घुसेरा पंचायत का स्कूल जर्जर
रायपुर। अभनपुर विकासखंड के ग्राम घुसेरा के सरपंच कुमारी बाई ने बताया कि उनके यहां प्राथमिक शाला भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है वहीं स्कूल मार्ग की हालत भी दयनीय है जिसके चलते छात्र-छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आंगन बाड़ी केंद्र के लिए भवन निर्माण की भी मांग की है।
----
पंचायत भवन जर्जर
रायपुर। अभनपुर विकास खंड के ग्राम पंचायत सिंगारभाठा स्थित पंचायत भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। यह जानकारी देते हुए सरपंच ने बताया कि उन्होंने इसकी सूचना जनपद पंचायत अभनपुर को कई बार दी है लेकिन कोई कार्रवाई नहींहो रही है। पंचायत भवन में बैठना तक मुश्किल हो गया है।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
खबर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
खबर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 20 नवंबर 2010
शुक्रवार, 19 नवंबर 2010
आज की खबर
आज की खबर
| १-रायपुर,संतोषी नगर खदान में किसान साहू नामक इस बालक कि सर कटी लाश मिली , बालक तिन दिन से लापता था. |
| २-रायपुर, कांग्रेसियों ने आज पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा जी कि जयंती पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की. |
| ३-छत्तीसगढ़ में प्रधान पाठक भारती में अनियमितता को लेकर धरना दिया गया. |
| ४-रायपुर,शंकराचार्य श्री निश्चलानंद जी आज रायपुर पहुंचे. |
गुरुवार, 18 नवंबर 2010
आज की खबर
१-दुनिया की उम्रदराज बाघिन शंकरी की आज दोपहर मौत हो गई.वह काफी दिनों से बीमार थी.उसे मैनपुर के जंगल से लाया गया था.
२-छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय का चुनाव की घोसना कर दी गई है. २१ दिसंबर को मतदान और २४ दिसंबर को मतगणना होगी
३-राजेंद्र जग्गी चेंबर रत्न से सम्मानित किये गए
४-सिकलसेल पर अंतररास्ट्रीय सम्मलेन २२-२७ नवम्बर को बेबिलान इन में होगा सम्मलेन का उदघाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री कलम करेंगे. सम्मलेन में १५ देशो के विशेषज्ञ भाग लेंगे.
५-रायपुर के सिविल लाइन निवासी अजय पाल ने आत्महत्या कर ली . नह मेकाहारा में वें चलता था.
६-हिरा स्टील द्वारा अफसरों-नेताओं को बनते दीपावली गिफ्ट में भारत का नक्शा गलत . अब देखना है की सरकार रिपोर्ट दर्ज करती है या फिर पैसों की ताकत काम करेगी? नागरिक संघर्स समिति ने आपति की. समिति के पदाधिकारी डॉ राकेश गुप्ता,विश्वजीत mitra , हरजीत जुनेजा, अमिताभ दीक्षित , ने एक पत्रकार-वार्ता में बताया की यदि करवाई नहीं हुई तो महामहिम राज्यपाल से भी मिला जायेगा .
७-मधुमेह को नियंत्रित करने सप्त-योग मधुनाश को बाजार में लाया काया है . बी टी सी फूड्स के नीरज गंभीर और अतुल दुबे ने बताया कि यह हार मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध है इसके नियमित सेवन से इसुलिन का इंजेक्शन नहीं लगाना पड़ेगा .
8-रायपुर के bairan बाजार में karodo कि jamin पर kabje को lekar balava huaa dono hi parti vidya-bhushan sukla और rahul shukla congresi hain,
२-छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय का चुनाव की घोसना कर दी गई है. २१ दिसंबर को मतदान और २४ दिसंबर को मतगणना होगी
३-राजेंद्र जग्गी चेंबर रत्न से सम्मानित किये गए
४-सिकलसेल पर अंतररास्ट्रीय सम्मलेन २२-२७ नवम्बर को बेबिलान इन में होगा सम्मलेन का उदघाटन पूर्व राष्ट्रपति श्री कलम करेंगे. सम्मलेन में १५ देशो के विशेषज्ञ भाग लेंगे.
५-रायपुर के सिविल लाइन निवासी अजय पाल ने आत्महत्या कर ली . नह मेकाहारा में वें चलता था.
६-हिरा स्टील द्वारा अफसरों-नेताओं को बनते दीपावली गिफ्ट में भारत का नक्शा गलत . अब देखना है की सरकार रिपोर्ट दर्ज करती है या फिर पैसों की ताकत काम करेगी? नागरिक संघर्स समिति ने आपति की. समिति के पदाधिकारी डॉ राकेश गुप्ता,विश्वजीत mitra , हरजीत जुनेजा, अमिताभ दीक्षित , ने एक पत्रकार-वार्ता में बताया की यदि करवाई नहीं हुई तो महामहिम राज्यपाल से भी मिला जायेगा .
७-मधुमेह को नियंत्रित करने सप्त-योग मधुनाश को बाजार में लाया काया है . बी टी सी फूड्स के नीरज गंभीर और अतुल दुबे ने बताया कि यह हार मेडिकल स्टोर्स में उपलब्ध है इसके नियमित सेवन से इसुलिन का इंजेक्शन नहीं लगाना पड़ेगा .
8-रायपुर के bairan बाजार में karodo कि jamin पर kabje को lekar balava huaa dono hi parti vidya-bhushan sukla और rahul shukla congresi hain,
मंगलवार, 16 नवंबर 2010
आज की खबर
आज की खबर
१.डॉ dixit का कैम्प १८-२० नवम्बर को अरविंदो नेत्रालय पच्पेरी नाका में होगा . इस फ्री कैम्प में प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी पिचले १२ सालों से यह कैंप आयोजित की जाती है .
२.सिंघानिया बिल्डकोन द्वारा फ़िल्मी सुपर स्टार शाहरुख खान को बुलाने की तैयारी है.
१.डॉ dixit का कैम्प १८-२० नवम्बर को अरविंदो नेत्रालय पच्पेरी नाका में होगा . इस फ्री कैम्प में प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी पिचले १२ सालों से यह कैंप आयोजित की जाती है .
२.सिंघानिया बिल्डकोन द्वारा फ़िल्मी सुपर स्टार शाहरुख खान को बुलाने की तैयारी है.
| नियंत्रण महालेखा के १५० वी वर्षगांठ पर विश्वविद्यालय सभा भवन में कार्यक्रम का उदघाटन महामहिम राज्यपाल ने किया . |
| विश्वविद्यालय कर्मचारियों की हड़ताल आज चौथे दिन भी जरी रही |
| महापौर किरणमयी नायक ने रामसागर पारा का दौरा किया इस दौरान उन्होंने अवध निर्माण तोड़ने का निर्देश भी दिया |
| सिविल लाइन के एक हिस्से में गन्दगी का आलम |
| प्रदेश भर के बौने बंधू अपनी मांग को लेकर ५ दिसंबर को राजधानी रायपुर में जुटेंगे |
| बाल-दिवस पर बच्चों की खुशी |
शनिवार, 13 नवंबर 2010
आज की खबर
| आज राजधानी में श्री जलाराम उत्सव मनाया गया |
आज राजधानी में श्री जलाराम उत्सव मनाया गया |
आज राजधानी में श्री जलाराम उत्सव मनाया गया |
| कल १४ नवम्बर को दैबितिस डे पर उषा फौन्डेसन के द्वारा फ्री कैंप लगाया जा रहा है |
शुक्रवार, 12 नवंबर 2010
आज की खबर
आज की खबर
सुदर्शन का युवक कांग्रेसियों ने पुतला फूंका
बिर्गावं के कांग्रेसियों ने ओम प्रकाश देवांगन को टिकिट देने की मांग की मोटर साइकल रैली निकाली .
देश भर के वैदिक वैज्ञानिक २०-२१ नवम्बर को राजधानी आयेंगे , प्रेस कांफ्रेंस में घोषणा , कार्यक्रम रविवि में.
सुदर्शन का युवक कांग्रेसियों ने पुतला फूंका
बिर्गावं के कांग्रेसियों ने ओम प्रकाश देवांगन को टिकिट देने की मांग की मोटर साइकल रैली निकाली .
देश भर के वैदिक वैज्ञानिक २०-२१ नवम्बर को राजधानी आयेंगे , प्रेस कांफ्रेंस में घोषणा , कार्यक्रम रविवि में.
शनिवार, 31 जुलाई 2010
अछ्छा जीवन सभी का हक़
दलितों, पिछड़ों एवं कमजोर वर्गो को आरक्षण सर्वप्रथम 26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर नरेश छत्रपति शाहूजी महाराज ने देना शुरू किया। शाहूजी ने आरक्षण विरोधियों के सामने आरक्षण का औचित्य एक उदाहरण द्वारा सिद्ब किया। आज के लोकतांत्रिक भारत में जहां हर नागरिक को बराबर अधिकार दिये गये हैं। हजारों वर्षो से शोषित और पिछाड़े गये वर्गो के विकास और उत्थान हेतु आवश्यक कदम उठाना वक्त की जरूरत है। यदि ये आरक्षण का लाभ लेकर आगे बढ़ते हैं तो देश आगे बढ़ेगा। आखिर अच्छा जीवन स्तर जीना सभी का हक है।
धमतरी जिला के पुलिस अधीक्षक श्री शेख आरिफ हुसान ने मुख्य अतिथि के रुप में आरक्षण के जनक एवं समानता के प्णेता कोल्हापुर के मराठा नरेश राजर्षि छत्रपति साहू जी महाराज की जयंती के शुभावसर पर भारतीय दलित साहित्य अकादमी के छत्तीसगढ़ राय स्तरीय गौरवपूर्ण सम्मेलन में पधारे साहित्यकारों,पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए ये शब्द कहे । सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए युवा समाजवीर श्री दिग्विजय सिंह कृदत्त ने शाहूजी महाराज के आदर्शो,कार्यो की प्वलित योति को वाला बनाने पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि द्वय श्री पी. एसोब (आंध्प्देश) एवं श्री उधोराम चंदनिहा (पोंड़-पाण्डुका) ने भी सम्बोधित किया।
उस अवसर पर शैक्षणिक, साहित्यिक व सामीजिक क्षेत्रों में विशिष्ट अवेदन के लिए श्रीमती चन्दि्का देवी देशलहरे, कांशीराम गायकवाड़, जेशू चन्द् सिंह, मनीराम पंकज, जगमोहन सिंह पैकरा, जनाब मोहम्मद हनीफ साकरीया, विनोद कुमार सिन्हा शमभूराम साहू, आर.डी.क्षीरसागर, पियुषकांत सिंघम, पूर्णेन्द् कुमार साहू, भुनेश्वर प्साद कुर्रे, कृष्णदत्त उपाध्याय, बी. एस. रावटे, शोभाराम बघेल, बालाराम सिन्हा, अलखराम यादव, राजा राम पटेल, सतीश चन्द्ाकर, सखाराम साहू, संतराम देवांगन, श्रीमती गुलाब विश्वकर्मा, रविन्द् बंनजारे, भगवान सिह साहू एन.पी. जोशी, डोमार सिंह साहू संवलराम
साहू, भुनेश्वर प्साद साहू, रामेश्वर सिंग सूर्यवंशी, सम्पत राम सारथी, श्रीमती गुलाब विश्वकर्मा ,रविन्द् बंजारे, भगवान सिंह साहू, एन.पी. जोशी,डोमार सिंह साहू, कंवलराम साहू, भुनेश्वर प्साद साहू, रामेश्वर सिंग सूर्यवंशी, सम्पत राम सारथी, श्रीमती नजमा खॉ, आर.मुत्थुस्वामी, बुद्बप्काश गायकवाड़, बृदावन यादव, कौषल प्साद साहू, तल्लीनपुरी गोस्वामी मोहनलाल सोनवानी एवं गुहाराम लहरे को प्ाईड ऑफ नेशन नेशनल अवार्ड-2010 से सम्मनित किया गया।
