गुरुवार, 12 मार्च 2026

कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर

कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर 


भारत  को दुनिया का सबसे बड़ा इकोनॉमी बनाने के लिए कमर कसकर तैयार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद यूनिसेफ की उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है जो भारत को पाकिस्तान से भी नीचे खड़ा कर देता है हमसे भी छोटे-छोटे देश बच्चों के पोषण के मामले में बेहतर है नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका किसी भी देश का नाम आप ले लीजिए हमसे एक पायदान नीचे कोई है तो वह अफगानिस्तान है अफगानिस्तान यानी तालिबान तब ऐसी परिस्थिति में विश्व गुरु बनाने की जो चाल चली जा रही है या सपना दिखाया जा रहा है उसकी हकीकत क्या यूनिसेफ की रिपोर्ट ने नहीं खोल दिया

 दुनिया भर में 18 करोड़ से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार है या उन्हें ठीक से खाना नहीं मिल रहा है और उनमें से 40 फीसद बच्चे भारत के यानी भारत की स्थिति नीचे के पैदान से आठवें नंबर पर है और हमसे बेहतर स्थिति में पाकिस्तान 

पाकिस्तान तो खुशहाली की रिपोर्ट में भी भारत से बेहतर तब क्या भारत में जो बच्चे हैं उन्हें पोषित खाना नहीं मिलना चाहिए 5 किलो अनाज एक परिवार को देकर वोट हासिल करने लाभार्थी बताकर लाभ लेने का इस खेल में किस कदर भारत की स्थिति लगातार खराब होते जा रही है और पूंजीपति और पूंजी वाले होते जा रहे हैं दुनिया में भारत का डंका बजाने के लिए ठहाके लगाए जा रहे हैं याद कीजिए आप इटली में किस तरीके से देश के प्रधानमंत्री ठहाके लगा रहे थे लेकिन यह कालिक क्या उन्हें दिखाई नहीं देता दुनिया तो देख ही लेगी यूनिसेफ की रिपोर्ट को य की रिपोर्ट बेहद ही चौकाने वाला ही नहीं परेशान करने वाला है कि किस तरीके से भारत के 40 फीसद बच्चे पोषण युक्त खाने के लिए तरस रहे हैं किस तरीके से गरीबी हावी है और इसकी कल्पना तो उन लोगों को तभी कर लेनी चाहिए थी जब भारत सरकार ने आंकड़े दिए थे कि 80 लाख परिवारों को 5 कि अनाज दिया जाता है तब देश में आम आदमी किस कदर परेशान है महंगाई बेरोजगारी एक अलग सवाल है लेकिन बच्चे बच्चों की जिंदगी को लेकर भी क्या सरकार गंभीर नहीं है कुपोषण दूर करने के लिए कितने बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं प्रचार प्रसार में ही करोड़ों रुपए बर्बाद करके अपना प्रचार प्रसार किया गया लेकिन खप की स्थिति यूनिसेफ ने खोल कर रख दी है कि किस तरीके से भारत में छोटे बच्चों को पोषण युक्त खाना तक नसीब नहीं हो रहा है और देश के प्रधानमंत्री भारत को दुनिया का तीसरा इकोनॉमी बनाने के लिए तैयार है तो क्या यह इकोनॉमी कॉरपोरेट सेक्टर के दम पर बन रहा है क्या पूंजी सिर्फ कारपोरेट सेक्टर के पास जाकर रह गई यह बेहद ही गंभीर सवाल है और इसके लिए मानवाधिकार को लेकर चिंतित लोगों को भी सामने आना चाहिए कहां है वह एनजीओ जो लगातार बच्चों के लिए काम कर रहे हैं किस तरीके से काम कर रहे हैं क्या सिर्फ अपना वेतन निकाल रहे हैं और सरकार के जी हुजूरी में लगे हुए हैं या उनके ग्रांड लेने में लगे हुए हैं सवाल आप कुछ भी उठा लीजिए सवाल यह नहीं है कि दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश की दिशा किस तरफ ले जाना चाह रहे हैं सवाल तो यह है कि देश किस दिशा में जा रहा है नसता बढ़ी है इसमें किसी को कोई संदेह नहीं अब तो छोटी-छोटी बातों पर ही लोग मारने कूटने को तैयार हो जाते हैं तब ऐसी परिस्थिति में यूनिसेफ की जो रिपोर्ट है हम डिस्क्रिप्शन बॉक्स में उनका लिंक दिया आप चाहे तो जाकर पढ़ सकते हैं लेकिन जो रिपोर्ट है वह बेहद ही गंभीर चेतावनी है देश के लिए कि आने वाले दिनों में देश इस तरह से चलाया जाएगा तो जो भविष्य के नागरिक हैं वे किस तरीके से होंगे महंगाई को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता शिक्षा व्यवस्था ठप हुई है किस तरीके से शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया गया वह भी इस दौर में लोगों ने देखा है और यह भी है कि सरकारी स्कूलों को खंडहर में तब्दील करके निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया गया क्या इस तरीके से इकोनॉमी बढ़ेगी भारत की और वह दुनिया में अपना झंडा बुलंद करेगा लेकिन धरातल में हकीकत क्या है जिस देश में 80 लाख परिवार 5 किलो अनाज पर निर्भर हो जिस देश में पीने का पानी के लिए हाहाकार मज गया हो जिस देश में बिजली सुविधा तक निर्वात गति से नहीं मिल रही हो या ट्रेन तक रद्द कर दी जाती हो तब उस देश में तीसरी इकोनॉमी को लेकर प्रधानमंत्री ने जो सपना देखा है क्या उसके लिए उन्हें बधाई दे दिया जाए इस यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद बधाई दे दिया जाए आप खुद तय करें

