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गुरुवार, 15 मई 2025

देश से आख़िर क्या छुपाया जा रहा है…

 देश से आख़िर क्या छुपाया जा रहा है…



अचानक हुए युद्धविराम यानी सीजफ़ायर के बाद कई तरह के सवाल उठने लगे हैं

अदानी को लेकर 

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप के दुश्मन देश की तरह व्यवहार को लेकर

चीन के खुले आम पाकिस्तान के साथ खड़ा होने को लेकर

और अब तुर्की के ख़िलाफ़ हिन्दुवादियों और केट को लेकर



पिछले दिनों में चौंकाने वाली कई खबरें आई लेकिन एक चीन से एक अमेरिका से आई खबर ने हिला कर रख दिया ।चीन से खबर आई कि उसने उसके नक्शे मैं अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं बताया है चीन  से ही दूसरी खबर आई कि  अंबानी ने चीन की  कंपनी के साथ एक करार किया जिसके बाद भारतीय विमान में बैठने वाले हर यात्री का जो बीमा होता है उसे वह कंपनी अंजाम देगी मतलब भारत से बैठने वाले जितने भी विमान यात्री हैं उसका डाटा हमेशा चीन के पास रहेगा सुरक्षा की दृष्टि से यह कितना उचित रहेगा यह आने वाले दिनों में परीक्षण का विषय होगा!

तीसरी खबर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से आई जिसमें उन्होंने आईफोन बनाने वाली कंपनी के निदेशक टीम   कुक    को कहा कि भारत में आईफोन बनाना बंद करें क्योंकि भारत पर टैरिफ का बहुत बड़ा प्रभार लगने वाला है यह दरअसल भारत के संप्रभुता पर हमला है लेकिन क्या इतनी नैतिक ताकत है हमारी सरकार में की अमेरिका के इस कदम का कोई डिप्लोमेटिक विरोध कर सके! 


इसी के साथ ही एक खबर यह भी रही कल अंबानी ने अरब के नवाब  के साहबजादे के साथ किसी व्यापार की डील की !

बचे हुए राफेल के लिए फ्रांस से हिंदुस्तान की डील कैंसिल हो गई!

और भारत के एक और दुश्मन पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश को आज अंतरराष्ट्रीय मुद्रा निगम से अरबो रुपए का लोन दिया गया!

प्रमोद जैन के मुताबिक़ यह सारी खबरें सामान्य खबरें नहीं है!


1_किसी कंपनी को भारत में उद्योग न लगाने के लिए प्रेरित करना भारत के संप्रभुता के साथ एक खिलवाड़ है और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कभी इस तरह का वाकया सामने नहीं आया है अमेरिका का यह बयान निश्चित रूप से भारत की कूटनीति की अ सफलता का परिचायक है! 


२_एक तरफ ट्रंप कहते हैं उनके कहने से युद्ध रोक दिया और दूसरी तरफ भारत के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा रहा है नमस्ते ट्रंप कहने वाली सरकार खामोश बैठी है!


3_दूसरी और सरकार के अत्यंत प्रिय उद्योगपति अंबानी जी अरब गए हैं, जब ट्रंप वहां है क्या ऑपरेशन सिंदूर का सौदा कर दिया गया है! 


4_अंबानी ने तो बेशर्मी की हद कर दी एक तरफ भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल और इनका अनुसांगिक संगठन तुर्की और अजर बेजान की बाय काट की बात करते हैं दूसरी तरफ जिस चीन की मिसाइल ने पाकिस्तान को दुस्साहस करने का मौका दिया उसके साथ इसी सरकार के दत्तक पुत्र बीमा बीमा खेल रहे हैं! 

यह कैसी कूटनीति है! 

5_बचे हुए राफेल का सौदा कैंसिल कर शायद सरकार ने स्वीकार कर लिया है राफेल सेना के लिए उपयोगी नहीं है, राफेल का भ्रष्टाचार भारतीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है!

