सोमवार, 18 मई 2026

जब साय सरकार के 'ज़ीरो टॉलरेंस' पर उठे सवाल

 जब साय सरकार के 'ज़ीरो टॉलरेंस' पर उठे सवाल


छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद भ्रष्टाचार पर 'ज़ीरो टॉलरेंस' का दावा करने वाली विष्णुदेव साय सरकार इस वक्त दोतरफा विवादों में घिर गई है। एक ओर जहाँ स्कूली बच्चों की मुफ्त किताबें कबाड़ की दुकानों और पेपर मिलों में बेचे जाने का मामला राष्ट्रीय स्तर पर तूल पकड़ा था  वहीं दूसरी ओर राजस्व विभाग में बड़े पैमाने पर लेन-देन और 'तबादला उद्योग' चलाने के गंभीर आरोपों ने सरकार की साख पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों ही मामलों में सरकार की कार्रवाई की दिशा पर सवाल उठ रहे हैं। जहाँ भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले तहसीलदार संघ के अध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया, वहीं दूसरी ओर पाठ्य पुस्तक निगम घोटाले की जांच के लिए बनाई गई कमेटी में दागी चेहरों को ही शामिल कर लिया गया।

राजस्व विभाग में 'तबादला उद्योग': आवाज उठाने पर  नेता निलंबित

राजस्व विभाग में हाल ही में हुए तबादलों के बाद संघ के प्रांतीय अध्यक्ष नीलमणि दुबे ने सीधे राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा की कार्यप्रणाली और उनके बंगले पर सवाल उठाए थे। दुबे का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन के आधार पर मनचाही पोस्टिंग दी जा रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जो दागी अधिकारी या पटवारी पहले दुर्ग-भिलाई या अन्य क्षेत्रों में विवादित रहे, उन्हें राजधानी रायपुर में मलाईदार कुर्सियां सौंप दी गईं।

निशाने पर आए संघ के पदाधिकारी

इस कथित घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने का खामियाजा तहसीलदार संघ को भुगतना पड़ा है। सरकार ने जांच बिठाने के बजाय प्रांतीय अध्यक्ष नीलमणि दुबे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही संघ के अन्य सक्रिय पदाधिकारियों—सचिव गुरुदत्त पंचभाई (दुर्ग से बलरामपुर), प्रवक्ता पखन टंडन (सुकमा) और अंजलि शर्मा (धमतरी)—का प्रशासनिक आधार पर दूर-दराज के क्षेत्रों में ट्रांसफर कर दिया गया। संघ ने इसे 'टारगेटेड' कार्रवाई और आवाज दबाने की कोशिश करार दिया है।

पाठ्य पुस्तक निगम घोटाला: बच्चों की किताबें कबाड़ के हवाले

दूसरा बड़ा मोर्चा शिक्षा विभाग में खुला है। प्रदेश के सात अलग-अलग जिलों (धमतरी, जशपुर, सूरजपुर, अंबिकापुर आदि) से सरकारी स्कूलों के बच्चों के लिए छपीं मुफ्त पाठ्य पुस्तकें सीधे कबाड़ की दुकानों और रिसाइक्लिंग के लिए पेपर मिलों में भेज दी गईं। कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस मामले को रंगे हाथों पकड़ा, जिसके बाद यह राष्ट्रीय सुर्खियां बन गया।

इस मामले में सरकार ने आनन-फानन में पाठ्य पुस्तक निगम के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश शर्मा को निलंबित तो कर दिया, लेकिन असली विवाद तब खड़ा हुआ जब जांच कमेटी के गठन की परतें खुलीं। विपक्ष का आरोप है कि पांच सदस्यीय जांच कमेटी में दो ऐसे अधिकारियों को शामिल किया गया है, जो खुद पहले से ही भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे हैं। ऐसे में जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

'पीए से मंत्री' के सफर पर उठ रहे राजनीतिक सवाल

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा पर लग रहे इन आरोपों के बाद अब राजनीतिक गलियारों में उनके अतीत को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व में कई बड़े नेताओं और मंत्रियों के पीए (Personal Assistant) रह चुके टंकराम वर्मा के अचानक कैबिनेट मंत्री बनने और अब उनके विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग के विवाद सामने आने के बाद विपक्ष आक्रामक है। कांग्रेस का आरोप है कि साय सरकार में 'साय-साय भ्रष्टाचार' चल रहा है और इस लड़ाई को सड़क से लेकर सदन और जरूरत पड़ने पर न्यायालय तक ले जाया जाएगा।

