रेलवे की बैठक में छत्तीसगढ़ के सांसदों के प्रस्ताव की अनदेखी से तोखन साहू भड़के
छत्तीसगढ़ की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को सांसद के रूप में 10 सीटें दी है लेकिन इन सांसदों की ना तो मोदी सत्ता को परवाह है और ना ही उनके अधिकारियों की ही परवाह है कहा जाता है कि सांसदों के प्रस्ताव को रेल प्रशासन रद्दी की टोकरी में फेंक देता है लगातार ट्रेनें रद्द हो रही हैं त्योहारी सीजन में लोग परेशान हैं बड़े-बड़े टैग लाइन के साथ अखबारों में छप रहा है कि त्यौहार के सीजन में ट्रेनें रद्द किए जाने से लोग किस तरीके से यात्रा कर रहे हैं जानवर से भी बदतर स्थिति में यात्रा हो रही है लेकिन इसकी परवाह सांसदों को है कहना कठिन है हालांकि रेलवे के इस अचानक इस करतूत को लेकर संसद में भी आवाज गूंजी लेकिन उसके बाद क्या हुआ पूरे प्रदेश को मालूम है कि किस तरीके से बृजमोहन अग्रवाल रायपुर के सांसद ने यह मामला उठाया उसके दूसरे तीसरे दिन ही किस तरीके से 40 ट्रेन रद्द कर दी गई थी और फिर जब अब तीजा का त्यौहार सीर में था और जगह जगह त्यौहारों का उत्सव मनाया जा रहा है तीजा के बाद गणेश उत्सव देखने लोग एक शहर से दूसरे शहर जाते हैं पितृ पक्ष के बाद दुर्गोत्सव में भी ट्रेनों में भीड़ रहती है छुट्टियों का सीजन चला आता है लेकिन जिस तरीके से ट्रेन रद्द हो रही है उसे ले भारतीय जनता पार्टी के सांसद की भूमिका क्या है क्या वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इतने डरे हुए हैं कि अपनी बात भी नहीं रख पाते हालांकि कहा जा रहा है कि कुछ सांसदों ने रेलवे को प्रस्ताव भेजा है कि किस तरीके से यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाई जाए लेकिन कहा जाता है कि रे प्रशासन इन प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं और पिछले दिनों दक्षिण पूर्व रेल मंडल की जब बैठक आयोजित हुई तो सांसदों का गुस्सा बाहर निकल आया इस बैठक में सांसदों द्वारा दिए जा रहे प्रस्ताव को जिस तरीके से रेलवे के अधिकारी अनसुना कर रहे थे उससे बिलासपुर के सांसद तोख साहू फट पड़े उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एक एक सांसद लगभग 252 लाख लोग लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और उनकी बातें नहीं सुनना गलत बात है उनकी बातें सुनी जाए लेकिन क्या तोख साहू के इस गुस्से का कोई असर होगा क्योंकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कोई छोटे-मोटे हस्ती नहीं है वे नरेंद्र मोदी के नाक के बाल माने जाते हैं इस दौर में जिस तरीके से रेल घटनाएं हुई दुर्घटनाएं हुई लोगों को लोगों की जान गई आए दिन पटरियों से डिब्बे के उतर जाने की खबरें आते रहती है उसके बाद भी रेल मंत्री के खिलाफ यदि कोई कारवाही नहीं हो रही है तब रेलवे अधिकारियों की मनमानी क्या बढ़ गई है क्या उन्हें रेल मंत्री और मोदी सरकार का पूरी तरीके से संरक्षण मिला हुआ है और इसकी वजह से वे भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की भी बात नहीं सुन रहे हैं कहा जाता है कि उस बैठक में तीखी नोक झोक हुई है रेलवे अधिकारियों और तोख साहू के बीच सांसदों के प्रस्ताव को जिस तरीके से रेल अधिकारी किनारे कर रहे थे अनसुना कर रहे थे उससे सांसद बेहद नाराज थे लेकिन बाकी सांसद खामोश थे क्योंकि यह मोदी सत्ता है तो खन साहू ने कुछ बात कही और इधर चर्चा इस बात की है कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद शीघ्र ही अब इस मामले का रेल मंत्री से मिलेंगे प्रधानमंत्री से भी वे मिल सकते हैं लेकिन यदि सरकार का रवैया ही यही है तब यह सांसद क्या सड़कों में उतरने की हिम्मत जुटा पाएंगे !
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