रविवार, 17 मई 2026

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे!"



छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में त्योहारों की आड़ में होने वाले हुड़दंग, बेलगाम डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में 'जंगलराज' नहीं चलने दिया जाएगा।"

[मुख्य मुद्दा: आत्महत्या का मामला]

"दरअसल, हाई कोर्ट में ध्वनि प्रदूषण को लेकर चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, हाल ही में हुई एक दुखद घटना का जिक्र आया। कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा की गई आत्महत्या के मामले का संज्ञान लेते हुए इसे बेहद चिंताजनक (Alarming) और दर्दनाक बताया। 

[हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां और जजों के बयान]

कानून व्यवस्था पर सवाल: कोर्ट ने कहा, "अगर राज्य की कानून-व्यवस्था ऐसी हो जाएगी, तो आम नागरिक कैसे जिंदा रहेगा? एक आम आदमी का गरिमा के साथ जीना और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखना सबसे जरूरी है।" 

त्योहारों की आड़ में असामाजिक तत्व: कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि "त्योहारों की आड़ में लोग हर तरह की असामाजिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। लोग शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव में हुड़दंग कर रहे हैं। कोर्ट ने किसी भी त्योहार को मनाने से नहीं रोका है, लेकिन त्योहार की आड़ में किसी की जान लेना या असामाजिक कृत्य करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" 

प्रशासन की लाचारी पर फटकार: जब महाधिवक्ता (Advocate General) ने कहा कि प्रशासन स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, तो कोर्ट ने कहा, "महाधिवक्ता जी, राज्य के मुखिया होने के नाते कानून-व्यवस्था बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है। आप इन तत्वों के सामने खुद को लाचार नहीं पा सकते। अगर राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकती, तो सरकार को सोचना होगा।" 

'जंगलराज' की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन हर हाल में होना चाहिए। कुछ लोग प्रशासन को धमकी दे रहे हैं कि नियम कड़े हैं तो इन्हें वापस लो। कोर्ट ने कहा, "यह कोई 'जंगलराज' नहीं है। हम किसी की धमकी से प्रभावित होने वाले नहीं हैं। कानून का राज (Rule of Law) सर्वोच्च है।" 

[अदालत का अंतिम निर्देश]

"हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट ने कभी भी लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन इसकी एक तय और वैध सीमा (Permissible Limit) होनी चाहिए, ताकि बीमार बुजुर्गों और पढ़ाई करने वाले छात्रों को परेशानी न हो। 

अदालत ने पुलिस अधीक्षक (SP) के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में ध्वनि प्रदूषण की लगातार निगरानी (Monitoring) करने के निर्देश दिए हैं 


शुक्रवार, 15 मई 2026

पुलिस बर्बरता की कहानी कहता वीडियो, एसपी भी शामिल

 