सवालों के घेरे में जमीनी हकीकत

नया शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन से चार महीने बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि राज्य के कई दूरस्थ अंचलों में बच्चों को अब तक न तो पूरी किताबें मिल पाई हैं और न ही सरकारी मुफ्त यूनिफॉर्म (स्कूली ड्रेस)। जनता और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच अब यह बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने मंत्रियों और बेलगाम हो चुके नौकरशाहों पर लगाम कसकर 'ज़ीरो टॉलरेंस' के अपने वादे को साबित कर पाएंगे, या फिर यह सिर्फ एक चुनावी नारा बनकर रह जाएगा?



रविवार, 17 मई 2026

लोहारीडीह का खौफनाक सच, अब भी दहशत…

 लोहारीडीह का खौफनाक सच, अब भी दहशत…




छत्तीसगढ़ का लोहारी डीह कांड भला कौन भूल सकता है, भाजपा नेता की गुंडागर्दी से निजात पाने जब गांववालों का कानून से भरोसा उठ गया तो गांववालों ने ख़ुद ही इस दहशत से मुक्ति के लिए बीजेपी नेता को घर में बंद कर आग लगाकर मार डाला और इसके बाद सत्ता में बैठी बीजेपी सरकार की पुलिस का नंगा नाच ने मानवता को शर्मसार तो किया ही पूरे गांव को दहशत में भर दिया क्या गांववाले इस दहशत से उबर पाए, क्या उन्हें न्याय मिला, ऐसे कई सवालों के बीच यह रिपोर्ट जो बताती है तब क्या क्या हुआ 

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा के गृह क्षेत्र कवर्धा के रेंगाखार अंतर्गत आने वाले लोहारीडीह गांव का एक ऐसा भयावह सच सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस कस्टडी में प्रशांत साहू की मौत के बाद अब जो खुलासे हो रहे हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। राज्य महिला आयोग की टीम द्वारा जेल में बंद महिला बंदियों से मुलाकात के बाद यह साफ हो गया है कि कानून व्यवस्था को कायम करने के नाम पर पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थीं।

आधी रात का तांडव: खींचकर निकाला और पीटा

जेल का दौरा कर लौटीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने बंद कमरे में महिला डॉक्टरों और तहसीलदार की मौजूदगी में महिला बंदियों के बयान दर्ज किए और उनकी चोटों की जांच की। उन्होंने बताया, "गांव में पुलिसिया बर्बरता चरम पर थी। 16 सितंबर की रात करीब 12 बजे पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों के घरों के दरवाजे तोड़ दिए। महिलाओं को घसीटते हुए बाहर निकाला गया और रेंगाखार थाने ले जाकर उन्हें डंडे, बेल्ट और पट्टों से बेरहमी से पीटा गया। छह दिन बीत जाने के बाद भी उनके शरीरों पर चोट और सूजन के गहरे निशान मौजूद हैं।" आयोग ने जेल डॉक्टरों को घुटनों और अन्य अंगों की सूजन की पुष्टि के लिए तत्काल एक्स-रे कराने के निर्देश दिए हैं।

रिश्तों की दुहाई भी न आई काम, पूरे-पूरे परिवार बंद

घटना के बाद पुलिस ने गांव से ताबड़तोड़ 69 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने बिना सोचे-समझे पूरे-पूरे परिवारों को जेल भेज दिया है। जेल में बंदियों की स्थिति बताते हुए महिला आयोग ने दर्ज किया कि कहीं सास-बहू एक साथ सलाखों के पीछे हैं, तो कहीं देवरानी-जेठानी को बंद कर दिया गया है। सबसे ज्यादा असंवेदनशीलता इस बात पर दिखी कि पुलिस कस्टडी में अपनी जान गंवाने वाले मृतक प्रशांत साहू की पीड़ित मां को भी पुलिस ने आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया है।

[विशेष बॉक्स 1] गांव में पसरा सन्नाटा, घरों में लटके ताले

पुलिसिया खौफ का आलम यह है कि आज लोहारीडीह गांव पूरी तरह से वीरान हो चुका है। कई घरों पर ताले लटके हुए हैं और ग्रामीण पुलिस के डर से अपने घर-बार, मवेशी छोड़कर जंगलों या सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग गए हैं। इस आधुनिक युग में भी किसी गांव का पुलिस के डर से खाली हो जाना शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है।

