बिफरे ननकीराम, सीबीआई जाँच की माँग 


 माल ढुलाई के लिए यात्रियों को परेशान करने वाले रेल मंत्रालय क्या अब कोयला घोटाले में शामिल हो गया है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके से छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है उसे ले कर लोगों में बेहद आक्रोश है लेकिन 10 सीट भारतीय जनता पार्टी को देने के बाद भी यहां के सांसदों ने इस मामले में अपने मुंह में दही जमा रखा है कहा जाए तो गलत नहीं होगा 

पिछले छ महीने बल्कि उससे अधिक दिनों से यहां के जो यात्री है जो रेलवे में सफर करते हैं वह परेशान है लेकिन अब कल जो मामला सामने आया है कि कोयला ढुलाई के नाम पर किस तरीके से कोल माफिया सक्रिय हैं और इस पूरे खेल में ना केवल रेल प्रशासन एचएससीएल बल्कि राज सरकार के भी कई अधिकारियों और नेताओं के शामिल होने की खबर है 

इस मामले को लेकर पूर्व गृह मंत्री ननकी राम कवर ने रमन सरकार में गृह मंत्री थे और उन्होंने अपनी ईमानदारी के चलते रमन सरकार के एसपी और कलेक्टर को वसूली बाज और कमीशन खोर ही नहीं कहा था बल्कि 10 हजार में थाना बिकने की भी बात भरी विधानसभा में कही थी और अब उसी ननकी राम कवर ने कोयला घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा करते हुए केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी से मुलाकात करके पूरे मामले की जानकारी देते हुए सीबीआई जांच की मांग की है और उनके इस मांग से प्रदेश सरकार के कई अफ़सर और नेताओं में भी हड़कंप मचा हुआ है कहा जाए तो गलत नहीं होगा

 दरअसल मामला सरबिया स्टेशन का है जहां खदान से निकलने वाली कोयले को मालगाड़ी के जरिए ढुलाई करते हुए पहुंचाया जाता है और ज्यादा माल यानी कोयला ज्यादा लोड कर देने की वजह से डंप किया जाता है एडजस्टमेंट किया जाता है समायोजन किया जाता है यह रेलवे का दावा है लेकिन इस डंप कोयले की तलाई वजन या फिर यह कहां जा रहा है किसी को नहीं पता चलता और कहा जा रहा है कि इस डंप कोयले को फिर डंपर के माध्यम से इधर उधर पहुंचाया जाता है और इसी में पूरा खेल होता है इस मामले की जांच लंबे समय से ननकी राम कवर करते रहे और उन्होंने इस मामले को लेकर वहां धरना भी दिया था और कहा जाता है उसके धरने के बाद रेलवे प्रशासन ने जांच के आदेश तो दिए लेकिन अब सरबिया स्टेशन में माल डंप होना बंद हो गया लेकिन ननकी राम कवर ने सवाल उठाया है कि यदि सब कुछ सही था तो फिर डंप क्यों बंद किया गया क्यों पहले जैसी व्यवस्था नहीं चल रही यानी इसमें बहुत लंबा चौड़ा घोटाला और इस मामले को लेकर कल ननकी राम कवर ने जी किशन रेड्डी से मुलाकात भी की लाखों मेट्रिक टन कोयले की हेराफेरी और यही नहीं इस सबसे महत्त्वपूर्ण बात तो यह है कि ज्यादा लोड लादने की वजह से रेलवे ट्रैक भी खराब हो रहे हैं रेलवे को भी नुकसान हो रहा है और किसकिस तरह के नुकसान हो रहे ये सब सीबीआई जांच में पता चलेगा लेकिन इस मामले को लेकर नंद की राम कवर ने साफ तौर पर जी किशन रेड्डी यानी केंद्री मंत्री से कहा कि इसकी सीबीआई जांच की जाए उन्होंने जितने भी मामले उठाए हैं चाहे इसके पहले कोयला घोटाला हो शराब घोटाला हो या पीएससी परीक्षा घोटाला हो सब में कार्रवाई चल रही है और कई अफसर जेल की सलाखों में है कई नेता जेल की सलाखों में है कई दलाल से जेल की सलाखों में है इसलिए इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए क्योंकि इस पूरे खेल में ना केवल रेल मंत्रालय बल्कि कोयला उत्पादन कंपनी और यही नहीं राज्य सरकार के कुछ अफसर भी शामिल हैं यह ननकी राम कवर का दावा है देखना है कि इस मामले को लेकर किस तरह की जांच शुरू होती है लेकिन ननकी राम कवर के सीधे केंद्रीय मंत्री से मिल लेने को लेकर भी पार्टी में हलचल है।

