मंगलवार, 17 मार्च 2026

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार





क्या इस देश में आम आदमी की जान की कीमत सिर्फ 5 लाख रुपये है? कल छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में बारूद फटा और गुजरात के राजकोट में गेम जोन जला। दोनों जगह एक बात कॉमन थी—मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार।"

2. बेमेतरा कांड: रसूख और लापरवाही (The Chhattisgarh Angle)

इतिहास: 1988 से शुरू हुई 'स्पेशल ब्लास्ट' फैक्ट्री का विवादों से पुराना नाता रहा है।

पहुंच: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के रिश्तेदारों और कोल इंडिया के पूर्व विशेषज्ञों का मालिकाना हक।

बड़ा सवाल: जब पिछली सरकार ने सुरक्षा कारणों से इसे बंद किया था, तो यह दोबारा कैसे खुली? 800 मजदूरों की जान जोखिम में डालकर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों हुई?

दृश्य: दो मंजिला इमारत का मलबे में तब्दील होना और हादसे के 3 घंटे बाद पुलिस का पहुँचना प्रशासन की मुस्तैदी पर तमाचा है।

3. राजकोट: मनोरंजन के नाम पर 'डेथ ट्रैप' (The Gujarat Angle)

अमित शाह के करीबियों का नाम: युवराज सिंह सोलंकी जैसे संचालकों का रसूख।

क्रूरता: आग लगते ही जानकारी देने के बजाय संचालक का फरार हो जाना उनकी मानसिकता दर्शाता है।

समानता: दोनों घटनाओं में 'पॉलिटिकल अप्रोच' ने सुरक्षा नियमों को रद्दी का टुकड़ा बना दिया।

4. मुआवजे का झुनझुना (The Critique of Power)

• सरकार ने 5 लाख का मुआवजा घोषित कर दिया। लेकिन क्या पैसा किसी का पिता, भाई या बेटा वापस ला सकता है?

दंडाधिकारी जांच (Magisterial Inquiry): क्या यह सिर्फ मामले को ठंडा करने का तरीका है? पिछली कितनी जांचों की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई या दोषियों को सजा मिली?

5. तीखे सवाल (The Conclusion/CTA)

• क्या डायरेक्टरों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर होगी?

• क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा जिन्होंने इन असुरक्षित जगहों को 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) दिया?

अंतिम संदेश: "जब तक वोट और नोट के बदले जान की सौदागिरी बंद नहीं होगी, बेमेतरा और राजकोट जैसी खबरें आती रहेंगी। अब जागने का वक्त है।"

लगता है सत्ता सबक लेने तैयार नहीं इसलिए इसे एक बार फिर प्रकाशित किया जा रहा है ताकि लोगो को ध्यान रहे 

