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गुरुवार, 16 अप्रैल 2026
बुधवार, 15 अप्रैल 2026
महादेव सट्टा से जुड़े नेता-अफ़सरों पर कार्रवाई क्यों नहीं
महादेव सट्टा से जुड़े नेता-अफ़सरों पर कार्रवाई क्यों नहीं
महादेव सट्टा को लेकर विष्णुदेव साय की सरकार क्या जनता से जो वादे किए थे मोदी ने जो गारंटी दी थी क्या उससे इतर काम हो रहा है क्या इस मामले में लिप्त अपराधियों को बचाया जा रहा है, केवल छोटी मछलियों को ही पकड़ा जा रहा है क्या वाशिंग मशीन बन चुकी है इस मामले को लेकर विष्णु देव साय सरकार पर यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे क्योंकि जिस तरीके से एसीबी और ईओडब्ल्यू ने चालान पेश किया है वह कम चौकाने वाला नहीं है अब तक राज्य में और राज्य से बाहर 300 से अधिक गिरफ्तारी हो चुकी कई व्यापारी वर्ग के लोग भी इस मामले में गिरफ्तार होकर जेल की सलाखों में है सबसे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले को लेकर ईडी ने जो सवाल उठाए थे या ईडी ने जो दावा किया था ईओडब्ल्यू और एसीसीबी की टीम वैसा कुछ नहीं कर पा रही है तो क्या बड़े अफसरों और राजनेताओं को बचा लिया गया है यह बेहद ही महत्त्वपूर्ण सवाल क्योंकि इस मामले में जिस तरह के बड़े अधिकारियों पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों के नाम खुलकर सामने आए थे केवल सिपाही हवालदार जैसों पर कार्रवाई की गई जो पैसे इधर से उधर पहुंचाते थे लेकिन जिनका प्रमुख संरक्षण था इस पूरे मामले में वे अफसर क्या बचा लिए गए हैं क्या उन्हें फिर से मलाईदार पदों पर बिठाया जा चुका है या क्या उन अफसरों से जो सेटिंग पूर्ववर्ती सरकार की बताई जा रही थी उस तरह की सेटिंग वर्तमान सरकार ने कर ली है प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा असम दौरे को लेकर सवालों के घेरे में है इस पर हम फिर कभी विस्तार से बताएंगे कि असम दौरे का पूरा खेल क्या है लेकिन उससे पहले हम बता देते हैं कि महादेव सट्टा प में जिस तरीके से पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले को भी निशाने पर लिया गया था वर्मा बघेल कई तरह के दावे किए गए थे और पूरे विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी इस मामले को जोर शोर से उठाती रही है लेकिन सरकार बने सात आठ माह हो गए अभी तक कोई भी बड़े अधिकारी घेरे में नहीं आए और ना राजनेता ही घेरे में आए यानी क्या सेटिंग हो चुकी है क्या जिस तरीके से आरोप लगे थे पूर्ववर्ती सरकार को करोड़ों रुपए मिलने के क्या वर्तमान सरकार में बैठे कुछ लोगों को यह राशि मिल रही है इसलिए वे खामोश है हालांकि दावा तो इस बात का किया गया था कि महादेव सट्टा ए पर प्रतिबंध लगा दिया गया लेकिन सट्टा अभी भी चल रहा है अभी भी पुलिस कारवाही कर रही है एसीबी भी छापेमारी की कारवाही कर रही है लेकिन इन सारे मामले से क्यों अफसरों को बचा लिया गया है कई अफसर थे रायपुर में भी पदस्थ अफसरों के नाम थे तो दुर्ग में भी पदस्थ अफसरों के नाम थे और यह सारे अफसर आईपीएस है कहा तो यहां तक जा रहा है कि यदि कोयला घोटाला शराब घोटाला और महादेव सट्टा एप को लेकर ईडी की कारवाही को देखा जाए तो उसने केवल आईएएस पर ही कारवाई की है आईपीएस लाबी को पूरी तरीके से छोड़ दिया गया जबकि नाम कई बड़े बड़े थे जिनसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था उसमें दीपांशु काबरा जैसे अधिकारी भी थे तो भोजराज पटेल और पारुल माथुर जैसे आईपीएस लोगों के भी नाम थे लेकिन जब चालान पेश किया महादेव सट्टा को लेकर एसीबी और डब्लू ने तो हैरान कर देने वाली बात यह थी कि ईडी ने जिन अफसरों पर संदेह व्यक्त किया था उन अफसरों पर भी ना तो किसी तरह की पूछता हुई ना किसी तरह की कार्रवाई हुई जिन राजनेताओं के नाम लिए गए थे पूर्व मुख्यमंत्री के बंगले को ही घेरे में लिया गया था कई बड़े-बड़े नाम थे उसमें पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकारों के भी नाम थे लेकिन अब क्या यह कारवाई केवल छोटी मछलियों तक ही सिमट गई है हम आपको विस्तार से बताएंगे हमारी टीम पूरी लगी हुई है कि अब महादेव सट्टा प को लेकर विष्णुदेव साय सरकार की भूमिका क्या है और गृह मंत्री विजय शर्मा किस तरीके का खेल खेल रहे हैं !
