बुधवार, 25 मार्च 2026

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग

आख़िर कौन चला रहा कृषि विभाग 


 छत्तीसगढ़ की डबल इंजन की सरकार के मंत्रियों की करतूत एकएक करके बाहर आने लगी है हमने आपको बताया कि किस तरीके से सीजीपीएससी घोटाले में ओपी चौधरी की भूमिका सामने आई है तो शिक्षा विभाग के घोटाले को लेकर कई तरह के सवाल उठे हैं ट्रांसफर पोस्टिंग पदोन्नति जिसमें देखिए आप गड़बड़ छाला है लेकिन आज हम बात कर रहे हैं कृषि विभाग का क्योंकि अब मानसून छत्तीसगढ़ पहुंच चुका है और यहां के किसान खेती किसानी में जूट गए हैं धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की अपनी अहमियत है कृषि को लेकर और विभाग को लेकर शायद यही वजह है कि एक समय में डॉक्टर रमन सिंह ने इसके लिए अलग से बजट तक की बात कर दी थी लेकिन अब इस दौर में किस तरीके का खेल यहां चल रहा है कहना मुश्किल है कृषि विभाग आखिर है किसके हवाले कहने को तो इसके मंत्री राम विचार नेताम को बनाया गया है लेकिन राम विचार नेता काम को लेकर कई तरह के सवाल हमेशा ही उठते रहे हैं खासकर इंदिरा प्रदर्शनी बैंक घोटाले में राम विचार ताम का नाम सामने आया था नारको टेस्ट की कथित सीडी में जिस तरीके से पैसे की लेनदेन को लेकर बातें सामने आई थी उसमें राम विचार नेताम का नाम भी सामने था इसके अलावा भी उनके गृह मंत्री रहते जब रमन सरकार में वे गृह मंत्री थे तब भी उन के खेल को लेकर सवाल उठते रहे लेकिन इस बार विष्णु देव साय की सरकार ने उन्हें कृषि विभाग दिया है सबसे बड़ा बजट वाला विभाग कहा जाए तो गलत नहीं होगा और इस विभाग में किसका खेल चल रहा है यह विभाग आखिर चला कौन रहा है क्या कृषि मंत्री राम विचार नेताम चला रहे हैं या आईएएस जो बैठे हैं भुनेश यादव वे चला रहे हैं राजस्थान से आते हैं भुनेश यादव और उनकी एक अपनी कहानी है कि किस तरीके से वे बिजनेस करते आईएएस बने दूसरे अटें में उन्होंने पास किया था लेकिन सत्ता बदलते हु उन्हें एपीओ में रख दिया गया था कोई विभाग नहीं दिया गया था फिर कई तरह के विभाग मिले भूपेश बघेल सरकार के नाक के बाल भी कहे जाते थे भूने यादव हालांकि उन पर अभी तक घपले घोटाले के कोई चार्ज नहीं लगे हैं लेकिन जिस तरीके का रवैया चल रहा है कृषि विभाग में उसमें भुनेश यादव की भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है तब क्या कोई राकेश अग्रवाल नाम का व्यक्ति चला रहा है कृषि यह बेहद ही गंभीर सवाल है क्योंकि जो मीडिया रिपोर्ट आ रही है उसमें सीधे अग्रवाल का नाम तो सामने नहीं आ रहा है हमारी टीम ने जब पता किया कि मीडिया रिपोर्ट में जिस लक्ष्मी पुत्र की बात की जा रही है या जिस दलाल की बात की जा रही है वह है कौन तब उसमें कुछ नाम सामने आए और सबसे बड़े नाम जो सामने आए वह राकेश अग्रवाल का नाम है तो क्या कृषि विभाग को राकेश अग्रवाल के सुपुर्द कर दिया गया यह बेहद गंभीर सवाल हालांकि हमने राकेश अग्रवाल से बात करने की कोशिश की लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे इस पूरे मामले को लेकर लेकिन कहा जा रहा है कि पूरा दफ्तर वहीं से चल रहा है तब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर बीच निगम में चल क्या रहा है टेंडर को लेकर गड़बड़ियों की खबर तो लगातार आ रही है यही नहीं किसानों को दिए जाने वाली योजनाओं में भी जो ठेका दिया जाता है उसे लेकर भी कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और कहा जा रहा है कि किसान त्रस्त है नकली बीज नकली खाद का मामला तो पहले भी उठता रहा है लेकिन सप्लाई के काम में जिस तरह की भर्रा साही की खबरें सामने आ रही है या मीडिया रिपोर्ट सामने आ रहे हैं कि किस तरीके का खेल हो रहा है वहां पहले कमीशन दो और कमीशन भी कितना 40 फीदी कमी की बात सामने आ रही है जो प्रदेश में किसी भी विभाग में सबसे ज्यादा बताया जा रहा है हालांकि कमीशन के मामले को लेकर पीडब्ल्यूडी विभाग हो या नगर निगम कई तरह के विभाग जो है वोह हमेशा ही चर्चा में रहे हैं पीएचई में जल जीवन मिशन को लेकर घोटाले की लगातार खबरें आ रही है कुछ इंजीनियरों को सस्पेंड भी किया गया हम इस पर विस्तार से फिर कभी चर्चा करेंगे लेकिन कृषि विभाग है किसके पास यह सबसे बड़ा सवाल इसलिए उठाया जा रहा है क्योंकि जो खबरें आ रही हैं वह हैरान कर देने वाली है कि आखिर राम विचार नेताओ ने चुप्पी क्यों ओढ ली है या इन खबरों को लेकर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है यह भी समझ में नहीं आ रहा है बीज निगम से लेकर उद्यान की विभाग तक गड़बड़ झाला की जो खबरें आ रही है वह हैरान कर देने वाली है हम हमारे रिपोर्टर्स लगे हुए हैं इस पूरे मामले की पता साझी करने के लिए देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है !