इसके अलावा दलित पिछड़े समाज के प्तिभावान छात्र छात्राओं-कु. किरण यादव कु. मधु चौहान, कु.गौरी चोपड़ा, कु. वीणाा वाल्मिकी, कु. सुभाषनी बंजारे, धर्मेद् गहरवार, अमित नागेश एवं अमित कुमार रामटेके को रजत पदक (चांदी का मैडल) व पाठय सामग्ी प्दान कर सम्मानित किया गया। अनुसूचित जाति विकास परिषद जिला धमतरी के सौजन्य से कु.आकांक्षा भारती, क. द्ोपती जोशी, कु. गायत्री धीवर, कु. सीमा सोनकर, कु.गणेशी धु्व, कु. ओमप्भा, कु. भगवती को स्कूल बैग, कापी, पेन प्दान किया गया।
कार्यक् म का सफल संचालन अकादमी के प्देशाध्यक्ष जी.आर. बंजारे वाला ने किया। कार्यक्म का शुभारंभ बैण्ड बाजे के रार्ष्ट्रीय गान के साथ हुआ। केकचंद बधेल, बुटुराम पूर्णे, नम्मूराम भोजवानी,आर. मुत्थुस्वामी प्ेम नजीर के द्वारा कविता पाठ प्स्तुत किया गया। प्ो.के. मुरारीदास, प्ेमलाल कुर्रे, प्काश सिंह बादल, भागचंद नागेश, पं.देवीदत्त उपाध्याय, डामनलाल सोनवानी, रांलाल रामटेके, शेखरलाल गहरवार सोमन ध्ुव, प्मोद यादव (शाबास इंडिया फेम) ने अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में अकादमी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री बद्रीप्रसाद गंगवीर के जन्म दिवस पर केक काटा गया।
इस अवसर पर तुलसीराम गहरवार, प्रेम सायमन, सी.एल. बंजारे, संतु यादव, अशोक टंडन, किशुन डांडे, अनिल बनारसी, पप्पू यादव ,दीपक सार्वा, महेश सिन्हा, उगेशराम बंसारे,श्रीमती सुमित्रा गंगवीर, श्रीमती सुशीला देवी वाल्मिकी, श्रीमती जे.उपाध्याय, प्रिती मेश्राम, सावित्री साहू, सरोज चौहान, नारायण राव शिन्दे, सूरज प्रसाद गुप्ता, दुष्यंत घोरपड़े, सोहनलाल डहरिया, मेहत्तर राम खापडर्े, श्रीराम डहरिया, फणेन्द्र कुमार साहू, एच.पी. देवांगन, शिवनारायण सोनी, कार्तिक राम पटेल, ललित साहू, टी.डी. सोनवानी, रमेश भालाधरे, एस.एल. कलिहारी, बी.आर. खोब्रागढ़े, बी.पी. वर्मा, रवि कुमार गंगवीर, श्वेता गंगवीर, जयंत कुमार, विश्वनाथ साहू, नसीमा, ममता देवांगन, विशाल सिंह ठाकुर, अमरदास बंजारे, सुशील बंजारे, विकास कुमार, सीमा गंगवीर, कु. भारती सोनवानी, श्यामलाल, दिलीप नाग, मुकेश प्रधान, त्रयम्बक हड़वदिया आदि लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस अवसर पर अकादमी के छत्तीसगढ़ प्रदेश शाखा की ओर से परम्परागत् टोपी (नीली पगड़ी) व शाल पहनाकर मुख्य अतिथि श्री शेख आरिफ हुसैन का आत्मीय अभिनंदन किया गया।
धमतरी जिला के पुलिस अधीक्षक श्री शेख आरिफ हुसान ने मुख्य अतिथि के रुप में आरक्षण के जनक एवं समानता के प्णेता कोल्हापुर के मराठा नरेश राजर्षि छत्रपति साहू जी महाराज की जयंती के शुभावसर पर भारतीय दलित साहित्य अकादमी के छत्तीसगढ़ राय स्तरीय गौरवपूर्ण सम्मेलन में पधारे साहित्यकारों,पत्रकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए ये शब्द कहे । सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए युवा समाजवीर श्री दिग्विजय सिंह कृदत्त ने शाहूजी महाराज के आदर्शो,कार्यो की प्वलित योति को वाला बनाने पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि द्वय श्री पी. एसोब (आंध्प्देश) एवं श्री उधोराम चंदनिहा (पोंड़-पाण्डुका) ने भी सम्बोधित किया।
उस अवसर पर शैक्षणिक, साहित्यिक व सामीजिक क्षेत्रों में विशिष्ट अवेदन के लिए श्रीमती चन्दि्का देवी देशलहरे, कांशीराम गायकवाड़, जेशू चन्द् सिंह, मनीराम पंकज, जगमोहन सिंह पैकरा, जनाब मोहम्मद हनीफ साकरीया, विनोद कुमार सिन्हा शमभूराम साहू, आर.डी.क्षीरसागर, पियुषकांत सिंघम, पूर्णेन्द् कुमार साहू, भुनेश्वर प्साद कुर्रे, कृष्णदत्त उपाध्याय, बी. एस. रावटे, शोभाराम बघेल, बालाराम सिन्हा, अलखराम यादव, राजा राम पटेल, सतीश चन्द्ाकर, सखाराम साहू, संतराम देवांगन, श्रीमती गुलाब विश्वकर्मा, रविन्द् बंनजारे, भगवान सिह साहू एन.पी. जोशी, डोमार सिंह साहू संवलराम
साहू, भुनेश्वर प्साद साहू, रामेश्वर सिंग सूर्यवंशी, सम्पत राम सारथी, श्रीमती गुलाब विश्वकर्मा ,रविन्द् बंजारे, भगवान सिंह साहू, एन.पी. जोशी,डोमार सिंह साहू, कंवलराम साहू, भुनेश्वर प्साद साहू, रामेश्वर सिंग सूर्यवंशी, सम्पत राम सारथी, श्रीमती नजमा खॉ, आर.मुत्थुस्वामी, बुद्बप्काश गायकवाड़, बृदावन यादव, कौषल प्साद साहू, तल्लीनपुरी गोस्वामी मोहनलाल सोनवानी एवं गुहाराम लहरे को प्ाईड ऑफ नेशन नेशनल अवार्ड-2010 से सम्मनित किया गया।
इसके अलावा दलित पिछड़े समाज के प्तिभावान छात्र छात्राओं-कु. किरण यादव कु. मधु चौहान, कु.गौरी चोपड़ा, कु. वीणाा वाल्मिकी, कु. सुभाषनी बंजारे, धर्मेद् गहरवार, अमित नागेश एवं अमित कुमार रामटेके को रजत पदक (चांदी का मैडल) व पाठय सामग्ी प्दान कर सम्मानित किया गया। अनुसूचित जाति विकास परिषद जिला धमतरी के सौजन्य से कु.आकांक्षा भारती, क. द्ोपती जोशी, कु. गायत्री धीवर, कु. सीमा सोनकर, कु.गणेशी धु्व, कु. ओमप्भा, कु. भगवती को स्कूल बैग, कापी, पेन प्दान किया गया।
कार्यक् म का सफल संचालन अकादमी के प्देशाध्यक्ष जी.आर. बंजारे वाला ने किया। कार्यक्म का शुभारंभ बैण्ड बाजे के रार्ष्ट्रीय गान के साथ हुआ। केकचंद बधेल, बुटुराम पूर्णे, नम्मूराम भोजवानी,आर. मुत्थुस्वामी प्ेम नजीर के द्वारा कविता पाठ प्स्तुत किया गया। प्ो.के. मुरारीदास, प्ेमलाल कुर्रे, प्काश सिंह बादल, भागचंद नागेश, पं.देवीदत्त उपाध्याय, डामनलाल सोनवानी, रांलाल रामटेके, शेखरलाल गहरवार सोमन ध्ुव, प्मोद यादव (शाबास इंडिया फेम) ने अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में अकादमी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री बद्रीप्रसाद गंगवीर के जन्म दिवस पर केक काटा गया।
इस अवसर पर तुलसीराम गहरवार, प्रेम सायमन, सी.एल. बंजारे, संतु यादव, अशोक टंडन, किशुन डांडे, अनिल बनारसी, पप्पू यादव ,दीपक सार्वा, महेश सिन्हा, उगेशराम बंसारे,श्रीमती सुमित्रा गंगवीर, श्रीमती सुशीला देवी वाल्मिकी, श्रीमती जे.उपाध्याय, प्रिती मेश्राम, सावित्री साहू, सरोज चौहान, नारायण राव शिन्दे, सूरज प्रसाद गुप्ता, दुष्यंत घोरपड़े, सोहनलाल डहरिया, मेहत्तर राम खापडर्े, श्रीराम डहरिया, फणेन्द्र कुमार साहू, एच.पी. देवांगन, शिवनारायण सोनी, कार्तिक राम पटेल, ललित साहू, टी.डी. सोनवानी, रमेश भालाधरे, एस.एल. कलिहारी, बी.आर. खोब्रागढ़े, बी.पी. वर्मा, रवि कुमार गंगवीर, श्वेता गंगवीर, जयंत कुमार, विश्वनाथ साहू, नसीमा, ममता देवांगन, विशाल सिंह ठाकुर, अमरदास बंजारे, सुशील बंजारे, विकास कुमार, सीमा गंगवीर, कु. भारती सोनवानी, श्यामलाल, दिलीप नाग, मुकेश प्रधान, त्रयम्बक हड़वदिया आदि लोगों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
इस अवसर पर अकादमी के छत्तीसगढ़ प्रदेश शाखा की ओर से परम्परागत् टोपी (नीली पगड़ी) व शाल पहनाकर मुख्य अतिथि श्री शेख आरिफ हुसैन का आत्मीय अभिनंदन किया गया।
रविवार, 25 जुलाई 2010
ग्राम कोटवार का हुक्का-पानी बंद
धमतरी। कुरुद तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरा के आश्रित ग्राम खपरी (सिलौटी) के ग्राम कोटवार खोरबहरा राम कोसरे का हुक्का-पानी ग्राम के उपसरपंच नारद साहू के निर्देशन में बंद करा दिया गया है। ग्राम कोटवार का कसूर केवल इतना है वह सतनामी समाज से तालुक्कात रखता है। सतनामी समाज ग्राम खपरी के समस्त समाज के व्यक्तियों के द्वारा अपने आरध्य देव श्री गुरुघासीदास जी का प्रतीक चिन्ह जैतखम्भ का निर्माण आपसी सहमति से किया गया है।
किन्तु द्वेषवश ग्राम कोटवार का हुक्का-पानी बंद करना स्वतंत्र भारत में न्याय संगत नहीं है। वर्तमान में गांव के उपसरपंच नारद साहू के निर्देशन में अवैध वसूली कर अतिक्रमण कराया जा रहा है। उपसरपंच ने ग्रामवासियों से निम्न रकम की मांग की है। चंद्रहास से 31 सौ रुपए, पिताम्बर से 35 सौ, रेणु से 18 सौ, भगवानी से 18 सौ, उत्तर से 32 सौ, गौतम से 28 सौ, मनोहर से 18 सौ, पुनीत से 21 सौ, इंद्रकुमार से 26 सौ, रामू से 21 सौ, चैतराम से 43 सौ, अनुज से 41 सौ तथा नारायण से 4 सौ एवं ग्राम के कोटवार खोरबहरा राम कोसरे से 52 सौ रुपए की मांग की गई थी जिस पर ग्राम कोटवार ने ऐतराज करते हुए अपने मंत्रालय 13 वर्ष पूर्व बने तोड़ने से असमर्थता जाहिर कर दिया। जिसके कारण शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का डर दिखा कर उनके मूत्रालय को तुड़वाना पड़ेगा अन्यथा तुम्हारी नौकरी नहीं रहेगी। ग्राम कोटवार के द्वारा ऐसे प्रकरणों पर समानतापूर्वक विचार करने की बात कहने पर उनको नौकरी से निकालने की धमकी बार-बार दिया जा रहा है। इसी बीच सतनामी समाज ग्राम खपरी के द्वारा अपने ईष्टदेव का प्रतीक चिन्ह जैतखम्भ निर्माण किया गया। निर्माणाधीन रहते हुए इस पर किसी ने भी विरोध प्रकट नहीं किया किन्तु जबपूर्णत: निर्माण पूरा हो जाने एवं उस पर झंडा चढ़ जाने के उपरांत वहां के उपसरपंच द्वारा ग्राम कोटवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया। इस स्वतंत्र भारत में जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। जहां सभी धर्म के अनुइयों का आपने धर्म को मानने एवं पूजने का अधिकार दिया जाता है। इस प्रकार का कृत्य इस देश की धर्मनिरपेक्षता सामाजिक सौहाद्रता को बिगाड़ता है। उपसरपंच का यह कारनामा भेदभाव, छुआछूत, आप्रश्यिता की भावनाओं को जन्म देता है। सतनामी समाज उस गांव में आजादी के पूर्व से कई पीढियों से निवासरत है वहां के ग्रामीणों के दुख-सुख में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता आया है। किन्तु उपसरपंच नारद साहू के द्वारा विद्वेषवश अपने स्वार्थ सिध्दी के लिए किया गया कार्य अपनी पंचायत बाड़ी में एक छतर राज का सिक्का जमाने की पहल माना जा रहा है। इस परिप्रेक्ष्य पर सरपंच एवं पंचोगण ने अपनी अनिभिज्ञता जाहिर की है। जहां पर जैतखम्भ का निर्माण किया गया है। वह जगह 5 फीट-5 फीट का जगह है। वह पर ना किसी प्रकार का सरकारी योजना के तहत ना ही भवन निर्माण प्रस्तावित नहीं है ऐसे समाजद्रोही उपसरपंच नारद साहू पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। अन्यथा सतनामी समाज महासंघ एवं अखिल भारतीय सतनामी कल्याण समिति के द्वारा उग्र आंदोलन की जाएगी। जिसकी जवाबदारी शासन की होगी इसी परिपेक्ष्य में सतनामी समाज महासंघ पाटन ब्लॉक के सचिव दिनेश कोसरे एवं अखिल भारतीय सतनामी कल्याण महासभा जिला धमतरी के सचिव लादूराम कुर्रे के संयुक्त बयान से जारी किया गया है।
