सीजी में युवा सिर्फ वोट देने की मशीन
क्या इस देश और राज्य में युवा सिर्फ वोट देने के लिए रह गए हैं? क्या नौकरियां अब सिर्फ चुनावी घोषणापत्रों के पन्नों तक सीमित रहेंगी?
आज हम बात कर रहे हैं उन लाखों युवाओं की, जिन्होंने दिन-रात एक करके पढ़ाई की, परीक्षा दी, और अब सिर्फ रिजल्ट, जॉइनिंग और नई भर्तियों के लिए सड़कों पर धक्के खा रहे हैं। कभी कोर्ट का सहारा, कभी रोस्टर में गड़बड़ी, कभी जांच का बहाना और कभी-कभी तो प्रशासनिक ताने-बाने में फाइलों का खो जाना! आखिरकार कब तक युवाओं के भविष्य के साथ यह खिलवाड़ चलता रहेगा?
आज के इस विशेष रिपोर्ट में हम एक-एक करके बात करेंगे:
- विश्वविद्यालय भर्तियों में आरक्षण और रोस्टर की गड़बड़ी का जो नया मामला सामने आया है।
- डी.एड (D.Ed/D.El.Ed) अभ्यर्थियों का आंदोलन और उनकी मांगें।
- ASI भर्ती के 1500 पदों की अटकी हुई सूची।
- 57,000 शिक्षक भर्ती की गारंटी और अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) का अनिश्चित भविष्य।
अगर आप भी इनमें से किसी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं या युवाओं के इस हक की लड़ाई में साथ हैं, तो इस वीडियो को अंत तक जरूर देखें और शेयर करें।"
विश्वविद्यालयों में भर्ती गड़बड़ी और जांच का पेंच
"सबसे पहले नजर डालते हैं हाल ही में सामने आए विश्वविद्यालय भर्ती विवाद पर। राज्यपाल सचिवालय के आदेशानुसार, विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक पदों की भर्ती से लेकर भवन निर्माण और रखरखाव कार्यों में कथित अनियमितताओं की शिकायतों का संज्ञान लिया गया है। कुलाधिपति ने इसकी जांच और प्रगति का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
लेकिन शिकायतें क्या हैं? जरा गौर से सुनिए:
- आरक्षण और रोस्टर में गड़बड़ी: पदों के आरक्षण में तय नियमों की अनदेखी की गई।
- स्वीकृत पदों से ज्यादा का विज्ञापन: जितने पद स्वीकृत नहीं थे, उससे अधिक पर विज्ञापन निकाल दिए गए।
- रोस्टर में मनमाना बदलाव: प्रक्रिया के बीच में ही तय रोस्टर को बदल दिया गया।
- कार्य परिषद (Executive Council) की बिना मंजूरी: भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया गया।
इसके अलावा बैकलॉग पद, शिक्षकों की पदोन्नति और वेतन संरक्षण जैसे कई मुद्दे इसमें शामिल हैं। अब सवाल यह उठता है कि जब विज्ञापन निकाला जाता है, तब जिम्मेदार अधिकारी इन नियमों को क्यों भूल जाते हैं? क्या यह जानबूझकर किया जाता है ताकि मामला कोर्ट या जांच में अटके और भर्ती लटक जाए?"
डी.एड (D.Ed) अभ्यर्थी और 57,000 शिक्षकों का वादा
: "अब बात करते हैं शिक्षा विभाग की। चुनावों के समय 57,000 शिक्षकों की भर्ती की गारंटी और वादे बड़े-बड़े मंचों से किए गए थे। लेकिन धरातल पर क्या है?