[विशेष बॉक्स 2] मजिस्टेरियल जांच पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर सूबे की सियासत भी उबल पड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार द्वारा गठित मजिस्टेरियल जांच समिति को 'लीपापोती' की कोशिश करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक छोटा प्रशासनिक अधिकारी (SDM) भला जिले के कलेक्टर और एसपी (SP) के खिलाफ कैसे निष्पक्ष जांच कर सकता है? इधर, साहू समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने ज्ञापन सौंपकर तत्कालीन एसपी अभिषेक पल्लव को तुरंत निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। विपक्षी दल अब सीधे गृह मंत्री विजय शर्मा के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए हैं।

राज्यपाल और चीफ जस्टिस को सौंपी जाएगी गोपनीय रिपोर्ट

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील और कानूनी पेचीदगियों से जुड़ा है, इसलिए इसकी पूरी विस्तृत और तकनीकी रिपोर्ट राज्य के राज्यपाल और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंपी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सभी पीड़ित महिलाओं की चोटों की फोटोग्राफी कराई जानी चाहिए ताकि पुलिसिया बर्बरता के पुख्ता सबूत कानूनी रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकें।


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे!"



छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में त्योहारों की आड़ में होने वाले हुड़दंग, बेलगाम डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में 'जंगलराज' नहीं चलने दिया जाएगा।"

[मुख्य मुद्दा: आत्महत्या का मामला]

"दरअसल, हाई कोर्ट में ध्वनि प्रदूषण को लेकर चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, हाल ही में हुई एक दुखद घटना का जिक्र आया। कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा की गई आत्महत्या के मामले का संज्ञान लेते हुए इसे बेहद चिंताजनक (Alarming) और दर्दनाक बताया। 

[हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां और जजों के बयान]

कानून व्यवस्था पर सवाल: कोर्ट ने कहा, "अगर राज्य की कानून-व्यवस्था ऐसी हो जाएगी, तो आम नागरिक कैसे जिंदा रहेगा? एक आम आदमी का गरिमा के साथ जीना और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखना सबसे जरूरी है।" 

त्योहारों की आड़ में असामाजिक तत्व: कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि "त्योहारों की आड़ में लोग हर तरह की असामाजिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। लोग शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव में हुड़दंग कर रहे हैं। कोर्ट ने किसी भी त्योहार को मनाने से नहीं रोका है, लेकिन त्योहार की आड़ में किसी की जान लेना या असामाजिक कृत्य करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" 

प्रशासन की लाचारी पर फटकार: जब महाधिवक्ता (Advocate General) ने कहा कि प्रशासन स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, तो कोर्ट ने कहा, "महाधिवक्ता जी, राज्य के मुखिया होने के नाते कानून-व्यवस्था बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है। आप इन तत्वों के सामने खुद को लाचार नहीं पा सकते। अगर राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकती, तो सरकार को सोचना होगा।" 

'जंगलराज' की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन हर हाल में होना चाहिए। कुछ लोग प्रशासन को धमकी दे रहे हैं कि नियम कड़े हैं तो इन्हें वापस लो। कोर्ट ने कहा, "यह कोई 'जंगलराज' नहीं है। हम किसी की धमकी से प्रभावित होने वाले नहीं हैं। कानून का राज (Rule of Law) सर्वोच्च है।" 

[अदालत का अंतिम निर्देश]

"हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट ने कभी भी लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन इसकी एक तय और वैध सीमा (Permissible Limit) होनी चाहिए, ताकि बीमार बुजुर्गों और पढ़ाई करने वाले छात्रों को परेशानी न हो। 

अदालत ने पुलिस अधीक्षक (SP) के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में ध्वनि प्रदूषण की लगातार निगरानी (Monitoring) करने के निर्देश दिए हैं 


शुक्रवार, 15 मई 2026

पुलिस बर्बरता की कहानी कहता वीडियो, एसपी भी शामिल

 

