गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में

रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में

 केंद्र के सरकार द्वारा यानी मोदी सत्ता के द्वारा लगातार 36 गढ़ की हो रही उपेक्षा की खबरों के बीच एक और चौकाने वाली खबर आई है महत्वकांक्षी योजना 45 हजार करोड़ की इस योजना को भी मोदी सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है हालांकि यह योजना नितिन गडकरी के विभाग की है सड़क निर्माण से संबंधित है लेकिन अचानक ही जिस तरीके से दैनिक प्रगति रिपोर्ट ही बंद करने की बात कर दी गई है पत्र लिख दिया गया है बकायदा उसके बाद इस महत्वकांक्षी योजना जो छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होता खासकर यहां से बड़ी संख्या में लोग हैदराबाद जाते हैं इलाज के लिए और इस योजना के बंद होने से किस तरह का नुकसान होगा इसकी भी कोई कल्पना नहीं कर सकता 4500 की यह योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर राजनांदगांव होते हुए यह योज यह सड़क हैदराबाद तक जाना था महत्त्वपूर्ण योजना लेकिन कहा जा रहा है कि इस योजना में जो 45 हज करोड़ रुपए लगने थे शायद उसे बचाया गया है क्योंकि बिहार और आंध्र प्रदेश को इस बार बजट में बड़ी राशि दी गई है हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव होने हैं उ से लेकर भी बजट में लंबे चौड़े प्रावधान किए गए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ को क्या मिल रहा है यह सबसे बड़ा सवाल है डबल इंजन की सरकार है उसके बाद भी लगातार राज्य बनने के बाद लगातार 10 सीटें देने वाली भारतीय जनता पार्टी को यदि कैबिनेट मिनिस्टर के लायक भी कोई नहीं लग रहा है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठे सिर्फ एक राज्य मंत्री मिला है तो खन साहू के रूप में लेकिन अब जो खबरें आ रही है वह बेहद ही चौकाने वाली खबर इसलिए है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ को बहुत बड़ा फायदा होने वाला था रायपुर राजनाथ गांव गढ़ चिरौरी गोमी परी आदिलाबाद रामा करीम नगर होते हुए यह सड़क हैदराबाद को जोड़ती थी जिसमें छत्तीसगढ़ में 101 किलोमीटर सड़क बनना था तो महाराष्ट्र में 70 किलोमीटर और बचे 388 किलोमीटर सड़क आंध्र प्रदेश में है और इसे अचानक क्यों ठंडे वस्त डाल दिया गया है इसे लेकर अभी तक सरकारी स्तर पर कोई भी जवाब नहीं आया है कहा जाता है कि इस सड़क मार्ग में वन भी पढ़ते हैं मोहला मानपुर और गढ़ चलो गढ़ चिरौली का क्षेत्र आता है जहां अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया था हालांकि दिक्कत थी अधिग्रहण में क्योंकि वन भूमि को अधिग्रहण करने का जो एनजीटी जो मापदंड है उसकी वजह से कुछ दिक्कत थी लेकिन लगातार दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाए जा रहे थे और कल ही अचानक दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाने का काम रोक देने का पत्र भी जारी कर दिया गया डीपीआर बंद करने के इस पत्र के बाद हड़कंप मचा हुआ है जो इस परियोजना में लगे हुए थे इस योजना में लगे हुए थे सरकारी अधिकारी बकायदा सर्वे हो रहे थे कि किस तरीके से सड़क बन छत्तीसगढ़ में जो 101 किलोमीटर सड़क बनना है उसके रास्ते क्या होंगे यह सब भारत माला प्रोजेक्ट के तहत हो रहा था तब सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कब तक होते रहेगी और अब जब इस परियोजना को साढे हजार करोड़ के इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है तो इसकी शुरुआत अब कब होगी !

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

जल जीवन मिशन के घपलों पर क्यों हो रही लीपा पोती की कोशिश…

 

जल जीवन मिशन के घपलों पर क्यों हो रही लीपा पोती की कोशिश…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना हर घर में जल पहुंचाने की पीने का पानी पहुंचाने और इस योजना का बंटाधार कोई और नहीं छत्तीसगढ़ में हो रहा है जहां डबल इंजन की सरकार है विष्णु देव साय की सरकार है।

सरकारी तंत्र जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों के मिली भगत से जिस तरीके से जल जीवन मिशन का यहां कबाड़ा हो रहा है लोगों को स्वक्ष पीने का पानी नहीं मिल रहा है वह हैरान कर देने वाला है लगातार सरकार की तरफ से कार्रवाई की बात तो की जा रही है लेकिन काम अपूर्ण होने के बाद भी यदि पूर्ण लिखकर ठेकेदारों को पैसा दिया गया है तो फिर यह पैसा क्या अधिकारियों से वसूला जाएगा या ठेकेदारों से 

