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शनिवार, 26 अक्टूबर 2013

लालच बुरी बला है...


हर व्यक्ति बचपन से सुन रहा है कि लालच बुरी बला है! सत्य पर आधारित कितनी ही कहानियां सुनी-सुनाई जाती है, पर आम लोगों में न तो लालच कम हो रहा है और न ही वे लालच के फेर में अपराध करने से ही हिचक रहे हैं।
खासकर इन दिनों राजनेताओं में बढ़ते लालच से आम आदमी क्षुब्द है। उनका गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। अरबो-खरबों के घोआले के बाद भी उनका लोकतंत्र पर भरोसा है तो इसके पीछे यह उम्मीद है कि देर सबेर ऐसे लोगों को उनके कर्मों की सजा जरुर मिलेगी...
देश भर में नेताओं के बढ़ते लालच ने नेताओं का जो विभत्स रूप जनता के जजेहन में स्थापित किया है हम यहां उसकी चर्चा फिर कभी करेंगे, लेकिन छत्तीसगढ़ निमा्रण के बाद यहां के नेताओं ने जो अकृत संपत्ति अर्जित की है वह शर्मसार कर देने वाला जरुर है।
हम यहां किसी लालची नेता की कथा सुनाने इच्छुक है और न ही सत्ता मद में डुबे नेताओं की करतुतों पर ही अभी कुछ कहने वाले हैं। क्योंकि हर कोई जानता है कि विधायक या मंत्री बनने के पहले इनकी हैसियत क्या थी और आज क्या हो गई है।
हम यहां कोयले की कमाई में मुख्यमंत्री के शामिल होने या भाई भतीजावाद पर ही कुछ लिखना चाहते हैं और न ही गर्भाशय कांड या आँख फोडऩे वाले डॉक्टरों की घटना को ही याद दिलाना चाहते हैं क्योंकि इइन सब घोटालों पर काफी कुछ लिखा जा युका है और शायद जनता ने भी तय कर लिया होगा कि वे इस बार किसे जिताना चाहते हैं।
पिछले चुनाव में भी जनता ने जिन्हें वह पसंद नहीं करती है लेकिन संविधानिक व्यवस्था के चलते वे लोग भी विधायक बन गए या उन लोगों की सरकार बन गई जो आधे से कम वोट पाये।
यह स्थिति पूरे देश भर के राज्यों की है। 50 फीसदी जनता के विरोध में मत डालने के बाद भी वे इसलिए विधायक बन जाते हैं क्योंकि वोटों के बंटवारे की वजह से उनका वोट सबसे अधिक होता है।
छत्तीसगढ़ में गिनती के विधायक हैं जिन्हें पचास फीसदी से अधिक लोग पसंद करते हैं और डॉ. रमन सिंह की दूसरी पारी तो सिर्फ 42 फीसदी वोटों के भरोसे बनी यानी 58 फीसदी लागों ने नकार दिया था।
हम तो यहां सिर्फ उन नेताओं को याद दिलाना चाहते हैं जो लालच में अंधे होकर सिर्फ पैसा कमाने में लगे हैं और जनता के हितों की ही अनदेखी कर रहे हैं बल्कि सरकारी धनों में सेंध लगाकर अपनी तिजौरी भर रहे हैं। हम ऐसे कृत्यों को देशद्रोह मानते हैं और हमें विश्वास है कि भले ही आज के कानून के दायरे से बाहर है लेकिन देर सबेर न केवल उनको इसकी सजा मिलेगी बल्कि उन पर आंसू बहाने वाला भी नहीं होगा।
हम यह बात उन नेताओं से फिर से कहना चाहेंगे उनकी लालच की वजह से ही छत्तीसगढ़ में विकास अभी  भी कोसो दूर हो गया है। उनकी लालच की वजह से ही महंगाई बढ़ रही है, आम आदमी को सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा जैसी बुनियादी जरुरतों से मरहूम होना पड़ रहा है।
नेताओं को लोकतंत्र में नौकरशाह को सही रास्ते पर काम कराने के लिए चुना जाता है लेकिन नेताओं और नौकरशाह ने अपराधियों से गठजोड़ बनाकर आम लोगों के हितों पर डाका डालने का काम शुरु कर दिया है। नेताओं ने अकूृत संपत्ति अर्जित कर ली है लेकिन वे भूल जाते हैं कि देर सबेर जनता उन्हें उनके इस बढ़ते वैभव की सजा जरुर देगी और उन्हें जेल तक जाना पड़ेगा।  क्योंकि लालच बुरी बला है और जनता यह बात अच्छी तरह जानती है, और वह भूलती भी नहीं है...
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सोमवार, 10 मई 2010

