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शुक्रवार, 12 जुलाई 2024

सगाई का खर्चा सरकारी खजाने से...

 सगाई का खर्चा सरकारी खजाने से...

आठ हजार रुपये प्रति प्लेट का खाना खिलाया..


ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब संघ और भाजपा के संस्कारितों ने सरकारी खजाने पर लूट मचाई हो। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद - धर्म - राजनैतिक सुचिता नैतिकता और बेहतर संस्कार । यही तो संघ का ध्येय वाक्य है।

लेकिन यह सब तभी तक है जब तक सत्ता न मिली हो, कुर्सी न मिली हो। और कुर्सी मिलते ही पैसों की भूख किसी आवारा पशु की तरह दिखः जाता है।

इलेक्ट्रान बॉण्ड, पीएम केचर फंड, नोट बंदी और उ‌द्योगपतियों के कर्ज माफ करने या राईट ऑफ़  करने के नाम पर वसूली का खेल किस तरह खेला गया यह किसी से छिपा नहीं है।




तब जम्मू कश्मीर  के उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने यदि बेटे की सगाई का खर्चा जम्मू कश्मीर के खजाने से भर दिया तो फिर उनकी राष्ट्र‌वादिता पर सवाल क्यों ।

दरअसल इसकी शिकायत अब पीएमओ में की गई है कि मनोज सिंहा ने अपने बेटे की सगाई दिल्ली में की है। इस सगाई समारोह में सौ से अधिक वीआईपी मेहमान थे। जिसका केटरिंग का बिल क़रीब ग्यारह  लाख रुपये आया। यानी लगभग आठ हजार रुपये प्लेट। ये बिल जम्मू कश्मीर सरकार से भरवा दिया गया।

 पीएमओ से की गई शिकायत में वैसे तो कई तरह की शिकायत है लेकिन  गाजीपुर से सांसद रहे मनोज सिंहा के बारे में कहा जाता है कि वे छात्र जीवन से ही संघ और भाजपा का संस्कार लेते रहे हैं, और इसके परिणाम स्वरूप वे केद्र मैं मंत्री भी रहे तो उन्हें जम्मू कश्मीर का उपराज्यपाल की बनाया गया ।

सवाल कई है ख़ासकर  धर्म का चश्मा पहनाकर लूट मचाने का लेकिन सवाल पूछने वाले को यदि देश द्रोही का तमगा मिलने लगे तो...।

आप तय कीजिए  कि धर्म का  आड़ में किस तरह का खेल चल रहा है और कैसे संस्कार मिला या सिखाया गया है।




द वायर की रिपोर्ट के अनुसार अब्दुल्ला ने कहा, "चाहे उनके लिए खरीदे गए वाहन हों, किराए पर लिए गए निजी जेट हों या उनके मेहमानों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये हों, एलजी जम्मू-कश्मीर को अपनी निजी जागीर समझते हैं, जो इस बात से स्पष्ट है कि कैसे यातायात को 25-30 मिनट तक रोक दिया जाता है ताकि वह बिना देरी के यात्रा कर सकें।"

एलजी के तत्कालीन प्रधान सचिव नीतीश्वर कुमार को संबोधित और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए 6 अप्रैल, 2021 के एक कथित आधिकारिक संचार के अनुसार, नई दिल्ली में जम्मू और कश्मीर के रेजिडेंट कमिश्नर ने एलजी सिन्हा के कार्यालय के निर्देशों का पालन करते हुए 2 फरवरी, 2021 को 7 अकबर रोड पर दोपहर के भोजन, रात के खाने और सजावट की व्यवस्था की थी।

पत्र में कहा गया है, "इस निजी समारोह के लिए हमारे कार्यालय द्वारा कुल 10,71,605 रुपये का भुगतान किया गया। हम अनुरोध करते हैं कि इस मुद्दे को हल करने के लिए यह राशि राजकोष में जमा कर दी जाए।"

जम्मू-कश्मीर के पूर्व कानून सचिव अशरफ मीर ने इसकी आलोचना करते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश के प्रमुख द्वारा घोर उल्लंघन और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बताया है।

मीर ने द वायर को बताया, "चूंकि जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए भारत की समेकित निधि से धन को संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए और राज्य कल्याण या सार्वजनिक हित के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत कार्य इस श्रेणी में नहीं आते हैं।"

सोमवार, 8 जुलाई 2024

शंकराचार्य की फिर अवहेलना...