पुलिस बर्बरता की कहानी कहता वीडियो, एसपी भी शामिल

सोशल मीडिया में अपनी पीठ थपथपा वाला वीडियो डालकर स्वयं को हीरो साबित करने वाला आईपीएस अभिषेक पल्लव कितना बड़ा खलनायक निकला यह उन वीडियो को देखकर आप समझ सकते हैं जिन वीडियो में मासूम बच्चों महिलाओं को खड़े होकर अभिषेक पल्लव पिटवा नजर आ रहे हैं पूरा मामला गृह मंत्री के क्षेत्र लोहारा डीह का है और लोहारा डी को लेकर इस कदर बवाल मचा है कि 21 सितंबर को कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ बंद करने का ऐलान कर दिया था मामला बेहद गंभीर है हम कुछ वीडियो आपके सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरीके से आईपीएस अभिषेक पल्लव खड़े होकर बच्चों को महिलाओं को पिटवा रहे हैं क्या यह किसी लोकतंत्र में जायज हो सकता है यह पूरा मामला हम आपको बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कुछ और बड़ी घटनाएं हुई सब घटनाओं का अलग-अलग वीडियो बनाना बड़ा मुश्किल काम है टाइम लगता है वीडियो बनाना एडिटिंग करना और कई मुद्दे छूट जाते हैं हम कोशिश करेंगे कि आज के बाद से एक ही वीडियो में बहुत कुछ कुछ घटनाएं आपके सामने लाने की कोशिश करेंगे सबसे पहले उस मामले की चर्चा कर लेते हैं जो देश में हलचल पैदा करती है दुनिया के सबसे अमीर मंदिर जिसमें अ अमिताभ बच्चन से लेकर मोदी तक अंबानी से लेकर अदानी तक बड़े-बड़े उद्योगपति लाखों करोड़ रुपए दान देते हैं उस मंदिर के प्रसाद लड्डू में गाय की चर्बी मछली का तेल मिलाया जा रहा था लेकिन दुखद पहलू तो यह है कि जो हिंदूवादी संगठन कांग्रेस और मुसलमान का नाम आते ही बाहे चढ़ा लेती थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिनका खून खोल जाता था उनकी भावनाएं आहत नहीं हो रही है या कुछ प्रतिक्रिया सामने नहीं आ रही है है ना हैरानी की बात सोचिए कि इनका हिंदुत्व किस तरह का हिंदुत्व है लेकिन छत्तीसगढ़ की बात करें तो सीमेंट की कीमत बढ़ गई बवाल मच गया तब उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन आकर बैठक लेते हैं और मीडिया में यह छपवा जाती है कि दो टूक शब्दों में कह दिया गया है कि सीमेंट की कीमत नहीं बढ़ेगी लेकिन अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया जो कीमत बढ़ाई गई है उस पर क्या आपको यह पूरा खेल हमेशा से लगने वाले आरोपों की तरह नहीं है सरकार पर सीमेंट की कीमत बढ़ाकर वसूली का खेल चलता रहा है और जीरो टॉलरेंस की दुहाई देने वाले विष्णु देव साय सरकार में भी यह सब चल रहा है सराब और कोयले की बात हम फिर कभी करेंगे लेकिन ताजा मामला पाठ्य पुस्तक निगम से लेकर है सरकार की शिक्षा व्यवस्था की नियत पर उठते सवाल है कि पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें लाखों की संख्या में रद्दी के भाव में कबाड़ में बेच दी जाती है और जांच समिति बनती है जांच समिति में प्रेम प्रकाश शर्मा का नाम है और जब बवाल मचता है कि जिम्मेदार तो पाठ पुस्तक निगम के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश शर्मा ही है तो आनंद फानंद में सरकार उन्हें निलंबित कर देती है यानी सोचिए पहले उन्हें जांच कमेटी का सदस्य बनाती है चोर के हाथ में ही तिजोरी की चाबी जैसी स्थिति बनती है जो कहावत है और अब निलंबित