बुधवार, 4 मार्च 2026

मोदी की मुट्ठी में बीजेपी और संघ भी

मोदी की मुट्ठी में बीजेपी और संघ भी 


 क्या भारतीय जनता पार्टी पूरी तरीके से बदल गई है क्या भारतीय जनता पार्टी के सामने मोदी के अलावा कोई विकल्प नहीं है या फिर मोदी की मुट्ठी में भारतीय जनता पार्टी चली गई यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि जो कुछ इन दिनों चल रहा है वह हैरान करने वाला है ।

जिस  तरीके से भारतीय जनता पार्टी मोदी के गिरफ्त में आ गई किस तरीके से सब कुछ बदल गया है और भारतीय जनता पार्टी के सामने अब कोई विकल्प नहीं बचा है कि वह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार चले और शायद इसकी झलक सबसे पहले तो लोकसभा चुनाव के दौरान जारी संकल्प पत्र में आपको देखने को मिल गया था भारतीय जनतापार्टी ने जो घोषणा पत्र जारी किया था घोषणा पत्र के नाम से उसमें वादों की फेहरिस्त थी लेकिन इस बार ना तो महंगाई को लेकर कोई सवाल है ना कोई बात है और ना ही बेरोजगारी को लेकर कोई बड़ा निर्णय सरकार करते दिखाई दी, दूसरे जो मुद्दे हैं भ्रष्टाचार से लेके सारे मुद्दे गायब हैं किसानों की आय दोगुनी करने का जो वादा 2014 में किया गया था उसका भी पता नहीं यानी बहुत सारे वादे जो 2014 में किए गए थे 10 साल सत्ता में रहने के बाद वे पूरे नहीं हुए लेकिन उनका कहीं कोई जिक्र नहीं यहाँ तक की अग्निवीर का भी कहीं जिक्र नहीं था।76 पेज की मोदी की इस गारंटी में 53 पेज में मोदी की तस्वीर और इसके अलावा कहीं कोई किसी की हैसियत नहीं है कहा जाए तो गलत नहीं होगाएक पेज में साइड में कहीं दिखते गृह मंत्री अमित शाह दिखाई दे रहे थे तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कहीं एक पेज में दिखा दे रहे थे  पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का अध्यक्ष भाषण केअलावा कहीं जिक्र नहीं है लेकिन 2014 में चार बड़े नेताओं की तस्वीर थी और दूसरे पेज में ये तस्वीर थी भाजपा या आरएसएस के प्रमुख संस्थापक जनसंघ के नेताओं श्यामा प्रसाद मुखर्जी और दीन दयाल लेकिन 2019 आते आते यह इसमें कुछ और बदलाव किया गया सारे नेताओं को गायब कर दिया गया था और श्यामा प्रसाद मुखर्जी दीनदयाल उपाध्याय के साथ अटल बिहारी वाजपेई की तस्वीर को जोड़ते हुए सबसे आखिरी पन्ने पर स्थान दिया था लेकिन २०२४ आते आते सब कुछ बदल गया तो क्या भारतीय जनता पार्टी हर तरह से बदल चुकी है कांग्रेस की तुलना  ना करें क्योंकि आज विश्वास की बात है लेकिन क्या देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो छवि बिगड़ चुकी है इलेक्ट्रॉल बंड और हिडन बर्ग की रिपोर्ट के बाद उस छवि पर भाजपा को इतना भरोसा था  या फिर यह मोदी की धमक है जिसके आगे पूरी पार्टी घुटने टेक द सवाल आप कई उठा सकते हैं लेकिन यह भारतीय जनता पार्टी का अंदरूनी मामला है उन्हेंशायद अब भी उस छवि पर भरोसा था चुनाव जीतने का जिस छवि को लेकर आरएसएस ने भी सवाल उठाए थे अपने मुखपत्र ऑर्गेनाइजर और क्या भारतीय जनता पार्टी झूठ की राह पर चल पड़ी है इस सवाल का जवाब बेहद ही मुश्किलहै क्योंकि झूठ और अपवाह की राजनीति के आसरे नफरत फैलाने का खेल का आरोप भारतीय जनता पार्टी पर लगते रही है ऐसे में यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बात बात पर झूठ बोलते हैं झूठों की फेहरिस्त है और उसकी गारंटी के साथ भारतीय जनता पार्टी आगे बढ़ गई जिसका ख़ामियाज़ा २४० सीट के रूप में सामने आया 