------
धनेन्द्र साहू पर बेबुनियाद आरोप
अभनपुर। जनपद सदस्य शशिप्रकाश साहू ने बताया कि उस दिन वस्तुस्थिति की जगह खुद उपस्थित था ऐसी कोई बात नहीं हुआ है। जिसमें धनेन्द्र साहू ने किसी प्रकार गांव वालों को धमकी दिया है। जबकि गांव के दो-चार महिलाओं के साथ मंत्रीजी के परिवारवाले मानिकचौरी प्रवेशद्वार पर नहर पुल के पास गाड़ी के सामने धरने पर बैठ गए और उसे अंदर जाने नहीं दे रहे थे। पुलिस के उच्चाधिकारी के समझाइश के बाद धनेन्द्र साहू के साथ केवल पांच व्यक्तियों को मिलने दिया गया। धनेन्द्र साहू केवल यही मांग कर रहे थे कि मृतक परिवारवालों से मिलकर उसे केवल सांत्वना देना चाहते थे। क्योंकि मृतक परिवार कांग्रेस से जुड़े हुए थे। जबकि वस्तुस्थिति में भाजपा के आसपास के सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंच गए और धनेन्द्र साहू वापस जाओ के नारे लगाने लगे और उसके सभी कार्यकर्ता वहीं हंगामा करने लगे। चूंकि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का संगठन चुनाव नजदीक है और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अभनपुर विधानसभा में अधिक से अधिक कांग्रेस से जुड़े हुए प्रतिनिधि चुनकर आए हैं। तो काग्रेस एवं धनेन्द्र साहू की साफ छवि में बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उसके ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। भूपेश बघेल जी को गांव के अंदर प्रवेश करने ही नहीं दिया गया जिससे भूपेश बघेल मृतक परिवार से मिलने से पहले ही वहां से चले गए है।
किन्तु द्वेषवश ग्राम कोटवार का हुक्का-पानी बंद करना स्वतंत्र भारत में न्याय संगत नहीं है। वर्तमान में गांव के उपसरपंच नारद साहू के निर्देशन में अवैध वसूली कर अतिक्रमण कराया जा रहा है। उपसरपंच ने ग्रामवासियों से निम्न रकम की मांग की है। चंद्रहास से 31 सौ रुपए, पिताम्बर से 35 सौ, रेणु से 18 सौ, भगवानी से 18 सौ, उत्तर से 32 सौ, गौतम से 28 सौ, मनोहर से 18 सौ, पुनीत से 21 सौ, इंद्रकुमार से 26 सौ, रामू से 21 सौ, चैतराम से 43 सौ, अनुज से 41 सौ तथा नारायण से 4 सौ एवं ग्राम के कोटवार खोरबहरा राम कोसरे से 52 सौ रुपए की मांग की गई थी जिस पर ग्राम कोटवार ने ऐतराज करते हुए अपने मंत्रालय 13 वर्ष पूर्व बने तोड़ने से असमर्थता जाहिर कर दिया। जिसके कारण शासकीय सेवा से बर्खास्त करने का डर दिखा कर उनके मूत्रालय को तुड़वाना पड़ेगा अन्यथा तुम्हारी नौकरी नहीं रहेगी। ग्राम कोटवार के द्वारा ऐसे प्रकरणों पर समानतापूर्वक विचार करने की बात कहने पर उनको नौकरी से निकालने की धमकी बार-बार दिया जा रहा है। इसी बीच सतनामी समाज ग्राम खपरी के द्वारा अपने ईष्टदेव का प्रतीक चिन्ह जैतखम्भ निर्माण किया गया। निर्माणाधीन रहते हुए इस पर किसी ने भी विरोध प्रकट नहीं किया किन्तु जबपूर्णत: निर्माण पूरा हो जाने एवं उस पर झंडा चढ़ जाने के उपरांत वहां के उपसरपंच द्वारा ग्राम कोटवार का हुक्का-पानी बंद कर दिया गया। इस स्वतंत्र भारत में जो एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है। जहां सभी धर्म के अनुइयों का आपने धर्म को मानने एवं पूजने का अधिकार दिया जाता है। इस प्रकार का कृत्य इस देश की धर्मनिरपेक्षता सामाजिक सौहाद्रता को बिगाड़ता है। उपसरपंच का यह कारनामा भेदभाव, छुआछूत, आप्रश्यिता की भावनाओं को जन्म देता है। सतनामी समाज उस गांव में आजादी के पूर्व से कई पीढियों से निवासरत है वहां के ग्रामीणों के दुख-सुख में कंधे से कंधा मिलाकर साथ देता आया है। किन्तु उपसरपंच नारद साहू के द्वारा विद्वेषवश अपने स्वार्थ सिध्दी के लिए किया गया कार्य अपनी पंचायत बाड़ी में एक छतर राज का सिक्का जमाने की पहल माना जा रहा है। इस परिप्रेक्ष्य पर सरपंच एवं पंचोगण ने अपनी अनिभिज्ञता जाहिर की है। जहां पर जैतखम्भ का निर्माण किया गया है। वह जगह 5 फीट-5 फीट का जगह है। वह पर ना किसी प्रकार का सरकारी योजना के तहत ना ही भवन निर्माण प्रस्तावित नहीं है ऐसे समाजद्रोही उपसरपंच नारद साहू पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जाए। अन्यथा सतनामी समाज महासंघ एवं अखिल भारतीय सतनामी कल्याण समिति के द्वारा उग्र आंदोलन की जाएगी। जिसकी जवाबदारी शासन की होगी इसी परिपेक्ष्य में सतनामी समाज महासंघ पाटन ब्लॉक के सचिव दिनेश कोसरे एवं अखिल भारतीय सतनामी कल्याण महासभा जिला धमतरी के सचिव लादूराम कुर्रे के संयुक्त बयान से जारी किया गया है।
------
धनेन्द्र साहू पर बेबुनियाद आरोप
अभनपुर। जनपद सदस्य शशिप्रकाश साहू ने बताया कि उस दिन वस्तुस्थिति की जगह खुद उपस्थित था ऐसी कोई बात नहीं हुआ है। जिसमें धनेन्द्र साहू ने किसी प्रकार गांव वालों को धमकी दिया है। जबकि गांव के दो-चार महिलाओं के साथ मंत्रीजी के परिवारवाले मानिकचौरी प्रवेशद्वार पर नहर पुल के पास गाड़ी के सामने धरने पर बैठ गए और उसे अंदर जाने नहीं दे रहे थे। पुलिस के उच्चाधिकारी के समझाइश के बाद धनेन्द्र साहू के साथ केवल पांच व्यक्तियों को मिलने दिया गया। धनेन्द्र साहू केवल यही मांग कर रहे थे कि मृतक परिवारवालों से मिलकर उसे केवल सांत्वना देना चाहते थे। क्योंकि मृतक परिवार कांग्रेस से जुड़े हुए थे। जबकि वस्तुस्थिति में भाजपा के आसपास के सैकड़ों कार्यकर्ता पहुंच गए और धनेन्द्र साहू वापस जाओ के नारे लगाने लगे और उसके सभी कार्यकर्ता वहीं हंगामा करने लगे। चूंकि छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का संगठन चुनाव नजदीक है और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अभनपुर विधानसभा में अधिक से अधिक कांग्रेस से जुड़े हुए प्रतिनिधि चुनकर आए हैं। तो काग्रेस एवं धनेन्द्र साहू की साफ छवि में बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर उसके ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। भूपेश बघेल जी को गांव के अंदर प्रवेश करने ही नहीं दिया गया जिससे भूपेश बघेल मृतक परिवार से मिलने से पहले ही वहां से चले गए है।
रविवार, 11 जुलाई 2010
खबर यह भी
पटवारी पर जमीन
हड़पने का आरोप
धमतरी। पटवारी पर मिलीभगत कर जमीन हड़पने दूसरे के नाम करने का आरोप रेलवे कर्मचारी फटिर न्याय के लिए दर-दर घूम रहा भखारा थाना, तह कुरुद जिला धमतरी निवासी बानीराम साहू ने संबंधित क्षेत्र के पटवारी पारस चंद्राकर पर अपनी 80 डिसमिल रजिस्टर्ड जमीन हड़पने एवं केन्द्री के निवासी ज्ञानिक राम साहू के नाम करने का आरोप लगाया है।
आज यहां बाबीराम साहू पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी जोरातराई पंचायत, भाखारा थाना, तह कुरुद में 2 एकड़ 72 डिसमिल जमीन है। जिसे उन्होंने सन् 1990 में छबलू सतनामी से लेकर रजिस्ट्री बकायदा करवाई थी। जिसकी कीमत तब 15 हजार रुपए आंकी गई थी। जमीन पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राजबाई खेती करती है। साहू ने आरोप लगाते हुए बताया कि क्षेत्र के सरपंच पारस चंद्राकर ने गलत सीमांकन कर केन्द्री में किसान ज्ञानिक राम साहू पिता बनिहार साहू के साथ मिलीभगत कर उनकी बाबी साहू 80 डिसमिल जमीन को पहले शासकीय फिर ज्ञानिक साहू को बता दिया जिसका उन्होंने प्रथा गांव के पंच-सरपंच ने कडा प्रतिभार किया। पंच-सरपंच ने उस्तख्त करने में इंकार कर दिया। बावजूद पटवारी ने जमीन हड़प ली तथा उक्त किसान ज्ञानिक साहू को दे दी। जिस पर ज्ञानिक ने सब कुछ जानते हुए एवं उनकी आपत्ति को अनुसुना कर 80 डिसमिल में लगे दर्जनों पेड़ काट डाले तथा 4 ट्रेक्टरों में भरकर ले गया। बाबी राम साहू ने आगे बताया कि मामले की रिपोर्ट उन्होंने भाखाराक थाने में दर्ज कराई है। ज्ञानिक साहू आरोपी है। मामला तहसीलदार के पास विचाराधीन है। परंतु सरपंच भय के चलते दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है। उधर पुलिस भी इसके चलते ज्ञानिक को गिरफ्तार नहीं कर रही है। बाबी ने बताया कि उनके पास रजिस्ट्री के तमाम दस्तावेज है। उनकी 80 डिसमिल उक्त जमीन का वर्तमान दर लाखों में है। उन्हें न्याय चाहिए, पटवारी ने सरहदी नाला पार करके बाबी राम में जमीन हड़पने का कोशिश कर रहा है।