कर दिया गया बवाल मचने के बाद क्या ऐसा ही कुछ बलौदा बाजार हिंसा कांड में नहीं हुआ था जब पहले तो हिंसा होने के बाद एसपी कलेक्टर को हटा दिया गया और जब दबाव बना तो निलंबित किया गया तो लोहारा डी में भी घटना के दो-तीन दिन बाद जब प्रशांत साहू की हत्या कर दी जाती हम हत्या इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनके शरीर में जो मार के निशान दिखाई दे रहे हैं हम दिखा नहीं सकते अपने दर्शकों को पाठकों को इतना ढंग से आदिम युग की बर्बरता फेल हो जाए उस ढंग से प्रशांत साहू को मारा गया शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा था जहां चोट के निशान नहीं थे और अब एडिशनल एसपी विकास कुमार को बली का बकरा बना दिया गया जबकि वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि एसपी अभिषेक पल्लव खुद खड़ा होकर महिलाओं और बच्चों को पिटवा रहे हैं और मेरे भाई को और मेरे मा भाई घटते हुए मारते हु घर उठ ले जा कौन लोग मारे हैं पुलिस वाले लोग अच्छा कुते की की चीखे निकल रही है बिलख नहीं है महिलाए लेकिन किसी भी पुलिस वाले का दिल नहीं पसीज रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कह दिया है कि पुलिस का हाथ लोहे का होना चाहिए लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जो वीडियो सामने आ रहे हैं वे बेहद ही खौफनाक है आदि बर्बर ु की जात ताजा करने वाली य वीडियो किस तरीके से पीटा गया है तो क्या यह सब कुछ गृह मंत्री विजय शर्मा की खींच का परिणाम था या फिर ग्रामीणों ने जिस तरीके से अभिषेक पल्लव को गांव आने से रोकने के लिए धक्का मुक्की की थी उसका गुस्सा था कहना बेहद कठिन क्योंकि कांग्रेस अभी तक अभिषेक पल्लव को ना तो निलंबित किया गया है और ना ही हटाया गया है सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है सरकार अपराध कम होने की बा बात करती लेकिन जिस तरीके से बर्बरता के साथ खुद एसपी खड़े होकर बच्चों और महिलाओं को पिटवा रहे हैं क्या वह वीडियो विष्णु देव साय या ग्रह मंत्री विजय शर्मा ने नहीं देखा क्या उन्हें अपनी पुलिस पर शर्म नहीं आती कि किस तरीके से सरकार चला रहे हैं और हफ्ता भर नहीं हुए हैं कलेक्टर एसपी कान्फ्रेंस को और इस तरीके की बर्बरता छत्तीसगढ़ में इस तरीके की बर्बरता की खबर शायद ही कभी सुनने को मिलती होगी वरना यहां तो पुलिस ही पीटती थी लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया उनकी भी बरामी से पिटाई किस हद तक या किस के साथ विष्णु देव साय सरकार चला रही है यह कहना बेहद मुश्किल काम कांग्रेस नेता पहुंचे थे उनके सामने महिलाएं बच्चे गांव वालों ने जो व्यथा कही है वह इस वीडियो में दिखाया नहीं जा सकता सोचिए कि किस हद की बर्बरता पुलिस ने वहां की है कितने ही लोग गांव छोड़कर भाग गए किस तरीके का खेल हुआ है और अभिषेक पल्लव जो हीरो बने फिरते थे सोशल मीडिया में तरह तरह के अपने हीरोगिरी के वीडियो डाला करते थे उस अभिषेक पल्लव के भीतर का जान किस कदर निकला बाहर कौन सा गुस्सा था उन्हें कि उनका दिल नहीं प पसीजा उन मासूम बच्चों और महिलाओं की चीख पर आप खुद सोचिए कि छत्तीसगढ़ सरकार कैसे चल रही है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/YCZ4vvQsZhM?si=vu7T1lqFVhOE0brq

