संघ की क्लास की परतें खुलने लगी
आ गया एक एक सच सामने
छत्तीसगढ़ की राजनीति में सत्ता और संगठन के बीच चल रही खींचतान ने अब एक बेहद गंभीर और नया मोड़ ले लिया है। रायपुर के रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिक्षण संस्थान के कार्यालय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और प्रदेश सरकार के 5 दिग्गज मंत्रियों के बीच हुई 'समन्वय बैठक' की परतें अब एक-एक कर खुलने लगी हैं।
सूत्रो के मुताबिक, यह महज कोई औपचारिक समन्वय बैठक नहीं थी, बल्कि मंत्रियों की बाकायदा 'क्लास' ली गई थी। इस क्लास में प्रदेश के पांच ताकतवर मंत्रियों— गृहमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, वन मंत्री केदार कश्यप और राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा को विशेष तौर पर तलब किया गया था ।
CBI के पर कतरने के पीछे क्या नागपुर कनेक्शन?
इस तीखी रिपोर्ट में सबसे बड़ा और गंभीर सवाल गृह मंत्रालय के उस फैसले पर उठाया गया है, जिसके तहत छत्तीसगढ़ में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारों को सीमित कर दिया गया है । राजनीतिक गलियारों में यह सवाल बड़ी शिद्दत से गूंज रहा है कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि मोदी-शाह की दिल्ली वाली महाशक्तिशाली CBI की एंट्री पर छत्तीसगढ़ सरकार को अंकुश लगाने की हिमाकत करनी पड़ी?
दावा किया जा रहा है कि संघ (RSS) से जुड़े कई रसूखदार और बड़े अधिकारियों के नाम CBI की जांच के दायरे में आ चुके हैं । इन अधिकारियों ने अपनी गर्दन फंसती देख संघ के बड़े पदाधिकारियों के सामने गुहार लगाई थी और अपनी व्यथा सुनाई थी। आरोप है कि अपने चहेते और खास नौकरशाहों को CBI की सीधी और ताबड़तोड़ कार्रवाई (पूछताछ और गिरफ्तारी) से बचाने के लिए ही गृह मंत्रालय के जरिए यह पूरी चक्रव्यूह रचना तैयार की गई है ।
जांच की आंच में घिरे बड़े नाम!
वीडियो में वरिष्ठ पत्रकार ने साफ तौर पर इशारा किया है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान हुए शराब घोटाले, महादेव सट्टा ऐप कांड, कोयला घोटाले और बहुचर्चित PSC घोटाले की जांच में कई IAS और IPS अधिकारियों के नाम लगातार तैर रहे हैं । इसमें जनसंपर्क और परिवहन विभाग संभाल चुके IPS दीपांशु काबरा जैसे चर्चित नामों का भी जिक्र नागपुर कनेक्शन के हवाले से किया गया है । चूंकि PSC घोटाले की जांच अब CBI के हाथों में है, इसलिए जांच का दायरा कहां तक फैलेगा, इसे लेकर सत्ता और संघ के भीतर भारी घबराहट देखी जा रही थी ।
विपक्ष और गलियारों में चर्चा: 'सिर्फ बचाना नहीं, मलाईदार पोस्टिंग भी देनी है'
चर्चाएं सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं हैं। भाजपा खेमे और प्रशासनिक हल्कों में दबी जुबान से यह बात चीख-चीख कर कही जा रही है कि गृहमंत्री विजय शर्मा को सिर्फ CBI पर लगाम लगाने का ही फरमान नहीं मिला है, बल्कि संघ की ओर से बाकायदा उन पसंदीदा अफसरों और कर्मचारियों की एक सीक्रेट लिस्ट सौंपी गई है जिन पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी है । इतना ही नहीं, आदेश यह भी है कि इन्हें हटाना तो दूर, बल्कि जल्द से जल्द मलाईदार और अच्छी जगहों पर पोस्टिंग दी जाए ।
तीखा सवाल:
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार स्वतंत्र रूप से फैसले ले रही है, या फिर पर्दे के पीछे से सरकार की कमान और मंत्रियों के विभागों का रिमोट कंट्रोल पूरी तरह से संघ कार्यालय से संचालित हो रहा है?
अभी तो सिर्फ गृह मंत्रालय का पत्ता खुला है, आने वाले दिनों में बाकी के 4 मंत्रियों— ओ.पी. चौधरी, केदार कश्यप, श्याम बिहारी जायसवाल और टंक राम वर्मा के विभागों से संघ के एजेंडे वाले क्या-क्या आदेश निकलते हैं, इस पर पूरी राजनीतिक बिरादरी की नजरें टिकी हुई हैं !
Vidio देखें
https://youtu.be/kfLU-rsmGpI?si=9P9NGqFiNFic2TzW