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https://youtu.be/36X_nwujrko?si=IvoMnqz5Ift3g1Am

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी

भाजपा विधायकों की वसूली बाजी 


 डबल इंजन की सरकार बने अभी दो साल ही पूरे  हुए हैं और पार्टी के विधायकों और कई पदाधिकारियों पर वसूली के आरोप लगने लगे हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में अभी तक ना तो संगठन कोई कारवाही कर रही है ना नोटिस दी है और ना ही सरकार की तरफ से ही कोई बयान आया है मामला सिर्फ शराब को लेकर नहीं है या अहाता को लेकर नहीं है या फिर कोयला घोटाले को लेकर नहीं है सवाल तो अब सीधे-सीधे मामले को दबाने के लिए वसूली का है और यह मामला कहीं और से नहीं साझा विधानसभा क्षेत्र के जो विधा पहली बार बने हैं गरीब विधायक के रूप में प्रचारित प्रसारित किया गया उनके द्वारा एक मामले को दबाने के लिए दो लाख रुपए वसूलने की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की गई है और इस मामले के सामने आते ही कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जमकर हमला बोला है सरकार पर और कहा जा रहा है कि कई विधायकों के नाम है पंडरिया की विधायक भावना बोहरा पर तो तीन ट्रक खादी उतरवा लेने का आरोप लगाया गया इसके अलावा भी कई तरह के आरोप है भावना बोहरा को डॉक्टर रमन सिंह की रिश्तेदार बताई जाती है और पहली बार वे भी विधायक बनी है इसके अलावा भैयालाल राजवाड़े को लेकर स्वास्थ्य विभाग में वसूली की शिकायत भी किए जाने की चर्चा है तो कई पदाधिकारी हैं संगठन से जुड़े उनके खिलाफ भी इसी तरह की वसूली बाजी के मामले सामने आने लगे हैं मामला सिर्फ वसूली का नहीं है मामला तो धमकी चमकी का भी है याद होगा आपको कि किस तरीके से शुरुआती दौर में ही महतारी वंदन योजना का लाभ दिलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने एक महिला को भला फुसलाकर बलात्कार तक कर दिया था रायगढ़ के जिला अध्यक्ष के खिलाफ किस तरह के मामले थे नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल के पुत्र के खिलाफ किस तरह के मामले थे किसी से छिपा नहीं है लेकिन अब जिस तरीके से सत्ता में आने के बाद विधायकों के और संगठन के पदाधिकारियों पर आरोप लगने लगे हैं वसूली के वह हैरानी की बात तो है ही चिंता की भी बात क्योंकि मामला कई सारे हैं कहा जा रहा है सरगुजा क्षेत्र के दो विधायकों के खिलाफ शिकायत है तो बस्तर क्षेत्र के एक विधायक के खिलाफ शिकायत है यही नहीं रायपुर जिले के एक विधायक के खिलाफ तो उद्योगों में वसूली करने का मामला सामने आया है हम विस्तार से इन सारी घटनाओं को आपके सामने रखेंगे लेकिन एक बात तो हम बता देते हैं कि जिस तरीके से नव निर्वाचित विधायकों में आधा दर्जन विधायकों के नाम सामने आए हैं संगठन के भी लगभग चार पदाधिकारियों के नाम सामने आए हैं प्रवक्ता है एक उनके बारे में तो सर्व विधित है कहा जाता है कि उनके वसूली बाजी की वजह से पार्टी के नेता भी परेशान रहे हैं वे हर बार टिकट मांगने पहुंच जाते हैं महापौर की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं कभी तो कभी विधायक की टिकट मांगने पहुंच जाते हैं लेकिन उनके खिलाफ जो शिकायतें हैं उनके इसी रवैया की वजह से अभी तक उन्हें केवल छोटे-मोटे चुनाव में ही टिकट दी गई है बड़े चुनाव से वंचित रखा गया है तो दूसरी तरफ ईश्वर साहू का मामला बड़ा होता जा रहा है और कहा जा रहा है कि इसे लेकर मामला विधानसभा में भी उठाने की तैयारी हालांकि ईश्वर साहू ने इस मामले को लेकर सफाई दी है लेकिन विधानसभा में य मामला तय है उठना और विधानसभा में तो भावना बोहरा के खिलाफ भी मामला उठाए जाने की चर्चा है कहा जा रहा है कि वहां जो पराजित प्रत्याशी है नीलकंठ वर्मा उन्होंने पिछले दिनों प्रदर्शन भी किया भावना बोरा के रहने को लेकर और खाद वाले मामले को लेकर तब ऐसी परिस्थिति में विष्णु देव साय सरकार या किरण देव जो प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष है वे क्या करते हैं हालांकि यह भी कहा जा रहा है किरण देव अब पद पर बने रहना नहीं चाहते हैं वे मंत्री बनना चाहते हैं लेकिन यह भाजपा है नया भाजपा है जहां सिर्फ मोदी शाह की चलती है और वे चाहेंगे वही मंत्री बनेंगे तब ऐसी परिस्थिति में कुछ होना!

