सोमवार, 4 मई 2026

जब बुरी तरह से फँस गई महिला मंत्री

जब बुरी तरह से फँस गई महिला मंत्री


 प्रदेश की एकमात्र महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के जेठ के द्वारा जिस तरीके से शराब खोरी के दौरान पुलिस से उलझा गया और उसके चलते लक्ष्मी राजवाड़े की जो छीछालेदर हुई है क्या इस पर पुलिस अब लीपापोती का खेल कर रही है यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इस पूरे मामले को लेकर जिस प्रधान आरक्षक देवनारायण नेताम ने रिपोर्ट रोजनामचा में दर्ज की थी किस तरीके से 20 बार फोन करके उन्हें धमकाया गया था उस पर जुर्म दर्ज करने की बजाय बस स्टैंड में मौजूद एक व्यक्ति के शिकायत पर जमानती धारा लगाकर मामले की तीसरी करने की कोशिश की हालांकि इस पूरे मामले में महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने क्या कहा यह सुन लीजिए पहले हमारे घर के हो चाहे किसी और के घर के हो जो गलत किया उ गलत का परिणाम भगत पड़े हमारे घर के हो चाहे किसी और के घर के हो जो गलत किया उ गलत का परिणाम भगत पड़ेगा लक्ष्मी राजवाड़े तो साफ कह रही हैं कि जिसने गुनाह किया है उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए लेकिन क्या यह सिर्फ मीडिया में कहने की बात है क्योंकि पुलिस कप्तान ने तो पहले ही महिला मंत्री के जेठ राजू राजवाड़े की दबंगई के आगे प्रधान आरक्षक को लाइन अटैच कर चुके हैं तब क्या उनका लाइन अटैच का जो फैसला है वह वापस होगा क्या देवनारायण नेता जैसे ईमानदार इस मामले में तो ईमानदारी दिखाई दे रही है के साथ न्याय होगा और उनकी रिपोर्ट पर जुर्म दर्ज होगा यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अब इस मामले को लेकर पार्टी के भीतर भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है कहा तो यहां तक जा रहा है कि महिला मंत्री की क्लास तक ली जा चुकी है और इस मामले को लेकर कांग्रेस के नेता अब सक्रिय होने लगे हैं दरअसल पूरे मामले को आप समझेंगे तो हैरान हो जाएंगे कि एक व्यक्ति सिर्फ मंत्री के जेठ होने की वजह से वह पुलिस की वर्दी के बिल्ले नि ल लेता है फाड़ देता है गाली गलोज करता है धमका है और थाने से जाने के बाद भी 200 बार फोन करके धमका आता है और उस हवालदार को पुलिस कप्तान लाइन अटैच कर देता यह किस तरीके का खेल है हालाकि यह मामला अब तूल पकड़ने लगा है और कहा जा रहा है कि पार्टी स्तर पर भी लक्ष्मी राजवाड़े को लेकर कई तरह की शिकायतें पहले से थी लेकिन चर्चा तो इस बात की भी है कि जिस एप्रोच के तहत वह मंत्री बनाई गई है ज्ञात हो कि दरअसल विष्णु देव साय सरकार पर यह आरोप इसलिए लग रहे हैं क्योंकि वे मंत्रिमंडल का विस्तार तक अपनी मर्जी से नहीं कर पा रहे हैं इसलिए कहा जा रहा है कि विष्णु देव साय सरकार में जिसे भी मंत्री पद मिला है वह किसी ना किसी तरह से पहुंच रखता है और उन्हें मंत्री पद इसी वजह से मिला है आखिर लक्ष्मी राजवाड़े को किसकी पहुंच से मंत्री पद मिला है यह बड़ा सवाल हो सकता है राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चा है लेकिन कहा जा रहा है कि अब पुलिस इस पूरे मामले में लीपापोती करने लगी और लक्ष्मी राज वाड़े से जो संतुलित बयान दिलवाया गया है वह भी किसी के इशारे से दिलाया गया है हमारे घर के हो चाहे किसी और के घर के जो गलत किया गलत का परिणाम भगना प तब देखना है कि आने वाले दिनों में जो करतूतों का वीडियो जारी हो रहा है या वायरल हो रहा है उस पर प्रदेश सरकार और भारतीय जनता पार्टी क्या निर्णय लेती है !

