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रविवार, 15 सितंबर 2024

आदिवासी समाज ने नहीं उठाया शव...

आदिवासी समाज ने नहीं उठाया शव...

तेज होते आन्दोलन से सत्ता की नींद उड़ी 

 हत्या कर लाश दपनाकर पानी टंकी का निर्माण 


सीतापुर में आदिवासी युवक की हत्या करके उसकी लाश दफनाकर पानी टंकी का निर्माण करवाने वाले आरोपी ठेकेदार अभिषेक पाण्डेय को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर पाई है। तो दूसरी तरफ मृतक संदीप लकड़ा के शव को लेने से इंकार करते हुए उसके परिजनों ने धरना देना शुरू  कर दिया है।) मृतक के परिजनों को दो करोड़ मुआवजा और आरोपी की गिरफ्तारी की मोग के चलते संदीप का शव 10 दिनों से मर्क्युरी में रखा हुआ  है तो अब मृतक के परिजनों के समर्थन में आदिवासी समाज के साथ कांग्रेस भी खड़ी हो गई है।

दृश्यप फिल्म की तर्ज पर हुए इस हत्याकांड को लेकर कोग्रेस के दिग्गज नेता भी धरना स्थल पहुंचने लगे है जिसमें पूर्व उपमुख्यमंत्री ती एस सिंहदेव, पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के अलावा कांग्रेस  व गोडवान पार्टी के नेता शामिल है।

सीतापुर में राजमिस्त्री की हत्या व फिर दृश्यम मूवी की तर्ज पर उसके शव को ओवरहेड टैंक के नीचे दफन करने के मामले ने अब और तूल पकड़ लिया है। सर्व आदिवासी समाज ने सीएम के नाम लिखे एक पत्र में मुख्य आरोपी ठेकेदार अभिषेक पांडेय, उसके सहयोगी प्रत्यूष पांडेय व गौरी तिवारी के खिलाफ नामजद अपराध दर्ज कर तीनों को फांसी की सजा देने की मांग की है। वहीं उसके परिजन को 2 करोड़ रुपए का मुआवजा व शासकीय नौकरी देने की भी मांग की है।


सीएम के नाम लिखे गए पत्र में सर्व आदिवासी समाज ने कहा है संदीप का शव 75 दिन बाद मिला है। उन्होंने एसपी, एसडीओपी, थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर जांच कराने तथा तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की मांग की है। उन्होंने मृतक संदीप लकड़ा (Sandeep murder case) की पत्नी सलीमा लकड़ा को शासकीय नौकरी देने की मांग की है।

उन्होंने कहा है कि मुख्य आरोपी अभिषेक पांडेय के निजी खाते से आहरित करोड़ों रुपए का उपयोग इस प्रकरण को दबाने में इस्तेमाल किया गया है। इसकी जांच कर संबंधितों के ऊपर एफआईआर दर्ज किया जाए

अमरजीत भगत के मुताबिक परिजनों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी गिरफ्तार नहीं होता पार्थिव शरीर को नहीं लेंगे. जबकि पुलिस प्रशासन अब तक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सका है.ऐसे में शव को इसी तरह से कब तक रखा जाएगा.इसलिए प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए.

सीतापुर के बेलजोरा निवासी राजमिस्त्री संदीप लकड़ा की नृशंस हत्या व शव दफन करने वाला मुख्य आरोपी ठेकेदार अभिषेक पांडेय अब तक गिरफ्तार  नहीं हुआ है। इसे लेकर आदिवासी समाज में आक्रोश है। वे सीतापुर रेस्ट हाउस के सामने 3 दिन से अनिश्चितकालीन आंदोलन पर बैठे हैं। वहीं परिजनों ने अब तक संदीप का शव का अंतिम संस्कार नहीं किया है। उनका कहना है कि जब तक मुख्य आरोपी नहीं पकड़ा जाता, वे शव नहीं लेंगे। इसी बीच सीतापुर थाने के टीआई जॉन प्रदीप लकड़ा व एक एसआई को हटा दिया गया है।

बुधवार, 30 जून 2021

अमरजीत की अकड़...