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मंगलवार, 14 अप्रैल 2026
जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था
जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था
अपनी पीठ थपथपा में लगी छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साहे सरकार कई तरह के ऐसे फरमान जारी करने लगी है जिसे लेकर चर्चा गर्म है ऐसा ही एक फरमान शिक्षा विभाग में भी जारी किया लगातार शिक्षा को लेकर और उसकी गुणवत्ता को लेकर जरजर स्कूल भवन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं उन सवालों से ध्यान भटकाने के लिए विष्णुदेव साय सरकार ने कई तरह के फरमान जारी किए हैं जिसमें से एक फरमान तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस का भी है जिसे लेकर अभी कई तरह के सवाल उठ ही रहे थे कि फिर एक बार नया फरमान जारी कर दिया गया है कि निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी पीटीएम होगी यानी पालक टीचर्स मीटिंग हो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के हाई कोर्ट ने स्वतः संजन लेकर शिक्षा सचिव को जवाब देने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जो जरजर स्कूल भवन है जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं वैसे स्कूलों के लिए सरकार क्या कर रही है लगातार छोटी-मोटी घटनाएं सामने आई है अभी तक गंभीर घटनाएं नहीं हुई कहीं छज्ज टूटकर बच्चों के ऊपर गिर रहा है तो कहीं रसोई में बच्चे जल रहे हैं और स्कूलों की साफ सफाई में बच्चों को नौकरों की तरह घसीटा जा रहा है ऐसे कई सवाल यही नहीं इन बारिश के दिनों में तो जिस तरह की तस्वीर सामने आई है वह छत्तीसगढ़ सरकार के मुंह पर काली पोतने वाली है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा किस तरीके से नौनिहालों को स्कूल जाने में संघर्ष करना पड़ रहा है उफनती नदी पार करनी पड़ रही है तो कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है ऐसी परिस्थिति में पीटीएम का आयोजन या पालक टीचर मीटिंग को लेकर दिशा निर्देश क्या साय सरकार का बेत का फरमान नहीं यदि आप प्रदेश की स्थिति देखेंगे तो चौक जाएंगे छत्तीसगढ़ की सरकार अपने तरफ से कुछ भी नहीं करना चाहती कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा क्योंकि पिछली सरकार ने सरकारी स्कूलों को सुधारने के लिए आत्मानंद स्कूल के नाम से एक योजना शुरू की थी जिसमें बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही थी स्कूल चकाचक किए जा रहे बैठक व्यवस्था जोरदार ढंग से बिल्कुल आधुनिकरण किए जा रहे थे उन स्कूलों को पीएम श्री योजना में शामिल कर लिया गया यानी वाहवाही लूटने का कोई मौका यह सरकार छोड़ना नहीं चाहती प्रदेश की यदि स्कूलों की बात किया जाए तो खुद विष्णुदेव साय सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश के 300 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है हज