सरकार विधानसभा में उठे सवालों से बचने की कोशिश करती है वह सही जवाब देने की बजाय इधर उधर की बात कर रही है तो क्या इस पूरे खेल में मंत्री और ठेकेदारों के बीच गठजोड़ हो गया है क्योंकि पिछली सरकार में यानी भूपेश बघेल की सरकार में तो इस योजना में काम लेने वाले ठेकेदारों के द्वारा सीधे बंगले में पैसा पहुंचाने का आरोप लगते रहा बजट इतना बड़ा है कि इसे लेकर तब के तत्कालीन पीएचई मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच भी ठन गई थी तो क्या इस बार जब सरकार बदल गई और डबल इंजन की सरकार है वह भी इस योजना में हो रहे गड़बड़ घोटाले पर कारवाही करने की बजाय कारवाही के नाम पर केवल खाना पूर्ति कर रही है और ठेकेदारों से लेकर इस योजना में लगे इंजीनियरों के साथ मिलकर कोई नया खेल खेल रही है क्या कुछ हो रहा है हर जिले से कुछ ना कुछ गड़बड़ी की खबरें आ रही है और कहा तो यहां तक जा रहा था कि यह मामला ईडी के पास भी जाने वाला है लेकिन सरकार बदलने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया और विधानसभा में क्या कुछ हो रहा है आप खुद देखिए केंद्र सरकार की महती योजना की नल जल के द्वारा स्वच्छ पेय जल की व्यवस्था उपलब्ध कराना और समय अवधि लगभग पूर्णता की ओर है लेकिन जिस प्रकार से अफरा तफरी इस विभाग में हुआ है और जिस प्रकार से करप्शन का भ्रष्टाचार का मामला आया है आज पूरे प्रदेश में यदि आप उसकी समीक्षा करा देंगे एक बार कि इसमें कितने गांव में अभी तक पानी पहुंचा है कितने चालू है कितने लोगों को पानी मिल रहा है वास्तविक में पूर्ववर्ती सरकार के द्वारा इसको भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया और आज छत्तीसगढ़ के जनता उसको भुगत रही है माननीय अध्यक्ष महोदय मैं मंत्री जी से उप मुख्यमंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जब इन पैनल किया गया ठेकेदारों को और इन पैनल करने के बाद में उनके साथ में जो अनुबंध इलेक्ट्रो क्लोनी रेटर यह जो खरीदने के लिए जो अनुबंध किया गया तो क्या उसमें किसी फर्म या संस्था का नाम पहले उसमें निर्धारित किया गया था कि कहां से उसकी खरीदी होनी चाहिए उसकी रेट क्या होनी चाहिए उसका मार्का क्या होनी चाहिए और क्या उसमें बाद में तब्दीली होते चली गई य पहले मैं आपसे जानना हूँ मंत्री अरुण साव ने इस पर जवाब देते हुए कहा लगातार हमारी सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के सपनों के अनुरूप जल जीवन मिशन का काम हो लोगों के घर तक शुद्ध पे जल पहुंचे इसके लिए लगातार हम काम कर रहे हैं और जहां पर भी अनियमितता  और गड़बड़ी मिल रही है उस पर कार्यवाही कर रहे हैं अभी-अभी छह एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया है चार को निलंबित किया है कुछ जो ठेकेदार जिनके काम में बहुत विलंब हुआ है उन पर भी कार्यवाही प्रस्तावित है और विभाग अपने कामों को दुरुस्त करने के लिए लगातार लगा हुआ है विस्तृत जवाब आ गया माननीय अध्यक्ष महोदय कोई शंका बाकी है हां बहुत बाकी है अरे प्रश्न लगने के बाद में प्रश्न लगने के बाद में छह को अभी आपने सस्पेंड किया उसके पहले तीन को आपने सस्पेंड किया था नौ तो हो गया है और इसके हां निलंबित मतलब सस्पेंड किया था टर्मिनेट तो मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि यह जो खरीदने के लिए इलेक्ट्रो क्लो रेटर जो अनुबंध किया गया और जो बार-बार उसमें बदली की गई इसको आपने स्वीकार किया है पहले आईएसआई मार् का का उन्होंने कहा कि आप खरीद लीजिए खरीदने के बाद में लगा दिए लगाने के बाद में छह लोगों को आपने उसमें सूचीबद्ध किया गया है जब आपने सूचीबद्ध किया और सूचीबद्ध करने के बाद में फिर उसके हिसाब से खरीदी हुई तो बाद में इसको निरस्त क्यों करना पड़ा है तो बाद में निरस्त करना पड़ा इसका मतलब यह है कि अधिकारी के क्या कंट्रोल में नहीं थे या अधिकारी जानबूझ कर के इसको उलझाना चाह रहे थे और उलझाना चाह रहे थे तो ऐसे अधिकारी के विरुद्ध में खिलाफ में आप क्या कारवाही करेंगे माननीय अध्यक्ष महोदय जैसे मैंने बताया कि जल जीवन मिशन का काम जो भारत सरकार की गाइडलाइन है उसके आधार पर होता है क्लोरिनेटर के लिए एसओ आर में स्पेसिफिकेशन दिया हुआ है और उस स्पेसिफिकेशन के अनुरूप जो लगाए गए क्लोरिनेटर है वह नहीं पाए गए और इसलिए उनका इंपैनलमेंट निरस्त किया गया नया इंपैनलमेंट किया गया है और इस पूरी योजना में खरीदी जो सामाग्री की है वह ठेकेदार के माध्यम से होता है हमारी जो एजेंसिया है वो जांच कर है और उसके आधार पर यह कार्यवाही होती है मैं अभी भी बोल रहा हूं कि जहां पर भी गड़बड़ी पाई जाएगी कठोर कार्यवाही होगी कठोर कार्यवाही तब करेंगे जब जांच होगी आपने कंपनी ने आपने निर्धारित किया एजेंसी को यह चार जगह से आप खरीदी करेंगे आपने रेट तय कर दिया तय करने के बाद में आखिर बदलना क्यों पड़ा बात तो यही है ना और जब बदलना पड़ा है तो उसमें जांच की बात आ रही है उसकी जांच क्यों नहीं कराना चाह रहे हैं मैंने वही स्पष्ट रूप से कहा है कि जांच के बाद जब पाई गई तो एसओ आर में जो मापदंड दिए गए हैं उस मापदंड के अनुरूप वो क्लोरिनेटर नहीं थे इसलिए उनका इंपैनलमेंट निरस्त किया गया है और अब सुनिश्चित करेंगे कि जो एसओ आर का मापदंड है उसके अनुरूप क्लोरिनेटर लगे चलिए आखरी प्रश्न माननीय अध्यक्ष महोदय आखरी प्रश्न दो तीन खंड में है वो मैं ब का पूछ र बहुत लंबा नहीं खींचना