सोमवार, 11 मई 2026

सालों से परेशान नटवरलाल कोर्ट पहुँचा, वजह जान आप भी हैरान हो जाएँगे…

 

सालों से परेशान नटवरलाल कोर्ट पहुँचा, वजह जान आप भी हैरान हो जाएँगे…

इस देश के लोग या सरकार नटवर लालों से बेहद परेशान है लेकिन आज हम आपको एक ऐसी नटवर लाल की कहानी बताएंगे जो खुद इतना परेशान हुए कि उन्हें हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी दरअसल पिछले कई सालों से यह नटवन लाल बेहद परेशान है यानी परिवार के साथ जब फिल्में देखने बैठता है यह या टीवी देखने बैठता है तो उन्हें किस तरीके से मजाक का सामना करना पड़ता है दोस्तों के बीच खबरों में हर जगह नटवर लाल के टैग लाइन ने इस नटवर लाल को परेशान कर दिया उन्होंने हमसे बातचीत में बताया कि वह किस तरीके से परेशान है पहले उनकी पूरी बात सुन लीजिए आज से लगभग 58 59 साल पहले मेरे माता-पिता ने मेरा नाम नटवर लाल भगवान श्री कृष्ण के नाम नटवर के आधार पर रखा था तब उन्हें क्या पता था कि इसको 420 के साथ जोड़ दिया जाएगा नट लाल का नाम इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आर्थिक मानसिक आहत होती है जिस नटवरलाल का नाम सबसे पहले जिस व्यक्ति के लिए जड़ा गया था उसका नाम भी मिथिलेश श्रीवास्तव था नटवरलाल नहीं था उसके बाद से एक परंपरा सी बन गई है 30 40 साल पहले जब लोग अपने बच्चों का नाम नटवरलाल रखा करते थे लेकिन जब से यह फ्रॉड के साथ में जोड़ना शुरू हुआ है तब से लोगों ने अपने बच्चों का नाम नटवरलाल रखना बंद कर दिया क्या लोग मजाक भी उड़ाते हैं इस मामले में आपके साथ स्वाभाविक क्रिया है कोई ऐसी घटना जो आप बता सके कि किस तरीके से आपको अपमानित होना पड़ा या आपको बड़ा पीड़ा पहुंचा ऐसी कोई घटना जब हम मालो बच्चों के साथ में टीवी देख रहे हैं और बैठे हैं परिवार के साथ में और जब य आता है कि नौरा फतेही और एक नटवरलाल के चक्कर में फसी तो एक मन में यह लगता है कि इसमें नटवरलाल का क्या कहा क्या क्या क्या लेना देना इस प्रकरण से सुकेश चंद्रशेखर का नाम सुकेश चंद्रशेखर लिया जाए ना ना कि टला क्या लगता है इस मामले में आपको न्याय मिलेगा माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ से हमने निवेदन किया है कि इस प्रथा को बंद किया जाए और मेरा सभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया एव सोशल मीडिया वालों से निवेदन है कि नटवर लाल के नाम का दुरुपयोग बंद करें एक मजाक का पात्र तो होही जाता है कहीं ना कहीं क्योंकि चाहे मजाक में ही तो यह प्रथा मतलब कुल मिला करके कहेंगे तो गलत परंपरा ही तो प्रारंभ हो गई ना जैसे आजकल नया बंटी बबली वगैरह भी आ गया है तो यह क्या क्या मतलब है इस परंपरा का य कहां से शुरू हुई किसने शुरू की इसकी त में जाना भी एक मेरे हिसाब से उचित होगा कोई भी 420 प्रकरण अभी भी आप आए दिन देख लीजिए में न्यूज चैनल में सोशल मीडिया पर कोई भी पकड़ता है चिल्ला चिल्ला के बोलते और नटवरलाल इसमें पकड़ा गया एक और नटवरलाल पकड़ा गया बड़े बड़े नटवरलाल शर्मा जाए जबक इसमें मेरे हिसाब से कोई नटवरलाल का कोई रोल या कोई तुक नहीं हैसे तो आप सालों से गुजर रहे हैं तो क्या अब जाकर आप इस बात को हमारे द्वारा यह भी इंतजार किया गया चलो कोई बात नहीं हो गया चलिए कोई बात नहीं इसके बाद बंद हो जाएगा लेकिन ये तो रेगुलर आदत सी बन गई है बिल्कुल परंपरा सी बन गई है या घर परिवार में भी दिक्कत होती है दिक्कत का मतलब य है कि मेरा नाम को जो मेरे मां बाप ने भगवान श्री कृष्ण के नाम पर रखा था उसको फड के नाम से जोड़ना नटवरलाल किसी भी नलाल का नाम को उसम स्वाभाविक पीड़ा का कार्य है मे हिब से तो यह थे रायगढ़ के वासी नटवर लाल अग्रवाल किस किस तरीके से इन् परेशान होना पड़ा है अपमानित होना पड़ा है इसे लेकर अब वे हाई कोर्ट की शरण में जा पहुंचे हैं देखना है कि इस मामले में इस नटवन लाल अग्रवाल को क्या न्याय मिलेगा उ वो तो सीधे-सीधे कहते हैं धार्मिक भावना का तो उपहास उड़ाया ही जा रहा है भगवान के नाम का उपहास आया जा रहा है और इस पर रोक लगनी चाहिए !

