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बुधवार, 6 नवंबर 2024

टिकिट मांगने वाले भाजपा के ब्राम्हण नेताओं की मुश्किलें बढ़ी



टिकिट मांगने वाले भाजपा के ब्राम्हण नेताओं की मुश्किलें बढ़ी 


दक्षिण विधानसभा चुनाव में ब्राम्हण प्रत्याशी की मांग करने वाले भारतीय जनता पार्टी के ब्राम्हण नेताओं के सामने अब नई तरह की दिक्कत आ गई है। कहा जा रहा है कि कई नेता तो मुंह छिपाते घुम रहे है तो कई नेताओं ने चुप्पी ओढ़ ली है। 

दरअसल दक्षिण विधानसभा उपचुनाव में ब्राम्हण समाज ने ब्राम्हण प्रत्याशी उतारने दोनों ही प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा पर दबाव बनाया था। समाज के इन नेताकों के साथ भाजपा और कांग्रेस से जुड़े नेताओं ने भी न केवल शिरकत की थी, बल्कि मीडिया के ज़रिये भी अपनी मांगों को जोर-शोर से हवा दी थी।

भाजपा ने ब्राम्हण समाज की मांग की परवाह नहीं करते हुए सुनील सोनी को प्रत्याशी घोषित कर दिया, तब समाज ने कांग्रेस पर दबाव बनाया तो कांग्रेस ने ब्राम्हण समाज की मांग के अनुरूप आकाश शर्मा को टिकिट दे दिया।

ऐसे में भाजपा से जुड़े ब्राह्मण  नेता के सामने मुश्किल यह है कि वे सेठ की तिजोरी के आगे न तो कुछ बोल पा रहे है और न ही समाज में जाकर सुनील सोनी का प्रचार ही कर पा रहे हैं।

इसकी बड़ी वजह आने  वाले दिनों में निगम चुनाव है। यदि वे अभी ब्राह्मण प्रत्याशी के खिलाफ वोट माँगेंगे तो फिर निगम चुनाव में वे किस मुंह से ब्राह्मण वोट हासिल कर पायेंगे। 

कहा तो यहां तक जा रहा है कि समाज के कई पदाधिकारियों ने भाजपा के ब्राम्हण नेताओं को दो टूक कह दिया है कि वे ब्राम्हण प्रत्याशी की खिलाफत न करे।

ऐसे में ब्राम्हण वोटरों को साधने गृह मंत्री विजय शर्मा को पार्टी ने लगा दिया। लेकिन कहा जाता है कि ब्राम्हण समाज के कुछ पदाधिकारियों ने उन्हें भी दो टूक कह दिया कि वे दक्षिण में प्रचार करने की बजाय प्रदेश की कानून व्यवस्थ पर ध्यान दें तो उनके लिए बेहतर होगा।

सोमवार, 23 सितंबर 2024

कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 कौन बचा रहा है अभिषेक पल्लव को...

 


सारे गवाह, सारे सबूत चीख-चीख कर कह रहे हैं कि गृहमंत्री विजय शर्मा के विधानसभा क्षेत्र के लोहाराडीह में पुलिसिया बर्बरता उस रात चरम पर थी। घरों के दरवाजे तोड़‌कर आधी रात को पुलिस ने सोते से जगाकर या सोते हुए महिलाओं और बच्चों पर कहर बरसाया है। साहू समाज आन्दोलित है।  पूरे देश में इस घटना को लेकर साय सरकार के कथित सुशासन की थू-थू हो रही है लेकिन तत्कालीन एस पी अभिषेक पल्लव को न तो निलंबित किया गया और न ही पुलिसिया बर्बरता को लेकर ही कोई एफ आई आर हो दर्ज हुई।

क्यो ?

यह सवाल अब न केवल बहा होने लगा है बल्कि अब इस सवाल का जवाब भी तलाशा जा रहा है कि अभिषेक पल्लव को कौन बचा रहा है। यह सवाल इसलिए भी उठाये जा रहे हैं क्योंकि छत्तीसगढ़ में साहू समाज को भाजपा का वोट बबैंक माना जाता है और  इस वोट बैंक के खिसकने या नाराजगी को लेकर किस किमत पर अभिषेक पल्लव को बचाया जा रहा है यह सवाल चर्चा में है।

हालांकि कभी रमन सिंह पर साहू समाज की उपेक्षा का आरोप लगाकर भरे मंच से गरियाने वाले मोतीलाल साहू न केवल भाजपा में चले गये बल्कि राजधानी के ग्रामीण का विधायक भी है। ऐसे में साहू समाज में क्या आन्दोलन को लेकर दो फाड् या दो मत है?

कवर्धा यदि गृहमंत्री विजय शर्मा का  विधानसभा है तो रमन सिंह का भी गृह  है ऐसे में  दोनों नेतार्थों पर अभिषेक पल्लव को बचाने का आरोप खुलकर लगाया जा रहा है लेकिन दूसरी तरफ सुपर सीएम के रूप में चर्चित ओपी चौधरी का नाम भी कम सुर्खियों में नहीं है। और मुख्यमंत्री साय को लेकर जो चर्चा है वह रिमोट पर आकर समाप्त हो जाता है।

अब समझने नहीं बल्कि जानने बाली बात है कि साहू समाज कब तक अपने समाज को न्याय दिलाने अड़े रहेंगे १

शनिवार, 31 अगस्त 2024

लौट के बुद्धू घर को आये...