पुलिस बर्बरता की कहानी कहता वीडियो, एसपी भी शामिल

सोशल मीडिया में अपनी पीठ थपथपा वाला वीडियो डालकर स्वयं को हीरो साबित करने वाला आईपीएस अभिषेक पल्लव कितना बड़ा खलनायक निकला यह उन वीडियो को देखकर आप समझ सकते हैं जिन वीडियो में मासूम बच्चों महिलाओं को खड़े होकर अभिषेक पल्लव पिटवा नजर आ रहे हैं पूरा मामला गृह मंत्री के क्षेत्र लोहारा डीह का है और लोहारा डी को लेकर इस कदर बवाल मचा है कि 21 सितंबर को कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ बंद करने का ऐलान कर दिया था मामला बेहद गंभीर है हम कुछ वीडियो आपके सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं कि किस तरीके से आईपीएस अभिषेक पल्लव खड़े होकर बच्चों को महिलाओं को पिटवा रहे हैं क्या यह किसी लोकतंत्र में जायज हो सकता है यह पूरा मामला हम आपको बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कुछ और बड़ी घटनाएं हुई सब घटनाओं का अलग-अलग वीडियो बनाना बड़ा मुश्किल काम है टाइम लगता है वीडियो बनाना एडिटिंग करना और कई मुद्दे छूट जाते हैं हम कोशिश करेंगे कि आज के बाद से एक ही वीडियो में बहुत कुछ कुछ घटनाएं आपके सामने लाने की कोशिश करेंगे सबसे पहले उस मामले की चर्चा कर लेते हैं जो देश में हलचल पैदा करती है दुनिया के सबसे अमीर मंदिर जिसमें अ अमिताभ बच्चन से लेकर मोदी तक अंबानी से लेकर अदानी तक बड़े-बड़े उद्योगपति लाखों करोड़ रुपए दान देते हैं उस मंदिर के प्रसाद लड्डू में गाय की चर्बी मछली का तेल मिलाया जा रहा था लेकिन दुखद पहलू तो यह है कि जो हिंदूवादी संगठन कांग्रेस और मुसलमान का नाम आते ही बाहे चढ़ा लेती थी जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिनका खून खोल जाता था उनकी भावनाएं आहत नहीं हो रही है या कुछ प्रतिक्रिया सामने नहीं आ रही है है ना हैरानी की बात सोचिए कि इनका हिंदुत्व किस तरह का हिंदुत्व है लेकिन छत्तीसगढ़ की बात करें तो सीमेंट की कीमत बढ़ गई बवाल मच गया तब उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन आकर बैठक लेते हैं और मीडिया में यह छपवा जाती है कि दो टूक शब्दों में कह दिया गया है कि सीमेंट की कीमत नहीं बढ़ेगी लेकिन अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया जो कीमत बढ़ाई गई है उस पर क्या आपको यह पूरा खेल हमेशा से लगने वाले आरोपों की तरह नहीं है सरकार पर सीमेंट की कीमत बढ़ाकर वसूली का खेल चलता रहा है और जीरो टॉलरेंस की दुहाई देने वाले विष्णु देव साय सरकार में भी यह सब चल रहा है सराब और कोयले की बात हम फिर कभी करेंगे लेकिन ताजा मामला पाठ्य पुस्तक निगम से लेकर है सरकार की शिक्षा व्यवस्था की नियत पर उठते सवाल है कि पाठ्य पुस्तक निगम की किताबें लाखों की संख्या में रद्दी के भाव में कबाड़ में बेच दी जाती है और जांच समिति बनती है जांच समिति में प्रेम प्रकाश शर्मा का नाम है और जब बवाल मचता है कि जिम्मेदार तो पाठ पुस्तक निगम के महाप्रबंधक प्रेम प्रकाश शर्मा ही है तो आनंद फानंद में सरकार उन्हें निलंबित कर देती है यानी सोचिए पहले उन्हें जांच कमेटी का सदस्य बनाती है चोर के हाथ में ही तिजोरी की चाबी जैसी स्थिति बनती है जो कहावत है और अब निलंबित कर