छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे!"
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में त्योहारों की आड़ में होने वाले हुड़दंग, बेलगाम डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में 'जंगलराज' नहीं चलने दिया जाएगा।"
[मुख्य मुद्दा: आत्महत्या का मामला]
"दरअसल, हाई कोर्ट में ध्वनि प्रदूषण को लेकर चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, हाल ही में हुई एक दुखद घटना का जिक्र आया। कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा की गई आत्महत्या के मामले का संज्ञान लेते हुए इसे बेहद चिंताजनक (Alarming) और दर्दनाक बताया।
[हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां और जजों के बयान]
• कानून व्यवस्था पर सवाल: कोर्ट ने कहा, "अगर राज्य की कानून-व्यवस्था ऐसी हो जाएगी, तो आम नागरिक कैसे जिंदा रहेगा? एक आम आदमी का गरिमा के साथ जीना और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखना सबसे जरूरी है।"
• त्योहारों की आड़ में असामाजिक तत्व: कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि "त्योहारों की आड़ में लोग हर तरह की असामाजिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। लोग शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव में हुड़दंग कर रहे हैं। कोर्ट ने किसी भी त्योहार को मनाने से नहीं रोका है, लेकिन त्योहार की आड़ में किसी की जान लेना या असामाजिक कृत्य करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
• प्रशासन की लाचारी पर फटकार: जब महाधिवक्ता (Advocate General) ने कहा कि प्रशासन स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, तो कोर्ट ने कहा, "महाधिवक्ता जी, राज्य के मुखिया होने के नाते कानून-व्यवस्था बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है। आप इन तत्वों के सामने खुद को लाचार नहीं पा सकते। अगर राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकती, तो सरकार को सोचना होगा।"
• 'जंगलराज' की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन हर हाल में होना चाहिए। कुछ लोग प्रशासन को धमकी दे रहे हैं कि नियम कड़े हैं तो इन्हें वापस लो। कोर्ट ने कहा, "यह कोई 'जंगलराज' नहीं है। हम किसी की धमकी से प्रभावित होने वाले नहीं हैं। कानून का राज (Rule of Law) सर्वोच्च है।"
[अदालत का अंतिम निर्देश]
"हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट ने कभी भी लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन इसकी एक तय और वैध सीमा (Permissible Limit) होनी चाहिए, ताकि बीमार बुजुर्गों और पढ़ाई करने वाले छात्रों को परेशानी न हो।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक (SP) के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में ध्वनि प्रदूषण की लगातार निगरानी (Monitoring) करने के निर्देश दिए हैं






