रविवार, 12 अप्रैल 2026

आशा की ऊँचाई और अनूठा सच

 आशा की ऊँचाई और अनूठा सच 


अपनी अनूठी आवाज़ से हिंदी फ़िल्मों को नई उड़ान देने वाली आशा भोसले ने ९२ साल की उम्र में विदा हो गई । उनकी बहन लता मंगेशकर की भी इतनी ही उम्र रही । ८ सितंबर १९३३ को उनका जन्म दिवस अब जयंती के रूप में मनाया जाएगा ।


1. "बहुमुखी प्रतिभा की रानी" (The Queen of Versatility)

जहाँ लता मंगदीकर जी को उनकी 'शुद्धता' और 'गंभीरता' के लिए जाना जाता था, वहीं आशा जी ने अपनी आवाज से हर तरह के प्रयोग किए।

• स्टोरी आइडिया: 'पिया तू अब तो आजा' के कैबरे से लेकर 'दिल चीज क्या है' की गजल तक और 'दम मारो दम' के हिप्पी कल्चर से लेकर 'दो लफ्जों की है दिल की कहानी' के रोमांस तक का सफर। उन्होंने साबित किया कि एक गायिका अपनी आवाज के जरिए अभिनय भी कर सकती है।

2. "साए से निकलकर अपनी पहचान बनाना"

लता मंगेशकर जी जैसी दिग्गज गायिका की बहन होने के नाते, शुरुआत में उनकी तुलना हमेशा लता जी से की गई।

• स्टोरी आइडिया: कैसे उन्होंने अपनी बड़ी बहन के स्टाइल को कॉपी करने के बजाय अपनी एक अलग, 'बोल्ड' और 'एनर्जेटिक' आवाज विकसित की। यह स्टोरी किसी के भी 'सेल्फ-मेड' बनने की प्रेरणा दे सकती है।

3. "पंचम और आशा: एक संगीत क्रांति"

आर.डी. बर्मन (पंचम दा) और आशा भोसले की जोड़ी ने भारतीय संगीत का चेहरा बदल दिया।

• स्टोरी आइडिया: वेस्टर्न बीट्स, रॉक-एंड-रोल और भारतीय शास्त्रीय संगीत का मेल। कैसे इन दोनों ने मिलकर 70 और 80 के दशक के युवाओं को एक नया साउंड दिया।

4. "उम्र को मात देने वाली आवाज"

आशा जी ने 10 साल की उम्र से गाना शुरू किया और 80-90 की उम्र तक उनकी आवाज में वही खनक बनी रही।

• स्टोरी आइडिया: 'रंगीला रे' (1995) के समय उनकी उम्र और उनके गायन की ऊर्जा का विश्लेषण। कैसे उन्होंने हर दशक की नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों (जैसे उर्मिला मातोंडकर या ऐश्वर्या राय) के लिए अपनी आवाज को ढाल लिया।

5. "संघर्ष और वापसी"

उनके निजी जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन संगीत ही उनकी ताकत बना।

79 साल की उम्र में बतौर मुख्य अभिनेत्री 'डेब्यू' (फिल्म: माई)

आशा जी ने साल 2013 में 'माई' (Mai) नाम की फिल्म से बॉलीवुड में बतौर लीड एक्ट्रेस कदम रखा।

• किरदार: उन्होंने एक ऐसी मां का किरदार निभाया था जो 'अल्जाइमर' (भूलने की बीमारी) से जूझ रही है और जिसे उसके बच्चे अकेला छोड़ देते हैं।

• खास बात: 79 साल की उम्र में किसी कलाकार का लीड रोल में डेब्यू करना अपने आप में एक रिकॉर्ड जैसा है। क्रिटिक्स ने उनके अभिनय की काफी तारीफ की थी और उन्होंने साबित किया कि एक कलाकार के लिए उम्र सिर्फ एक नंबर है।

बचपन में अभिनय की शुरुआत

आशा जी का अभिनय से रिश्ता काफी पुराना है। पिता दीनानाथ मंगेशकर जी के निधन के बाद, परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए आशा जी और लता जी ने कुछ फिल्मों में बाल कलाकार (Child Artist) के रूप में भी काम किया था।

• उन्होंने 'माझा बाल' (1943) जैसी कुछ मराठी और हिंदी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाई थीं।

3. संगीत और अभिनय का तालमेल

फिल्म 'माई' के दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके लिए अभिनय करना ज्यादा मुश्किल नहीं था, क्योंकि एक गायक जब गाना गाता है, तो वह अपनी आवाज़ के जरिए उस भावना को 'एक्ट' ही कर रहा होता है।


आशा भोसले जी का निजी जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम उतार-चढ़ाव वाला नहीं रहा है। उनके प्रेम और विवाह से जुड़े किस्से उनके व्यक्तित्व के विद्रोही और साहसी पक्ष को दर्शाते हैं।

16 साल की उम्र में बगावत और पहली शादी

आशा जी का पहला बड़ा प्रेम संबंध काफी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने समाज और अपने परिवार (मंगेशकर परिवार) की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की थी।

• किस्सा: मात्र 16 साल की उम्र में उन्हें गणपतराव भोसले से प्यार हो गया, जो उस समय लता मंगेशकर के पर्सनल सेक्रेटरी थे। परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था, लेकिन आशा जी ने घर छोड़कर उनसे शादी कर ली।

• नतीजा: यह रिश्ता काफी दुखद रहा और कुछ सालों बाद वे अपने बच्चों के साथ वापस अपने मायके लौट आईं। उनके नाम के साथ लगा 'भोसले' सरनेम इसी शादी की पहचान है।

2. ओ.पी. नैय्यर और संगीत की केमिस्ट्री

50 और 60 के दशक में संगीत निर्देशक ओ.पी. नैय्यर और आशा भोसले की जोड़ी ने संगीत की दुनिया में तहलका मचा दिया था।