लेकिन शायद पार्टी के नेता इससे सबक लेने को तैया नहीं हैं।

भारतीय जनता पार्टी में ना तो वह राजनैतिक सचिता की बात की जा सकती है और ना ही भय भूख और भ्रष्टाचार जैसे नारों का ही कहीं पार्टी विद डिफरेंस भी कहीं दिखाई नहीं देता तब ऐसी परिस्थिति में अब जब एपिस्टन फ़ाइल और अमेरिका ट्रेड डील के मामले गर्म है, ईरान से दूरी का मामला पेचीदा हो रहा है तब भी भरोसा ?

तब क्या बीजेपी भी यह मान चुकी है कि चुनाव के लिए वोट चोरी और चुनावी सेटिंग के आसरे सत्ता क़ायम रहेगी इसलिए वे खामोश हैं या सच में गुजराती लॉबी ने पार्टी को अपनी मुट्ठी में रख लिया है 

तब संघ भी क्या उनकी मुट्ठी में चला गया है 

लग तो यही रहा है और यही वजह है कि अब मोहन भागवत की भूमिका पर सवाल उठ रहे है 


वीडियो देखें 


https://youtu.be/P3jDeqzASuY?si=ZMPUXH3-5Uytk17O

मंगलवार, 3 मार्च 2026

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया -ग़ज़ब कर रही सरकार

आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया -ग़ज़ब कर रही सरकार 


 यह ना तो इतिहास के उस सनकी राजा की कहानी है जिन्हें एक दिन के लिए दिल्ली की गद्दी दे दी गई तो वे चमड़े का सिक्का चलाने लग गए चौसा के भिस्ती निजाम थे ये जिन्हें एक दिन के लिए दिल्ली की गद्दी दे दी गई थी, वे चमड़े का सिक्का चलाकर अपना नाम इतिहास में दर्ज कर लिए और ना ही यह किस्सा भगोड़ा डिफाल्टर विजय माल्या का ही है जो आमदनीअठन्नी खर्चा रुपैया की तर्ज पर वाहवाही लूटने के लिए क्या कुछ नहीं किया था किस तरीके से उन्होंने अंग्रेजों द्वारा ले गए तलवार भी वापस लाए थे तो किंग फिशर विमान के जरिए किस तरीके से बैंकों को चूना लगाया था और इस देश से भागना पड़ा 

यह तो मोदी सत्ता का वह कारनामा है जो आपकी आंखें खोल देगी यकीन मानिए कि चुनावी बांड के बाद जिस तरीके से मोदी सत्ता की करतूत सामने आई या उससे पहले की बात करें यदि हिडन बर्ड की रिपोर्ट आने के बाद से ही मोदी सरकार की मुसीबत बढ़ते चले गई उनकी छवि इस कदर खराब होने लग गई कि आरएसएस को अपने मुख पत्र में भी कहना पड़ा कि मोदी के भरोसे चुनाव जीता नहीं जा सकता लेकिन अहंकार जब सर चढ़कर बोलता है तो वह किसी भी चेतावनी को कहां मानता है और शायद यही वजह है कि 400 पार का नारा दे दिया गया