पत्रकार कादरी का इंतेकाल
बिलाईगढ़। बुलंद छत्तीसगढ़ के पत्रकार पंडरीपानी निवासी मोहम्मद सुल्तान कादरी वल्द सुमान खान का पिछले दिनों हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। 32 वर्षीय कादरी मिलनसार व तेज तर्रार पत्रकार के रुप में पूरे क्षेत्र में जाने जाते थे। उनके निधन पर बुलंद छत्तीसगढ़ परिवार स्तब्ध है और ईश्वर से कामना करते हैं कि उनके परिजनों को इस दुखद घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करे।
अपराधियों के संरक्षण के खिलाफ सुझाव
रायपुर। छत्तीसगढ़िया सुन्नी मुस्लिम पंचायत के सदर से मुजफ्फर अली ने कहा है कि सीरतुन्नबी कमेटी के सदर पद पर अनिवार्य रुप से छत्तीसगढ़िया मुस्लिम को ही प्राथमिकता दी जाए। इससे छत्तीसगढ़ में अपराधिक व्यक्ति जो कि मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं में संरक्षण लेते है उससे मस्जिद मदरसे, दरगाह, कमेटियों को मुक्ति मिलेगी। ऐसी सुझाव छत्तीसगढ़िया सुन्नी मुस्लिम पंचायत ने सीरत कमेटी के वयोवृध्द समाजसेवी जनाब कुतुबुद्दीन साहब को दिया है।
अस्पताल के सामने कब्जा
कर मकान बना लिया
सिमगा। रावण में कृष्णकुमार वर्मा नामक व्यक्ति ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के सामने अतिक्रमण कर मकान बना लिया। इसकी शिकायत सरपंच ने स्वास्थ्य मंत्री से की है। यही नहीं तहसीलदार सुहेला द्वारा लेन देन कर मामले को दबाने की चर्चा है।
हड़पने का आरोप
धमतरी। पटवारी पर मिलीभगत कर जमीन हड़पने दूसरे के नाम करने का आरोप रेलवे कर्मचारी फटिर न्याय के लिए दर-दर घूम रहा भखारा थाना, तह कुरुद जिला धमतरी निवासी बानीराम साहू ने संबंधित क्षेत्र के पटवारी पारस चंद्राकर पर अपनी 80 डिसमिल रजिस्टर्ड जमीन हड़पने एवं केन्द्री के निवासी ज्ञानिक राम साहू के नाम करने का आरोप लगाया है।
आज यहां बाबीराम साहू पत्रकारों से अनौपचारिक चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी जोरातराई पंचायत, भाखारा थाना, तह कुरुद में 2 एकड़ 72 डिसमिल जमीन है। जिसे उन्होंने सन् 1990 में छबलू सतनामी से लेकर रजिस्ट्री बकायदा करवाई थी। जिसकी कीमत तब 15 हजार रुपए आंकी गई थी। जमीन पर उनकी धर्मपत्नी श्रीमती राजबाई खेती करती है। साहू ने आरोप लगाते हुए बताया कि क्षेत्र के सरपंच पारस चंद्राकर ने गलत सीमांकन कर केन्द्री में किसान ज्ञानिक राम साहू पिता बनिहार साहू के साथ मिलीभगत कर उनकी बाबी साहू 80 डिसमिल जमीन को पहले शासकीय फिर ज्ञानिक साहू को बता दिया जिसका उन्होंने प्रथा गांव के पंच-सरपंच ने कडा प्रतिभार किया। पंच-सरपंच ने उस्तख्त करने में इंकार कर दिया। बावजूद पटवारी ने जमीन हड़प ली तथा उक्त किसान ज्ञानिक साहू को दे दी। जिस पर ज्ञानिक ने सब कुछ जानते हुए एवं उनकी आपत्ति को अनुसुना कर 80 डिसमिल में लगे दर्जनों पेड़ काट डाले तथा 4 ट्रेक्टरों में भरकर ले गया। बाबी राम साहू ने आगे बताया कि मामले की रिपोर्ट उन्होंने भाखाराक थाने में दर्ज कराई है। ज्ञानिक साहू आरोपी है। मामला तहसीलदार के पास विचाराधीन है। परंतु सरपंच भय के चलते दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है। उधर पुलिस भी इसके चलते ज्ञानिक को गिरफ्तार नहीं कर रही है। बाबी ने बताया कि उनके पास रजिस्ट्री के तमाम दस्तावेज है। उनकी 80 डिसमिल उक्त जमीन का वर्तमान दर लाखों में है। उन्हें न्याय चाहिए, पटवारी ने सरहदी नाला पार करके बाबी राम में जमीन हड़पने का कोशिश कर रहा है।
पत्रकार कादरी का इंतेकाल
बिलाईगढ़। बुलंद छत्तीसगढ़ के पत्रकार पंडरीपानी निवासी मोहम्मद सुल्तान कादरी वल्द सुमान खान का पिछले दिनों हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। 32 वर्षीय कादरी मिलनसार व तेज तर्रार पत्रकार के रुप में पूरे क्षेत्र में जाने जाते थे। उनके निधन पर बुलंद छत्तीसगढ़ परिवार स्तब्ध है और ईश्वर से कामना करते हैं कि उनके परिजनों को इस दुखद घड़ी को सहने की शक्ति प्रदान करे।
अपराधियों के संरक्षण के खिलाफ सुझाव
रायपुर। छत्तीसगढ़िया सुन्नी मुस्लिम पंचायत के सदर से मुजफ्फर अली ने कहा है कि सीरतुन्नबी कमेटी के सदर पद पर अनिवार्य रुप से छत्तीसगढ़िया मुस्लिम को ही प्राथमिकता दी जाए। इससे छत्तीसगढ़ में अपराधिक व्यक्ति जो कि मुस्लिम धार्मिक संस्थाओं में संरक्षण लेते है उससे मस्जिद मदरसे, दरगाह, कमेटियों को मुक्ति मिलेगी। ऐसी सुझाव छत्तीसगढ़िया सुन्नी मुस्लिम पंचायत ने सीरत कमेटी के वयोवृध्द समाजसेवी जनाब कुतुबुद्दीन साहब को दिया है।
अस्पताल के सामने कब्जा
कर मकान बना लिया
सिमगा। रावण में कृष्णकुमार वर्मा नामक व्यक्ति ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के सामने अतिक्रमण कर मकान बना लिया। इसकी शिकायत सरपंच ने स्वास्थ्य मंत्री से की है। यही नहीं तहसीलदार सुहेला द्वारा लेन देन कर मामले को दबाने की चर्चा है।
बुधवार, 5 मई 2010
बहु को नहीं पकड़ पा रही पुलिस!
घोटालेबाजों का जमाना
महाधिवक्ता है सुराना - 7
छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग किस तरह से सरकार के आगे नतमस्तक है इसका उदाहरण श्रीमती चेतना सुराना के केस से समझा जा सकता है। कोर्ट में पेश करने के आदेश के बाद भी स्थानीय पुलिस को श्रीमती सुराना नहीं मिल पा रही है या वे दबाव में कार्रवाई नहीं कर रही है यह तो पुलिस महकमा ही जाने लेकिन इस मामले की चर्चा जोरों पर है कि शासन से सांठगांठ कर अपराधी आसानी से बच जाते हैं।
मंदिर की जमीन से लेकर आदिवासियों की जमीन हड़पने के आरोप में फंसे सुराना परिवार के ऊपर कई तरह के आरोप है उनके पार्टनर रह चुके कई लोगों ने तो सत्ता के दुरूपयोग का कई आरोप लगाया है। ऐसा ही मामला सुराना परिवार की बहु श्रीमती चेतना सुराना पर भी लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि श्रीमती चेतना सुराना पति आनंद सुराना ने डीपी गांधी व अन्य के खिलाफ थाना गोल बाजार में आपराधिक प्रकरण 420, 467, 468, 471 एवं 34 भादवि के तहत मामला दर्ज करवाया था। प्रभावशाली होने के कारण गोलबाजार पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन जांच में यह मामला झूठा पाया गया और न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया।इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के पुलिस निदेशक की शिकायत जांच रिपोर्ट में कहा गया कि श्रीमती चेतना सुराना और उनके मुख्तयार पति आनंद सुराना को आभास था कि वे झूठी शिकायत कर रहे हैं फिर भी उसने प्रशासन को गुमराह करते हुए थाना स्तर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रकरण दर्ज कराया। इसके बाद थाना प्रभारी गोल बाजार ने श्रीमती चेतना सुराना के विरुध्द इस्तगासा 12009 अंतर्गत धारा 182, 211 के तहत दंडित कराने माननीय न्यायालय में पेश किया जहां वह उपस्थित नहीं हुई और पुलिस भी उसे पेश नहीं करा सकी। बहरहाल सुराना परिवार पर लग रहे आरोपों की कई तरह की चर्चा है और लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि इतने आरोपों के बाद भी कोई महाधिवक्ता कैसे बन सकता है?
महाधिवक्ता है सुराना - 7
छत्तीसगढ़ में पुलिस विभाग किस तरह से सरकार के आगे नतमस्तक है इसका उदाहरण श्रीमती चेतना सुराना के केस से समझा जा सकता है। कोर्ट में पेश करने के आदेश के बाद भी स्थानीय पुलिस को श्रीमती सुराना नहीं मिल पा रही है या वे दबाव में कार्रवाई नहीं कर रही है यह तो पुलिस महकमा ही जाने लेकिन इस मामले की चर्चा जोरों पर है कि शासन से सांठगांठ कर अपराधी आसानी से बच जाते हैं।
मंदिर की जमीन से लेकर आदिवासियों की जमीन हड़पने के आरोप में फंसे सुराना परिवार के ऊपर कई तरह के आरोप है उनके पार्टनर रह चुके कई लोगों ने तो सत्ता के दुरूपयोग का कई आरोप लगाया है। ऐसा ही मामला सुराना परिवार की बहु श्रीमती चेतना सुराना पर भी लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि श्रीमती चेतना सुराना पति आनंद सुराना ने डीपी गांधी व अन्य के खिलाफ थाना गोल बाजार में आपराधिक प्रकरण 420, 467, 468, 471 एवं 34 भादवि के तहत मामला दर्ज करवाया था। प्रभावशाली होने के कारण गोलबाजार पुलिस ने मामला तो दर्ज कर लिया लेकिन जांच में यह मामला झूठा पाया गया और न्यायालय ने इसे खारिज कर दिया।इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के पुलिस निदेशक की शिकायत जांच रिपोर्ट में कहा गया कि श्रीमती चेतना सुराना और उनके मुख्तयार पति आनंद सुराना को आभास था कि वे झूठी शिकायत कर रहे हैं फिर भी उसने प्रशासन को गुमराह करते हुए थाना स्तर पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रकरण दर्ज कराया। इसके बाद थाना प्रभारी गोल बाजार ने श्रीमती चेतना सुराना के विरुध्द इस्तगासा 12009 अंतर्गत धारा 182, 211 के तहत दंडित कराने माननीय न्यायालय में पेश किया जहां वह उपस्थित नहीं हुई और पुलिस भी उसे पेश नहीं करा सकी। बहरहाल सुराना परिवार पर लग रहे आरोपों की कई तरह की चर्चा है और लोग आश्चर्य व्यक्त कर रहे हैं कि इतने आरोपों के बाद भी कोई महाधिवक्ता कैसे बन सकता है?
