उद्योगपतियों की सरकार, लोग मरने को लाचार
देश का बजट जारी कर दिया गया है एक लाइन में हालांकि हम बजट को लेकर ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं या नहीं समझते हैं क्योंकि अब तक जितने भी बजट आए हैं उसमें कहा जाता है कि फला फला फला वस्तुओं की कीमत कम हो रही है वह सस्ती हो रही है लेकिन आज तक कभी सस्ती होते नहीं देखी और जिसकी बढ़ेगी बताते हैं तुरंत दूसरे दिन बढ़ जाती है लेकिन सीधा-सीधा एक लाइन में कहा जाए कि केंद्रीय बजट क्या है तो यही कहा जा सकता है कि यह सत्ता को बचाने का बचाव बजट है बिहार आंध्र प्रदेश क्या कुछ नहीं दिया गया क्या यह दूसरे राज्यों के बजट में कटौती करके दिया गया है जिन राज्यों में चुनाव होने हैं इस साल तीन राज्यों में चुनाव होने महाराष्ट्र झारखंड हरियाणा उन्हें भी कुछ कुछ मिल गया लेकिन 36 गढ़ को क्या मिला एक बार जिक्र जरूर आया बजट भाषण में तो लगा कि अब छत्तीसगढ़ को भी कुछ मिलेगा लेकिन वह नक्सलियों से संबंधित था खैर यह तो बजट की बात हुई लेकिन छत्तीसगढ़ में क्या कुछ हो रहा है क्या मोदी सरकार की तरह छत्तीसगढ़ की सरकार भी कार्पोरेट के साथ गट जोड़ करके आम लोगों का जीवन खतरे में डाल देना चाहती क्या छत्तीसगढ़ की सरकार को उद्योग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरा भी चिंता नहीं है यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कल ही विधानसभा में खुद भारतीय पार्टी के विधायक अनुज शर्मा ने जब सवाल उठाया तो उद्योग मंत्री लखन लाल देवागन के जवाब जिस तरीके से थे वह हैरान कर देने वाला है कि आखिर छत्तीसगढ़ के लोगों के स्वास्थ के साथ किस तरीके से उद्योग खिलवाड़ कर रहे हैं
अनुज शर्मा ने कहा कि मेरे पास 108 उद्योगों की सूची है जहां स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं हुए हैं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जरूर कहा कि हमने इनके खिलाफ कारवाही का निर्णय लिया है कारवाही चल भी रही है कोर्ट में भी मामला चल रहा है लेबर कोर्ट में भी मामला चल रहा है और यह कहते हुए उन्होंने 108 उद्योगों का तो जिक्र नहीं किया लेकिन राजधानी के नजदीक सिलतरा में जो उद्योग है उसका जिक्र जरूर उन्होंने किया उन्होंने खुद बताया कि सिलतरा में 32 उद्योग हैं जिसमें से 25 उद्योग खतरनाक श्रेणी के और सभी उद्योगों को यह निर्देश है कि साल में वह कम से कम एक बार स्वास्थ्य शिविर जरूर लगाए लेकिन आप हैरान हो जाएंगे कि बहुत सारे उद्योग खुद अनुष शर्मा ने बताया कि 108 उद्योग उनके पास उनकी जानकारी में जिन्होंने स्वास्थ्य शिविर ही नहीं लगाया लखन लाल देवांगन उद्योग मंत्री ने भी बताया कि जो सिलतरा में 25 खतरनाक श्रेणी के उद्योग है उसमें से छह उद्योगों ने शिविर नहीं लगाया है लोगों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही है स्किन की बीमारी के अलावा भी कैंसर और दूसरे तरह की गंभीर बीमारी हो रही है लेकिन सरकार इन उद्योगों के खिलाफ कारवाही क्यों नहीं कर रही याद होगा आपको की एक डेढ़ महीना पहले अवारा क्षेत्र में स्पेशल ब्लास्ट फैक्ट्री में भी विस्फोट हुआ था और लोग मारे गए थे तब भी सवाल उठा था लेकिन लगता है कि कारपोरेट और सत्ता के गठजोड़ ने आम लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है और शायद यही वजह है कि इन सवालों से बचने की कोशिश की जाती रही है जवाब ही नहीं दिया जाता है हम और बता दे कि छत्तीसगढ़ में जो जानकारी मिली है जो सूत्र बता रहे हैं कि लगभग हर साल 100 से अधिक ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं जिनके खिलाफ पुलिस कारवाही भी होती है और लेबर कोर्ट में भी मामला चलता है लेबर कोर्ट में जो मामला चलता है उसमें तो बकायदा जुर्माना तक बात चली जाती है कारवाई हो जाती जाते लेकिन पुलिस में जो कारवाही चलती है उसे लेकर सवाल उठते रहे हैं कि मामला अंजाम तक क्यों नहीं पहुंचता क्यों ठंडे बस्ते में चले जाता है इसे लेकर कई तरह के सवाल है हमारी टीम लगी हुई है कि कोर्ट लेबर कोर्ट में और पुलिस में किसकिस तरह के मामले चले और उसकी क्या स्थिति है हम आपको बताएंगे लेकिन हम आपको बता देते हैं कि जिस तरीके से विधानसभा में सवाल उठे और मंत्री का जवाब है उ से देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कारपोरेट और सत्ता के गठजोड़ किस तरीके से लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है !
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