दिया गया बवाल मचने के बाद क्या ऐसा ही कुछ बलौदा बाजार हिंसा कांड में नहीं हुआ था जब पहले तो हिंसा होने के बाद एसपी कलेक्टर को हटा दिया गया और जब दबाव बना तो निलंबित किया गया तो लोहारा डी में भी घटना के दो-तीन दिन बाद जब प्रशांत साहू की हत्या कर दी जाती हम हत्या इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनके शरीर में जो मार के निशान दिखाई दे रहे हैं हम दिखा नहीं सकते अपने दर्शकों को पाठकों को इतना ढंग से आदिम युग की बर्बरता फेल हो जाए उस ढंग से प्रशांत साहू को मारा गया शरीर का कोई हिस्सा नहीं बचा था जहां चोट के निशान नहीं थे और अब एडिशनल एसपी विकास कुमार को बली का बकरा बना दिया गया जबकि वीडियो में साफ तौर पर दिखाई दे रहा है कि एसपी अभिषेक पल्लव खुद खड़ा होकर महिलाओं और बच्चों को पिटवा रहे हैं और मेरे भाई को और मेरे मा भाई घटते हुए मारते हु घर उठ ले जा कौन लोग मारे हैं पुलिस वाले लोग अच्छा कुते की की चीखे निकल रही है बिलख नहीं है महिलाए लेकिन किसी भी पुलिस वाले का दिल नहीं पसीज रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कह दिया है कि पुलिस का हाथ लोहे का होना चाहिए लेकिन इस पूरे घटनाक्रम को लेकर जो वीडियो सामने आ रहे हैं वे बेहद ही खौफनाक है आदि बर्बर ु की जात ताजा करने वाली य वीडियो किस तरीके से पीटा गया है तो क्या यह सब कुछ गृह मंत्री विजय शर्मा की खींच का परिणाम था या फिर ग्रामीणों ने जिस तरीके से अभिषेक पल्लव को गांव आने से रोकने के लिए धक्का मुक्की की थी उसका गुस्सा था कहना बेहद कठिन क्योंकि कांग्रेस अभी तक अभिषेक पल्लव को ना तो निलंबित किया गया है और ना ही हटाया गया है सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है सरकार अपराध कम होने की बा बात करती लेकिन जिस तरीके से बर्बरता के साथ खुद एसपी खड़े होकर बच्चों और महिलाओं को पिटवा रहे हैं क्या वह वीडियो विष्णु देव साय या ग्रह मंत्री विजय शर्मा ने नहीं देखा क्या उन्हें अपनी पुलिस पर शर्म नहीं आती कि किस तरीके से सरकार चला रहे हैं और हफ्ता भर नहीं हुए हैं कलेक्टर एसपी कान्फ्रेंस को और इस तरीके की बर्बरता छत्तीसगढ़ में इस तरीके की बर्बरता की खबर शायद ही कभी सुनने को मिलती होगी वरना यहां तो पुलिस ही पीटती थी लेकिन पहली बार ऐसा हो रहा है कि बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया उनकी भी बरामी से पिटाई किस हद तक या किस के साथ विष्णु देव साय सरकार चला रही है यह कहना बेहद मुश्किल काम कांग्रेस नेता पहुंचे थे उनके सामने महिलाएं बच्चे गांव वालों ने जो व्यथा कही है वह इस वीडियो में दिखाया नहीं जा सकता सोचिए कि किस हद की बर्बरता पुलिस ने वहां की है कितने ही लोग गांव छोड़कर भाग गए किस तरीके का खेल हुआ है और अभिषेक पल्लव जो हीरो बने फिरते थे सोशल मीडिया में तरह तरह के अपने हीरोगिरी के वीडियो डाला करते थे उस अभिषेक पल्लव के भीतर का जान किस कदर निकला बाहर कौन सा गुस्सा था उन्हें कि उनका दिल नहीं प पसीजा उन मासूम बच्चों और महिलाओं की चीख पर आप खुद सोचिए कि छत्तीसगढ़ सरकार कैसे चल रही है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/YCZ4vvQsZhM?si=vu7T1lqFVhOE0brq