रविवार, 2 मई 2010
मंत्रीगिरी से लोग नाराज
भीड़ देख मूणत बौखलाए
राशन दुकानों की अनियमितता की शिकायत लेकर वार्ड पार्षद के साथ पहुंचे कोटा वार्ड के नागरिकों को तब अपमानजनक स्थिति से गुजरना पड़ा जब नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत ने शिकायत सुनने की बजाए महिला पार्षद को चिल्लाते हुए कहा कि पार्षद का काम राशन दिलाना नहीं है, कार्ड मिल गया यही काफी है चुप
चाप घर में बैठें।
वैसे नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत का यह रवैया नया नहीं है उनके व्यवहार से आम आदमी ही नहीं भाजपा के कई कार्यकर्ता भी दुखी है जो मन में आए कह देने की उनकी आदत से आम लोगों में सरकार के प्रति क्रोध बढता ही जा रहा है। यही नहीं मुख्यमंत्री के गृह जिले कवर्धा में भी उनकी भाजपा कार्यकर्ताओं से झड़प हो चुकी है।
ताजा मामला 26 अप्रैल की है जब कोटा वार्ड की निर्दलीय पार्षद श्रीमती अंजू तिवारी ने वार्ड में राशन ठीक से नहीं बांटने व राशन दुकानदारों द्वारा अनियमितता की शिकायत लेकर करीब डेढ़ सौ कार्डधारियों को लेकर कलेक्टर संजय गर्ग के पास पहुंची थी। पार्षद का आरोप है कि प्रियदर्शनी और मां खल्लारी सहकारी समिति की अनियमितता से लोग त्रस्त हैं। बताया जाता है कलेक्टर ने कार्रवाई का आश्वासन तो दिया लेकिन इससे लोग संतुष्ट नहीं हुए और वहीं नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत जो क्षेत्र के विधायक भी है से मिलने का निश्चय किया।
बताया जाता है कि पहले से ही परेशान नागरिक जब मंत्री बंगला पहुंचे तो मंत्री के जवाब से उन्हें आश्चर्य हुआ। श्रीमती तिवारी का कहना था कि श्री मूणत शिकायकर्ताओं की भीड़ देख बौखला गए और जो मन में आया कहने लगे इससे नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इधर कोटा वार्ड के नागरिकों का कहना है कि दूसरी बार मंत्री बने मूणत नहीं चाहते कि कोई शिकायत करे इसलिए जब भी कोई शिकायत लेकर जाता है वे ऐसा ही व्यवहार करते हैं। बहरहाल इस मामले से लोग नाराज है और आगे की रणनीति बनाने में लगे है। एक नागरिक संजय ने कहा कि वे इस घटना की शिकायत मुख्यमंत्री से भी करेंगे।
राशन दुकानों की अनियमितता की शिकायत लेकर वार्ड पार्षद के साथ पहुंचे कोटा वार्ड के नागरिकों को तब अपमानजनक स्थिति से गुजरना पड़ा जब नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत ने शिकायत सुनने की बजाए महिला पार्षद को चिल्लाते हुए कहा कि पार्षद का काम राशन दिलाना नहीं है, कार्ड मिल गया यही काफी है चुप
चाप घर में बैठें।वैसे नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत का यह रवैया नया नहीं है उनके व्यवहार से आम आदमी ही नहीं भाजपा के कई कार्यकर्ता भी दुखी है जो मन में आए कह देने की उनकी आदत से आम लोगों में सरकार के प्रति क्रोध बढता ही जा रहा है। यही नहीं मुख्यमंत्री के गृह जिले कवर्धा में भी उनकी भाजपा कार्यकर्ताओं से झड़प हो चुकी है।
ताजा मामला 26 अप्रैल की है जब कोटा वार्ड की निर्दलीय पार्षद श्रीमती अंजू तिवारी ने वार्ड में राशन ठीक से नहीं बांटने व राशन दुकानदारों द्वारा अनियमितता की शिकायत लेकर करीब डेढ़ सौ कार्डधारियों को लेकर कलेक्टर संजय गर्ग के पास पहुंची थी। पार्षद का आरोप है कि प्रियदर्शनी और मां खल्लारी सहकारी समिति की अनियमितता से लोग त्रस्त हैं। बताया जाता है कलेक्टर ने कार्रवाई का आश्वासन तो दिया लेकिन इससे लोग संतुष्ट नहीं हुए और वहीं नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत जो क्षेत्र के विधायक भी है से मिलने का निश्चय किया।
बताया जाता है कि पहले से ही परेशान नागरिक जब मंत्री बंगला पहुंचे तो मंत्री के जवाब से उन्हें आश्चर्य हुआ। श्रीमती तिवारी का कहना था कि श्री मूणत शिकायकर्ताओं की भीड़ देख बौखला गए और जो मन में आया कहने लगे इससे नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। इधर कोटा वार्ड के नागरिकों का कहना है कि दूसरी बार मंत्री बने मूणत नहीं चाहते कि कोई शिकायत करे इसलिए जब भी कोई शिकायत लेकर जाता है वे ऐसा ही व्यवहार करते हैं। बहरहाल इस मामले से लोग नाराज है और आगे की रणनीति बनाने में लगे है। एक नागरिक संजय ने कहा कि वे इस घटना की शिकायत मुख्यमंत्री से भी करेंगे।
गुरुवार, 29 अप्रैल 2010
दबाव के आगे कार्रवाई रूकी
घोटालेबाजों का जमाना महाधिवक्ता है सुराना - 6
पार्टी के प्रति निष्ठा के चलते देवराज सुराना ने महाधिवक्ता पद का सफर कर लिया हो पर विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रही है। धम कमाने में कानूनी दांव पेंच ने नैतिकता का तो किनारे किया ही परिवार की महिला सदस्य भी कानूनी दांव पेंच में फंस गई। अब जब सरकार को जेब में रखने का दावा हो तो फिर प्रशासन से उम्मीद बेमानी हो जाती है। यही सब कारण है कि आम लोगों का कानून से भरोसा उठने लगा है।
महाधिवक्ता पद तक पहुंचने देवराज सुराना व उनके परिजनों पर दर्जनभर से अधिक मामले ऐसे हैं जो उन्हें सीधा कटघरे पर खड़ा करता है लेकिन शासन-प्रशासन कानूनी पेचदगीयों में इस कदर उलझी है कि कार्रवाई की आस में लोग अपना सिर धुन रहे हैं। जब मंदिर की जमीनों को बेचने-खरीदने में दुनियाभर के नियम कानून है तब सुराना परिवार के नानेश बिल्डर्स द्वारा गोपियापारा स्थित श्री हनुमान मंदिर की भाठागांव स्थित बेशकीमती जमीन का घोटाला कैसे कर लिया गया। इस संपूर्ण मामले में भाजपा सरकार की भूमिका पर भी जांच होनी चाहिए जब जोगी शासनकाल में इस पर बंदिश लगाई गई थी तब आनन-फानन में डॉ. रमन सरकार में इस जमीन की खरीदी बिक्री की अनुमति कैसे दी गई।
इस मामले में फर्जी मुख्तियार नामा से लेकर खरीदी बिक्री में जो घपले हुए उस पर कार्रवाई की बजाए प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती की गई। जिस कलेक्टर ने इसकी बिक्री को रोका उसी ने अचानक सरकार बदलते ही रजिस्ट्री की अनुमति कैसे दे दी। इस पूरे मामले का जांच प्रतिवेदन भी समझने योग्य है कि किस तरह से जांच प्रतिवेदन में तहसीलदार और उपपंजीयक के विरुध्द कार्रवाई की बात कही गई लेकिन अचानक सारा मामला भूला दिया गया। इस जमीन की रजिस्ट्री के बाद जब विवाद बढ़ा तो इसे रामसागर पारा के सुशील अग्रवाल और रवि वासवानी को बेचा गया। इन लोगों के नामांतरण की फाईल जब तहसीलदार ने रोकी तो कैसे नानेश बिल्डर्स ने दूसरे के नाम रजिस्ट्री के बाद अपने नाम डायवर्सन करा लिया।
हिन्दूवादी पार्टी का दंभ भरने वाली भाजपा ने श्री हनुमान मंदिर की बेशकीमती जमीन पर खेले गए खेल को कैसे चुपचाप देखते रही। यह सब ऐसा सवाल है जिसका जवाब सरकार को देना ही होगा। बहरहाल इस पूरे मामले की राजधानी ही नहीं न्यायधानी में भी जमकर चर्चा है और आने वाले दिनों में इसका खामियाजा भी भुगतना पड़े तो आश्चर्य नहीं है।
पार्टी के प्रति निष्ठा के चलते देवराज सुराना ने महाधिवक्ता पद का सफर कर लिया हो पर विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रही है। धम कमाने में कानूनी दांव पेंच ने नैतिकता का तो किनारे किया ही परिवार की महिला सदस्य भी कानूनी दांव पेंच में फंस गई। अब जब सरकार को जेब में रखने का दावा हो तो फिर प्रशासन से उम्मीद बेमानी हो जाती है। यही सब कारण है कि आम लोगों का कानून से भरोसा उठने लगा है।
महाधिवक्ता पद तक पहुंचने देवराज सुराना व उनके परिजनों पर दर्जनभर से अधिक मामले ऐसे हैं जो उन्हें सीधा कटघरे पर खड़ा करता है लेकिन शासन-प्रशासन कानूनी पेचदगीयों में इस कदर उलझी है कि कार्रवाई की आस में लोग अपना सिर धुन रहे हैं। जब मंदिर की जमीनों को बेचने-खरीदने में दुनियाभर के नियम कानून है तब सुराना परिवार के नानेश बिल्डर्स द्वारा गोपियापारा स्थित श्री हनुमान मंदिर की भाठागांव स्थित बेशकीमती जमीन का घोटाला कैसे कर लिया गया। इस संपूर्ण मामले में भाजपा सरकार की भूमिका पर भी जांच होनी चाहिए जब जोगी शासनकाल में इस पर बंदिश लगाई गई थी तब आनन-फानन में डॉ. रमन सरकार में इस जमीन की खरीदी बिक्री की अनुमति कैसे दी गई।
इस मामले में फर्जी मुख्तियार नामा से लेकर खरीदी बिक्री में जो घपले हुए उस पर कार्रवाई की बजाए प्रशासनिक स्तर पर लीपापोती की गई। जिस कलेक्टर ने इसकी बिक्री को रोका उसी ने अचानक सरकार बदलते ही रजिस्ट्री की अनुमति कैसे दे दी। इस पूरे मामले का जांच प्रतिवेदन भी समझने योग्य है कि किस तरह से जांच प्रतिवेदन में तहसीलदार और उपपंजीयक के विरुध्द कार्रवाई की बात कही गई लेकिन अचानक सारा मामला भूला दिया गया। इस जमीन की रजिस्ट्री के बाद जब विवाद बढ़ा तो इसे रामसागर पारा के सुशील अग्रवाल और रवि वासवानी को बेचा गया। इन लोगों के नामांतरण की फाईल जब तहसीलदार ने रोकी तो कैसे नानेश बिल्डर्स ने दूसरे के नाम रजिस्ट्री के बाद अपने नाम डायवर्सन करा लिया।
हिन्दूवादी पार्टी का दंभ भरने वाली भाजपा ने श्री हनुमान मंदिर की बेशकीमती जमीन पर खेले गए खेल को कैसे चुपचाप देखते रही। यह सब ऐसा सवाल है जिसका जवाब सरकार को देना ही होगा। बहरहाल इस पूरे मामले की राजधानी ही नहीं न्यायधानी में भी जमकर चर्चा है और आने वाले दिनों में इसका खामियाजा भी भुगतना पड़े तो आश्चर्य नहीं है।
रविवार, 25 अप्रैल 2010
देश प्रेम का चेहरा लगाओं घपलेबाजी से पैसा कमाओं
तिरंगा लगाने के नाम पर युवाओं के आदर्श बनने वाले जिंदल उद्योग समूह के नवीन जिंदल का असली चेहरा धीरे-धीरे सामने आने लगा है। इसी दम पर सांसद की सीढ़ी का भी सफर तय कर चुके हैं लेकिन पैसा कमाने की भूख कहें या भाजपाई राज की सेटिंग कहें। जिस पैमाने पर रायगढ़ में इस उद्योग समूह ने खेल खेला है वह उसके देश प्रेम के ढकोसले को तो उजागर करता ही है मुख्य सचिव जाय. उमेन के नोटशीट ने रमन सरकार के चेहरे को भी आईना दिखा दिया है कि इस तरह से छत्तीसगढ़ को बड़े पैमाने पर लूटने का खेल चल रहा है।छत्तीसगढ़ में मची लूट खसोट की यह सबसे खतरनाक कड़ी है बालको हादसे का मामला हो या उद्योगों को जमीन हड़पने की छूट का मामला हो कहीं न कहीं सरकार के मुखिया की भूमिका संदिग्ध नजर आती है ऐसे
में जब बाढ़ ही खेत खाने लगे तो फसल रुपी आम छत्तीसगढ़िया के भविष्य को बर्बाद होने से कौन रोक सकता है। दरअसल यह सारा खेल अरबों रुपए का है जिसमें उर्जा विभाग अपने पास रखने वाले मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह और जिंदल उद्योग समूह के एम.डी. के बीच हुई मुलाकात के बाद शुरु हुई। इस खेल में राय के लोगों को पॉवर कट का सामना करना पड़ा जबकि जिंदल पावर लिमिटेड को अरबों रुपए का फायदा हुआ।छत्तीसगढ़ राय ने यह नियम बनाया है कि बिजली उत्पादन करने वाले उद्योग सीएसईबी को ही बिजली देंगे। इसी नियम के अनुरूप मेसर्स जिंदल पॉवर लिमिटेड तमनार जिला रायगढ़ और छत्तीसगढ़ विद्युत बोर्ड के बीच एग्रीमेंट हुआ। इसके तहत जिंदल द्वारा कुल विद्युत उत्पादन का 37.5 प्रतिशत बिजली विद्युत मंडल को जिंदल द्वारा दिया जाना था। लेकिन यह सब नहीं हुआ। वास्तव में एग्रीमेंट के मुताबिक छत्तीसगढ़ विद्युत बोर्ड यह बिजली 2 रुपए 88 पैसे में खरीदी करती। इधर जिंदल ने वर्ष 2009 में 8028.02 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया और उसने छत्तीसगढ़ को केवल 1337.84 मिलियन यूनिट बिजली ही दिया जबकि कुल उत्पादन के हिसाब से छत्तीसगढ़ को 3015.50 मिलियन यूनिट बिजली मिलनी थी। यानी 1672.66 मिलियन यूनिट बिजली छत्तीसगढ़ को कम मिली।