गुरुवार, 14 मई 2026

नितिन गडकरी ने सरकार की मंशा ज़ाहिर कर दी, मिडिल क्लास पर बढ़ाता बोझ…

 

नितिन गडकरी ने सरकार की मंशा ज़ाहिर कर दी, मिडिल क्लास पर बढ़ाता बोझ…

तुम अगर कार वालों से टोल ज्यादा लोगे वह आंदोलन नहीं करेगा ट्रक बसेस वाले एजीटेशन नहीं करेंगे पर स्कूटर और साइकिल वाला झेंडा लेकर घूमता है तुम उससे तुम्हारे टोटल इसमें एक परसेंट भी एडिशन नहीं हो रहा उसको आंग पर क्यों ले रहे हो उसको ऑटो रिक्षा और स्कूटर से लेने का कोई कारण नहीं-नितिन गडकरी 

 मोदी सरकार ने सुविधा देने के नाम पर जिस तरीके से टैक्स वसूली के नए-नए फार्मूले सामने लाए हैं उससे क्या मिडिल क्लास की तकलीफें बढ़ गई महंगाई भी इसी वजह से बढ़ी और बेरोजगारी भी क्या इसी वजह से बढ़ी यह सवाल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आम आदमी को महंगाई की वजह से जीवन जीना मुश्किल और अब मिडिल क्लास की तकलीफों का अंदाजा आरएसएस या हिंदूवादी संगठनों को भी धीरे-धीरे होने लगा है मिडिल क्लास की तकलीफों को देखकर पिछले दिनों आरएसएस के नेता गोपाल अग्रवाल जो रायपुर सांसद के बड़े भाई भी हैं उन्होंने और ऐसा नहीं है कि इस पूरे खेल में केवल वित्तमंत्री सीतारमण शामिल हो या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह ही शामिल हो इस खेल में परिवहन मंत्री नितिन गटक भी उतने ही शिद्दत से शामिल है एनएचआई का कर्जा यदि लगातार बढ़ रहा है और उसी पैमाने पर विकास के नाम पर टोल टैक्स की बात हो या आम आदमी से जुर्माना वसूलने की बात हो उसी तेजी से यदि बढ़ाई जा रही तो इसे क्या कहा जाए और अब तो नितिन गडकरी ने खुलेआम मंच से कहना शुरू कर दिया है कि मिडिल क्लास को निचोड़ डालो हालांकि सीधे उन्होंने मिडिल क्लास का नाम नहीं लिया ना ही निचोड़ में जैसे शब्द का इस्तेमाल किया लेकिन जिस तरीके से उ ने कार वालों से वसूली को लेकर बात कही पहले वह सुन लीजिए तुम अगर कार वालों से टोल ज्यादा लोगे व आंदोलन नहीं करेगा ट्रक बसेस वाले एजीटेशन नहीं करेंगे पर स्कूटर और साइकिल वाला झेंडा लेकर घूमता है तुम उससे तुम्हारे टोटल इसमें एक परट भी एडिशन नहीं हो रहा उसको आंग पर क्यों ले रहे हो उसको ऑटो रिक्षा और स्कूटर से लेने का कोई कारण नहीं यानी आप सोचिए कि लोन लेकर मिडिल क्लास अपने सपने पूरे करता है और उससे वसूली किस तरीके से करने का प्लान या वसूली को लेकर यदि दिमाग में परिवहन मंत्री की सोच है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इतनी वसूली के बाद भी यानी टोल टैक्स के रूप में वसूली चल रही है रोड टैक्स के रूप में वसूली चल रही है अनाप सनाप जुर्माना वसूला जा रहा है 20 20 303 हजार के जुर्माने की खबरें तो आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनी रहती है और उसके बाद भी यदि 1750 किलोमीटर सड़क बेची जा रही है 14 हाईवे सेक्शन की है यह सड़क बकायदा इसे लेकर टेंडर भी जारी किया गया था 3 लाख 47 हज करोड़ रुपए कर्जा है ए और जिस तरीके से वसूली के नए नए मापदंड तैयार किए जा रहे हैं करोड़ों रुपए खर्च करके टोल प्लाजा बनवाया गया फास्ट ट्रैक लगवाया गया और उसके बाद अब इन करोड़ों रुपए का कोई मतलब नहीं रह जाएगा जब सेटेलाइट सिस्टम पर आ जाएगा और यकीन मानिए य सेटेलाइट सिर्फ टोल वसूली नहीं करेगी बल्कि आने वाले दिनों में वह स्पीड को लेकर भी जुर्माना वसूलने लग जाए तो कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि जो सिस्टम लगाए जा रहे हैं वह सिस्टम में यह भी पता चलेगा कि किस सड़क पर गाड़ी कितनी किलोमीटर