 

सत्ता का अपना चरित्र होता है, सत्ता का नशा भी सर चढ़कर बोलता है और कई बार तो सत्ता की कुर्सी में बैठते ही आदमी, अंधा, गूंगा और बहरा भी हो जाता है। लगता है छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के खाद्य मंत्री अमरजीत भगत ने महात्मा गांधी के तीन बंदरों को कुछ ज्यादा ही पढ़ लिये है या उस सिद्धांत को कुछ ज्यादा ही आत्मसात कर चुके है इसलिए उन्हें अब पत्रकारों के वे सवाल सुनाई नहीं देते जो जनसरोकार से जुड़े होते हैं, हम तीन करोड़ की कहानी की बात को बाद में बतायेंगे अभी तो हम शराब बंदी के सवाल पर खाद्य मंत्री अमरजीत भगत के जवाब पर ही चर्चा करना चाहते हैं।

छत्तीसगढ़ में शराब बंदी का दावा कर सत्ता में आई कांग्रेस सरकार को अब शराब बंदी को लेकर उठ रहे सवाल अच्छे नहीं लगते जबकि शराब की वजह से बढ़ते अपराध के आकड़े नई तरह की चिंता पैदा करने वाली है। औसतन हर महीने 40 से पचास मामले सामने आ रहे हैं, पारिवारिक कलह से लेकर हत्या, बलात्कार के मामले बढ़ते जा रहे है और महासमुंद के रेल पट्टी में अपनी पांच बेटियों के साथ एक महिला का सामूहिक आत्महत्या कोई कैसे भूल सकता है।

हालांकि प्रदेश के मुखिया भूपेश बघेल ने जनजागरण चलाने और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने शराब बंदी के सवाल पर कहा है कि अभी ढाई साल बचा है। ऐसे ही सवाल जब खाद्य मंत्री अमरजीत भगत से पूछा गया, कई बार पूछा गया लेकिन भगत को सुनाई नहीं दिया, उन्होंने सवाल सुनाई देने की बात कहकर अपने कदम आगे बढ़ा दिये। 

जब यह वीडियो वायरल हुआ तो भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने खाद्य मंत्री सहित पूरी सरकार पर हमला बोल दिया लेकिन सत्ता का अपनी चरित्र है। अमरजीत भगत ने जिस तरह से शराब बंदी के सवाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है उसमें हैरानी की बात नहीं है क्योंकि सत्ता में बैठे व्यक्ति का अपना अलग ही रवैया होता है, फिर अजीत जोगी के करीबी रहे अमरजीत भगत के बारे में कहा जाता है कि उनकी निगाह और महत्वाकांक्षा भी अलग तरह की है जोगी खेमे की राजनैतिक शैली का उन पर असर भी है और वे मौके का फायदा उठाने से चूकते भी नहीं है, यही वजह है कि उन्हें जब कांग्रेस अध्यक्ष की बजाय देर से मंत्री बनाया गया तो इसकी वजह टीएस बाबा का विरोधी बताया गया और कहा जाता है कि बाबा के खिलाफ कदम ताल करने में वे देर भी नहीं करते। अब गांवों में निजी अस्पताल के मामले में ही उनके बयान को देख लीजिए, उन्होंने किस तरह से मुख्यमंत्री को कमांडर बताते हुए बाबा को उसकी हैसियत समझाने की कोशिश की है यह सबके सामने है। तब देखना है कि सत्ता की अकड़ से अभी प्रदेश को और कितना और क्या-क्या देखना है।

मंगलवार, 12 अक्टूबर 2010

भटगांव में भीतरघात कांग्रेस को लगा आघात

विधायकद्वय कुलदीप जुनेजा, अमरजीत भगत तथा सूरजपुर के अब्दुल रसीद, वासु चक्रवर्ती और संजय पाठक?