 छत्तीसगढ़ और गुजरात में जो घटना हुई वह हृदय विदारक घटना गुजरात में गेम जोन में लगी भीषण आग में 24 लोगों की मौत हो गई जिसमें 12 ब तो छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित बारूदी फैक्ट्री में हुए विस्फोट से एक दर्जन से अधिक लोगों के मरने की बात कही जा रही है दोनों ही घटनाओं में यदि कुछ कामन है तो वह आम लोगों की मौत या फिर उनके संचालकों का राजनैतिक पहुंच रखना आप हैरान हो जाएंगे कि किस तरीके से राजनीतिक पहुंच के चलते लापरवाही बढ़ती जाती है और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है राजकोट में तो जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं वे गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी लोगों में से इस गेम जोन के संचालक युवराज सिंह सोलंकी ने घटना के बाद पुलिस या प्रशासन से इतल करने की बजाय फरार हो गए बेहद अफरातफरी का माहौल है और कहा जा रहा है कि कई लोग बेहद ही गंभीर हालत में अस्पताल में भरती है तो दूसरी तरफ बेमेतरा में जो बात सामने आई है कि इस फैक्ट्री को लेकर हमेशा ही लापरवाही की खबर आती रही है बारूद फैक्ट्री है यह और 1988 से इसका निर्माण शुरू हुआ और 1998 999 में इसने प्रोडक्शन शुरू किया कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के धाकड़ नेता रहे सुंदरलाल पटवा के दामाद और उनके रिश्तेदारों की यह फैक्ट्री है डायरेक्टरों में जो नाम है वह अजय चौधरी चौधरी यह रिश्तेदार बताए जा रहे हैं इसके अलावा जो टेक्निकल सलाहकार है एसन सी यह कभी कोल इंडिया में रहे हैं और एक्सप्लोसिव और कोल के यह एक्सपर्ट माने जाते हैं तो एनआईटी से पास आउट आदेश जैन भी एक डायरेक्टर है इस स्पेशल ब्लास्ट नाम ही है इस कंपनी का स्पेशल ब्लास्ट तो सुंदरलाल पटवा के करीबी लोगों की इस फैक्ट्री में कल सुबह अचानक शनिवार को विस्फोट होता है दो मंजिला बिल्डिंग भरभरा कर गिर जाती है अफरातफरी का माहौल है और हैरानी की बात तो यह है कि घटना के तीन घंटे बाद पुलिस पहुंचती है तब तक वहां जो कर्मचारी तैनात थे सुरक्षा गार्ड थे कैशियर थे मैनेजर थे सब के सब फरार हो गए कहां है पुलिस ढूंढ रही है घटना क्यों हुई किस तरीके से हुई यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि इस फैक्ट्री को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था सुरक्षा कारणों की अनदेखी पर कई सवाल उठते रहे हैं लेकिन कहा जाता है कि राजनैतिक अप्रोच के चलते इनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई यहां तक कि भूपेश सरकार में भी कई शिकायतें होने के बाद पिछले साल एक हफ्ते के लिए सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया गया था लेकिन अचानक फिर इसे कब चालू किया गया कोई नहीं जानता और तब से यहां सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी की जा रही थी 800 के आसपास लोग यहां काम करते थे जिस बिल्डिंग में या जिस यूनिट में चार यूनिट थे लेकिन जिस यूनिट में विस्फोट हुआ वहां उस समय कितने लोग थे यह भी कोई बताने वाला नहीं है दो मंजिला बिल्डिंग जब बला में भरभरा कर गिरा तो मलम में भी कई लोगों की दबे होने की आशंका है और अभी तक राहत और बचाव का कार्य चल रहा है लोगों में आक्रोश है लेकिन इस आक्रोश का क्या करें सरकार हमेशा की तरह मृतकों को 5 लाख रुपए मुआवजा दे दे दी विष्णु देसाय की सरकारने और 00 रप इलाज के खर्चे के लिए घायलों को दे दी यानी राजनीति के इस गड़बड़ झाले में या घालमेल में किस तरह से लोगों की जान पे बन आई है और सत्ता मुआवजा बांटने में लगी है क्या डायरेक्टरों के खिलाफ एफआईआर नहीं होना चाहिए हालांकि कांग्रेस इस मामले में हमलावर है क्योंकि पिछले साल भूपेश सरकार के दौरानी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे एक सप्ताह के लिए बंद भी कर दिया गया था लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी थी कहा जा रहा है तब फैक्ट्री कैसे चालू यह बड़ा सवाल है हालांकि इस परे दंडाधिकारी जांच के आदेश दे दिए हैं गए हैं लेकिन सब जानते हैं कि इन इस तरह की जांच का क्या मतलब होता है मामले को शांत करने के लिए इस तरह की जांच की घोषणा कर दी जाती है और उस दंडाधिकारी जांच का क्या होता है कितने ही जांच है जो रद्दी की टोकरी में फेंक दिए गए हैं तब ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजनीतिक और पैसे के पहुंच के आगे सत्ता भी नतमस्तक है प्रशासन भी नतमस्तक है!

वीडियो देखें 

https://youtu.be/SAUufPl8cxs?si=0pR-GQCh1X-_j4JR

शनिवार, 14 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ में नशा का ये कैसा गुजरात मॉडल

छत्तीसगढ़ में नशा का ये कैसा गुजरात मॉडल

एक  तरफ अफ़ीम की खेती को लेकर सरकार घिरी हुई है तो दूसरी तरफ़ सरकार गांवगांव में घर-घर में शराब पहुंचाने आमदा है तो अब सूखा नशा का कारोबार भी जमकर फलफूल रहा है। कुछ महीने पहले जरूर पाकिस्तान से ड्रग्स सप्लाई से लेकर डर्टी पार्टी को लेकर पुलिस ने कारवाई तो की थी। यह राजधानी की बात थी। लेकिन छत्तीसगढ़ के गांवगांव में किस तरीके से नशा का व्यापार फल फूट रहा है और अब तो गुजरात का विकास मॉडल की बात नहीं है और ना ही शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में गुजरात मॉडल लागू करने की बात यह कब लागू होगा कहना बड़ा मुश्किल है। हालांकि गुजरात मॉडल तो फ़ेल साबित हुआ है। इसकी भी तो चर्चा है। 

