गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

बलात्कारियों-छिछोरों का जमावड़ा क्यों बढ़ रहा, ऐसे-कैसे छवि गढ़ने की कोशिश…

बलात्कारियों-छिछोरों का जमावड़ा क्यों बढ़ रहा, ऐसे-कैसे छवि गढ़ने की कोशिश…

 जिस तरीके से मोदी सरकार चल रही है और जिस तरीके से समूची भाजपा में अपराधियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है वह इस देश के लिए क्या चिंता का सबब नहीं होना चाहिए सत्ता बचाने के लिए या सत्ता में बने रहने के लिए भारतीय जनता पार्टी और आईटी सेल किस-किस तरीके से विज्ञापन प्रसारित नहीं करते हैं असंभव को संभव कर देने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में विश्व गुरु की राह पर चलने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया में सबसे बड़ी मूर्ति बनाने वाले देश के प्रधानमंत्री और दुनिया में सबसे ऊंचे स्थान पर सड़क बनाने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकिन यह पूरा खेल क्या संघ के संस्कार से निकल कर आया है यह सवाल संघ पर इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि पिछले दिनों यानी हाल के दिनों में या फिर यूं कहे मोदी सरकार के आने के बाद जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी में बलात्कारियों छिछोरों और अपराधियों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है जमावड़ा तो विपक्ष के नेताओं का भी बढ़ता जा रहा है जिन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे लेकिन आज हम बात कर रहे हैं उन छिछोरों और बलात्कारियों का याद कीजिए बीएचयू में तीन भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल के नेता बंदूक की नोक पर बला बकार करते हैं उनकी गिरफ्तारी होती है और कायदा बताती है कि यह अपराधिक छवि के लोग हैं और उसके बाद उनकी जब जमानत होती है तो किस तरीके से उनके घर वाले उन बलात्कारियों का स्वागत सत्कार करते हैं और केक तक काटा जाता है यानी आप सोच सकते हैं इस दौर में जब बलात्कार के मामले को लेकर पूरा देश चिंतित है उस दौर में बलात्कारियों का स्वागत और ऐसा पहली बार नहीं हुआ कठुआ का मामला याद कीजिए आपकी मासूम बच्ची से बलात्कार करने वाले जब इसी तरीके से जमानत से बाहर आए थे तो किस तरीके से स्वागत सत्कार हुआ था गुजरात में बिल्किस बानू के बलात्कारियों की समयपुर रिहाई जब हुई तो किस तरीके से स्वागत सत्कार किया गया था तो क्या भारतीय जनता पार्टी ब कायों को पसंद करती है यह सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाए उसी ट्रेन में किस तरीके से बच्चियों के साथ दुर्व्यवहार किया और साफ तौर पर जो वीडियो वायरल हो रहा है वह भारतीय जनता पार्टी के लिए शर्मसार कर देने वाला है लेकिन मजाक है वह आज भी बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ कुछ बोल दे जो देश का गौरव देश का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों की छाती पर बड़ी बेशर्मी से हाथ धरने करर सत्ता का संरक्षण ले रहा था ऐसे कई सारे सवाल है टिकट का तो हमने काकर का बताया कि किस तरीके से कांकेर में महिला अपराध में शामिल व्यक्ति को टिकट दे दिया गया किस तरीके से रायगढ़ में यन शोषण के आरोपी को जिलाध्यक्ष बनाकर रखा गया था तो क्या भारतीय जनता पार्टी में अब इसी तरह के लोग रहेंगे जो देश के लिए ही नहीं समाज के लिए भी खतरा बनता जा रहा है ऐसे कई सारे उदाहरण आपके सामने होंगे राज्य दर राज्य जब आप जाएंगे तो आपको ढेरों उदाहरण मिलेंगे जब बलात्कारी यौन शोषण के अपराधी छीछोरे और दूसरे तरह के अपराधियों को भारतीय जनता पार्टी में संरक्षण मिल र और ऐसा नहीं है कि दूसरी पार्टियां नहीं दे रही लेकिन इस दौर में जिस तरीके से भाजपा में यह बड़ी है वह चौकाने वाला है संसद में भी उनके सांसदों की फेहरिस्त सबसे ज्यादा है आप कहेंगे सबसे ज्यादा जीते हैं इसलिए सबसे ज्यादा लेकिन जिस तरीके से प्रचारित प्रसारित किया जा रहा है और शायद यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी अपने विज्ञापन में जिस विकास का दंब भरती है वह विकास किस तरीके से दम तोड़ने लगा सड़कों से लेकर मूर्तियों तक अयोध्या से लेकर संसद भवन तक सब कुछ तो साफ दिखाई देने लग और सत्ता में बने रहने के लिए चंदा वसूली का भी तो इलेक्ट्रोल बांड ने सब कुछ खुलासा कर दिया है और पीएम केयर फंड से बड़ा कोई भ्रष्टाचार हो सकता है नोटबंदी को लेकर भी तो भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगते रहे इसके अलावा जो दूसरी पार्टियों के भ्रष्ट लोग है अपराधिक लोग हैं उन्हें भी अपनी पार्टी में लाने के लिए किसकिस तरीके से जा पा एजेंसियों का सहारा लिया जाता है वह भी किसी से छिपा नहीं है तब क्या भारतीय जनता पार्टी को जो संघ से मिले संस्कार वह सत्ता मिलते ही दिखने लगा है!