गुरुवार, 14 मई 2026

नितिन गडकरी ने सरकार की मंशा ज़ाहिर कर दी, मिडिल क्लास पर बढ़ाता बोझ…

 

नितिन गडकरी ने सरकार की मंशा ज़ाहिर कर दी, मिडिल क्लास पर बढ़ाता बोझ…

तुम अगर कार वालों से टोल ज्यादा लोगे वह आंदोलन नहीं करेगा ट्रक बसेस वाले एजीटेशन नहीं करेंगे पर स्कूटर और साइकिल वाला झेंडा लेकर घूमता है तुम उससे तुम्हारे टोटल इसमें एक परसेंट भी एडिशन नहीं हो रहा उसको आंग पर क्यों ले रहे हो उसको ऑटो रिक्षा और स्कूटर से लेने का कोई कारण नहीं-नितिन गडकरी 

 मोदी सरकार ने सुविधा देने के नाम पर जिस तरीके से टैक्स वसूली के नए-नए फार्मूले सामने लाए हैं उससे क्या मिडिल क्लास की तकलीफें बढ़ गई महंगाई भी इसी वजह से बढ़ी और बेरोजगारी भी क्या इसी वजह से बढ़ी यह सवाल इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आम आदमी को महंगाई की वजह से जीवन जीना मुश्किल और अब मिडिल क्लास की तकलीफों का अंदाजा आरएसएस या हिंदूवादी संगठनों को भी धीरे-धीरे होने लगा है मिडिल क्लास की तकलीफों को देखकर पिछले दिनों आरएसएस के नेता गोपाल अग्रवाल जो रायपुर सांसद के बड़े भाई भी हैं उन्होंने और ऐसा नहीं है कि इस पूरे खेल में केवल वित्तमंत्री सीतारमण शामिल हो या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमित शाह ही शामिल हो इस खेल में परिवहन मंत्री नितिन गटक भी उतने ही शिद्दत से शामिल है एनएचआई का कर्जा यदि लगातार बढ़ रहा है और उसी पैमाने पर विकास के नाम पर टोल टैक्स की बात हो या आम आदमी से जुर्माना वसूलने की बात हो उसी तेजी से यदि बढ़ाई जा रही तो इसे क्या कहा जाए और अब तो नितिन गडकरी ने खुलेआम मंच से कहना शुरू कर दिया है कि मिडिल क्लास को निचोड़ डालो हालांकि सीधे उन्होंने मिडिल क्लास का नाम नहीं लिया ना ही निचोड़ में जैसे शब्द का इस्तेमाल किया लेकिन जिस तरीके से उ ने कार वालों से वसूली को लेकर बात कही पहले वह सुन लीजिए तुम अगर कार वालों से टोल ज्यादा लोगे व आंदोलन नहीं करेगा ट्रक बसेस वाले एजीटेशन नहीं करेंगे पर स्कूटर और साइकिल वाला झेंडा लेकर घूमता है तुम उससे तुम्हारे टोटल इसमें एक परट भी एडिशन नहीं हो रहा उसको आंग पर क्यों ले रहे हो उसको ऑटो रिक्षा और स्कूटर से लेने का कोई कारण नहीं यानी आप सोचिए कि लोन लेकर मिडिल क्लास अपने सपने पूरे करता है और उससे वसूली किस तरीके से करने का प्लान या वसूली को लेकर यदि दिमाग में परिवहन मंत्री की सोच है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इतनी वसूली के बाद भी यानी टोल टैक्स के रूप में वसूली चल रही है रोड टैक्स के रूप में वसूली चल रही है अनाप सनाप जुर्माना वसूला जा रहा है 20 20 303 हजार के जुर्माने की खबरें तो आए दिन मीडिया की सुर्खियां बनी रहती है और उसके बाद भी यदि 1750 किलोमीटर सड़क बेची जा रही है 14 हाईवे सेक्शन की है यह सड़क बकायदा इसे लेकर टेंडर भी जारी किया गया था 3 लाख 47 हज करोड़ रुपए कर्जा है ए और जिस तरीके से वसूली के नए नए मापदंड तैयार किए जा रहे हैं करोड़ों रुपए खर्च करके टोल प्लाजा बनवाया गया फास्ट ट्रैक लगवाया गया और उसके बाद अब इन करोड़ों रुपए का कोई मतलब नहीं रह जाएगा जब सेटेलाइट सिस्टम पर आ जाएगा और यकीन मानिए य सेटेलाइट सिर्फ टोल वसूली नहीं करेगी बल्कि आने वाले दिनों में वह स्पीड को लेकर भी जुर्माना वसूलने लग जाए तो कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि जो सिस्टम लगाए जा रहे हैं वह सिस्टम में यह भी पता चलेगा कि किस सड़क पर गाड़ी कितनी किलोमीटर चलनी चाहिए यदि आपने उससे मान लो किसी सड़क में 40 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ी चलनी और आपने 42 की चला ली तो हो सकता है कि आने वाले दिनों में टोल टक्स की वसूली के साथ जुर्माने का भी रसीद आपके पास पहुंच जाए यानी सरकार कोई मौका नहीं छोड़ना चाहती और सबसे हैरानी की बात तो यह है 10 साल सत्ता में रहने के बाद दुनिया भर के दावा करने के बाद यदि टोल टैक्स वसूली का काम गुंडे बदमाश या राजनीतिक ने ही कर रहे हैं तो इसे क्या कहा जाए आप खुद सुनिए कि नितिन गडकरी टोल वसूली को लेकर क्या कहते हैं आदर यू लाइक इट मे नॉट लाइक इट टोल कलेक्शन यह तुम्हारा धंधा ही नहीं है अभी देश में यह धंधा है इसमें जो इवॉल्वड है एंटरप्र व एक तो पॉलिटिशियन है अंडरवर्ल्ड है या क्रिमिनल है मारपीट करने वाले ल बाज वही आते हैं और वह आने के बाद यह सिस्टम में की दादागिरी चलने लगी और फिर उन्होंने एक काम किया कि अभी बहुत से जगह पर उतना ज्यादा डायरेक्ट बोलना मेरे लिए उचित नहीं है वहां का मेंबर ऑफ पार्लियामेंट हो या एमएलए हो उन लोगों के साथ इनका जॉइंट वेंचर बन गया और फिर उसके बाद यह बिजनेस रन करते हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से सरकार चल रही है और किस तरीके से मिडिल क्लास को निचोड़ का खेल चल रहा है पर्यावरण के नाम पर 10 साल 15 साल चली गाड़ियों को कंडम बनाकर ऑटोमोबाइल सेक्टर को जीवित करने की कोशिश तो की जा रही है लेकिन इसका भार भी तो आम आदमी पर पड़ रहा है तब देखना है कि आने वाले दिनों में मिडिल क्लास को लेकर या मिडिल क्लास से वसूली को लेकर सत्ता और किस किस तरह की योजना बनाती है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/H_IWN2ltlUY?si=gE0V9IkSVx4_I_ts