पूरा खेल
यहीं से शुरु हुआ। जिंदल ने 1672.66 मिलियन यूनिट बिजली छत्तीसगढ़ को देने की बजाय इसे दूसरे को बेच दिया। बताया जाता है कि वर्ष 2009 में बिजली बाहर बेचने का औसत दर 7-8 रुपए था इस लिहाज से जिंदल ने 4 रुपए प्रति यूनिट अधिक दर पर बिजली बेची जिससे उन्हें 700 करोड़ से अधिक का लाभ हुआ जबकि यही बिजली वह राय को बेचती तो उसे 2.99 प्रति यूनिट से पैसा मिलता।इस सारे खेल में किसकी भूमिका यह जांच का विषय है। एक तरफ प्रदेश में लोग बिजली संकट से जूझ रहे है और दूसरी तरफ जिंदल को बिजली खरीदने की बजाय उसे लाभ पहुंचाया जा रहा है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि उर्जा विभाग मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास है तब यह सब हुअआ ऐसे में उनकी भूमिका को लेकर संदेह उठना स्वाभाविक है और करोड़ों में लेन देन के आरोप भी लग रहे हैं।उनकी भूमिका पर संदेह इसलिए भी उठता है कि मुख्य सचिव पी.जाय. उमेन ने अपने नोटशीट में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और जिंदल पॉवर लिमिटेड के एमडी नवीन जिंदल से हुई बैठक की बात लिखी है। इस पत्र में कई तरह के खुलासे हैं जो मुख्यमंत्री की भूमिका पर संदेह व्यक्त करने के लिए काफी है।
गुरुवार, 22 अप्रैल 2010
अब गृहमंत्री की दमदारी कहां गई

क्यों नहीं हुआ अमितेष पर जुर्म दर्ज
वैसे तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में अभी भी शुक्ल परिवार के वर्चस्व को नकारा नहीं जा सकता। इस परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने से आज भी शासन-प्रशासन के हाथ-पैर फूलने लगते है। इसलिए सट्टा का मामला हो या बिजली चोरी का मामला पुलिस मकान मालिक शुक्ल पर कार्रवाई से अपने को दूर ही रखती है। जबकि किरायेदार की करतूतों पर मकान मालिकों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया जाता है।
छत्तीसगढ सरकार और उसकी पुलिस के द्वारा किस तरह भेदभाव किया जाता है इसका ताजा उदाहरण पुराना बस स्टैण्ड स्थित होटल हेमटन का है जहां पुलिस ने पिछले हफ्ते क्रिकेट में सट्टा का भंड़ाफोड़ कर दो-तीन लोगों को गिरफ्तार किया था लेकिन पुलिस ने होटल मालिक की तरफ आंख उठाने की भी हिमाकत नहीं की। जबकि यहां की पुलिस ने किरायेदारों की करतूत पर मकान मालिकों के खिलाफ दर्जनभर से अधिक मामले बना चुकी है।
यही हाल पचपेढ़ी नाका स्थित नेस्ट बार का है यहां खुलेआम बिजली चोरी होती रही और जब मामला पकड़ाया तो यहां कार्रवाई के नाम पर अमितेष शुक्ल के समर्थक गौतम मिश्रा के खिलाफ ही कार्रवाई की गई। राजधानी पुलिस के इस रवैये से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शुक्ल परिवार का यहां कितना दबदबा है। इस मामले में जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की गई तो वे इसका जवाब देने से बचते रहे एक वरिष्ठ अधिकारी का तो यहां तक कहना था कि मुझे इस मामले में न घसीटों जिस थाने का मामला है वहीं पूछताछ करों।
बताया जाता है कि पुराना बस स्टैण्ड स्थित होटल हेमटन और पचपेढ़ी नाका स्थित नेस्ट बार की जगह का मालिक राजिम के विधायक अमितेष शुक्ल का है और इसे किराये पर दिया गया है। पुलिस के इस भेदभावपूर्वक कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि दोनों ही स्थानों पर असामाजिक तत्वों का जमावाड़ा होता है लेकिन पुलिस यहां जांच करने से घबराती है।
वैसे तो छत्तीसगढ़ की राजनीति में अभी भी शुक्ल परिवार के वर्चस्व को नकारा नहीं जा सकता। इस परिवार के खिलाफ कार्रवाई करने से आज भी शासन-प्रशासन के हाथ-पैर फूलने लगते है। इसलिए सट्टा का मामला हो या बिजली चोरी का मामला पुलिस मकान मालिक शुक्ल पर कार्रवाई से अपने को दूर ही रखती है। जबकि किरायेदार की करतूतों पर मकान मालिकों के खिलाफ जुर्म दर्ज किया जाता है।
छत्तीसगढ सरकार और उसकी पुलिस के द्वारा किस तरह भेदभाव किया जाता है इसका ताजा उदाहरण पुराना बस स्टैण्ड स्थित होटल हेमटन का है जहां पुलिस ने पिछले हफ्ते क्रिकेट में सट्टा का भंड़ाफोड़ कर दो-तीन लोगों को गिरफ्तार किया था लेकिन पुलिस ने होटल मालिक की तरफ आंख उठाने की भी हिमाकत नहीं की। जबकि यहां की पुलिस ने किरायेदारों की करतूत पर मकान मालिकों के खिलाफ दर्जनभर से अधिक मामले बना चुकी है।
यही हाल पचपेढ़ी नाका स्थित नेस्ट बार का है यहां खुलेआम बिजली चोरी होती रही और जब मामला पकड़ाया तो यहां कार्रवाई के नाम पर अमितेष शुक्ल के समर्थक गौतम मिश्रा के खिलाफ ही कार्रवाई की गई। राजधानी पुलिस के इस रवैये से अंदाजा लगाया जा सकता है कि शुक्ल परिवार का यहां कितना दबदबा है। इस मामले में जब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ की गई तो वे इसका जवाब देने से बचते रहे एक वरिष्ठ अधिकारी का तो यहां तक कहना था कि मुझे इस मामले में न घसीटों जिस थाने का मामला है वहीं पूछताछ करों।
बताया जाता है कि पुराना बस स्टैण्ड स्थित होटल हेमटन और पचपेढ़ी नाका स्थित नेस्ट बार की जगह का मालिक राजिम के विधायक अमितेष शुक्ल का है और इसे किराये पर दिया गया है। पुलिस के इस भेदभावपूर्वक कार्रवाई को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि दोनों ही स्थानों पर असामाजिक तत्वों का जमावाड़ा होता है लेकिन पुलिस यहां जांच करने से घबराती है।
बुधवार, 21 अप्रैल 2010
दामाद की दमदारी , सरकारी की लाचारी
घोटालेबाजों का जमाना है महाधिवक्ता सुराना है- 5
जनसंघ की टिकिट से चुनाव लड़ चुके महाधिवक्ता देवराज सुराना ही नहीं उनके दामाद विजयचंद बोथरा भी दमदार है यही वजह है कि इनके परिवार के खिलाफ एक के बाद एक केस तो दर्ज हुए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
मंदिर से लेकर आदिवासियों की जमीन हड़पने का मामला हो या श्रीमती चेतना सुराना का ही मामला हो पुलिस सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और सत्ता के प्रभाव में फर्जीवाड़ा जमकर चलता रहा। क्या अब भी सरकार इस मामले पर कार्रवाई की बजाय खामोश रहेगा।
दरअसल छत्तीसगढ क़ी भाजपाई राजनीति में सुराना परिवार का जबरदस्त दबदबा है और कहा जाता है कि इनके खिलाफ जुबान खोलने वालों की पार्टी में खैर नहीं। यही वजह है कि जब देवराज सुराना को महाधिवक्ता बनाया गया तब भी किसी ने विरोध नहीं किया और आज जब उन्हें लेकर पार्टी की बदनामी हो रही है तब भी कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। वास्तव में देवराज सुराना ही नहीं उनके परिवार के कवर्धा निवासी विजयचंद बोथरा भी दमदार हैं और कहा जाता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले के होने के कारण उनका डा. रमन सिंह से सीधे संबंध है और जिस व्यक्ति का मुख्यमंत्री से सीधे संबंध हो उसके खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद किया जाना निरर्थक माना जाता है यही वजह है कि बदनामी से कई भाजपाई दुखी तो हैं लेकिन वे अपना दुख दबी जबान में ही व्यक्त करते हैं।
बताया जाता है कि आदिवासियों की जमीनें फर्जी तरीके से खरीदने के मामले में न केवल विजयचंद बोथरा बल्कि उनके पुत्र विनित बोथरा तक शामिल हैं और इसी तरह इस बात की भी चर्चा है कि सुराना परिवार को उनके मामले से बचाने में बोथरा परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कवर्धा के इस प्रभावशाली बोथरा परिवार के भी अपने किस्से हैं और कहा जा रहा है कि सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी तक इस परिवार की पहुंच का लोहा मानते हैं और कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी इनके इशारे पर हुई हैं।
यही वजह है कि सुराना-बोथरा परिवार की पहुंच ने चेतना सुराना के मामले में पुलिस के हाथ पैर बांध दिए हैं। पुलिस इस्तेगासा तो पेश कर दी है लेकिन श्रीमती चेतना सुराना की अनुपस्थिति पर चुप्पी साध रखी है। चेतना सुराना मामले का सबसे दुखद पहलु तो यह है कि देवराज सुराना महाधिवक्ता है और शासन-प्रशासन को महाधिवक्ता से सलाह लेना होता है ऐसे में बहुत संभव है पुलिस खामोश रहे। बहरहाल सुराना-बोथरा परिवार की इस जुगलबंदी के किस्से आम लोगों में चर्चा का विषय है और यही हाल रहा तो सरकार को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
जनसंघ की टिकिट से चुनाव लड़ चुके महाधिवक्ता देवराज सुराना ही नहीं उनके दामाद विजयचंद बोथरा भी दमदार है यही वजह है कि इनके परिवार के खिलाफ एक के बाद एक केस तो दर्ज हुए लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
मंदिर से लेकर आदिवासियों की जमीन हड़पने का मामला हो या श्रीमती चेतना सुराना का ही मामला हो पुलिस सिर्फ हाथ पर हाथ धरे बैठी रही और सत्ता के प्रभाव में फर्जीवाड़ा जमकर चलता रहा। क्या अब भी सरकार इस मामले पर कार्रवाई की बजाय खामोश रहेगा।दरअसल छत्तीसगढ क़ी भाजपाई राजनीति में सुराना परिवार का जबरदस्त दबदबा है और कहा जाता है कि इनके खिलाफ जुबान खोलने वालों की पार्टी में खैर नहीं। यही वजह है कि जब देवराज सुराना को महाधिवक्ता बनाया गया तब भी किसी ने विरोध नहीं किया और आज जब उन्हें लेकर पार्टी की बदनामी हो रही है तब भी कोई खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। वास्तव में देवराज सुराना ही नहीं उनके परिवार के कवर्धा निवासी विजयचंद बोथरा भी दमदार हैं और कहा जाता है कि मुख्यमंत्री के गृह जिले के होने के कारण उनका डा. रमन सिंह से सीधे संबंध है और जिस व्यक्ति का मुख्यमंत्री से सीधे संबंध हो उसके खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद किया जाना निरर्थक माना जाता है यही वजह है कि बदनामी से कई भाजपाई दुखी तो हैं लेकिन वे अपना दुख दबी जबान में ही व्यक्त करते हैं।
बताया जाता है कि आदिवासियों की जमीनें फर्जी तरीके से खरीदने के मामले में न केवल विजयचंद बोथरा बल्कि उनके पुत्र विनित बोथरा तक शामिल हैं और इसी तरह इस बात की भी चर्चा है कि सुराना परिवार को उनके मामले से बचाने में बोथरा परिवार की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। कवर्धा के इस प्रभावशाली बोथरा परिवार के भी अपने किस्से हैं और कहा जा रहा है कि सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी तक इस परिवार की पहुंच का लोहा मानते हैं और कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां भी इनके इशारे पर हुई हैं।
यही वजह है कि सुराना-बोथरा परिवार की पहुंच ने चेतना सुराना के मामले में पुलिस के हाथ पैर बांध दिए हैं। पुलिस इस्तेगासा तो पेश कर दी है लेकिन श्रीमती चेतना सुराना की अनुपस्थिति पर चुप्पी साध रखी है। चेतना सुराना मामले का सबसे दुखद पहलु तो यह है कि देवराज सुराना महाधिवक्ता है और शासन-प्रशासन को महाधिवक्ता से सलाह लेना होता है ऐसे में बहुत संभव है पुलिस खामोश रहे। बहरहाल सुराना-बोथरा परिवार की इस जुगलबंदी के किस्से आम लोगों में चर्चा का विषय है और यही हाल रहा तो सरकार को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
बुधवार, 14 अप्रैल 2010
प्रदेश के बड़े मगरमच्छों के खिलाफ 6 सौ मामले...