वीडियो देखें 


https://youtu.be/FL7uDUlMjQY?si=zT6txdNU8YWhkqKD

शनिवार, 28 मार्च 2026

जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा

 जब धर्मजीत ने गधा गंवार कहा 


सत्ता का नशा जब सर चढ़कर बोलता है तो वह किसी बात की परवाह नहीं करता ना तो उसकी जुबान पर ही कोई कंट्रोल रहता है और ना ही तेवर पे और शायद यही वजह है कि जल जीवन मिशन में घपले घोटाले को लेकर विधानसभा में जब चर्चा चल रही थी तब भारतीय जनता पार्टी के विधायक धर्म जीत सिंह ने ठेकेदारों को लेकर ऐसी बात कह दी जो हैरानी की बात है चौकाने वाली बात है 

उन्होंने कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ कहां कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए उनके भीतर का ठाकुर इसलिए जाग गया कि कितने सालों के बाद उनकी पार्टी को सत्ता मिली धर्मजीत सिंह कभी कांग्रेस में हुआ करते थे और उसके बाद जब जनता कांग्रेस बनी यानी जोगी कांग्रेस की नीव रखी गई तो धर्मजीत सिंह जोगी कांग्रेस चले गए लेकिन अमित जोगी से उनकी पटरी नहीं बैठी तो वे भारतीय जनता पार्टी में आ गए और भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें टिकट दी वे चुनाव भी जीत गए काफी सीनियर है लेकिन है तो ठाकुर तब छत्तीसगढ़ विधानसभा में उन्होंने क्या कहा यह पहले विस्तार से सुन लीजिए 

कहा के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के आ गए हैं आदरणीय अध्यक्ष जी इनके कारण ही पूरा जल जीवन मिशन लेप्स पोजीशन में है  सिर्फ बिलासपुर की बात नहीं कह रहा हूं इस सदन में  90 विधानसभा क्षेत्र में यह योजना दम तोड़ रही है उसमें दम देने का काम आपसे निवेदन है कि आप करिए करोड़ों रुपया की लागत है अगर उसम थोड़ा और पैसा देकर के उसको लागू हो जाए तो गांव गांव में हम लोग जाते हैं दौरे में लोग क्या करेंगे हम लोग क्या कर सकते हैं  घपले घोटाले में पूरा सिस्टम शामिल है क्या अधिकारी क्या मंत्री क्या ठेकेदार क्या बाबू क्या चपरासी सब कुछ शामिल है लेकिन गुस्सा धर्मजीत सिंह का है तो अपनी सरकार के मंत्री की बजाय या अधिकारियों की बजाय उन ठेकेदारों कर कहां के गधे गवार लोग ठेकेदार बन के सब गए हैं इसम यह नहीं है कि धर्मजीत सिंह किस नेचर के व्यक्ति हैं वैसे तो बड़े सौम्य माने जाते हैं चेहरा मोहरा भी बड़ा शानदार है 