ऐसे में नशा के मामले में ज़रूर गुजरात मॉडल अब धीरे-धीरे लागू होने लगा है। और जिस तरीके से पाकिस्तान से ड्रग्स आने लगे हैं। कहा जा रहा है कि गुजरात और राजस्थान के रास्ते ही छत्तीसगढ़ ड्रग्स पहुंच रहे थे। तब ऐसे में नशीली टेबलेट को लेकर भी तो बड़ा सवाल है। हालांकि छोटे-छोटे स्थानों पर तो मेडिकल स्टोर्स में ही खुलेआम नशीली टेबलेट बिक रहे हैं। लेकिन यह नशीली टेबलेट यदि गुजरात से आ रहा है तो फिर यह कौन सा गुजरात का नशा मॉडल है? कहना बड़ा मुश्किल होता जा रहा है। आज हम बताएंगे कि पिछले दिनों पुलिस ने जिस तरीके से गुजरात से नशीली टेबलेट सप्लाई का मामला पकड़ा है, वह बेहद ही चौंकाने वाला है और यह सवाल बड़ा होने लगा है कि क्या गुजरात का शिक्षा मॉडल पता नहीं कब लागू हो लेकिन नशा मॉडल तो लागू होने लगा है और यह कारवाई खैरागढ़ पुलिस ने की है। कहा जाता है कि यहां लंबे अरसे से पुलिस को सूचना मिल रही थी कि गुजरात से खासकर भरूच क्षेत्र से यहां बड़ी मात्रा में नशीली टेबलेट सप्लाई होती है और इस खेल में छत्तीसगढ़ के युवा भी शामिल है जो खैरागढ़ ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों के गांव में भी नशीली टेबलेट सप्लाई कर रहे हैं। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत कुछ गिरफ़्तारियां की है। कुछ गिरफ़्तारियां क्या? आधा दर्जन युवाओं को पकड़ा है जो गुजरात के भरूच के रास्ते से ड्रामा डोल कैप्सूल लाते थे। बड़ी मात्रा में और गांव-गांव में अपना कारोबार जमा कर रखे थे। जो मामला पकड़ाया वह भी लाखों रुपए का मामला है। लाखों रुपए के कैप्सूल ड्रामाडोल पकड़ाए हैं। गुजरात के भरूच से यहां तक मोटरसाइकिल से सप्लाई हो रहा था। और इस मामले में पुलिस ने भरूच से ड्रग्स लाने वाले यानी इस कैप्सूल को लाने वाले आधा दर्जन युवकों को गिरफ्तार किया है। जिसमें मोहित, राहुल, शाहबाज, शैलेश, उत्तम और एक युवक नाबालिक है। इसलिए उसका नाम हम नहीं बता रहे हैं। ऐसे आधा दर्जन युवक खैरागढ़ ही नहीं उसके आसपास के क्षेत्रों में गंडई से लेकर कई गांवों के नाम है। क्षेत्रों के नाम है। जहां ये लोग गुजरात से नशीले कैप्सूल लाकर सप्लाई किया करते थे। सोचिए कि छत्तीसगढ़ में किस तरीके से नशा का खेल हो रहा है। सरकार के अपने दावे हैं। शराब की कमाई को लेकर किस तरीके का खेल होता है। हमने कई बार बताया है कि वैध कमाई से ज्यादा अवैध कमाई का खेल ने सत्ता को नए-नए दुकान खोलने को मजबूर कर दिया और इसीलिए वह नए-नए उपाय कर रही है। 67 दुकान तो खोलने की घोषणा कर ही दी है। जिसका कई जगह भारी विरोध हो रहा है। कई क्षेत्रों से यह खबर भी आने लगी कि महिलाओं ने अब इस नशा के खिलाफ यानी शराब के खिलाफ अभियान छेड़ना शुरू कर दिया। याद कीजिए एक समय में डॉक्टर रमन सिंह की सरकार के दौरान किस तरीके से गुलाबी गैंग के नाम से महिलाएं सक्रिय हो गई थी और नशेड़ियों की पिटाई करने लगी थी। तो दूसरी तरफ सरकार कभी घोषणा करती है कि वह बियर को गन्ना रस की तर्ज पर बेचेगी तो कभी कहा जाता है कि बड़े रेसराओं को आमंत्रित किया जा रहा है उन्हें शुल्क सुविधाएं दी जाएगी। तो अब इस बात की भी चर्चा है कि क्या सरकार बड़ी कमाई के लिए जिन शराब दुकानों का सरकारीकरण किया गया है उनके ही सरकार द्वारा डॉक्टर रमन सिंह की सरकार ने किया था। ठेका प्रथा बंद करके सरकारीकरण उसे बदल के फिर ठेका प्रथा में लाने वाली ताकि एक मुस्तराक एक साथ आए और इस घपले घोटाले की झंझट से बचा जा सके। जिस घपले घोटाले के झंझट में भूपेश बघेल की सरकार फंस गई थी। तब ऐसी परिस्थिति में जो नए-नए मामले सामने आ रहे हैं। खासकर सूखा नशा को लेकर ड्रग्स, एमडी और नशीली टेबलेट मेडिकल स्टोरों से। इसके अलावा क्विक्स, बोन फिक्स, आयडेक्स जैसे नशीली वस्तुओं की बिक्री और युवाओं का गर्त में चले जाना। क्या छत्तीसगढ़ को उड़ता छत्तीसगढ़ बना देगा? उड़ता छत्तीसगढ़ का मतलब समझिए कि पंजाब के युवक जब नशे में बर्बाद हो रहे थे तो उसका नामकरण उड़ता पंजाब कर दिया गया था। उसी तर्ज पर क्या छत्तीसगढ़ भी अब उड़ता छत्तीसगढ़ हो जाएगा। 