अब छत्तीसगढ क़ा क्या होगा
सरकार मामला दबा रही
छत्तीसगढ़ राय बनने के बाद यहां के उच्च पदस्थ अधिकारियों और मंत्रियों ने चौतरफा लूट मचा रखी है और यही वजह है कि लोक आयोग जैसी संस्था में शिकायतों का ग्राफ बढता जा रहा है और सरकार खुद को बचाने किसी भी मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है।
छत्तीसगढ़ राय निर्माण के बाद वैसे तो सरकार ने लोकायुक्त के मुकाबले लोक आयोग का गठन कर अपनी मंशा जाहिर कर दी थी कि वह अपने नेताओं और मंत्रियों को किस तरह से संरक्षण देना चाहते है और अब राय निर्माण के दस साल में यही सब हो भी रहा है। बताया जाता है कि लोक आयोग के पास लगभग 6 सौ मामले लंबित है। इनमें सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्री और अधिकारियों के नाम है। हालत यह है कि इन लोगों के खिलाफ मिली शिकायतों की ठीक से न तो जांच हो रही है और न ही जांच में सहयोग ही किया जा रहा है।
वैसे लोक आयोग ने पिछले साल दर्जनभर मामले में कार्रवाई के लिए राय सरकार से अनुशंसा भी की थी लेकिन पता चला है कि इस मामले में सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
छत्तीसगढ़ में निर्माण के क्षेत्र में खासकर पीडब्ल्यूडी, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य, खनिज और पंचायत विभाग में भारी भ्रष्टाचार करने की खबर है और मंत्री से लेकर अधिकारियों के खिलाफ मय सबूत शिकायतें की गई है लेकिन इन मामलों की जांच तक नहीं हो रही है इस संबंध में बताया जाता है कि सरकार जानबूझकर बल की कमी उत्पन्न कर रही है जिससे चौतरफा जांच प्रभावित हो वहीं सरकार के दबाव की भी चर्चा है।इधर पता चला है कि यदि लोक आयोग को सरकार छूट दें तो प्रदेश के आधा दर्जन मंत्री और दर्जनभर से अधिक अधिकारी कटघरे में जा सकते हैं। ऐसे में सरकार अपनी बदनामी से बचने आयोग की सिफारिशों को रद्दी की टोकरी में फेंक रही है। दूसरी तरफ इस बार बजट सत्र में रिपोर्ट नहीं पेश करने को लेकर भी सरकार कटघरे में है और कहा जा रहा है कि मानसून सत्र में रिपोर्ट पेश की जाएगी। बहरहाल लोक आयोग पर दबाव को लेकर रमन सरकार कटघरे में है और कहा जाता है कि प्रदेश के भ्रष्ट मगरमच्छों को बचाने की कोशिश हो रही है।
सरकार मामला दबा रही
छत्तीसगढ़ राय बनने के बाद यहां के उच्च पदस्थ अधिकारियों और मंत्रियों ने चौतरफा लूट मचा रखी है और यही वजह है कि लोक आयोग जैसी संस्था में शिकायतों का ग्राफ बढता जा रहा है और सरकार खुद को बचाने किसी भी मामले में कार्रवाई नहीं कर रही है।
छत्तीसगढ़ राय निर्माण के बाद वैसे तो सरकार ने लोकायुक्त के मुकाबले लोक आयोग का गठन कर अपनी मंशा जाहिर कर दी थी कि वह अपने नेताओं और मंत्रियों को किस तरह से संरक्षण देना चाहते है और अब राय निर्माण के दस साल में यही सब हो भी रहा है। बताया जाता है कि लोक आयोग के पास लगभग 6 सौ मामले लंबित है। इनमें सरकार के कई महत्वपूर्ण मंत्री और अधिकारियों के नाम है। हालत यह है कि इन लोगों के खिलाफ मिली शिकायतों की ठीक से न तो जांच हो रही है और न ही जांच में सहयोग ही किया जा रहा है।
वैसे लोक आयोग ने पिछले साल दर्जनभर मामले में कार्रवाई के लिए राय सरकार से अनुशंसा भी की थी लेकिन पता चला है कि इस मामले में सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
छत्तीसगढ़ में निर्माण के क्षेत्र में खासकर पीडब्ल्यूडी, पर्यटन, सिंचाई, स्वास्थ्य, खनिज और पंचायत विभाग में भारी भ्रष्टाचार करने की खबर है और मंत्री से लेकर अधिकारियों के खिलाफ मय सबूत शिकायतें की गई है लेकिन इन मामलों की जांच तक नहीं हो रही है इस संबंध में बताया जाता है कि सरकार जानबूझकर बल की कमी उत्पन्न कर रही है जिससे चौतरफा जांच प्रभावित हो वहीं सरकार के दबाव की भी चर्चा है।इधर पता चला है कि यदि लोक आयोग को सरकार छूट दें तो प्रदेश के आधा दर्जन मंत्री और दर्जनभर से अधिक अधिकारी कटघरे में जा सकते हैं। ऐसे में सरकार अपनी बदनामी से बचने आयोग की सिफारिशों को रद्दी की टोकरी में फेंक रही है। दूसरी तरफ इस बार बजट सत्र में रिपोर्ट नहीं पेश करने को लेकर भी सरकार कटघरे में है और कहा जा रहा है कि मानसून सत्र में रिपोर्ट पेश की जाएगी। बहरहाल लोक आयोग पर दबाव को लेकर रमन सरकार कटघरे में है और कहा जाता है कि प्रदेश के भ्रष्ट मगरमच्छों को बचाने की कोशिश हो रही है।
मंगलवार, 13 अप्रैल 2010
संवाद में 18 करोड़ का घोटाला...

आडिट आपत्ति के बाद लीपापोती शुरु
अपने निर्माण के साथ ही विवादों में घिरे छत्तीसगढ़ संवाद में अनियमितता की कहानी थमने का नाम नहीं ले रही है संविदा नियुक्ति के मामले में लेन-देन में फंसे यहां के अधिकारी अब छत्तीसगढ क़े बाहर से प्रकाशित होने वाले कथित नेशनल अखबारों को व्यवसायिक दर पर विज्ञापन देने के मामले में बुरी तरह फंस गए हैं। इस मामले में अधिकारियों द्वारा कमीशनखोरी की भी चर्चा है और अब आडिट आपत्ति के बाद इस मामले की लीपा-पोती की जा रही है। मुख्यमंत्री के विभाग में चल रहे घपलेबाजी के उजागर होने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर सीधे सचिव बृजेन्द्र कुमार पर उंगली उठने लगी है।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद राय सरकार के विज्ञापन से मिलने वाले कमीशन पर खड़ा संवाद के अधिकारी कमीशनखोरी में मस्त हो गए हैं। वैसे तो संवाद में यह सब नया नहीं है। पहले किराये के भवन में संचालित होने को लेकर विवाद में रहे जनसंपर्क के अधिकारियों पर कमीशनखोरी का आरोप लगते रहा है। इसके बाद संविदा नियुक्ति के मामले में संवाद विवादों में घिरा लेकिन मुख्यमंत्री का विवाद होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई और यहां के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम से धमकी-चमकी देने की वजह से कई पत्रकारों की नौकरी तक खतरे में पड़ चुकी है।
ऐसे में इस विभाग में चल रहे घपलेबाजी की तरफ कोई देखना ही नहीं चाहता और प्रकाशन से लेकर विज्ञापनों के डिजाईन के नाम पर मनमाने रुप से अनियमितता की जा रही है हालत यह है कि करोड़ों की संपत्ति के स्वामी होते यहां के अधिकारियों की शिकायतों की फाईलें दब जाती है और सूचना का अधिकार कानून भी यहां आकर दम तोड़ देता है। ताजा मामले का खुलासा तब हुअआ जब आडिट विभाग ने तथा कथित नेशनल अखबारों को विज्ञापन के नाम पर भुगतान पर आपत्ति की। दरअसल इन अखबारों को डीएवीपी रेट से भुगतान करने की बजाय व्यवसायिक दर पर भुगतान किया गया जो डीएवीपी दर से 10 गुणा अधिक होता है।
बताया जाता है कि डीएवीपी की बजाय व्यवसायिक दर पर भुगतान की कहानी कमीशनखोरी से जुड़ी हुई है और हर भुगतान के एवज में 10 फीसदी राशि अलग से लिए जाने की चर्चा है। बताया जाता है कि आडिट आपत्ति के बाद अफसरों ने इस पर लीपापोती का खेल शुरु कर दिया है और यह सब उच्च स्तर पर किया गया। बताया जाता है कि लीपापोती के तहत उन अखबारों को डीएवीपी की दर पर पुन: विज्ञापन दिए जा रहे हैं ताकि भुगतान को एडजेस्ट किया जा सके। इसी तरह इसकी कहानी भी गढ़ी जा रही है।
इधर यह भी पता चला है कि इस मामले में ऊपर तक पैसा पहुंचाये जाने का हल्ला है। किस स्तर तक पैसा पहुंचाया गया है यह तो जांच का विषय है लेकिन प्रदेश के मुखिया के विभाग में चल रहे 18 करोड़ के इस घपलेबाजी को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री और सरकार की छवि बनने वाले इस विभाग की करतूत से सरकार की छवि पर भी असर पड़ेगा। बहरहाल मुख्यमंत्री के विभाग में ही चल रहे भ्रष्टाचार की आम लोगों में बेहद चर्चा है और कहा जा रहा है कि सालों से जमें अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और भी बदतर होगी।
अपने निर्माण के साथ ही विवादों में घिरे छत्तीसगढ़ संवाद में अनियमितता की कहानी थमने का नाम नहीं ले रही है संविदा नियुक्ति के मामले में लेन-देन में फंसे यहां के अधिकारी अब छत्तीसगढ क़े बाहर से प्रकाशित होने वाले कथित नेशनल अखबारों को व्यवसायिक दर पर विज्ञापन देने के मामले में बुरी तरह फंस गए हैं। इस मामले में अधिकारियों द्वारा कमीशनखोरी की भी चर्चा है और अब आडिट आपत्ति के बाद इस मामले की लीपा-पोती की जा रही है। मुख्यमंत्री के विभाग में चल रहे घपलेबाजी के उजागर होने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने पर सीधे सचिव बृजेन्द्र कुमार पर उंगली उठने लगी है।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद राय सरकार के विज्ञापन से मिलने वाले कमीशन पर खड़ा संवाद के अधिकारी कमीशनखोरी में मस्त हो गए हैं। वैसे तो संवाद में यह सब नया नहीं है। पहले किराये के भवन में संचालित होने को लेकर विवाद में रहे जनसंपर्क के अधिकारियों पर कमीशनखोरी का आरोप लगते रहा है। इसके बाद संविदा नियुक्ति के मामले में संवाद विवादों में घिरा लेकिन मुख्यमंत्री का विवाद होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई और यहां के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के नाम से धमकी-चमकी देने की वजह से कई पत्रकारों की नौकरी तक खतरे में पड़ चुकी है।
ऐसे में इस विभाग में चल रहे घपलेबाजी की तरफ कोई देखना ही नहीं चाहता और प्रकाशन से लेकर विज्ञापनों के डिजाईन के नाम पर मनमाने रुप से अनियमितता की जा रही है हालत यह है कि करोड़ों की संपत्ति के स्वामी होते यहां के अधिकारियों की शिकायतों की फाईलें दब जाती है और सूचना का अधिकार कानून भी यहां आकर दम तोड़ देता है। ताजा मामले का खुलासा तब हुअआ जब आडिट विभाग ने तथा कथित नेशनल अखबारों को विज्ञापन के नाम पर भुगतान पर आपत्ति की। दरअसल इन अखबारों को डीएवीपी रेट से भुगतान करने की बजाय व्यवसायिक दर पर भुगतान किया गया जो डीएवीपी दर से 10 गुणा अधिक होता है।
बताया जाता है कि डीएवीपी की बजाय व्यवसायिक दर पर भुगतान की कहानी कमीशनखोरी से जुड़ी हुई है और हर भुगतान के एवज में 10 फीसदी राशि अलग से लिए जाने की चर्चा है। बताया जाता है कि आडिट आपत्ति के बाद अफसरों ने इस पर लीपापोती का खेल शुरु कर दिया है और यह सब उच्च स्तर पर किया गया। बताया जाता है कि लीपापोती के तहत उन अखबारों को डीएवीपी की दर पर पुन: विज्ञापन दिए जा रहे हैं ताकि भुगतान को एडजेस्ट किया जा सके। इसी तरह इसकी कहानी भी गढ़ी जा रही है।
इधर यह भी पता चला है कि इस मामले में ऊपर तक पैसा पहुंचाये जाने का हल्ला है। किस स्तर तक पैसा पहुंचाया गया है यह तो जांच का विषय है लेकिन प्रदेश के मुखिया के विभाग में चल रहे 18 करोड़ के इस घपलेबाजी को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री और सरकार की छवि बनने वाले इस विभाग की करतूत से सरकार की छवि पर भी असर पड़ेगा। बहरहाल मुख्यमंत्री के विभाग में ही चल रहे भ्रष्टाचार की आम लोगों में बेहद चर्चा है और कहा जा रहा है कि सालों से जमें अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और भी बदतर होगी।
ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने पीडब्ल्यूडी में गड़बड़झाला
लागत मूल्य बढ़ाकर की जाती है करोड़ों की कमाई
छत्तीसगढ़ में पीडब्ल्यूडी विभाग ने भ्रष्टाचार के नए तरीके ईजाद किए है और इसके चलते यहां के अधिकारी हर साल करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। आरोप तो मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर भी लगाए जा रहे हैं कि उनके आने के बाद शुरु हुए इस खेल में ठेकेदारों को तो फायदा पहुंचाया ही जा रहा है बल्कि घटिया निर्माण के एवज में 20 से 25 प्रतिशत कमीशन तक लिए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ में पीडब्ल्यूडी विभाग में जिस तरह से घपलेबाजी की जा रही है वह आश्चर्यजनक है। बताया जाता है कि पैसे कमाने के नए-नए तरीके ईजाद किए जाने की वजह से निर्माण का स्तर न केवल निम्न दर्जे का हो गया है बल्कि सरकार को भी हर साल करोड़ों-अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि पिछले माह पीडब्ल्यूडी ने दर्जनभर ई टेण्डर जारी किया था और इसके लिए ठेकेदारों को पहले से ही तैयार कर लिया गया था जिसके तहत इन कामों को 35 प्रतिशत बिलों पर टेण्डर स्वीकृत कर लिया गया।