लेकिन भाषा क्या इस तरह की होनी चाहिए किसी के लिए भी क्या कोई भी ठेकेदार बन जाता है जल जीवन मिशन में निश्चित रूप से जबरदस्त घपला हुआ है अब तक नौ इंजीनियर निलंबित किए जा चुके हैं कई ठेकेदारों को भी सस्पेंड कर दिया है या उनके काम को रोक दिया है उनसे काम वापस ले लिया गया प्राय सभी जिले में सर्वाधिक तो जो शिकायत सामने आई है वह बिलासपुर संभाग में है तो धमतरी जिले में भी जमकर शिकायत हुई है कहा जा रहा है कि अधिकारियों को पैसा देकर ठेकेदारों ने काम पूर्ण होने का सर्टिफिकेट तक ले लिया है लेकिन धरातल में काम शुरू ही नहीं हुआ कई जगह तो काम हुए कई जगह तो पानी की सप्लाई लोगों को मिला लेकिन 15 दिन बाद बंद कर दिया गया कई जगह तो पाइपलाइन ही नहीं बची यानी आधे अधूरे काम को पूर्ण दिखाकर जिस तरीके से ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया गया है उसे लेकर विधायकों ने सवाल पूछे तो मंत्री का जवाब भी हैरान कर देने वाला था गोलमोल जवाब दे रहे थे मंत्री सवाल कुछ और पूछे जा रहे थे जवाब कुछ और दिए जा रहे थे यहां तक कि जो ज्यादा राशि ठेकेदारों को दी गई है उसे लेकर भी जब सवाल पूछा गया तो ना तो ठेकेदारों पर कारवाई की बात की गई और ना ही उन राशियों को वसूलने की बात की गई यहां तक कि उन दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी क्या कारवाई होगी कहना मुश्किल है 

लेकिन धर्मजीत सिंह को गुस्सा उन अधिकारियों पर नहीं है धर्मजीत सिंह को गुस्सा उस सिस्टम पर नहीं है गुस्सा है उन ठेकेदारों पर जो कमाने के लिए ही ठेकेदारी कर रहे हैं तब सवाल यह है कि क्या सत्ता का नशा इस तरीके से सिर चढ़कर बोलता है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/nxStEleO5Bw?si=HaogPSqQ7c5j_OCv

शुक्रवार, 27 मार्च 2026

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम

अब एम्स रायपुर में भी चहेते ठेकेदारों को ही काम 


 क्या मोदी सत्ता ने केंद्र सरकार के सभी विभागों को भ्रष्टाचार करने की खुले आम छूट दे रखी है लगातार खबर आ रही है चाहे रेलवे क्यों ना हो वंदे भारत एक्सप्रेस की छत से पानी टपकने की खबर आ रही है तो दूसरे तरफ पूलों के लगातार ढहने की खबर दिल्ली के प्रगति मैदान की भी तो खबर हैं तो दूसरी तरफ जिस तरीके से  कैग ने रिपोर्ट दी थी चाहे आयुष्मान भारत कार्ड योजना हो या फिर ा स करोड़ रुपए में एक किलोमीटर सड़क निर्माण की बात हो सब तरफ भ्रष्टाचार की खबरें आ रही है लेकिन अब जो छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से खबर रही है वह भी हैरान कर देने वाली रायपुर स्थित एम्स  अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान  वहां से जो टेंडर घोटाले की खबर आ रही है वह हैरान कर देने वाली है कि किस तरीके से दिल्ली से आए स्टाफ ने अपने चहेते ठेकेदार को टेंडर देने के लिए किस किस तरीके का खेल नहीं खेला सब कुछ कागजों में कैद है और आरटीआई के माध्यम से और भी जानकारी इकट्ठी की जा रही है लेकिन जो प्रारंभिक जानकारी मिली है वह साफ संकेत दे रही है कि चहते ठेकेदार को टेंडर देने ठेका देने मनमाने ढंग से घपले बाजी की गई है घोटाले की गई है 

इस घोटाले को लेकर जो खबर आ रही है व हैरान कर देने वाली इसलिए भी है क्योंकि रायपुर एम्स जो कई कार्यक्रम आयोजित करता है जिसमें राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के आगमन के कार्यक्रम भी होते हैं मंत्रियों के कार्यक्रम होते इसके लिए इवेंट कंपनियों को काम दिया जाता है ऐसा ही एक काम का टेंडर निकला था जिसे 30 मई को खोला जाना था इस टेंडर में तीन कंपनियों ने भाग लिया था जिसम से एक कंपनी को यह टेंडर मिल गया था लेकिन वह कंपनी चहेता कंपनी नहीं था इसलिए यह टेंडर रदद कर दिया गया कि इन कंपलीट फाइनेंस की होने की वजह से 