6_दक्षिण एशिया में पैर जमाने के लिए अमेरिका एक के बाद एक भारत विरोधी राष्ट्रों को एस्टेब्लिश करने की कोशिश कर रहा है बांग्लादेश इसका ताजा उदाहरण है!

एक कहावत है आक्रमण जब किया जाता है जब सामने वाला पक्ष सबसे कमजोर होता है क्या इस तथा कथित युद्ध विराम के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति कमजोर हुई है और कूटनीति अ सफल!


और आज भारत की तर्ज पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति शाहबाज शरीफ ने भी एक एयर बेस पर जाकर हजारों की जनसमूह के बीच में टैंक पर खड़े होकर पाकिस्तानी अवाम को अपना भाषण दिया जिसमें उन्होंने कहा हमने भारत का घमंड तोड़ दिया है अपने आप को बहुत संपन्न समझने वाली इंडियन आर्मी के राफेल और एस 400 विमान पाकिस्तान आर्मी की  रक्षा नीति से ध्वस्त कर दिए ! इन खबरों की सच्चाई की पुष्टि सरकार और सेना ही कर सकती है , पर जिस तरह राफेल के बची हुई खरीद के सौदा निरस्त करने की खबर है उसे लगता है कहीं कोई झोल तो है! 

तिरंगा यात्रा की तरह शीघ्र ही आप सुन लेंगे पाकिस्तान में भी उनके ध्वज के साथ यात्रा निकाली जा रही है क्योंकि पाक के प्रधान मंत्री और उनकी सेना का खेल कौन नहीं जानता…।

बुधवार, 14 मई 2025

मोदी के ये दो अफ़सर क्यों निपट गये..

 मोदी के ये दो अफ़सर पंद्रह दिन के भीतर क्यों निपट गये..


देश युद्धविराम के कारणों पर उलझा है, मोदी सत्ता तिरंगा यात्रा निकाल कर चुनावी लाभ लेने तत्पर है,

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप युद्धविराम का श्रेय लेते घूम रहे है

अदाणी को लेकर युद्धविराम के संबंध तलाशे जा रहे है 

तो अंबानी का खेल भी चर्चा में इसलिए है क्योंकि अब मोदी के पसंदीदा दो अफ़सरों पर पंद्रह दिन के भीतर गाज गिर गई, दोनों ही अफ़सर बर्खास्त किए गये.

केंद्र सरकार ने आरपी गुप्ता को भारतीय सौर ऊर्जा निगम (SECI) के चेयरमैन के पद से बर्खास्त कर दिया। सरकार ने आरपी गुप्ता को को इस पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उनका कार्यकाल एक महीने बचा था। लेकिन अचानक उन्हें हटाए जाने का कोई कारण अभी पता नहीं चला है। सरकार ने शनिवार को आरपी गुप्ता को हटाने का आदेश जारी किया जिसमें फैसले के पीछे कोई वजह नहीं बताई गई है। हालांकि, कई विवादों में निगम और सौर ऊर्जा से संबंधित बड़ी कंपनियों के नाम सामने आ रहे थे। आरपी गुप्ता जून 2023 से भारतीय सौर ऊर्जा निगम के अध्यक्ष थे।

लेकिन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ भारतीय सौर ऊर्जा निगम का आंतिरक संचालन भी विवादों में आया। पिछले वर्ष अक्तूबर महीने में खबरें आईं कि उद्योगपति अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर ने टेंडर लेने के लिए निगम को दिए दस्तावेजों में गड़बड़ी की थी, बावजूद इसके निगम ने उसे टेंडर में बोली लगाने की अनुमति दे दी थी। दूसरी तरफ, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने जनवरी में सौर ऊर्जा निगम (SECI) की पहली ग्रिड स्तरीय बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) के लिए 2022 में निर्धारित टैरिफ को खारिज कर दिया था।