Vidio देखें 

https://youtu.be/nAeA7QkhL4A?si=D33JMrQmqt5n0eyV

अपनी ही सरकार पर भड़के बीजेपी सांसद, मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखा

 

अपनी ही सरकार पर भड़के बीजेपी सांसद, मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखा

छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार यानी केंद्र में भी और राज्य में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और उसके बाद भी यदि मोदी की कई गारंटी पूरी नहीं हो रही तो फिर इसे क्या गारंटी पूरी नहीं होने से अब भारतीय जनता पार्टी में भी विरोध के स्वर सु बगाने लगे हैं  पहले ही कई तरह के आरोपों से घिरे विष्णुदेव साय सरकार क्या अब पार्टी के नेताओं को भी नहीं साथ पा रहे कांग्रेस ने तो इसे रिमोट पर चलने वाली सरकार कह दी है और जिस तरीके से वरिष्ठ की उपेक्षा हो रही है उसे लेकर भी साय सरकार पर कई तरह के सवाल है कहा जाता है कि विधायक तो छोड़िए मंत्रियों की भी बात यदि अधिकारी नहीं सुन रहे हैं तो छत्तीसगढ़ में सरकार कौन चला रहा है हालांकि कई सुपर सीएम खुद विष्णुदेव साय की धर्म पत्नी कौशल्या देवी भी अपने को सुपर सीएम कहने से परहेज नहीं करती तो इसके अलावा संगठन का भी अपना दबदबा है संगठन मंत्री पवन साय का जिस तरीके से लाल बत्ती के इच्छुक लोग चक्कर लगा रहे हैं वह भी क्या सत्ता का केंद्र बिंदु ब न भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान के दौरान जिस तरीके से रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने को अपमानित महसूस जिस तरीके से गुस्से में आकर उन्होंने मोमबत्ती को बुझाया और वहां से चले गए यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है और लोग तो इसके लिए बृजमोहन अग्रवाल को दोष दे रहे हैं कि हर जगह ठने की क्या जरूरत है जहां मान सम्मान ना हो वहां जाने की क्या जरूरत है और यह बात नंद कुमार साय को लेकर भी जन चर्चा का विषय तब ऐसे दुर्ग से दूसरी बार सांसद बने विजय बघेल का गुस्सा क्या वायरल नहीं हो रहा है उन्होंने कर्मचारियों के एक कार्यक्रम में जिस तरीके से विष्णु देव साय सरकार पर प्रहार किया वह पहले आप खुद सुन अभ दिल्ली ग मुख्यमंत्री बात रता हं आप लोग ज्यादा दिन इसको उइ मत अपनी हसी मत उड़ाए अब अगर कर्मचारी आंदोलन होंगे उस आंदोलन में यो आपने बनाया था और जी की गारंटी के रूप में हमने इसको दिया है तो मोदी गारंटी झूठी ना हो उस पर विश्वास बना रहे कर्मचारी अधिकारियों का इसलिए इसको तत्काल आप निर्णय लीजिए नहीं तो अब धीरे धीरे आग सुलग रही है कब स्पोट स्थिति आ जाएगी मैं नहीं जानता और उसम मैं भी शामिल होगा य बोल यानी आप सोचिए कि विजय बघेल किस तरीके से नाराज है और अपनी टिकट या अपनी कुर्सी तक को दाव में लगाने को तैयार तभी मिलता है नहीं तो टिकट तो बहुत लोग को मिलता है हर कोई जीत जाता तो ये मैं उसकी चिंता नहीं करता टिकट मिले नहीं मिले वो जिसकी किस्मत में होगा मिलेगा मेरी किस्मत में रहेगा मिलेगा लेकिन छत्तीसगढ़ में किस तरीके से सत्ता चल रही है यह सिर्फ एक बानगी है अपराध बेलगाम हो चुके हैं लगातार अपराध की घटनाएं घट रही है लोग देख रहे हैं लेकिन गृह मंत्री आकड़े बाजी में लगे हैं वे कहते हैं कि अपराध में कमी आई विष्णु देव साय दावा करते घूम रहे हैं कि डबल इंजन की सरकार होने की वजह से बस्तर में विकास का नया युग शुरू हो गया क्योंकि डबल इंजन की भी सरकार है उसका भी लाभ मिल रहा है और हमारे देश असस गृह मंत्री आदरणीय अमित शाह जी आठ महीने में दो बार आकर हम लोग का हमारे प्रदेश के जो जवान है जो सैनिक बल है उनका हौसला अफजाई किए हैं और बहुत मजबूती के साथ हम लोग नक्सलवाद के साथ लड़ रहे हैं लेकिन हकीकत तो यह है कि पार्टी के भीतर असंतोष जमकर भरा हुआ है और जिस तरीके से विजय बघेल ने कहा कि कभी भी विस्फोटक रूप ले लेगा तो क्या सचमुच विष्णु देव साय सत्ता संभालने में असफल हो रहे हैं या फिर सचमुच रिमोट की यह सरकार है जो हर काम मोदी शाह के इशारे पर करती है और इसीलिए काम पूरा होने में विलंब हो रहा है भ्रष्टाचार को लेकर भी कई तरह के सवाल है हालांकि अभी तक किसी भारतीय जनता पार्टी के नेता भ्रष्टाचार को लेकर खुलकर नहीं सामने आए हैं लेकिन कहा जा रहा है कि शराब घोटाला के लिए जो सिस्टम जिम्मेदार था वही सिस्टम तो चल रहे हैं जल जीवन मिशन में भी वसूली बाजी जमकर हो रही है तो संविदा नियुक्ति के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं एम फंड को लेकर जिस तरह के आरोप से भूपेश बघेल की सरकार घिरी थी कमो बेश वही स्थिति है कलेक्टरों की अपनी मनमानी चल रही है यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो विष्णुदेव साय सरकार आठ महीने में भले ही मुख्यमंत्री कहते हो कि मात्र आठ महीने जब से हम लोग सरकार में आए हैं अभी सरकार को मात्र आठ महीने हुए हैं लेकिन किसी भी सत्ता के लिए उसकी परफॉर्मेंस को देखना आठ माह का समय कम नहीं होता है तब ऐसी परिस्थिति में विजय बघेल ने जो सवाल उठाए हैं या सीधा-सीधा अपनी ही सरकार पर हमला किए उन्होंने तो पत्र भी लिख दिया है विष्णु देव साय को तब देखना है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति क्या जम्मू कश्मीर और हरियाणा में जिस तरीके से बगावत हो रहे हैं उसी तरीके से सामने आएगा हालांकि इसकी कोई संभावना इसलिए भी नहीं दिखाई देती क्योंकि सरकार का कार्यकाल पूरे 4 साल बचा है लेकिन चुनाव के आते ही क्या जिस तरीके से हरियाणा में गुस्सा फूटा है कश्मीर में गुस्सा फूटा है उसी तरीके से अब जहां-जहां डबल इंजन की सरकार है वहां वहां गुस्सा फटेगा !