जबकि इसे जिस तरह के रेट  आए थे या जो ए कंपनी थी व य 30 लाख में काम करने को तैयार थी तो जो दूसरी कंपनिया थी वह कोई 40 लाख तो कोई 60 लाख तक का टेंडर भरा था ऐसे में उस फाइनेंशियल कीट के जो खाने छूटे हुए थे उसे भरकर आसानी से टेंडर जारी किया जा सकता था लेकिन वर्क आर्डर नहीं दिया गया और तमाम टेंडर निरस्त करके फिर से टेंडर जारी कर दिया गया यह पूरा ऑनलाइन प्रक्रिया है लेकिन किस तरीके से इसमें भी खेल होता है यह समझिए जब दूसरी बार टेंडर जारी हुआ और 26 तारीख को उसे 26 जून को इसे खोला जाना था तब छ कंपनियो ने इस में हिस्सा लिया कंपने प्रजेंटेशन नहीं दिया तो उनका फम रिजेक्ट कर दिया गया अब सिर्फ दो कंपनिया बची थी एक री दूसरा और इन दोनों कंपनियों का टेंडर खोला जाना था और जिसका एल वन होता उसे टेंडर दे दिया जाना था लेकिन आश्चर्यजनक रूप से  टेंडर खोला ही नहीं क्योंकि  टेंडर देना था यह शिकायत भी हुई है क्योंकि जिस बना पर मेरी टेडर किया नहीं खोला गया है व पहले जब टेंडर हुआ था उसम प्रेजेंटेशन व दे चुके थे और यह कर दिया गया को की आपका जो प्रेजेंटेशन है अप टू द मार्क पर नहीं है जबक इसी प्रेजेंटेशन पर पहली बार टेंडर उसे मिल चुका था जिसे निरस्त किया गया था ऐसी परिस्थिति में जब हमारी टीम ने इस शिकायत पर जब अस्पताल प्रबंधन से बात करने की कोशिश की तो उपलब्ध नहीं थे लेकिन जो जानकारी मिली है वह भी कम हैरानी की बात नहीं है क्योंकि टेंडर की शर्तो में एक महत्वपूर्ण शर्त यह था कि टर्न ओवर एक करोड़  होना चाहिए लेकिन जिस कंपनी को यह टेंडर जारी कर दिया गया उसका टर्न ओवर 50 लाख से भी ज्यादा नहीं है और कारण यह बताया गया क्योंकि वह  एमएसएनई कंपनी है इसलिए उसे छूट दी जा रही है और यही बात यदि टेंडर जारी करते समय कर दी जाती कि एमएसएमई  सेक्टर वालो को छूट दी जाएगी तो यकीन मानिए कि कई लोग स्टैंडर में भाग लेते हैं यानी एक करोड़ टन की शर्त लगाकर एमएसए के कई कंपनियों को रोक दिया गया और एमएस की छूट के नाम पर अपने चहते कंपनी को टेंडर जारी कर दिया गया कहा जा रहा है कि इस पूरे मामले में जबरदस्त ढंग से खेल हुआ है और यही नहीं अब तो जो कंपनिया इवेंट का काम करती है फ्लावर लगाने का टेंट लगाने का लगाने का व कंपनिया आशंकित इसलिए भी है क्योंकि एम्स में हर साल करोड़ अरब रुपए का काम निकलता है तो एक शुरुआत थी इस साल की उसमें ही यदि इस तरीके की घपले बाजी हो रही है तो आने वाले दिनों में क्या कुछ होगा कहना मुश्किल है देखना है कि इस मामले को लेकर अब किस तरीके की कारवाई होगी क्योंकि कहा तो यहां तक जा रहा है कि कुछ पार्टी इस मामले को लेकर कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाने वाली है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/uXzRZRUhjLw?si=_zis7qUm9KlXBTBE