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https://youtu.be/FDEL7LjZ7V8?si=2RH0ZsmkQ9MDZQeM

मंगलवार, 24 मार्च 2026

छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी

 छत्तीसगढ़ की यह पहचान ही मिटा दी 


नाम बदलने में माहिर विष्णु देव साय की सरकार यानी डबल इंजन की सरकार क्या अब छत्तीसगढ़ की पहचान भी मिटा देना चाहती है कई योजनाओं का नाम उन्होंने आते ही बदल दिया था जो भूपेश सरकार ने रखी थी और और अब जो काम किया जा रहा वह बेहद ही चौकाने वाला है यह चौकाने वाला इसलिए है क्योंकि इस योजना को भूपेश बघेल जब मुख्यमंत्री थे तब भी लाया गया था लेकिन मामला सिर्फ इसलिए रुका था क्योंकि नाम का संकट था केंद्र सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ हाट का नाम बदल दिया जाए और उसका नाम पीएम एकता माल कर दिया जाए और उसमें दूसरे राज्यों के हस्त शिल्प उत्पादकों को भी दुकान दिया जाए दूसरे राज्यों के हस्तशिल्प  को दुकान तो दिया ही जा रहा था लेकिन जो रायपुर की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ की पहचान बन चुकी है छत्तीसगढ़ हाट जमीन से जुड़ा हुआ नाम है उसे आखिर विष्णुदेव साय क्यों बदल देना चाहती है क्या केंद्र की योजना से नाम भी बदलना जरूरी है यह सवाल इसलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि जिस तरीके का खेल रायपुर विकास प्राधिकरण के संचालन मंडल के कंधे पर रखकर किया गया है या कंधे पर रखकर बंदूक चलाया गया है वह स्वयं को बचाने के लिए भी है कहा जाए तो गलत नहीं हो अभी निगम मंडल आयोग सब में नियुक्तियां होनी है उससे पहले छत्तीसगढ़ हाट का नाम पीएम एकता माल रख दिया जाएगा या रख देने का प्रस्ताव पारित हो गया और इसको तोड़कर फिर से नए सीरे से बनाने की बात की जा रही है बिल्कुल बनाना चाहिए यदि कहीं कोई कमी है तो नए सीरे से बनाया जा सकता है लेकिन नाम बदलने को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या डबल इंजन की सरकार सब कुछ बदल देगी और छत्तीसगढ़ की पहचान को भी मिटा देगी छत्तीसगढ़ की राजधानी में स्थित महत्त्वपूर्ण जगह में स्थित इस हाट का नाम लोगों को जोड़ता है एक दूसरे से तब ऐसी परिस्थिति में कल आरडीए के संचालन मंडल की बैठक में जो छत्तीसगढ़ हाट की जगह पीएम एकता माल बनाने की बात कही जा रही है प्रस्ताव पारित किया गया है वह बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा छत्तीसगढ़ हाट की पहचान यहां विभिन्न हस्त शिल्प और दूसरे उत्पाद है ग्रामीण उत्पाद उसको लेकर बनी हुई है और लोग जाते हैं यहां और यहां ऐसा नहीं है कि केवल गढ़ के लोग ही स्टाल लगाते हैं बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोगों का भी स्टाल लगता है तब नाम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी यह सबसे बड़ा सवाल सिटी सेंटर माल के पीछे छत्तीसगढ़ हाट बाजार को तोड़कर माल बनाने की प्रक्रिया लंबे समय से चल रही थी यह केंद्र सरकार की योजना है कांग्रेस सरकार के दौरान यह योजना सिर्फ नाम को लेकर भूपेश सरकार अड़ी हुई थी कि वे पीएम एकता माल नाम नहीं रख सकते छत्तीसगढ़ हाट इस राजधानी की पहचान बन चुकी है वह नाम नहीं बदला जाएगा आवास एवं पर्यावरण विभाग की सचिव तथा प्राधिकरण की अध्यक्ष आर संगीता की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एकता माल निर्माण के लिए निविदा दर की स्वीकृति कर ली गई है और इसको अनुमोदित भी कर लिया गया क्यों हड़बड़ी थी आखिर अभी आरडीए का अध्यक्ष बनाना आरडीए का अध्यक्ष बनना है उसके लिए मारामारी हो रही है इस विभाग के मंत्री ओपी चौधरी हैं जो रायगढ़ से विधायक हैं और प्रदेश सरकार में दमदार माने जाते हैं और यह भी माने जाते हैं कि वे अमित शाह के निर्देशन पर ही सब काम करते हैं तो क्या यह काम भी अमित शाह पसंद नहीं है यह नाम छत्तीसगढ़ इसलिए नाम बदला जा रहा है कई सवाल उठाए जा रहे हैं छत्तीसगढ़ हाट का सुपर बिल्ड अप एरिया जो है वह 73 392 वर्ग फुट है तथा निर्माण लागत करीब 1 स लाख रुपए होनी है एकता माल बनाने का जिम्मा मेसर्स दीपक पांडे डी एनवी प्रोजेक्ट लिमिटेड को दिया गया है इसका निर्माण लग दो साल के भीतर किया जाएगा यह अनुमोदित कर दिया गया प्रस्ताव पारित गया इतनी बड़ी राशि को संचालक मंडल ने एक झटके में पास कर दिया और साय सरकार के निर्देश पर ही किया गया है कहा जाए तो गलत नहीं होगा या ओपी चौधरी के निर्देश पर यह हुआ है छत्तीसगढ़ की अपनी पहचान है इस पहचान को लेकर लोगों ने कितना संघर्ष किया है और आज राजधानी के उस छत्तीसगढ़ हाट जो लोगों की जन भावना से जुड़ा हुआ है उसका नाम बदल दिया जाएगा है ना हैरानी की बात देखना है कि इस मामले को लेकर जनप्रतिनिधि किस तरह की आवाज उठाते हैं और विष्णु देव साय सरकार आगे किस किस छत्तीसगढ़ नाम से जुड़े योजनाओं का नाम केंद्र सरकार के निर्देश पर बदलती है!