भटगांव चुनाव में कांग्रेस की करारी शिकस्त ने न केवल कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष धनेन्द्र साहू बल्कि प्रभारी नारायण सामी के अस्तित्व पर ही सवाल उठाये हैं। ऐसे में भाजपा के प्रभारी बृजमोहन अग्रवाल ने कांग्रेसियों के सहयोग की बात कहकर कांग्रेसियों के गाल पर तमाचा जड़ा है जबकि भाजपा से पैसे लेकर भीतरघात करने वालों में विधायक द्वय कुलदीप जुनेजा, अमरजीत भगत के अलावा सूरजपुर के अब्दुल रसीद, शहर अध्यक्ष के दावेदार संजय पाठक, वासु चक्रवर्ती और अरुण भद्रा का नाम सुर्खियों में है।
वैसे तो छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पूरी तरह से गुटबाजी में उलझी हुई है। कहा जाता है कि राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर जिस तरह से संगठन को अपना पिछलग्गू और वसूलीबाज बनाया है उससे निष्ठावान कांग्रेसियों में हताशा है। भाजपा से सांठगांठ के आरोपों की एक वजह यह भी बताई जाती है कि मोतीलाल वोरा के बाद से जितने भी कांग्रेसी अध्यक्ष बने इन लोगों ने कभी भी भाजपा के खिलाफ बड़ा आंदोलन नहीं किया। हालत यह है कि कांग्रेस गुटबाजी में उलझ गई। दूसरे बड़े नेता विद्याचरण शुक्ल और अजीत जोगी की गुटबाजी है। दोनों ही छत्तीसगढ़ में मोतीलाल वोरा से यादा पकड़ रखते हैं लेकिन संगठन में इनकी नहीं चलती जिसकी वजह से एक दूसरे को नीचा दिखाने के जिम्मेदारी इन नेताओं के समर्थकों ने उठा रखी है। इनके बयान से लेकर एक-एक चाल पर गौर करें तो पता चलेगा कि अपने मतलब के लिए ये लोग कांग्रेस को गर्त पर पहुंचा सकते हैं।
भटगांव चुनाव इसका उदाहरण नहीं है इसके पहले रायपुर में नगर निगम के सभापति के चुनाव में भी भाजपा ने कांग्रेसियों को खरीदकर करारी शिकस्त दी थी। इस मामले में हुए लेन-देन की शिकायत पर जांच की नौटंकी भी हुई लेकिन लाचार प्रदेशाध्यक्ष धनेन्द्र साहू कुछ नहीं कर पाए। उनकी इन्हीं कमजोरी को भांपकर भटगांव चुनाव में कांग्रेस के लोगों ने भाजपा से पैसा लेकर जमकर भीतरघात किया। बताया जाता है कि बृजमोहन अग्रवाल ने रायपुर के कांग्रेसियों से हमेशा ही मधुर संबंध के चलते जीतते रहे हैं। उनके लिए कांग्रेसी भीतरघात करते रहे हैं। ऐसे में भटगांव चुनाव में जब उन्हें प्रभारी बनाया गया तो बृजमोहन अग्रवाल से संबंध रखने वाले शहर के कांग्रेसियों ने भटगांव में जाकर बैठ गए और सारी गतिविधियों की जानकारी भाजपा तक पहुंचने लगी।
इधर इस बात की शिकायत प्रदेशाध्यक्ष धनेन्द्र साहू से की गई है जिसमें विधायक कुलदीप जुनेजा और अमरजीत भगत के क्रियाकलापों पर न केवल सवाल उठाए गए हैं बल्कि उन पर लेन देन के आरोप भी लगे हैं। शिकायत कर्ताओं ने यहां तक कहा है कि इन दोनों विधायकों की जिन बूथों पर डयूटी लगाई गई थी वहां एजेंट ही नहीं बैठाए गए या भाजपा से सांठगांठ कर भाजपा के एजेंट ही बिठा दिए गए। शिकायत में महल विरोधी रहे सूरजपुर के अब्दुल रसीद के अलावा वासु चक्रवर्ती, संजय पाठक और अरुण भद्रा पर भी बृजमोहन अग्रवाल से मधुर संबंध के चलते भीतरघात करने और लेन देन का आरोप लगाया गया है।
इधर विधायक द्वय से पूछताछ की कोशिश की गई लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे जबकि बाकी ने इसे छवि धूमिल करने वाला बताया। इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के सूत्रों के मुताबिक उन तक भीतरघातियों की शिकायत तो पहुंच गई है लेकिन वे अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश में यादा ध्यान दे रहे हैं। हालांकि यह भी चर्चा है कि इस बार भीतरघातियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस में जबरदस्त बिखराव आएगा और इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ेगा।