इस दौर में जबकि स्थिति वह नहीं है जो दिखाने बताने की कोशिश की जा रही है और इस खेल में समूचा मीडिया भी शामिल है तब ऐसी परिस्थिति में जब रोज-रोज मोदी के नए नए कारनामे सामने आ रहे हैं सिर्फ चुनावी बांड की बात नहीं है जहां उन दवा कंपनियों से भी पैसे वसूल लिए गए जांच रोकने के नाम से जो जहर बनाने की कोशिश कर रहे थे या नकली दवाइयां बना रहे थे मानक स्तर से नीचे की घटिया दवाइयां बना रहे थे उनसे पैसे लेने की बात नहीं है और ना ही पैसा दो और धंधा लो की बात है यह बात तो वंदे भारत जैसे महत्वाकांक्षी योजना की याद कीजिए आप जब गुजरात से चलकर देश के प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचे थे तब बुलेट ट्रेन की बात की जा रही थी रेलवे की अनियमितता की बात की जा रही थी रेलवे के घाटे को लेकर कसीदे गढ़े जा रहे थे हमले किए जा रहे थे कांग्रेस और उसके पूर्व की सरकारों पर लेकिन वंदे भारत जब शुरू हुआ तो उसका हकीकत यह है कि सुविधाओं को लेकर तो सवाल उठते ही हैं खाने पीने की घटिया स्थिति को लेकर भी कई वीडियो वायरल हुए लेकिन आज हम बात कर रहे हैं नरेंद्र मोदी के उस खेल का जो आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया की तर्ज पर किया जा रहा है इस दौर में जो आरटीआई से खुलासे हुए व बेहद ना केवल चौकाने वाले हैं बल्कि सत्ता की मनमानी का ऐसा नमूना है जो आपको देखने में कहीं नहीं मिलेगा यदि आप टिकट कैंसल को लेकर जो आरटीआई की रिपोर्ट आई है वह जी समझ ले तो आप हैरान हो जाएंगे कि ट्रेन तो ठीक से चल नहीं रही आए दिन ट्रेन रद्द कर दी जाती है केवल ढुलाई के लिए या दूसरे माल परिवहन के लिए यात्रियों को परेशानी में डाल दिया जाता है लेकिन इस दौर में शायद कांग्रेस भी आंदोलन करने की स्थिति में नहीं है इसलिए जनता को उसके हाल में छोड़ दिया गया लोग परेशान ट्रेनों  की बात नहीं है जो समय पर नहीं चल रही है बल्कि कभी भी रद्द की जा रही है और कैंसल टिकट से यानी जो लोग लोग अपनी इच्छा से कैंसल करते हैं उससे ही रेलवे ने 1230 करोड़ रुपए की कमाई की है यानी कमाई का क्या जरिया बना के रख दिया गया इस दौर में और यही नहीं रेलवे बुजुर्ग यात्रियों को सीनियर सिटीजन के नाम से जो सुविधाएं द देती थी वह भी पूरी तरीके से बंद कर दिया गया लेकिन यह धार्मिक सत्ता है यह धर्म के अनुसार चलने वाली सत्ता है शायद इसलिए लोगों ने इसे ध्यान नहीं दिया कि इस देश में बुजुर्गों के साथ किस तरीके से खेल खेल दिया रेलवेने और इसी खेल से ही करोड़ों रुपए रेलवे ने कमा लिया 