वीडियो देखें 

https://youtu.be/-jl05KaXTLg?si=tBhB8iFrgZiFc7hS

मंगलवार, 10 मार्च 2026

धर्म को अपने अनुसार चलाना चाहती है मोदी सरकार

धर्म को अपने अनुसार चलाना चाहती है मोदी सरकार 


 ऐतिहासिक सत्य है कि जब जब राजा मजबूत रहा है तब तक उसने धर्म गुरुओं को अपने इशारे पर चलाने की कोशिश की है इतिहास इस तरह के उदाहरण से अटे पड़े हैं हम आपको सिर्फ एक उदाहरण बता देते हैं कि मुगल साम्राज्य अकबर जब ताकतवर हो गए तो उन्होंने मुस्लिम धर्म के किसी भी प्रवर्तक न मुल्ला किसी की नहीं सुनने लगे वे अपने हिसाब से सत्ता चलाने लगे थे और जब दबाव ज्यादा बढ़ने लगा तो उन्होंने दीन इलाही नाम का अपना एक नया धर्म ही शुरू कर दिया था 

कहा जाता है कि कि वे हिंदू मुस्लिम नहीं करते थे क्योंकि वे मुसलमान भी नहीं रह गए थे दीन इलाही धर्म की स्थापना के बाद तब उनका रवैया क्या इतना भरोसेमंद था कि लोग उन पर विश्वास करते थे और उनके नौ रत्नों की कहानियां तो सबने सुनी है उनमें सभी तरह के लोग थे हिंदू हिंदुओं की संख्या भी ज्यादा थी लेकिन क्या इस दौर में हिंदू मुस्लिम करके सत्ता हासिल करने वाले अब धर्म गुरुओं पर ही प्रहार करने लगे क्या सिर्फ धर्म गुरुओं पर प्रहार इसलिए किया जा रहा है ताकि समूचे हिंदुत्व को भी अपनी मुट्ठी में कर लिया जाए राजनीति में तो यह दिखाई दिया क्योंकि हिंदुत्व के सबसे बड़े झंडा बरदार रहे बाला साहब ठाकरे के सुपुत्र उद्धव ठाकरे जब भारतीय जनता पार्टी से अलग हो गए तो उन्हें तोड़ने की क्या-क्या कोशिश नहीं हुई यानी हिंदुत्व का झंडा हमारे पास ही है हम ही उठाएंगे कोई दूसरा हमसे बड़ा हिंदुत्व नहीं है और इस दौर में इसी तरीके का खेल भी खेला गया जिसने भी भाजपा की आलोचना की उसे सनातन विरोधी कहा गया जिसने भी मोदी की मनमानी पर प्रहार किया उसे भी हिंदू विरोधी करार दिया गया और यदि  आपने कांग्रेस की सत्ता की तारीफ कर दी या कांग्रेस के साथ खड़े हैं तो आप हिंदू विरोधी करार दिए जाएंगे तमगे बांटे गए देशद्रोही के भी और हिंदुत्व के भी इस दौर में और यह उपाय अभी से शुरू नहीं हुआ है आरएसएस के साथ लगी विश्व हिंदू परिषद ने सबसे पहले साधु महात्माओं या धार्मिक लोगों पर डोरे डालना शुरू किया और राम मंदिर का आंदोलन इसका सहारा बना 