आदरणीय अध्यक्ष महोदय जी माननीय अध्यक्ष महोदय एक है पूरक प्रश्न ब में जो दिया है इन कंपनियो संस्थाओं को 1972 प 98 लाख राशि का कार्य मिशन अंतर्गत दिया गया था और 809 प8 से लाख राशि का भुगतान किया गया और भुगतान करने के बाद में आपने उसमें से 79 को आपने रिजेक्ट कर दिया तो जो रिजेक्ट किया और यह जो राशि दी गई है और राशि देने के बाद में आज उसकी अतन क्या स्थिति है कि उन लोगों से जो राशि दी गई है उस राशि की आप वसूली किए हैं उनके ऊपर में आप कोई एफआईआर कराए हैं उनके खिलाफ में अपराध पंजीव किए हैं या उसमें क्या करने वाले हैं इसको थोड़ा सा स्पष्ट करें आप माननीय अध्यक्ष महोदय जैसे मैंने बताया कि सामाग्री का क्रय विभाग से सीधे भुगतान नहीं होता है जल जीवन मिशन से भुगतान नहीं होता है सामाग्री का भुगतान ठेकेदार करता है हमने इंपैनलमेंट निरस्त किया है और ठेकेदार को यह सुनिश्चित करना है कि एसओ आर का जो मापदंड है उसके अनुरूप जो भी सामग्री लगना है वह लगे चलिए खत्म करिए माननीय अध्यक्ष महोदय यदि ठेकेदार की बात आ रही है मैं अपने विधानसभा में कोई स्पेसिफिक प्रश्न कर लीजिए दो बलक है बस विधानसभा पूछ लो और दो नहीं दो ब्लॉक में मैं उसका पूरा जो समीक्षा किया सरपंच भी उपस्थित थे सचिव भी थे जो गांव में जानकारी दे रहे थे और आपके अधिकारी भी थे केवल 10 पर जगह में सप्लाई आधा अधूरा शुरू हुआ है 90 जगह में सप्लाई शुरू नहीं हुआ है इसको अधिकारी ने स्वीकार किया है लेकिन ठेकेदार के खिलाफ में कोई कार्रवाई अभी तक आप नहीं कर पाए इसमें आप ठेकेदार को ला रहे हैं कि ठेकेदार उसमें मापदंड के अनुसार से जो है अरे आपके अधिकारी ने उसको जो भुगतान किया ठेकेदार ने उसको भुगतान नहीं किया है और अधिकारी ने जब भुगतान किया है और उसके बाद में आपने उसको निरस्त किया तो पैसा जो उनके पास में है उसकी वसूली विभाग करेगी कि नहीं करेगी और यदि नहीं कर रहे हैं तो इसका यह मतलब है कि आपके अधिकारी के मिली भगत है और नहीं तो उनके खिलाफ में शक्ति से कार्रवाई होनी चाहिए यह कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है यह कारण आप स्पष्ट करें ना माननीय अध्यक्ष महोदय जैसे मैंने कहा कि जो सामाग्री सप्लाई होती है जो इक्विपमेंट लगते हैं वह ठेकेदार और निर्माता इकाई जो पंजीकृत है उससे वह खरीदते हैं और जो माननीय सदस्य ने अपने क्षेत्र की बात कही कि अनेक स्थानों पर पानी नहीं आ रहा है हम उसकी जांच भी करने वाले हैं और जहां पर पानी नहीं आ रही है उसकी क्या दिक्कत है क्यों जल नहीं आ रहा है नलों में यह हमारे ध्यान में है और इसके लिए हम पूरा शक्ति से काम कर रहे हैं चलिए आपके पूरे विधानसभा की जांच करा लेंगे आदरणीय अध्यक्ष म जी क दिया आप लिख के दे पूरी जांच हो जाएगी मैं तो केवल मंत्री जी से इतना आग्रह करना चाहता हूं बोल दिया कि बारबार जो गड़बड़ियां आई है वो आप उसको स्वीकार कर रहे हैं कर लिए कर कर ब कमेटी बना कर उसकी जांच करा दीजिए यह बड़ा मामला है प्रदेश का मामला है विधान मा रु का मामला है तो करोड़ों रुपया का मामला है इसमें आप कोई कमेटी बना करके उसकी जांच करा दीजिए चलिए आदरणीय अध्यक्ष महोदय जी मैंने भी जल जीवन मिशन में जानकारी चाही थी और उसका आगे है जानकारी अध्यक्ष महोदय जी मेरे संज्ञान में जो आया है इन्होंने दिया है मंत्री जी ने तो इसमें अध्यक्ष महोदय जी कई कार्य ऐसे हैं जो अभी अपूर्ण है कहीं टेस्टिंग होकर छोड़ दिया गया है कहीं पर कार्य चालू ही नहीं हुआ है और यहां पर शुरू से लेकर नीचे तक अध्यक्ष महोदय पूरा पूर्ण लिखाया हुआ है अकलवारा मेरा गांव है अध्यक्ष मद जी गुरुर ब्लक में अकलवारा में अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ और इसमें लिखा हुआ है पूण तो मैं माननीय अध्यक्ष महोदय जी आपसे निवेदन करती हूं कि मुझे मंत्री जी यह बताए कि पूर्णता की परिभाषा क्या होता है आप पूर्ण किसको बोलते हैं आप मेरे को बस परिभाषा चाहिए आपसे महीना अमत का माननीय अध्यक्ष महोदय जी क एक गाव है वहां सिर्फ 15 दिन चालू हुआ है नल उसके बाद बंद कर दिया गया खर्रा गांव का अध्यक्ष महोदय जी साथ में बगदरी में टेस्टिंग हुआ है उसके बाद कार्य बंद कर दिया जाए ऐसे बहुत सारे विधानसभा मेरे पूरे आपको लिस्ट भी दे दूंगी जहां पर सिर्फ 15 दिन चला है वहां बंद कर दिया गया है जहां आप लिस्ट दे दीजिए जी आप लिस्ट दे दीजिए बताइए तो आप बस मेरा निवेदन है कि आप जल्द से जल्द उसे पूर्णता और पूर्णता की परिभाषा अगर दे द कर बता दीजिए का अर्थ बता द माननीय अध्यक्ष महोदय उन्होंने पॉइंटेड प्रश्न पूछा है कि पूर्णता का मतलब क्या है और दूसरा दो गांव का उन्होंने अकलवारा और एक और गांव का नाम बताया है कि वो 15 दिन चला उसके बाद बंद है बद में बगदरी का तो यह शुरू होगा कि नहीं होगा दोनों गांव का दिखावा लीजिए और पूर्णता का पूर्णता का परिभाषा थी आपकी बारी आती तो आपका पूरा जवाब देता आपद छग का मामला है छतीसगढ़ में च रहान अध्यक्ष मद माननी अध्यक्ष महोदय माननीय अध्यक्ष महोदय उनके जो प्रश्न है वो मुझे बता देंगे मैं परीक्ष अध्यक्ष महोदय जीभी अभी जो अध्यक्ष महोदय जीस अध्यक्ष महोदय जी जो अभी रिपेयरिंग का कार्य हुआ है उसमें सिर्फ एक से दो इंच क्रंक हुआ है जो बरसात में उखड़ गया कृपा करके उसमें गुणवत्ता लाइए य निवेदन करती तो किस तरीके से इस योजना का कबाड़ा निकाला जा रहा है किस तरीके से अधिकारियों को बचाया जा रहा है !