Vidio देखें 


https://youtu.be/9QFbrpJ9Gb0?si=lknlElrzmbgS8gSX

शनिवार, 9 मई 2026

दंतक्रांति में मांसाहार को लेकर फँस गये रामदेव, कोर्ट का नोटिस…

 

दंतक्रांति में मांसाहार को लेकर फँस गये रामदेव, कोर्ट का नोटिस…

पतंजलि योग पीठ के करता धरता योग गुरु के नाम से विख्यात बाबा रामदेव एक बार फिर क्या बुरी तरीके से फंस गए हैं क्या उन्होंने शाकाहारी हिंदू समाज की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हुए उन्हें समुद्री फेन मछली की हड्डी वाला यह पूरा खेल परोस दिया है उनका धर्म भ्रष्ट कर दिया है इसे लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई और ना केवल दंत क्रांति मंजन या टूथपेस्ट बल्कि रामदेव बाबा के 21 उत्पादों पर मांसाहार का प्रयोग करने और हरा बटन लगाने एक संकेत है लाल आपके निशान होंगे चिन्ह तो वह मांसाहारी होगा हरा होगा तो शाकाहारी होगा और शाकाहारी चिन्ह हरा वाला लगाकर मांस से बने उत्पादन या उन उत्पादन में जिसमें मांस मिला है उसे बेच देने का आरोप लगाते हुए एक याचिका दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार सहित पतंजलि योग पीठ के कर्ता धरता हों को भी नोटिस जारी किया हमने गल में सर्च करने की कोशिश की कि आखिर यह समुद्री फेन क्या है और इसका उपयोग किस तरीके से मांसाहार इस समुद्री फैन में कैल्शियम वगैरह की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इसका उपयोग दंत क्रांति मंजन बनाने में किया जा रहा था और यह उत्पाद मांसाहारी और यदि इसकी उपयोग किया जा रहा ता तो यकीन मानिए कि दन क्रांति मंजन जो है वह मांसाहारी की श्रेणी में आएगा लेकिन इस दौर में स्वदेशी अपनाओ मांसाहार से दूर रहो शाकाहारी अपनाओ और धार्मिक भावनाओं को जिस तरीके से कुरे ने की कोशिश हुई है उस दौर में बाबा रामदेव उन हिंदूवादी संगठनों के नेता है इसलिए उनको लेकर जितनी भी शिकायत की जाती है हिंदूवादी संगठन भड़क जाते हैं और बाबा रामदेव के सपोर्ट में खड़े हो जाते हैं लेकिन इस बार जो मामला समुद्री फेन का है या दंत क्रांति का है वह क्या उस पर क्या निर्णय होगा यह तो न्यायालय तय करेगा लेकिन एक बात तो तय है कि इस दौर में जिस तरीके से धर्म की आड़ में राजनीति भी की जा रही है तो धंधा भी किया जा रहा है अब देखना है कि इस मामले में पतंजलि का क्या जवाब आता है और उस पर दिल्ली हाई कोर्ट क्या निर्णय लेती है अगली सुनवाई की तारीख थोड़ी लंबी है नवंबर में फैसला होगा तब तक दीपावली भी लोग मना चुके हो दंत क्रांति के साथ !

Vidio देखें 


https://youtu.be/3GMz8MepQPg?si=3brutNM847nFSp0F

शुक्रवार, 8 मई 2026

जब रोती हुई इस छात्रा ने खोल दी सरकार की पोल

जब रोती हुई इस छात्रा ने खोल दी सरकार की पोल 


 छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था किस कदर बदहाल है कि बच्चों को अपना भविष्य खराब नजर आने लगा है और क्या विष्णुदेव साय सरकार ने यह निर्णय ले लिया है कि जो भी बच्चे अब स्कूलों की बदहाली पर आवाज उठाएंगे उन्हें जेल में सड़ा देंगे क्या जिला शिक्षा अधिकारी खुद को मुख्यमंत्री समझने लगे हैं क्योंकि उनको लगता है कि मुख्यमंत्री से तो हर कोई मिल नहीं सकता तब उनकी मनमानी मुख्यमंत्री तक कैसे पहुंचे सवाल सिर्फ इस अहिवारा के बच्चों का नहीं है सवाल तो प्रदेश में बदहाल होती शिक्षा का है ऐसे सैकड़ों स्कूल है जहां के बच्चों को शिक्षक भी नहीं मिल पा रहा है और हालत यह है सरकार कोई व्यवस्था करना ही नहीं चाहती और क्या सत्ता ने अब जिला शिक्षा अधिकारियों को यह पावर दे रखा है कि वह अपनी मनमान चलाए और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने वाले बच्चों को जेल में सड़ा यह कई तरह के सवाल है जिसका जवाब ढूंढना बेहद मुश्किल है इतने बड़े मामले में कांग्रेस की भी चुप्पी हैरान कर देने वाली यानी आप सोचिए कि एक जिला शिक्षा अधिकारी की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वह अपने स्कूल की समस्या को लेकर शिक्षकों की कमी को लेकर आने वाले बच्चों को जेल में डाल देने की धमकी दे रहे हैं क्या जिला शिक्षा अधिकारी के ऊपर बैठे कलेक्टर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं इतने ताकतवर हो गए जिला शिक्षाधिकारी ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन जब आप इन बच्चों का पूरा वीडियो देखेंगे तो आपको समझ में आएगा कि किस हद तक छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था बदहाली की कगार पर पहुंच गया है और अधिकारियों की मनमानी किस हद तक पहुंच गई हम लोग कलेक्टर सर के पास गए थे तो उसने सर ने ना हम लोगों को डीओ साहब के पास भेजा कि हम लोग दो दिन में व्यवस्था करते हैं टीचर्स की लेकिन डीओ सर ने हमसे बदतमीजी से बात की बोलते हैं ऐसी बहस मत करो चलो जाओ यहां से क्या ये सब लिख एप्लीकेशन में कौन सिखाया तुम लोगों को लिखने के लिए जिी जेल का वो करोगे ना समझ जेल का वो करोगे ना समझ आ जाएगा ऐसे वैसे करके बोले हम लोगों को और हमारा जो क्या मांगने गए थे बेटा शिक्षक दो साल हो गए एक भी टीचर्स नहीं है तो हम लोग टीचर्स की मांग करने के लिए गए थे कितने टीचर नहीं है एक भी 11 12 पिछले साल से खुला है लेकिन 11 को जैसे तैसे करके हम लोग पास कर ले लेकिन 12थ हमारा बोर्ड है बोर्ड हमारा बेस है तो हम लोग कैसे फाइट करेंगे उसको तो हम लोग टीचर्स की मांग करने के लिए गए थे तो वैसे ही बोल दिया ओ आपके स्कूल का क्या नाम है कितने बच्चे हैं जिसमें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल लीवा से हैं हम लोग और चार टीचर्स बस है वो भी ना 10थ के लिए है 11 12थ के नहीं है वो सर मैम जो है वो 160 अभी क्या चाह रहे हो अभी हमारे पास टीचर आज ऐसे करके बोलने के लिए आए थे लेकिन ओ सर ने हमको ये सब बोल दिया ठीक आपका नाम बताओ आरती साहू बायो कहा जा रहा है कि यह स्थिति केवल अवारा की नहीं है अमूमन किसी भी जिले के शिक्षा अधिकारियों का रुतबा देखने को बनता है शिक्षक वर्ग भी उनसे परेशान रहते हैं कभी छुट्टी को लेकर तो कभी दूसरे मामले को लेकर य सरकार के आने के बाद बढ़ोतरी हुई है कहा जाए तो गलत नहीं होगा !