वीडियो देखें 

https://youtu.be/ZK_KT7frpWE?si=nDDGJupSd3ABRF4B

शुक्रवार, 13 मार्च 2026

मंत्री का चहेता एसडीएम जब फँस गया

मंत्री का चहेता एसडीएम जब फँस गया 


 एंटी करप्शन ब्यूरो ने कुछ माह पहले  जिस एसडीएम को पकड़ा है उसका नाम भागीरथ खांडे है भागीरथ यानी गंगा बिल्कुल पवित्र शुद्ध साफ लेकिन इनके कर्म ऐसे थे कि बिल्कुल उलट नाम के और धमक इतनी थी कि वे दमदार से वसूली करते थे कहा जाता है कि इनके खिलाफ ढेरों शिकायत थी लेकिन एसीबी के जाल में यह मुश्किल से आया है एक मंत्री का वरद हस्त है इसके ऊपर और उस वरद हस्त के चलते अपने काम को वह बेखौफ अंजाम देता था

 एंटी करप्शन ब्यूरो ने  जब पकड़ा तो सिर्फ भागीरथी खांडे को नहीं पकड़ा बल्कि इसके चक्कर में बाबू चपरासी गार्ड सब थरे गए क्योंकि पैसे का जो लेनदेन हुआ था वह इन्हीं लोगों के मार्फ़त हुआ था यानी एसडीएम का कहना यदि बाबू चपरासी या गार्ड नहीं मानते तो भी उनकी मुसीबत थी और मान लिए तब भी उनकी मुसीबत है मामला अंबिकापुर का है छत्तीसगढ़ प्रदेश के अंबिकापुर को पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस बाबा के नाम से भी जाना जाता है तो इस जिले में परसा कोल ब्लॉक याने अदानी की कोयला खदान भी यानी आप सोचिए कि इस पूरे संभाग में जिले में किस तरह के अधिकारियों की पोस्टिंग होती है खासकर राजस्व के मामले में क्योंकि बड़ी  ही कमाई वाला क्षेत्र माना जाता है 

गरीब आदिवासी भोले भाले लोगों को बेवकूफ बनाकर वसूली करने वाले अधिकारियों की यहां फेहरिस्त लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उस भागीरथी खांडे का जिन्हें विष्णुदेव साय सरकार के एक मंत्री का वरद हस्त्र कौन है वह मंत्री हम आगे आपको बताएंगे उससे पहले बता देते हैं कि जिस अधिकारी को पकड़ा गया है भागीरथ खांडे वह एसडीएम है यानी सोचिए कि कितना बड़ा अधिकारी है और एसीबी को यह बड़ी सफलता मिली है कहा जाए तब भी गलत नहीं यदि एसीबी की माने तो इस इस अधिकारी की धूर्तता कितनी थी कि इसने किसान से रिश्वत तो ली ही ली साथ ही जमीन का पावर पटानी भी अपने नजदीकी लोगों के नाम कर दिया गया यानी य जमीन देर सवेर वह अपने पाले में कर ही लेता मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 7 मई को जब किसान  कन्हरा बंजारा ने इस अधिकारी की शिकायत की थी कि उन पर दबाव डाला जा रहा है 500 घूस मांगा जा कन्ही राम बंजारा जो शिकायत करता है उसका एक जमीन को लेकर अपने चाचा से विवाद और तहसील दफ्तर में उस जमीन विवाद को लेकर कन्ही राम मंजारा ने आवेदन दिया था शिकायत की तो तहसीलदार के आदेश के खिलाफ चाचा एसडीएम उदयपुर के राजस्व न्यायालय में अपील की थी इस मामले में उसके तथा अन्य परिजनों के पक्ष में आदेश पारित कराने के एवज में एसडीएम उदयपुर भागीरथी राम खांडे यही नाम है उसने रिश्वत मांगी थी और इसकी शिकायत जब की गई तो एसीबी ने जाल बिछाना शुरू किया क्योंकि यह बेहद ही यह  बहुत प्रभावशाली व्यक्ति है मंत्री का आदमी है और इसे पकड़ना आसान भी नहीं था और पकड़ने के बाद हंगामा के भी आसार थे और रिश्वत की रकम देने के लिए 21 जून को जब शाम को 6 बजे कन्हीरांगद उसने सीधी रकम नहीं दी बल्कि अपने बाबू से कह दिया कि वह रकम ले ले तो बाबू ने वह पैसा चपरासी को दे दिया अबीर राम को अभीर राम ने जाकर बताया कि पैसा मिल गया इसे क्या किया जाए तो एसडीएम ने कहा कि जाओ पैसा जो उनके गार्ड है सिक्योरिटी गार्ड कविनाथ सिंह को दे दिया और चपरासी ने वैसा ही किया जो एसडीएम ने कवि नाथ सिंह को देने को कहा था और जैसे ही शिकायत करता ने इसकी पुष्टि की छापे मार की कारवाही की गई और ना केवल रुपए बरामद किए गए बल्कि एक चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस जमीन के बदले आदेश पारित करने के लिए  रिश्वत लिया गया है उसका पावर ऑफ एटमी भी बना दिया गया और कितना चालाकी से यह पावर ऑफ एटनी अपने परिचित महिलाओं के नाम से तैयार किया गया था ताकि फिर कभी भी मिले व जमीन अपने नाम में कर लिया जब खंगाला गया दफ्तर तो वह पावर टन भी मिल कहा जाता है कि इनकी संपत्ति को लेकर भी अब एसीबी जांच करने में जुटी क्योंकि इस अधिकारी के संबंध कांग्रेस के नेताओं और ऐसी परिस्थिति में इसने हाल के वर्षों में खूब पैसा बनाया था अब देखना है कि इस अधिकारी को निलंबित किया जाता है !