से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो एक शिक्षक के भरोसे हैं और शिक्षा विभाग में ही 1954 पद रिक्त है यह स्कूली शिक्षा विभाग का हाल है और हायर एजुकेशन में याने कॉलेज की शिक्षा उच्च शिक्षा में तो और भी बुरी स्थिति है अतिथि शिक्षकों के माध्यम से ले देकर पढ़ाई हो रही है और शोध कार्य विद्यालयों में एक ढंग से बंद है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा और ऐसे में शिक्षा विभाग का यह फरमान किस तरीके से ला हालांकि इसे लेकर लंबी चौड़ी योजनाएं बनाई गई है 12 बिंदु पर यह मीटिंग होगी जिसमें पालकों के सवालों का जवाब शिक्षक देंगे या उनसे बेहतर जो उपाय हो सकते हैं वह सलाह भी लेंगे और सबसे बड़ी बात है फरमान जारी होने के पाच छ दिन बाद यानी 6 अगस्त से इस योजना को अमली जामा पहनाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं कि सरकार का यह कहना है कि जो स्कूलों को लेकर जो योजना बनी है उनकी जानकारी पालकों को दी जाएगी जिससे पालक स्कूल विभाग के निर्देश से जो उनकी जो योजना है उसका फायदा उठा सकते हैं लेकिन आप सोचिए कि जड़ जर भवन का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है बच्चे कैसे स्कूल जा रहे हैं इसका भी कोई ठौर ठिकाना नहीं है यानी ट्रैफिक यातायात की अलग समस्या है किस तरीके से आए दिन यह सुनने में मिलता है कि स्कूली बच्चे स्कूल जाते समय या स्कूल से घर लौटते समय सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं किस तरीके से स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और ऐसी परिस्थिति में निजी स्कूलों की तर्ज पर यह इस फरमान को लेकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मचाए देखना है कि पीठ थपथपा नहीं वाली इस योजना कितने दिनों तक चलती है l
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रविवार, 12 अप्रैल 2026
आशा की ऊँचाई और अनूठा सच
आशा की ऊँचाई और अनूठा सच
अपनी अनूठी आवाज़ से हिंदी फ़िल्मों को नई उड़ान देने वाली आशा भोसले ने ९२ साल की उम्र में विदा हो गई । उनकी बहन लता मंगेशकर की भी इतनी ही उम्र रही । ८ सितंबर १९३३ को उनका जन्म दिवस अब जयंती के रूप में मनाया जाएगा ।
1. "बहुमुखी प्रतिभा की रानी" (The Queen of Versatility)
जहाँ लता मंगदीकर जी को उनकी 'शुद्धता' और 'गंभीरता' के लिए जाना जाता था, वहीं आशा जी ने अपनी आवाज से हर तरह के प्रयोग किए।
• स्टोरी आइडिया: 'पिया तू अब तो आजा' के कैबरे से लेकर 'दिल चीज क्या है' की गजल तक और 'दम मारो दम' के हिप्पी कल्चर से लेकर 'दो लफ्जों की है दिल की कहानी' के रोमांस तक का सफर। उन्होंने साबित किया कि एक गायिका अपनी आवाज के जरिए अभिनय भी कर सकती है।
2. "साए से निकलकर अपनी पहचान बनाना"
लता मंगेशकर जी जैसी दिग्गज गायिका की बहन होने के नाते, शुरुआत में उनकी तुलना हमेशा लता जी से की गई।
• स्टोरी आइडिया: कैसे उन्होंने अपनी बड़ी बहन के स्टाइल को कॉपी करने के बजाय अपनी एक अलग, 'बोल्ड' और 'एनर्जेटिक' आवाज विकसित की। यह स्टोरी किसी के भी 'सेल्फ-मेड' बनने की प्रेरणा दे सकती है।
