छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ननकीराम कंवर पूरे देश में मिसाल कायम कर रहे हैं। ऐसे गृहमंत्री को पाकर छत्तीसगढ़ के लोग खुश हैं। अपनी ईमानदारी का डंका बजा चुके गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने निजी स्क्वाड से अपराधियों में दहशत है। यही वजह है कि उन्हें पूरे देश का सर्वश्रेष्ठ गृहमंत्री माना जा रहा है। सरकार को भी चाहिए कि जिस तरह से गुजरात मॉडल और हैदराबाद को मॉडल बनाकर भ्रमण यात्रा किया जाता है उसी तरह से देश के दूसरे रायों के गृहमंत्रियों को भी बुलाया जाना चाहिए ताकि वे भी देख सकें कि किस तरह से गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने छत्तीसगढ़ में एक नया मिसाल कायम किया है।
गृहमंत्री ननकीराम कंवर के इस कार्यशैली से सबसे यादा दुखी डीजीपी विश्वरंजन जी है क्योंकि गृहमंत्री की ईमानदारी से वे परेशान है। परेशानी की प्रमुख वजह नक्सलियों के खिलाफ केन्द्र से आने वाली बड़ी रकम को माना जा रहा है। अब इसका बंदरबांट ठीक से न हो तो लड़ाई तो छिड़नी है। गृहमंत्री सिर्फ विश्वरंजन के पीछे ही नहीं पड़े हैं उन्होंने एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कहकर अपनी साफ गोई का परिचय दिया है। है किसी गृहमंत्री में दम जो इतनी बड़ी बात कह दे न किसी गृहमंत्री में ये दम है कि वह विधानसभा में सरकार की खिंचाई करते हुए कह दें कि शराब माफिया थाने चला रहे हैं। इतना सब कुछ देखते-सुनते कोई गृहमंत्री कैसे थानों पर भरोसा करे इसलिए तो वे अपना निजी स्क्वाड बना रखे हैं। आम आदमी को न्याय दिलाने के लिए?
अब थानों की कमाई बंद हो गई है। ढाबों में शराबखोरी तो छोड़िए अवैध शराब बेचने वाले भी भाग लिए है और थानों को सट्टा-जुआ या अपराधियों से मोटी रकम नहीं मिल रही है। इसलिए सब साजिश के तहत निजी स्क्वाड के पीछे पड़ गए हैं। आखिर प्रदेश को अपराध मुक्त करना हो तो अवैध रुप से पैसा कमाने वाले पुलिस पर अंकुश जरूरी है इसलिए निजी स्क्वाड खड़ा किया गया है। अपराधियों को पकड़ों तो दो चार दिन में वह छूट जाता है क्योंकि लातों के भूत बातों से नहीं मानते इसलिए पिटाई जरूर है।
निजी स्क्वाड की ईमानदारी से थाने से लेकर अपराधियों के होश उड़े हुए है इसलिए भी साजिश रच कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। चूंकि मुख्यमंत्री डा. साहब भी जानते हैं कि गृहमंत्री ईमानदार है और वे गलत नहीं करेंगे। इसलिए वे भी निजी स्क्वाड की शिकायतों को तवाों नहीं दे रहे हैं। गृहमंत्री की एक और आदत है वे जिस काम का बीड़ा उठाते हैं उसे पूरा करके ही दम लेते हैं अब देखिए डेढ़ साल हो गया दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई कैलाश अग्रवाल का कबाड़ खरीदने का धंधा बंद हुए। है किसी में हिम्मत जो चालू करवा दे। अब दूसरे नए लोग धंधा कर रहे है। गृहमंत्री को पता नहीं है। पता चलेगा तो उनकी भी शामत आएगी। आखिर बकरे की अम्मा कब तक खैर मनाएगी।
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मंगलवार, 9 नवंबर 2010
शनिवार, 16 अक्टूबर 2010
विवादास्पद आई पी एस विश्वरंजन
0 गृहमंत्री फूटी आंख नहीं भाते?
0 जातिवाद व क्षेत्रियता का आरोप?
0 नक्सली मामले में संदेहास्पद भूमिका?
0 साहित्यिक गतिविधियों पर अवैध वसूली?