डी.एड (D.Ed) अभ्यर्थी आज सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं। न्यायालय के फैसलों के बावजूद, प्राथमिक शिक्षक भर्तियों में डी.एड अभ्यर्थियों को उनका हक समय पर नहीं मिल पा रहा है। काउंसिलिंग, दस्तावेज सत्यापन और फिर अंतिम सूची जारी करने में महीनोंलगा दिए जाते हैं।
दूसरी तरफ, जो अतिथि शिक्षक (Guest Teachers) सालों से बेहद कम मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनका भविष्य भी अधर में है। न तो नई नियमित भर्तियां पूरी हो पा रही हैं और न ही अतिथि शिक्षकों के समायोजन को लेकर कोई ठोस नीति बन पा रही है। नतीजा यह है कि स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं और योग्य अभ्यर्थी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।"
ASI भर्ती के 1500 पद और रुकी हुई अन्य परीक्षाएं
"शिक्षकों के बाद अब आइए पुलिस महकमे और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर। ASI (सहायक उपनिरीक्षक) भर्ती के लगभग 1500 पदों की चयन सूची महीनों से लटकी हुई है। अभ्यर्थियों ने शारीरिक दक्षता (Physical Test), लिखित परीक्षा सब पार कर लिया। लेकिन चयन सूची जारी क्यों नहीं हो रही? इसका कोई ठोस जवाब किसी विभाग के पास नहीं है।
यही हाल कई अन्य व्यावसायिक और लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं का है:
- किसी परीक्षा का रिजल्ट रोक दिया जाता है।
- किसी में मॉडल आंसर-की को लेकर विवाद खड़ा हो जाता है।
- तो किसी भर्ती प्रक्रिया पर कोर्ट का स्टे (Stay) लग जाता है।
युवा सालों-साल अपने घर-परिवार से दूर रहकर, किराए के कमरों में तंगी की जिंदगी जीकर तैयारी करते हैं। लेकिन जब परीक्षा का परिणाम ही सालों तक न आए, तो उनकी मानसिक स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा किसी अधिकारी या राजनेता को शायद नहीं है।"
लेट-लतीफी' का पैटर्न और युवाओं का नुकसान
"दोस्तों, अगर आप ध्यान से देखें तो हर भर्ती में एक जैसा पैटर्न नजर आता है:
- पहले बड़ी धूमधाम से भर्ती का विज्ञापन निकाला जाता है।
- फॉर्म भरवाकर करोड़ों रुपये की फीस जमा की जाती है।
- फिर रोस्टर या आरक्षण में ऐसी खामियां छोड़ दी जाती हैं, जिससे मामला कोर्ट चला जाए।
- और फिर मामला जांच, कोर्ट और प्रशासनिक कमेटियों के चक्कर में सालों तक घूमता रहता है।
इस पूरे खेल में नुकसान किसका होता है? नुकसान उस युवा का होता है जिसकी उम्र सीमा (Age Limit) धीरे-धीरे खत्म हो रही है। नुकसान उस गरीब मां-बाप का होता है जो पेट काटकर अपने बच्चे को पढ़ा रहे हैं।"
"सरकार और प्रशासन को यह समझना होगा कि युवा सिर्फ वोट बैंक नहीं हैं। भर्तियों में पारदर्शिता, समयबद्ध चयन प्रक्रिया और रोस्टर का सही पालन प्रशासन की पहली जिम्मेदारी होनी चाहिए।
- 1500 ASI पदों की रुकी हुई सूची तुरंत जारी हो!
- डी.एड अभ्यर्थियों और शिक्षक भर्ती की मांगों का पारदर्शी हल निकले!
- 57,000 शिक्षक पदों के वादे पर अमल शुरू हो!
- और विश्वविद्यालयों में जो गड़बड़ियां हुई हैं, उनकी निष्पक्ष जांच करके दोषियों पर कार्रवाई हो और सही अभ्यर्थियों को मौका मिले!
आपकी इस पूरे मुद्दे पर क्या राय है? क्या आप भी इनमें से किसी भर्ती के अटकने से प्रभावित हुए हैं? कमेंट सेक्शन में अपनी बात जरूर रखें।
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