3. "पंचम और आशा: एक संगीत क्रांति"
आर.डी. बर्मन (पंचम दा) और आशा भोसले की जोड़ी ने भारतीय संगीत का चेहरा बदल दिया।
• स्टोरी आइडिया: वेस्टर्न बीट्स, रॉक-एंड-रोल और भारतीय शास्त्रीय संगीत का मेल। कैसे इन दोनों ने मिलकर 70 और 80 के दशक के युवाओं को एक नया साउंड दिया।
4. "उम्र को मात देने वाली आवाज"
आशा जी ने 10 साल की उम्र से गाना शुरू किया और 80-90 की उम्र तक उनकी आवाज में वही खनक बनी रही।
• स्टोरी आइडिया: 'रंगीला रे' (1995) के समय उनकी उम्र और उनके गायन की ऊर्जा का विश्लेषण। कैसे उन्होंने हर दशक की नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों (जैसे उर्मिला मातोंडकर या ऐश्वर्या राय) के लिए अपनी आवाज को ढाल लिया।
5. "संघर्ष और वापसी"
उनके निजी जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन संगीत ही उनकी ताकत बना।
79 साल की उम्र में बतौर मुख्य अभिनेत्री 'डेब्यू' (फिल्म: माई)
आशा जी ने साल 2013 में 'माई' (Mai) नाम की फिल्म से बॉलीवुड में बतौर लीड एक्ट्रेस कदम रखा।
• किरदार: उन्होंने एक ऐसी मां का किरदार निभाया था जो 'अल्जाइमर' (भूलने की बीमारी) से जूझ रही है और जिसे उसके बच्चे अकेला छोड़ देते हैं।
• खास बात: 79 साल की उम्र में किसी कलाकार का लीड रोल में डेब्यू करना अपने आप में एक रिकॉर्ड जैसा है। क्रिटिक्स ने उनके अभिनय की काफी तारीफ की थी और उन्होंने साबित किया कि एक कलाकार के लिए उम्र सिर्फ एक नंबर है।
बचपन में अभिनय की शुरुआत
आशा जी का अभिनय से रिश्ता काफी पुराना है। पिता दीनानाथ मंगेशकर जी के निधन के बाद, परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए आशा जी और लता जी ने कुछ फिल्मों में बाल कलाकार (Child Artist) के रूप में भी काम किया था।
• उन्होंने 'माझा बाल' (1943) जैसी कुछ मराठी और हिंदी फिल्मों में छोटी भूमिकाएं निभाई थीं।
3. संगीत और अभिनय का तालमेल
फिल्म 'माई' के दौरान उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके लिए अभिनय करना ज्यादा मुश्किल नहीं था, क्योंकि एक गायक जब गाना गाता है, तो वह अपनी आवाज़ के जरिए उस भावना को 'एक्ट' ही कर रहा होता है।
आशा भोसले जी का निजी जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम उतार-चढ़ाव वाला नहीं रहा है। उनके प्रेम और विवाह से जुड़े किस्से उनके व्यक्तित्व के विद्रोही और साहसी पक्ष को दर्शाते हैं।
16 साल की उम्र में बगावत और पहली शादी
आशा जी का पहला बड़ा प्रेम संबंध काफी चर्चा में रहा क्योंकि उन्होंने समाज और अपने परिवार (मंगेशकर परिवार) की मर्जी के खिलाफ जाकर शादी की थी।
• किस्सा: मात्र 16 साल की उम्र में उन्हें गणपतराव भोसले से प्यार हो गया, जो उस समय लता मंगेशकर के पर्सनल सेक्रेटरी थे। परिवार इस रिश्ते के सख्त खिलाफ था, लेकिन आशा जी ने घर छोड़कर उनसे शादी कर ली।