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https://youtu.be/TPns_0UgElQ?si=iZ10ttylKpgzwSNw

मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

उद्योगपतियों की सरकार, लोग मरने को लाचार

 उद्योगपतियों की सरकार, लोग मरने को लाचार 


देश का बजट जारी कर दिया गया है एक लाइन में हालांकि हम बजट को लेकर ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं या नहीं समझते हैं क्योंकि अब तक जितने भी बजट आए हैं उसमें कहा जाता है कि फला फला फला वस्तुओं की कीमत कम हो रही है वह सस्ती हो रही है लेकिन आज तक कभी सस्ती होते नहीं देखी और जिसकी बढ़ेगी बताते हैं तुरंत दूसरे दिन बढ़ जाती है लेकिन सीधा-सीधा एक लाइन में कहा जाए कि केंद्रीय बजट क्या है तो यही कहा जा सकता है कि यह सत्ता को बचाने का बचाव बजट है बिहार आंध्र प्रदेश क्या कुछ नहीं दिया गया क्या यह दूसरे राज्यों के बजट में कटौती करके दिया गया है जिन राज्यों में चुनाव होने हैं इस साल तीन राज्यों में चुनाव होने महाराष्ट्र झारखंड हरियाणा उन्हें भी कुछ कुछ मिल गया लेकिन 36 गढ़ को क्या मिला एक बार जिक्र जरूर आया बजट भाषण में तो लगा कि अब छत्तीसगढ़ को भी कुछ मिलेगा लेकिन वह नक्सलियों से संबंधित था खैर यह तो बजट की बात हुई लेकिन छत्तीसगढ़ में क्या कुछ हो रहा है क्या मोदी सरकार की तरह छत्तीसगढ़ की सरकार भी कार्पोरेट के साथ गट जोड़ करके आम लोगों का जीवन खतरे में डाल देना चाहती क्या छत्तीसगढ़ की सरकार को उद्योग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरा भी चिंता नहीं है यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कल ही विधानसभा में खुद भारतीय पार्टी के विधायक अनुज शर्मा ने जब सवाल उठाया तो उद्योग मंत्री लखन लाल देवागन के जवाब जिस तरीके से थे वह हैरान कर देने वाला है कि आखिर छत्तीसगढ़ के लोगों के स्वास्थ के साथ किस तरीके से उद्योग खिलवाड़ कर रहे हैं 

अनुज शर्मा ने कहा कि मेरे पास 108 उद्योगों की सूची है जहां स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं हुए हैं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जरूर कहा कि हमने इनके खिलाफ कारवाही का निर्णय लिया है कारवाही चल भी रही है कोर्ट में भी मामला चल रहा है लेबर कोर्ट में भी मामला चल रहा है और यह कहते हुए उन्होंने 108 उद्योगों का तो जिक्र नहीं किया लेकिन राजधानी के नजदीक सिलतरा में जो उद्योग है उसका जिक्र जरूर उन्होंने किया उन्होंने खुद बताया कि सिलतरा में 32 उद्योग हैं जिसमें से 25 उद्योग खतरनाक श्रेणी के और सभी उद्योगों को यह निर्देश है कि साल में वह कम से कम एक बार स्वास्थ्य शिविर जरूर लगाए लेकिन आप हैरान हो जाएंगे कि बहुत सारे उद्योग खुद अनुष शर्मा ने बताया कि 108 उद्योग उनके पास उनकी जानकारी में जिन्होंने स्वास्थ्य शिविर ही नहीं लगाया लखन लाल देवांगन उद्योग मंत्री ने भी बताया कि जो सिलतरा में 25 खतरनाक श्रेणी के उद्योग है उसमें से छह उद्योगों ने शिविर नहीं लगाया है लोगों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही है स्किन की बीमारी के अलावा भी कैंसर और दूसरे तरह की गंभीर बीमारी हो रही है लेकिन सरकार इन उद्योगों के खिलाफ कारवाही क्यों नहीं कर रही याद होगा आपको की एक डेढ़ महीना पहले अवारा क्षेत्र में स्पेशल ब्लास्ट फैक्ट्री में भी विस्फोट हुआ था और लोग मारे गए थे तब भी सवाल उठा था लेकिन लगता है कि कारपोरेट और सत्ता के गठजोड़ ने आम लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है और शायद यही वजह है कि इन सवालों से बचने की कोशिश की जाती रही है जवाब ही नहीं दिया जाता है हम और बता दे कि छत्तीसगढ़ में जो जानकारी मिली है जो सूत्र बता रहे हैं कि लगभग हर साल 100 से अधिक ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं जिनके खिलाफ पुलिस कारवाही भी होती है और लेबर कोर्ट में भी मामला चलता है लेबर कोर्ट में जो मामला चलता है उसमें तो बकायदा जुर्माना तक बात चली जाती है कारवाई हो जाती जाते लेकिन पुलिस में जो कारवाही चलती है उसे लेकर सवाल उठते रहे हैं कि मामला अंजाम तक क्यों नहीं पहुंचता क्यों ठंडे बस्ते में चले जाता है इसे लेकर कई तरह के सवाल है हमारी टीम लगी हुई है कि कोर्ट लेबर कोर्ट में और पुलिस में किसकिस तरह के मामले चले और उसकी क्या स्थिति है हम आपको बताएंगे लेकिन हम आपको बता देते हैं कि जिस तरीके से विधानसभा में सवाल उठे और मंत्री का जवाब है उ से देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कारपोरेट और सत्ता के गठजोड़ किस तरीके से लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है !