लेकिन आज हम बात कर रहे हैं वंदे भारत न की जो मोदी सत्ता की सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से आप यकीन नहीं करेंगे कि बीबीसी ने जो आरटीआई लगाया था उससे जो खुलासा हुआ है उससे तो यह पता चल रहा है कि केवल झंडी दिखाने के लिए जब मोदी पहुंचते हैं वंदे भारत ट्रेन को तो उसके खर्चे 19 लाख रुपए एक ट्रेन को झंडी दिखाने का पड़ रहा है जबकि आप याद कीजिए कि इससे पहले प्रधानमंत्री कब कब ट्रेन को झंडी दिखाते थे एक से एक ट्रेन चले नई तकनीकी के साथ ट्रेन चले लेकिन वंदे भारत को लेकर रेलवे मंत्री कहां है दूसरे विभाग के मंत्री कहां हालत यह है कि कोई भी विभाग का काम देश के प्रधानमंत्री ही झंडी दिखाने पहुंच जाते हैं उद्घाटन करने पहुंच जाते हैं यानी लोग तो मजाक में यहां तक कहने लग गए कि नाली का भी उद्घाटन करने देश के प्रधानमंत्री यदि जाने लगे तो फिर क्या कुछ हो लेकिन 2019 में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की गई थी और अब तक 100 वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा चुकी यदि एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने की कीमत 19 लाख रुपए तो आप अंदाजा लगाइए कि 100 नों को हरी झंडी दिखाने में कितने करोड़ रुपए फूक दिए गए हैं केवल तामझाम स्वयं को स्थापित करने के लिए स्वयं की छवि बनाने के लिए क्या कुछ खेल इस दौर में नहीं हुआ और किस तरीके से सरकारी धन या टैक्स पेयर के पैसों को बर्बाद किया गया है लेकिन अब वही टैक्स पेयर जो सब्सिडी को लेकर सवाल उठाते थे मुंह में ताला लगा लिए हैं या आंखों में धर्म की पट्टी बांध चुके और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि यह वंदे भारत ट्रेन घाटे में चल रही 1 अप्रैल जो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मिली है उसके अनुसार 1 अप्रैल 2023 से 31 जनवरी 2024 तक ट्रेन का खर्चा इस ट्रेन को चलाने का खर्चा जो हुआ है वह 75 करोड़ 23 लाख रुपए खर्चा कर दिया गया और इससे जो पैसे मिले हैं वह केवल 30 करोड़ रुपए यानी डबल आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया वही दूसरी तरफ आप कहेंगे कि यह तो सभी यात्री ट्रेनों के साथ होता है क्योंकि रेलवे के जो महाप्रबंधक मल्होत्रा है जो प्रमुख है वे कहते हैं कि हमारा धे यात्रियों को सुविधा देना है ना कि आय करना है पैसा कमाना है हम हम तो पैसा माल ढुलाई में कमाते लेकिन क्या यह हकीकत हैयदि यह हकीकत है तो फिर वंदे भारत ट्रेन की टिकट की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है कि आम आदमी सफर ना कर सके आमतौर पर यह कहा जाता था कि मध्यम वर्ग और उनसे गरीब वर्ग ही ट्रेनों की यात्रा करते हैं पैसे ले तो हवाई जहाज से उड़ जाते हैं या एसी में सफर करते हैं तब ऐसी परिस्थिति में वंदे भारत चलाई किसके लिए जा रही है और वह भी इस तरह घाटे से आप कहेंगे कि सभी यात्री ट्रेन घाटे में चलती होगी नहीं ऐसा नहीं बेंगलर राजधानी एक्सप्रेसशताब्दी ना तो इसके उद्घाटन में वह तामझाम आपको देखने को मिला होगा और ना ही उतने खर्चे हुए होंगे क्योंकि उस दौर में रेलवे अपने खर्चे से अपने प्रचार के माध्यम से  उद्घाटन करवा दिया करता था इसकी सुविधाओं का प्रचार प्रसार वह जरूर करती थी लेकिन वंदे भारत का जो प्रचार प्रसार है वह आप हैरान हो जाएंगे कि किस स्तर पर हो रहा है और किस तरीके से टैक्स पेयर के पैसे बर्बाद किए जा रहे हैं केवल अपनी छवि बनाने के लिए तो बेंगलर राजधानी शताब्दी जो है वो उसे चलाने में 68 करोड़ रुपए खर्च हुए जबकि उस दौर में 143 करोड़ कीकमाई इसी तरीके से एमपी शताब्दी एक्सप्रेस 35 करोड़ रुपए ही खर्च हुए आमदा 42 करोड़ रुपए हुआ यानी आप सोचिए