चलनी चाहिए यदि आपने उससे मान लो किसी सड़क में 40 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी चलनी और आपने 42 की चला ली तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में टोल टक्स की वसूली के साथ जुर्माने का भी रसीद आपके पास पहुंच जाए यानी सरकार कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती और सबसे हैरानी की बात तो यह है 10 साल सत्ता में रहने के बाद दुनिया भर के दावा करने के बाद यदि टोल टैक्स वसूली का काम गुंडे बदमाश या राजनीतिक ने ही कर रहे हैं तो इसे क्या कहा जाए आप खुद सुनिए कि नितिन गडकरी टोल वसूली को लेकर क्या कहते हैं आदर यू लाइक इट मे नॉट लाइक इट टोल कलेक्शन यह तुम्हारा धंधा ही नहीं है अभी देश में यह धंधा है इसमें जो इवॉल्वड है एंटरप्र व एक तो पॉलिटिशियन है अंडरवर्ल्ड है या क्रिमिनल है मारपीट करने वाले ल बाज वही आते हैं और वह आने के बाद यह सिस्टम में की दादागिरी चलने लगी और फिर उन्होंने एक काम किया कि अभी बहुत से जगह पर उतना ज्यादा डायरेक्ट बोलना मेरे लिए उचित नहीं है वहां का मेंबर ऑफ पार्लियामेंट हो या एमएलए हो उन लोगों के साथ इनका जॉइंट वेंचर बन गया और फिर उसके बाद यह बिजनेस रन करते हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से सरकार चल रही है और किस तरीके से मिडिल क्लास को निचोड़ का खेल चल रहा है पर्यावरण के नाम पर 10 साल 15 साल चली गाड़ियों को कंडम बनाकर ऑटोमोबाइल सेक्टर को जीवित करने की कोशिश तो की जा रही है लेकिन इसका भार भी तो आम आदमी पर पड़ रहा है तब देखना है कि आने वाले दिनों में मिडिल क्लास को लेकर या मिडिल क्लास से वसूली को लेकर सत्ता और किस किस तरह की योजना बनाती है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/H_IWN2ltlUY?si=gE0V9IkSVx4_I_ts

बुधवार, 13 मई 2026

पार्टी ने बढ़ा दी मोहन की परेशानी

 

पार्टी ने बढ़ा दी मोहन की परेशानी

छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार तो बन गई है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के भीतर खाने में जिस तरीके से गुटबाजी हावी है उसकी वजह क्या भाजपा को अपने कब्जे में करने की मोदी शाह की कोशिश है क्या मोदी शाह के पकड़ को लेकर भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ के कई नेता नाराज हैं यह सवाल इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल भर से इस तरह के घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं हम साल भर के ही घटनाक्रम की बात कर रहे हैं किसे किनारे लगाना है किसे मंत्री बनाना है किसे संगठन में बड़ा पद देना है सारा कुछ तय मोदी शाह कर रहे हैं और इस चर्चा के बीच कांग्रेस ने भी तो आरोप लगा दिया है कि भारतीय जनता पार्टी कि डबल इंजन की सरकार रिमोट कंट्रोल से चढ रही है तो कोई इसे खड़ाऊ सरकार कह रहा है तो कोई इसे रबड़ स्टैंप लेकिन अब  कद्दावर माने जाने वाले नेता बृजमोहन अग्रवाल की कोर ग्रुप से छुट्टी उनके लिए चिंता का सबब हो सकता बृजमोहन अग्रवाल को जिस तरीके से सत्ता और संगठन किनारे करने की कोशिश में लगी 15 साल रमन राज में मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल विष्णुदेव साय सरकार में भी मंत्री बने उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया लेकिन अचानक लोकसभा चुनाव में उतार दिया गया और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उसके बाद बृजमोहन अग्रवाल की उपेक्षा और अपमान की खबर जमकर चर्चा में रही कांग्रेस ने भी खूब मजे लिएथे