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https://youtu.be/YYBTYf4Rtno?si=g2iGRC9DnoLjClTk

बुधवार, 22 अप्रैल 2026

क़र्ज़ से लदे है साय सरकार के कई मंत्री, लाखों का क़र्ज़

 

क़र्ज़ से लदे है साय सरकार के कई मंत्री, लाखों का क़र्ज़

एक तरफ विष्णु देव साय मंत्रिमंडल में फेरबदल लेकर कई तरह की चर्चाए सामने आ रही है कहा जा रहा है कि मोदी शाह अनुमति ही नहीं दे रहे हैं और विष्णु देव साय लगातार दिल्ली का चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं तो दूसरी तरफ निगम मंडल आयोग में नियुक्ति को लेकर भी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त रोष है कहा जा रहा है कि इसे लेकर दिल्ली तक शिकायत की जा चुकी है और इसे देखते हुए बड़ी बैठक  के बाद ही कोई निर्णय होगा  लेकिन इस सबसे दूर आज हम बात कर रहे हैं विष्णु देव साय सरकार के मंत्रिमंडल के सदस्य के द्वारा लिए गए कर्जे का 11 मंत्री है वर्तमान में बृजमोहन अग्रवाल जो शिक्षा मंत्री थे उन्हें केंद्र की राजनीति में भेज दिया गया और उन्हें मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना पड़ा जबकि वे दावा कर रहे थे कि छ महीने तक वे रह सकते हैं लेकिन आनंद फानंद में उनसे इस्तीफा ले लिया गया या उन्होंने इस्तीफा दे दिया तब सवाल यह है कि विष्णु दे साय सरकार के मंत्रिमंडल का क्या हाल है परसेप्शन सबके सामने है कि किस तरीके से खेल खेला जा रहा है मोदी की गारंटी पूरा करने के वादे के साथ सत्ता में आई सरकार किस तरीके से उद्योगपति की सरकार बन गई है अडानी की सरकार बन गई है उसे लेकर भी कई तरह के आरोप है लेकिन आज हम चर्चा कर रहे हैं विष्णु देव साय सरकार के कितने मन यो पर कर्ज और कौन कौन से मंत्री हैं जो कर्ज से मुक्त है यह पूरी जानकारी हम चुनाव आयोग के दिए गए जानकारी के आधार पर दे रहे हैं विष्णुदेव साय सरकार के जो सबसे बड़े कर्ज लेने वाले कोई मंत्री वे है श्याम बिहारी जायसवाल सरगुजा क्षेत्र से आते हैं और इन पर 5 करोड़ से अधिक कर्ज है बैंक में इनकी पत्नी भी सम्मिलित कर्ज में शामिल है 5 करोड़ 16 लाख 8477 रप के कर्जदार है ये तो दूसरे नंबर पर जिनका नाम है वे है खुद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जिन पर 65 819 ₹ का कर्ज है तो तीसरे नंबर पर ओपी चौधरी है विष्णु देसाय से थोड़ा ही कम कर्जदार हैं वे 525000 के कर्जदार हैं हालांकि वे बड़े-बड़े दावा करते हैं कि किस तरीके से उ उन्होंने 2 करोड़ रुपए को 24 करोड़ बना लिया और पता नहीं किस किस तरह की बात करते हैं सुपर सीएम भी कहलाते हैं उन पर 65 करोड़ 25000 का कर्जा है तो राम विचार नेताम दमदार मंत्री हैं आदिवासी समाज से आते हैं यह भी सरगुजा क्षेत्र के विधायक हैं और रमन सरकार में भी मंत्री रहे इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले को लेकर भी वे चर्चा में रहे कि सबसे नार्को टेस्ट जो कथित नार्को टेस्ट है उसमें सबसे ज्यादा पैसे वसूलने का आरोप राम विचार नेताम पर रहा है और वर्तमान में वे कृषि मंत्री हैं और कृषि विभाग कौन चला रहा है इसे लेकर भी संशय कई लोग तो किसी राकेश अग्रवाल का नाम लेते हैं तब उन पर 49 8276 रप का कर्जा है तो उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा पहली बार विधायक बने हैं और सीधे उप मुख्यमंत्री बना दिए गए गृह मंत्री जैसा महत्त्वपूर्ण विभाग उनके पास है उन पर 12 लाख से ऊपर कर्जा है एक मात्र महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी कर्जदार है उन पर 8 लाख रपए का र्चा है इसमें उनके पति भी साथ में हैं और यह कर्जा कुछ पटाल दिए हैं कि बढ़ गए हैं यह इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पाई है लेकिन दयाल दास बघेल सुरक्षित सीट नवागढ़ से जीते हैं वे पूर्व मंत्री रुद्र गुरु को हराए हैं उन पर भी 40 90 हज से अधिक रुप का कर्चा है केदार कश्यप बस्तर के बड़े नेता है रमन सरकार में मंत्री जब जब चुनाव जीते हैं तब तब मंत्री रहे तीसरी बार वे मंत्री बने हैं उन पर भी 25 लाख का कर्जा है लेकिन इन कर्जदार मंत्रियों से भी इतर तीन ऐसे मंत्री हैं जिन पर कोई कर्जा नहीं है या उन्होंने चुनाव आयोग को जो जानकारी दी है उसमें बताया कि उन पर कोई नहीं है इनमें कोरबा के महापौर रहे चर्चित है बेहर एक विमला कांड को लेकर उनकी चर्चा बहुत जबरदस्त होते रही और हाल में वे चर्चा में तब आए जब विधानसभा में उन्हें उद्योगों में सुरक्षा को लेकर भारतीय जनता पार्टी के विधायक अनु शर्मा नेही सवाल उठाया था इसके अलावा जो बारूद फैक्ट्री में विस्फोट हुआ था पटवा के रिश्तेदारों की बारूद फैक्ट्री में उसमें उसे लेकर वे चर्चा में आए थे उन पर भी कोई कर्जा नहीं है तो पीए गिरी करते हुए मंत्री तक पहुंचे टंक राम वर्मा बलौदा बाजार के विधायक हैं उन्होंने शैलेश नितिन त्रिवेदी को हराया पहली बार विधायक बने और राजस्व मंत्रालय खेल मंत्रालय उनके पास है और किस तरीके से खेल विभाग में अंधा बा रेवड़ी अपन अपन को देवाले किससे चर्चित है ऐसे मंत्री टंक राम वर्मा पर भी कोई कर्जा नहीं है तो जो मुख्यमंत्री के दौड़ में सबसे आगे थे और अभी भी मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा पाले हुए हैं संघ के सबसे करीबी और विधायक पहली बार बने उससे पहले वे सांसद रहे और पहली बार विधायक बनते ही मुख्यमंत्री तक जा पहुंचे हैं ऐसे नेता अरुण साव पर भी कोई र्चा नहीं है ये पूरी जानकारी चुनाव आयोग को चुनाव लड़ने से पहले जो दी जाती है उनके आधार पर हो सकता है कि इनमें से कुछ लोगों ने कर्जा पटा दिया होगा या कई लोगों के कर्जे बढ़ गए होंगे यह देखने की बात है हमारी टीम लगी हुई कि स्थिति क्या है !