हालांकि शंकराचार्य साफ कहते हैं कि हंगामा करने से या सड़क में हो हल्ला मचाने से राम मंदिर नहीं बना है या नहीं मिला है लोग ये कह रहे हैं कि हम राम को लाए उन लोगों से पूछिए कि आज राम अगर वहां पर बैठने के लिए अवसर बन रहा है तो ये कैसे बन रहा है यह सड़क पर चिलाने से बन रहा है कि न्यायालय के फैसले से बन रहा है राम मंदिर या अयोध्या जन्मभूमि तब मिला है जब न्यायालय में सबूत पेश किए गए शंकराचार्य ने पैरवी की वकीलों की फेहरिस्त लगी थी शंकराचार्य के साथ लगातार सबूत दे दिए जाने लगे और आप हैरान हो जाएंगे कि इस पूरी कानूनी प्रक्रिया से ना तो विश्व हिंदू परिषद प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा था या भारतीय जनता पार्टी के लोग ही जुड़े थे वे सब पर्दे के पीछे खड़े नजर आए तब ऐसी परिस्थिति में अब जब विवाद बढ़ता जा रहा है शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कह दिया है कि राम मंदिर में जो प्राण प्रतिष्ठा हुई है वह उचित नहीं हुई है या धर्म के अनुसार नहीं हुई है और वे पूर्ण निर् निर्माण के बाद यानी मंदिर अभी अधूरा भी है 30 फीसद बना है पूर्ण निर्माण के बाद वे फिर से प्राण प्रतिष्ठा करेंगे यह बेहद ही विवादास्पद मामला हो जाता है और यदि यही बात कोई कांग्रेस या दूसरे विपक्षी दल के लोग कह देते कि वह भाजपा का इवेंट है फिर से प्राण प्रतिष्ठा समारोप की जाएगी तो अब तक वे सनातन विरोधी कहलाते लेकिन सवाल शंकराचार्य जी ने उठाया और शायद इसलिए उठाया है कि इस दौर में सब कुछ अपने में समेट लेने अपने को सबसे बड़ा हिंदुत्व का ठेकेदार बनाने मोनोपोली रखने और पूरा कब्जा जमाने की जो कोशिश हुई है उससे क्या शंकराचार्य का मन आहत हुआ विवाद तो उस दिन से शुरू हो गया था जब कांशी में कारी का निर्माण किया जा रहा था सैकड़ों की संख्या में मूर्तियां बुलडोजर की चपेट में आ गई थी एक मूर्ति के लिए क्या दसों मूर्तियों को किनारे किया जा सकता है यह पहला सवाल शंकराचार्य श्री अभ मुक्तेश्वरा नंद जी ने उठाया था और उसके बाद जब केवल इवेंट करने के लिए या राजनीति साधने के लिए प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन हुआ तब विवाद और बढ़ता चला गया तो क्या यह सारी लड़ाई सिर्फ हिंदुत्व का ठेकेदार बनने की है या वास्तव में यह कोई राजनीतिक खेल है सवाल आप कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि इस दौर में जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर तमाम विपक्ष के लोगों को हिंदू विरोधी बताया गया वह भी कम हैरान करने वाली बात नहीं है हालाकि कि बहुत सारे भाजपाइयों के रिश्तेदार भी होंगे उन रिश्तेदारों के मन में क्या गुजर रहा होगा जो कांग्रेस में है 