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https://youtu.be/PQ23EU90RRo?si=OVuoqMopHQhmv27o

रविवार, 3 मई 2026

डीपीएस में बच्ची से छेड़छाड़ का मामला तूल पकड़ा लेकिन क्या हुआ

डीपीएस में बच्ची से छेड़छाड़ का मामला तूल तो पकड़ा लेकिन क्या हुआ 

दुर्ग में डीपीएस में हुए एक मासूम से अनाचार के मामले को लेकर बवाल तो खूब मचा लेकिन कार्रवाई क्या हुई कोई नहीं जानता । ऐसे में लोगो की याद वापस लाने हमने उस समय के घटनाक्रम को फिर से बताने की कोशिश की है ।

छत्तीसगढ़ की राजनीति एक बार फिर गरमाने लगी और इस बार गरमाने की वजह भूपेश बघेल ही है दरअसल चुनाव होने के बाद जब भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तब से भूपेश बघेल को घेरने की कोशिश जारी है हालाकि अभी तक भूपेश बघेल बचे हुए हैं लेकिन आगे बचे रहेंगे कहना बेहद कठिन है क्योंकि मामला सिर्फ कोयला और शराब घोटाला नहीं है बल्कि महादेव सट्टा पप से लेकर दूसरे तरह के भी मामले अब सामने आने लगे हैं बलौदा बाजार हिंसा के बाद जिस तरीके से सरकार ने भूपेश बघेल को घेरने के लिहाज से उनके समर्थक विधायक देवेंद्र की गिरफ्तारी की है उसके बाद राजनीति उफान पर है देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी के खिलाफ जब भूपेश बघेल और पूरी कांग्रेस सड़क पर उतरने लगी तो इसी दौरान भूपेश बघेल की सुरक्षा चूक को लेकर मामला गरमाने लगा और बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद पर भूपेश बेल का रास्ता रोककर उनके सुरक्षा अधिकारियों से के साथ बदतमीज जी का जो मामला सामने आया उसके बाद कांग्रेसी सड़क पर उतर आए भिलाई में जब कांग्रेसी थाना घेरने जा रहे थे तो इस दौरान पुलिस लाठी चार्ज करती और राजनीति को लेकर जब दुर्ग एसपी जितेंद्र शुक्ला का रुख कड़ा दिखाई देने लगा तो भूपेश भेल ने लाठी चार्ज के बाद सीधे-सीधे एसपी को ही गुंडा खेत सुरक्षित है ना गाय गरवा सुरक्षित है ना बेटी बहु सुरक्षित है नाना लमन तक सुरक्षित नहीं है बहुत प्रसिद्ध स्कूल है  अनाचार के शिकायत मिले है लेकिन एसपी ऐसे धमका शिकायत कर फर देख ले मतलब सब बड़ गुंडा कोई है तो दुर्ग में एसपी बन गए और अब एसपी के तेवर के बाद क्या भूपेश बघेल उन्हें घेरने के लिए नई रणनीति बना रहे हैं और क्या डीपीएस में हुई छेड़छाड़ के मामले को लेकर दुर्ग एसपी के खिलाफ मोर्चा खोल देंगे और कोई बड़ा आंदोलन खड़ा करेंगे दरअसल डीपीएस में एक बच्ची की तबीयत खराब होती है और उसे जब इलाज के लिए मेडिकल हॉस्पिटल ले जाया जाता है तो रिपोर्ट सामने आती है कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट के साथ छेड़छाड़ की गई और इस घटना के सामने आते ही डीपीएस के सामने पालकों का प्रदर्शन होता है लेकिन कहा जाता है कि इस मामले में एसपी की भूमिका