Vidio dekhen


https://youtu.be/hVkT305tI5Y?si=eYp2teVu_-FoW6P3

छापा-छापा का खेल, कब होगी गिरफ़्तारी…

 

शराब कांड - छापा-छापा का खेल, कब होगी गिरफ़्तारी…

एक तरफ छत्तीसगढ़ में राजनीतिक गर्मी उफान पर है तो दूसरी तरफ ईडी सीबीआई एसीबी ईओ डब्लू की भूमिका भी अब अचानक तेज हो गई है और जिस तरीके से पिछले दिनों शराब घोटाले के मामले को लेकर आपकारी विभाग के 15 अफसरों से पूछताछ की गई क्या उनकी गिरफ्तारी होगी यह बड़ा सवाल है करोड़ों अरबों रुपए के शराब घोटाले को लेकर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही भारतीय जनता पार्टी के निशाने पर है और सत्ता जाने की बड़ी वजह में से एक वजह शराब घोटाला भी रहा हालांकि इस पूरे मामले में राजनीति के जानकारों का कहना है कि भूपेश बघेल की गिरफ्तारी शायद इस मामले में ना हो क्योंकि उन्होंने जिस तरीके से शराब घोटाले के मामले को अंजाम दिया है उसमें उनकी संलिप्तता पाना बड़ा मुश्किल है उनके खिलाफ सबूत जुटाना बेहद मुश्किल है कोई मुंह खोल दे तो बात अलग है जो आरोपी धरे गए हैं 