लेकिन राजनीति साधनी है और राजनीति गजब का खेल है मान सम्मान कुछ नहीं देखा जाता इसका उदाहरण नीतीश कुमार तो सबके सामने है ही है कि किस तरीके से अमित शाह ने दरवाजे बोने की बात कही थी और कुछ ही महीनों बाद उनकी भारतीय जनता पार्टी में वापसी हो गई थी किस तरीके से भ्रष्टाचारियों को जेल में डालने की बात हुई थी और किस तरीके से उन्हें मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री बना दिया गया था यह राजनीति उन लोगों के लिए जायज हो सकती है जो नैतिकता को तिलांजलि दे चुके हैं लेकिन जब बात धर्म की आने लगी है तो क्या सचमुच अब भारतीय जनता पार्टी या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सब कुछ अपने कब्जे में कर लेना चाहते हैं और मोदी समर्थकों को क्या यह दिखाई नहीं देता कि किसी शंकराचार्य का किस तरीके से अपमान हो रहा है उनकी बातों की किस तरीके से अवहेलना हो रही है उन्हें डराया धमकाया तक जा रहा यकीन मानिए यदि आप यह बात यदि किसी दूसरे धर्म में होती यानी बहुत सारे धर्म है सिख चैन मुस्लिम ईसाई पारसी किसी भी धर्म गुरुओं के खिलाफ कोई सत्ता इस तरह का व्यवहार करती या अनदेखी करती उनके बातों की अवहेलना करती तो अब तक बवाल मच चुका होता सत्ता के खिलाफ विद्रोह हो चुका होता क्या कुछ नहीं हो जाता लेकिन हमने पहले ही कहा कि राजनीति को साधने के लिए विश्व हिंदू परिषद के गठन के साथ यह खेल हो गया था धर्म पर भी कब्जा करने का मोनोपोली स्थापित करने का और क्या मोदी सरकार अब इस परे सफल हो गई है और अब हिंदू समाज में शंकराचार्य की अहमियत समाप्त हो चली है या समाप्त हो गई है या हो रही है कहना बेहद कठिन है आप सोचिए जरूर कि राजनीति किस करवट बैठ रही है और धर्म के आश्रय जिस राजनीति को साधा गया है वह धर्म के साथ या धर्म गुरुओं के साथ उस राजनीति का व्यवहार कैसा होता जा रहा है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/65KWUiB1Woc?si=qZBa0SQx96ZDNc5q

मौत का सामान बन रहा तरबूज

 मौत का सामान बन रहा तरबूज 


गर्मी तेज पड़ने लगी है और इसके साथ ही तरबूज की मांग भी बढ़ गई लोगों को अच्छे तरबूज चाहिए लाल रंग के तरबूज चाहिए और शायद इसका फायदा उठाते हुए बहुत सारे तरबूज के व्यापारी खाने का रंग खाद्य और औषधि प्रशासन द्वारा अनुमति मिला हुआ है एरिथ सन नामक यह खाद्य रंग कितना हाम फूल है कितना फायदे जनक है इसे लेकर कई तरह के विवाद हमेशा ही उठते रहे हैं 

पुलिस भी इंजेक्शन के जरिए तरबूज मेंलाल रंग करने वालों को गिरफ्तार भी करती है कारवाही भी करती है लेकिन पुलिस क्यों नहीं पहुंच पाती असली व्यापारी तक केवल इंजेक्शन लगाने वाले नौकरों तक ही क्यों सीमित हो जाती यह एक अलग सवाल है दरअसलएरिथ सन को खाद्य एवं औषधि प्रशासन से अनुमति मिली हुई है इसके बाद भी यदि इसे तरबूज में मिलाने के बाद लोगों की तकलीफ शुरू हो जाती है उल्टी दस्त पेट दर्द और अब तो मौत तक की खबर आने लगी तब क्या लोगों को इस बात का ध्यान नहीं रखना चाहिए कि वे ऐसी तरबूज ना खरीदे बड़ा सरल सा परीक्षण है इसके आप तरबूज को कटवा लीजिए और कॉटन रुई से आप उस लाल रंग में काटन और रुई को फेरिए तो यदि वह लाल हो जाता है तो उसमें एरिथ सिन मिलाई गई है लेकिन लोगों को तो साबुत तरबूज घर ले जाना है तब उनके सामने क्या उपाय कई बार इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं 1990 के दशक में तो वाशिंगटन पोस्ट ने यानी अमेरिका के उस बड़े चर्चित अखबार में इसके प्रतिबंध लगाने की भी खबरें प्रसारित कर दी गई थी लेकिन बार-बार रिसर्च के बाद भी यह कहा जाता है कि यह मनुष्य के लिए नुकसानदायक नहीं है चूहे में प्रयोग हुआ था उसके कुछ

