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शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

रमन का अगला शिकार बैस


मुख्यमंत्री के दावेदार निपट रहे हैं पर एक-एक करके

विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा में जो कुछ हो रहा है वैसा पहले कभी राजनीति में नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह पर मुख्यमंत्री के दावेदारों क एक एक कर निपटाने का जो खेल चल रहा है वह हैरान कर देने वाला है। जिसने भी मुख्यमंत्री की दावेदारी की उसे हाशिये में डालने की कोशिश आश्चर्यजनक है। ताराचंद, करूणा शुक्ला के बाद अब अगला शिकार रमेश बैस हो तो अचरज नहीं होगा।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बारे में राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे जीतने सरल सौम्य व सीधे दिखते है वैसा वे है ही नहीं। राजनीति में माहिर रमन सिंह ने जब से मुख्यमंत्री पर संभाला है उनकी अपने प्रतिनिधियों पर नजर रहती है।
पहले कार्यकाल में डॉ. रमन सि ंह के कारनामों का विरोध करने वाले आदिवासी एक्सप्रेस की उन्होंने जिस बखुबी से हवा निकाली वह भले ही राजनैतिक सुझ बुझ कहा जाए लेकिन इसके बाद उन्होंने अपने विरोधियों के पर कतरने शिवराज सिंह, नंदकुमार साय और ताराचंद साहू को हाशिये पर लाने की कोशिश की शिवराज और नंदकुमार साय को इस कदर हाशिये पर डाला गया कि वे इससे उबर ही नहीं पा रहे है। जबकि स्व. दिलीप सिंह जुदेव ने सार्वजनिक रूप से रमन राज को प्रशासनिक आतंक की संज्ञा दी। स्व. ताराचंद साहू को तो पार्टी छोडऩे पर मजबूर कर दिया और  इसके बाद महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष करूणा शुक्ला इसलिए निशाने पर आये क्योंकि वे भी मुख्यमंत्री की प्रबल दावेदार होने लगी थी।
सूत्रों की माने तो करूणा शुक्ला को एक खेमे ने सांसद बनने से रोकते हुए जमकर भीतर घात किया और नितिन गडकरी के करीबी संचेती बंधुओं के कोल ब्लाक घोटाले में जब वे मुखर हुई उसी दिन से उन्हें हाशिये में डालने की जो कोशिश हुई उससे त्रस्त करूणा शुक्ला को मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा।
बताया जाता है कि कुर्र्सी के लिए जो जो नेता खतरा बनकर उभरे उन्हें बाटने की झाजिश को लेकर भाजपा में कई तरह के सवाल उठने लगे है और लोग भाजपा में चल रहे इस खेल को जोगी राज से भी खतरनाक मानने लगे हैं। भाजपा में अब इस बात की चर्चा है कि डॉ. रमन सिंह का अगला शिकार रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमेश बैस होंगे? कहा जाता है कि रमन सिंह के खिलाफ जरा भी माहौल बिगड़ा तो रमेश बैस ही मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार है और वे दिल्ली में भी अच्छी पकड़ रखते हैं।
हालांकि कुछ लोग अगला शिकार के रूप में तेजी से उभर रही दुर्ग की सांसद सरोज पाण्डेय को भी बता रहे है और इन दिनों सरोज पाण्डेय को भी हाशिये में डालने की जबदस्त कोशिश हो रही है।
भाजपा में बड़े नेताओं को जिस तरह से हाशिये में डालने की कोशिश हो रही है वह आश्यर्च जनक है और यह खेल नहीं रूका तो आने वाले दिनों में भाजपा को मुसिबत बढ़ सकती है।
बहरहाल डॉ. रमन सिंह के सरल चेहरे के पीछे के सच को लेकर चल रही चर्चा थमने का नाम नहीं ले रहा है।
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बुधवार, 6 नवंबर 2013