बुधवार, 13 मई 2026

पार्टी ने बढ़ा दी मोहन की परेशानी

 

पार्टी ने बढ़ा दी मोहन की परेशानी

छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार तो बन गई है लेकिन भारतीय जनता पार्टी के भीतर खाने में जिस तरीके से गुटबाजी हावी है उसकी वजह क्या भाजपा को अपने कब्जे में करने की मोदी शाह की कोशिश है क्या मोदी शाह के पकड़ को लेकर भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ के कई नेता नाराज हैं यह सवाल इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल भर से इस तरह के घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं हम साल भर के ही घटनाक्रम की बात कर रहे हैं किसे किनारे लगाना है किसे मंत्री बनाना है किसे संगठन में बड़ा पद देना है सारा कुछ तय मोदी शाह कर रहे हैं और इस चर्चा के बीच कांग्रेस ने भी तो आरोप लगा दिया है कि भारतीय जनता पार्टी कि डबल इंजन की सरकार रिमोट कंट्रोल से चढ रही है तो कोई इसे खड़ाऊ सरकार कह रहा है तो कोई इसे रबड़ स्टैंप लेकिन अब  कद्दावर माने जाने वाले नेता बृजमोहन अग्रवाल की कोर ग्रुप से छुट्टी उनके लिए चिंता का सबब हो सकता बृजमोहन अग्रवाल को जिस तरीके से सत्ता और संगठन किनारे करने की कोशिश में लगी 15 साल रमन राज में मंत्री रहे बृजमोहन अग्रवाल विष्णुदेव साय सरकार में भी मंत्री बने उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया लेकिन अचानक लोकसभा चुनाव में उतार दिया गया और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और उसके बाद बृजमोहन अग्रवाल की उपेक्षा और अपमान की खबर जमकर चर्चा में रही कांग्रेस ने भी खूब मजे लिएथे

हालांकि कोर ग्रुप से छुट्टी केवल मोहन सेठ की नहीं हुईं है उनके साथ रामविचार नेताम विक्रम उसेंडी रेणुका सिंह की भी छुट्टी हुई है 