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https://youtu.be/1WB6tIW0P9w?si=Igq7Hy6KcEMhD03u

रविवार, 22 मार्च 2026

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार

मोदी के मित्र की गोद में जा बैठी साय सरकार 


 छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आते ही अडानी यानी गौतम अडानी की कंपनियों के काम में तेजी आ गई है एक तरफ हसदेव अरण्य को धड़ल्ले से काटा जा रहा है पेड़ काटने की अनुमति दी जा रही है वहां पर्यावरण को लेकर जिस तरह के सवाल उसकी अनदेखी की जा रही है तो दूसरी तरफ तिल्दा राजधानी रायपुर से लगे क्षेत्र में अडानी पावर के विस्तार को लेकर जन सुनवाई कल हुई इस जन सुनवाई के विरोध में गांव वाले एक राय होकर पहले ही सरकार को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंप चुके थे कि जन सुनवाई रोक दी जाए पहले ही जीएमआर पावर कंपनी ने जो द किया था गांव वालों से उसे पूरा नहीं किया गया और गांव की आबोहवा अलग खराब हो रही है ऐसे में विस्तार के लिए जो 885 एकड़ जमीन चाहिए वे नहीं देंगे लेकिन यह विष्णुदेव साय की सरकार है यह डबल इंजन की सरकार है और कहा जा रहा है कि सरकार तो पूरी तरीके से अदानी की गोद में जा बैठे यानी जैसे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मित्र के लिए क वही सब कुछ विष्णु देव साय की सरकार करेगी और यही वजह है कि जब ग्रामीणों ने ज्ञापन सौंपा था कि यह जन सुनवाई टाल दी जाए स्थगित कर दी जाए उसकी अनदेखी करके कल जन सुनवाई की गई लदा विकासखंड के तहत रायखेड़ा गांव में स्थापित अडानी पावर लिमिटेड के पावर ग्रेड 370 मेगावाट प्लान के विस्तार हेतु प्रस्तावित 1600 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट की पर्यावरण स्वीकृति हेतु जन सुनवाई थी और प्रचारित प्रसारित यह किया जा रहा है कि जन सुनवाई में लोगों ने समर्थन दिया है लेकिन हकीकत तो यह है कि कल जमकर विवाद हुआ है विरोध हुआ है कांग्रेस ही नहीं दूसरे दलों के नेता जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के नेता भी पहुंचे थे विरोध के लिए जिसमें रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय पूर्व राज्यसभा सांसद छाया वर्मा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ग्रामीण जिलाध्यक्ष है उधो राम वर्मा जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के मुखिया अमित बघेल सहित कई लोग यहां पहुंचे थे और इस बात का विरोध कर रहे थे कि कंपनी जमीन लेते समय तो सब वादा कर देती है लेकिन जमीन हासिल होने के बाद गांव वालों की मुसीबत बढ़ जाती ऐसी परिस्थिति में अब सवाल यह उठ रहा है कि हसदेव कितना बच पाएगा और अब रायखेड़ा क्षेत्र के लोग पर्यावरण के प्रदूषण से अपने को कैसे बचा पाएंगे किस तरीके का विरोध प्रदर्शन हुआ है या किसी से छिपा नहीं है लेकिन मीडिया में खबर छपाई जा रही है कि समर्थन में लोग खड़े हैं ऐसे में सवाल यह है कि क्या सचमुच विष्णुदेव साय की सरकार अदानी की गोद में जा बैठी और कहा जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों में फिर जमीन खरीदी की जा रही है बड़े पैमाने पर अदानी द्वारा खासकर राजधानी और बड़े शहरों के नजदीकी जमीन ताकि वहां बड़े पैमाने पर गोदाम बनाया जा सके यानी मध्य प्रदेश की तर्ज पर क्या अब एफसीआई में रखने की बजाय धान जो खरीदती है छत्तीसगढ़ की सरकार वह अदान के गोदामों में रखेगी ऐसे कई सवाल हैं हम आपको बताते रहेंगे अभी तो जन सुनवाई एक बार हुई और कितने बार करती है या इस तरीके से हसदेव अरण्य को काटे जाने को लेकर जिस फर्जी जन सुनवाई हुई है कहा जा रहा है उस तरह से क्या फर्जी जन सुनवाई करके विस्तार के लिए अनुमति दे दी जाएगी पर्यावरण की अनदेखी कर  कर दी जाएगी जिसका प्रभाव राजधानी में भी पढना तय है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि आने वाले दिनों में क्या कुछ होता है!