शंकराचार्य ने साफ कर दिया तब बीजेजी का शोर क्यों?

राहुल पर हमले की आशंका, सुरक्षा बढ़ाई गई 


राहुल गांधी के संसद में हिन्दुत्व को लेकर दिये बयान के बाद भाजपा सहित कई हिन्दू संगठन देश भर में बवाल काटने लगे हैं लेकिन इस बवाल का तब कोई मतलब नहीं रह जाता, जब हिदू धर्म के सर्वोच्च गुरु शंकराचार्य जी को राहुल गांधी के बयान में कुछ भी गलत नजर नहीं आता, लेकिन धर्म के आसरे राजनैतिक रोटी सेकने में माहिर भाजपा का अब भी राहुल गांधी पर हमला जारी है और इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इंटेलीजेसियों ने राहुल गांधी पर हमले की आशंका जाहिर कर दी है।

ज्ञात हो कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान  देश की वर्तमान स्थिति फोर भाजपा के द्वारा धर्म के नाम पर नफरत फैलाने को लेकर संसद में राहुल गांधी ने साफ कहा था कि न तो नरेंद्र मोदी हिंदू  समाज है और न भाजपा या आरएसएस ही हिंदू समाज है। 

इस वक्तव्य के बाद खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद में यह आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने पूरे हिन्दू समाज को हिंसक बता दिया और इसरे बाद देश भर राहुल गांधी के खिलाए भाजपा और हिन्दू‌वादी संगठनों ने प्रदर्शन किया।

राहुल गांधी के वकतव्य को लेकर जब पत्रकारों ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंदजी से इस संबंध में सवाल पूछा तो स्वामी शंकराचार्य जी ने साफ कर दिया कि उन्होंने राहुल गांधी के पूरे भाषण को सुनने के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि राहुल गांधी के भाषण को तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है और इसके लिए दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कारवाई करनी चाहिए ।

लेकिन जब देश के प्रधानमंत्री ही राहुल गांधी के भाषण को हिंसक बता रहे हैं तो कारवाई कौन करे।

हालांकि मोदी सत्ता के इस दौर में शंकराचार्यो की बातों को कितना सुना जा रहा है, कहना कठिन इसलिए भी है क्योंकि राममंदिर के प्राण प्रतिस्था को लेकर भी शंकराचार्यों ने आपति की थी, तब भी मोदी सत्ता और उनसे जुड़े लोगों ने शंकराचार्यों की बात मानने की बात तो दूर उनके ख़िलाफ़ ही विषवमन शुरु कर दिया था। तब ऐसे में राहुल गांधी को क्लीन चीट देने के बाद भी शंकराचार्यो की बात कितनी मानी जायेगी कहना कठिन है।

लेकिन एक बात तो तय है कि शंकराचार्यो की अहमियत को जिस तरह से मोही सत्ता ने गिरोने का काम किया है ऐसा किसी दूसरे धर्म में कहीं नहीं दिखेगा । 

इस मामले में संघ भी इसलिए ख़ामोश है क्योंकि वे भी अब सत्तालोलुपता में पड़ गये है तब हिन्दुत्व की दु‌हाई देने वाले मोदी सत्ता और संघ को शंकराचार्यो की अनदेखी, उपेक्षा को अपमान के लिए भी इतिहास याद रखेगा।

रविवार, 7 जुलाई 2024

कुपोषण से बच्चों की जा रही किडनी


 यूनीसेक के बाद अब एम्स ने की चेतावनी 

कुपोषण से बच्चों की जा रही किडनी

एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  इस देश को विश्व की बड़ी आर्थिक शक्ति  के रूप में स्थापित करने का सब्जबाग़ दिखा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ देश के बच्चों की हालत दिनों दिन खराब होते जा रही है, हालत यह है कि विश्व रैकिंग मैं खुशहाली गरीबी के बाद अब कुपोषण के मामले में भी भारत अपने पड़ोसी देशों से भी बदतर स्थिति में पहुंच गया है। और अब एम्स के ताजा रिपोर्ट साफ़ कर किया है कि कुपोषण के चलते बच्चों को कई तरफ की गंभीर बीमारियों के अलावा बड़ी संख्या में बच्चों की किडनी पर भी असर पड़‌ने लगा है और देश के पांच फीसदी बच्चों व किशोरों की किडनी खराब हो गई है। 

