छत्तीसगढ़ का ₹1000 करोड़ का दिव्यांग घोटाला
आज हम बात करने जा रहे हैं छत्तीसगढ़ के उस सबसे बड़े और बहुचर्चित घोटाले की, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी। सोचिए, जिस राज्य में गरीबों, दिव्यांगों और असहाय लोगों के कल्याण के लिए पैसा आया हो, उस फंड में ₹1000 करोड़ की कथित गड़बड़ी हो जाए!
यह कोई आम भ्रष्टाचार नहीं है, यह सीधे तौर पर इंसानियत के साथ खिलवाड़ है। मामला छत्तीसगढ़ के दिव्यांग कल्याण यानी SRC-PRRC का है। हाईकोर्ट के दखल के बाद यह जांच सीबीआई (CBI) को सौंपी गई थी। लेकिन आज सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि जांच शुरू कब हुई थी, बल्कि सबसे बड़ा और चुभने वाला सवाल यह है कि इस जांच के बाद कार्रवाई आखिर कब होगी? पिछले करीब एक साल से सीबीआई दस्तावेजों की पड़ताल, पूछताछ और सबूत जुटाने में लगी हुई है। अब खबर आ रही है कि जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि चार्जशीट अभी तक अदालत में नहीं पहुंची है! आखिर कौन बचा रहा है इन ताकतों को? आइए, आज की इस वीडियो में परतों को खोलते हैं।"
अदालत की टिप्पणी और सिस्टम की पोल
इस केस की सबसे अहम कड़ी है साल 2020 का वह हाईकोर्ट का ऐतिहासिक आदेश। जरा गौर से सुनिए कि अदालत ने तब क्या कहा था। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस मामले में जिन अधिकारियों के नाम सामने आए हैं, वे बेहद ऊंचे पदों पर रहे हैं। इसलिए अगर इसकी जांच स्थानीय स्तर पर कराई जाती, तो जांच प्रभावित होने की पूरी आशंका थी।
यही वह वजह थी जिसके बाद मजबूरन सीबीआई जैसी स्वतंत्र एजेंसी से इस मामले की जांच कराने के निर्देश देने पड़े। अदालत ने साफ-साफ आदेश दिया था कि सीबीआई तुरंत FIR दर्ज करे, मूल रिकॉर्ड ज़ब्त करे और बिना किसी दबाव के निष्पक्ष जांच जल्द से जल्द पूरी करे।
लेकिन सोचिए, जब अदालत जैसी सर्वोच्च संस्था को यह कहना पड़ जाए कि 'अधिकारी इतने ताकतवर हैं कि स्थानीय जांच नहीं हो सकती', तो हमारे सिस्टम की रीढ़ की हड्डी पर कितना बड़ा सवालिया निशान लग जाता है? क्या हमारे देश में कानून और कुर्सी की ताकत आम जनता के अधिकारों से इतनी बड़ी हो गई है?"
कौन-कौन से हैं वे बड़े नाम?
"अब ज़रा उन चेहरों से पर्दा उठाते हैं, जिनका इस हाई-प्रोफाइल मामले में नाम उछला है। इस मामले की याचिका में जिन लोगों के नाम दर्ज हैं, उनकी फेहरिस्त बहुत लंबी और रसूखदार है:
- पूर्व मुख्य सचिव: विवेक ढांड और सुनील कुजूर।
- पूर्व वरिष्ठ IAS अधिकारी: आलोक शुक्ल, एमके राउत, और बीएल अग्रवाल।
- अन्य बड़े प्रशासनिक अधिकारी: सतीश पांडे, पीपी सोती, राजेश तिवारी और अशोक तिवारी समेत कई अन्य अधिकारी।
- राजनीतिक गलियारे से: तत्कालीन महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह का नाम भी इस मामले में शामिल है।
हालांकि, हमें यह भी समझना होगा कि किसी का नाम कोर्ट रिकॉर्ड में होना अपने आप में शत-प्रतिशत अपराध सिद्ध नहीं करता। कानून अपनी प्रक्रिया से चलता है। लेकिन जब इतने बड़े-बड़े ओहदेदार, जो कभी शासन और प्रशासन के सर्वेसर्वा हुआ करते थे, इस प्रकार के घोटालों के घेरे में आते हैं, तो यह सीधे तौर पर सरकारों और व्यवस्था के संरक्षण की ओर इशारा करता है।"
सरकार और अधिकारियों के संरक्षण पर सीधा प्रहार
"सवाल यह उठता है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर गबन कैसे हो गया? क्या एक रात में करोड़ों रुपये गायब हो गए? नहीं! यह बिना किसी 'ऊपर के संरक्षण' के संभव ही नहीं है। जब बड़े पदों पर बैठे लोग खुद इस व्यवस्था का हिस्सा बन जाएं, तो गरीबों की आवाज़ दबा दी जाती है।
एक साल से अधिक का समय बीत चुका है, सीबीआई ने फाइलों को खंगाला, पूछताछ की, कागजात खंगाले, लेकिन जब बात चार्जशीट दाखिल करने की आती है, तो फाइलें धीमी क्यों पड़ जाती हैं? क्या सिस्टम के भीतर ही बैठे कुछ लोग इन भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की जुगत में लगे हैं?
सरकारें बदलती हैं, राजनीतिक दल अपनी पीठ थपथपाते हैं कि हमने जांच बैठा दी है, भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात की जाती है। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? दिव्यांगों के हक का पैसा कागजों में घूमता रहता है और आरोपी बड़े आराम से अपने महलों में जीवन काटते हैं। जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली व्यवस्था जब खुद गुनाहगारों को ढाल देने लगे, तो लोकतंत्र पर से भरोसा उठने लगता है।"
यह लड़ाई सिर्फ एक घोटाले की नहीं है। यह लड़ाई उस हर एक दिव्यांग और लाचार व्यक्ति के हक की है, जिसके हिस्से का निवाला इन ताकतवर कुर्सियों पर बैठे लोगों ने छीना है। अगर अब भी इस मामले में पारदर्शी और कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो न्याय व्यवस्था से लोगों का भरोसा उठ जाएगा।
अब वक्त आ गया है कि जनता सवाल पूछे। नेताजी से लेकर बड़े अफसरों तक, हर किसी को जवाबदेह बनाना होगा।
आपकी इस पूरे मामले पर क्या राय है? क्या आपको लगता है कि इन बड़े अधिकारियों और नेताओं पर कभी असली कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों के कब्रिस्तानों में दफन हो जाएगा? हमें कमेंट करके जरूर बताएं
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