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https://youtu.be/B7ECf91Mw9Q?si=Qqw35hohda-vVo7a

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली 


देश के प्रधानमंत्री से लेकर तमाम बीजेपी नेता बंगाल चुनाव में बलात्कार का मुद्दा उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ बलात्कारियों को सत्ता के संरक्षण का मामला भी गरमाने लगा है एक रिपोर्ट-

कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए  रेप कांड ने एक बार फिर समूचे देश को झकझोर के रख दिया था  इसलिए देश भर के तमाम डॉक्टर सड़कों पर उतर आए थे, न्याय के लिए याद कीजिए आप 12 साल पहले जब निर्भया कांड हुआ था तब इसी तरीके से समूचा देश सड़कों पर था और उसके बाद सरकार ने कानून भी बनाए थे और लगने लगा था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह नहीं देख पाए कि सत्ता किस तरीके से बलात्कारियों का संरक्षक बनी बैठी है यदि एनसीआरबी के आंकड़े को देखें तो आप चौक जाएंगे कि हर रोज इस देश में 87 महिलाओं की युवतियों की बलात्कार होती है हर रोज इतनी बड़ी तादाद में यदि यौन उत्पीड़न से महिलाएं पीड़ित हैं तब यह हंगामा कलकाता रेप केस के बाद क्यों और उसके बाद भी क्या यह अपराध थम गया है याद कीजिए आप उत्तराखंड में किस तरीके से युवती के साथ बस चालकों ने बलात्कार किया और बिहार से खबर आई कि एक दलित छात्रा के साथ किस तरीके से विभ तरीके से बलात्कार किया नाबालिक छात्रा से यानी ना तो बलात्कार का सिलसिला रुक पा रहा है और रोज हो रहे बलात्कार के आंकड़े ही कम हो रहे हैं कि और ना ही राजनीतिक दलों का खेल सवाल यह नहीं है कि कलकाता कांड को लेकर डॉक्टर आज सड़कों पर है उनके साथ तमाम लोग जुड़े हुए हैं क्योंकि महिला उत्पीड़न का मामला है तब सवाल यह है कि क्या इस अपराध को रोका जाना चाहिए और को रोकने के लिए अब नए सीरे से इस देश को आंदोलन के लिए खड़ा होना चाहिए यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि लोगों ने आश्चर्यजनक ढंग से निर्भया के बाद चुप्पी ड़ ली थी गुस्सा बेहद है इस मामले को लेकर लेकिन किस पर करें गुस्सा उस सरकार पर जो खुलेआम बृजभूषण सरण सि जैसे लोगों को संरक्षण देती है या उस सरकार पर जो हर चुनाव के पहले राम रहीम जैसे बलात्कारियों को पैरोल पर छोड़ देती है एक दो बार नहीं दर्जन बार से अधिक राम रहीम को पैरोल पर छोड़ा जा चुका है या उस सरकार पर जो बिलकिस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर स्वागत समारोह में तालियां पीटती नजर आती है या तालियां पीटने वालों के साथ खड़ी होती क्या विनेश फोगाट साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जब सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे थे उस छिछोरे बृजभूषण शरण सिंह को लेकर तब उन्हें छिनाल कह दिया गया था और यह लोग तमाम जो आज नारा लगाते घूम रहे हैं उठो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे पिछले एक हफ्ते से यह टैग लाइन चल रहा है सब तरफ उन लोगों ने खामोशी क्यों ड़ ली थी जब बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ वे महिला पहलवान रोती कलपी सड़कों