 लौट के बुद्धू घर को आये...


एक सामान्य आदमी के लिए विदेश जाने का मोह क्या होता है इसका तो पता नहीं, लेकिन सरकारी खर्चे में विदेश यात्रा के मोह से बच पाना हर किसी के बस में नहीं है। कई नेता तो सरकारी खर्च में विदेश जाने का फर्जी उपाय भी कर लेते हैं, कुछ सफल हो जाते हैं तो कुछ….!

ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार के उपमुख्यमंत्री अरुण साव का विदेश जाने के सपने का टूटना कितना गजब है यह बताने की इसलिए जरूरत नहीं है कि रिमोट पर चलने वाली सरकार के काम काज सुपर सीएम देख रहे हैं और अपने से कम होशियार या अनुभवहीन लोगों की फौज, कब किसकी बेइज्जती करवा दे, कहा नहीं जा सकता ।

लेकिन अमेरिका जाने के लिए मरे जा रहे की तर्ज पर दिल्ली में लगभग सप्ताह भर से डेरा डालने के बावजूद यदि ख़ाली हाथ लौट के आना बड़े तो इससे दुर्भाग्यजनक बात शायद दूसरी नहीं हो सकती। कहते हैं कि संघियों का अमेरिका के प्रति मोह नया नहीं है, संघ के प्रचारक से प्रधानमंत्री बने नरेद्र मोदी ने तो प्रधानमंत्री बनने के बाद अमेरिका जाने के लिए किसी ने सरकारी बुलावे का इंतजार तक नहीं कर सके थे।

ऐसे में यदि अरुण साव अपने अधिकारी कमलप्रीत के साथ वीजा लेने यदि दिल्ली में डेरा डाले थे तो क्या हुआ। 

वैसे भी भारी माकम बजट वाले जल जीवन मिशन में उनके रहते कौन सा भ्रष्टाचार रूक गया है, लेकिन वीजा नहीं मिलने को लेकर मंत्रालय से लेकर पार्टी नेताओ में चल रहे क़िस्से भी कम खतरनाक नहीं है, नवा बईला के चिक्कन सिंग से लेकर अनाड़ी का… सत्यानाश तक की कहावत। 

अब देखना है कि अनुभवहीनता के चलते इस घोर बेईज्जती का हिसाब किस-किस अधिकारियों से लिया जाना है। 

सोमवार, 26 अगस्त 2024

गये थे हरिभजन को वोटन लगे कपास…

 गये थे हरिभजन को

वोटन लगे कपास…


यह तो गये थे हरिभजन को वोटन लगे कपास की कहावत को ही चरितार्थ करता है वरना मुख्यमंत्री बनकर छत्तीसगढ़ को भ्रष्टाचार मुक्त करने का दावा करने वाले उपमुख्यमंत्री अरुण साव के विभाग में भ्रष्टाचार की नदियां नहीं बहती। और न ही बटोर लेने का खेल इस पैमाने पर होता। 

हालत यह है कि अब प्रभार वाद का नया खेल भी शुरू हो गया है सीनियर अफसरों को किनारे करके  जूनियरों को प्रभार देने के इस खेल में  लेन-देन की जो खबरें आ रही है वह हैरान कर देने वाला है तो जूनियर - सीनियर की लड़ाई ने कामकाज को भी बुरी तरह प्रभावित किया है।

कहा जाता है कि उपमुख्यमंत्री साव ने मुख्यमंत्री नहीं बन पाने की कमी को अपने विभाग में धौंस जमाकर पूरी कर ली है। नगरीय निकायों में मनमाने ढंग से संविदा नियुक्ति के बाद जल संसाधन और पीएचई में प्रभारवाद का खेल कम चर्चा में नहीं है।

वैसे भी जल जीवन मिशन को कबाड़ा करने का आरोप तो विधानसभा तक में सुर्ख़ियाँ बिखेर चुका है और कहा जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी की हस महत्वाकांक्षी योजना का सबसे ज्यादा कबाड़ा तो धमतरी, बिलासपुर और महासमुंद जिले में निकल रहा है, जहाँ इंजिनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से निकल रहा मलाई सीधे बंगले तक पहुंच रहा है।

सत्ता मिलते ही संघ का संस्कार किस तरह सिर चढ़ कर बोलता है यह किसी से छिपा नहीं है लेकिन जो लोग अरुण साव के क्रियाकलापों को देख समझ रहे हैं वे भी हैरान है।

इधर जल जीवन मिशन के बजट के बंदर बाँट को लेकर खेल नया नहीं है। इस लंबे चौड़े बजट के चक्कर में भूपेश बघेल और रुद्र गुरु   की लड़ाई अभी लोग भूले नहीं है लेकिन साव के साथ अभी यह स्थति पैदा नहीं हुई है लेकिन यह स्थिति नहीं पैदा होगी कहना मुश्किल है।

कहा जाता है कि धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार में चल रहे गोलमाल और  छोटे ठेकेदारों की करतूत को लेकर चर्चा अब मुख्यमंत्री तक जा पहुंचा है।