अमेरिकी सिक्यॉरिटीज एंड एक्सचेंज कमिशन (USSEC) ने दावा किया था कि उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी ने उत्पादित बिजली की बिक्री के लिए राज्य सरकारों को रिश्वत देने शुरू किए जिसकी जानकारी उसने अपने अमेरिकी निवेशकों को नहीं दिया। इस कारण गौतम अडानी की इस कंपनी के खिलाफ अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में मुकदमा दर्ज किया गया। हाल में खबर आई थी कि अडानी समूह के प्रतिनिधियों ने इस मुकदमे को रफा-दफा करवाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से लगातार संपर्क किया है।

मंत्रालय ने 2011 में भारतीय सौर ऊर्जा निगम को पहली नवीकरणीय ऊर्जा कार्यान्वयन एजेंसी नियुक्त किया था। इसे सौर, पवन, हाइब्रिड और एफडीआरई (फर्म एंड डिस्पैचेबल रीन्यूएबल एनर्जी) और बैटरी स्टोरेज जैसी रीन्यूएबल एनर्जी प्रॉजेक्ट्स का टेंडर जारी करना था। कुल 40 गीगावॉट में निगम के पास 12 गीगावॉट की खरीद और बिक्री का दायित्व दिया गया था जिस पर काम नहीं हो सका। ज्यादातर प्रॉजेक्ट्स से पैदा हुई ऊर्जा का कोई खरीदार नहीं मिला। अडानी ग्रीन एनर्जी, रीन्यू पावर, सॉफ्टबैंक एनर्जी, अज्योर पावर और एसीएमई सोलर जैसे बड़ी ग्रीन पावर कंपनियों के प्रॉजेक्ट्स इस लिस्ट में शामिल हैं।

इससे पहले केवी सुब्रमण्यन को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के एग्जिक्युटिव डायरेक्ट पद से बर्खास्त कर दिया था। सुब्रमण्यम पर की गई इस कार्रवाई का भी केंद्र सरकार ने कोई कारण नहीं बताया था। हालांकि, इकनॉमिक टाइम्स ने खबर दी थी कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने सुब्रमण्यम की किताब 'India@100: Envisioning Tomorrow's Economic Powerhouse' की करीब 2 लाख कॉपियों का ऑर्डर प्रकाशन से पहले ही दे दिया था। करीब 7.5 करोड़ रुपये के इस ऑर्डर पर बैंक मैनेजमेंट के अंदर विवाद पैदा हो गया था। आईएमएफ में केवी सुब्रमण्यम का कार्यकाल छह महीने बचा हुआ था।

रविवार, 4 अगस्त 2024

सोशल मीडिया का किंग कौन... ?

 सोशल मीडिया का किंग कौन... ? 


भारतीय जनता पार्टी या निजी सर्वे कंपनी भले ही देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया का सबसे नम्बर वन नेता बता रही हो लेकिन सोशल मीडिया के यू-ट्यूब प्लेट फ़ार्म ने जुलाई के अंतिम पखवाड़े का जो आंकड़ा पेश किया है उसमें सोशल मीडिया का किंग कौन है यह साबित हो गया है।

आंकड़े पर गौर करे तो स्पष्ट है कि देश के लोग किसे सुनना पसंद कर रहे है और कौन किस पर भारी पड़ रहा है।

टॉप 10 का जो आँकड़ा यू-ट्यूब ने जारी किया है वह देश के मिजाज को समझने के लिए काफी है कि देश किस दिशा में जा रहा है।

यू ट्यूब का यह आंकड़ा 13 जुलाई से 31 जुलाई के बीच देखे जाने वाले दर्शकों का है।


इसमें भारतीय जनता पार्टी का यू ट्यूब चैनल  0.3 मिलियन दर्शकों के साथ दसवे नम्बर पर है। जबकि 9वे नम्बर पर अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के नेता को 0.4 मिलियन लोगों  ने देखा या सुना। आम आदमी पार्टी पंजाब ने अपने ही पार्टी के दिल्ली को पछाड़‌ते हुए 7वे नम्बर पर है तो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 6वे नंबर पर है।