• किस्सा: कहा जाता है कि उनके बीच पेशेवर रिश्तों से बढ़कर भी एक गहरा लगाव था। ओ.पी. नैय्यर ने ही आशा जी की गायकी को वह 'मदहोश' करने वाला अंदाज दिया जो उनकी पहचान बना।

• ट्विस्ट: सालों तक साथ काम करने के बाद, एक वक्त ऐसा आया जब दोनों के बीच अनबन हुई और उन्होंने फिर कभी साथ काम नहीं किया। यह बॉलीवुड के सबसे चर्चित 'प्रोफेशनल ब्रेकअप्स' में से एक माना जाता है।

आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के साथ 'म्यूजिकल' लव स्टोरी

आशा जी के जीवन का सबसे खूबसूरत और यादगार हिस्सा आर.डी. बर्मन के साथ उनका रिश्ता रहा।

• किस्सा: पंचम दा, आशा जी से उम्र में 6 साल छोटे थे और उनके काम के बहुत बड़े प्रशंसक थे। दोनों ही अपने पिछले रिश्तों से आहत थे। संगीत के प्रति उनकी साझा दीवानगी ने उन्हें करीब लाया।

• शादी: 1980 में दोनों ने शादी कर ली। उनकी जोड़ी ने 'दम मारो दम' और 'पिया तू अब तो आजा' जैसे सदाबहार गाने दिए। पंचम दा के निधन तक वे साथ रहे और आज भी आशा जी उन्हें अक्सर याद करती हैं।

यह दिखाता है कि कैसे उन्होंने अपने निजी जीवन के संघर्षों को कभी अपनी कला के आड़े नहीं आने दिया।



शनिवार, 11 अप्रैल 2026

एफ़आईआर दर्ज कराने महिला विधायक को थाने में घंटों बैठना पड़ा

 

जब एफ़आईआर दर्ज कराने महिला विधायक को थाने में घंटों बैठना पड़ा

छत्तीसगढ़ में बदहाल हो चुकी कानून व्यवस्था को लेकर अभी कांग्रेस के प्रदर्शन को लोग भूल भी नहीं पाए थे कि बालोद की विधायक संगीता सिन्हा को थाने में जाकर एफआईआर करानी पड़ी आप कल्पना कर सकते हैं कि विधायक को यदि धरना देना पड़े एक एफआईआर के लिए तो छत्तीसगढ़ में थानों की क्या स्थिति है आसानी से समझा जा सकता है भले ही गृह मंत्री विजय शर्मा कितना भी दावा कर ले आंकड़े कितनी भी पेश कर ले कि कानून व्यवस्था अच्छी है कांग्रेस सरकार से लेकिन हकीकत तो यह है कि आज भी एफआईआर करने के नाम पर थाने में लोगों को परेशान किया जाता है घुमाया जाता है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण कल तब देखने को मिला जब एक महिला के साथ बदतमीजी करने का जो मामला था उस पर पुलिस एफआईआर करने को तैयार नहीं थी क्यों आखिर पुलिस को एफआईआर करने में क्या दिक्कत थी और 12 जुलाई की इस घटना से वह महिला इतनी परेशान थी कि उसने अपनी व्यथा विधायक से कही संगीता सिन्हा से उसके बाद संगीता सिन्हा थाना पहुंचे और थाने में भी विधायक के जाने के बाद एफआईआर नहीं की गई उन्हें धरने पर बैठना पड़ा और सुबह से शाम होते होते जब उन्होंने आईजी से लेकर तमाम सीएसपी भी वहां पहुंच गई थी चित्रा वर्मा तमाम लोगों को उच्चाधिकारियों को फोन करने के बाद शाम को एफआईआर दर्ज की गई महिला से छेड़छाड़ करने वाला कोई और नहीं वहां की एक पार्षद है उसके दामाद है अनुराग जैन उनके खिलाफ एफआईआर कर दी गई है लेकिन आप सोच सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और थानों की क्या स्थिति बन रही है याद कीजिए आपकी किस तरीके से गौ रक्षकों ने गुंडागर्दी करते हुए हमला किया था महानदी पूल पर जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी इस मामले को पुलिस ने मावली मानने से इंकार करते हुए अपने जो चालान पेश किए हैं आरोप पत्र जो कोर्ट में दाखिल किया है उसमें कह दिया है कि गौ रक्षकों की डर की वजह से वे जो तीनों लोग थे वो नदी में कूद गए और चट्टान में गिरने की वजह से उनकी मौत हो गई खुलेआम किस तरीके से चाकूबाजी की घटना हो रही है किस तरीके से हत्या की घटना अचानक बढ़ गई है चोरी का तो और भी बुरा हाल है यदि आप दो चार घंटों के लिए अपने मकान छोड़कर कहीं जाते हैं तो चोरी हो जाती है इस तरह की स्थिति कई कॉलोनियों में सुनाई देने लगी है खुलेआम अपराध हो रहे हैं ऐसी परिस्थिति में यदि विधायक को ही थाना जाना पड़े धरना देना पड़े एक एफआईआर के लिए तब आप कल्पना कर सकते हैं कि डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में किस तरह से चल रही और गृह मंत्री अपना मंत्रालय किस तरीके से चला रहे हैं हालांकि अभी सरकार परेशान है सरकार परेशान इसलिए है क्योंकि वह दो मंत्रियों का विस्तार नहीं कर पाई दो मंत्री पद खाली पड़े हैं निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति की सूची बन गई है उसे भी मोदी शाह शायद पास नहीं कर रहे हैं आगे नहीं बढ़ा रहे इसलिए नियुक्ति नहीं हो रही और नेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है क्योंकि सरकार बने यदि आठ महीने हो गए हैं और मंत्रिमंडल का विस्तार करने के लिए यह निगम मंडल आयोग की नियुक्ति के लिए भी यदि मुख्यमंत्री को बार-बार दिल्ली का दरवाजा खटखटाना पड़े तब कांग्रेस को क्यों मौका नहीं लग जाता कि यह रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार है क्या सिर्फ महतारी वंदन योजना को लागू करके छत्तीसगढ़ में वोटों की राजनीति संभव है क्योंकि जिस तरीके से सरकार चल रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और विधानसभा में असंतोष साफ तौर पर देखने को मिला जब सत्ता पक्ष के ही सीनियर विधायकों ने जो डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल में मंत्री रहे वे लोग ही विष्णुदेव साय सरकार को सवालों की झड़ी लगाकर खेर रहे थे और मंत्री असहाय महसूस कर रहे थे वह तो डॉक्टर रमन सिंह जैसे स्पीकर है इसलिए मामले को संभाल ले रहे थे लेकिन कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ की जो सरकार है उसका परसेप्शन जो विधानसभा में बना है वह बेहद ही हैरान कर देने वाला है तब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था को लेकर यह सरकार क्या निर्णय लेती है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/Wbva0IyrPVs?si=pHy1pd4luVl-b9V1