ये तो थी घटना , लेकिन कहा जा रहा है कि अब उसने फिर सेटिंस जमा ली है देखना है क्या होता हैं ।


वीडियो देखें 


https://youtu.be/lG54_JVHmAk?si=jiLXlZ42rFamBKZM

गुरुवार, 12 मार्च 2026

कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर

कुपोषण में भारत से पाकिस्तान बेहतर 


भारत  को दुनिया का सबसे बड़ा इकोनॉमी बनाने के लिए कमर कसकर तैयार देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शायद यूनिसेफ की उस रिपोर्ट पर भरोसा नहीं है जो भारत को पाकिस्तान से भी नीचे खड़ा कर देता है हमसे भी छोटे-छोटे देश बच्चों के पोषण के मामले में बेहतर है नेपाल बांग्लादेश श्रीलंका किसी भी देश का नाम आप ले लीजिए हमसे एक पायदान नीचे कोई है तो वह अफगानिस्तान है अफगानिस्तान यानी तालिबान तब ऐसी परिस्थिति में विश्व गुरु बनाने की जो चाल चली जा रही है या सपना दिखाया जा रहा है उसकी हकीकत क्या यूनिसेफ की रिपोर्ट ने नहीं खोल दिया

 दुनिया भर में 18 करोड़ से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार है या उन्हें ठीक से खाना नहीं मिल रहा है और उनमें से 40 फीसद बच्चे भारत के यानी भारत की स्थिति नीचे के पैदान से आठवें नंबर पर है और हमसे बेहतर स्थिति में पाकिस्तान 

पाकिस्तान तो खुशहाली की रिपोर्ट में भी भारत से बेहतर तब क्या भारत में जो बच्चे हैं उन्हें पोषित खाना नहीं मिलना चाहिए 5 किलो अनाज एक परिवार को देकर वोट हासिल करने लाभार्थी बताकर लाभ लेने का इस खेल में किस कदर भारत की स्थिति लगातार खराब होते जा रही है और पूंजीपति और पूंजी वाले होते जा रहे हैं दुनिया में भारत का डंका बजाने के लिए ठहाके लगाए जा रहे हैं याद कीजिए आप इटली में किस तरीके से देश के प्रधानमंत्री ठहाके लगा रहे थे लेकिन यह कालिक क्या उन्हें दिखाई नहीं देता दुनिया तो देख ही लेगी यूनिसेफ की रिपोर्ट को य की रिपोर्ट बेहद ही चौकाने वाला ही नहीं परेशान करने वाला है कि किस तरीके से भारत के 40 फीसद बच्चे पोषण युक्त खाने के लिए तरस रहे हैं किस तरीके से गरीबी हावी है और इसकी कल्पना तो उन लोगों को तभी कर लेनी चाहिए थी जब भारत सरकार ने आंकड़े दिए थे कि 80 लाख परिवारों को 5 कि अनाज दिया जाता है तब देश में आम आदमी किस कदर परेशान है महंगाई बेरोजगारी एक अलग सवाल है लेकिन बच्चे बच्चों की जिंदगी को लेकर भी क्या सरकार गंभीर नहीं है कुपोषण दूर करने के लिए कितने बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं प्रचार प्रसार में ही करोड़ों रुपए बर्बाद करके अपना प्रचार प्रसार किया गया लेकिन खप की स्थिति यूनिसेफ ने खोल कर रख दी है कि किस तरीके से भारत में छोटे बच्चों को पोषण युक्त खाना तक नसीब नहीं हो रहा है और देश के प्रधानमंत्री भारत को दुनिया का तीसरा इकोनॉमी बनाने के लिए तैयार है तो क्या यह इकोनॉमी कॉरपोरेट सेक्टर के दम पर बन रहा है क्या पूंजी सिर्फ कारपोरेट सेक्टर के पास जाकर रह गई यह बेहद ही गंभीर सवाल है और इसके लिए मानवाधिकार को लेकर चिंतित लोगों को भी सामने आना चाहिए कहां है वह एनजीओ जो लगातार बच्चों के लिए काम कर रहे हैं किस तरीके से काम कर रहे हैं क्या सिर्फ अपना वेतन निकाल रहे हैं और सरकार के जी हुजूरी में लगे हुए हैं या उनके ग्रांड लेने में लगे हुए हैं सवाल आप कुछ भी उठा लीजिए सवाल यह नहीं है कि दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस देश की दिशा किस तरफ ले जाना चाह रहे हैं सवाल तो यह है कि देश किस दिशा में जा रहा है नसता बढ़ी है इसमें किसी को कोई संदेह नहीं अब तो छोटी-छोटी बातों पर ही लोग मारने कूटने को तैयार हो जाते हैं तब ऐसी परिस्थिति में यूनिसेफ की जो रिपोर्ट है हम डिस्क्रिप्शन बॉक्स में उनका लिंक दिया आप चाहे तो जाकर पढ़ सकते हैं लेकिन जो रिपोर्ट है वह बेहद ही गंभीर चेतावनी है देश के लिए कि आने वाले दिनों में देश इस तरह से चलाया जाएगा तो जो भविष्य के नागरिक हैं वे किस तरीके से होंगे महंगाई को लेकर कोई सवाल नहीं उठाता शिक्षा व्यवस्था ठप हुई है किस तरीके से शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद किया गया वह भी इस दौर में लोगों ने देखा है और यह भी है कि सरकारी स्कूलों को खंडहर में तब्दील करके निजी स्कूलों को बढ़ावा दिया गया क्या इस तरीके से इकोनॉमी बढ़ेगी भारत की और वह दुनिया में अपना झंडा बुलंद करेगा लेकिन धरातल में हकीकत क्या है जिस देश में 80 लाख परिवार 5 किलो अनाज पर निर्भर हो जिस देश में पीने का पानी के लिए हाहाकार मज गया हो जिस देश में बिजली सुविधा तक निर्वात गति से नहीं मिल रही हो या ट्रेन तक रद्द कर दी जाती हो तब उस देश में तीसरी इकोनॉमी को लेकर प्रधानमंत्री ने जो सपना देखा है क्या उसके लिए उन्हें बधाई दे दिया जाए इस यूनिसेफ की रिपोर्ट आने के बाद बधाई दे दिया जाए आप खुद तय करें