गडकरी की सभा को लेकर कई भाजपाई नाराज


कोल ब्लाक का मामला गरमाने का खतरा....
विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। प्रदेश भाजपा में अपने पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी की सभा को लेकर विवाद होने की खबर है। इस चुनावी समय में गडकरी जैसे विवादास्पद नेता की सभा को लेकर न केवल भाजपाईयों में नाराजगी है बल्कि इसे विनाश काले विपरीत बुद्धि की संज्ञा भी देने लगे हैं।
छत्तीसगढ़ भाजपा ने विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार-प्रसार के लिए जिन राष्ट्रीय नेताओं को छत्तीसगढ़ बुलाया है उनमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी भी शामिल है और इस नाम को लेकर कई नेताओं ने न केवल आश्चर्य जताया है बल्कि नाराजगी भी व्यक्त किये जाने की चर्चा है।
ज्ञात हो कि नितिन गडकरी को संघ का पसंदीदा नेता माना जाता है और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये रखने संघ के दबाव के चलते भाजपा के संविधान तक में संशोधन किये जाने की चर्चा रही है।
सूत्रों की माने तो नितिन गडकरी को लेकर  डॉ. रमन सिंह की नजदीकियों को लेकर भी कई तरह की चचा्र है। कैग ने भटगांव कोल ब्लॉक आबंटन को लेकर रमन सरकार पर उंगली उठाई हे। इस कोल ब्लॉक का ठेका लेने वाले संचेती ब्रदर्स का नितिन गडकरी से संबंध रहा है। कांग्रेस ने तो इस मामले में डॉ. रमन सिंह पर गंभीर आरोप लगाये हैं और कहा जाता है कि डॉ. रमन सिंह ने अपने तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष को खुश करने संचेती ब्रदर्स को भटगांव कोल ब्लॉक उपहार में दिया था। इतना ही नहीं इस आबंटन से छत्तीसगढ़ को एक हजार 52 करोड़ का घाटा कैग ने बताया है। जबकि 49 प्रतिशत शेयर होने के बाद भी कंपनी को एमडी का पद दे दिया गया था।
ज्ञात हो कि इस मामले के बाद नितिन गडकरी की कंपनी की कई घोटाले उजागर हुए थे। आप पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल के खुलासे के बाद नितिन गडकरी को पार्टी अध्यक्ष का पद तक खोना पड़ा था।
घपले-घोटाले को लेकर चर्चित नितिन गडकरी को चुनाव के दौरान सभा के लिए बुलाने को लेकर भाजपा में विवाद तो बनी है लेकिन इसे हवा नहीं दी जा रही है। बल्कि विरोध के स्वर को अनुशासन के डंडे से हकाला जा रहा है।
इधर कांग्रेस ने भी नितिन गड़करी को बुलाये जाने को लेकर डॉ. रमन सिंह पर तीखा हमला करते हुए यहां तक कह दिया है कि इससे भाजपा का छत्तीसगढ़ के प्रति रवैया क्या है रमन सिंह किस तरह का छत्तीसगढ़ चाहते हैं यह स्पष्ट होने लगा है।
बहरहाल नितिन गडकरी की सभा को लेकर भाजपा फंसते नजर आ रही है अब देखना है कि नितिन की सभा के बाद क्या कुछ होता है।