पर घसीट जा रही थी या फिर वे लोग कहां चले जाते हैं जब राम रहीम जैसे बलात्कारियों को दर्जन भर बाद पैरोल में छोड़ा जाता क्या उनके खिलाफ सड़क पर नहीं उतरना चाहिए कि आखिर ऐसे बलात्कारी जिसकी सजा की पुष्टि हो चुकी है उन्हें कैसे पेरोल पर छोड़ सकती है कोई सरकार और एक दो बार नहीं दर्जन भर से अधिक और लोगों की खामोशी क्या सिर्फ राजनीतिक नफा नुकसान के साथ जुड़ गई है यह सवाल तो ब कि बानों के बलात्कारियों की रिहाई को लेकर भी उठनी चाहिए थी और सड़क पर लोगों को उतर जाना चाहिए था लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह भूल जाते हैं कि यदि कल किसी के साथ इस तरह की घटना हुई है तो अगली बारी उनकी अपनी है तब सवाल यह है कि क्या सिर्फ कलकाता रेप केस में हंगामा खड़ा कर देने से बलात्कार के मामले रुक जाएंगे क्योंकि हर रोज इस देश में 87 बलात्कार हो रहे हैं और इस घटना के बाद भी लगातार बलात्कार की घटनाएं सुनाई दे रही है वह भी विभ बलात्कार की घटनाएं उत्तराखंड की घटनाएं कम विभ नहीं है क्या कोलकात्ता कांड के साय तरे उसे छुपा लिया जाएगा या कल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुई नाबालिक छात्रा के साथ की घटना को क्या कलकाता कांड के साथ छुपा लिया जाएगा ऐसे कई सवाल है आप खुद सोचिए कि आप किस तरीके से राजनीतिक फायदे नफा नुकसान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं क्यों नहीं उठना चाहिए राम रहीम को पैरोल पे छोड़ने के खिलाफ सड़क की आवाज लोगों की आवाज क्यों नहीं उठनी चाहिए क्या राजनीति ने भी बलात्कार जैसे विवस मामले को बांट दिया है और लोग नफा नुकसान देखकर आंदोलन करते हैं ऐसे कई सवाल है लेकिन एक बड़ा सवाल है कि यदि जब तक राम रहीम या बृजभूषण शरण सिंह या बिल्किस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर या उन्हें बचा की कोशिश पर यह देश चुप्पी ड़ के बैठे रहेगा तब तक इस तरह की घटनाएं होते रहेगी और इन सब बातों के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से बलात्कार को लेकर भाषण बाजी करना अब समय की मांग है जिनको सजा होती है उसकी व्यापक चर्चा हो ताकि ऐसा पाप करने वालो र पैदा हो पाप करने की होती है फं पर ल पता है क्या आम लोगों का मुह चिढ़ाना नहीं है !

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https://youtu.be/HnBPdIp0Wys?si=5xFmgfsHNStQbMEw

मंगलवार, 21 अप्रैल 2026

सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल

 सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल 


छत्तीसगढ़ की राजधानी सुंदर हो यह कौन नहीं चाहेगा लेकिन विकास के नाम पर यदि उन बिल्डिंगों को गिरा दिया जाए जो वर्षों पुराने हैं हेरिटेज की श्रेणी में आते हैं जिसकी खूबसूरती को लोग आज भी आंख भर भर कर देखते हैं तब इसे सत्ता का कौन सा विकास कहा जाएगा और अब इस पर हो रहे नए निर्माण का ठेका भी उसी ठेकेदार ने हासिल कर लिया है जिसने इससे पहले नए सर्किट हाउस का निर्माण किया था और सेंट्रिंग गिरने के विवाद में फँसा था क्या है खेल , कौन अधिकारी रिटायर्ड होने के पहले दो पाँच करोड़ कमाना चाहता है यह हम फिर कभी बतायेंगे ।