बेहद विवादास्पद है क्योंकि प्रदर्शन पालक कर चुके हैं डीपीएस के खिलाफ और इस मामले में पास को एक्ट के तहत कार्रवाई होनी थी लेकिन कार्रवाई करने की बजाय एसपी जितेंद्र शुक्ला ने कह दिया कि इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है उसे लेकर विवाद शुरू हुआ है और कल भूपेश बघेल सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने राजधानी में पत्रकार वार्ता लेकर एसपी को हटाने की मांग कर दी भूपेश बघेल के साथ पत्रकार वार्ता में कांग्रेस के दिग्गज माने जाने वाले नेता सत्यनारायण शर्मा रवींद्र चौबे धनेंद्र साहू सहित कई नेता उपस्थित इन लोगों ने डीपीएस में बच्ची के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में प्रदेश सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए तो एसपी पर भी गंभीर आरोप लगाए भूपेश बघेल ने तो इस पूरी घटना का सिलसिले वार बरा देते हुए कहा कि बच्ची की तबीयत खराब होने पर डॉक्टर ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि प्राइवेट पार्ट में जखम है जानकारी में आने के बाद पालकों ने स्कूल में 2 अगस्त को प्रदर्शन भी किया याने सोच एक महीने होने जा रहा है इस पूरे मामले में लेकिन पुलिस की भूमिका क्या है यह सोचा जा सकता है प्रिंसिपल और दुर्ग के एसपी ने बयान दिया कि बच्ची के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं एसपी ने मीडिया रिपोर्ट को गलत करार देकर धमकाया बेशर्मी के साथ एसपी ने कह दिया कि इसमें कोई तथ्य नहीं है पालक भी एफआईआर नहीं चाहते भूपेश बघेल ने पूछा कि कौन पालक होगा जो अपनी बच्ची से छेड़छाड़ के बाद अपराधी के खिलाफ कारवाई नहीं चाहेगा उन्होंने तो डीपीएस के प्रिंसिपल के पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की भी मांग कर दिए और सवाल उठाया कि क्यों नहीं कराया गया बगेल ने तो यहां तक आरोप लगा दिया कि एसपी के बच्चे भी उसी स्कूल में पढ़ते हैं और जिस व ग्रुप में वे जुड़े हुए हैं उस ग्रुप में भी जब उन्होंने इसे तथ हीन बताया था तो पालकों ने गुस्सा जाहिर किया जबकि पास्को एक्ट में प्रावधान है कि सूचना मिलते ही जुर्म दर्ज किया जाता है उसके बाद जांच होती यदि पालक 2 अगस्त को प्रदर्शन कर रहे थे तो क्या शासन प्रशासन की यह जिम्मेदारी नहीं थी कि उस बच्ची का मेडिकल टेस्ट कराया जाता लेकिन यह सब नहीं हुआ तो दूसरी तरफ इस पूरे घटनाक्रम में भूपेश बघेल ने अपनी ताकत ना केवल सत्ता को दिखाई है बल्कि पार्टी के भीतर भी अपनी ताकत दिखाई है और एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होंने जेल में बंद अपने खास समर्थक देवेंद्र यादव को राष्ट्रीय पदाधिकारी जैसे महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दिलवा दी अब देखना है कि राजनीति किस करवट बैठती है !