शराब घोटाले में अनवर ढेबर अनिल टुटेजा सौम्या चौरसिया यानी इन बड़े आरोपियों में से कोई यदि मुंह खोल दे तब ही भूपेश बघेल की मुसीबत बढ़ सकती है लेकिन जो वर्तमान परिस्थिति है और जिस तरीके से ईडी पर भी वसूली के आरोप लगे हैं एसीबी और ईओडब्ल्यू पर भी पहचान देख देख देख कर कारवाही करने का आरोप लगाए उसके बाद जिस तरीके से अचानक आपकारी विभाग के 15 अफसरों से जो पूछताछ की गई है क्या वे अफसर धरे जाएंगे हालांकि आपकारी विभाग के तत्कालीन प्रमुख निरंजन दास अभी जेल की सलाखों के पीछे और कहा जा रहा है कि वे तो सिर्फ एक मोहरा थे असल मास्टर माइंड तो अना तो अनिल टुटेजा है ना अनोवर ढेबर है बल्कि जो आरोप पत्र दाखिल हुए उनके अनुसार तो विवेक ढांड की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे लेकिन अभी तक विवेक ढांड से ना तो कोई पूछताछ हुई है और ना ही कोई कारवाही की पहल हुई ऐसे में क्या विवेक ढांड ने सेटिंग कर ली क्योंकि इस दौर में जिस तरीके की खबरें आ रही है उसमें हमें सेटिंग शब्द का इस्तेमाल करने मजबूर होना पड़ रहा है राम गपाल अग्रवाल का मामला सेट हो गया यही चर्चा है जो आम लोगों में चर्चा है वह यही चर्चा है और कांग्रेस तो बिना कोष अध्यक्ष के संगठन चला रही है राम गोपाल अग्रवाल कहां है इसका किसी को पता नहीं इसके अलावा भी जो आईपीएस अधिकारी थे जिनसे बकायदा ईडी ने पूछताछ की थी और कहा जाता है कि उनके खिलाफ गंभीर तरह के सबूत भी मिले थे लेकिन ना तो भोजराज पटेल के खिलाफ जुर्म दर्ज हुआ ना उनकी गिरफ्तारी हुई ना तो पारुल माथुर को लेकर किसी तरह की सुगबुगाहट सुनाई दे रही है इसके अलावा दीपांशु काबरा से तो परिवहन घोटाले के मामले में भी पूछताछ की खबरें आते रही महादेव सट्टा से भी कई आईपीएस अधिकारियों के नाम रहे ऐसी परिस्थिति में जब इन लोगों के खिलाफ ना तो कोई जुर्म दर्ज हो रहा है और ना ही गिरफ्तारी हो रही है ना पूछताछ हो रही है तो क्या यह पूरा मामला एक तरह से सेट हो चुका है यह कई तरह के सवाल हैं और यह जन चर्चा का विषय है कि आखिर यह लगातार छापे की कारवाई जमानत नहीं देना हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि पीएमएलए कानून जो है वह भी अब जमानत के अधीन आ गया है यानी जमानत अधिकार है और जेल अपवाद तब ऐसी परिस्थिति में छत्तीसगढ़ में जो 15 अपकारी अधिकारियों के यहां छापेमारी की कारवाई हुई है या पूछताछ की जो कारवाई हुई है उसे लेकर भी तो सेटिंग की खबरें आ रही तो क्या सिर्फ वसूली के लिए दबाव बनाने का खेल चल रहा है लोगों को बड़ी उम्मीद थी जब अमित शाह ने भरी चुनावी सभा में कहा था कि भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे शासन में आएंगे त भ्रष्टाचार करने वा को लेकिन जो परिस्थितियां इन आ न में बनी है आठ महीने से ऊपर हो रहे हैं विष्णु देव साय सरकार को यानी इस डबल इंजन सरकार को और जो परिस्थितियां निर्मित हो रही है वह कारवाही के नाम पर खाना पूर्ति की अधिक दिखाई दे रही है तब इन 15 आपकारी अफसर जो इन दिनों निशाने पर है उनके खिलाफ क्या होगा !