अधिकारियों की दादागिरी, सरपंचों की लाचारी

वर्मा, बघेल को हटाने सरपंचों ने मोर्चा खोला
रमन सरकार में बेलगाम होते अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के सरपंच बेहद नाराज है। बिलाईगढ़ क्षेत्र के सरपंचों ने तो बकायदा सीओ आर.के. वर्मा और ब्लाक अधिकारी बघेल के खिलाफ तो मोर्चा ही खोल दिया है। सरपंचों का कहना है कि ये दोनों अधिकारी अपने को मंत्रियों व सांसद का रिश्तेदार बताकर आए दिन सरपंचों से गाली गलौज व बदतमीजी करता है। यही नहीं इन दोनों अधिकारियों पर कार्यों के सत्यापन के लिए रुपए मांगे जाने का भी आरोप लगाया गया है।
छत्तीसगढ़ में बेलगाम होते अधिकारियों पर नकेल कसने में पूरी तरह विफल रही रमन सरकार से बिलाईगढ़ ही नहीं कई क्षेत्रों के सरपंचों ने अधिकारियों की शिकायत की है। बताया जाता है कि सरपंचों को भ्रष्ट आचरण की सीख ऐसे ही अधिकारी देते हैं और कार्यों के सत्यापन के नाम पर सरपंचों से न केवल अनाप-शनाप रुपए मांगे जाते हैं बल्कि गाली गलौज तक करते हैं। ऐसा ही एक मामला बिलाईगढ़ क्षेत्र का है जहां के सरपंच सीओ आर.के वर्मा से त्रस्त हैं सरपंचों का कहना है कि अपनी उच्च पहुंच और नेताओं से रिश्तेदारी का धौंस देकर श्री वर्मा आए दिन सरपंचों से गाली गलौच करते हैं। श्री वर्मा को हटाने की मांग बिलाईगढ़ क्षेत्र के लगभग 65 से 70 सरपंचों ने करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा है।
इसी तरह अनुविभागीय अधिकारी बघेल पर पण्ड्रीपानी के सरपंच मजीद खान ने पैसे मांगने का आरोप लगाया है। सरपंचों का कहना है कि मास्टर रोल सचिव के द्वारा भरा जाता है और उस पर गलतियां निकालकर सरपंचों के साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। ऐसा नहीं है कि सरपंचों के साथ इस तरह का व्यवहार केवल बिलाईगढ़ क्षेत्र में ही किया जा रहा है। बल्कि कवर्धा जिले के सरपंच भी परेशान है। अधिकारियों द्वारा जेल भेजे जाने की धमकी तो आम बात है।
सरपंच संघ के एक नेता ने कहा कि सरपंचों को भ्रष्टाचार के दलदल में यही अधिकारी ही ले जाते हैं। पहली बार सरपंच चुने जाने वाले सीधे साधे ग्रामीणों को पहले पैसा कमाने के तरीके बताये जाते हैं फिर उन्हें जेल भेजने की धमकी देकर उनसे रुपए हड़पे जाते हैं। सरपंचों का कहना है कि अधिकारियों की शिकायतें पर सरकार ध्यान नहीं देती असली चोर तो ये अधिकारी ही हैं और उन्हें बदनाम किया जाता हैं। बिलाईगढ़ सरपंच संघ के अध्यक्ष बैनू सोनवानी ने कहा कि यदि अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। बहरहाल अधिकारियों और सरपंचों में आए दिन हो रहे टकराव को नजरअंदाज किया गया तो इसके घातक परिणाम आएंगे।