पहले के चार स्थानों पर कांग्रेस पार्टी की धूम मची है दूसरे नम्बर पर 11.8 मिलियन लोगों के साथ यूथ कांग्रेस जमा हुआ है तो राहुल गांधी 12.7 मिलियन लोगों के साथ टॉप पर है। अब आप समय ही गये होगे कि सोशल मीडिया का किंग कौन है।

सोमवार, 22 जुलाई 2024

अब योगी भी हत्यारे को सिर में नचायेंगे

 योगी चले मोदी की चाल 

अब हत्यारे को सिर में नचायेंगे !



गुजरात में बलात्कारियों का स्वागत सत्कार करने वाली संघ से संस्कारित पार्टी का अब उत्तरप्रदेश  में नया कारनामा सामने आया है। एके 47 रायफल से प्रयागराज के सिविल लाईन में बसपा विधायक जवाहर यादव सहित तीन लोगों को मौत की घाट उतार चुके पूर्व विधायक उद‌यमान करवरिया को अब योगी आदित्यनाज ने रिहाई करवा दी है। उदयभान करवरिया को प्रयागराज की एक अदालत ने उम्र क़ैद की सजा सुनाई थी। हालांकि योगी आदित्यनाथ का यह पहला कारनामा नहीं है। इससे पहले अमरमणि त्रिपाठी को भी समयपूर्व रिहा कर दिया गया था। और गुजरात में दर्जनभर बलात्कारियों और हत्या के आरोपियों  को समय पूर्व रिहाई के लिए तो सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा था | तो क्या योगी  आदित्यनाथ भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राह पर चल पड़े हैं।

कहा जाता है कि योगी आदित्यनाथ  सरकार की सिफ़ारिश के बाद राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश की जेल में चार साल से आजीवन कारावास की सजा काट रहे पूर्व BJP विधायक उदय भान करवरिया की रिहाई का आदेश दे दिया  है।1996 में समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक जवाहर यादव की हत्या की गई थी. उसी मामले में चार साल पहले कोर्ट ने उदय भान को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अब राज्य सरकार ने समय से बहुत पहले ही रिहाई का आदेश दे दिया है. पूरा मामला टाइमलाइन के हिसाब से समझ लेते हैं.

कहा जाता है कि 13 अगस्त, 1996 को प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में कुछ लोगों ने मिलकर सपा विधायक की गाड़ी पर गोलीबारी कर दी थी. हमले में विधायक जवाहर यादव और दो अन्य लोगों की मौत हो गई. पुलिस जांच में पता चला कि हत्या राजनीतिक और व्यापारिक रंजिश के चलते की गई.फिर 4 नवंबर 2019 को प्रयागराज की एक अदालत ने उदय भान, उनके भाइयों सूरज भान और कपिल मुनि और उनके चाचा राम चंद्र को सपा विधायक जवाहर यादव की हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई. तीनों दोषी फिलहाल प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद हैं.


शुक्रवार, 19 जुलाई 2024

संघ- तिलमिलाहट कम, नौटंकी ज्यादा...

 प्रतिष्ठा का प्रश्न कहाँ 

आफत में अस्तित्व... 

तिलमिलाहट कम, नौटंकी ज्यादा...


कांग्रेस मुक्त भारत का नारा लगाते लगाते स्वयं को भगवान के रूप में प्रतिष्ठित करने के प्रयास में लगे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इन दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत के शब्द बाण की चर्चा खूब सुर्खियां बटोर रही है। तो इसकी वजह क्या है। क्या मोदी ने इन दस सालो में संघ की प्रतिष्ठा को इतना धूमिल कर दिया है कि मोहन भागवत नये सिरे से संघ की प्रतिष्ठा बचाने की कवायद कर रहे हैं या फिर स्वयं सेवकों  के ग़ुस्से पर पानी छिड़क रहे हैं!