बुधवार, 30 अक्टूबर 2013

आदिवासी हो या अग्रवाल सब हुए है माला-माल


सालों से सत्ता संभालने वाले पीछे छुटे


विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व लाख दावा करे कि छत्तीसगढ़ की सरकार भ्रष्टाचार से दूर रही है और उनके नेता राजनैतिक सुचिता का पालन करते हुए सादगी के साथ जनसेवा में लगे हैं। लेकिन पिछले पांच सालों में मुख्यमंत्री ीााजपाई मंत्रियों और विधायकों की संपत्तियों में कई गुणा वृद्धि साफ चुगली कर रही है कि हकीकत क्या है? और जनता भी समझ चुकी है।
छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन फार्म भरने का दौर अंतिम चरण में है और चुनाव आयोग के कड़े निर्देश के बादी प्रत्येक प्रत्याशियों को अपनी संपत्ति की घोषणा करनी पड़ रही है। संपत्ति की घोषणा से जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं व न केवल आश्चर्यजनक हे बल्कि आम आदमी को हैसान कर देने वाला है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके परिवार की संपत्ति 6 गुना तक बढ़ गई है। वो इसी तरह की बढ़ोतरी लता उसेण्डी, केदार कश्यप से लेकर प्रेमप्रकाश पाण्डे जैसे नेताओं की भी कई-कई गुणा बढ़ी है। रमन राज के प्राय: सभी मंत्रियों और दिग्गज भाजपाईयों की संपत्ति में हुई कई-कई गुणा वृद्धि किसी जादुई नुस्खे से कम नहीं है।
प्रत्याशियों की संपत्ति के मामले में कांग्रेस नेताओं की संपत्ति इस पैमाने पर नहीं बढ़ी। आखिर लंबे समय तक सत्ता सुख भोगने वाले कांग्रेसियों के मुकाबले भाजपाईयों की संपत्ति इस पैमाने पर क्यों और कैसे बढ़ गये यह जन चर्चा का विषय है। जबकि भाजपा नेता स्वयं को सादगी के साथ जन सेवा और भ्रष्टाचार विरोधी बताते नहीं थकते।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की संपत्ति बढऩे को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह तक ने सवाल उठाये थे लेकिन डॉक्टर साह बने यह कहकर सवाल को टाल दिया कि दिग्विजय सिंह तो बोलते ही रहते हैं लेकिन अब यह सवाल जनमानस में तैरने लगा है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय को संपत्ति में हुए अप्रत्याशित इजाफे पर तो स्वाभिमान मंच ने भी बवाल खड़ा कर दिया है। प्रेमप्रकाश पाण्डेय, अमर अग्रवाल, गौरीशंकर अग्रवाल, बृजमोहन अग्रवाल, राजेश मूणत सहित कई गैर छत्तीसगढिय़ा नेताओं की संपत्ति में अप्रत्याशित बढ़त को लेकर स्वाभिमान मंच ने हमले भी तेज कर दिये हैं। हालांकि कई-कई गुणा संपत्ति बढ़ाने के मामले में भाजपा के आदिवासी मंत्री भी पीछे नहीं है। केदार कश्यप, विक्रम उसेण्डी, सुश्री लता उसेण्डी जैसे आदिवासी मंत्रियों की संपत्ति में ईजाफा भी जादुइ्र ढंग से हुई है।
कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते नहीं थकने वाली भाजपा के नेताओं के सत्ता में आते ही संपत्ति अर्जन की गति पर अब तो दूसरों के पाप गिनाने से स्वयं के पाप नहीं धुलने की कहावत की चर्चा है।
सूत्रों की माने तो भाजपा सरकार यानी रमन सरकार के मंत्रियों व विधायकों की बढ़ती संपत्ति का मामला भी चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है और विरोधी दल इसे सीधे भ्रष्टाचार से जोडऩे लगा है जो आने वाले दिनों में भाजपा के विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व लाख दावा करे कि छत्तीसगढ़ की सरकार भ्रष्टाचार से दूर रही है और उनके नेता राजनैतिक सुचिता का पालन करते हुए सादगी के साथ जनसेवा में लगे हैं। लेकिन पिछले पांच सालों में मुख्यमंत्री ीााजपाई मंत्रियों और विधायकों की संपत्तियों में कई गुणा वृद्धि साफ चुगली कर रही है कि हकीकत क्या है? और जनता भी समझ चुकी है।
छत्तीसगढ़ में हो रहे विधानसभा चुनाव को लेकर नामांकन फार्म भरने का दौर अंतिम चरण में है और चुनाव आयोग के कड़े निर्देश के बादी प्रत्येक प्रत्याशियों को अपनी संपत्ति की घोषणा करनी पड़ रही है। संपत्ति की घोषणा से जो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं व न केवल आश्चर्यजनक हे बल्कि आम आदमी को हैसान कर देने वाला है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और उनके परिवार की संपत्ति 6 गुना तक बढ़ गई है। वो इसी तरह की बढ़ोतरी लता उसेण्डी, केदार कश्यप से लेकर प्रेमप्रकाश पाण्डे जैसे नेताओं की भी कई-कई गुणा बढ़ी है। रमन राज के प्राय: सभी मंत्रियों और दिग्गज भाजपाईयों की संपत्ति में हुई कई-कई गुणा वृद्धि किसी जादुई नुस्खे से कम नहीं है।
प्रत्याशियों की संपत्ति के मामले में कांग्रेस नेताओं की संपत्ति इस पैमाने पर नहीं बढ़ी। आखिर लंबे समय तक सत्ता सुख भोगने वाले कांग्रेसियों के मुकाबले भाजपाईयों की संपत्ति इस पैमाने पर क्यों और कैसे बढ़ गये यह जन चर्चा का विषय है। जबकि भाजपा नेता स्वयं को सादगी के साथ जन सेवा और भ्रष्टाचार विरोधी बताते नहीं थकते।
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की संपत्ति बढऩे को लेकर कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह तक ने सवाल उठाये थे लेकिन डॉक्टर साह बने यह कहकर सवाल को टाल दिया कि दिग्विजय सिंह तो बोलते ही रहते हैं लेकिन अब यह सवाल जनमानस में तैरने लगा है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय को संपत्ति में हुए अप्रत्याशित इजाफे पर तो स्वाभिमान मंच ने भी बवाल खड़ा कर दिया है। प्रेमप्रकाश पाण्डेय, अमर अग्रवाल, गौरीशंकर अग्रवाल, सहित कई गैर छत्तीसगढिय़ा नेताओं की संपत्ति में अप्रत्याशित बढ़त को लेकर स्वाभिमान मंच ने हमले भी तेज कर दिये हैं। हालांकि कई-कई गुणा संपत्ति बढ़ाने के मामले में भाजपा के आदिवासी मंत्री भी पीछे नहीं है। केदार कश्यप, विक्रम उसेण्डी, सुश्री लता उसेण्डी जैसे आदिवासी मंत्रियों की संपत्ति में ईजाफा भी जादुइ्र ढंग से हुई है।
कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते नहीं थकने वाली भाजपा के नेताओं के सत्ता में आते ही संपत्ति अर्जन की गति पर अब तो दूसरों के पाप गिनाने से स्वयं के पाप नहीं धुलने की कहावत की चर्चा है।
सूत्रों की माने तो भाजपा सरकार यानी रमन सरकार के मंत्रियों व विधायकों की बढ़ती संपत्ति का मामला भी चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है और विरोधी दल इसे सीधे भ्रष्टाचार से जोडऩे लगा है जो आने वाले दिनों में भाजपा के लिए खतरनाक है।
बहरहाल मुख्यमंत्री सहित भाजपाई मंत्रियों की बढ़ती संपत्ति पर जनचर्चा तेज होने लगी है अब देखना है कि इसका जवाब भाजपा कैसे देती है या जनता जवाब तैयार करेगी।लिए खतरनाक है।
बहरहाल मुख्यमंत्री सहित भाजपाई मंत्रियों की बढ़ती संपत्ति पर जनचर्चा तेज होने लगी है अब देखना है कि इसका जवाब भाजपा कैसे देती है या जनता जवाब तैयार करेगी।

मंगलवार, 27 अगस्त 2013

भाजपा के दर्जन भर विधायक जोगी एक्सप्रेस में बैठने आतुर...