लेकिन आज सिविल लाइन के उस सर्किट हाउस का है जिसकी बिल्डिंग बेहद पुरानी है कहा जा रहा है अंग्रेजों के जमाने की वह बिल्डिंग है और उस बिल्डिंग को इन दिनों गिराया जा चुका है हैरानी की बात तो यह है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की सरकार मंत्रियों के बंगले अधिकारियों के बंगले सब कुछ नया रायपुर में शिफ्ट करने जा रही है अधिकारी भी लगातार एक-एक करके शिफ्ट होते जा रहे हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति में जो हेरिटेज के रूप में माना जाता है उस बिल्डिंग को जमीन दोज कर देना क्या सरकार के मंसूबों पर सवाल नहीं उठाता है कहा तो यहां तक जा रहा है कि उस बिल्डिंग को गिराकर वहां पार्किंग बनाई जाएगी क्योंकि जो सर्किट हाउस की वर्तमान पार्किंग है कॉफी हाउस वहां है इस वजह से पार्किंग हच पच रहती है भीड़ बढ़ जाती है तब ऐसी परिस्थिति में क्या उस बिल्डिंग को गिराकर कोई नया खेल खेला जा रहा है किस तरीके से वहां कीमती फर्नीचर लग और इस सर्किट हाउस में लोग ठहर भी रहे थे यानी सब कुछ बहुत बढ़िया था ऐसा भी नहीं कि बिल्डिंग जड़ जड़ थी इसलिए गिरा दिया गया मजबूत बिल्डिंग थी पुराने जमाने की बनी यह बिल्डिंग डेढ़ फीट दीवार वाली बिल्डिंग थी मजबूती से खड़ी थी और हाल में ही इस पर लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके इसे सजाया भी गया था टाइ लगाई गई थी बिस्तर बदले गए थे दरवाजे भी नए स्टाइल में लगाए गए थे एसी सहित किचन सब कुछ नया बनाया गया था यानी करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब सरकार को लगने लगा है कि यह बिल्डिंग अब कोई काम की नहीं है क्योंकि सर्किट हाउस में पर्याप्त जगह है इसलिए इस बिल्डिंग को गिराया जाना चाहिए और वह गिरा रही है इस मामले में हमारी एक्टिविस्ट राकेश च से बात हुई है उनका क्या कहना है सुन लीजिए पुराना सर्किट हाउस सिविल लाइन को जो तोड़े जाने की अचानक निर्णय लिया गया वह निर्णय विधि विरुद्ध है और मुझे तो यह लग रहा है कि इसके तोड़े जाने के पीछे कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का एक अमला काम करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत कार्य प्रारंभ कर रही है जो नहीं होना चाहिए हमारे धरहर को बचाने के लिए हम लगातार संघर्ष करते रहते हैं ऐसे में ये बहुत ही प्राचीन और पुरानी धरोहर थी जिसको बचाया जाना चाहिए था और इसको रोकने के लिए सरकार को खुद आगे आना चाहिए था जो सरकार आगे आती दिखती नहीं क्योंकि इस वक्त नया रायपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री मंत्रियों के निवास बन चुके हैं ऐसे में इसे पार्किंग या अन्य किसी रूप में डेवलप करना फंड की बर्बादी है हमारे टैक्स के पेयर लोगों की पैसों की बर्बादी है इसे रोका जाना चाहिए अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में जिस विभाग का यह जुम्मा है उस विभाग के खिलाफ मामला न्यायालय में ले जाएंगे या संबंधित फोरम में जरूर शिकायत करेंगे क्योंकि मुझे तो लग रहा है कि यह नियम विरु कार्य को संचालन किया जा रहा है यानी सोचिए कि किस तरीके का खेल सरकार कर रही है किस तरीके से टैक्स पेरो की पैसे की बर्बादी की जा रही है और पहले ही नींद में सो चुके इस शहर को इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है !

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https://youtu.be/XH-kMHpNoPY?si=R5uxCn8rbKjzFfbn