लक्षण आए थे एक तो दूसरी तरफ विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि बड़े लंबे समय तक सेवन करने के बाद ही इसमें में कैंसर या थायराइड जैसी बीमारी हो सकती है के लक्षणपाए गए हैं तब सवाल यह है कि आखिर जो खबरें आ रही है उत्तर प्रदेश की खबरें हैं एक लड़की अपने घर की सबसे बड़ीथी और उसने तरबूज खाया उसके बाद उसे पेट में दर्द हुआ उल्टी हुआ अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई इसी तरह की और भी खबरें कुछ लोग ठीक भी हुए हैं तो क्या इंजेक्शन लगाने के दौरान एहतियात नहीं बढ़ता जाता है जब वैज्ञानिकों ने कह दिया कि यह बहुत ज्यादा हार्मफुल नहीं है और लाखों लोगों में से एक आक को थायराइड याकैंसर जैसी बीमारी हो सकती है तब यदि घटना हो रही है तो क्या इससे बचा जाना नहीं चाहिए यकीनन बचा जाना चाहिए पुलिस ने पिछले दिनों कुछ लोगों को गिरफ्तार भीकिया इंजेक्शन लगाते हुए बकायदा लेकिन वे नौकर थे वे कह रहे हैं कि उन्हें मालिक नौकरी पर रखा और मालिक जैसा आदेश देंगे वे करेंगे लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही यदि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अनुमति है कि यह खाने की चीजों में मिलाई जा सकती है तब इसे क्या कहा जाए या इसका क्या किया जाए फिलहाल तो हम अपने पाठकों को यही सलाह दे सकते हैं या दर्शकों को यही सलाह दे सकतेहैं कि वे इस तरीके से मिश्रित चीजों से बचे शुद्धता वाली चीजों पर ही भरोसा करें

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https://youtu.be/3JD66t-Wl24?si=-XqLWiTqWmH_fLZE

रविवार, 8 मार्च 2026

करोड़ों रुपये के जप्त ड्रग्स गायब

करोड़ों रुपये के जप्त ड्रग्स गायब 


छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भाजपा नेता के द्वारा अफ़ीम की खेती को लेकर बवाल मचा हुआ है , नशे के कारोबार में लिप्त भाजपा नेताओं की संलिप्तता नई नहीं है लेकिन यह मामला पार्टी के लिए नए तरह का संकट खड़ा कर सकता है , तब ड्रग्स को लेकर मोदी सत्ता पर उठते सवाल को लेकर एक रिपोर्ट 

जब  से मोदी सरकार ने सत्ता संभाली है क्या ड्रग माफियाओं की चांदी हो गई है यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि  दिल्ली हाई कोर्ट में जो याचिका लगाई गई है उसके मुताबिक 7 हज़ार किलो ड्रग गायब हो गए इसकी कीमत लगभग 5 लाख करोड़ रुपए बताई जा रही है और इतने अरबों खरबों के ड्रग यदि गायब हो रहे हैं तो कहां हो रहे हैं जल सेना के जवानों ने लगातार दूसरे देशों से आने वाले ड्रग रोकने के लिए क्या कुछ जतन नहीं करती है सभी बंदरगाह अडानी के पास है जल सेना के इन प्रयासों के बाद भी यदि ड्रग भारत में आ रहा है और करोड़ों अरबों रुपए के पकड़ाए जा रहे हैं तो इसके पीछे की क्या कहानी उड़ता पंजाब को लेकर तो फिल्म तक बन गई थी नसा से सरा बोर पंजाब के युवा किस तरीके से बर्बाद हो रहे थे तब ऐसी परिस्थिति में जब सरकार के पासड्रग जप्त करने आती है तो जो नियम कहते हैं उसके अनुसार उसे नष्ट भी किया जाता है लेकिन यदि एनसीआरबी यानी केंद्रीय अपराध ब्यूरो और ग्री मंत्रालय के रिपोर्ट में जो आंकड़े उन्होंने जारी किए हैं 18 से लेकर 2022 तक उसमें अनेक विसंगतियां है और इस विसंगतियों के बीच 70 हज किलो से यदि अधिक ड्रग गायब हो गए हैं तो क्या इसे तस्करों के हवाले लेनदेन कर या सेटिंग कर सौंप दी गई है 

यह बड़ा सवाल है और इसे ही लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है, याचिकाकर्ता ने साफ तौर पर कहा है कि जिस पैमाने पर अनियमितता दिख रही है उससे समाज में अराजकता फैलने की आशंका है और यकीनन क्योंकि अपराध की पहली जननी झूठ बोलना है तो ड्रग और नशा भी है ड्रग और नशे के चक्कर में किस तरीके से अपराध बढ़ते चले जा रहे हैं और ऐसी परिस्थिति में यदि अपराध ब्यूरो और गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में अलग-अलग दिखाईविसंगतियां दिखाई दे रही है और 7 हज किलो यानी लगभग 5 लाख करोड़ रुपए के ड्रग गायब है इसमें हीरोइन है और बहुत दूसरे प्रकार के ड्रग है तब क्या इस बढ़ते अपराध के लिए कहीं ना कहीं सरकार दोषी नहीं 

सवाल आप कई उठा सकते हैं याचिका करता ने तो बड़ी लंबी चौड़ी सूची दी और इसकी वजह से समाज में अराजकता फैलने की आशंका भी जाहिर करती है निश्चित तौर पर कल ही हमने छत्तीसगढ़ मेंबताया कि इससे पहले शराब बंदी को लेकर किस तरीके से बवाल मचता था और किस तरीके से घोटाले का पर्दा फास हुआ और सरकार बदल गई इसी घोटाले की वजह से लेकिन व्यवस्था नहीं बदली एक व्यक्ति के हाथ से दूसरे व्यक्ति के हाथ में चले गए और अहाता चलाने शराब दुकानों पर मनमाने सप्लाई को लेकर कई नेता सक्रीय हैं और उनमें से तो एक चर्चित मंत्री विवादास्पद मंत्री का भाई को तीन जिले की जिम्मेदारी दे देने तक की चर्चा सरकार अहाता खोल रही है यानी शराब दुकान के बाजू में ही बैठकर पिलाया जाएगा तब ऐसी परिस्थिति में यदि दिल्ली हाई कोर्ट में जो याचिका लगी है क्या वह मोदी सत्ता के क्रियाकलापों पर उंगली नहीं उठाती है देश सुरक्षित हाथों में है कहकरकिस तरीके से इस दौर में खेल हुआ है यानी सवाल सिर्फ ड्रग का नहीं यदि आप मोटे तौर पर इस 10 साल के कार्यकाल में देखें तो उन दवा कंपनियों से भी चुनावी बांड वसूला गया या चंदा लिया गया जिनकी दवा जांच में घटिया पाई गई थी जांच रोक दी गई कोरोनिल का मामला तो है कि किस तरीके से कंपनी ने बाजार से सारा कोरोनिल वापस मंगवा लिया है किस तरीके से लोग मरे हैं करोना काल में और किस तरीके से बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने लोगों का जीवन हराम कर दिया और ऐसी परिस्थिति मेंयदि लोगों को ड्रग भी आसानी से उपलब्ध हो जाए या सरकार के द्वारा जपत किए गए ड्रग ही गायब हो जाए तो फिर इसे क्या कहेंगे !

छत्तीसगढ़ में ड्रग की खेती पर वीडियो 


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