कांग्रेसी हलाकान
भाजपाई परेशान

विशेष प्रतिनिधि
रायपुर। छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारी के बीच जोगी एक्सप्रेस की बढ़ती रफ्तार ने यहां की राजनीति को गरमा दिया है। जोगी एक्सप्रेस की बढ़ती रफ्तार से जहां कांग्रेस हलाकान है तो भाजपा की परेशानी भी बढऩे लगी है। भाजपा अब खराब प्रदर्शन करने वाले विधायकों की टिकिट को लेकर दुविधा में है कि कहीं में लोग जोगी एक्सप्रेस में न बैठ जाए क्योंकि चर्चा है कि भाजपा के दर्जन भर से अधिक विधायक न केवल जोगी के संपर्क में हैं बल्कि उनके एक्सप्रेस में भी बैठने को आतुर है।
छत्तीसगढ़ में पिछले चुनावों के मुकाबले इस बार राजनैतिक फिजा अलग ही दिखाई देने लगाह है। दस साल से सत्ता सीन भाजपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत मुखिया डॉ. रमन सिं की छवि को लेकर है। भ्रष्टाचार और प्रशासनिक आतंक के चलते कालिख पूते चेहरे का असर साफ दिखने लगा है। भले ही भाजपा हैट्रिक का दखा कर रही हो लेकिन इंदिरा बैंक घोटाले के नार्को टेस्ट की सीडी से लेकर दरभा घाटी में हुए कांग्रेसी नेताओं की हत्या को होने वाले दुस्प्रभाव को रोक पाना आसान नहीं है। उपर से भाजपा विधायकों की छवि और कुनबे करतूतों को लेकर पार्टी में जबरदस्त उहापोह की स्थिति बनी हुई है।
कहा जाता है कि भाजपा द्वारा कराये सर्वे में दो दर्जन से अधिक विधायकों की रिपोर्ट कार्ड बेहद खराब हे ऐसे में भाजपा के लिए हैट्रिक की राह आसान नहीं है। डॉ. रमन सिंह खुद कोयले की कालिख, इंदिरा बैक घोटाले से लेकर प्रशासनिक अक्षमत के आरोपों से उबर नहीं पाये हें तो उनके मंत्रीमंडल के कइई सदस्य भी गंभीर आरोपों से घिरे हुए है। यहां तक कि विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक तक आरोपों से बच नहीं पाये है।
भाजपा के सामने सबसे बड़ी दिक्कत अजा-जजा वर्ग के वोटों के अलावा पिछड़े वर्ग के वोटों को साधने की है। सतनामी समाज जहां आंख तरेर कर खड़ा है तो आदिवासी समाज भी कम आक्रोशित नहीं है। ऐसे में भाजपा की छोटी सी भूल बड़ी लापरवाही साबित हो सकती है।
दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौति गुटबाजी है। नये प्रदेशाध्यक्ष चरणदास महंत के नेतृत्वक्षमता को लेकर सपाल उठाये जा रहे हैं और कहा जा रहा है कि वे अब भी रंगा-बिल्ला से नहीं उबर जाये है। कांग्रेस का एक बड़ा  जहां महंत से नाराज है तो वही पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने महंत के खिलाफ अघोषित युद्ध छेड़ रखा है।
राजनैतिक विश£ेषकों का मानना है कि अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के जनाधार वाले सबसे बड़े नेता है ऐसे में उनको नजर अंदाज करना न केवल कांग्रेस बल्कि भाजपा को भी भारी पड़ सकता है।
इन दिनों स्व. मिनी माता के आदर्शो को लेकर जोगी एक्सप्रेस चला रहे इस कांग्रेसी नेता की सभा में जुटने वाली भीड़ से भले ही भाजपाई खुश दिख रहे हो पर सच तो यह है कि कहीं चुनाव में भी यह एक्सप्रेस चल निकला तो भाजपा को ही सर्वाधिक नुकसान होने वाला है।
सूत्रों की माने तो जोगी की ताकत को देखकर भाजपा के दर्जनभर से अधिक विधायक उनके संपर्क में है जबकि टिकिट करने की सूरत में कई भाजपा विधायक जोगी एक्सप्रेस में बैठ सकते हैं। बताया जाता है कि भाजपाई भले ही उपर से खुश दिखाई दे रहे हैं लेकिन जोगी एक्सप्रेस के संभावित रफ्तार से पार्टी के कई लोगों के माथे पर बल पडऩे लगे है।
बहर हाल जोगी एक्सप्रेस की बढ़ती रफ्तार ने छत्तीसगढ़ की राजनीति को चुनाव के 4 माह पहले ही गरमा दिया है और देखना है कि इस एक्सप्रेस में कौन-कौन सवार होता है।

सोमवार, 26 अगस्त 2013

नार्को सीडी की असलियत पर सरकार चुप क्यों?