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

पत्रकारों को फँसाने की साज़िश करने वाला थाना प्रभारी को जेल, नेता को कब

पत्रकारों को फँसाने की साज़िश करने वाला थाना प्रभारी को जेल, नेता को कब

 छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार आने के बाद किस तरीके से नेताओं के हौसले बुलंद है किस तरीके से सरकारी तंत्र इन नेताओं के इशारे पर किसी को भी फसा देने का कुचक्र रचते हैं और इस पूरे खेल में क्या सत्ता में बैठे प्रमुख लोग भी शामिल हैं ऐसे कई सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि पिछले दिनों कोंटा से जो खबरें आई है बस्तर में स्थित है वहां तत्कालीन टीआई थे अजय सोनकर उन्होंने एक नेताजी के कहने पर चार पत्रकारों को फसाने की साजिश रची उनके कार में गांजा रखकर उन्हें प्रताड़ित किया उन्हें गिरफ्तार किया तो क्या यह खेल दूसरे स्थानों पर भी हो रहा है और पूरा मामला रेत माफियाओं से जुड़ा हुआ है आंध्र प्रदेश का बॉर्डर जहां बड़ी संख्या में अवैध रूप से रेत उत्खनन किए जा रहे हैं और इसे दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है इसकी खबर पर चार पत्रकार पहुंचे थे और जब इन अवैध उत्खनन की तस्वीर ली जा रही थी तब इनके कार में गांजा रख दिया गया था जिसकी शिकायत जब एसपी से की गई और लगातार पत्रकार प्रदर्शन कर रहे थे कि किस तरीके से पत्रकारों को फंसाया गया है और इस आरोप के बाद जब जांच शुरू हुई तो वह वीडियो फुटेज भी सामने आ गया जिसमें टीआई इन पत्रकार की गाड़ियों में गांजा रखते देखे जा रहे थे जांच हुई तो सारे सबूत सामने आ गए लेकिन क्या यह काम केवल टीआई रेत माफियाओं के इशारे पर कर रहा था या इसके पीछे कोई बड़ा हाथ टीआई अजय सोनकर को सस्पेंड करके जेल भेज दिया गया लेकिन सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि ठीक गिरफ्तारी के पहले टीआई अजय सोनकर ने अपने फुक अकाउंट में यह दावा की यह लिख दिया कि नेताजी को बता देना कौन है वह नेताजी इसे लेकर कई तरह की चर्चा है क्या वह सत्ता से जुड़ा है या पूर्व मंत्री से जुड़ा हुआ है यह सवाल जांच में सामने आ पाएगा यह कहना कठिन है लेकिन छत्तीसगढ़ में जिस तरीके से र का अवैध उत्खनन हो रहा है वह हैरान कर देने वाला है और कई स्थानों पर खासकर धमतरी महासमुंद जैसे क्षेत्रों में तो सीधे-सीधे इस मामले में राजनीतिक दलों से जुड़े लोग शामिल है तो क्या कोंटा जिले में भी जो रेत का अवैध उत्खनन हो रहा था उसमें भी किसी बड़े नेता का हाथ है यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण हो गया है और जिस तरीके से पत्रकारों को इस पूरे मामले में टीआई के द्वारा प्रताड़ित किया गया उससे भी स्पष्ट हो रहा है कि इसन घटनाओं के पीछे कोई बड़ा हाथ है सबसे हैरानी की बात तो यह है कि सरकार ने टीआई को सस्पेंड कर जेल तो भेज दिया है लेकिन खनन माफियाओं को संरक्षण देने वाले खनिज विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अभी तक किसी तरह की कारवाही नहीं हुई सब कुछ आईना की तरह स्पष्ट है लेकिन जो खेल नेता अधिकारी और माफिया कर रहे हैं वह हैरान कर देने वाला है छत्तीसगढ़ में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं तो इसकी बड़ी वजह इस तरह के माफियाओं का सत्ता तक पहुंच है हालांकि टीआई को सस्पेंड कर जेल भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है लेकिन देख ना है कि आने वाले दिनों में उस नेता तक सरकार पहुंच पाती है या नहीं !

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https://youtu.be/vKaKL2jE2r8?si=w9A78j6KAAeiYqvU

रविवार, 19 अप्रैल 2026

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

 