Vidio देखें 


https://youtu.be/MGMMmhipLHI?si=uSVPQeqKzC8x7DoJ

सोमवार, 4 मई 2026

जब बुरी तरह से फँस गई महिला मंत्री

जब बुरी तरह से फँस गई महिला मंत्री


 प्रदेश की एकमात्र महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के जेठ के द्वारा जिस तरीके से शराब खोरी के दौरान पुलिस से उलझा गया और उसके चलते लक्ष्मी राजवाड़े की जो छीछालेदर हुई है क्या इस पर पुलिस अब लीपापोती का खेल कर रही है यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इस पूरे मामले को लेकर जिस प्रधान आरक्षक देवनारायण नेताम ने रिपोर्ट रोजनामचा में दर्ज की थी किस तरीके से 20 बार फोन करके उन्हें धमकाया गया था उस पर जुर्म दर्ज करने की बजाय बस स्टैंड में मौजूद एक व्यक्ति के शिकायत पर जमानती धारा लगाकर मामले की तीसरी करने की कोशिश की हालांकि इस पूरे मामले में महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने क्या कहा यह सुन लीजिए पहले हमारे घर के हो चाहे किसी और के घर के हो जो गलत किया उ गलत का परिणाम भगत पड़े हमारे घर के हो चाहे किसी और के घर के हो जो गलत किया उ गलत का परिणाम भगत पड़ेगा लक्ष्मी राजवाड़े तो साफ कह रही हैं कि जिसने गुनाह किया है उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए लेकिन क्या यह सिर्फ मीडिया में कहने की बात है क्योंकि पुलिस कप्तान ने तो पहले ही महिला मंत्री के जेठ राजू राजवाड़े की दबंगई के आगे प्रधान आरक्षक को लाइन अटैच कर चुके हैं तब क्या उनका लाइन अटैच का जो फैसला है वह वापस होगा क्या देवनारायण नेता जैसे ईमानदार इस मामले में तो ईमानदारी दिखाई दे रही है के साथ न्याय होगा और उनकी रिपोर्ट पर जुर्म दर्ज होगा यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अब इस मामले को लेकर पार्टी के भीतर भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है कहा तो यहां तक जा रहा है कि महिला मंत्री की क्लास तक ली जा चुकी है और इस मामले को लेकर कांग्रेस के नेता अब सक्रिय होने लगे हैं दरअसल पूरे मामले को आप समझेंगे तो हैरान हो जाएंगे कि एक व्यक्ति सिर्फ मंत्री के जेठ होने की वजह से वह पुलिस की वर्दी के बिल्ले नि ल लेता है फाड़ देता है गाली गलोज करता है धमका है और थाने से जाने के बाद भी 200 बार फोन करके धमका आता है और उस हवालदार को पुलिस कप्तान लाइन अटैच कर देता यह किस तरीके का खेल है हालाकि यह मामला अब तूल पकड़ने लगा है और कहा जा रहा है कि पार्टी स्तर पर भी लक्ष्मी राजवाड़े को लेकर कई तरह की शिकायतें पहले से थी लेकिन चर्चा तो इस बात की भी है कि जिस एप्रोच के तहत वह मंत्री बनाई गई है ज्ञात हो कि दरअसल विष्णु देव साय सरकार पर यह आरोप इसलिए लग रहे हैं क्योंकि वे मंत्रिमंडल का विस्तार तक अपनी मर्जी से नहीं कर पा रहे हैं इसलिए कहा जा रहा है कि विष्णु देव साय सरकार में जिसे भी मंत्री पद मिला है वह किसी ना किसी तरह से पहुंच रखता है और उन्हें मंत्री पद इसी वजह से मिला है आखिर लक्ष्मी राजवाड़े को किसकी पहुंच से मंत्री पद मिला है यह बड़ा सवाल हो सकता है राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चा है लेकिन कहा जा रहा है कि अब पुलिस इस पूरे मामले में लीपापोती करने लगी और लक्ष्मी राज वाड़े से जो संतुलित बयान दिलवाया गया है वह भी किसी के इशारे से दिलाया गया है हमारे घर के हो चाहे किसी और के घर के जो गलत किया गलत का परिणाम भगना प तब देखना है कि आने वाले दिनों में जो करतूतों का वीडियो जारी हो रहा है या वायरल हो रहा है उस पर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी क्या निर्णय लेती है !

Vidio देखें 


https://youtu.be/PQ23EU90RRo?si=OVuoqMopHQhmv27o

रविवार, 3 मई 2026

डीपीएस में बच्ची से छेड़छाड़ का मामला तूल पकड़ा लेकिन क्या हुआ

डीपीएस में बच्ची से छेड़छाड़ का मामला तूल तो पकड़ा लेकिन क्या हुआ 

दुर्ग में डीपीएस में हुए एक मासूम से अनाचार के मामले को लेकर बवाल तो खूब मचा लेकिन कार्रवाई क्या हुई कोई नहीं जानता । ऐसे में लोगो की याद वापस लाने हमने उस समय के घटनाक्रम को फिर से बताने की कोशिश की है ।

छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी और इस बार गरमाने की वजह भूपेश बघेल ही है दरअसल चुनाव होने के बाद जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तब से भूपेश बघेल को घेरने की कोशिश जारी है हालाकि अभी तक भूपेश बघेल बचे हुए हैं लेकिन आगे बचे रहेंगे कहना बेहद कठिन है क्योंकि मामला सिर्फ कोयला और शराब घोटाला नहीं है बल्कि महादेव सट्टा पप से लेकर दूसरे तरह के भी मामले अब सामने आने लगे हैं बलौदा बाजार हिंसा के बाद जिस तरीके से सरकार ने भूपेश बघेल को घेरने के लिहाज से उनके समर्थक विधायक देवेंद्र की गिरफ्तारी की है उसके बाद राजनीति उफान पर है देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के खिलाफ जब भूपेश बघेल और पूरी कांग्रेस सड़क पर उतरने लगी तो इसी दौरान भूपेश बघेल की सुरक्षा चूक को लेकर मामला गरमाने लगा और बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर भूपेश बेल का रास्ता रोककर उनके सुरक्षा अधिकारियों से के साथ बदतमीज जी का जो मामला सामने आया उसके बाद कांग्रेसी सड़क पर उतर आए भिलाई में जब कांग्रेसी थाना घेरने जा रहे थे तो इस दौरान पुलिस लाठी चार्ज करती और राजनीति को लेकर जब दुर्ग एसपी जितेंद्र शुक्ला का रुख कड़ा दिखाई देने लगा तो भूपेश भेल ने लाठी चार्ज के बाद सीधे-सीधे एसपी को ही गुंडा खेत सुरक्षित है ना गाय गरवा सुरक्षित है ना बेटी बहु सुरक्षित है नाना लमन तक सुरक्षित नहीं है बहुत प्रसिद्ध स्कूल है  अनाचार के शिकायत मिले है लेकिन एसपी ऐसे धमका शिकायत कर फर देख ले मतलब सब बड़ गुंडा कोई है तो दुर्ग में एसपी बन गए और अब एसपी के तेवर के बाद क्या भूपेश बघेल उन्हें घेरने के लिए नई रणनीति बना रहे हैं और क्या डीपीएस में हुई छेड़छाड़ के मामले को लेकर दुर्ग एसपी के खिलाफ मोर्चा खोल देंगे और कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे दरअसल डीपीएस में एक बच्ची की तबीयत खराब होती है और उसे जब इलाज के लिए मेडिकल हॉस्पिटल ले जाया जाता है तो रिपोर्ट सामने आती है कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट के साथ छेड़छाड़ की गई और इस घटना के सामने आते ही डीपीएस के सामने पालकों का प्रदर्शन होता है लेकिन कहा जाता है कि इस मामले में एसपी की भूमिका बेहद विवादास्पद है क्योंकि प्रदर्शन पालक कर चुके हैं डीपीएस के खिलाफ और इस मामले में पास को एक्ट के तहत कार्रवाई होनी थी लेकिन कार्रवाई करने की बजाय एसपी जितेंद्र शुक्ला ने कह दिया कि इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है उसे लेकर विवाद शुरू हुआ है और कल भूपेश बघेल सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने राजधानी में पत्रकार वार्ता लेकर एसपी को हटाने की मांग कर दी भूपेश बघेल के साथ पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के दिग्गज माने जाने वाले नेता सत्यनारायण शर्मा रवींद्र चौबे धनेंद्र साहू सहित कई नेता उपस्थित इन लोगों ने डीपीएस में बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में प्रदेश सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए तो एसपी पर भी गंभीर आरोप लगाए भूपेश बघेल ने तो इस पूरी घटना का सिलसिले वार बरा देते हुए कहा कि बच्ची की तबीयत खराब होने पर डॉक्टर ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि प्राइवेट पार्ट में जखम है जानकारी में आने के बाद पालकों ने स्कूल में 2 अगस्त को प्रदर्शन भी किया याने सोच एक महीने होने जा रहा है इस पूरे मामले में लेकिन पुलिस की भूमिका क्या है यह सोचा जा सकता है प्रिंसिपल और दुर्ग के एसपी ने बयान दिया कि बच्ची के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं एसपी ने मीडिया रिपोर्ट को गलत करार देकर धमकाया बेशर्मी के साथ एसपी ने कह दिया कि इसमें कोई तथ्य नहीं है पालक भी एफआईआर नहीं चाहते भूपेश बघेल ने पूछा कि कौन पालक होगा जो अपनी बच्ची से छेड़छाड़ के बाद अपराधी के खिलाफ कारवाई नहीं चाहेगा उन्होंने तो डीपीएस के प्रिंसिपल के पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की भी मांग कर दिए और सवाल उठाया कि क्यों नहीं कराया गया बगेल ने तो यहां तक आरोप लगा दिया कि एसपी के बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं और जिस व ग्रुप में वे जुड़े हुए हैं उस ग्रुप में भी जब उन्होंने इसे तथ हीन बताया था तो पालकों ने गुस्सा जाहिर किया जबकि पास्को एक्ट में प्रावधान है कि सूचना मिलते ही जुर्म दर्ज किया जाता है उसके बाद जांच होती यदि पालक 2 अगस्त को प्रदर्शन कर रहे थे तो क्या शासन प्रशासन की यह जिम्मेदारी नहीं थी कि उस बच्ची का मेडिकल टेस्ट कराया जाता लेकिन यह सब नहीं हुआ तो दूसरी तरफ इस पूरे घटनाक्रम में भूपेश बघेल ने अपनी ताकत ना केवल सत्ता को दिखाई है बल्कि पार्टी के भीतर भी अपनी ताकत दिखाई है और एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने जेल में बंद अपने खास समर्थक देवेंद्र यादव को राष्ट्रीय पदाधिकारी जैसे महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दिलवा दी अब देखना है कि राजनीति किस करवट बैठती है !

Vidio देखें 


https://youtu.be/B9E_ngA57KY?si=NbQxy2vALdXY_7cs