* भूपेश की चुनौती से भाजपा में घबराहट!
* कांग्रेसी घोटालों को पैसा खाकर दबाया!
* संचेती बंधु और अदानी गु्रप पर मेहरबानी!
* जल जंगल जमीन सभी की चौतरफा लूट!
* सब कुछ मुफ्त बांटने से मध्यम वर्ग नाराज!
रायपुर। इंदिरा बैंक घोटाले के मामले में नार्को सीडी के खुलासे से जहां भाजपा की मुसिबत थमने का नाम नहीं ले रहा है वहीं मुख्यमंत्री और चारों मंत्रियों से हाईकमान की नाराजगी ने नया मोड़ ले लिया है। नार्को सीडी को फर्जी बताने वाली सरकार ने अब तक न तो असली सीडी ही जारी की है ओर न ही भूपेश बघेल की चुनौती को दी स्वीकार किया है इसे लेकर भाजपा को जवाब देना मुश्कि हो रहा है।
अपनी कथित साफ छवि और विकास को मुद्दा बनाने का दंभ भरने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की कोल ब्लॉक आबंटन में संचती बंधुओं पर की गई मेहरबानी से ही किरकिरी शुरू हो गई थी। इस मेहरबानी के चलते न केवल छत्तीसगढ़ को हजार करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ बल्कि भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष नीतिन गडकरी भी कटघरे में खड़े हुए। इसके बाद कैग ने अदानी ग्रुप पर मेहरबानी का खुलासा कर रमन सरकार के कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर दिया। अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि नक्सलियों के दरभा कांड में हुए कांग्रेसी दिग्ंगजों की हत्या
ने सरकार की नियत पर सवाल खड़ा कर दिया। इस मामले में कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के द्वारा रमन सिंह के द्वारा ब्रम्हास्त्र चलाने की बात कहकर सनसनी फैला दी थी।
ताजा मामला इंदिरा बैक घोटाले में उमेश सिंह की नार्को सीडी का है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह सहित उनके मंत्रियों पर घोटाले दबाने करोड़ों रूपये खाने का जो आरोप कांग्रेस ने लगाया हे उससे भाजपा में बेचैनी बड़ गई है। हालांकि उपरी तौर पर भाजपा इस सीडी से नुकसान नहीं होने का दावा कर रही है पर सच तो यह है कि कल तक कांग्रेस को गरियाने वाली भाजपा के पास नार्को सीडी मामले में कोई जवाब नहीं हे। अब तो आम आदमी भी कहने लगा है कि यदि सीडी नकली है तो सरकार असली सीडी सामने क्यों नहीं ला रही है।
इधर भाजपा ने भ्रष्टाचार, दरभा कांड और नार्को सीडी से हो रहे नुकसान से निपटने कई विधायकों की टिकिट काटने और गरीबों व युवाओं को सब कुछ मुक्त बांटने का निर्णय ले लिया है।
सूत्रों का कहना है कि हाल के वर्षो में विकास के नाम पर संसाधनों की चौतरफा लूट जिस पैमाने पर हुआ है वह अंयंत्र कहीं देखने को नहीं मिलेगा। स्तर हीन सड़क से लेकर भवन निर्माण और भ्रष्ट अधिकारियों के संरक्षण को लेकर आम लोगों में सरकार की छवि पर प्रभाव पड़ा है।
इधर सरकार की मुफ्त बांटने की वोट बैक की राजनीति से मध्यम वर्ग में बेहद नाराजगी है। सूत्र बताते है कि सरकार की इस मुक्त बांटो योजना से नाराज मध्यम वर्ग ने यदि अपनी नाराजगी वोट के रूप में तब्दिल कर दी तो भाजपा को लेने के देने पड़ जायेंगे।
दूसरी तरफ चर्चा इस बात की भी है कि चुनावी साल में रमन सरकार के करतूतों के इस खुलासे से हाईकमान भी नाराज हे और भले ही बाहर से सब ठीक दिख रहा हो लेकिन भीतर से कुछ भी ठीक नहीं है।
बहरहाल नार्को सीडी का असर क्या होगा यह बाद में ही पता चलेगा।

मंगलवार, 16 नवंबर 2010

डा. रमन की स्वीकारोक्ति - उद्योगपतियों व व्यापारियों के बदौलत है हमारी सरकार...

आम लोगों में तीखी प्रतिक्रिया...
 वैसे तो भाजपा पर व्यापारियों की सरकार का आरोप हमेशा लगता रहा है और भाजपा के नेता हमेशा ही इसका खंडन करते रहे हैं लेकिन पिछले दिनों राजनांदगांव के दीपावली मिलन कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खुलकर पहली बार यह बात स्वीकार की कि उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों ने जो माहौल तैयार किया। उसी की बदौलत उनकी सरकार बनी और ये बात वे कभी नहीं भूलेंगे।
वैसे तो बुलंद छत्तीसगढ़ ने भाजपा सरकार और सचिवों के उद्योगपतियों के इशारे पर नाचने का कई उदाहरण पेश किया है बाल्को से लेकर जिंदल तक और राज्योत्सव में वीडियोकॉन का मामला भी लोग भूले नहीं है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी इसे विरोधी दलों का दुष्प्रचार कहते रही है लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने राजनांदगांव में 7 नवम्बर को आयोजित अग्रसेन भवन में दीपावली मिलन कार्यक्रम में यह बात स्वीकार की कि उनकी सरकार उद्योगपतियों एवं व्यवसायियों की बदौलत है यही नहीं उन्होंने यहां तक कहा कि वे पार्षद से विधायक और केन्द्रीय मंत्री से मुख्यमंत्री बन पाए तो सिर्फ इसलिए कि उद्योगपतियों व व्यवसायियों ने माहौल बनाया। उन्होंने उद्योगपतियों से आगे भी इसी तरह के सहयोग करने की गुजारिश की।
रायपुर से प्रकाशित नामी दैनिक अखबार ‘पत्रिका’ में 8 नवम्बर 2010 को छपी इस खबर से स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री ने यह बात स्वीकार की है। इस खबर की सच्चाई जब जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि डॉ. सिंह के इस स्वीकारोक्ति की आम जनों में तीखी प्रतिक्रिया है। वहीं पार्टी के कुछ विधायकों ने भी इस पर तीखी टिप्पणी नाम नहीं छापने की शर्त पर कही।
इधर चर्चा इस बात की है कि पत्रिका में छपी खबर की अब तक न तो मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने खंडन किया है और न ही मुख्यमंत्री के प्रेस कार्यालय से ही इस बात का खंडन हुआ है इससे ही स्पष्ट है कि डॉ. रमन ने यह बात खुलेआम से स्वीकार किया है। हालांकि आम लोगों में व्याप्त तीखी प्रतिक्रिया से भाजपा नेताओं में जबरदस्त बेचैनी है। बहरहाल मुख्यमंत्री की यह स्वीकारोक्ति आने वाले दिनों में क्या रंग लेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन आम लोगों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया है।