छत्तीसगढ़ के डीजीपी यानी विश्वरंजन की विवादास्पद छवि के चलते न केवल सरकार की छवि खराब होने लगी है बल्कि पुलिस में गुटबाजी उभर कर सामने आई है। लगातार विवादों में रहना विश्वरंजन का शगल बन चुका है और अब तो उन्हें कारण बताओं नोटिस पर नोटिस जारी होने लगे हैं।
छत्तीसगढ क़े डीजीपी विश्वरंजन को गृहमंत्री ननकीराम कंवर फूटी आंख नहीं सुहाते खबर सिर्फ इतनी नहीं है। खबर इसके आगे की यह है कि डीजीपी विश्वरंजन पर अब गंभीर आरोप लगने लगे हैं और प्रदेश सरकार ने उन्हें दो मामलों में कारण बताओं नोटिस भी थमा दिया है। दरअसल डीजीपी विश्वरंजन की नियुक्ति के तरीके को लेकर शुरु हुआ विवाद ही प्रदेश सरकार खासकर मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए गले की हड्डी बन चुका है। कभी बस्तर और रायगढ़ में पदस्थ रहे डीजीपी विश्वरंजन को केन्द्र सरकार से विशेष अनुरोध कर यहां लाया गया। यदि विश्वरंजन के आने के बाद अपराध के आंकड़े पर नजर डाले तो हर क्षेत्र में अपराधों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी नजर आएगी। खासकर नक्सली और शहरी क्षेत्रों में लूट की वारदातों ने तो सरकार की नींद उठा दी है।
सर्वाधिक विवाद तो उनके प्रमोद वर्मा स्मृति साहित्यिक गतिविधियों की रही है। कार्यक्रम के लिए दबावपूर्वक वसूली की शिकायतों से तो थानेदार तक परेशान है और राजनांदगांव जिले में विनोद शंकर चौबे की शहादत के दौरान उनकी भूमिका और गतिविधियों को लेकर जबरदस्त विवाद रहा है। प्रदेश सरकार ने इस मामले में बढ़ती शिकायतों पर कितनी गंभीरता दिखाई है यह तो बाद में ही पता चलेगा लेकिन इस मामले में नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया गया है।
सिर्फ यही एक मामला नहीं है इसके अलावा गृहमंत्री ननकीराम कंवर से उनका विवाद भी सुर्खियों में रहा है। गृहमंत्री ने डीजीपी को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी भी कर चुके हैं। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र कवर्धा में एसपी को निकम्मा व कलेक्टर को दलाल कहने वाले गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने विधानसभा तक में पुलिस की गतिविधियों का भर्त्सना कर चुके हैं। इतना ही नहीं डीजीपी विश्वरंजन पर नक्सली मामले में भूमिका पर भी आरोप लगते रहे हैं। कहा जाता है कि बस्तर पदस्थापना के दौरान उनके कार्य को लेकर आलोचना भी हुई थी जबकि मुखबिरी व गोपनीय सैनिकों को दी जाने वाली रकमों को लेकर डीजीपी पर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
इधर पीएचक्यू में चल रहे गुटबाजी का असर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर हुआ है। कहा जाता है बिहारी-यूपी की क्षेत्रियता वाली गुटबाजी के चलते पुलिस मुख्यालय में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस मामले में गृहमंत्री ननकीराम कंवर से शिकायत के बाद गृहमंत्री द्वारा जांच करवाने का फरमान जारी कर दिया गया है और श्री नवानी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि डीजीपी विश्वरंजन की गतिविधियों को सरकार को मुंह चिढ़ाने वाला बताया जा रहा है लेकिन कार्रवाई सिर्फ नोटिस व जांच तक ही सिमट गया है। इस संबंध में डीजीपी से जब संपर्क की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं हुए। बहरहाल डीजीपी को नोटिस व उनके खिलाफ जांच के फरमान को लेकर सरकार की चौतरफा किरकिरी हो रही है। जो आने वाले दिनों में विवाद और भी बढ़ने की संभावना है।
0 जातिवाद व क्षेत्रियता का आरोप?
0 नक्सली मामले में संदेहास्पद भूमिका?
0 साहित्यिक गतिविधियों पर अवैध वसूली?