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https://youtu.be/N5xQGokXsm4?si=oo_Ku6k7iGcaOi2p

रविवार, 5 अप्रैल 2026

जब बेर पर मचा था बवाल


जब बेर पर मचा था बवाल
 

 भारतीय जनता पार्टी धर्म के नाम पर किस किस तरह का तमाशा करती है यह किसी से छिपा नहीं है और ऐसे में  नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने छत्तीसगढ़ के विधानसभा में ही साय सरकार को बुरी तरीके से घेर लिया इसकी वजह थी बेर।

दरअसल कुछ ही दिन पहले साय सरकार यानी पूरी कैबिनेट राम लला के दर्शन करने के लिए अयोध्या गई थी और रामलला में क्या चढ़ाना है इसकी पूरी सूची जारी की थी जिसमें एक था सबरी के बेर शिवरी नारायण से लाया गया है यह बताया गया इसी बात को लेकर चरण दास महंत ने विधानसभा में सवाल पूछ लिया कि यह बेर का तो सीजन नहीं है मौसम नहीं है बेर का फिर शिवरी नारायण का बेर कहां से आ गया और बेर के नाम पर क्या चीज भगवान राम को चढ़ा दिया गया हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे भी अयोध्या जाना चाहते थे अकेले कैबिनेट को लेकर चले गए अब सब विधायकों को अयोध्या ले जाने प्लेन से अयोध्या ले जाने का इंतजाम किया जाए और बुरी तरीके से इस बेर के प्रकरण से बौखलाए बीजेपी के विधायकों ने चरण दास महंत को ही घेरने की कोशिश की 

राजेश मूणत रायपुर पश्चिम के विधायक है उन्होंने तो यह कह दिया कि 10 सीटें राम के नाम पर मिली है भारतीय जनता पार्टी को तो धर्मजीत सिंह पहले कांग्रेस में थे अब भाजपा में चले गए और भाजपा के विधायक हैं उन्होंने कह दिया कि क्या अयोध्या जाने का जो मंसा जाहिर कर रहे हैं चरण दास जी महंत उसके लिए राहुल गांधी से पूछे हैं लेकिन चरण दास महंत कब रुकने वाले थे उन्होंने सीधे-सीधे इन विधायकों से कह दिया कि आप लोग सही बातों का जवाब नहीं देते हैं बेर कहां से आया यह बताइए इधर-उधर की बात करते हैं और इसीलिए आप लोग अयोध्या से लेकर बद्रीनाथ चित्रकूट प्रयागराज नासिक रामेश्वरम सब हार गए देखना है कि सरकार इसका क्या जवाब देती हालांकि मुश्किल है इसका जवाब इस तरह के सवालों के जवाब कभी मिलते नहीं है और चरणदास महंत जी जब चर्चा कर रहे थे तो भाजपा के तेज करर माने जाने वाले विधायक और रमन सरकार में मंत्री रहे अजय चंद्राकर ने तो यहां तक कह दिया कि इस पर चर्चा क्यों होनी चाहिए और उन्होंने अध्यक्ष से यहां तक पूछ लिया कि क्या अयोध्या पर चर्चा के लिए कोई नोटिस दिया है अब बेर का मामला बड़ा होता जा रहा है और जन चर्चा का भी विषय बनता जा रहा है कि वाकई में आखिर जब सीजन नहीं था तो बेर कहां से लाया गया और क्या चढ़ाया गया भगवान को !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/DD8uGlRjsL4?si=lE7K7fvrxZtFc_5O

अब अनियमित कर्मचारियों की बड़ी तैयारी

अब अनियमित कर्मचारियों की बड़ी तैयारी 


एक तरफ़ प्रदेश में बढ़ते अपराध और बिगड़ती क़ानून व्यवस्था ने आम आदमी के सामने मुश्किल खड़ा कर दिया है तो  दूसरी तरफ अनियमित कर्मचारी भी सरकार के द्वारा ठगे जाने को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं बार-बार ठगे जा रहे हैं अनियमित कर्मचारी हम विस्तार से एक एक घटनाक्रम आपको बताएंगे कि किस तरीके से बच्चों को उफनती नदी पार करना पड़ रहा है पढ़ाई के लिए तो आत्मानंद  स्कूलों को किस तरीके से बर्बाद करने की कोशिश की जा रही है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा इसके अलावा महतारी वंदन योजना को लेकर क्या विवाद चल रहा है क्यों ओपी चौधरी ने भूपेश बघेल को चैलेंज किया और भूपेश बघेल उस चैलेंज को किस तरीके से स्वीकारा यह सब बताएं उससे पहले आज सबसे पहले बता देते हैं कि कांग्रेस ने जन आंदोलन की बड़ी तैयारी की है और  कहा जा रहा है कि बलौदा बाजार जैसी घटनाओं को रोकने के लिए ही किया गया है याद कीजिए आप बलौदा बाजार में किस तरीके से सतनामी समाज के प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पें हुई थी किस तरीके से एसपी कार्यालय जला दिए गए थे। ऐसी घटनाओं को रोकने सरकार अब मुस्तैद दिखाई देती है 