मंगलवार, 2 नवंबर 2010

खनिज के ‘खा’

 लगता है छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज मामले में तय कर लिया है कि खदानों को लीज में देने की बजाय अवैध उत्खनन से पैसा कमाया जाए। तभी तो यहां लीज देने की प्रक्रिया इतना जटिल कर दिया है कि सालों से लीज देने का आवेदन लंबित है। यही नहीं आए दिन खनिज को लेकर नई-नई नीतियां बनाई जाती है ताकि खनिज की चोरी चलता रहे अधिकारियों की जेब गरम होते रहे। चूंकि यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास है इसलिए भी अधिकारियों की दादागिरी चरम पर है।
छत्तीसगढ़ में जिस तरह से लूट मची है उसमें खनिज विभाग के अधिकारी भी पीछे नहीं है। खनिज चोरी की बढ़ती घटना से चिंतित नजर आने वाले अधिकारियों की एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा भी टांय-टांय फिस्स हो चुका है। एफआईआर कराने की बात तो दूर नई राजधानी जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र से भी खनिज चोरी को वह नहीं रोक पाई है।
ज्ञात हो कि नई राजधानी क्षेत्र व उससे लगे गांवों में मुरुम व गिट्टी उत्खनन पर प्रतिबंध है लेकिन आज भी सैकड़ों ट्रके मुरुम व गिट्टी शहर में बेधडक़ परिवहन किया जा रहा है। खनिज नाका तो अवैध उत्खनन को रोकने की बजाय वसूली व कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। यही नहीं दुर्ग जिले के नंदनी अहिवारा क्षेत्र से भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकें मुरुम व गिट्टी लेकर रायपुर आ रही है। चूंकि इन दोनों ही क्षेत्रों से आने वाले मुरुम-गिट्टी की कीमत अत्यंत कम है इसलिए भी सडक़ निर्माण से लेकर भवन निर्माण में इसका बेतहाशा उपयोग हो रहा है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि कुम्हारी बीटीओ नाके में 100 रुपए टैक्स वसूलने के बाद भी रायपुर में सस्ते में कैसे आ रहा है यह जांच का विषय है।
इधर उड़ीसा व महासमुंद में खदान चलाने वाले एक व्यापारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वही काम कर सकता है जो अवैध काम करेगा हमारे जैसे नियम में काम करने वालों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने खदान लीज पर देने की प्रक्रिया को भी घुमावदार बताते हुए यहां तक कहा कि वे यहां की खदान को सिर्फ इसलिए चालू नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनसे बेवजह पैसे मांगे जाते हैं। अवैध उत्खनन करने वालों से सांठगांठ की वजह से ही लीज देने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है और लीज लेने का आवेदन देने वालों को आफिस का चक्कर लगवाया जा रहा है।
चर्चा तो यह है कि सैकड़ों एकड़ जमीन लीज पर लेने वालों के लिए पूरा अमला लग जाता है और निजी वन जमीनों तक को लीज पर दे दिया जाता है। इसका उदाहरण पलारी के पास स्थित गांव रिंगनी तथा चुआं, मालूकोना, देवरानी जेठानी नामक गांव तक को लीज पर दे दिया गया है और यह सब मंत्री से लेकर अधिकारियों तक से सांठगांठ कर की जाती है।

शनिवार, 30 अक्टूबर 2010

सीएम साहब! बधाई हो 10 साल का...