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https://youtu.be/B9E_ngA57KY?si=NbQxy2vALdXY_7cs

शनिवार, 2 मई 2026

भाजपाई आपस में भीड़े, सरे आम गुंडागर्दी,

 

भाजपाई आपस में भीड़े, सरे आम गुंडागर्दी

सत्ता का नशा जब सर चढ़कर बोलता है तो वह कुछ भी नहीं देखता चाहे संघ का कितना भी बड़ा संस्कार देने का दावा हो या फिर पार्टी का अनुशासन सब कुछ धरा का धरा रह जाता है जब सता का नशा सर चढ़कर बोलता है और बड़ी मुश्किल से ना उम्मीद के साथ मिली सत्ता नशा का तो कुछ और ही मतलब होता है . कांव काव खाव खाव के इस दौर में जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी के दो नेता आपस में भीड़ गए उसे लेकर संघ के संस्कार पर तो सवाल उठ ही रहे हैं साथ ही दमदार माने जाने वाले सांसद बृजमोहन अग्रवाल पर भी सवाल उठ रहे हैं बृजमोहन अग्रवाल पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि जो दोनों नेताओं ने सड़क पर खुलेआम गाली गलोज के साथ मारपीट और गुंडागर्दी की है वे दोनों नेता सचिन मेघानी हो या फिर राहुल चंदना नहीं दोनों ही नेता बृजमोहन अग्रवाल के करीबी लोगों में गिने जाते हैं कटोरा तालाब चौक के इस मामले में जिस तरीके की गुंडागर्दी गाली गलो सरे राह हुई उससे आने जाने वाले शर्मसार हो रहे थे क्या महिलाएं क्या बच्चे और उधर से गुजरने वाले तमाम लोग तमाशा बिन इसलिए बने थे क्योंकि इन गुंडागर्दी के बीच कौन मुंह खोलकर अपनी पिटाई करवाता मामला लेन देन का है यह बताया जा रहा है दोनों ही मोहन सेठ के समर्थक है और दोनों के बीच जिस तरीके से राहुल चंद नानी के होटल में घुसकर पहले विवाद हुआ और होटल से शुरू हुई मारपीट बाहर तक निकला आप खुद वीडियो में देख रहे होंगे कि किस तरीके से यातायात व्यवस्था चौपट हो गई थी पुलिस का कहीं अता पता नहीं था पुलिस को फोन भी कुछ लोगों ने किया लेकिन घंटों बाद पुलिस तब पहुंची जब एक पक्ष जा चुका था मामला पुलिस तक पहुंचा राहुल चंद नानी के रिपोर्ट पर सचिन मेघानी और उनके लोगों पर जुर्म दर्ज किया गया है वहीं सचिन मेघानी ने भी आवेदन दिया है उसके आवेदन पर अभी तक जुर्म दर्ज नहीं हुआ है और कहा जा रहा है कि समझौते का प्रयास हो रहा है क्या इस तरह की गुंडागर्दी खुलेआम मारपीट के मामले में पुलिस को स्वतः संजन लेकर दोनों के खिलाफ कारवाही नहीं करनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि सत्ता उनकी है धमक उनकी है और दमदार माने जाने वाले सांसद बृजमोहन अग्रवाल उनके हैं ऐसे में बहुत जल्दी इस मामले का पटक शेप हो जाएगा समझौता हो जाएगा लेनदेन का विवाद सुलझ जाएगा यह भी लोग संभावना जता रहे हैं लेकिन जिस तरीके की गुंडागर्दी हुई है उसे लेकर कहा जा रहा है कि सत्ता मिलते ही भाजपाइयों के तेवर बदल गए और इसी तरह के कई मामले कई जगह पर सुनाई देने लगे हमारी टीम लगी हुई है हम विस्तार से घटनाओं को आपके सामने रखेंगे लेकिन जो मीडिया रिपोर्ट आई है उस मुताबिक नेताजी होटल के संचालक राहुल चंद नानी की रिपोर्ट पर सचिन मेघानी करण बजार दिव्यांग सक्सेना मनोज जोशी कमल पारक याकूब गनी सहित कई लोगों जो नामजद नहीं है बहुत सारे लोग पहुंचे थे उसके होटल में वहीं सचिन मेघानी ने भी शिकायत करके एफआईआर दर्ज करने की मांग की है जिस तरीके का वीडियो वायरल हो रहा है जिस तरीके की गाली गलौज हो रही है आप सोच सकते हैं कि राजधानी में कानून व्यवस्था की क्या स्थिति है हालांकि कानून व्यवस्था को लेकर गृह मंत्री विजय पहले ही निशाने में अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है एक जगह पुलिस संभालने जाती है तो दूसरे मोहल्ले से इस तरह की खबर आती है और यदि कोई पुलिस वाला ईमानदारी से काम कर दे तो किस तरीके से मंत्रियों का ौस या फोल सामने आता है यह भी चर्चा का विषय हमने कल ही विस्तार से बताया कि किस से शराब खोरी कर रहे एक महिला मंत्री के जेठ को जब पुलिस ने चौकी ले आया पकड़कर तो किस तरीके से उस प्रधान आरक्षक आदिवासी प्रधान आरक्षक को धमकी दी जा रही है उसे एसपी ने लाइन अटैच कर दिया तब ऐसी परिस्थिति में क्या सूचना मिलने के बाद भी क तालाब चौक में पुलिस के नहीं पहुंचने की यही वजह थी आखिर पुलिस कैसे काम करें यह सबसे बड़ा सवाल है !