तब ऐसे में अनियमित कर्मचारियों के सामने क्या रास्ता है क्योंकि सत्ता अपनी बातों से मुकर रही है जब विपक्ष में थे भारतीय जनता पार्टी विपक्ष में थी तब उनके नेता किस तरीके से भूपेश सरकार के अत्याचार को लेकर अनियमित कर्मचारियों के पंडालों में जाते थे और सत्ता आने पर उन्हें नियमित कर देने का वादा करते थे उस दौर में रमन सिंह से लेकर जो मोहन सेठ है मनत सेठ है सब तरह के भाजपा के नेता इन अनियमित कर्मचारियों के मंचों पर जाकर उनके नियमितीकरण की मांग को स्वीकार करते थे लेकिन सात माह बीत गए अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं अनियमित कर्मचारी और वे बड़े प्रदर्शन की तैयारी में उससे पहले वे धरना प्रदर्शन कर रहे हैं निमित कर्मचारी संघ के पदाधिकारी ने क्या कहा पहले यह सुन लीजिए छतीसगढ़ प्रमित कर्मचारी फेडरेशन प्रदेश के शासकीय कार्याल में का अमित कर्मचारियों की निमक निकाले गए कर्मचारियों की बहाली न्यूनतम न्यून वेतन पाने वाले कर्मचारी को न्यूनतम वेतन देने अंशकालीन कर्मचारी को पूर्ण कालीन करने एवं और स सि ठेका प्रथा सेवा प्रदाता समूह समिति के माध्यम से कर्मचारियो को भाग में रखने जैसे मुद्दे को लेकर के कल 20 जुलाई 2024 को ध्यानाकर्षण रैली कर रहा है इसके माध्यम से हम अपनी बातों को मजबूती से शासन प्रशासन के समक्ष रखेंगे तब ऐसे में क्या अनियमित कर्मचारी इस सरकार के द्वारा भी ठगे जाएंगे क्योंकि लगातार रमन सिंह जब सत्ता में थे उस समय से अनियमित कर्मचारी अपनी मांग कर रहे हैं भूपेश बघेल और पूरी कांग्रेस उनकी मांग को स्वीकार करने का वादा करते हुए सत्ता में आई थी लेकिन साल उसने भी कुछ नहीं किया केवल कुछ कागजी कारवाही की बात करते रही लेकिन अनियमित कर्मचारियों का कुछ नहीं हुआ तब अनियमित कर्मचारी छह सात माह इस नए सरकार का इंतजार करते रहे इस विष्णु देव साय की सरकार के वादों का इंतजार करते रहे और अब उनका शब्द टूटने लगा है तो दूसरी तरफ कई तरह के वादे किए थे विधानसभा जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी में में उसमें से एक बड़ा वादा था मतारी वंदन योजना जिसके तहत हर शादीशुदा महिला को 1000 देने की बात कही गई थी साल में 12000 लेकिन सत्ता में आने के बाद कुछ नियम बना दिए गए और उस नियम के तहत लाखों महिलाओं को इस लाभ से वंचित कर दिया गया और अब नया विवाद यह शुरू हो गया है कि क्या बीपीएल या निम्न आय वाले परिवार की सभी महिलाओं को महतारी वंदन योजना का लाभ मिल रहा है और इसे लेकर ओपी चौधरी ने कांग्रेस के आरोप पर कह दिया कि वे तैयार हैं यदि महिलाएं ला दे कि जो वंचित हैं और भूपेश बघेल ने इसे स्वीकार करते हुए यहां तक कह दिया कि गांव क्यों जाए आइए रायपुर शहर में आप रहते हैं राय शहर से ही कुछ वार्डों में जाकर पता कर लेते हैं यह चैलेंज क्या ओपी चौधरी स्वीकार करेंगे ओ पी चौधरी इन दिनों सुपर सीएम कहलाते हैं और उन्होंने नौकरी को लेकर क्या कुछ कहा यह भी किसी से छिपा नहीं है 2 साल में 1 लाख लोगों को नौकरी देने का वादा किया है भारतीय जनता पार्टी ने।और ओपी चौधरी के पास जब युवा पहुंचे तो वे किस तरीके से जवाब दिए यह भी किसी से छिपा नहीं है नौकरी नहीं है फंड नहीं है वगैरह वगैरह कई तरह की बात उन्होंने कर दी और इसे लेकर विवाद भी मचा है युवाओं में आक्रोश भी है तब महतारी वंदन योजना को लेकर भूपेश बघेल ने जो चैलेंज किया है क्या ओपी चौधरी उसे स्वीकारें कहना मुश्किल है राजनीति में इस तरह का खेल चलता रहता है तब आत्मानंद स्कूल को लेकर भी तो शायद सरकार घिरी हुई है क्योंकि भूपेश बघेर ने जिस तरीके से आत्मानंद स्कूल बनाकर पढ़ाई के क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा काम किया था अब उन स्कूलों को पीएम श्री योजना में शामिल किया जा रहा है यही नहीं इस उमस के दौरान भी बारिश का मौसम है उमस होता है बच्चों की जो क्लासे लगाई जा रही उसमें कहीं किसी तरह की सुविधाएं भी नहीं है और परिपत्र पर परिपत्र जारी किया जा रहा है आत्मानंद स्कूल के प्राचार्य द्वारा इस हम फिर कभी विस्तार से बात करेंगे क्योंकि यह बड़ा महत्त्वपूर्ण काम है शिक्षा लेकिन दूसरी तरफ खुद सरगुजा क्षेत्र में और कई क्षेत्र होंगे अभी जो वीडियो आए हैं वे सरगुजा क्षेत्र के गोरेला पेंड्रा मरवाही जिले की है जहां बच्चों को उफनती नदी में स्कूल जा के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है आप खुद सोचिए कि उनके अभिभावक किस तरीके से चिंतित होंगे लेकिन सरकार का अपना रवैया है मंत्री कुछ कहते हैं सत्ता कुछ बताती है ऐसी परिस्थिति में महिलाओं को लेकर एक बड़ी गारंटी दी गई थी 500 रप में सिलेंडर राजस्थान साथ में ही चुनाव हुए थे साथ में ही सरकार बनी है वहां शुरू हो गई है लेकिन अभी तक छत्तीसगढ़ में इसकी कोई सु गाहट प्रशासनिक तौर पर दिखाई नहीं दे रही तो क्या नगरी निकाय चुनाव के पहले शहर सरकार बनाने के नाम से इस योजना को अभी रोक दिया गया है और नगरी चुनाव के लिए वोट बैंक बनाने इस योजना की घोषणा की जाएगी कहना मुश्किल है क्योंकि जिस तरीके से साय सरकार चल रही है वह सब काम तो मोदी शाह के इशारे पर कर रही है कांग्रेस ने तो इसे रिमोट कंट्रोल वाला सरकार बता दिया है यहां तक कि मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा है निगम मंडल आयोग की नियुक्ति को लेकर कार्यकर्ता आक्रोशित है उसकी भी नियुक्ति नहीं हो रही तब देखना है कि आने वाले दिनों में सरकार विधानसभा में किस तरीके से कांग्रेस के सवालों का जवाब देती है विधानसभा घेराव को किस तरीके से रोकती है और कर्मचारियों में जो आक्रोश है उसे कैसे समाधान करती है ।