वीडियो देखें 

https://youtu.be/-jl05KaXTLg?si=tBhB8iFrgZiFc7hS

मंगलवार, 10 मार्च 2026

धर्म को अपने अनुसार चलाना चाहती है मोदी सरकार

धर्म को अपने अनुसार चलाना चाहती है मोदी सरकार 


 ऐतिहासिक सत्य है कि जब जब राजा मजबूत रहा है तब तक उसने धर्म गुरुओं को अपने इशारे पर चलाने की कोशिश की है इतिहास इस तरह के उदाहरण से अटे पड़े हैं हम आपको सिर्फ एक उदाहरण बता देते हैं कि मुगल साम्राज्य अकबर जब ताकतवर हो गए तो उन्होंने मुस्लिम धर्म के किसी भी प्रवर्तक न मुल्ला किसी की नहीं सुनने लगे वे अपने हिसाब से सत्ता चलाने लगे थे और जब दबाव ज्यादा बढ़ने लगा तो उन्होंने दीन इलाही नाम का अपना एक नया धर्म ही शुरू कर दिया था 

कहा जाता है कि कि वे हिंदू मुस्लिम नहीं करते थे क्योंकि वे मुसलमान भी नहीं रह गए थे दीन इलाही धर्म की स्थापना के बाद तब उनका रवैया क्या इतना भरोसेमंद था कि लोग उन पर विश्वास करते थे और उनके नौ रत्नों की कहानियां तो सबने सुनी है उनमें सभी तरह के लोग थे हिंदू हिंदुओं की संख्या भी ज्यादा थी लेकिन क्या इस दौर में हिंदू मुस्लिम करके सत्ता हासिल करने वाले अब धर्म गुरुओं पर ही प्रहार करने लगे क्या सिर्फ धर्म गुरुओं पर प्रहार इसलिए किया जा रहा है ताकि समूचे हिंदुत्व को भी अपनी मुट्ठी में कर लिया जाए राजनीति में तो यह दिखाई दिया क्योंकि हिंदुत्व के सबसे बड़े झंडा बरदार रहे बाला साहब ठाकरे के सुपुत्र उद्धव ठाकरे जब भारतीय जनता पार्टी से अलग हो गए तो उन्हें तोड़ने की क्या-क्या कोशिश नहीं हुई यानी हिंदुत्व का झंडा हमारे पास ही है हम ही उठाएंगे कोई दूसरा हमसे बड़ा हिंदुत्व नहीं है और इस दौर में इसी तरीके का खेल भी खेला गया जिसने भी भाजपा की आलोचना की उसे सनातन विरोधी कहा गया जिसने भी मोदी की मनमानी पर प्रहार किया उसे भी हिंदू विरोधी करार दिया गया और यदि  आपने कांग्रेस की सत्ता की तारीफ कर दी या कांग्रेस के साथ खड़े हैं तो आप हिंदू विरोधी करार दिए जाएंगे तमगे बांटे गए देशद्रोही के भी और हिंदुत्व के भी इस दौर में और यह उपाय अभी से शुरू नहीं हुआ है आरएसएस के साथ लगी विश्व हिंदू परिषद ने सबसे पहले साधु महात्माओं या धार्मिक लोगों पर डोरे डालना शुरू किया और राम मंदिर का आंदोलन इसका सहारा बना 