पिछले दस सालों में यानी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर संघ के प्रचारक नरेद्र मोदी के बैठने के बाद संघ और उसके अनुषंकिक संगठनों की गतिविधियों पर नजर डाले तो यह साफ़ दिखाई देता है कि कांग्रेस मुक्त नारे  से खुश संघ के तमाम अनुशंकिक संगठनों ने नरेंद्र मोदी के आगे स्वयं को नतमस्तक कर लिया था।

पचाल साल तक बीजेपी की सरकार  बने रहने का सपना इतना बड़ा  हो गया कि संघ के उद्देश्य को तिलांजलि दे दी गई। निजीकरण से लेकर तीन कृषि बिल हो या नोटबंदी से लेकर जीएसटी से होने वाली तकलीफ़,श्रम कानून से लेकर प्रधानमंत्री के हर घोषणा पर संघ ने यही सोचकर चुप्पी ओढ़ ली  कि  नरेंद्र मोदी का हर कदम हिन्दू राष्ट्र की ओर उठ रहा है?

संघ तो बीजेपी  के 240 सीट आने पर भी आँखें नहीं खोलता यदि सत्ता जाने के अंदेशे में सर्वाधिक ख़तरा संघ के स्वयंसेवकों को ही है यह बात स्वयंसेवक जोर-शोर से नहीं उठाते ।

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता का ऐसा चकाचौंध खड़ा कर दिया था कि संघ प्रमुख की आँखें चौधियां गई थी, उन्हें सत्ता और कारपोरेट के गठजोड़ से मंह‌गाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोग दिखाई ही नहीं दे रहे थे। झूठ और अफवाह की जिस राजनीति के आसरे नफरत का बीज बोकर राजनीति साधी जा रही थी, वह सब कुछ संघ को अपने अनुकूल लग रहा था कहा जाय तो भी गलत नहीं होगा ?

लेकिन राइल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा, भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में जिस तरह से संघ पर सीधा प्रहार किया और आलोचना करने लगे, संघ ने तब भी इसकी परवाह इसलिए नहीं की थी, क्योकि उन्हें लगता रहा कि नरेंद्र मोदी ने जब दावा किया है तो 400 सीट न सहीं 350 सीट तो आ ही जायेगी।

लेकिन जब परिणाम आये तो स्वयं सेवकों की बेचैनी बढ़ गई । सत्ता जाने के बाद के ख़तरे दिखाई देने लगे तब संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मोदी के अहंकार और भगवान बनने को लेकर अपरोक्ष बोलना शुरू  किया है यानी अब भी नाम लेकर बोलने की हिम्मत नहीं है तो इसकी दो ही वजह है या तो नरेंद्र मोदी ने समूचे संघ पर क़ब्ज़ा जमा लिया है और इस ताक़त से उनके मन में  डर घर कर गया है या सत्ता की मलाई छोड़ा नहीं जा रहा।

लेकिन जिस तरह से इस दौर में संघ की प्रतिष्ठा को आँच पहुंची है वह अब स्वयंसेवकों में बेचैनी का सबब है। सत्ता के प्रभाव में संघ ने शाखाओं का विस्तार ही नहीं किया बल्कि भव्य और सुविधा युक्त कार्यालय  भी बने लेकिन उसने कभी सपने में नहीं सोचा रहा होगा कि जिस नरेंद्र मोदी की छवि बिग‌ड़‌ने की बात वह ऑर्गेनज़र में कर रहा है उस नरेंद्र मोदी ने तो संघ की छवि ही नहीं प्रतिष्ठा पर तो प्रश्न चिन्ह लगाए है बल्कि अस्तित्व पर भी सवालिया निशान लगा दिया है?