• नतीजा: यह रिश्ता काफी दुखद रहा और कुछ सालों बाद वे अपने बच्चों के साथ वापस अपने मायके लौट आईं। उनके नाम के साथ लगा 'भोसले' सरनेम इसी शादी की पहचान है।
2. ओ.पी. नैय्यर और संगीत की केमिस्ट्री
50 और 60 के दशक में संगीत निर्देशक ओ.पी. नैय्यर और आशा भोसले की जोड़ी ने संगीत की दुनिया में तहलका मचा दिया था।
• किस्सा: कहा जाता है कि उनके बीच पेशेवर रिश्तों से बढ़कर भी एक गहरा लगाव था। ओ.पी. नैय्यर ने ही आशा जी की गायकी को वह 'मदहोश' करने वाला अंदाज दिया जो उनकी पहचान बना।
• ट्विस्ट: सालों तक साथ काम करने के बाद, एक वक्त ऐसा आया जब दोनों के बीच अनबन हुई और उन्होंने फिर कभी साथ काम नहीं किया। यह बॉलीवुड के सबसे चर्चित 'प्रोफेशनल ब्रेकअप्स' में से एक माना जाता है।
आर.डी. बर्मन (पंचम दा) के साथ 'म्यूजिकल' लव स्टोरी
आशा जी के जीवन का सबसे खूबसूरत और यादगार हिस्सा आर.डी. बर्मन के साथ उनका रिश्ता रहा।
• किस्सा: पंचम दा, आशा जी से उम्र में 6 साल छोटे थे और उनके काम के बहुत बड़े प्रशंसक थे। दोनों ही अपने पिछले रिश्तों से आहत थे। संगीत के प्रति उनकी साझा दीवानगी ने उन्हें करीब लाया।
• शादी: 1980 में दोनों ने शादी कर ली। उनकी जोड़ी ने 'दम मारो दम' और 'पिया तू अब तो आजा' जैसे सदाबहार गाने दिए। पंचम दा के निधन तक वे साथ रहे और आज भी आशा जी उन्हें अक्सर याद करती हैं।
यह दिखाता है कि कैसे उन्होंने अपने निजी जीवन के संघर्षों को कभी अपनी कला के आड़े नहीं आने दिया।
शनिवार, 11 अप्रैल 2026
एफ़आईआर दर्ज कराने महिला विधायक को थाने में घंटों बैठना पड़ा
जब एफ़आईआर दर्ज कराने महिला विधायक को थाने में घंटों बैठना पड़ा
छत्तीसगढ़ में बदहाल हो चुकी कानून व्यवस्था को लेकर अभी कांग्रेस के प्रदर्शन को लोग भूल भी नहीं पाए थे कि बालोद की विधायक संगीता सिन्हा को थाने में जाकर एफआईआर करानी पड़ी आप कल्पना कर सकते हैं कि विधायक को यदि धरना देना पड़े एक एफआईआर के लिए तो छत्तीसगढ़ में थानों की क्या स्थिति है आसानी से समझा जा सकता है भले ही गृह मंत्री विजय शर्मा कितना भी दावा कर ले आंकड़े कितनी भी पेश कर ले कि कानून व्यवस्था अच्छी है कांग्रेस सरकार से लेकिन हकीकत तो यह है कि आज भी एफआईआर करने के नाम पर थाने में लोगों को परेशान किया जाता है घुमाया जाता है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण कल तब देखने को मिला जब एक महिला के साथ बदतमीजी करने का जो मामला था उस पर पुलिस एफआईआर करने को तैयार नहीं थी क्यों आखिर पुलिस को एफआईआर करने में क्या दिक्कत थी और 12 जुलाई की इस घटना से वह महिला इतनी परेशान थी कि उसने अपनी व्यथा विधायक से कही संगीता सिन्हा से उसके बाद संगीता सिन्हा थाना पहुंचे और थाने में भी विधायक के जाने के बाद एफआईआर नहीं की गई उन्हें धरने पर बैठना पड़ा और सुबह से शाम होते होते जब उन्होंने आईजी से लेकर तमाम सीएसपी भी वहां पहुंच गई थी चित्रा वर्मा तमाम लोगों को उच्चाधिकारियों को फोन करने के बाद