Vidio देखें 


https://youtu.be/2eeHzLliMBA?si=jd-1nsoCQE_7xRsx

शनिवार, 4 अप्रैल 2026

बीजेपी में पल रहे खतरनाक लोग


बीजेपी में पल रहे खतरनाक लोग
 

 लगता है भारतीय जनता पार्टी और उनसे जुड़े लोग 2024 के चुनाव परिणाम से भी सबक लेने को तैयार नहीं है 240 सीट में सिमट गई भाजपा को शायद अब भी लगता है कि नफरत की दुकान लगाकर ही वे सत्ता हासिल कर सकते कोई विजन नहीं है उनके पास सिवाय हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का इसलिए धार्मिक नगरी को लेकर इन दिनों भारतीय जनता पार्टी बुरी तरीके से फंसी हुई है तो दूसरी तरफ 240 सीट आने की बौखलाहट भी दिखाई देने लगी है हालांकि बद्रीनाथ हार जाने के माले में भारतीय जनता पार्टी के लोगों को सांप स गया है लेकिन जब अयोध्या में पराजय मिली थी तो किस तरीके से विष बमन किया गया था वहां के लोगों को गालियां दी गई थी वह भी किसी से छिपा नहीं तो राहुल गांधी ने जो मोहब्बत की दुकान लगाने का आह्न करते हुए देश भर में यात्रा की थी क्या उसका असर है यह और इस असर को देखते हुए भाजपा के नेता कुछ ज्यादा ही बख लाने लगे हालांकि संघ ने भारतीय जनता पार्टी यानी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अहंकार को लेकर कई जगह बातें कही लेकिन उन्होंने नाम कभी नहीं लिया सत्ता के अहंकार की बात करते रहे लेकिन अब जो मामला सामने आया है वह साफ संके दे रहा है कि भारतीय जनता पार्टी के जो कर्ता धरता है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मंसा क्या है क्योंकि लगातार नफरत की दुकान लगाने वालों को प्रमुख पदों पर बैठाया जाता है किस तरीके से भारतीय जनता पार्टी में हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण का खेल चल रहा है और उसे आरस का किस तरीके से समर्थन प्राप्त है यह कहना अब मुश्किल नहीं रह गया क्योंकि आरएसएस की चुप्पी और मोदी शाह का खेल क्या इस देश को सचमुच आग लगा देना चाहती है यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पहले भी पहले भी यानी कल जब सुभेंदु अधिकारी ने साफ तौर पर कहा वे विपक्ष के नेता है पश्चिम बंगाल में मोदी शाह के नाक के बाल है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा और सुभेंदु अधिकारी ने सीधे-सीधे कहा कि भाजपा में अल्पसंख्यक मोर्चा को बंद कर देना चाहिए सबका साथ सबका विकास का नारा बेकार है इसी तरीके से क्या कुछ कहा पहले सुन लीजिए उनके मुह से बोले राष्ट्रवादी मुस्लिम अना बोले का साथ सबका विकास और बोल बोना बोल जो हमारे साथ हम उनका साथ जो हमारी साथ जो हमारे साथ जो हमारी साथ हम उनका साथ सबका साथ सबका विकास बंद करो नो नीड संल मोर्चा जय श्री राम तब क्या भारतीय जनता पार्टी ऐसे लोगों को हटाए गी हालांकि सुभेंदु अधिकारी ने कहा यह व्यक्तिगत सोच है और यदि यह सुभेंदु अधिकारी का व्यक्तिगत सोच भी है तो किस तरीके की सोच को सोच भाजपा में फूल रहा है यह क्या किसी को बताने की जरूरत है क्योंकि सुभेंदु अधिकारी ने जिस लहजे के साथ यह बात कही है वह इस देश के लिए बेहद ही खतरनाक है और भारतीय जनता पार्टी इस पर यह कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती कि यह सुभेंदु अधिकारी की सोच है और यदि सुभेंदु अधिकारी की सोच है तो वह पार्टी में इतने बड़े पद पर कर क्या रहे हैं हालांकि इससे पहले भी जब जूता मारो सालों को या गोली मारो सालों को जैसे नारे लगाए जा रहे थे उन लोगों को भी बड़े-बड़े पदों से नवाजा गया साधवी प्रज्ञा को तो टिकट तक दे दी गई थी और इस सांसद बनने के उत्साह में उन्होंने किस तरीके से महात्मा गांधी के खिलाफ अपशब्द कहे थे और जब बवाल मचा तो देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा था कि वे प्रज्ञा को कभी माफ नहीं करेंगे इसके अलावा भी भारतीय जनता पार्टी के नेता समय-समय पर किस तरीके से विश् ममन करते हैं वह किसी से छिपा नहीं है 400 पार के नारे के साथ तो हेगड़े से लेकर राजस्थान के नेता तक कहने लगे थे कि 400 पार होगा तो हम संविधान बदल देंगे हिंदू राष्ट्र की घोषणा कर देंगे हालांकि पार्टी स्तर पर इस तरह के आरोपों का खंडन जरूर होता रहा लेकिन यह सभी लोग अब भी पार्टी में है प्रमुख पदों पर है उनका स्वागत सत्कार उतने ही ढंग अच्छे ढंग से किया जाता है तो क्या इस तरह के खतरनाक लोगों को भाजपा पाल नहीं रही है मोदी साहब पनाह नहीं दे रहे हैं तब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में यदि इस सोच को अमली जामा पहनाने की कोशिश करें जो पदों पर बैठे हैं तब सत्ता क्या करेगी आप खुद सोचिए कि किस तरीके से नफरत का खेल इस दौर में चल रहा है झूठ और अफवाह की राजनीति को साधते साधते किस कदर इस देश में नफरत फैलाया गया और अब धार्मिक पर्यटन को लेकर सत्ता की जो सोच है वह किस तरीके से डकैत की तरह हो गई है यह भी अब दिखने को मिलने लगा है चाहे अयोध्या का मामला हो बद्रीनाथ का मामला हो केदारनाथ का मामला हो या उज्जैन का मामला दिल्ली में तो केदारनाथ धाम बनाने को लेकर बवाल मचा हुआ शंकराचार्य को खुद सामने आकर इसकी आलोचना करनी पड़ी है तब सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार या भारतीय जनता पार्टी ऐसे खतरनाक लोगों को अपनी पार्टी से हका लेगी बाहर निकाल देगी देखना होगा !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/1fclYZfWWvI?si=0XeRUqlLYjRpiPMs