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https://youtu.be/xuFtq-pr7wE?si=QZR5Gr9LzmfxCniE

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़

 क्या भाजपा ही करती है धर्म से ज़्यादा खिलवाड़ 


हिंदू धर्म का ठेकेदार बनने वाले लोगों को तब साप सूंघ जाता है जब इस ठेकेदार के समर्थकों में से कोई एक धर्म के साथ खिलवाड़ करता है चाहे वह संवित पात्रा का मामला हो या फिर दूसरे किसी और भारतीय जनता पार्टी के विधायक का मामला जब जब धर्म के साथ ऐसे लोग खिलवाड़ करते हैं उन्हें नजर अंदाज कर दिया जाता है और इससे भी छोटी बात पर यदि विपक्ष के नेता गिरफ्त में आ गए तो पूरे देश में भवाल मचा देते हैं उन्हें हिंदू विरोधी का तमगा देने से भी नहीं कतराते हैं यहां तक कि शंकराचार्य की अवहेलना राम मंदिर प्रांत प्रतिष्ठा समारोह में हुई तब भी कोई उन्हें कांग्रेसी बताने लगा तो कोई आलोचना करने लगा जबकि हमने बार-बार बताया कि यदि इतने सर्वोच्च गुरु किसी दूसरे धर्म के होते और बोल देते तो बवाल मज गया होता लेकिन यह दौर मोदी का दौर है यह दौर भगवान बनाने का दौर है यह दौर अवतार बताने का दौर है और बाप बनाने का और इसी चक्कर में शायद पूरी से चुनाव लड़ रहे हैं भाजपा के बड़े दिग्गज नेता माने जाते हैं संत पात्रा ने भगवान जगन्नाथ को ही मोदी का भक्त बता दिया ल लो मोदी भक्त जगन्नाथ मोदी भक्त जगन्नाथ मोद भक्त जगन्नाथ सब मोद परिवार हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका जुबान फिसल गया था लेकिन याद कीजिए कि जुबान एक बार फिसलती है बार-बार नहीं फिसलती और जुबान इन लोगों की क्यों फिसलती क्योंकि इसी संदीप पात्र ने एक समय कन्हैया कुमार से बहस के दौरान मोदी को देश का पाप भी बता दिया था उसके लिए माफी इससे पहले भी कई ऐसे मामले आए जिसके लिए कभी माफी नहीं मांगी गई और यह माफी शायद सिर्फ इसलिए मांगी गई क्योंकि वे चुनाव लड़ रहे हैं और चुनाव में इसका प्रभाव विपरीत पड़ सकता है जगन्नाथ स्वामी कलयुग के सबसे बड़े अवतार माने जाते हैं सबसे बड़े देवता माने जाते हैं सबसे प्रमुख देवता माने जाते हैं और उन्हें लेकर इस तरह से जुबान फिसल जाने की बात कहना आश्चर्य जनक है क्योंकि जो लोग यदि धर्म में 24 घंटे जुड़े हुए हैं धर्म को लेकर 24 घंटे चिंतित है तो फिर जुबान कैसे फिसल सकती है यह बड़ा सवाल आप खुद सोचिए लेकिन सवाल सिर्फ संवित पात्रा का नहीं है इस दौर में मोदी को भगवान बताने का जो खेल चला उसमें क्या स्वयं दे के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं थे यानी धर्म के इस पूरे खेल में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारतीय जनता पार्टी या उन हिंदूवादी संगठनों के लोग शामिल नहीं थे जिन्हें लगता है कि मोदी ही हिंदू धर्म की रक्षा कर सकते हैं और कोई दूसरा कर ही नहीं सकता और शायद यही वजह है कि कोई मंदिर बना रहा है तो कोई उन्हें विष्णु का अवतार बता रहा है और हैरान की बात तो यह है कि धर्म के इस खिलवाड़ में बीजेपी खुद शामिल है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि भगवान वेंकटेश्वर का रूप दिखाते हुए खुद बीजेपी ने अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से यह तस्वीर रिलीज की थी और क्या कुछ नहीं लिखा था नमो नमो वगैरह वगैरह आप हैरान हो जाएंगे तब भी किसी को आपत्ति नहीं हुई थी और यही बात कोई राहुल गांधी या सोनिया गांधी या और किसी को भगवान बनाकर प्रस्तुत कर दिया गया होता तो अभी तक इस देश में पता नहीं किस किस तरह के भवाल मचा दिए जाते उदाहरण कई है यदि हम आपको उदाहरण बताएंगे तो आप खुद हैरान हो जाएंगे कि धर्म के खिलवाड़ के को लेकर किस तरीके से यह लोग लगे हुए थे भारतीय जनता पार्टी के एमएलए मधुबनी से उन्होंने तो भगवान विश्वकर्मा का ही रूप दे दिया था भगवान विश्वकर्मा की जयंती के समय तो कंगना रानावत मंडी से लोकसभा की प्रत्याशी हैं और उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विष्णु का अवतार बताया था और कहा जा रहा है कि वही अवतार बताने की वजह से ही उन्हें टिकिट दी गई थी यानी धर्म का खिलवाड़ करने की वजह से उन्हें टिकट दी गई थी तब ऐसे में बीएचयू में जो फोटो प्रदर्शनी लगाई गई किसने लगाई थी क्या एबीपी ने लगाई थी या कोई और इसी तरह के संगठन ने लगाई थी उसमें भी देश के प्रधानमंत्री के चित्र को किस रूप में दिखाया गया था आप खुद देखिए और सोचिए कि क्या कुछ खेल हुआ मेरठ में भी तो इसी तरह का भव्य मंदिर बनाकर स्थापित करने का खेल हुआ है तो महाराष्ट्र भाजपा के प्रवक्ता ने अवधूत बाग नाम है उन्होंने भी तो कहा था कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विष्णु के 11वें अवतार हैं और एक गोयल है जिन्होंने किताब लिखी और एक शिवाजी महाराज पर किताब लिखी गई और शिवाजी की मोदी वाली एक तस्वीर जब सामने आई तो उन्होंने कहा कि यह तस्वीर उन्हें पहले मिल जाती तो वे इसे ही किताब का कवर पेज बनाते आज के शिवाजी के लिए यह तस्वीर सबसे उपयुक्त है यह उस गोयल ने कहा था जो शिवाजी पर किताब लिख रहे थे ऐसे कई उदाहरण आपके सामने खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसकिस वेशभूषा  धरते हैं यह भी तो इस देश ने देखा है कभी वे सन्यासी बन जाते हैं तो कभी कुछ और एक बार तो उन्होंने जिस तरीके से रुद्राक्ष धारण किया था यहां तक कहा गया कि महाकाल का वेशभूषा धारण कर लिया यानी उसी तरीके से श्रृंगार करवाए थे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरीके का श्रृंगार महाकाल का होता है तब ऐसे में धर्म के साथ खिलवाड़ कौन कर रहा है कौन धर्म का ठेकेदार बना बैठा है और किस किस तरह से आने वाले दिनों में धर्म के साथ खिलवाड़ होगा !