शाम को एफआईआर दर्ज की गई महिला से छेड़छाड़ करने वाला कोई और नहीं वहां की एक पार्षद है उसके दामाद है अनुराग जैन उनके खिलाफ एफआईआर कर दी गई है लेकिन आप सोच सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और थानों की क्या स्थिति बन रही है याद कीजिए आपकी किस तरीके से गौ रक्षकों ने गुंडागर्दी करते हुए हमला किया था महानदी पूल पर जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी इस मामले को पुलिस ने मावली मानने से इंकार करते हुए अपने जो चालान पेश किए हैं आरोप पत्र जो कोर्ट में दाखिल किया है उसमें कह दिया है कि गौ रक्षकों की डर की वजह से वे जो तीनों लोग थे वो नदी में कूद गए और चट्टान में गिरने की वजह से उनकी मौत हो गई खुलेआम किस तरीके से चाकूबाजी की घटना हो रही है किस तरीके से हत्या की घटना अचानक बढ़ गई है चोरी का तो और भी बुरा हाल है यदि आप दो चार घंटों के लिए अपने मकान छोड़कर कहीं जाते हैं तो चोरी हो जाती है इस तरह की स्थिति कई कॉलोनियों में सुनाई देने लगी है खुलेआम अपराध हो रहे हैं ऐसी परिस्थिति में यदि विधायक को ही थाना जाना पड़े धरना देना पड़े एक एफआईआर के लिए तब आप कल्पना कर सकते हैं कि डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में किस तरह से चल रही और गृह मंत्री अपना मंत्रालय किस तरीके से चला रहे हैं हालांकि अभी सरकार परेशान है सरकार परेशान इसलिए है क्योंकि वह दो मंत्रियों का विस्तार नहीं कर पाई दो मंत्री पद खाली पड़े हैं निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति की सूची बन गई है उसे भी मोदी शाह शायद पास नहीं कर रहे हैं आगे नहीं बढ़ा रहे इसलिए नियुक्ति नहीं हो रही और नेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है क्योंकि सरकार बने यदि आठ महीने हो गए हैं और मंत्रिमंडल का विस्तार करने के लिए यह निगम मंडल आयोग की नियुक्ति के लिए भी यदि मुख्यमंत्री को बार-बार दिल्ली का दरवाजा खटखटाना पड़े तब कांग्रेस को क्यों मौका नहीं लग जाता कि यह रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार है क्या सिर्फ महतारी वंदन योजना को लागू करके छत्तीसगढ़ में वोटों की राजनीति संभव है क्योंकि जिस तरीके से सरकार चल रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और विधानसभा में असंतोष साफ तौर पर देखने को मिला जब सत्ता पक्ष के ही सीनियर विधायकों ने जो डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल में मंत्री रहे वे लोग ही विष्णुदेव साय सरकार को सवालों की झड़ी लगाकर खेर रहे थे और मंत्री असहाय महसूस कर रहे थे वह तो डॉक्टर रमन सिंह जैसे स्पीकर है इसलिए मामले को संभाल ले रहे थे लेकिन कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ की जो सरकार है उसका परसेप्शन जो विधानसभा में बना है वह बेहद ही हैरान कर देने वाला है तब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था को लेकर यह सरकार क्या निर्णय लेती है !