हालांकि शंकराचार्य साफ कहते हैं कि हंगामा करने से या सड़क में हो हल्ला मचाने से राम मंदिर नहीं बना है या नहीं मिला है लोग ये कह रहे हैं कि हम राम को लाए उन लोगों से पूछिए कि आज राम अगर वहां पर बैठने के लिए अवसर बन रहा है तो ये कैसे बन रहा है यह सड़क पर चिलाने से बन रहा है कि न्यायालय के फैसले से बन रहा है राम मंदिर या अयोध्या जन्मभूमि तब मिला है जब न्यायालय में सबूत पेश किए गए शंकराचार्य ने पैरवी की वकीलों की फेहरिस्त लगी थी शंकराचार्य के साथ लगातार सबूत दे दिए जाने लगे और आप हैरान हो जाएंगे कि इस पूरी कानूनी प्रक्रिया से ना तो विश्व हिंदू परिषद प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा था या भारतीय जनता पार्टी के लोग ही जुड़े थे वे सब पर्दे के पीछे खड़े नजर आए तब ऐसी परिस्थिति में अब जब विवाद बढ़ता जा रहा है शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज ने कह दिया है कि राम मंदिर में जो प्राण प्रतिष्ठा हुई है वह उचित नहीं हुई है या धर्म के अनुसार नहीं हुई है और वे पूर्ण निर् निर्माण के बाद यानी मंदिर अभी अधूरा भी है 30 फीसद बना है पूर्ण निर्माण के बाद वे फिर से प्राण प्रतिष्ठा करेंगे यह बेहद ही विवादास्पद मामला हो जाता है और यदि यही बात कोई कांग्रेस या दूसरे विपक्षी दल के लोग कह देते कि वह भाजपा का इवेंट है फिर से प्राण प्रतिष्ठा समारोप की जाएगी तो अब तक वे सनातन विरोधी कहलाते लेकिन सवाल शंकराचार्य जी ने उठाया और शायद इसलिए उठाया है कि इस दौर में सब कुछ अपने में समेट लेने अपने को सबसे बड़ा हिंदुत्व का ठेकेदार बनाने मोनोपोली रखने और पूरा कब्जा जमाने की जो कोशिश हुई है उससे क्या शंकराचार्य का मन आहत हुआ विवाद तो उस दिन से शुरू हो गया था जब कांशी में कारी का निर्माण किया जा रहा था सैकड़ों की संख्या में मूर्तियां बुलडोजर की चपेट में आ गई थी एक मूर्ति के लिए क्या दसों मूर्तियों को किनारे किया जा सकता है यह पहला सवाल शंकराचार्य श्री अभ मुक्तेश्वरा नंद जी ने उठाया था और उसके बाद जब केवल इवेंट करने के लिए या राजनीति साधने के लिए प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन हुआ तब विवाद और बढ़ता चला गया तो क्या यह सारी लड़ाई सिर्फ हिंदुत्व का ठेकेदार बनने की है या वास्तव में यह कोई राजनीतिक खेल है सवाल आप कुछ भी कर सकते हैं क्योंकि इस दौर में जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर तमाम विपक्ष के लोगों को हिंदू विरोधी बताया गया वह भी कम हैरान करने वाली बात नहीं है हालाकि कि बहुत सारे भाजपाइयों के रिश्तेदार भी होंगे उन रिश्तेदारों के मन में क्या गुजर रहा होगा जो कांग्रेस में है 

लेकिन राजनीति साधनी है और राजनीति गजब का खेल है मान सम्मान कुछ नहीं देखा जाता इसका उदाहरण नीतीश कुमार तो सबके सामने है ही है कि किस तरीके से अमित शाह ने दरवाजे बोने की बात कही थी और कुछ ही महीनों बाद उनकी भारतीय जनता पार्टी में वापसी हो गई थी किस तरीके से भ्रष्टाचारियों को जेल में डालने की बात हुई थी और किस तरीके से उन्हें मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री बना दिया गया था यह राजनीति उन लोगों के लिए जायज हो सकती है जो नैतिकता को तिलांजलि दे चुके हैं लेकिन जब बात धर्म की आने लगी है तो क्या सचमुच अब भारतीय जनता पार्टी या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब सब कुछ अपने कब्जे में कर लेना चाहते हैं और मोदी समर्थकों को क्या यह दिखाई नहीं देता कि किसी शंकराचार्य का किस तरीके से अपमान हो रहा है उनकी बातों की किस तरीके से अवहेलना हो रही है उन्हें डराया धमकाया तक जा रहा यकीन मानिए यदि आप यह बात यदि किसी दूसरे धर्म में होती यानी बहुत सारे धर्म है सिख चैन मुस्लिम ईसाई पारसी किसी भी धर्म गुरुओं के खिलाफ कोई सत्ता इस तरह का व्यवहार करती या अनदेखी करती उनके बातों की अवहेलना करती तो अब तक बवाल मच चुका होता सत्ता के खिलाफ विद्रोह हो चुका होता क्या कुछ नहीं हो जाता लेकिन हमने पहले ही कहा कि राजनीति को साधने के लिए विश्व हिंदू परिषद के गठन के साथ यह खेल हो गया था धर्म पर भी कब्जा करने का मोनोपोली स्थापित करने का और क्या मोदी सरकार अब इस परे सफल हो गई है और अब हिंदू समाज में शंकराचार्य की अहमियत समाप्त हो चली है या समाप्त हो गई है या हो रही है कहना बेहद कठिन है आप सोचिए जरूर कि राजनीति किस करवट बैठ रही है और धर्म के आश्रय जिस राजनीति को साधा गया है वह धर्म के साथ या धर्म गुरुओं के साथ उस राजनीति का व्यवहार कैसा होता जा रहा है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/65KWUiB1Woc?si=qZBa0SQx96ZDNc5q