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https://youtu.be/V2NwsAhBDoQ?si=0gG09JdgaDCU9pR1

शुक्रवार, 1 मई 2026

कुख्यात क्यों होने लगा होटल बेबीलॉन ग्रुप, क्या है पूरा मामला

 

कुख्यात क्यों होने लगा होटल बेबीलॉन ग्रुप, क्या है पूरा मामला

छत्तीसगढ़ की राजधानी के सबसे शानदार होटल ग्रुप में शुमार बेबी लान ग्रुप अपनी करतूतों की वजह से पहले ही कुख्यात हो चुका है और फ़र्ज़ी कैफे ने रही सही कसर भी पूरी कर दी । नियम क़ानून  को अपनी जेब में रखने के कितने ही मामले हैं । जुआरियों के साथ गिरफ्तारी के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या बेबी लान  संचालक अपनी ताकत पैसे और पहुंच के बल पर कुछ भी कर रहे हैं क्या उनके ग्रुप के होटलों में अ यासी भी हो रही है या सिर्फ जुआ खिलाने का ही काम बड़े पैमाने पर हो रहा है जिस तरीके से लोग गिरफ्तार हुए हैं उनके बारे में हम विस्तार से बताए उससे पहले बता देते हैं कि बेबी लान ग्रुप की धमक की चर्चा पहली बार नहीं हो रही है इससे पहले बेबीलोन कैपिटल पर सरकारी जमीन और नाले पर कब्जे का जो आरोप लगा था वह सालों चलते रहा निगम की हिम्मत नहीं हो रही थी लेकिन सत्ता बदलने के बाद जिस तरीके से एक मंत्री हड़ गए थे उसके चलते बेबी लान के इस कब्जे को बड़ी मुश्किल से हटाया गया था लेकिन कोई कारवाई नहीं की गई थी केवल कब्जा हटाया था निगम ने कोई जुर्म दर्ज नहीं किया था जबकि इतने बड़े क पर कोई दूसरा व्यक्ति होता तो उसके खिलाफ जुर्म दर्ज भी होता और इसके बाद बेबी लान इन चर्चा में तब आया था जब अंबिकापुर की एक लड़की की हत्या हो गई थी एक रूम में और पुलिस को घुसने नहीं दिया गया था पुलिस बारबार मोबाइल के लोकेशन के आधार पर बेबी लान इन होटल पहुंचती थी और उनके संचालक के दबाव में वह लौट आती थी लेकिन जब पीड़ित पक्ष ने दबाव बनाया भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं अंबिकापुर के गुप्ता परिवार और उन्होंने जब दबाव बनाया शासन की तरफ से तब जाकर पुलिस घुस पाई और लाश बरामद हुई थी इसके बाद भी कई तरह के विवाद सुन्य समझने को आते रहे लेकिन कारवाही नहीं हुई हो रही थी लेकिन कल जिस तरीके से कारवाई हुई वह भी कम चौकाने वाली बात नहीं है और कहा जा रहा है कि इसमें भी शहर के एक विधायक कहां था उन्होंने ही पुलिस पर दबाव बनाया था कि बेबी लान होटल के कमरा नंबर 115 में शहर के नामी गिरामी धनाढ्य संभ्रांत माने जाने वाले लोगों के बच्चे जुआ खेड़ रहे हैं लाखों रुपए के तब कहीं जाकर पुलिस सक्रिय हुई थी और होटल में छापेमारी की कारवाई की थी इसमें रायपुर के सदर बाजार सराफा से जुड़े परिवार के युवक तो शामिल थे ही धमतरी भाटापारा जैसे शहर के संभ्रांत माने जाने वाले परिवार के युवक भी शामिल थे और इसके अलावा जब दबाव बढ़ा तो पुलिस ने बेबी लान होटल के संचालक परमवीर पर भी जुर्म दर्ज किया है जिन लोगों पर वाही की है होटल के कमरा नंबर 115 में चल रहे जुआ के पाद उनमें निखिल सिंघानिया बड़ा नाम है नाम से ही आपको लग रहा होगा कि निखिल सिंघानिया बिलाईगढ़ के हैं ऋत्विक भंसाली टागोर नगर के हैं सदर से ही संबंधित है पारस वाधवा शंकर नगर रायपुर के हैं यश चावला कोस्टा पारा धमतरी ऋषभ भंसाली टैगोर नगर यह भी ज्वेलर्स से ही संबंधित परिवार है दर्शन मूलवानी साई वाठिका कॉलोनी देवपुरी का है गौरव गोलछा यह भी टैगोर नगर और संबंध सदर से यानी आप यह समझिए कि सदर के ज्यादातर सराफा व्यवसाई टैगोर नगर में ही शिफ्ट हो गए इसलिए उनका मूल पता टैगोर नगर ही होता है अक्षय सचदेव ये आमापारा धमतरी के हैं पंकज चावला दलदल शिवनी रायपुर के हैं निखिल जगताप यह बास पानी धमतरी के हैं यानी ये सारे लोग सराफा व्यवसाय से और बड़े ही रहिस खानदान के माने जाते हैं इन सबको पुलिस ने जुआ एक्ट के तहत गिरफ्तार किया और ररा यह पुलिस का कि बहुत बाद में नामों की घोषणा की गई छापा पढ़ने के बाद जब दबाव पड़ा पड़ा पत्रकारों ने नाम पूछने लगे तब कहीं जाकर पुलिस ने नाम उजागर किया था इन बड़े संभ्रांत लोगों का तो सवाल तो यही है कि क्या छत्तीसगढ़ में जो बड़े होटल व्यवसाई हैं उनका खेल क्या है बेबी लान तो कुख्यात होही गया अपनी कई तरह की करतूत सामने आने के बाद अब देखना है कि ऐसे मामले में पुलिस क्या कारवाई करती है !

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https://youtu.be/bZdUk9DPl2o?si=MPUnRwcX2hUhy5SS