हालांकि कोर ग्रुप से छुट्टी केवल मोहन सेठ की नहीं हुईं है उनके साथ रामविचार नेताम विक्रम उसेंडी रेणुका सिंह की भी छुट्टी हुई है 

वीडियो देखें

https://youtu.be/8FYkPZgnDIk?si=c9p5bF133vxHVICH

मंगलवार, 12 मई 2026

रेलवे की बैठक में छत्तीसगढ़ के सांसदों के प्रस्ताव की अनदेखी से तोखन साहू भड़के

रेलवे की बैठक में छत्तीसगढ़ के सांसदों के प्रस्ताव की अनदेखी से तोखन साहू भड़के

 छत्तीसगढ़ की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को सांसद के रूप में 10 सीटें दी है लेकिन इन सांसदों की ना तो मोदी सत्ता को परवाह है और ना ही उनके अधिकारियों की ही परवाह है कहा जाता है कि सांसदों के प्रस्ताव को रेल प्रशासन रद्दी की टोकरी में फेंक देता है लगातार ट्रेनें रद्द हो रही हैं त्योहारी सीजन में लोग परेशान हैं बड़े-बड़े टैग लाइन के साथ अखबारों में छप रहा है कि त्यौहार के सीजन में ट्रेनें रद्द किए जाने से लोग किस तरीके से यात्रा कर रहे हैं जानवर से भी बदतर स्थिति में यात्रा हो रही है लेकिन इसकी परवाह सांसदों को है कहना कठिन है हालांकि रेलवे के इस अचानक इस करतूत को लेकर संसद में भी आवाज गूंजी लेकिन उसके बाद क्या हुआ पूरे प्रदेश को मालूम है कि किस तरीके से बृजमोहन अग्रवाल रायपुर के सांसद ने यह मामला उठाया उसके दूसरे तीसरे दिन ही किस तरीके से 40 ट्रेन रद्द कर दी गई थी और फिर जब अब तीजा का त्यौहार सीर में था और जगह जगह त्यौहारों का उत्सव मनाया जा रहा है तीजा के बाद गणेश उत्सव देखने लोग एक शहर से दूसरे शहर जाते हैं पितृ पक्ष के बाद दुर्गोत्सव में भी ट्रेनों में भीड़ रहती है छुट्टियों का सीजन चला आता है लेकिन जिस तरीके से ट्रेन रद्द हो रही है उसे ले भारतीय जनता पार्टी के सांसद की भूमिका क्या है क्या वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इतने डरे हुए हैं कि अपनी बात भी नहीं रख पाते हालांकि कहा जा रहा है कि कुछ सांसदों ने रेलवे को प्रस्ताव भेजा है कि किस तरीके से यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाई जाए लेकिन कहा जाता है कि रे प्रशासन इन प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं और पिछले दिनों दक्षिण पूर्व रेल मंडल की जब बैठक आयोजित हुई तो सांसदों का गुस्सा बाहर निकल आया इस बैठक में सांसदों द्वारा दिए जा रहे प्रस्ताव को जिस तरीके से रेलवे के अधिकारी अनसुना कर रहे थे उससे बिलासपुर के सांसद तोख साहू फट पड़े उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एक एक सांसद लगभग 252 लाख लोग लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और उनकी बातें नहीं सुनना गलत बात है उनकी बातें सुनी जाए लेकिन क्या तोख साहू के इस गुस्से का कोई असर होगा क्योंकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कोई छोटे-मोटे हस्ती नहीं है वे नरेंद्र मोदी के नाक के बाल माने जाते हैं इस दौर में जिस तरीके से रेल घटनाएं हुई दुर्घटनाएं हुई लोगों को लोगों की जान गई आए दिन पटरियों से डिब्बे के उतर जाने की खबरें आते रहती है उसके बाद भी रेल मंत्री के खिलाफ यदि कोई कारवाही नहीं हो रही है तब रेलवे अधिकारियों की मनमानी क्या बढ़ गई है क्या उन्हें रेल मंत्री और मोदी सरकार का पूरी तरीके से संरक्षण मिला हुआ है और इसकी वजह से वे भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की भी बात नहीं सुन रहे हैं कहा जाता है कि उस बैठक में तीखी नोक झोक हुई है रेलवे अधिकारियों और तोख साहू के बीच सांसदों के प्रस्ताव को जिस तरीके से रेल अधिकारी किनारे कर रहे थे अनसुना कर रहे थे उससे सांसद बेहद नाराज थे लेकिन बाकी सांसद खामोश थे क्योंकि यह मोदी सत्ता है तो खन साहू ने कुछ बात कही और इधर चर्चा इस बात की है कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद शीघ्र ही अब इस मामले का रेल मंत्री से मिलेंगे प्रधानमंत्री से भी वे मिल सकते हैं लेकिन यदि सरकार का रवैया ही यही है तब यह सांसद क्या सड़कों में उतरने की हिम्मत जुटा पाएंगे !