ज्ञात हो कि अभी हाल ही में यूनीसेफ ने विश्व में कुपोषण के बढ़ते मामले को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में ४१ फिसदी बच्चे कुपोषण का शिकार है और इनमें से कई बच्चों की स्थिति बेहद खराब है। यूनिसेफ़ ने रिपोर्ट में यह भी दावा किया था कि भारत की स्थिति अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बंगला देश और श्रीलंका से भी बदतर है। भारत से बेहतर  स्थिति केवल अफ़गानिस्तान की है।

लेकिन कारपोरेट की आँख के सहारे देश की आर्थिक स्थिति को देखने वाली मोदी लत्ता के लिए इस हक़ीक़त को नजर अंदाज किया जा रहा है।

देश में बढ़‌ती मंहगाई और बेरोजगारी के चलते आम लोगों का जीवन नारकीय होता जा रहा है और सत्ता पाँच किलो अनाज बाँट कर कापरिट के गोद में जा बैठी है। धर्म के आसरे राजनीति को प्राथमिकता देने वाली मोदी सत्ता के लिए यह चिंता का विषय होना चाहिए । लेकिन मित्र-प्रेम के चलते स्थिति भयावह होते जा रही है।

बताया जाता है कि यह रिपोर्ट देश के बठिंडा ओर विजयपुर स्थित एम्स और ग्लोबल हेल्थ इंडिया ने जारी की है।

रिपोर्ट के मुताबिक – 

 देश में लगभग पांच फीसदी बच्चे और किशोर किडनी, गुर्दे के सही से काम न करने या खराब किडनी फंक्शन से पीड़ित हैं। राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में सामने आया है कि किडनी को नुकसान पहुंचने से जैसे-जैसे समय बीतता है यह समस्या और भी जटिल और लाइलाज हो जाती है। बाद में यह धीरे-धीरे क्रोनिक किडनी डिजीज के रूप में तब्दील हो जाती है। यह अध्ययन बठिंडा और विजयपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान और जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ इंडिया के शोधकर्ताओं ने संयुक्त रूप से किया है। इसके नतीजे स्प्रिंगर लिंक नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं। इसका प्रमुख कारण क्या है और इससे कितने बच्चे पीड़ित हैं, इसके सही आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। यह अध्ययन 2016 से 18 के बीच पांच से 19 वर्ष की आयु के 24,690 बच्चों और किशोरों के राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण पर आधारित है। सर्वेक्षण के अनुसार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक मामले सामने आए, जबकि तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, राजस्थान और केरल में यह प्रचलन कम था।

ज्यादातर को बीमारी का पता नहीं

अध्ययनकर्ताओं के मुताबिक, 10 लाख की जनसंख्या पर लगभग 49 हजार बच्चे और किशोर (4.9 फीसदी) किसी न किसी रूप में किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं। आश्चर्यजनक रूप से इन लोगों में से आधे से अधिक लोगों और उनके अभिभावकों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। यह समस्या अधिकतर ऐसे इलाकों में है, जहां स्वास्थ्य संबंधी अच्छी सुविधाओं की पहुंच लगभग नगण्य है। जिन लोगों को इस समस्या की जानकारी है उनका इलाज भी अधिकतर हकीमों के भरोसे है।

मुख्य समस्या ग्रामीण क्षेत्रों में

राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण के अनुसार, यह समस्या मुख्य तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में पाई गई। अभिभावकों खासतौर से माताओं में शिक्षा की कमी, बच्चों और किशोरों का शारीरिक विकास न हो पाना और बौनापन इसके मुख्य कारण हैं।