गुरुवार, 30 अप्रैल 2026

जब चौकी प्रभारी को ईमानदारी की सज़ा

जब चौकी प्रभारी को ईमानदारी की सज़ा 

 छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार और उसके गृह मंत्री से कानून व्यवस्था तो संभल नहीं रही है और अब कानून व्यवस्था संभालने में निकली पुलिस को ही यदि निलंबित कर दिया जाए तो इसे आप क्या कहेंगे और वह भी आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते आदिवासी प्रधान आरक्षक को निलंबित कर दिया जाता है क्योंकि उसने बस स्टैंड में खुलेआम कार में बैठकर शराब पीने वालों को गिरफ्तार करके चौकी तक ले आया था देवनारायण नेताम प्रधान आरक्षक यही नेता में आदिवासी समाज के और उन्होंने जब खुलेआम शराब खोरी को लेकर सवाल जवाब किया तो शराब पीने वाला एक युवक ने स्वयं को मंत्री का जेठ बताने लगा महिला मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं आप सोचिए कि किस तरीके की मंत्री है और उनका जेठ जो पुलिस को धमकाने लगा लेकिन देवनारायण नेताम उनकी धमकी में नहीं आकर उन्हें चौकी में ले आए जहां चौकी में भी उसने अपने रुतबे का इस्तेमाल करते हुए ना केवल देवनारायण नेताम के साथ धक्का मुक्की की बल्कि छीना झपटी में देवनारायण नेताम की वर्दी फट गई या बिल्ला निकल गया और उसके बाद जो कुछ खेल हुआ व हैरानी की बात नहीं है कहा जाता है कि इसकी खबर ल ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और एसपी ने देवनारायण नेताम को आदिवासी है उसे अटैच कर दिया लाइन अटैच कर दिया और उस युवक को थाने से ही छोड़ दिया बगैर कारवाही की क्योंकि वह महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े का जेट बताया जा रहा और इतना ही नहीं उस प्रधान आरक्षक को जिस तरीके से लगातार धमकी मिल रही है वह भी हैरानी की बात है उन्हें किसी स्थान का नाम लेकर कहा जा रहा है कि यहां आइए फिर बताते हैं कि तुम्हारी पुलिस क्या करती है यानी आप सोचिए कि किस तरीके से छत्तीसगढ़ में डबल इंजन की सरकार चल रही है प्रदेश में अपराध के आंकड़े आसमान छू रहे हैं नशाखोरी को लेकर तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी बताया कि किस तरीके से गांजा जैसे मामले में 36 गढ़ किसी भी दूसरे राज्य से औसतन डबल स्थिति में है यानी मनमाने गांजा की बिक्री हो रही है नशाखोरी को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहे और राजधानी में लगातार नसेर द्वारा अपराध को अंजाम दिया जा रहा है ऐसे में चौकी प्रभारी ने जब शराब पीते खुलेआम शराब पीते दो लोगों को पकड़ा और थाने तक लाया तो उनके साथ किस तरीके से सत्ता में बैठे लोगों ने करतूत किया यह किसी से छिपा नहीं है सवाल क्या सिर्फ इतना है कि देवनारायण नेता आदिवासी समाज के हैं इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री आदिवासी है इसलिए हिम्मत दिखा दी थी और उसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है आगे क्या होगा देवनारायण नेताम के साथ कहना बेहद मुश्किल है हालांकि एसएसपी का दावा है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और सबके खिलाफ कारवाही होगी तो क्या ये इस तरह की कारवाही होगी कि एक प्रधान आरक्षक जो अपनी ड्यूटी बजा रहा है और मंत्री का जेठ बताने के बाद भी चौकी तक ले आया उस प्रधान आरक्षक को ईमानदारी का इनाम देने की बजाय उसे लाइन अटैच कर देना यह किस तरीके का डबल इंजन है और गृह मंत्री विजय शर्मा दावा करते हैं कि अपराध क्याम हो रहे और जिस तरीके का खेल राजनीति में इन तीनों छत्तीसगढ़ में चल रहा है वह क्या कम चौकाने वाला है जो ईमानदारी से ड्यूटी बजाने वालों के साथ कारवाई की जा रही ऐसे में कौन पुलिस वाला भला ऐसे नसेड़ी और अपराधियों के खिलाफ कारवाही करने की हिम्मत जुटा सकता है किसे अपनी नौकरी प्यारी नहीं है तब सवाल यह है कि क्या इस मामले में उच्च स्तरी जांच करके अपराधियों के खिलाफ कड़ी कारवाही नहीं की जानी चाहिए किसके दबाव में आकर एसपी ने लाइन अटैच किया देवनारायण नेताम को क्या उसकी भी गंभीरता से जांच नहीं होनी चाहिए विष्णु देव सय स्वयं को आदिवासी समाज का कि मुखिया बताने सेव हम को नहीं थकते और एक आदिवासी प्रधान आरक्षक को सिर्फ इसलिए लाइन अटैच कर देना कि वह शराब खोरी कर रहे युवको को चौकी तक ले आया देखना होगा इस मामले में क्या कुछ होता है अभी तक कांग्रेस की किसी तरह की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है लेकिन मामला बेहद गंभीर है क्योंकि मंत्री से जुड़ा मामला है और मंत्री एक मात्र महिला मंत्री महिला एवं बाल विकास मंत्री उनके कई तरह के मामले अब सामने आने लगे हैं हम हमारी टीम लगी हुई है विस्तार से आपको पूरी जानकारी देंगे !

Video देखे


https://youtu.be/Q_HI8mTE31g?si=p1TLZ-5Gg5Xjn8O0

बुधवार, 29 अप्रैल 2026

भूपेश को घेरने के चक्कर में बीजेपी नेताओं की मुसीबत बढ़ी

 