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

अदानी के लिए हसदेव को दांव पर लगाने को लेकर बुरी तरीके से घिरी विष्णुदेव साय सरकार अब अंबिकापुर में भू माफियाओं के द्वारा 100 एकड़ जंगल काटे जाने को लेकर निशाने पर है कहा जा रहा है कि अंबिकापुर से सटे गांव बुधिया चुआ गांव का यही नाम है वहां भू माफिया लगातार जंगल काट रहे हैं और 100 एकड़ जंगल काट चुके हैं इसे लेकर पिछले दिनों जब लोगों ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता टीएस बाबा के पास पहुंचे तो बाबा आग बबूला हो गए उन्होंने का दौरा भी किया और पत्रकारों से बताया से कहा कि लंबे अरसे से शासन से लगातार शिकायत की जा रही है कलेक्टर कर क्या रहे हैं आखिर इस पूरे घटनाक्रम में क्या शासन का संरक्षण है क्योंकि लगातार इस मामले को लेकर वहां गांव वाले आवाज उठाते रहे हैं शिकायत करते रहे लिखित में और इसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान तो हो रहा है इस करोड़ों रुपए की जमीन का भी बंदर बांट हो रहा है टी एस बाबा ने विस्तार से यह सब बात कहते हुए धमकी भी दी कि ऐसी स्थिति  क्यों लाई जा रही है कि उन्हें भूख हड़ताल पर बैठना पड़े पहले बाबा ने क्या कुछ कहा वह सुन ली वो वहां तक ऐसे फैल के वो नीचे तक और लगभग गुमला नेशनल हाईवे तक जहां सिसोदिया जी का पेट्रोल पंप लोग बता रहे हैं उसके 500 मीटर तक का पूरा क्षेत्र एक के बाद एक काटा जा रहा है और आप स्वयं देख सकते हैं कि मेड़ के आकार भी दिख रहे हैं यहां कुछ नहीं है जोध कोट भी ऐसा नहीं दिख रहा है और मेड़ बना के लोगों ने क्षेत्र को आपस में बांट लिया है यह रिजर्व फॉरेस्ट है जो कलेक्टर ने 20161 में अन्य अधिकारियों के साथ सेटल भी किया उसके आदेश भी है और बावजूद उसके यह स्थिति बनी मैं बाहर था दिल्ली में था तो गांव से खबर आई कि बाबा यहां दिक्कत हो रही है कुछ वन अधिकार पत्र है वह हमको अभी तक नहीं मिले हैं आजादी के पहले से जो लोग काबिज हैं उनके वन अधिकार पत्र नहीं मिले हैं नए लोगों को कुछ वन अधिकार पत्र मिले हैं कुछ वह भी प्रक्रिया अधूरी है और कुछ लोग हैं जो खरीद बिक्री भी कर रहे हैं यह सारी बातें सामने कि जो वनाधिकार पत्र मिले हैं उनकी खरीद बिक्री उनके कब समझाए भी कि एक देखिए वनाधिकार पट्टा नहीं है यह वनाधिकार पत्र है पट्टा आपको अधिकार देता है खरीद बिक्री का भी वनाधिकार पत्र में बेचने के अधिकार नहीं है और यदि आप बेचते हैं तो यह जमीन वापस शासन को चली जाएगी तो प्रजातंत्र के इस चौथे स्तंभ के माध्यम से हम लोग चाहेंगे कि लोगों के सामने सच्चाई कम से कम पहु कदम अगला कदम इसको रोकने का होगा यह नौबत तो नहीं आनी चाहिए कि यहां के मैं भूख हड़ताल में बैठू यह तो अति हो जाएगी बैठूंगा यह तो अति हो जाएगी तो या हल्का पन है क्या हमारी व्यवस्था ऐसी है कि यह सब करना पड़ेगा तब एक जानकारी आए और अगर वह बात सही है पक्ष विपक्ष इसमें कुछ नहीं है नियम और कानून है नियम और कानून के विपरीत हो रहा है तो आप कारवाही करिए आखिरी में प्रजातंत्र में क्या होता है जनमत का संग्रह है तो वो तो बहुत ही हल्का पन हो जाएगा कि अगर यही नहीं गांव के जो उपसरपंच है उन्होंने भी पूरी बात विस्तार से मीडिया को बताया बड़ा-बड़ा पेड़ था सब कटाई हो गया और निरंतर गांव वाले से शिकायत करते रहे कलेक्टर को भी फॉरेस्ट को भी लेकिन इसमें कभी कब्जा नहीं रोका गया किसी प्रकार का गांव में आक्रोशित है कि हम लोग का नि स्तारी है और जंगल से निस्तार है और जंगल रहने पर हम लोग का आगे भविष्य में हर प्रकार का ऑक्सीजन मिलेगा और हम लोग का सुख सुविधा मिलेगा कहके सब सब लोग को आक्रोशित हो रहा है कि वह नष्ट हो रहा है तो यह तो बड़ी मतलब थोड़ा सा गौर करने की बात है और प्रशासन इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है लोग का कहना है जब इसको बराबर किया जा रहा था उस समय आप लोगों ने कोई उचित कम नहीं उस समय हम लोग जब से शुरुआत हुआ है तब से हम लोग इसका विरोध करते आ रहे हैं पूरे गांव के लोग विरोध करते आ रहे हैं मगर नियंत यानी आप सोचिए कि किस तरीके से शासन प्रशासन के पर जंगल की जमीन तक को लूटा जा रहा है और शिकायत के बाद भी यदि सत्ता खामोश है तो क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार भू माफियाओं से मिली हुई है और वह जानबूझकर कारवाही को टाल रही है जबकि वह अच्छी तरीके से जानती है कि इस 100 एकड़ जमीन में जो जंगल है गांव की निस्तार उस पर निर्भर है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि शासन कुछ कारवाही करती है या फिर टीएस बाबा को भूख हड़ताल में बैठना पड़ेगा!