मौत का सामान बन रहा तरबूज

 मौत का सामान बन रहा तरबूज 


गर्मी तेज पड़ने लगी है और इसके साथ ही तरबूज की मांग भी बढ़ गई लोगों को अच्छे तरबूज चाहिए लाल रंग के तरबूज चाहिए और शायद इसका फायदा उठाते हुए बहुत सारे तरबूज के व्यापारी खाने का रंग खाद्य और औषधि प्रशासन द्वारा अनुमति मिला हुआ है एरिथ सन नामक यह खाद्य रंग कितना हाम फूल है कितना फायदे जनक है इसे लेकर कई तरह के विवाद हमेशा ही उठते रहे हैं 

पुलिस भी इंजेक्शन के जरिए तरबूज मेंलाल रंग करने वालों को गिरफ्तार भी करती है कारवाही भी करती है लेकिन पुलिस क्यों नहीं पहुंच पाती असली व्यापारी तक केवल इंजेक्शन लगाने वाले नौकरों तक ही क्यों सीमित हो जाती यह एक अलग सवाल है दरअसलएरिथ सन को खाद्य एवं औषधि प्रशासन से अनुमति मिली हुई है इसके बाद भी यदि इसे तरबूज में मिलाने के बाद लोगों की तकलीफ शुरू हो जाती है उल्टी दस्त पेट दर्द और अब तो मौत तक की खबर आने लगी तब क्या लोगों को इस बात का ध्यान नहीं रखना चाहिए कि वे ऐसी तरबूज ना खरीदे बड़ा सरल सा परीक्षण है इसके आप तरबूज को कटवा लीजिए और कॉटन रुई से आप उस लाल रंग में काटन और रुई को फेरिए तो यदि वह लाल हो जाता है तो उसमें एरिथ सिन मिलाई गई है लेकिन लोगों को तो साबुत तरबूज घर ले जाना है तब उनके सामने क्या उपाय कई बार इसे लेकर सवाल उठते रहे हैं 1990 के दशक में तो वाशिंगटन पोस्ट ने यानी अमेरिका के उस बड़े चर्चित अखबार में इसके प्रतिबंध लगाने की भी खबरें प्रसारित कर दी गई थी लेकिन बार-बार रिसर्च के बाद भी यह कहा जाता है कि यह मनुष्य के लिए नुकसानदायक नहीं है चूहे में प्रयोग हुआ था उसके कुछ

लक्षण आए थे एक तो दूसरी तरफ विशेषज्ञों का यह भी दावा है कि बड़े लंबे समय तक सेवन करने के बाद ही इसमें में कैंसर या थायराइड जैसी बीमारी हो सकती है के लक्षणपाए गए हैं तब सवाल यह है कि आखिर जो खबरें आ रही है उत्तर प्रदेश की खबरें हैं एक लड़की अपने घर की सबसे बड़ीथी और उसने तरबूज खाया उसके बाद उसे पेट में दर्द हुआ उल्टी हुआ अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई इसी तरह की और भी खबरें कुछ लोग ठीक भी हुए हैं तो क्या इंजेक्शन लगाने के दौरान एहतियात नहीं बढ़ता जाता है जब वैज्ञानिकों ने कह दिया कि यह बहुत ज्यादा हार्मफुल नहीं है और लाखों लोगों में से एक आक को थायराइड याकैंसर जैसी बीमारी हो सकती है तब यदि घटना हो रही है तो क्या इससे बचा जाना नहीं चाहिए यकीनन बचा जाना चाहिए पुलिस ने पिछले दिनों कुछ लोगों को गिरफ्तार भीकिया इंजेक्शन लगाते हुए बकायदा लेकिन वे नौकर थे वे कह रहे हैं कि उन्हें मालिक नौकरी पर रखा और मालिक जैसा आदेश देंगे वे करेंगे लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही यदि खाद्य एवं औषधि प्रशासन की अनुमति है कि यह खाने की चीजों में मिलाई जा सकती है तब इसे क्या कहा जाए या इसका क्या किया जाए फिलहाल तो हम अपने पाठकों को यही सलाह दे सकते हैं या दर्शकों को यही सलाह दे सकतेहैं कि वे इस तरीके से मिश्रित चीजों से बचे शुद्धता वाली चीजों पर ही भरोसा करें

वीडियो देखें 


https://youtu.be/3JD66t-Wl24?si=-XqLWiTqWmH_fLZE