Vidio देखें 

https://youtu.be/b0504cOMMWg?si=_iZKg2vNAQpBbgPi

सोमवार, 11 मई 2026

सालों से परेशान नटवरलाल कोर्ट पहुँचा, वजह जान आप भी हैरान हो जाएँगे…

 

सालों से परेशान नटवरलाल कोर्ट पहुँचा, वजह जान आप भी हैरान हो जाएँगे…

इस देश के लोग या सरकार नटवर लालों से बेहद परेशान है लेकिन आज हम आपको एक ऐसी नटवर लाल की कहानी बताएंगे जो खुद इतना परेशान हुए कि उन्हें हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी दरअसल पिछले कई सालों से यह नटवन लाल बेहद परेशान है यानी परिवार के साथ जब फिल्में देखने बैठता है यह या टीवी देखने बैठता है तो उन्हें किस तरीके से मजाक का सामना करना पड़ता है दोस्तों के बीच खबरों में हर जगह नटवर लाल के टैग लाइन ने इस नटवर लाल को परेशान कर दिया उन्होंने हमसे बातचीत में बताया कि वह किस तरीके से परेशान है पहले उनकी पूरी बात सुन लीजिए आज से लगभग 58 59 साल पहले मेरे माता-पिता ने मेरा नाम नटवर लाल भगवान श्री कृष्ण के नाम नटवर के आधार पर रखा था तब उन्हें क्या पता था कि इसको 420 के साथ जोड़ दिया जाएगा नट लाल का नाम इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आर्थिक मानसिक आहत होती है जिस नटवरलाल का नाम सबसे पहले जिस व्यक्ति के लिए जड़ा गया था उसका नाम भी मिथिलेश श्रीवास्तव था नटवरलाल नहीं था उसके बाद से एक परंपरा सी बन गई है 30 40 साल पहले जब लोग अपने बच्चों का नाम नटवरलाल रखा करते थे लेकिन जब से यह फ्रॉड के साथ में जोड़ना शुरू हुआ है तब से लोगों ने अपने बच्चों का नाम नटवरलाल रखना बंद कर दिया क्या लोग मजाक भी उड़ाते हैं इस मामले में आपके साथ स्वाभाविक क्रिया है कोई ऐसी घटना जो आप बता सके कि किस तरीके से आपको अपमानित होना पड़ा या आपको बड़ा पीड़ा पहुंचा ऐसी कोई घटना जब हम मालो बच्चों के साथ में टीवी देख रहे हैं और बैठे हैं परिवार के साथ में और जब य आता है कि नौरा फतेही और एक नटवरलाल के चक्कर में फसी तो एक मन में यह लगता है कि इसमें नटवरलाल का क्या कहा क्या क्या क्या लेना देना इस प्रकरण से सुकेश चंद्रशेखर का नाम सुकेश चंद्रशेखर लिया जाए ना ना कि टला क्या लगता है इस मामले में आपको न्याय मिलेगा माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ से हमने निवेदन किया है कि इस प्रथा को बंद किया जाए और मेरा सभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया एव सोशल मीडिया वालों से निवेदन है कि नटवर लाल के नाम का दुरुपयोग बंद करें एक मजाक का पात्र तो होही जाता है कहीं ना कहीं क्योंकि चाहे मजाक में ही तो यह प्रथा मतलब कुल मिला करके कहेंगे तो गलत परंपरा ही तो प्रारंभ हो गई ना जैसे आजकल नया बंटी बबली वगैरह भी आ गया है तो यह क्या क्या मतलब है इस परंपरा का य कहां से शुरू हुई किसने शुरू की इसकी त में जाना भी एक मेरे हिसाब से उचित होगा कोई भी 420 प्रकरण अभी भी आप आए दिन देख लीजिए में न्यूज चैनल में सोशल मीडिया पर कोई भी पकड़ता है चिल्ला चिल्ला के बोलते और नटवरलाल इसमें पकड़ा गया एक और नटवरलाल पकड़ा गया बड़े बड़े नटवरलाल शर्मा जाए जबक इसमें मेरे हिसाब से कोई नटवरलाल का कोई रोल या कोई तुक नहीं हैसे तो आप सालों से गुजर रहे हैं तो क्या अब जाकर आप इस बात को हमारे द्वारा यह भी इंतजार किया गया चलो कोई बात नहीं हो गया चलिए कोई बात नहीं इसके बाद बंद हो जाएगा लेकिन ये तो रेगुलर आदत सी बन गई है बिल्कुल परंपरा सी बन गई है या घर परिवार में भी दिक्कत होती है दिक्कत का मतलब य है कि मेरा नाम को जो मेरे मां बाप ने भगवान श्री कृष्ण के नाम पर रखा था उसको फड के नाम से जोड़ना नटवरलाल किसी भी नलाल का नाम को उसम स्वाभाविक पीड़ा का कार्य है मे हिब से तो यह थे रायगढ़ के वासी नटवर लाल अग्रवाल किस किस तरीके से इन् परेशान होना पड़ा है अपमानित होना पड़ा है इसे लेकर अब वे हाई कोर्ट की शरण में जा पहुंचे हैं देखना है कि इस मामले में इस नटवन लाल अग्रवाल को क्या न्याय मिलेगा उ वो तो सीधे-सीधे कहते हैं धार्मिक भावना का तो उपहास उड़ाया ही जा रहा है भगवान के नाम का उपहास आया जा रहा है और इस पर रोक लगनी चाहिए !