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https://youtu.be/3SlxCVTSQFg?si=Z9Quonkt0b75NYW-



शनिवार, 18 अप्रैल 2026

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा

छत्तीसगढ़ का कौन है सुपर सीएम, किसका किसका दावा 

 छत्तीसगढ़ में सत्ता आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाया तो साथ ही दो दो उप मुख्यमंत्री बनाए अरुण साव और विजय शर्मा को लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि सुपर सीएम कौन है क्या विष्णुदेव साय सरकार के ऊपर भी कोई सीएम हालांकि जन चर्चा जो है उसके हिसाब से जो सुपर सीएम का तमगा या पद जिसके पास है वह भारतीय जनता पार्टी का वह नेता जो आईएएस से राजनीति में आया है और देश के गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी और खास माने जाते हैं ओपी चौधरी ओपी चौधरी को आम बोलचाल की भाषा में यानी अधिकारी वर्ग में कर्मचारी वर्ग में सुपर सीएम कहा जाता है यहां तक कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति में भी ओपी चौधरी को सुपर सीएम की संज्ञा दी जाती है और बेहद ताकतवर बताया जाता है और कहा जा रहा है कि सरकार वही चला रहे हैं लेकिन अब विवाद इसलिए उठने लगा है क्योंकि विष्णु देव साय की धर्म पत्नी कौशल्या देवी ने खुद को सुपर सीएम बता दिया है मीडिया के सामने उन्होंने क्या कुछ कहा पहले वह सुन लीजिए और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं तो कोई क की मैं उन पदाधिकारियों से जो टिकट लेकर लड़े ठीक है सांसद बन गए विधायक बन गए मैं बिना टिकट मांगे बिना लड़े दूसरो को है और आज मैं एकत्र की विधायक और एक लोकसभा की सांसद भी हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं तो ऐसे में सुपर सीएम को लेकर जो दावा किया जा रहा था कि ओपी चौधरी है उस दावे का क्या होगा और छत्तीसगढ़ की राजनीति किस तरह से चल रही है क्या सचमुच ओपी चौधरी इतने ताकतवर हैं कि सभी फाइल उनकी ही निगरानी में हस्ताक्षर हो रहे हैं सभी फाइलों को क्या वेही देख रहे हैं यह सवाल बेहद महत्त्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि छत्तीसगढ़ में लोकसभा चुनाव के पहले 33000 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला था उसे ओपी चौधरी ने एक झटके में समाप्त करते हुए कह दिया कि अभी वित्तीय स्थिति उतनी मजबूत नहीं है और इसे लेकर सोशल मीडिया में कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं और ओपी चौधरी के खिलाफ विश् वमन भी हो रहे हैं कहा जाए तो गलत नहीं होगा दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि जो बैठक व्यवस्था बदली है कैबिनेट की हमने कल ही बताया कि पहले कैबिनेट की बैठक व्यवस्था कैसे होती थी कैसे मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्री बैठा करते थे लेकिन कल जो कैबिनेट की बैठक हुई उसमें बैठक व्यवस्था बदल दी गई और इस बैठक व्यवस्था में अब दोनों उप मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ बैठेंगे तो क्या यह परिवर्तन भी ओपी चौधरी के कहने पर अधिकारियों ने करवाया है यह महत्त्वपूर्ण है यह जांच का विषय हो सकता है हमारी टीम लगी है कि आखिर सचमुच विष्णुदेव साय अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए यह सब खेल खेल रहे हैं या फिर ओपी चौधरी को मुख्यमंत्री के आजूबाजू दोनों उप मुख्यमंत्रियों का बैठना रास नहीं आ रहा था यह जांच का विषय है यह भाजपा की अंदरूनी राजनीति का मामला है लेकिन दूसरे तरफ कहा तो यहां तक जा रहा है कि जो मंत्रिमंडल के विस्तार का मामला है या निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति का मामला है इसमें भी ओपी चौधरी का ही पेच फसा हुआ है वे चाहते हैं कि उनके समर्थक ज्यादा से ज्यादा इन पदों पर रहे तब दूसरा सवाल उपचुनाव का भी ले है जो बृजमोहन अग्रवाल के स्थि फे के बाद खाली हुआ है रायपुर दक्षिण का सीट वहां क्या ओपी चौधरी के पसंद का उम्मीदवार उतारा जाएगा ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन अभी जो सवा बड़ा हो चुका है वह सुपर सीएम का है और जब खुद मुख्यमंत्री की धर्म पत्नी ने आगे आकर कह दिया है कि वे ही सुपर सीएम है और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जाने जाती हूं और अब छत्तीसगढ़ की सुपर सीएम के नाम से जानी जाती हूं हालांकि अब तक जो परंपरा रही है या मजाक में लोग बोल कहते रहे हैं कि गृह मंत्री जैसे पद मिलते रहा है पत्नियों को तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि इस सुपर सीएम को लेकर जो दावे और राजनीति हो रही थी उस पर क्या असर पड़ता है इस मामले को लेकर कांग्रेस ने भी तंज कसा है भूपेश बघेल से लेकर कांग्रेस के कई नेताओं ने कौशल्या देवी साय के बयान को लेकर टिप्पणी की है आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस सुपर सीएम का मामला का क्या होता है।

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https://youtu.be/qQb5AAfbTxw?si=Uo58Db5qOWvOOk83