छत्तीसगढ़ के डीजीपी यानी विश्वरंजन की विवादास्पद छवि के चलते न केवल सरकार की छवि खराब होने लगी है बल्कि पुलिस में गुटबाजी उभर कर सामने आई है। लगातार विवादों में रहना विश्वरंजन का शगल बन चुका है और अब तो उन्हें कारण बताओं नोटिस पर नोटिस जारी होने लगे हैं।
छत्तीसगढ क़े डीजीपी विश्वरंजन को गृहमंत्री ननकीराम कंवर फूटी आंख नहीं सुहाते खबर सिर्फ इतनी नहीं है। खबर इसके आगे की यह है कि डीजीपी विश्वरंजन पर अब गंभीर आरोप लगने लगे हैं और प्रदेश सरकार ने उन्हें दो मामलों में कारण बताओं नोटिस भी थमा दिया है। दरअसल डीजीपी विश्वरंजन की नियुक्ति के तरीके को लेकर शुरु हुआ विवाद ही प्रदेश सरकार खासकर मुख्यमंत्री रमन सिंह के लिए गले की हड्डी बन चुका है। कभी बस्तर और रायगढ़ में पदस्थ रहे डीजीपी विश्वरंजन को केन्द्र सरकार से विशेष अनुरोध कर यहां लाया गया। यदि विश्वरंजन के आने के बाद अपराध के आंकड़े पर नजर डाले तो हर क्षेत्र में अपराधों में जबरदस्त बढ़ोत्तरी नजर आएगी। खासकर नक्सली और शहरी क्षेत्रों में लूट की वारदातों ने तो सरकार की नींद उठा दी है।
सर्वाधिक विवाद तो उनके प्रमोद वर्मा स्मृति साहित्यिक गतिविधियों की रही है। कार्यक्रम के लिए दबावपूर्वक वसूली की शिकायतों से तो थानेदार तक परेशान है और राजनांदगांव जिले में विनोद शंकर चौबे की शहादत के दौरान उनकी भूमिका और गतिविधियों को लेकर जबरदस्त विवाद रहा है। प्रदेश सरकार ने इस मामले में बढ़ती शिकायतों पर कितनी गंभीरता दिखाई है यह तो बाद में ही पता चलेगा लेकिन इस मामले में नोटिस जारी कर उनसे जवाब तलब किया गया है।
सिर्फ यही एक मामला नहीं है इसके अलावा गृहमंत्री ननकीराम कंवर से उनका विवाद भी सुर्खियों में रहा है। गृहमंत्री ने डीजीपी को लेकर सार्वजनिक टिप्पणी भी कर चुके हैं। मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र कवर्धा में एसपी को निकम्मा व कलेक्टर को दलाल कहने वाले गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने विधानसभा तक में पुलिस की गतिविधियों का भर्त्सना कर चुके हैं। इतना ही नहीं डीजीपी विश्वरंजन पर नक्सली मामले में भूमिका पर भी आरोप लगते रहे हैं। कहा जाता है कि बस्तर पदस्थापना के दौरान उनके कार्य को लेकर आलोचना भी हुई थी जबकि मुखबिरी व गोपनीय सैनिकों को दी जाने वाली रकमों को लेकर डीजीपी पर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए हैं।
इधर पीएचक्यू में चल रहे गुटबाजी का असर भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर हुआ है। कहा जाता है बिहारी-यूपी की क्षेत्रियता वाली गुटबाजी के चलते पुलिस मुख्यालय में कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस मामले में गृहमंत्री ननकीराम कंवर से शिकायत के बाद गृहमंत्री द्वारा जांच करवाने का फरमान जारी कर दिया गया है और श्री नवानी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि डीजीपी विश्वरंजन की गतिविधियों को सरकार को मुंह चिढ़ाने वाला बताया जा रहा है लेकिन कार्रवाई सिर्फ नोटिस व जांच तक ही सिमट गया है। इस संबंध में डीजीपी से जब संपर्क की कोशिश की गई तो वे उपलब्ध नहीं हुए। बहरहाल डीजीपी को नोटिस व उनके खिलाफ जांच के फरमान को लेकर सरकार की चौतरफा किरकिरी हो रही है। जो आने वाले दिनों में विवाद और भी बढ़ने की संभावना है।
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