कि एक तरफ वह ट्रेन है जो अपने समय के नईटेक्नोलॉजी के साथ शुरू की गई थी शताब्दी एक्सप्रेस हो दुरंतो एक्सप्रेस हो गरीब रत हो आपने इस तरह का तामझाम नहीं देखा होगा इस तरीके से ना तो झंडी दिखाने में खर्चा किया गया लेकिन यह दौर नए तरह का दौर है जहां बुजुर्गों को सुविधाएं भी नहीं दी जाएगी जहां दूसरी ट्रेनों को बंद करके केवल वंदे भारत को समय पर चलाने की कोशिशकरके लोगों की जेबें ढीली की जाएगी और इससे भी बड़ी बात तो यह है कि जो सोशल मीडिया में कहानी चल रही है वह भी कम हैरानी की बात नहीं एक व्यक्ति जो खुद सामने आकर कहता है कि उसने अपने परिवार के साथ वंदे भारत में टिकट बुक किया था वह कंफर्म नहीं हुआ था एक ही पीएनआर नंबर से टिकट बुक किया था उनकी कहानी जरा आप सुन लीजिए देखिए अज भाई बेसिकली मैंने दो टिकटलिया था ठीक है एक दोनों ही मतलब टिकट एक ही पीएनआर नंबर प था मतलब मेरा और एक मेरी फैमिली का यह आईआरसीटीसी क्या किया वेटिंग में टिकट था दोनों थोड़ा देर के बाद मैं रात में जब देखता हूं तो एक टिकट कंफर्म हो जाता है उसके बाद मेरे को लगा क्या कि ना कल चार्ट प्रीपेड होते होते दूसरा टिकट भी कंफर्म हो गया हो जाएगा लेकिन देख रहा हूं क्या कि दूसरा टिकट क्या किया इन लोगों ने वेटिंग में डाल दिया और एक टिकट का कंफर्म कर दिया अब मैं थोड़ा सा आईआरसीटी से ये पूछना चाहता हूं कि कोई भी उसका एडमिन कहीं पर जाता है तो क्या वोइसकी फैमिली और वो दोनों एक टिकट लेता है है और अगर बाय दुबे उसका जो एडमिन है मतलब जो मैनेजमेंट में है उसका टिकट कंफर्म हो जाता है और उसकी वाइफ का टिकट वेटिंग रह जाता है तो क्या वो अपनी वाइफ को छोड़ कर के वहां से वो भाग जाएगा या चला जाएगा मुझे समझ में नहीं आ रहा ये क्या चल रहा है यार मतलब अजीब है एक पीएन आर नंबर से जब दो टिकट लिया गया या तो कैंसिल होगा तो दोनों हो जाएगा भाई दोनों वेटिंग में डाल दो कोई दिक्कत नहीं है अगर या तो ये भी तो नहीं है कि आप बिना टिकट से ट्रेवल करो मतलब किस हिसाब से कोई बंदा उसकी जो फैमिली है वो उसको छोड़ कर के चला जाए येमुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ये लोग का क्या किस तरह से मतलब इसका एल्गोरिथम यूज काम करता है हां अगर यह बोल रहे हैं कि नहीं मेरा एल्गोरिथम में कुछ इशू या तोसॉफ्टवेयर में कुछ तो भाई 11 बजे अगर 10 बजे अगर तत्काल टिकट बनना है ना तो 959 में टिकट नहीं बनता है तो फिर ये किस तरह से इसका वर्क कर रहा है मतलब आप लोग सोचिए गांव कार में जो ऑटो चलता है ना तो ऑटोवाला भी कभी ऐसा कर सकता है कि दो हस्बैंड वाइफ कहीं प जा रहा हो और हस्बैंड को बोल रहा हो कि भाई तू बैठ जा अपनी वाइफ को यहीं पर छोड़ द छोड़ जा मतलब एक ही सीट मेरा ऑटो में बचा हुआ है तो तू एक काम कर तू बैठ जा तेरी वाइफ को यहीं पर छोड़ दे ऐसा कभी साला एक ऑटो वाला नहीं कर रहा है मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि येआईआरसीटीसी का क्या ये नियम है और किस तरह से ओवरऑल मैंने टिकट छोड़ दिया मेरा जो मैंने टिकट में जो खर्चा हुआ था सेकंड एसी का टिकट था वो तो टिकट मेरा गया कुछ नहीं और कोई भी बंदा मेरे को नहीं लग रहा है किकोई भी बंदा इस तरह से कर सकता है कि उसका एक टिकट कंफर्म हो जाए तो वो अपना फैमिली को छोड़ कर के अपने से चला जाए ऐसा तो दुनिया में कोई नहीं हो सकतापता नहीं मैं इस बात को लेकर के मैं मेल भी किया हूं और आगे मैं कंजूमर कोर्ट में भी इस चीज का एप्लीकेशन डालू तो छवि चमकाने के लिए क्या कुछ खेल नहीं खेला जा रहा है किस तरीके से सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है किस तरीके से अनियमित ट्रेनों ने लोगों का जीवन मुश्किलकर दिया है

वीडियो देखें -


https://youtu.be/55MR5E-N79E?si=DbC8FGa2zu906L32

रविवार, 1 मार्च 2026

डिफॉल्टर

डिफॉल्टर  


जब कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने प्रधानमंत्री मोदी को डिफाल्टर कह दिया था तब भाजपाइयों ने जमकर हल्ला मचाया था

यह रिपोर्ट अचानक सामने आ गई तो सोचा एक बार फिर इसे पुनर्प्रकाशित किया जाए…

राजनीतिक दलो में बढ़ती तल्खी के चलते एक दूसरे के खिलाफ अमर्यादित शब्दों की बाढ सी आ गई है और हम इस के शब्दों को लेकर हमेशा चिंता व्यक्त करते रहे हैं आलोचना करते रहे हैं कि राजनीति में इस तरह के शब्दों का कहीं कोई स्थान नहींहोना चाहिए लेकिन यदि सत्ता पक्ष ही आक्रमक होकर विरोधियों के खिलाफ विषवमन करने लगे अमर्यादित  शब्दों का प्रयोग करने लगे तो फिर विपक्ष के नेताओं से किस तरह की उम्मीद की जा सकती है

देश के मंत्री नरेंद्र मोदी ने जितने अमर्यादित शब्दों का उपयोग किया है जिसकी वजह से उनकी छवि बरी तरीके से बिगड़ गई है हालाकि यह छवि हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से ही बिगड़ गई थी और इसकी पुष्टि किसी और नहीं आरएसएस ने अपने मुख पत्र से ही कर दिया था कि इस छवि के भरो से चुनाव जीतना मुश्किल है लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी ठसक है अपनी धमक है इसलिए वे अब भी यह मानते हैं कि उनकी छवि के भरोसे ही चुनाव जीता जा सकता है लेकिन जब चुनावी बांड का नतीजा सामने आया कि किस तरीके सेपैसा वसूलने के लिए हर वो काम किए गए जो अनैतिकता की श्रेणी में आते हैं या सत्ता यदि पैसा लेकर धंधा देने लगे सत्ता यदि पैसा लेकर जहर बेचने वालों को क्लीन देने लगे सत्ता यदि पैसा लेकर सरकारी गवाह बनाने लगे तो फिर ऐसी सत्ता पर सवाल तो उठेंगे ही और उनके मुखिया के खिलाफ विश वमन होगा हालांकि हम फिर कह रहे हैं कि हम इस तरह के अमर्यादित टिप्पणी के बिलकुल भी खिलाफ है क्योंकि जो टिप की गई है वह शब्द है डिफल्टर डिफल्टर आमतौर पर उन को कहा जाता है जो पैसों से दिवालिया हो जाते हैं जो कर्ज लेने के बाद पैसा नहीं पटाते हैं भागे भागे फिरते हैं इस में आपको याद होगा विजय माल मोदी चौसीकितने भ पता नहीं क्या क्या कहा जाता है तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिफल्टर क्यों कहा गया व भी उस व्यक्ति के द्वारा जिसकी राजनीतिक जीवन में वा को लेकर संयम बरतने या उनकी छवि इस तरह की है कि कहा जाता है कि चरण दास महंत इस तरह के शब्दों का प्रयोग कभी नहीं करते हैं वह व्यक्ति यदि डिफाल्टर कह रहा है तोइसकी वजह क्या है हालांकि इसके पहले जब सर फोड़ने की बात कही थी तो वे खुद आकर यह बात बता गए थे कि यह सब छत्तीसगढ़ी में के रूप में या कहावत के रूप में लो के रूप में प्रयोग किया जाता है और भारतीय जनता पार्टी गलत ढंग से इस ले रही है लेकिन डिफाल्टर यि डिफाल्टर का मतलब हिंदी में समझा जाए तो इसके चार अर्थ बताए गए हैं डिशनरी में शब्द कोष में उसम से एक शब्द है दोष दूसरा दिवालिया तीसरा व्यक्ति क्रमी और चौथा चूक करने वाला इन् डिफल्टर कहा जाता है या हिंदी शब्दकोश के शब्द है जैसे ही चरण दस मने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोडिफल्टर कहा तो इसे अो टिप्प बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पत्रकार वार्ता ले ली हालांकि अभी तक किसी भी भाजपाई ने इस स्लोन को अपने सीने से नहीं लगाया कि मैंभी डिफल्टर जिस तरीके से पहले लगाते रहे हैं विपक्षी अमर्यादित शब्दों को लेकर लेकिन आम चलन की भाषा में डिफल्टर किसे कहते हैं यह किसी से छिपा नहीं है या जो बात बात प झूठ बोलता है और वादा करके मुक जाता हैवादे कभी पूरा नहीं करता है उन्हे आमतौर पर बोलचाल की भाषा में छत्तीसगढ़ में तो कम से कम उ डिफाल्टर कहा जाता है इस तरह के लोगों को और कांग्रेस ने यही बात भारतीय जनता पार्टी के सवालों के जवाब में कहा है कांग्रेस ने भी तत्काल इस बयान का पक्ष लेते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री मोदी को डिफाल्टर कहने की वजह ये है किउन्होने जो भी वादा किया है उसे पूरा नहीं किया है चाहे दो करोड़ लोगों को हर साल रोजगार देने की बात हो या लाख रुप यही हर खाते में चले जाने की बात हो महगाई 100 दिन में कम करने की बात हो या फिर गैस सिलेंडर 00 में देने की बात हो कांग्रेस ने तो फेरिस गना दी मोदी के वादा खिलाफ का तो क्या डिफाल्टर इसलिए कहा गया क्या डिफल्टर कहा जा सकता है यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं है कि यह शब्द कहना चाहिए या नहीं कहना चाहिए लेकिन अब यहमहत्त्वपूर्ण हो गया है कि पहले जिस तरीके से मोदी पर हमले होते थे और उसकी प्रतिक्रिया आम लोगों में सामने आती थी उस तरह की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आ रही क्यासचमुच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि लगातार बिगड़ते चली गई है इसलिए अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई भी कुछ भी कह रहे हैं कोई फर्क नहीं पड़ रहा है आम लोगों में कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है और इसकी एक बड़ी वजह चुनावी भांड भी है जिसके तहत पैसा लो धंधा दो का खेल शुरू किया गया जिसके तहत उ दवा कंपनियों से भी पैसे वसूल लिए गए जो नकली थे मापदंड से घटिया स्तर प थे जानी एक तरह से मरीजों के लिए व जहर काकाम कर सकता था ऐसी दवा कंपनियों की भी जांच रोक कर पैसे ले लेने की वजह से अब लोगों में मोदी की छवि बिगड़ चुकी या फिर विरोधियों को कुचलने का जो खेल खेला गया है या ने गांधी परिवार को के खिलाफ लगातारविमन होते देख जनता परेशान है या हैरान है या फिर नाखुश है क्या कहा जाए लेकिन एक बात तो तय है कि यदि सत्ता में सहि ना रहे सत्ता में शालीनता ना रहे तो फिर विरोधियों से किस तरह की उम्मीद की जा सकती है हालांकि हम अब भी कह रहे हैं कि हम किसी भी तरह के अमर्यादित शब्दों केखिलाफ है और इसे एक तरह से हिंसा मानते हैं लेकिन फिर वही बात की यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही अमरद इस शब्दों का प्रयोग करें तो फिर आने वाले दिनों में राजनीति किस तरह से आगे बढ़ेगी लोकतंत्र का क्या होगा अभी से कहना कुछ मुश्किल है 

वीडियो देखें

https://youtu.be/YAc-M4UH3lg?si=ZoF67MVneUQmAFJA