वीडियो देखें

https://youtu.be/8FYkPZgnDIk?si=c9p5bF133vxHVICH

मंगलवार, 12 मई 2026

रेलवे की बैठक में छत्तीसगढ़ के सांसदों के प्रस्ताव की अनदेखी से तोखन साहू भड़के

रेलवे की बैठक में छत्तीसगढ़ के सांसदों के प्रस्ताव की अनदेखी से तोखन साहू भड़के

 छत्तीसगढ़ की जनता ने भारतीय जनता पार्टी को सांसद के रूप में 10 सीटें दी है लेकिन इन सांसदों की ना तो मोदी सत्ता को परवाह है और ना ही उनके अधिकारियों की ही परवाह है कहा जाता है कि सांसदों के प्रस्ताव को रेल प्रशासन रद्दी की टोकरी में फेंक देता है लगातार ट्रेनें रद्द हो रही हैं त्योहारी सीजन में लोग परेशान हैं बड़े-बड़े टैग लाइन के साथ अखबारों में छप रहा है कि त्यौहार के सीजन में ट्रेनें रद्द किए जाने से लोग किस तरीके से यात्रा कर रहे हैं जानवर से भी बदतर स्थिति में यात्रा हो रही है लेकिन इसकी परवाह सांसदों को है कहना कठिन है हालांकि रेलवे के इस अचानक इस करतूत को लेकर संसद में भी आवाज गूंजी लेकिन उसके बाद क्या हुआ पूरे प्रदेश को मालूम है कि किस तरीके से बृजमोहन अग्रवाल रायपुर के सांसद ने यह मामला उठाया उसके दूसरे तीसरे दिन ही किस तरीके से 40 ट्रेन रद्द कर दी गई थी और फिर जब अब तीजा का त्यौहार सीर में था और जगह जगह त्यौहारों का उत्सव मनाया जा रहा है तीजा के बाद गणेश उत्सव देखने लोग एक शहर से दूसरे शहर जाते हैं पितृ पक्ष के बाद दुर्गोत्सव में भी ट्रेनों में भीड़ रहती है छुट्टियों का सीजन चला आता है लेकिन जिस तरीके से ट्रेन रद्द हो रही है उसे ले भारतीय जनता पार्टी के सांसद की भूमिका क्या है क्या वे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इतने डरे हुए हैं कि अपनी बात भी नहीं रख पाते हालांकि कहा जा रहा है कि कुछ सांसदों ने रेलवे को प्रस्ताव भेजा है कि किस तरीके से यात्रियों की सुविधाएं बढ़ाई जाए लेकिन कहा जाता है कि रे प्रशासन इन प्रस्तावों को रद्दी की टोकरी में फेंक देते हैं और पिछले दिनों दक्षिण पूर्व रेल मंडल की जब बैठक आयोजित हुई तो सांसदों का गुस्सा बाहर निकल आया इस बैठक में सांसदों द्वारा दिए जा रहे प्रस्ताव को जिस तरीके से रेलवे के अधिकारी अनसुना कर रहे थे उससे बिलासपुर के सांसद तोख साहू फट पड़े उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एक एक सांसद लगभग 252 लाख लोग लोगों का प्रतिनिधित्व करता है और उनकी बातें नहीं सुनना गलत बात है उनकी बातें सुनी जाए लेकिन क्या तोख साहू के इस गुस्से का कोई असर होगा क्योंकि रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव कोई छोटे-मोटे हस्ती नहीं है वे नरेंद्र मोदी के नाक के बाल माने जाते हैं इस दौर में जिस तरीके से रेल घटनाएं हुई दुर्घटनाएं हुई लोगों को लोगों की जान गई आए दिन पटरियों से डिब्बे के उतर जाने की खबरें आते रहती है उसके बाद भी रेल मंत्री के खिलाफ यदि कोई कारवाही नहीं हो रही है तब रेलवे अधिकारियों की मनमानी क्या बढ़ गई है क्या उन्हें रेल मंत्री और मोदी सरकार का पूरी तरीके से संरक्षण मिला हुआ है और इसकी वजह से वे भारतीय जनता पार्टी के सांसदों की भी बात नहीं सुन रहे हैं कहा जाता है कि उस बैठक में तीखी नोक झोक हुई है रेलवे अधिकारियों और तोख साहू के बीच सांसदों के प्रस्ताव को जिस तरीके से रेल अधिकारी किनारे कर रहे थे अनसुना कर रहे थे उससे सांसद बेहद नाराज थे लेकिन बाकी सांसद खामोश थे क्योंकि यह मोदी सत्ता है तो खन साहू ने कुछ बात कही और इधर चर्चा इस बात की है कि भारतीय जनता पार्टी के सांसद शीघ्र ही अब इस मामले का रेल मंत्री से मिलेंगे प्रधानमंत्री से भी वे मिल सकते हैं लेकिन यदि सरकार का रवैया ही यही है तब यह सांसद क्या सड़कों में उतरने की हिम्मत जुटा पाएंगे !

Vidio देखें 

https://youtu.be/b0504cOMMWg?si=_iZKg2vNAQpBbgPi