Vidio देखें 

https://youtu.be/nAeA7QkhL4A?si=D33JMrQmqt5n0eyV

अपनी ही सरकार पर भड़के बीजेपी सांसद, मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखा

 

अपनी ही सरकार पर भड़के बीजेपी सांसद, मुख्यमंत्री को चिट्ठी भी लिखा

छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार यानी केंद्र में भी और राज्य में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और उसके बाद भी यदि मोदी की कई गारंटी पूरी नहीं हो रही तो फिर इसे क्या गारंटी पूरी नहीं होने से अब भारतीय जनता पार्टी में भी विरोध के स्वर सु बगाने लगे हैं  पहले ही कई तरह के आरोपों से घिरे विष्णुदेव साय सरकार क्या अब पार्टी के नेताओं को भी नहीं साथ पा रहे कांग्रेस ने तो इसे रिमोट पर चलने वाली सरकार कह दी है और जिस तरीके से वरिष्ठ की उपेक्षा हो रही है उसे लेकर भी साय सरकार पर कई तरह के सवाल है कहा जाता है कि विधायक तो छोड़िए मंत्रियों की भी बात यदि अधिकारी नहीं सुन रहे हैं तो छत्तीसगढ़ में सरकार कौन चला रहा है हालांकि कई सुपर सीएम खुद विष्णुदेव साय की धर्म पत्नी कौशल्या देवी भी अपने को सुपर सीएम कहने से परहेज नहीं करती तो इसके अलावा संगठन का भी अपना दबदबा है संगठन मंत्री पवन साय का जिस तरीके से लाल बत्ती के इच्छुक लोग चक्कर लगा रहे हैं वह भी क्या सत्ता का केंद्र बिंदु ब न भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान के दौरान जिस तरीके से रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने को अपमानित महसूस जिस तरीके से गुस्से में आकर उन्होंने मोमबत्ती को बुझाया और वहां से चले गए यह वीडियो खूब वायरल हो रहा है और लोग तो इसके लिए बृजमोहन अग्रवाल को दोष दे रहे हैं कि हर जगह ठने की क्या जरूरत है जहां मान सम्मान ना हो वहां जाने की क्या जरूरत है और यह बात नंद कुमार साय को लेकर भी जन चर्चा का विषय तब ऐसे दुर्ग से दूसरी बार सांसद बने विजय बघेल का गुस्सा क्या वायरल नहीं हो रहा है उन्होंने कर्मचारियों के एक कार्यक्रम में जिस तरीके से विष्णु देव साय सरकार पर प्रहार किया वह पहले आप खुद सुन अभ दिल्ली ग मुख्यमंत्री बात रता हं आप लोग ज्यादा दिन इसको उइ मत अपनी हसी मत उड़ाए अब अगर कर्मचारी आंदोलन होंगे उस आंदोलन में यो आपने बनाया था और जी की गारंटी के रूप में हमने इसको दिया है तो मोदी गारंटी झूठी ना हो उस पर विश्वास बना रहे कर्मचारी अधिकारियों का इसलिए इसको तत्काल आप निर्णय लीजिए नहीं तो अब धीरे धीरे आग सुलग रही है कब स्पोट स्थिति आ जाएगी मैं नहीं जानता और उसम मैं भी शामिल होगा य बोल यानी आप सोचिए कि विजय बघेल किस तरीके से नाराज है और अपनी टिकट या अपनी कुर्सी तक को दाव में लगाने को तैयार तभी मिलता है नहीं तो टिकट तो बहुत लोग को मिलता है हर कोई जीत जाता तो ये मैं उसकी चिंता नहीं करता टिकट मिले नहीं मिले वो जिसकी किस्मत में होगा मिलेगा मेरी किस्मत में रहेगा मिलेगा लेकिन छत्तीसगढ़ में किस तरीके से सत्ता चल रही है यह सिर्फ एक बानगी है अपराध बेलगाम हो चुके हैं लगातार अपराध की घटनाएं घट रही है लोग देख रहे हैं लेकिन गृह मंत्री आकड़े बाजी में लगे हैं वे कहते हैं कि अपराध में कमी आई विष्णु देव साय दावा करते घूम रहे हैं कि डबल इंजन की सरकार होने की वजह से बस्तर में विकास का नया युग शुरू हो गया क्योंकि डबल इंजन की भी सरकार है उसका भी लाभ मिल रहा है और हमारे देश असस गृह मंत्री आदरणीय अमित शाह जी आठ महीने में दो बार आकर हम लोग का हमारे प्रदेश के जो जवान है जो सैनिक बल है उनका हौसला अफजाई किए हैं और बहुत मजबूती के साथ हम लोग नक्सलवाद के साथ लड़ रहे हैं लेकिन हकीकत तो यह है कि पार्टी के भीतर असंतोष जमकर भरा हुआ है और जिस तरीके से विजय बघेल ने कहा कि कभी भी विस्फोटक रूप ले लेगा तो क्या सचमुच विष्णु देव साय सत्ता संभालने में असफल हो रहे हैं या फिर सचमुच रिमोट की यह सरकार है जो हर काम मोदी शाह के इशारे पर करती है और इसीलिए काम पूरा होने में विलंब हो रहा है भ्रष्टाचार को लेकर भी कई तरह के सवाल है हालांकि अभी तक किसी भारतीय जनता पार्टी के नेता भ्रष्टाचार को लेकर खुलकर नहीं सामने आए हैं लेकिन कहा जा रहा है कि शराब घोटाला के लिए जो सिस्टम जिम्मेदार था वही सिस्टम तो चल रहे हैं जल जीवन मिशन में भी वसूली बाजी जमकर हो रही है तो संविदा नियुक्ति के नाम पर मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं एम फंड को लेकर जिस तरह के आरोप से भूपेश बघेल की सरकार घिरी थी कमो बेश वही स्थिति है कलेक्टरों की अपनी मनमानी चल रही है यानी कुल मिलाकर देखा जाए तो विष्णुदेव साय सरकार आठ महीने में भले ही मुख्यमंत्री कहते हो कि मात्र आठ महीने जब से हम लोग सरकार में आए हैं अभी सरकार को मात्र आठ महीने हुए हैं लेकिन किसी भी सत्ता के लिए उसकी परफॉर्मेंस को देखना आठ माह का समय कम नहीं होता है तब ऐसी परिस्थिति में विजय बघेल ने जो सवाल उठाए हैं या सीधा-सीधा अपनी ही सरकार पर हमला किए उन्होंने तो पत्र भी लिख दिया है विष्णु देव साय को तब देखना है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की राजनीति क्या जम्मू कश्मीर और हरियाणा में जिस तरीके से बगावत हो रहे हैं उसी तरीके से सामने आएगा हालांकि इसकी कोई संभावना इसलिए भी नहीं दिखाई देती क्योंकि सरकार का कार्यकाल पूरे 4 साल बचा है लेकिन चुनाव के आते ही क्या जिस तरीके से हरियाणा में गुस्सा फूटा है कश्मीर में गुस्सा फूटा है उसी तरीके से अब जहां-जहां डबल इंजन की सरकार है वहां वहां गुस्सा फटेगा !

Vidio देखें 


https://youtu.be/9QFbrpJ9Gb0?si=lknlElrzmbgS8gSX