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https://youtu.be/FH8VX23Fnqc?si=FPAWVdWwJ-QrgrIq

गुरुवार, 19 मार्च 2026

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे

कोयले के इस खेल में क्या अड़ानी फँसेंगे 


 देश के सबसे बड़े उद्योगपति गौतम अडानी एक बार फिर घोटाले में फंस गए हैं घोटाला क्या है सीधे-सीधे सरकार को चूना लगाना हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद ना तो गौतम अडानी का ही मुश्किल कम हो रहा है और ना ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दरअसल यह रिश्ता क्या कहलाता है यह सवाल इतना बड़ा हो चुका है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अब बौखलाने  लाने लगे हैं और शायद जिस गौतम अडानी को लेकर या हिडन बर्ग की रिपोर्ट को लेकर समूची मोदी सत्ता विपक्ष पर हमलावर थी गौतम अदानी को पाक साफ बताते नहीं थकती थी और चुनाव में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी  कहने लग गए कि अदानी और अंबानी के पास भरपूर काला धन है और वे टेंपो भर भर के कांग्रेस को पहुंचा रहे हैं इसलिए कांग्रेस ने गौतम अडानी या अंबानी का नाम लेना बंद कर दिया तेलंगाना की धरती से पूछना चाहता हूं जरा य शहजादे घोषित करें कि चुनाव में ये अंबानी अडानी थे कितना माल उठाया है काले धन के कितने बोरे भर कर के रुपए मारे हैं क्या टेंपो भर कर के नोटे कांग्रेस के लिए पहुंची है क्या क्या सौदा हुआ है ऐसे में उन समर्थकों का सोचिए या उन हिंदू वादियों का सोचिए या ऐसे बांगड़ बिल्लों का सोचिए जो अब मुंह छुपाते घूम रहे हैं कि वे जिस गौतम अदानी के लिए खड़े हुए थे उन्हें ही जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्ट कह दिया काला धन वाला कह दिया तो फिर उनके पास क्या बचता है लेकिन लगता है कि यह मित्र प्रेम का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और शायद यही वजह है कि कल दुनिया के सब सबसे बड़े अखबार 20 देशों से निकलते हैं फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की कोयला घोटाले को लेकर और गौतम अडानी पर कोयला घोटाले का आरोप पहली बार नहीं लगा है खदानों को देने के मामले में हो या फिर दूसरे देशों से कोयला मंगाकर यहां के विद्युत कंपनियों को मनमाने कीमत पर यानी कई गुना कीमत वसूलने को लेकर गौतम अडानी हमेशा ही विवाद में रहे हैं लेकिन इस बार जो विवाद है वह यह है कि घटिया क्वालिटी का कोयला नंबर एक क्वालिटी के नाम पर विद्युत कंपनियों को खपा गया जिसके चलते ना केवल विद्युत कंपनियों को नुकसान हुआ बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान प क्योंकि घटिया दर्जे की कोयला यदि जलाई जाएगी बिजली उत्पादन के लिए तो ज्यादा जलाना पड़ेगा और उतना ही पर्यावरण को नुकसान होगा इस पर कांग्रेस ने खुलकर मोदी सरकार पर हमला बोल दिया ऐसा कोई दिन नहीं आता जिस दिन अडानी जी का कोई महा घोटाला सामने ना आए अब एक बड़ा धोखाधड़ी का मामला सामने आ रहा है कोयले को लेकर सही सुना आपने खटिया सस्ते दाम के कोयले को अच्छी गु गुणवत्ता का बताकर मनमाने डाम पर अडानी जी ने हिंदुस्तान की एक सरकारी कंपनी को चूना लगाकर बेचा यह बात तब की है जब अडानी जी ने इंडोनेशिया से कोयला लिया $28 प्रति टन पे ये कोयला 3500 कैलोरी वाला कोयला था हिंदुस्तान आते-आते लेकिन जादू हो