1 नवम्बर को छत्तीसगढ़ के स्थापना का दस साल पूरा हो जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के बधाई हो। छत्तीसगढ़ के स्थापना का दस साल पूरा हो गया। अखबार वाले भी खुश है। उन्हें भी बधाई हो। फिर राज्योत्सव के नाम पर लाखों रुपए के विज्ञापन मिल जाएंगे। सरकारी खजानों से राज्योत्सव की धूम इस बार जोरदार रहेगी। रहनी भी चाहिए। सलमान खान जैसे सुपर स्टार को बुलाया जा रहा है। सब कुछ ठीक ठाक है। राज्य इन दस सालों में बहुत तरक्की की है। फिर क्यों नहीं राज्योत्सव मनाना चाहिए। यही बहाने हम दूसरे प्रदेश की संस्कृति को जान समझ लेंगे। आखिर आम छत्तीसगढिय़ा फिर कब देख पाएगा सलमान खान को।
डा. रमन सिंह सबसे ज्यादा बधाई के पात्र हैं सलमान खान को दिखाने के लिए। संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढिय़ा बेवजह कोसते रहते हैं। अरे सुआ नाचा गम्मत तो रोज देखते रहते हैं। बाहर के कलाकारों को देखने समझने का तो यही मौका है। फिर छत्तीसगढ़ कोई गरीब प्रदेश तो है नहीं कि बाहर के कलाकारों को मनमाने ढंग से रुपए न दे सके। बाहर के कलाकारों को भी तो लगना चाहिए कि हमारे प्रदेश के लोग कितने उदार है स्वयं फ्री फंड में काम करते हैं लेकिन मेहमानों को उनकी औकात से अधिक पैसा दे सकते हैं।
अखबार वाले बेवजह यहां के कुछ लोक कलाकारों को प्रश्रय देते हैं। छोटी सोच को तो अखबार में जगह ही नहीं मिलनी चाहिए और न ही सरकार के खिलाफ ही कुछ छापना चाहिए। पत्रिका ने आकर सब गड़बड़ कर दिया वरना सब गुड-गॉड चल रहा था। दो की लड़ाई में जबरदस्ती छापना पड़ रहा है। लेकिन सीएम डॉ. रमन साहब भी कम नहीं है वे भी जानते है कि ये सब जो घोटालों का पर्दाफाश हो रहा है वह कार्रवाई करने के लिए नहीं बल्कि अपनी कमीज को ज्यादा सफेद बताने की लड़ाई है। 10 साल बिना कार्रवाई के निपट गया। आगे का साल भी निपट जाएगा। बताते रहो मंत्रियों को दुष्ट और अधिकारियों को भ्रष्ट क्या फर्क पड़ता है? कार्रवाई ही जब नहीं होनी ही है। सीएम साहब! ठीक सोचते हैं हर विभाग के भ्रष्ट कारनामों को केवल अखबार के छपने के आधार पर कार्रवाई की जाती रही तो चल गया विभाग।
अब पीएचई का ही मामला ले पत्रिका बेवजह पीछे पड़ गया है। कमल विहार कितनी अच्छी योजना है और अच्छे काम में थोड़ी बहुत गलती होती ही है उसको तिल का ताड़ बना रहे हैं। गली-गली में बाबूलाल गली छाप पर नवभारत क्या साबित करना चाहता है। बेवजह शराब के खिलाफ अखबार लिख रहा है। अब शराब पीकर नशे में कोई हत्या कर दे तो इसमें डॉ. साहब की कहां गलती है वे तो ठेका दे दिए हैं अब बेचने वाले जाने और पीने वाले? जबरदस्ती कहा जा रहा है कि शराब की वजह से हर माह सौ-दो सौ लोग मार रहे हैं। आंकड़े बता कर आम लोगों को भ्रमित करने वालों को तो पकड़-पकड़ कर पिटना चाहिए। गृहमंत्री ननकीराम कंवर की नाराजगी डीजीपी विश्वरंजन से हैं और वे गुस्सा एसपी को निकम्मा और कलेक्टर को दलाल कहकर उतार रहे हैं इतने में भी बात नहीं बनी तो थानेदारों पर आरोप लगाने लगे कि वे शराब माफियाओं के इशारे पर चल रहे हैं।
नगर भैय्या बृजमोहन अग्रवाल के तो पीछे ही पड़ गए हैं लोग। जब कांग्रेस के समय सडक़ उखड़ती थी तब कोई नहीं बोलता था और न ही शिक्षा व्यवस्था पर ही सवाल उठाता था। कोई ये नहीं कहता कि एक आदमी आधा दर्जन से ज्यादा विभाग मुस्तैदी से संभाल रहा है। उल्टे उसके विभाग के विवादास्पद अधिकारियों को उनसे संबंध जोडऩा कितना उचित है। जब विभाग में विवादास्पद और भ्रष्ट लोगों का जमावड़ा हो तो कोई इन्हें हटाकर कैसे काम कर सकता है आखिर विभाग चलाना कोई मजाक तो नहीं है।
अब किसानों के नाम पर बेवजह लोग राजनीति कर रहे हैं। अरे भई चुनाव था इसलिए कह दिया 270 रुपए बोनस देंगे। चुनाव में तो ऐसा बोला जाता है। फिर अब किसान किसान कहां रह गए हैं। लोग धंधा-नौकरी कर रहे हैं। गांव-गांव तक सडक़ें इसलिए तो बनाई है कि किसान भी शहर का दर्शन कर सके। अब चप्पू साहू खुद किसान है इसके बाद भी लोगों को उन पर भरोसा नहीं है वे जानते हैं कि किसानों को बोनस से कुछ हासिल नहीं होने वाला। वे जानते हैं कि खेती से सिर्फ घाटा होना है इसलिए खेती की जमीन उद्योगों को दी जा रही है। वे जानते हैं कि यूरिया से खेत बर्बाद होता है इसलिए तो वे दुकानों की अनियमित सप्लाई पर ध्यान नहीं देते। बेवजह लोग किसान मोर्चा बनाकर राजनीति कर रहे हैं। लोगों को तो बहाना मिल गया है कि बृजमोहन अग्रवाल हरियाणवी हैं इसलिए छत्तीसगढ़ की उपेक्षा कर रहे हैं। कोई ये नहीं देख रहा है कि रात-रात भर जाग कर आदमी मेहनत कर रहा है। मंत्री है भई कोई मजाक नहीं है कि सुबह से लोगों से मिलने निकल जाए।
डॉ. साहब तो गांधी जी के सच्चे अनुयायी है इसलिए वे किसी की बात ही नहीं सुनते। गांधी दर्शन से लबरेज डॉ. साहब ने गांधी जी के तीन बंदरों के सिद्धांत को आत्म सात कर लिया है बुरा न देखो, बुरा न सुनों, बुरा न बोलो? कभी डाक्टर साहब के मुंह से किसी के लिए अपशब्द सुना है फिर वे क्यों किसी अधिकारी के खिलाफ सुनेंगे और मंत्री तो उनकी अपनी पार्टी के हैं? जो लोग नाराज है या भ्रष्टाचार से दुखी है वे बेवजह दुखी है घर का मामला है मना लिया जाएगा। और रहा सवाल देखने का तो डॉ. साहब ने तो सत्ता पाते ही आंखे बंद कर ली थी क्योंकि वे जानते है आंख खोलते ही सत्ता की बुराई दिखेगी और पिछली सरकार के काले कारनामों पर कार्रवाई करनी पड़ जाएगी। इसलिए उन्होंने तब से आंखे बंद कर ली है और फिर कांग्रेसी कोई पराये थोड़ी न है? पता नहीं कब सत्ता बदल जाए तो? इसलिए बदले की राजनीति तो होनी ही नहीं चाहिए? आखिर कांग्रेसी भी तो सत्ता की राजनीति ही कर रहे हैं। डॉ. साहब भी जानते हैं कि कांग्रेसी गांधी जी के सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है। वह भी न बुरा देखती है न सुनती है न बोलती है? इसलिए चिंता आम लोगों की करना चाहिए और इसकी चिंता पूरी सिद्दत से की जा रही है एक-दो रुपया किलो चावल दे दो। पेट भरा रहेगा तो सब खुश और जो खुश नहीं है उनके लिए गांव-गांव में दारू तो है ही। दस साल में सब गुड-गॉड है अमन चैन शांति है इसलिए एक बार फिर डॉ. साहब और उसकी पूरी टीम को बधाई!