भूपेश को घेरने के चक्कर में बीजेपी नेताओं की मुसीबत बढ़ी

सत्ता में आते ही भारतीय जनता पार्टी डबल इंजन की सरकार विष्णु देव साय की सरकार ने जिस तरीके से एकएक मामले को सीबीआई को सौंपना शुरू किया है क्या उससे भ्रष्टाचार मिट पाएगा या अधिक मामले को सीबीआई को सौंपा गया है क्या उसका का परिणाम सुखद आएगा क्योंकि सीबीआई का जो परसेप्शन रहा है वह न्यायालय में जाकर टाय टाए फिस हो जाने वाला रहा है और इस दौर में तो सीबीआई हो ईडी हो या तमाम तरह की इस तरह की जितनी भी संस्थाएं हैं सब पर राजनीतिक द्वेष के साथ कारवाई करने का आरोप लगता रहा है ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस महादेव सट्टा को सौंपा है उसे लेकर बेहद बवाल मचा था इससे पहले हम बता देते हैं कि दो और मामले सीबीआई को सौपे गए जिसमें से एक बीरपुर हत्या का मामला था जो चुनावी राजनीति में बड़ा मुद्दा था और इसके चलते दुर्ग जिले में कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया था और कद्दावर मंत्री र चौवे ताम्र साहू रुद्र गुरु सब चुनाव हार गए थे और इस मामले को सीबीआई को सौंपा गया है क्या कुछ कारवाई हो रही है अभी किसी की जानकारी में नहीं दूसरा मामला था यह भी चुनाव में खूब हल्ला हुआ था पीएससी घोटाले का जिसमें राज्यपाल के यहां तैनात अधिकारियों पीएससी अध्यक्ष पीएससी सचिव और कई कांग्रेस के नेताओं के रिश्तेदारों का चैन का मामला था भर्ती पीएससी ने निकाली थी इस मामले को भी सौंप दिया गया है कारवाही कहां तक हो रही है किस तरीके से गिरफ्तारी होगी अभी कहना मुश्किल है अब तीसरा मामला महादेव सट्टा एक्ट का है इस मामले को लेकर बहुत बवाल मचा बवाल तो यहां तक मचा कि जो मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर है उस उसके साथ भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं की तस्वीर तक कांग्रेस ने जारी कर दी थी जिसमें डॉक्टर रमन सिंह थे प्रेम प्रकाश पांडे थे और भी बहुत सारे भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ महादेव सट्टा संचालित करने वाले सौरभ चंद्राकर की तस्वीर थी कहा जा रहा है कि इस मामले में कई आईपीएस घेरे में है हालांकि अभी तक जितने भी बड़े मामले सामने आए हैं चाहे कोयला घोटाला हो या शराब घोटाला हो सब में नाम तो रहे आईपीएस अधिकारियों के लेकिन किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई गिरफ्तारी केवल आईपीएस लोगों की हुई तो क्या महादेव सट्टा ए में जिस तरीके से दुर्ग रायपुर जैसे शहरों में उस दौरान पदस्थ आईपीएस लोगों के नाम थे क्या उनकी गिरफ्तारी होगी यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए है क्योंकि छोटे मछलियां तो गिरफ्तार हुई है अब तक कोई बड़ी मछली गिरफ्तार नहीं हुई क्योंकि संचालक करने वाले लोग दुबई में जाके बैठे हैं और अभी तक महादेव सट्टा ए पर प्रतिबंध भी नहीं लगा है कारवाही की बात की जाए तो 300 से ऊपर गिरफ्तारी हो चुकी है देश भर के कई थानों में अपराध दर्ज है और ओडब्ल्यू ने जो रिपोर्ट लिखी है उसमें भी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम इसके अलावा भी कई पुलिस अधिकारियों के नाम है कई बड़े अधिकारी हैं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का तो हमने बताया कि जब यह मामला उठा था तो किस तरीके से कांग्रेस ने बकायदा पत्रकार वार्ता लेकर सौरभ चंद्राकर के संबंधों का खुलासा करते हुए भाजपा नेताओं के साथ उनकी तस्वीर जारी की थी तो क्या इस जांच में भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता भी आएंगे जिनके साथ उनकी तस्वीर है क्या उनकी भी गिरफ्तारी होगी बहरहाल कहा जा रहा है कि यह पूरा मामला भूपेश बघेल पर दबाव बनाने के लिए है देखना है कि सीबीआई इस मामले को क्या करती है !