गया ये 3500 कैलोरी वाला कोयला अपने आप 6000 कैलोरी वाला कोयला बन गया और दाम $28 प्रति टन से बढ़कर $92 प्रति टन हो गए 28 से बढ़ के 92 3500 कैलोरी अपने आप बढ़कर 6000 सैलरी हो गई यह कोयला अडानी ने इंडोनेशिया की एक कंपनी पीटी जोलिन से लिया था और यह तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी टन जटको को बेचा गया था ये कोयला जोने जो कंपनी है इंडोनेशिया की उसने अदानी को $28 प्रति टन में दिया पेपर में पूरी तरह से साफ है कि एंड कस्टमर टाइम जेट को है अदनी अदानी जो थे वो मध्यस्थता कर रहे थे ये कोयला का जो बिल काटा गया वो काटा गया ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में स्थित सुप्रीम यूनियन समूह के नाम उसने सिंगापुर में बिल काटा अडानी के नाम और उस कोयले को 3500 कैलोरी का तो रहने दिया लेकिन $4 प्रति टन दाम लगा दिया अब यही कोयला जब तमिलनाडु पहुंचता है भारत के छोड़ में आता है तो अडानी जी इसको 92 प्रति टन और जादू से 000 कैलोरी का बनाकर बेच देते हैं करीब 000 करोड़ रप का चूना लगाया उन्होंने भारत की एक कंपनी को तो इस पूरे मामले में अडानी जी ने एक भारतीय कंपनी से सरकारी कंपनी से धोखाधड़ी करी राजस्व की चोरी की बिजली के दाम बढ़ाए उपभोग ताओं के लिए क्योंकि महंगा कोयला आएगा तो महंगा जनरेशन होगा महंगा डिस्ट्रीब्यूशन होगा और यही नहीं उन्होंने पर्यावरण के साथ-साथ हिंदुस्तान के लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ किया करीब 22 लाख लोगों की हिंदुस्तान में वायु प्रदूषण से हर साल मौत होती है जिसमें से ज्यादातर बच्चे हैं तो दिक्कत की बात यह है कि आरानी जी ये सब तब कर रहे हैं जब आपको रिन्यूएबल एनर्जी में एक बड़ा प्लेयर बनाने जा रहे हैं ये अलग बात है कि कोयले की आयात करने वाली भारतीय समूह में से वो शायद एक या दूसरे नंबर पर होंगे तो मोदी जी से कुछ सवाल कि डायरेक्टरेट ऑ रेवन्यू इंटेलिजेंस को तो चलिए आपने छानबीन नहीं करने दी संस्थाओं के आपने हाथ बांध दिए आंखों पर पट्टी बांध द लेकिन अब क्या कीजिएगा क्योंकि आप ही ने कहा है कि टेंपो में भर भर कर काला धन बांटा जा रहा है वो टेंपो अडानी के पकड़े कब जाएंगे और ये काले कोयले की जो काली चोरी थी इसका क्या नतीजा है यह देश जानना चाहता है इसका अभिप्राय क्या है इसका एक ही मतलब है कि गौतम अडानी के पास भरपूर काला धन है जिसकी जानकारी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी है तब क्या घटिया कोयला सप्लाई का मामला तूल पकड़ेगा क्या इस मामले की जांच होगी यकीनन होगी यह जांच तो होगी लेकिन तब जब सत्ता बदलेगी क्योंकि राहुल गांधी ने अब साफ तौर पर कह दिया है कि जिस तरह के घपले घोटाले अदानी समूह के आने लगे हैं वे सत्ता में आए यानी इंडिया गठबंधन सत्ता में आई तो हर मामले की विस्तार से जांच की जाएगी तब क्या मोदी सरकार के रहते यह जांच नहीं होगी क्योंकि जिस तरीके से सिर्फ अदानी का नाम ले लेने से ही इस दौर में उन लोगों को प्रताड़ित किया गया संसद की सदस्यता तक समाप्त करने की बात सामने आई है या आरोप लगे हैं मोदी सरकार पर तब इस सत्ता के रहते तो अदानी समूह पर कोई कारवाई होगी या जांच भी होगी कहना मुश्किल है तब देखना है कि जो कोयला घोटाले को लेकर या घटिया कोयला सप्लाई को लेकर जो मामला सामने आया है वह आम लोगों को कितना समझ में आता है !