गुरुवार, 30 सितंबर 2010

डॉ. रमन साहब विकास कहां हुआ है...

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह यह कहते नहीं थकते कि उनके कार्यकाल में छत्तीसगढ़ का विकास हुआ है। दस साल छत्तीसगढ़ के निर्माण को हो गए इनमें से 7 साल से डॉ. रमन सिंह सत्ता में हैं। अजीत जोगी तो अपने तीन सालों के कार्यकाल को विकास की बुनियाद रखने की बात कहते हुए जिम्मेदारी से मुक्त होने की कोशिश करते हैं लेकिन डॉ. रमन का दावा कितना सार्थक है यह अब देखने की जरूरत है। वे कांग्रेस के 50 बनाम 5 से तुलना कर 'बेटर देन' की बात तो करते हैं लेकिन बेटर देन के चक्कर में 'गुड' कहीं नहीं है। सब तरफ भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है। अमीरों को अधिकाधिक सुविधा दिए जा रहे हैं। अपनी सुविधा बढ़ाने की कोशिश में पूरी सरकार और विपक्ष ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है लेकिन डॉ. रमन सिंह के इस सात सालों में आम आदमी को क्या मिला है?
बिसलरी से लेकर एक्वागार्ड का पानी पीने वाले इस सरकार के मंत्री से लेकर अधिकारियों ने क्या कभी सोचा है कि छत्तीसगढ़ के गांवों के लोगों को पीने का साफ पानी और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध करा दें। शायद नहीं। डॉ. रमन सिंह ने यदि सात सालों में विकास का दावा किया है तो वे क्या बता पाएंगे कि इन वर्षों में कितने गांव में पीने का साफ पानी उपलब्ध कराया गया है या कितने गांवों के खेतों में पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। हमारा दावा है कि इसका जवाब ही सरकार के पास नहीं है। इसी तरह इन 7 वर्षों में कितने गांवों में चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है। शिक्षा का तो भगवान ही मालिक है। आज भी छत्तीसगढ़ के ऐसे कई गांव है जहां के मीडिल और हाई स्कूल के छात्रों को कई किलोमीटर चलकर स्कूल जाना पड़ता है? जब गांव में पीने और सिंचाई का पानी हैं, चिकित्सा सुविधा नहीं है शिक्षा तक नहीं दिया जा रहा है तब सरकार के विकास का दावा कितना उचित है। जिस दिन सरकार छत्तीसगढ में यह बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करा देगी तब विकास की बात की जानी चाहिए। ऐसे में किसी भी सरकार को विकास का दावा नहीं करना चाहिए।
दरअसल डॉ. रमन सिंह ने विकास के दूसरे मायने ही निकाल रखा है। भारी भ्रष्टाचार आज सरकार की प्राथमिकता हो गई है। भ्रष्ट अधिकारियों की फौज करना उसकी आदत हो गई है। तभी तो बाबूलाल अग्रवाल जैसे आईएएस की बहाली हो जाती है। नारायण सिंह जैसे सजायाफ्ता आईएएस को प्रमोशन देने पूरा मंत्रिमंडल जुट जाता है और बाल्को जैसे अवैध कब्जाधारियों को पट्टा देने पूरी सरकार लग जाती है।
उद्योगों को जमीन देने किसानों से जबरिया अधिग्रहण कराया जाता है और अपने ऐशो आराम के लिए नई राजधानी में सारे संसाधन जुटाये जाते हैं और कोई सरकार यह नहीं कहती कि नई राजधानी इसलिए बनाए जा रहे हैं ताकि अपने लिए ऐशोआराम के साधन जुटाए जाए बल्कि सरकार यह कहती है कि वह दुनिया में छत्तीसगढ क़ा नाम रोशन करने नई राजधानी में अरबों खरबों खर्च कर रहे हैं। जिस प्रदेश के आम लोगों को पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा उपलब्ध नहीं हो रहा हो वहां अरबों-खरबों की राजधानी बने और भ्रष्टाचार की गंगोत्री बहे वहां बजट का रोना घड़ियाली आंसू के सिवाय कुछ नहीं है।