एक ठेकेदार ने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब 20 से 25 प्रतिशत राशि विभाग के अधिकारियों व उच्च पदस्थ लोगों को कमीशन के रुप में दिया जाता है तब भला 35 प्रतिशत बिलों पर कोई काम कैसे कर सकता है और इसे मिला दिया जाए तो यह राशि 50 प्रतिशत से अधिक होती है। इस बारे में जब छानबीन की गई तो पता चला कि यह सब मंत्रालय स्तर पर रचा गया खेल है जिसके तहत चहेते ठेकेदारों को 35 प्रतिशत बिलों में टेण्डर भरने कहा गया था।
बताया जाता है कि इस रेट पर क्वालिटी से समझौता तो किया ही जा रहा है निर्माण में भी अत्यंत घटिया दर्जे के करने की छूट दी गई है। इधर यह भी पता चला है कि अपने चेहतों को टेंडर देने यह रणनीति जानबूझकर अपनाई जाती है और बाद में निर्माण लागत में वृध्दि कर दी जाती है ताकि ठेकेदारों को इस दर पर भी कोई घाटा न हो। राजधानी के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल इस विभाग के मंत्री है और कहा जाता है कि इस तरह के खेल की जानकारी उन्हें भी है। दूसरी तरफ हाल में दिए गए दर्जनभर टेण्डर को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि इस मामले में जमकर कमीशनखोरी हुई है।इधर पीडब्ल्यूडी में पदोन्नति को लेकर हुई लेनदेन का मामला कोर्ट में जाने से हड़कम्प मचा हुआ है। बहरहाल पीडब्ल्यूडी में चल रहे व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार की कहानी आम लोगों में चर्चा का विषय है और कहा जा रहा है कि यदि मुख्यमंत्री ने यहां हस्तक्षेप नहीं किया तो डामर कांड से भी बड़ा कांड उजागर हो सकता है। जिसका जवाब देना सरकार को मुश्किल होगा।
छत्तीसगढ़ में पीडब्ल्यूडी विभाग ने भ्रष्टाचार के नए तरीके ईजाद किए है और इसके चलते यहां के अधिकारी हर साल करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। आरोप तो मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर भी लगाए जा रहे हैं कि उनके आने के बाद शुरु हुए इस खेल में ठेकेदारों को तो फायदा पहुंचाया ही जा रहा है बल्कि घटिया निर्माण के एवज में 20 से 25 प्रतिशत कमीशन तक लिए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ में पीडब्ल्यूडी विभाग में जिस तरह से घपलेबाजी की जा रही है वह आश्चर्यजनक है। बताया जाता है कि पैसे कमाने के नए-नए तरीके ईजाद किए जाने की वजह से निर्माण का स्तर न केवल निम्न दर्जे का हो गया है बल्कि सरकार को भी हर साल करोड़ों-अरबों रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि पिछले माह पीडब्ल्यूडी ने दर्जनभर ई टेण्डर जारी किया था और इसके लिए ठेकेदारों को पहले से ही तैयार कर लिया गया था जिसके तहत इन कामों को 35 प्रतिशत बिलों पर टेण्डर स्वीकृत कर लिया गया।
एक ठेकेदार ने आश्चर्य व्यक्त किया कि जब 20 से 25 प्रतिशत राशि विभाग के अधिकारियों व उच्च पदस्थ लोगों को कमीशन के रुप में दिया जाता है तब भला 35 प्रतिशत बिलों पर कोई काम कैसे कर सकता है और इसे मिला दिया जाए तो यह राशि 50 प्रतिशत से अधिक होती है। इस बारे में जब छानबीन की गई तो पता चला कि यह सब मंत्रालय स्तर पर रचा गया खेल है जिसके तहत चहेते ठेकेदारों को 35 प्रतिशत बिलों में टेण्डर भरने कहा गया था।
बताया जाता है कि इस रेट पर क्वालिटी से समझौता तो किया ही जा रहा है निर्माण में भी अत्यंत घटिया दर्जे के करने की छूट दी गई है। इधर यह भी पता चला है कि अपने चेहतों को टेंडर देने यह रणनीति जानबूझकर अपनाई जाती है और बाद में निर्माण लागत में वृध्दि कर दी जाती है ताकि ठेकेदारों को इस दर पर भी कोई घाटा न हो। राजधानी के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल इस विभाग के मंत्री है और कहा जाता है कि इस तरह के खेल की जानकारी उन्हें भी है। दूसरी तरफ हाल में दिए गए दर्जनभर टेण्डर को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि इस मामले में जमकर कमीशनखोरी हुई है।इधर पीडब्ल्यूडी में पदोन्नति को लेकर हुई लेनदेन का मामला कोर्ट में जाने से हड़कम्प मचा हुआ है। बहरहाल पीडब्ल्यूडी में चल रहे व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार की कहानी आम लोगों में चर्चा का विषय है और कहा जा रहा है कि यदि मुख्यमंत्री ने यहां हस्तक्षेप नहीं किया तो डामर कांड से भी बड़ा कांड उजागर हो सकता है। जिसका जवाब देना सरकार को मुश्किल होगा।
सोमवार, 12 अप्रैल 2010
सरपंच की हठधर्मिता से उद्यमी आत्महत्या करने मजबूर
विद्युत मंडल भी कनेक्शन देने असहाय
यह तो जिसकी लाठी उसकी भैस की कहावत को ही चरितार्थ करता है वरना कृषि उपकरण के निर्माण के लिए लघु उद्योग लगाने वाले उद्यमी श्रीमती सोनिया को आत्महत्या के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। कहा जाता है कि भाजपाई सरपंच की दादागिरी की वजह से शासन-प्रशासन भी मूक दर्शक बना है और मामला बिगड़ता जा रहा है।
मामला दुर्ग जिले के पिरदा पंचायत का है। यहां श्रीमती सोनिया ने गांव की बस्ती से 1 किलोमीटर दूर कृष यंत्र के निर्माण के लिए लघु उद्योग स्थापित किया है और सरपंच द्वारा इस पर अड़ंगा लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि मामला लेन-देन का है इसलिए सबसे पहले सरपंच ने भूमि के डायवर्सन नहीं होने व गांव की महिलाओं द्वारा शौच जाने की बात कहकर उद्योग को बंद करने की चेतावनी दी और तहसीलदार ने डायवर्सन नहीं होने के नाम पर उद्योग बंद करने कहा।
इसके बाद श्रीमती सोनिया ने एसडीएम से गुहार लगाई तो उन्हें कहा गया कि ग्राम की जनसंख्या दो हजार से कम हो तो डायवर्सन की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है कृषि औजारों और मवेशियों के लिए मकान का निर्माण डायवर्सन करना नहीं है। इस आदेश के बाद भी सरपंच अपने रुख पर अड़ा रहा इस बीच विद्युत कनेक्शन के लिए राशि जमा की गई और विद्युत विभाग ने जब खंभा गड़ाना शुरु किया तो सरपंच ने इसका भी विरोध किया और विद्युत मंडल असहाय है।
इधर उद्यमी श्रीमती सोनिया के पति जयपाल ने आरोप लगाया है कि सरपंच ने रुपए की मांग की थी और नहीं देने पर दादागिरी कर रहे हैं जबकि लघु उद्योग के कारण गांव के दर्जनभर परिवार को रोजगार मिल रहा है। उन्हाेंने कहा कि वे पुलिस से लेकर सभी लोगों का चक्कर लगा चुके है लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा है और उसके सामने आत्महत्या करने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में जब सरपंच बलदेव परघानिया से बात करने की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं हुए।
यह तो जिसकी लाठी उसकी भैस की कहावत को ही चरितार्थ करता है वरना कृषि उपकरण के निर्माण के लिए लघु उद्योग लगाने वाले उद्यमी श्रीमती सोनिया को आत्महत्या के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। कहा जाता है कि भाजपाई सरपंच की दादागिरी की वजह से शासन-प्रशासन भी मूक दर्शक बना है और मामला बिगड़ता जा रहा है।
मामला दुर्ग जिले के पिरदा पंचायत का है। यहां श्रीमती सोनिया ने गांव की बस्ती से 1 किलोमीटर दूर कृष यंत्र के निर्माण के लिए लघु उद्योग स्थापित किया है और सरपंच द्वारा इस पर अड़ंगा लगाया जा रहा है। बताया जाता है कि मामला लेन-देन का है इसलिए सबसे पहले सरपंच ने भूमि के डायवर्सन नहीं होने व गांव की महिलाओं द्वारा शौच जाने की बात कहकर उद्योग को बंद करने की चेतावनी दी और तहसीलदार ने डायवर्सन नहीं होने के नाम पर उद्योग बंद करने कहा।
इसके बाद श्रीमती सोनिया ने एसडीएम से गुहार लगाई तो उन्हें कहा गया कि ग्राम की जनसंख्या दो हजार से कम हो तो डायवर्सन की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है कृषि औजारों और मवेशियों के लिए मकान का निर्माण डायवर्सन करना नहीं है। इस आदेश के बाद भी सरपंच अपने रुख पर अड़ा रहा इस बीच विद्युत कनेक्शन के लिए राशि जमा की गई और विद्युत विभाग ने जब खंभा गड़ाना शुरु किया तो सरपंच ने इसका भी विरोध किया और विद्युत मंडल असहाय है।
इधर उद्यमी श्रीमती सोनिया के पति जयपाल ने आरोप लगाया है कि सरपंच ने रुपए की मांग की थी और नहीं देने पर दादागिरी कर रहे हैं जबकि लघु उद्योग के कारण गांव के दर्जनभर परिवार को रोजगार मिल रहा है। उन्हाेंने कहा कि वे पुलिस से लेकर सभी लोगों का चक्कर लगा चुके है लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा है और उसके सामने आत्महत्या करने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस संबंध में जब सरपंच बलदेव परघानिया से बात करने की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं हुए।
आरडीए पर कमल भारी
बजट की आधी राशि कमल विहार में खर्च होगी
आम लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करते हुए रायपुर विकास प्राधिकरण ने अपने कुल बजट की आधी राशि कमल विहार योजना में खर्च करने का निर्णय ले लिया है। जबकि इस योजना का सांसद रमेश बैस कई विधायकों सहित हजारों लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है।
यह सरकार की हठधर्मिता है या नौकरशाहों की मर्जी यह तो वहीं जाने लेकिन जिस कमल विहार योजना को बंद करने की मांग उठ रही है इसी योजना को आरडीए न केवल चालू रखने तत्पर है बल्कि अपने कुल बजट की आधी राशि तक इसमें लगा रहा है।
अपनी योजना को पूरा करने आरडीए ने हुडको से 500 करोड़ रुपया ऋण लेने का भी निर्णय ले लिया है और इसकी गारंटी राय सरकार द्वारा लिए जाने की खबर है। यही नहीं इसे हर हाल में पूरा करने तमाम हथकंडे अपनाने की भी खबर है।
उल्लेखनीय है कि कमल विहार योजना का न केवल आमलोग बल्कि भाजपा के सांसद और विधायक तक विरोध कर रहे है। सांसद रमेश बैस के अलावा कई भाजपा नेताओं का मानना है कि नगर निगम चुनाव में हार की वजह कमल विहार योजना ही रही है और इसे जनता की राय समझकर यह योजना बंद की जानी चाहिए। इन तमाम दलीलाें को नजरअंदाज करके भी कमल विहार योजना को लागू की जा रही है। बहरहाल आरडीए के इस बजट को लेकर भाजपा में ही तीखी टिप्पणी की जा रही है।
आम लोगों की शिकायतों को नजरअंदाज करते हुए रायपुर विकास प्राधिकरण ने अपने कुल बजट की आधी राशि कमल विहार योजना में खर्च करने का निर्णय ले लिया है। जबकि इस योजना का सांसद रमेश बैस कई विधायकों सहित हजारों लोगों द्वारा विरोध किया जा रहा है।
यह सरकार की हठधर्मिता है या नौकरशाहों की मर्जी यह तो वहीं जाने लेकिन जिस कमल विहार योजना को बंद करने की मांग उठ रही है इसी योजना को आरडीए न केवल चालू रखने तत्पर है बल्कि अपने कुल बजट की आधी राशि तक इसमें लगा रहा है।
अपनी योजना को पूरा करने आरडीए ने हुडको से 500 करोड़ रुपया ऋण लेने का भी निर्णय ले लिया है और इसकी गारंटी राय सरकार द्वारा लिए जाने की खबर है। यही नहीं इसे हर हाल में पूरा करने तमाम हथकंडे अपनाने की भी खबर है।
उल्लेखनीय है कि कमल विहार योजना का न केवल आमलोग बल्कि भाजपा के सांसद और विधायक तक विरोध कर रहे है। सांसद रमेश बैस के अलावा कई भाजपा नेताओं का मानना है कि नगर निगम चुनाव में हार की वजह कमल विहार योजना ही रही है और इसे जनता की राय समझकर यह योजना बंद की जानी चाहिए। इन तमाम दलीलाें को नजरअंदाज करके भी कमल विहार योजना को लागू की जा रही है। बहरहाल आरडीए के इस बजट को लेकर भाजपा में ही तीखी टिप्पणी की जा रही है।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)