नियमित जांच जरूरी : शोधकर्ताओं ने बच्चों में क्रोनिक किडनी रोग से बचने के तरीके भी सुझाए हैं। इसमें नियमित जांच और मूत्र परीक्षण कराना जरूरी है। स्वस्थ और संतुलित आहार जिसमें सोडियम, फास्फोरस और पोटेशियम कम हो, किडनी के कार्य को बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके साथ ही बच्चों को फल, सब्जियां, साबुत अनाज और प्रोटीन खाने के लिए प्रोत्साहित करना और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों और स्नैक्स से बच्चों को दूर रखना जरूरी है। ऐसे भोजन जिनमें चीनी और नमक अधिक होता है, से भी परहेज जरूरी है।


शनिवार, 6 जुलाई 2024

अदानी के ख़िलाफ़ बड़ा फ़ैसला-108 हेक्टेयर ज़मीन वापस


ग्रामीणों की बड़ी जीत: अदाणी समूह को दी गई 108 हेक्टेयर जमीन वापस लेंगे; गुजरात हाईकोर्ट में बोली सरकार

 


गुजरात सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि 13 साल पहले अडानी को दी गई 108 हेक्टेयर चरागाह भूमि वापस ली जाएगी। 


अडाणी समूह को दी गई 108 हेक्टेयर गौचर भूमि वापस ले जाएगी। गुजरात सरकार को हाईकोर्ट ने बताया। यह जमीन कच्छ में मुंद्रा बंदरगाह बनाने के लिए अडाणी समूह की दे दी गई थी। इसके खिलाफ ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

लगभग 13 साल बाद गुजरात सरकार निर्णय ले पाई। 2005 में गुजरात के राजस्व विभाग ने अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड को 231 एकड़ गौचर भूमि आवंटित की थी। लेकिन ग्रामीणों को भूमि आवंटित होनी की सूचना 2010 में पता चली। जब एपीएसईजेड ने गौचर भूमि पर बाड़ लगाना शुरू किया। गांव के निवासियों ने अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड को 231 एकड़ गौचर भूमि आवंटित करने के निर्णय के खिलाफ एक जनहित याचिका के माध्यम से हाईकोर्ट का रुख किया था।

ग्रामीणों के अनुसार एपीएसईजेड को 276 एकड़ में से 231 एकड़ भूमि आवंटित किए जाने के बाद गांव में केवल 45 एकड़ चरागाह भूमि बची है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि यह कदम अवैध है क्योंकि गांव में पहले से ही चरागाह भूमि की कमी है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि यह भूमि आम है और सामुदायिक संसाधन है। 2014 में राज्य सरकार ने बताया कि डिप्टी कलेक्टर ने चरागाह के उद्देश्य से अतिरिक्त 387 हेक्टेयर सरकारी भूमि देने का आदेश पारित किया था। इसके बाद उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया था।


बावजूद जब ऐसा नहीं हुआ, तो उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की गई। इसके बाद 2015 में गुजरात सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष एक समीक्षा याचिका दायर की। इस याचिका में कहा गया कि पंचायत को आवंटन के लिए उपलब्ध भूमि केवल 17 हेक्टेयर ही है। इसके बाद गुजरात सरकार ने शेष भूमि को लगभग 7 किलोमीटर दूर आवंटित करने का प्रस्ताव रखा। यह प्रस्ताव ग्रामीणों को स्वीकार्य नहीं था। ग्रामीणों का कहना था कि मवेशियों के लिए इतनी लंबी दूरी तय करना संभव नहीं है।


 अप्रैल 2024 में मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति प्रणव त्रिवेदी की खंडपीठ ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को समाधान निकालने का निर्देश दिया। जिसके बाद शुक्रवार को एसीएस ने हलफनामे के माध्यम से पीठ को सूचित किया कि गुजरात सरकार ने लगभग 108 हेक्टेयर या 266 एकड़ गौचर भूमि वापस लेने का फैसला किया है, जिसे पहले एपीएसईजेड को आवंटित किया गया था। राजस्व विभाग ने अदालत को सूचित किया कि राज्य सरकार 129 हेक्टेयर भूमि को गांव को वापस देगी। इसके लिए वह अपनी कुछ भूमि और अडानी समूह की फर्म से वापस ली जा रही 108 हेक्टेयर भूमि का उपयोग करेगी। हाईकोर्ट की पीठ ने गुजरात सरकार को इस प्रस्ताव को लागू करने का निर्देश दिया। इसके बाद हाईकोर्ट ने कार्यवाही 7 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दी।