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https://youtu.be/e7HjSQARqkY?si=qeW-dvU-OUVzve0z

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

इज़राइल से रायपुर पहुँचे युवा वैज्ञानिक ने बता दिया कहाँ-क्या हुआ, कैसे घर पहुँचा…

 युद्ध की विभीषिका को लेकर कितने ही सवाल उठते रहे हैं। भारत पाकिस्तान का युद्ध हो या फिर ईरान और इजराइल के बीच मचे युद्ध के बाद किस तरह से आपाधापी मची पूरे इजराइल में या ईरान में लोग अपने काम छोड़कर अपने वतन की वापसी के लिए किस तरह से संघर्ष किए। आज हम बात करेंगे इजराइल में कार्यरत साइंटिस्ट हैं हमारे छत्तीसगढ़ के राजधानी के लाडले देवव्रत दुबे जी। उनसे हम बात करेंगे और समझने की कोशिश करेंगे कि इस युद्ध में किस तरीके से प्रभाव पड़ा इजराइल में या जहां वे काम कर रहे थे उस शहर में और क्या परिस्थिति बनी जिसकी वजह से उन्हें वतन यानी भारत आना पड़ा रायपुर आना पड़ा पूरा एक-एक बात हम समझने और जानने की कोशिश करेंगे इजराइल और ईरान के बीच बीच जो युद्ध का माहौल बना या युद्ध हुआ तो आप लोगों ने क्या देखा समझा ये थोड़ा सा बताएंगे। टेंशनंस तो पहले से थे ही पूरे मिडिल ईस्ट में। उसके बाद ईरान के न्यूक्लियर कैपेबिलिटीज बम बनाने के नजदीक पहुंच रही थी। जिसको रोकने के लिए इजराइल ने अटैक किया और फिर ईरान से रिस्पांस आना शुरू हुआ मिसाइल्स का। मिसाइल्स जब आती थी तो सायरेंस बजते थे अलग-अलग एरिया में और जब हमारे एरिया में साइरस बजते थे तो हम शेल्टर में चले जाते थे। ऐसी क्या परिस्थिति बनी कि वापस आना पड़ा? क्या सरकार ने कहा कि आप लोगों ने स्वयं निर्णय लिया। एंबेसी की एडवाइज़री आ रही इजराइल में एक होम फ्रंट कमांड है जो वहां पर जो भी रहते हैं उन सबको अलर्ट करती रहती है। तो एंबेसी की एडवाइज़री थी कि होम फ्रंट कमांड का जो भी गाइडेंस आए वो फॉलो कीजिए और ज्यादा ओपन एरियाज में मत घूमिए। ज्यादा भीड़ होम फ्रंट ने मना किया था जमा होने से। सारे यूनिवर्सिटीज और स्कूल्स भी बंद हो चुके थे। सब कुछ वर्क फ्रॉम होम मोड में चल रहा था। उसके बाद कुछ मिसाइल्स जो हुई जो हाईफा का अटैक हुआ। फिर वीरशिश में जब एक हॉस्पिटल पर अटैक हुआ उसके बाद एंबेसी ने यह एक ऑप्शन दिया था कि एक इवाकुएशन हो रहा है ऑपरेशन से जो जाना चाहते हैं वो अपना नाम एनरोल करवा सकते हैं। तो उसमें हम लोगों ने एनरोल किया और आ गए। कितना संघर्ष भरा महसूस हो रहा था उस दौरान जब ईरान का अटैक हुआ तो आप लोग क्या महसूस कर रहे थे? संघर्ष वैसे कुछ खास नहीं था क्योंकि जब रॉकेट्स आते थे वो पीरियड हमने देखा है। हुथस्ट की मिसाइल जब यमन से आती थी तब भी हम साइरेंस में चले जाते थे। ईरान के साथ भी जब सब कुछ शुरू हुआ तब भी हम शेल्टर्स में चले जाते थे गाइडेंस के हिसाब से। पर उसके बाद जब ये हुआ कि अटैक सिविलियन एरियाज पे होने लगे। जैसे हॉस्पिटल पे अटैक हुआ, वाइसमैन इंस्टट्यूट में अटैक हुआ। जब सिविलियन एरियाज पे अटैक होने लगे तब फिर हमने सोचना शुरू किया कि शायद निकल जाना चाहिए। इजराइल से भारत पहुंचते तक क्या महसूस कर रहे थे थोड़ा सा वो तो चल रहे थे हम तेलवी से लैंड बॉर्डर क्रॉस करके जॉर्डन गए वहां जॉर्डन के अमान एयरपोर्ट से कुवैत आए तो जब लैंड बॉर्डर क्रॉस कर रहे थे तब भी जब हम बस से जा रहे थे तब भी दो बार साइंस बजे और बस रोक के हमको सड़क के किनारे खेत में जाकर रुकना पड़ा उसके बाद जब हम कुवैत से दिल्ली के लिए निकल गए थे तब शायद ईरान ने कतर पे अटैक किया और यूएई ने एयर स्पेस क्लोज कर दिया तो हमारा प्लेन वापस कुवैत गया और उसके 4 घंटे बाद फिर से टेक ऑफ किया दिल्ली और अभी सिचुएशन नॉर्मल हो गई है तो 15 दिन में तो हम शायद वापस भी चले जाएंगे जब कुवैत से हम निकले थे दिल्ली के लिए और रास्ते में थे तो प्लेन रिटर्न होने के पहले मैं तो विंडो सीट पे नहीं था पर जो लोग विंडो सीट पे थे उन लोगों ने मिसाइल्स और इंटरसेप्ट र्स दोनों ल्च होते हुए देखे जो हम इजराइल में देखते रहते थे मिसाइल्स वगैरह बट एयरप्लेन से पहली बार उन लोगों ने देखा जो कुछ लोगों ने वीडियोस लिए इजराइल में रहते हुए क्या महसूस कर रहे थे आप जो सभी जो दूसरे देशों से थे वहां जो काम कर रहे थे या आप भी तो क्या लग रहा था कि क्या कुछ होगा अभी तक तो इजराइल वन में था उसका अपना मिडिल ईस्ट में खाक रहा है जो परसेप्शन रहा है लेकिन जब ईरान के मिसाइल गिरने लगे तो क्या सोचे आपको यहां हम लोग इतने चैतन्य नहीं रहते हैं अलर्ट नहीं रहते हैं बट इजराइल में जब से हम रह रहे हैं तो हम किसी भी मोमेंट पे रेडी रहते हैं कि आप तिलवी में है या वीर शिवा में है या हफा में है तो आप जिस शहर में हैं उसके हिसाब से एक टाइमिंग होती है कि 30 सेकंड में आपको शेल्टर में पहुंचना है या 1ढ़ मिनट में आपको शेल्टर में पहुंचना है सायरन बजने के बाद तो वीरसेवा जैसे ये एक मिनट था और इतने में आप शेल्टर में पहुंच सकते हैं क्योंकि आप जहां भी हैं जिस भी बिल्डिंग में है या सड़क के किनारे हैं तो उतनी दूर में कहीं ना कहीं आपको शेल्टर्स मिल ही जाएंगे या घर भी है तो घर के अंदर भी सेफ रूम्स होते हैं। तो उसके लिए हम प्रिपयर्ड ही थे। बट ईरान की जो बैलस्टिक मिसाइल्स आई जो कुछ ऐसी थी जो इंटरसेप्ट नहीं हुई एरो से और सिविलियन एरियाज पर जो ब्लास्ट हुए उसके बाद थोड़ा सा डर लगना शुरू हुआ!

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https://youtu.be/mCdclPK7G1E?si=6xaAuKKEWVndjJfX