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गुरुवार, 9 अप्रैल 2026
स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं
स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड योजना ला रहे हैं और आम लोगों को तकलीफ ना हो इसलिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए काम करने का दावा किया जा रहा है लेकिन दूसरी छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार की दीमक का भेट चढ़ चुका है हर खरीदी में भ्रष्टाचार डॉक्टर रमन सिंह के जमाने में याद कीजिए डॉपलर से लेकर किस तरीके से मशीनों की खरीदी में जबरदस्त घोटाला हुआ था और अब भी लगातार घोटाला हो रहा है तो क्या इसके पीछे कोई माफिया का खेल चल रहा है किस तरीके से दवा कंपनी सप्लायर और विभागीय तंत्र इस पूरे खेल में शामिल होकर क्या सरकार को तो चुना लगा ही रहे हैं लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं पिछले दिनों विधानसभा में यह मामला गुंजा जिसमें दवाइयां मशीन रिएजेंट और ट्यूब खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का मामला उठा खूब हंगामा तीखी बहस भी हुई है मंत्री और सदस्यों के बीच अमर अग्रवाल बिलासपुर के विधायक हैं कभी रमन सरकार में वित्त मंत्री भी रहे उन्होंने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल को बुरी तरीके से खेल दिया और श्याम बिहारी जयसवाल ने इस मामले की जांच कराने की घोषणा तो कर दी है ध्यान आकर्षण सूचना के जरिए इस मामले को सबसे पहले बल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने उठाया और उन्होंने बताया कि किस तरीके से बिना बिना डिमांड के ही करोड़ों रुपए की खरीदी की गई जिसमें रिएजेंट दवाएं उपकन स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि जिन अस्पतालों को जरूरत नहीं थी जिसकी मांग नहीं थी वहां भी जबरदस्ती यह ग्रिया भेजी गई जहां मशीन नहीं है वहां रिएजेंट की सप्लाई हो रही है ऐसी दवाओं की आपूर्ति कर दी गई है जिसका एक्सपायरी सितंबर और नवंबर 2024 में होना है सीएजी की रिपोर्ट में भी इसे इस इसे लेकर अनियमितता उजागर हो चुकी है ी में जो दवाई की खरीदी की गई है मशीन की खरीदी की गई है रिजेंट की खरीदी की गई है ट्यूब की खरीदी की गई है और उसमें जिस प्रकार से रेट तय किए हैं बाजार में उससे सस्ते में उपलब्ध है और उससे ज्यादा रेट में जो खरीदी की गई है इसको लेकर के मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है और इसमें मुख्य रूप से जो मोक्षित मेडिकेयर साथ ही ना इंडिया के द्वारा जो खरीदी की गई है इसमें डी ईडीटी ए ट्यूब साथ ही इसमें डी डाइमर फुली ऑटो एनालाइजर मशीन और उसके साथ में रिजेंट दवाइयां यह जो खरीदी की गई है निश्चित रूप से इसमें बड़ा करप्शन का मामला है भ्रष्टाचार का मामला है और यह महालेखा कार के उसमें भी आया है जिसका निर्णय अभी तक नहीं हुआ है यह कंपनी के द्वारा कर सीज के द्वारा कराई नहीं गई है साथ ही किसी प्र इसमें जांच जो होनी चाहिए हुई नहीं आज इस मामले को लेकर के उठाया गया और इसमें मंत्री जी के द्वारा सदन में घोषणा की गई है एसीएस के अध्यक्षता में दो आईएस और मिलाकर के तीन लोग की कमेटी में इसकी जांच की जाएगी और उसकी रिपोर्ट तीन महीने के अंदर जांच कमेटी के द्वारा प्रस्तुत की जाएगी जहां पर डिमांड नहीं है जहां पर मांग नहीं है वहां दवाई की सप्लाई जहां पर व मशीन नहीं है वहां पर रिजेंट के आपको जो सप्लाई करना और इस प्रकार से जो एक बड़े स्तर पर जो बिना डिमांड के जो उसमें सप्लाई की गई है और जिस प्रकार से उसमें मिली भगत के द्वारा जो टेंडर लगा कर के ठेकेदार के द्वारा जो उसमें डिमांड की गई तो एक बड़ा मामला इससे उजागर होगा और प्रदेश में प्रकार से जनता के बीच में जो यह लगातार मामले आते रहे हैं इस मामले पर जांच होने के बाद में उनके ऊपर शक्ति से शक्ति कारवाई हो इसके लिए हमने मांग किया था मंत्री जी ने जांच के आदेश दिए हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से अपनी जेब भरने के लिए स्वास्थ जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग में भी भ्रष्टाचार का दीमक पहुंच गया है आम लोगों के जीवन के साथ किस तरीके से खिलवाड़ किया जा रहा है एक्सपायरी डेट की दवाएं जो जल्दी एक्सपायरी होने वाली है ऐसी दवाओं की सप्लाई करके किस तरीके का खेल हो रहा है !
रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में
रायपुर से हैदराबाद को जोड़ने वाली योजना ठंडे बस्ते में
केंद्र के सरकार द्वारा यानी मोदी सत्ता के द्वारा लगातार 36 गढ़ की हो रही उपेक्षा की खबरों के बीच एक और चौकाने वाली खबर आई है महत्वकांक्षी योजना 45 हजार करोड़ की इस योजना को भी मोदी सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है हालांकि यह योजना नितिन गडकरी के विभाग की है सड़क निर्माण से संबंधित है लेकिन अचानक ही जिस तरीके से दैनिक प्रगति रिपोर्ट ही बंद करने की बात कर दी गई है पत्र लिख दिया गया है बकायदा उसके बाद इस महत्वकांक्षी योजना जो छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण होता खासकर यहां से बड़ी संख्या में लोग हैदराबाद जाते हैं इलाज के लिए और इस योजना के बंद होने से किस तरह का नुकसान होगा इसकी भी कोई कल्पना नहीं कर सकता 4500 की यह योजना भारत माला प्रोजेक्ट के तहत रायपुर राजनांदगांव होते हुए यह योज यह सड़क हैदराबाद तक जाना था महत्त्वपूर्ण योजना लेकिन कहा जा रहा है कि इस योजना में जो 45 हज करोड़ रुपए लगने थे शायद उसे बचाया गया है क्योंकि बिहार और आंध्र प्रदेश को इस बार बजट में बड़ी राशि दी गई है हरियाणा महाराष्ट्र और झारखंड में चुनाव होने हैं उ से लेकर भी बजट में लंबे चौड़े प्रावधान किए गए हैं लेकिन छत्तीसगढ़ को क्या मिल रहा है यह सबसे बड़ा सवाल है डबल इंजन की सरकार है उसके बाद भी लगातार राज्य बनने के बाद लगातार 10 सीटें देने वाली भारतीय जनता पार्टी को यदि कैबिनेट मिनिस्टर के लायक भी कोई नहीं लग रहा है तो फिर इसे क्या कहा जाए हालांकि इसे लेकर कई तरह के सवाल भी उठे सिर्फ एक राज्य मंत्री मिला है तो खन साहू के रूप में लेकिन अब जो खबरें आ रही है वह बेहद ही चौकाने वाली खबर इसलिए है क्योंकि इससे छत्तीसगढ़ को बहुत बड़ा फायदा होने वाला था रायपुर राजनाथ गांव गढ़ चिरौरी गोमी परी आदिलाबाद रामा करीम नगर होते हुए यह सड़क हैदराबाद को जोड़ती थी जिसमें छत्तीसगढ़ में 101 किलोमीटर सड़क बनना था तो महाराष्ट्र में 70 किलोमीटर और बचे 388 किलोमीटर सड़क आंध्र प्रदेश में है और इसे अचानक क्यों ठंडे वस्त डाल दिया गया है इसे लेकर अभी तक सरकारी स्तर पर कोई भी जवाब नहीं आया है कहा जाता है कि इस सड़क मार्ग में वन भी पढ़ते हैं मोहला मानपुर और गढ़ चलो गढ़ चिरौली का क्षेत्र आता है जहां अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया था हालांकि दिक्कत थी अधिग्रहण में क्योंकि वन भूमि को अधिग्रहण करने का जो एनजीटी जो मापदंड है उसकी वजह से कुछ दिक्कत थी लेकिन लगातार दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाए जा रहे थे और कल ही अचानक दैनिक प्रगति रिपोर्ट बनाने का काम रोक देने का पत्र भी जारी कर दिया गया डीपीआर बंद करने के इस पत्र के बाद हड़कंप मचा हुआ है जो इस परियोजना में लगे हुए थे इस योजना में लगे हुए थे सरकारी अधिकारी बकायदा सर्वे हो रहे थे कि किस तरीके से सड़क बन छत्तीसगढ़ में जो 101 किलोमीटर सड़क बनना है उसके रास्ते क्या होंगे यह सब भारत माला प्रोजेक्ट के तहत हो रहा था तब सवाल यही है कि आखिर छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कब तक होते रहेगी और अब जब इस परियोजना को साढे हजार करोड़ के इस परियोजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है तो इसकी शुरुआत अब कब होगी !