गुरुवार, 2 अप्रैल 2026

रेत माफियाओं को खुले आम संरक्षण

रेत माफियाओं को खुले आम संरक्षण, आ गया नाम 


 क्या छत्तीसगढ़ में माफिया राज हावी होने लगा है क्या रेत माफियाओं के कहर के आगे जनप्रतिनिधि ही नहीं शासकीय अधिकारी भी नतमस्तक है दरअसल रेत की नीलामी के बाद पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिलने के बाद भी रेत खनन का काम बेतहाशा चल रहा है और क्या यह पूरा खेल उच्च स्तर पर चल रहा है यह सवाल इसलिए उठाये जा रहे है क्योंकि जिस तरीके से प्रतिबंध लगने के बाद भी छत्तीसगढ़ की नदियों से लगातार रेत का उत्खनन किया जा रहा है और हाईवा भर भर के सड़कों पर बेतहाशा दौड़ाई जा रही है जिससे लोगों की जान भी खतरे में आ गया है तब सवाल यह है  कि रेत माफियाओं के हौसले कितने बुलंद  है कि  धमतरी जिला पंचायत के उपाध्यक्ष जब एक कार्यक्रम से लौट रहे थे तो एक हाईवा तेज गति से आ रही थी और वे चपेट में आने से बाल-बाल बच गए हालांकि कई सारी घटनाएं हुई हैं छत्तीसगढ़ में इस दौर में जब हाईवा की चपेट में आकर लोग काल कलवी तक हुए हैं और लगातार शिकायत आ रही है कि कई खासकर धमतरी जिला महासमुंद जिला रायपुर जिला और बलौदा बाजार जिले से सर्वाधिक रेत की काला बाजारी की खबर आ रही है रेत के अवैध परिवहन को लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं लेकिन जब प्रदेश के मुखिया के पास ही खनिज विभाग हो तब सवाल यह है कि क्या रेत माफिया का जो खेल चल रहा है अवैध उत्खनन का वह क्या मुख्यमंत्री के इशारे पर चल रहा है या रेत माफियाओं ने इतना अपना कद इतना बढ़ा लिया कि कारवाई करने में खनिज अधिकारियों के हाथ पैर काप जाते हैं छत्तीसगढ़ में रेत के अवैध उत्खनन का इतिहास यदि राज्य बनने के बाद देखा जाए तो याद कीजिए आप कि किस तरीके से जोगी शासन काल में कोई जैन और तिवारी के गठजोड़ ने किस तरह सी धमा चौकड़ी मचाई थी और उसके बाद डॉक्टर रमन सिंह के सरकार में भी चलता रहा केवल नाम बदल गया बाकी खेल उसी तरीके से चलते रहा और अब भी वही खेल चल रहा है भूपेश सरकार के दौरान भी रेत माफियाओं के गुंडागर्दी दादागिरी को लेकर सवाल उठते रहे और अब जब प्रतिबंधित समय बारिश के मौसम में नदियों में रेत उत्खनन प्रतिबंधित लगा कर दिया जाता है उस परिस्थिति में भी यदि बड़े पैमाने पर रेत उत्खनन चल रहा है तो क्या इन्हें राजनैतिक संरक्षण है इन्हें अधिकारियों का संरक्षण और कहा तो यहां तक जा रहा है कि इस खेल में कई जनप्रतिनिधि भी शामिल और लोगों को आशंका है कि यही स्थिति चलते रही तो कभी भी कोई बड़ी घटना हो सकती है क्योंकि जिस ढंग से रेट माफिया ताकतवर होते जा रहे हैं वह आने वाले दिनों में प्रशासन और शासन दोनों के लिए मुश्किल हालात पैदा कर सकते हैं हालांकि चर्चा इस बात का भी है कि इस इन खेलों में कई जनप्रतिनिधि में सरपंच जिला पंचायत सदस्य या जनपद सदस्य और विधायक तक शामिल है तब देखना है कि जो धमतरी में घटना हुई है उसको प्रशासन कितनी गंभीरता से लेता है हालांकि धमतरी में एक और ऑडियो वायरल हो रहा है एक अधिकारी है नायब तहसीलदार ज्योति सिंह और जिला पंचायत के सदस्य खूब लाल ध्रुव के जो बहस हुई है इसी रेत मामले को लेकर वह खूब वायरल हो रहा है लेकिन अभी तक कारवाही नहीं रही है और कहा जा रहा है कि कारवाही के नाम में केवल खाना पूर्ति होती है और छोड़ दिया जाता है जुर्माना लिया जाता है नहीं लिया जाता है एक अलग विषय हो सकता है लेकिन जिस तरीके से रेत माफियाओं ने जाल बिछाया और रात भर बेहिसाब अवैध उत्खनन किया जाता है और हाईवा में भर भर के तेज गति से दौड़ाई जाती उससे आम लोगों के जीवन पर भी खतरा मंडराने लगा है देखना है कि शासन अब धमतरी में जो घटना हुई है धरना दिया गया था रात उसे लेकर कितनी गंभीरता से लेती है और कारवाई करती है 

वीडियो देखें 


https://youtu.be/IFR2gI8GHFE?si=_u1Ui_f0hA3P2GeO!