गुरुवार, 9 अप्रैल 2026

स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं

स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं

 एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड योजना ला रहे हैं और आम लोगों को तकलीफ ना हो इसलिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए काम करने का दावा किया जा रहा है लेकिन दूसरी छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार की दीमक का भेट चढ़ चुका है हर खरीदी में भ्रष्टाचार डॉक्टर रमन  सिंह के जमाने में याद कीजिए डॉपलर से लेकर किस तरीके से मशीनों की खरीदी में जबरदस्त घोटाला हुआ था और अब भी लगातार घोटाला हो रहा है तो क्या इसके पीछे कोई माफिया का खेल चल रहा है किस तरीके से दवा कंपनी सप्लायर और विभागीय तंत्र इस पूरे खेल में शामिल होकर क्या सरकार को तो चुना लगा ही रहे हैं लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं पिछले दिनों विधानसभा में यह मामला गुंजा जिसमें दवाइयां मशीन रिएजेंट और ट्यूब खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का मामला उठा खूब हंगामा तीखी बहस भी हुई है मंत्री और सदस्यों के बीच अमर अग्रवाल बिलासपुर के विधायक हैं कभी रमन सरकार में वित्त मंत्री भी रहे उन्होंने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल को बुरी तरीके से खेल दिया और श्याम बिहारी जयसवाल ने इस मामले की जांच कराने की घोषणा तो कर दी है ध्यान आकर्षण सूचना के जरिए इस मामले को सबसे पहले बल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने उठाया और उन्होंने बताया कि किस तरीके से बिना बिना डिमांड के ही करोड़ों रुपए की खरीदी की गई जिसमें रिएजेंट दवाएं उपकन स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि जिन अस्पतालों को जरूरत नहीं थी जिसकी मांग नहीं थी वहां भी जबरदस्ती यह ग्रिया भेजी गई जहां मशीन नहीं है वहां रिएजेंट की सप्लाई हो रही है ऐसी दवाओं की आपूर्ति कर दी गई है जिसका एक्सपायरी सितंबर और नवंबर 2024 में होना है सीएजी की रिपोर्ट में भी इसे इस इसे लेकर अनियमितता उजागर हो चुकी है ी में जो दवाई की खरीदी की गई है मशीन की खरीदी की गई है रिजेंट की खरीदी की गई है ट्यूब की खरीदी की गई है और उसमें जिस प्रकार से रेट तय किए हैं बाजार में उससे सस्ते में उपलब्ध है और उससे ज्यादा रेट में जो खरीदी की गई है इसको लेकर के मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है और इसमें मुख्य रूप से जो मोक्षित मेडिकेयर साथ ही ना इंडिया के द्वारा जो खरीदी की गई है इसमें डी ईडीटी ए ट्यूब साथ ही इसमें डी डाइमर फुली ऑटो एनालाइजर मशीन और उसके साथ में रिजेंट दवाइयां यह जो खरीदी की गई है निश्चित रूप से इसमें बड़ा करप्शन का मामला है भ्रष्टाचार का मामला है और यह महालेखा कार के उसमें भी आया है जिसका निर्णय अभी तक नहीं हुआ है यह कंपनी के द्वारा कर सीज के द्वारा कराई नहीं गई है साथ ही किसी प्र इसमें जांच जो होनी चाहिए हुई नहीं आज इस मामले को लेकर के उठाया गया और इसमें मंत्री जी के द्वारा सदन में घोषणा की गई है एसीएस के अध्यक्षता में दो आईएस और मिलाकर के तीन लोग की कमेटी में इसकी जांच की जाएगी और उसकी रिपोर्ट तीन महीने के अंदर जांच कमेटी के द्वारा प्रस्तुत की जाएगी जहां पर डिमांड नहीं है जहां पर मांग नहीं है वहां दवाई की सप्लाई जहां पर व मशीन नहीं है वहां पर रिजेंट के आपको जो सप्लाई करना और इस प्रकार से जो एक बड़े स्तर पर जो बिना डिमांड के जो उसमें सप्लाई की गई है और जिस प्रकार से उसमें मिली भगत के द्वारा जो टेंडर लगा कर के ठेकेदार के द्वारा जो उसमें डिमांड की गई तो एक बड़ा मामला इससे उजागर होगा और प्रदेश में प्रकार से जनता के बीच में जो यह लगातार मामले आते रहे हैं इस मामले पर जांच होने के बाद में उनके ऊपर शक्ति से शक्ति कारवाई हो इसके लिए हमने मांग किया था मंत्री जी ने जांच के आदेश दिए हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से अपनी जेब भरने के लिए स्वास्थ जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग में भी भ्रष्टाचार का दीमक पहुंच गया है आम लोगों के जीवन के साथ किस तरीके से खिलवाड़ किया जा रहा है एक्सपायरी डेट की दवाएं जो जल्दी एक्सपायरी होने वाली है ऐसी दवाओं की सप्लाई करके किस तरीके का खेल हो रहा है !

रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में

रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में

 केंद्र के सरकार द्वारा यानी मोदी सत्ता के द्वारा लगातार 36 गढ़ की हो रही उपेक्षा की खबरों के बीच एक और चौकाने वाली खबर आई है महत्वकांक्षी योजना 45 हजार करोड़ की इस योजना को भी मोदी सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है हालांकि यह योजना नितिन गडकरी के विभाग की है सड़क निर्माण से संबंधित है लेकिन अचानक ही जिस तरीके से दैनिक प्रगति रिपोर्ट ही बंद करने की बात कर दी गई है पत्र लिख दिया गया है बकायदा उसके बाद इस महत्वकांक्षी योजना जो छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होता खासकर यहां से बड़ी संख्या में लोग हैदराबाद जाते हैं इलाज के लिए और इस योजना के बंद होने से किस तरह का नुकसान होगा इसकी भी कोई कल्पना नहीं कर सकता 4500 की यह योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर राजनांदगांव होते हुए यह योज यह सड़क हैदराबाद तक जाना था महत्त्वपूर्ण योजना लेकिन कहा जा रहा है कि इस योजना में जो 45 हज करोड़ रुपए लगने थे शायद उसे बचाया गया है क्योंकि बिहार और आंध्र प्रदेश को इस बार बजट में बड़ी राशि दी गई है हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव होने हैं उ से लेकर भी बजट में लंबे चौड़े प्रावधान किए गए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ को क्या मिल रहा है यह सबसे बड़ा सवाल है डबल इंजन की सरकार है उसके बाद भी लगातार राज्य बनने के बाद लगातार 10 सीटें देने वाली भारतीय जनता पार्टी को यदि कैबिनेट मिनिस्टर के लायक भी कोई नहीं लग रहा है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठे सिर्फ एक राज्य मंत्री मिला है तो खन साहू के रूप में लेकिन अब जो खबरें आ रही है वह बेहद ही चौकाने वाली खबर इसलिए है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ को बहुत बड़ा फायदा होने वाला था रायपुर राजनाथ गांव गढ़ चिरौरी गोमी परी आदिलाबाद रामा करीम नगर होते हुए यह सड़क हैदराबाद को जोड़ती थी जिसमें छत्तीसगढ़ में 101 किलोमीटर सड़क बनना था तो महाराष्ट्र में 70 किलोमीटर और बचे 388 किलोमीटर सड़क आंध्र प्रदेश में है और इसे अचानक क्यों ठंडे वस्त डाल दिया गया है इसे लेकर अभी तक सरकारी स्तर पर कोई भी जवाब नहीं आया है कहा जाता है कि इस सड़क मार्ग में वन भी पढ़ते हैं मोहला मानपुर और गढ़ चलो गढ़ चिरौली का क्षेत्र आता है जहां अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया था हालांकि दिक्कत थी अधिग्रहण में क्योंकि वन भूमि को अधिग्रहण करने का जो एनजीटी जो मापदंड है उसकी वजह से कुछ दिक्कत थी लेकिन लगातार दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाए जा रहे थे और कल ही अचानक दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाने का काम रोक देने का पत्र भी जारी कर दिया गया डीपीआर बंद करने के इस पत्र के बाद हड़कंप मचा हुआ है जो इस परियोजना में लगे हुए थे इस योजना में लगे हुए थे सरकारी अधिकारी बकायदा सर्वे हो रहे थे कि किस तरीके से सड़क बन छत्तीसगढ़ में जो 101 किलोमीटर सड़क बनना है उसके रास्ते क्या होंगे यह सब भारत माला प्रोजेक्ट के तहत हो रहा था तब सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कब तक होते रहेगी और अब जब इस परियोजना को साढे हजार करोड़ के इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है तो इसकी शुरुआत अब कब होगी !

बुधवार, 8 अप्रैल 2026

जल जीवन मिशन के घपलों पर क्यों हो रही लीपा पोती की कोशिश…

 

जल जीवन मिशन के घपलों पर क्यों हो रही लीपा पोती की कोशिश…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना हर घर में जल पहुंचाने की पीने का पानी पहुंचाने और इस योजना का बंटाधार कोई और नहीं छत्तीसगढ़ में हो रहा है जहां डबल इंजन की सरकार है विष्णु देव साय की सरकार है।

सरकारी तंत्र जनप्रतिनिधि और ठेकेदारों के मिली भगत से जिस तरीके से जल जीवन मिशन का यहां कबाड़ा हो रहा है लोगों को स्वक्ष पीने का पानी नहीं मिल रहा है वह हैरान कर देने वाला है लगातार सरकार की तरफ से कार्रवाई की बात तो की जा रही है लेकिन काम अपूर्ण होने के बाद भी यदि पूर्ण लिखकर ठेकेदारों को पैसा दिया गया है तो फिर यह पैसा क्या अधिकारियों से वसूला जाएगा या ठेकेदारों से 

सरकार विधानसभा में उठे सवालों से बचने की कोशिश करती है वह सही जवाब देने की बजाय इधर उधर की बात कर रही है तो क्या इस पूरे खेल में मंत्री और ठेकेदारों के बीच गठजोड़ हो गया है क्योंकि पिछली सरकार में यानी भूपेश बघेल की सरकार में तो इस योजना में काम लेने वाले ठेकेदारों के द्वारा सीधे बंगले में पैसा पहुंचाने का आरोप लगते रहा बजट इतना बड़ा है कि इसे लेकर तब के तत्कालीन पीएचई मंत्री और मुख्यमंत्री के बीच भी ठन गई थी तो क्या इस बार जब सरकार बदल गई और डबल इंजन की सरकार है वह भी इस योजना में हो रहे गड़बड़ घोटाले पर कारवाही करने की बजाय कारवाही के नाम पर केवल खाना पूर्ति कर रही है और ठेकेदारों से लेकर इस योजना में लगे इंजीनियरों के साथ मिलकर कोई नया खेल खेल रही है क्या कुछ हो रहा है हर जिले से कुछ ना कुछ गड़बड़ी की खबरें आ रही है और कहा तो यहां तक जा रहा था कि यह मामला ईडी के पास भी जाने वाला है लेकिन सरकार बदलने के बाद यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया और विधानसभा में क्या कुछ हो रहा है आप खुद देखिए केंद्र सरकार की महती योजना की नल जल के द्वारा स्वच्छ पेय जल की व्यवस्था उपलब्ध कराना और समय अवधि लगभग पूर्णता की ओर है लेकिन जिस प्रकार से अफरा तफरी इस विभाग में हुआ है और जिस प्रकार से करप्शन का भ्रष्टाचार का मामला आया है आज पूरे प्रदेश में यदि आप उसकी समीक्षा करा देंगे एक बार कि इसमें कितने गांव में अभी तक पानी पहुंचा है कितने चालू है कितने लोगों को पानी मिल रहा है वास्तविक में पूर्ववर्ती सरकार के द्वारा इसको भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया और आज छत्तीसगढ़ के जनता उसको भुगत रही है माननीय अध्यक्ष महोदय मैं मंत्री जी से उप मुख्यमंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जब इन पैनल किया गया ठेकेदारों को और इन पैनल करने के बाद में उनके साथ में जो अनुबंध इलेक्ट्रो क्लोनी रेटर यह जो खरीदने के लिए जो अनुबंध किया गया तो क्या उसमें किसी फर्म या संस्था का नाम पहले उसमें निर्धारित किया गया था कि कहां से उसकी खरीदी होनी चाहिए उसकी रेट क्या होनी चाहिए उसका मार्का क्या होनी चाहिए और क्या उसमें बाद में तब्दीली होते चली गई य पहले मैं आपसे जानना हूँ मंत्री अरुण साव ने इस पर जवाब देते हुए कहा लगातार हमारी सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी के सपनों के अनुरूप जल जीवन मिशन का काम हो लोगों के घर तक शुद्ध पे जल पहुंचे इसके लिए लगातार हम काम कर रहे हैं और जहां पर भी अनियमितता  और गड़बड़ी मिल रही है उस पर कार्यवाही कर रहे हैं अभी-अभी छह एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड किया है चार को निलंबित किया है कुछ जो ठेकेदार जिनके काम में बहुत विलंब हुआ है उन पर भी कार्यवाही प्रस्तावित है और विभाग अपने कामों को दुरुस्त करने के लिए लगातार लगा हुआ है विस्तृत जवाब आ गया माननीय अध्यक्ष महोदय कोई शंका बाकी है हां बहुत बाकी है अरे प्रश्न लगने के बाद में प्रश्न लगने के बाद में छह को अभी आपने सस्पेंड किया उसके पहले तीन को आपने सस्पेंड किया था नौ तो हो गया है और इसके हां निलंबित मतलब सस्पेंड किया था टर्मिनेट तो मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि यह जो खरीदने के लिए इलेक्ट्रो क्लो रेटर जो अनुबंध किया गया और जो बार-बार उसमें बदली की गई इसको आपने स्वीकार किया है पहले आईएसआई मार् का का उन्होंने कहा कि आप खरीद लीजिए खरीदने के बाद में लगा दिए लगाने के बाद में छह लोगों को आपने उसमें सूचीबद्ध किया गया है जब आपने सूचीबद्ध किया और सूचीबद्ध करने के बाद में फिर उसके हिसाब से खरीदी हुई तो बाद में इसको निरस्त क्यों करना पड़ा है तो बाद में निरस्त करना पड़ा इसका मतलब यह है कि अधिकारी के क्या कंट्रोल में नहीं थे या अधिकारी जानबूझ कर के इसको उलझाना चाह रहे थे और उलझाना चाह रहे थे तो ऐसे अधिकारी के विरुद्ध में खिलाफ में आप क्या कारवाही करेंगे माननीय अध्यक्ष महोदय जैसे मैंने बताया कि जल जीवन मिशन का काम जो भारत सरकार की गाइडलाइन है उसके आधार पर होता है क्लोरिनेटर के लिए एसओ आर में स्पेसिफिकेशन दिया हुआ है और उस स्पेसिफिकेशन के अनुरूप जो लगाए गए क्लोरिनेटर है वह नहीं पाए गए और इसलिए उनका इंपैनलमेंट निरस्त किया गया नया इंपैनलमेंट किया गया है और इस पूरी योजना में खरीदी जो सामाग्री की है वह ठेकेदार के माध्यम से होता है हमारी जो एजेंसिया है वो जांच कर है और उसके आधार पर यह कार्यवाही होती है मैं अभी भी बोल रहा हूं कि जहां पर भी गड़बड़ी पाई जाएगी कठोर कार्यवाही होगी कठोर कार्यवाही तब करेंगे जब जांच होगी आपने कंपनी ने आपने निर्धारित किया एजेंसी को यह चार जगह से आप खरीदी करेंगे आपने रेट तय कर दिया तय करने के बाद में आखिर बदलना क्यों पड़ा बात तो यही है ना और जब बदलना पड़ा है तो उसमें जांच की बात आ रही है उसकी जांच क्यों नहीं कराना चाह रहे हैं मैंने वही स्पष्ट रूप से कहा है कि जांच के बाद जब पाई गई तो एसओ आर में जो मापदंड दिए गए हैं उस मापदंड के अनुरूप वो क्लोरिनेटर नहीं थे इसलिए उनका इंपैनलमेंट निरस्त किया गया है और अब सुनिश्चित करेंगे कि जो एसओ आर का मापदंड है उसके अनुरूप क्लोरिनेटर लगे चलिए आखरी प्रश्न माननीय अध्यक्ष महोदय आखरी प्रश्न दो तीन खंड में है वो मैं ब का पूछ र बहुत लंबा नहीं खींचना आदरणीय अध्यक्ष महोदय जी माननीय अध्यक्ष महोदय एक है पूरक प्रश्न ब में जो दिया है इन कंपनियो संस्थाओं को 1972 प 98 लाख राशि का कार्य मिशन अंतर्गत दिया गया था और 809 प8 से लाख राशि का भुगतान किया गया और भुगतान करने के बाद में आपने उसमें से 79 को आपने रिजेक्ट कर दिया तो जो रिजेक्ट किया और यह जो राशि दी गई है और राशि देने के बाद में आज उसकी अतन क्या स्थिति है कि उन लोगों से जो राशि दी गई है उस राशि की आप वसूली किए हैं उनके ऊपर में आप कोई एफआईआर कराए हैं उनके खिलाफ में अपराध पंजीव किए हैं या उसमें क्या करने वाले हैं इसको थोड़ा सा स्पष्ट करें आप माननीय अध्यक्ष महोदय जैसे मैंने बताया कि सामाग्री का क्रय विभाग से सीधे भुगतान नहीं होता है जल जीवन मिशन से भुगतान नहीं होता है सामाग्री का भुगतान ठेकेदार करता है हमने इंपैनलमेंट निरस्त किया है और ठेकेदार को यह सुनिश्चित करना है कि एसओ आर का जो मापदंड है उसके अनुरूप जो भी सामग्री लगना है वह लगे चलिए खत्म करिए माननीय अध्यक्ष महोदय यदि ठेकेदार की बात आ रही है मैं अपने विधानसभा में कोई स्पेसिफिक प्रश्न कर लीजिए दो बलक है बस विधानसभा पूछ लो और दो नहीं दो ब्लॉक में मैं उसका पूरा जो समीक्षा किया सरपंच भी उपस्थित थे सचिव भी थे जो गांव में जानकारी दे रहे थे और आपके अधिकारी भी थे केवल 10 पर जगह में सप्लाई आधा अधूरा शुरू हुआ है 90 जगह में सप्लाई शुरू नहीं हुआ है इसको अधिकारी ने स्वीकार किया है लेकिन ठेकेदार के खिलाफ में कोई कार्रवाई अभी तक आप नहीं कर पाए इसमें आप ठेकेदार को ला रहे हैं कि ठेकेदार उसमें मापदंड के अनुसार से जो है अरे आपके अधिकारी ने उसको जो भुगतान किया ठेकेदार ने उसको भुगतान नहीं किया है और अधिकारी ने जब भुगतान किया है और उसके बाद में आपने उसको निरस्त किया तो पैसा जो उनके पास में है उसकी वसूली विभाग करेगी कि नहीं करेगी और यदि नहीं कर रहे हैं तो इसका यह मतलब है कि आपके अधिकारी के मिली भगत है और नहीं तो उनके खिलाफ में शक्ति से कार्रवाई होनी चाहिए यह कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है यह कारण आप स्पष्ट करें ना माननीय अध्यक्ष महोदय जैसे मैंने कहा कि जो सामाग्री सप्लाई होती है जो इक्विपमेंट लगते हैं वह ठेकेदार और निर्माता इकाई जो पंजीकृत है उससे वह खरीदते हैं और जो माननीय सदस्य ने अपने क्षेत्र की बात कही कि अनेक स्थानों पर पानी नहीं आ रहा है हम उसकी जांच भी करने वाले हैं और जहां पर पानी नहीं आ रही है उसकी क्या दिक्कत है क्यों जल नहीं आ रहा है नलों में यह हमारे ध्यान में है और इसके लिए हम पूरा शक्ति से काम कर रहे हैं चलिए आपके पूरे विधानसभा की जांच करा लेंगे आदरणीय अध्यक्ष म जी क दिया आप लिख के दे पूरी जांच हो जाएगी मैं तो केवल मंत्री जी से इतना आग्रह करना चाहता हूं बोल दिया कि बारबार जो गड़बड़ियां आई है वो आप उसको स्वीकार कर रहे हैं कर लिए कर कर ब कमेटी बना कर उसकी जांच करा दीजिए यह बड़ा मामला है प्रदेश का मामला है विधान मा रु का मामला है तो करोड़ों रुपया का मामला है इसमें आप कोई कमेटी बना करके उसकी जांच करा दीजिए चलिए आदरणीय अध्यक्ष महोदय जी मैंने भी जल जीवन मिशन में जानकारी चाही थी और उसका आगे है जानकारी अध्यक्ष महोदय जी मेरे संज्ञान में जो आया है इन्होंने दिया है मंत्री जी ने तो इसमें अध्यक्ष महोदय जी कई कार्य ऐसे हैं जो अभी अपूर्ण है कहीं टेस्टिंग होकर छोड़ दिया गया है कहीं पर कार्य चालू ही नहीं हुआ है और यहां पर शुरू से लेकर नीचे तक अध्यक्ष महोदय पूरा पूर्ण लिखाया हुआ है अकलवारा मेरा गांव है अध्यक्ष मद जी गुरुर ब्लक में अकलवारा में अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ और इसमें लिखा हुआ है पूण तो मैं माननीय अध्यक्ष महोदय जी आपसे निवेदन करती हूं कि मुझे मंत्री जी यह बताए कि पूर्णता की परिभाषा क्या होता है आप पूर्ण किसको बोलते हैं आप मेरे को बस परिभाषा चाहिए आपसे महीना अमत का माननीय अध्यक्ष महोदय जी क एक गाव है वहां सिर्फ 15 दिन चालू हुआ है नल उसके बाद बंद कर दिया गया खर्रा गांव का अध्यक्ष महोदय जी साथ में बगदरी में टेस्टिंग हुआ है उसके बाद कार्य बंद कर दिया जाए ऐसे बहुत सारे विधानसभा मेरे पूरे आपको लिस्ट भी दे दूंगी जहां पर सिर्फ 15 दिन चला है वहां बंद कर दिया गया है जहां आप लिस्ट दे दीजिए जी आप लिस्ट दे दीजिए बताइए तो आप बस मेरा निवेदन है कि आप जल्द से जल्द उसे पूर्णता और पूर्णता की परिभाषा अगर दे द कर बता दीजिए का अर्थ बता द माननीय अध्यक्ष महोदय उन्होंने पॉइंटेड प्रश्न पूछा है कि पूर्णता का मतलब क्या है और दूसरा दो गांव का उन्होंने अकलवारा और एक और गांव का नाम बताया है कि वो 15 दिन चला उसके बाद बंद है बद में बगदरी का तो यह शुरू होगा कि नहीं होगा दोनों गांव का दिखावा लीजिए और पूर्णता का पूर्णता का परिभाषा थी आपकी बारी आती तो आपका पूरा जवाब देता आपद छग का मामला है छतीसगढ़ में च रहान अध्यक्ष मद माननी अध्यक्ष महोदय माननीय अध्यक्ष महोदय उनके जो प्रश्न है वो मुझे बता देंगे मैं परीक्ष अध्यक्ष महोदय जीभी अभी जो अध्यक्ष महोदय जीस अध्यक्ष महोदय जी जो अभी रिपेयरिंग का कार्य हुआ है उसमें सिर्फ एक से दो इंच क्रंक हुआ है जो बरसात में उखड़ गया कृपा करके उसमें गुणवत्ता लाइए य निवेदन करती तो किस तरीके से इस योजना का कबाड़ा निकाला जा रहा है किस तरीके से अधिकारियों को बचाया जा रहा है !

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https://youtu.be/TPns_0UgElQ?si=iZ10ttylKpgzwSNw

मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

उद्योगपतियों की सरकार, लोग मरने को लाचार

 उद्योगपतियों की सरकार, लोग मरने को लाचार 


देश का बजट जारी कर दिया गया है एक लाइन में हालांकि हम बजट को लेकर ज्यादा कुछ नहीं जानते हैं या नहीं समझते हैं क्योंकि अब तक जितने भी बजट आए हैं उसमें कहा जाता है कि फला फला फला वस्तुओं की कीमत कम हो रही है वह सस्ती हो रही है लेकिन आज तक कभी सस्ती होते नहीं देखी और जिसकी बढ़ेगी बताते हैं तुरंत दूसरे दिन बढ़ जाती है लेकिन सीधा-सीधा एक लाइन में कहा जाए कि केंद्रीय बजट क्या है तो यही कहा जा सकता है कि यह सत्ता को बचाने का बचाव बजट है बिहार आंध्र प्रदेश क्या कुछ नहीं दिया गया क्या यह दूसरे राज्यों के बजट में कटौती करके दिया गया है जिन राज्यों में चुनाव होने हैं इस साल तीन राज्यों में चुनाव होने महाराष्ट्र झारखंड हरियाणा उन्हें भी कुछ कुछ मिल गया लेकिन 36 गढ़ को क्या मिला एक बार जिक्र जरूर आया बजट भाषण में तो लगा कि अब छत्तीसगढ़ को भी कुछ मिलेगा लेकिन वह नक्सलियों से संबंधित था खैर यह तो बजट की बात हुई लेकिन छत्तीसगढ़ में क्या कुछ हो रहा है क्या मोदी सरकार की तरह छत्तीसगढ़ की सरकार भी कार्पोरेट के साथ गट जोड़ करके आम लोगों का जीवन खतरे में डाल देना चाहती क्या छत्तीसगढ़ की सरकार को उद्योग क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरा भी चिंता नहीं है यह सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि कल ही विधानसभा में खुद भारतीय पार्टी के विधायक अनुज शर्मा ने जब सवाल उठाया तो उद्योग मंत्री लखन लाल देवागन के जवाब जिस तरीके से थे वह हैरान कर देने वाला है कि आखिर छत्तीसगढ़ के लोगों के स्वास्थ के साथ किस तरीके से उद्योग खिलवाड़ कर रहे हैं 

अनुज शर्मा ने कहा कि मेरे पास 108 उद्योगों की सूची है जहां स्वास्थ्य परीक्षण ही नहीं हुए हैं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जरूर कहा कि हमने इनके खिलाफ कारवाही का निर्णय लिया है कारवाही चल भी रही है कोर्ट में भी मामला चल रहा है लेबर कोर्ट में भी मामला चल रहा है और यह कहते हुए उन्होंने 108 उद्योगों का तो जिक्र नहीं किया लेकिन राजधानी के नजदीक सिलतरा में जो उद्योग है उसका जिक्र जरूर उन्होंने किया उन्होंने खुद बताया कि सिलतरा में 32 उद्योग हैं जिसमें से 25 उद्योग खतरनाक श्रेणी के और सभी उद्योगों को यह निर्देश है कि साल में वह कम से कम एक बार स्वास्थ्य शिविर जरूर लगाए लेकिन आप हैरान हो जाएंगे कि बहुत सारे उद्योग खुद अनुष शर्मा ने बताया कि 108 उद्योग उनके पास उनकी जानकारी में जिन्होंने स्वास्थ्य शिविर ही नहीं लगाया लखन लाल देवांगन उद्योग मंत्री ने भी बताया कि जो सिलतरा में 25 खतरनाक श्रेणी के उद्योग है उसमें से छह उद्योगों ने शिविर नहीं लगाया है लोगों को तरह-तरह की बीमारियां हो रही है स्किन की बीमारी के अलावा भी कैंसर और दूसरे तरह की गंभीर बीमारी हो रही है लेकिन सरकार इन उद्योगों के खिलाफ कारवाही क्यों नहीं कर रही याद होगा आपको की एक डेढ़ महीना पहले अवारा क्षेत्र में स्पेशल ब्लास्ट फैक्ट्री में भी विस्फोट हुआ था और लोग मारे गए थे तब भी सवाल उठा था लेकिन लगता है कि कारपोरेट और सत्ता के गठजोड़ ने आम लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है और शायद यही वजह है कि इन सवालों से बचने की कोशिश की जाती रही है जवाब ही नहीं दिया जाता है हम और बता दे कि छत्तीसगढ़ में जो जानकारी मिली है जो सूत्र बता रहे हैं कि लगभग हर साल 100 से अधिक ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं जिनके खिलाफ पुलिस कारवाही भी होती है और लेबर कोर्ट में भी मामला चलता है लेबर कोर्ट में जो मामला चलता है उसमें तो बकायदा जुर्माना तक बात चली जाती है कारवाई हो जाती जाते लेकिन पुलिस में जो कारवाही चलती है उसे लेकर सवाल उठते रहे हैं कि मामला अंजाम तक क्यों नहीं पहुंचता क्यों ठंडे बस्ते में चले जाता है इसे लेकर कई तरह के सवाल है हमारी टीम लगी हुई है कि कोर्ट लेबर कोर्ट में और पुलिस में किसकिस तरह के मामले चले और उसकी क्या स्थिति है हम आपको बताएंगे लेकिन हम आपको बता देते हैं कि जिस तरीके से विधानसभा में सवाल उठे और मंत्री का जवाब है उ से देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है कि कारपोरेट और सत्ता के गठजोड़ किस तरीके से लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ कर रही है उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है !

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https://youtu.be/N5xQGokXsm4?si=oo_Ku6k7iGcaOi2p

रविवार, 5 अप्रैल 2026

जब बेर पर मचा था बवाल


जब बेर पर मचा था बवाल
 

 भारतीय जनता पार्टी धर्म के नाम पर किस किस तरह का तमाशा करती है यह किसी से छिपा नहीं है और ऐसे में  नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने छत्तीसगढ़ के विधानसभा में ही साय सरकार को बुरी तरीके से घेर लिया इसकी वजह थी बेर।

दरअसल कुछ ही दिन पहले साय सरकार यानी पूरी कैबिनेट राम लला के दर्शन करने के लिए अयोध्या गई थी और रामलला में क्या चढ़ाना है इसकी पूरी सूची जारी की थी जिसमें एक था सबरी के बेर शिवरी नारायण से लाया गया है यह बताया गया इसी बात को लेकर चरण दास महंत ने विधानसभा में सवाल पूछ लिया कि यह बेर का तो सीजन नहीं है मौसम नहीं है बेर का फिर शिवरी नारायण का बेर कहां से आ गया और बेर के नाम पर क्या चीज भगवान राम को चढ़ा दिया गया हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे भी अयोध्या जाना चाहते थे अकेले कैबिनेट को लेकर चले गए अब सब विधायकों को अयोध्या ले जाने प्लेन से अयोध्या ले जाने का इंतजाम किया जाए और बुरी तरीके से इस बेर के प्रकरण से बौखलाए बीजेपी के विधायकों ने चरण दास महंत को ही घेरने की कोशिश की 

राजेश मूणत रायपुर पश्चिम के विधायक है उन्होंने तो यह कह दिया कि 10 सीटें राम के नाम पर मिली है भारतीय जनता पार्टी को तो धर्मजीत सिंह पहले कांग्रेस में थे अब भाजपा में चले गए और भाजपा के विधायक हैं उन्होंने कह दिया कि क्या अयोध्या जाने का जो मंसा जाहिर कर रहे हैं चरण दास जी महंत उसके लिए राहुल गांधी से पूछे हैं लेकिन चरण दास महंत कब रुकने वाले थे उन्होंने सीधे-सीधे इन विधायकों से कह दिया कि आप लोग सही बातों का जवाब नहीं देते हैं बेर कहां से आया यह बताइए इधर-उधर की बात करते हैं और इसीलिए आप लोग अयोध्या से लेकर बद्रीनाथ चित्रकूट प्रयागराज नासिक रामेश्वरम सब हार गए देखना है कि सरकार इसका क्या जवाब देती हालांकि मुश्किल है इसका जवाब इस तरह के सवालों के जवाब कभी मिलते नहीं है और चरणदास महंत जी जब चर्चा कर रहे थे तो भाजपा के तेज करर माने जाने वाले विधायक और रमन सरकार में मंत्री रहे अजय चंद्राकर ने तो यहां तक कह दिया कि इस पर चर्चा क्यों होनी चाहिए और उन्होंने अध्यक्ष से यहां तक पूछ लिया कि क्या अयोध्या पर चर्चा के लिए कोई नोटिस दिया है अब बेर का मामला बड़ा होता जा रहा है और जन चर्चा का भी विषय बनता जा रहा है कि वाकई में आखिर जब सीजन नहीं था तो बेर कहां से लाया गया और क्या चढ़ाया गया भगवान को !

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https://youtu.be/DD8uGlRjsL4?si=lE7K7fvrxZtFc_5O