वीडियो देखें


https://youtu.be/W8ElSBP_OgI?si=uodJqRK-mTtk3-Z0

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

चौधरी को लेकर क्यो नाराज़ है कर्मचारी

 चौधरी को लेकर क्यो नाराज़ है कर्मचारी 


छत्तीसगढ़ के सबसे दमदार मंत्री माने जाने वाले ओपी चौधरी ने एक बार फिर कर्मचारियों को लेकर जो बात कही  उसे लेकर विवाद शुरू हो गया है दरअसल ओपी चौधरी का विवादों से पुराना नाता है जब वे कलेक्टर थे तब भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप के चलते हुए विवादों में आए थे उसके बाद उन्होंने आनंद फानंद में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली थी लेकिन 2018 का चुनाव वे हार गए थे   फिर उन्हें टिकट मिली और अमित शाह को आकर कहना पड़ा कि ओपी चौधरी को जिता हो हम इन्हें बड़ा आदमी बनाएंगे और इसके बाद जब मंत्रिमंडल का गठन हुआ तो उन्हें सबसे महत्त्वपूर्ण विभाग वित्त विभाग दिया गया वित्त विभाग के मिलते ही जिस तरीके से वे विवादों में आए हैं उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं सबसे पहले तो उन्होंने 33000 शिक्षकों की भर्ती के मामले में जिस तरह से कहा कि अभी फंड नहीं है फिलहाल शिक्षकों की भर्ती पर कोई विचार नहीं किया जा रहा उसे लेकर ओपी चौधरी विवादों में रहे और बेरोजगारों का गुस्सा आज तक सोशल मीडिया में फूट रहा तब कर्मचारियों को लेकर ओपी चौधरी ने जो बात कही उससे लेकर कर्मचारी संगठनों में भी आक्रोश है हालांकि छत्तीसगढ़ के कर्मचारी पहले से ही ओपी चौधरी की भूमिका को लेकर सवाल उठाते रहे हैं और विभिन्न संगठन खासकर शिक्षक समुदाय तो लगातार आंदोलन कर रहे हैं युक्तिकरण के खिलाफ दरअसल यह पूरा खेल शिक्षक भर्ती पर बंदिश लगाने का है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा क्योंकि स्कूलों में शिक्षक की कमी है लेकिन युक्तिकरण के नाम पर जिस तरीके से स्कूल ही बंद करने की योजना बना ली गई है उसे लेकर शिक्षक संघों में भारी आक्रोश है लेकिन नया मामला है यूपीएस का यूपीएस यानी नई एकीकृत पेंशन योजना यह केंद्र सरकार ने प्रस्ताव बनाकर लागू कर दिया है 1 अप्रैल 2025 से और इसमें फायदा जो 25 साल नौकरी कर चुके हैं उन्हीं कर्मचारियों को ज्यादा मिलेगा अभी ओपीएसओ पेंशन स्कीम और एनपीएस न्यू पेंशन स्कीम को लेकर जबरदस्त बवाल है और कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में भी यह मुद्दा काम कर रहा था और इसी से घबराकर केंद्र सरकार ने नहीं एकीकृत पेंशन योजना लाई है यूपीएस जिसका नाम दिया गया और राज्य सरकारों से कहा गया है कि कर्मचारियों को इस बात के लिए तैयार करें इस पेंशन को बनाने वालों का दावा है कि इस योजना का लाभ 90 लाख कर्मचारियों को होगा लेकिन छत्तीसगढ़ में इस योजना को लागू करने का कोई विचार नहीं है मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यह बात वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साफ तौर पर कह दिए उन्होंने प्रतिष्ठित अखबार नव भारत से चर्चा करते हुए यह बात कही है तो क्या इस नई पेंशन स्कीम पर कोई विचार नहीं किया जाएगा और कर्मचारियों को इसका कोई फायदा नहीं मिलेगा क्योंकि जब विचार ही नहीं होगा तो फायदा कहां से मिलेगा लेकिन इससे इधर छत्तीसगढ़ की क्या स्थिति है छत्तीसगढ़ में ओल्ड पेंशन स्कीम की मांग को लेकर लंबे आंदोलन जब हुए तो पूर्ववर्ती सरकार कांग्रेस की जो सरकार थी भूपेश बघेल की उन्हो ओल्ड पेंशन स्कीम लागू कर दिया और इसके चलते यहां के बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने ओल्ड पेंशन स्कीम के लिए आवेदन भी दे दिया उनके आवेदन स्वीकृत भी हो गए लेकिन मामला फंडिंग का है जो केंद्र सरकार पर एनपीएस का जो फंडिंग है वह अटका पड़ा हुआ है और उसे छत्तीसगढ़ को मिलेगा नहीं मिलेगा कब मिलेगा यह कहना बेहद मुश्किल भरा सवाल है और कब होगा यह भी आसानी से सुलझ का मामला नहीं दिख रहा है ऐसी परिस्थिति में मजबूरी में जो कर्मचारी एनपीएस के साथ खड़े हैं उनके लिए यह एक सुनारा मौका हो सकता था नई पेंशन स्कीम यानी यूपीएस लेकिन अब जब प्रदेश सरकार इस पर विचार करने को तैयार नहीं है तब देखना है कि कर्मचारी संगठनों का क्या रवैया होता है हालांकि छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की मांग पर कायम है केंद्र सरकार की यूनिफाइड योजना ओ पीएस जैसी लाभदायक नहीं है यानी ओल्ड पेंशन स्कीम की तरह य लाभकारी नहीं है इसलिए इस तरफ कर्मचारियों का जरा भी ध्यान नहीं है वह तो वल्ड पेंशन योजना पर ही पूरा ध्यान लगाए हुए हैं यह बात फेडरेशन के जो संयोजक है कमल वर्मा ने यह बात मीडिया से कही है ऐसी परिस्थिति में जब कुछ कर्मचारियों को उम्मीद थी कि छत्तीसगढ़ सर सरकार यूपीएस लागू करेगी तो उन्हें फायदा मिलेगा जिनकी सर्विस 25 साल से अधिक हो जाएगी लेकिन अब वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने साफ तौर पर कह दिया है कि इस योजना पर अभी विचार नहीं किया जाएगा देखना है कि कर्मचारी संगठन ओपी चौधरी के इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं !