रिश्तों की बलि, करोड़ों का खेल!
भारतमाला मुआवजा घोटाला: जब रसूख और रुपयों की हवस में अपनों के नाम और सिंदूर की मर्यादा भी दांव पर लग गई
जिस देश और प्रदेश में एक आम किसान अपनी ही पुश्तैनी जमीन का जायज मुआवजा पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर अपनी चप्पलें घिस देता है, वहीं रसूखदारों के एक पूरे कुनबे ने कागजों पर जालसाजी का ऐसा शर्मनाक खेल खेला है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। यह सनसनीखेज कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'भारतमाला परियोजना' के तहत दुर्ग और राजनांदगांव के बीच (विशेषकर पाटन तहसील में) हुए भूमि अधिग्रहण मुआवजे की है। इस पूरे महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है, और जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्होंने न केवल कानून बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की पवित्रता को भी तार-तार कर दिया है।
करोड़ों का लालच और रिश्तों का 'बदला हुआ' भूगोल
कहते हैं कि भारतीय समाज में विवाह के सात फेरे, सिंदूर की मर्यादा और पारिवारिक रिश्ते सबसे अनमोल होते हैं। लेकिन जब बात करोड़ों रुपये के सरकारी मुआवजे की आई, तो पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कथित 'संस्कारों' की दुहाई देने वाले एक बड़े रसूखदार परिवार ने लाज-शर्म को ताक पर रख दिया।
मुआवजे का नियम कहता है कि जमीन के जितने टुकड़े होंगे और जितने अलग-अलग खातेदार होंगे, मुआवजा राशि उतनी ही मोटी और अलग-अलग हिस्सों में बढ़कर मिलेगी। बस, इसी कानूनी छिद्र का फायदा उठाने के लिए इस रसूखदार परिवार ने घर की महिलाओं को मोहरा बनाया या वे खुद इस खेल में शामिल हो गईं। एक ही नाम पर जमीन होने से मुआवजा सीमित रहता, इसलिए जमीन के टुकड़े किए गए और कागजों पर पतियों, पिताओं और ससुरों के नाम इस तरह बदले गए मानो आपस में कोई खून का रिश्ता ही न हो।
पैसे की भूख: किसी ने पति का नाम छुपाया, तो किसी ने बदला ससुर
इस पारिवारिक ड्रामे ने रातों-रात पूरे कुनबे को करोड़पति बना दिया। इस घोटाले की जद में पूर्व मंत्री के सगे भतीजे से लेकर बहुएं और भाभियां तक शामिल हैं। ईडी की जांच और राजस्व दस्तावेजों से जो प्रमुख नाम बेनकाब हुए हैं, वे इस प्रकार हैं:
1 रंजीता चंद्राकर (ग्राम कुरूद): इन्होंने मुआवजे की रकम को कई गुना बढ़ाने के लिए सरकारी कागजों में पति या पिता के नाम की जगह अपने 'ससुर' का नाम दर्ज करा दिया।
2 वाणी श्री चंद्राकर: इन्होंने तो हद ही कर दी; करोड़ों के फेर में शादी के पवित्र बंधन और पति के नाम को ही कागजों से गायब कर दिया और उसकी जगह अपने स्वर्गीय पिता का नाम दर्ज करा दिया।
3 अन्य संदेहास्पद नाम: इस पूरे खेल में पूर्व मंत्री के भतीजे सौरभ चंद्राकर, भाभी अरुणा चंद्राकर सहित परिवार के अन्य सदस्य—भरतलाल, मनोहर चंद्राकर, सुषमा चंद्राकर, विशाखा चंद्राकर, योगेश चंद्राकर, रेखा चंद्राकर और मीना चंद्राकर की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
यह छत्तीसगढ़ की उस पारिवारिक पृष्ठभूमि पर एक बड़ा तमाचा है जहां रिश्तों को रुपयों से ऊपर माना जाता है। सवाल यह उठता है कि क्या इन महिलाओं ने केवल पुरुषों के दबाव में आकर अपने सिंदूर और पहचान का सौदा किया, या फिर पैसे की हवस में वे खुद इस धोखाधड़ी की सूत्रधार थीं?
अंधा तंत्र, गदगद अफसरशाही: पटवारी से लेकर एसडीएम तक मौन
यह घोटाला सिर्फ एक रसूखदार परिवार की चालाकी का नतीजा नहीं है। यह मुमकिन ही नहीं था कि इतना बड़ा पारिवारिक खेल बिना प्रशासनिक मिलीभगत के खेला जा सके। जब कागजों पर ससुर को पिता और पति को अजनबी बनाया जा रहा था, तब इलाके के पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और लैंड एक्विजिशन (भूमि अधिग्रहण) ऑफिसर अपनी आंखें मूंदे बैठे थे।
आशंका जताई जा रही है कि या तो इन अधिकारियों के टेबल के नीचे नोटों की मोटी गड्डियां पहुंचाई गईं या फिर पूर्व मंत्री के रसूख और धौंस के आगे पूरा तंत्र नतमस्तक हो गया। राजनांदगांव और पाटन क्षेत्र से ऐसी भी खबरें हैं कि जो जमीनें एक्सप्रेसवे के मुख्य निर्माण से 100 मीटर से लेकर 1 किलोमीटर तक दूर थीं, उनका भी नियम विरुद्ध जाकर करोड़ों का मुआवजा बांट दिया गया।
आरएसएस के 'संस्कार' और दावों पर बड़ा सवाल
यह मामला इसलिए भी राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है क्योंकि आरोपी कुनबा उस पार्टी और विचारधारा से ताल्लुक रखता है जो खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्कारों से पोषित बताती है। जो संगठन देश में सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक ताने-बाने को मजबूत करने का दावा करता है, उसी के एक पूर्व कद्दावर मंत्री का परिवार पैसों के लिए अपनी पहचान बदलने पर आमादा हो गया।
ED की एंट्री से हड़कंप, चेहरों से नकाब उतरना तय
भारतमाला परियोजना के इस 'मुआवजा घोटाले' की परतें अब तेजी से उखड़ रही हैं। ईडी की एंट्री के बाद से ही दोषी रसूखदारों और भ्रष्ट अधिकारियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। शुरुआती जांच ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि यह देश के विकास मॉडल की आड़ में रसूखदारों द्वारा अपने 'कुनबे के विकास' का एक घृणित और सुनियोजित प्रयास था।
आने वाले दिनों में ईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। देखना होगा कि कानून इन 'रिश्तों के सौदागरों' को उनके किए की क्या सजा देता है।







