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शुक्रवार, 20 जून 2025

सुनो…! ऑपरेशन सिंदूर जारी है…

सुनो…! ऑपरेशन सिंदूर जारी है…


 आपरेशन सिंदुर चल रहा हैं इसके समाप्त होने की  कोई अधिकृत घोषणा नहीं हुई मतलब आपरेशन सिंदुर के चलते तीन देशों की यात्रा भी हो गई और  ट्रंप से 
35 मिनिट की बातचीत भी हो गई। और ईधर आपरेशन सिंदुर चल रहा है और ऊधर असीम मुनीर का मजे में अमेरिका दौरा भी चल रहा हैं, लंच भी हो ही गया। कितना गंभीर आपरेशन हैं ये पाकिस्तान को कोई परेशानी नहीं फिर भी चल रहा है और तो और ऐसा भी चल रहा हैं कि मानो कोई बाई पास सर्जरी चल रही हो एकदम खामोशी से…

हैरानी हुई कि आख़िर ऑपरेशन सिंदूर के बीच ये सब हो क्या रहा है,इमेज तो सीज फ़ायर से ख़राब हुई ही है और अब जैसे ही मीडिया में खबर चली के पाकिस्तानी सेनापति मुनरो को ट्रंप ने लंच पर आमंत्रित किया है वैसे ही अमेरिका की पाकिस्तान को एक तरफा झुकाव वाली बात को गलत साबित करने के लिए और मोदी जी के विश्व गुरु चरित्र की रक्षा के लिए फोन कॉल का नॉरेटिव गढ़ा गया!

दरअसल् यह अर्ध सत्य रहा होगा !प्रधानमंत्री के फोन कॉल पर कभी विदेश मंत्रालय को ब्रीफिंग करते हुए नहीं देखा गया है !जब स्वयं प्रधानमंत्री छोटी-छोटी सी बातों के लिए ट्वीट करते है ,,मन की बात करते हैं , फिर इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके व्यक्तिगत वार्तालाप पर विदेश सचिव कोई वक्तव्य दे यह बात हजम नहीं होती!

तीसरी बात यह है यह सामान्य शिष्टाचार के खिलाफ है क्योंकि प्रधानमंत्री की किसी नेता के साथ हुई व्यक्तिगत बातचीत को विदेश मंत्रालय के रिकॉर्ड पर रखा जाए! विदेश सचिव सरकारके एक विभाग  अधिकारी  मात्र है प्रधानमंत्री की बात यदि विदेश मंत्री कहते केंद्रीय मंत्री परिषद की तरफ से कही जाती तो वह सरकार की बात होती तो ज्यादा असर कारक होती!

 अमेरिका में सिर्फ पाकिस्तान  के सेनापति को जिस तरह ग्लोरिफाई किया गया था लंच की डिप्लोमेसी से उसको न्यूट्रल करने के लिए यह नॉरेटिव घड़ा गया!

दरअसल श्रीमान ट्रंप ने फोन तो किया होगा लेकिन माय डियर फ्रेंड को फोन में उन्होने स्पष्ट रूप से अमेरिका आमंत्रित किया  था कि वह g7 समिट के बाद अमेरिका होते हुए भारत आए और जो  पाक सेनापति के साथ लंच था वह भारत के प्रधानमंत्री पाकिस्तान के सेनापति और अमेरिका के राष्ट्रपति एक साथ करें! 

इस डिप्लोमेसी की वजह थी एक तो ट्रंप यह स्थापित करना चाहते थे की मध्यस्थता उनकी वजह से हुई हुई है दूसरी पाकिस्तान के सेनापति ने उन्हें नोबेल पीस प्राइज के लिए नामांकित किया है अगर भारत के प्रधानमंत्री भी  वहां उपस्थित होते हैं तो शायद इस पीस प्राइज के लिए उनके प्रतिनिधित्व को ज्यादा मान्यता   मिलने के अवसर थे !

बीजेपी की आईटी सेल लगातार एक नॉरेटिव स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि ईरान पर पाकिस्तान आक्रमण करें या ईरान पर अमेरिका जो आक्रमण करेगा उसमें पाकिस्तान के हवाई अड्डा का इस्तेमाल किया जा सके इसके लिए पाकिस्तान के सेनापति को बुलाया गया था! 

पाकिस्तान खुलकर ईरान के साथ है वह उसकी मजबूरी भी है क्योंकि उसे अरब देशों का साथ चाहिए और मुस्लिम कंट्री का भी! ईरान उसका स्वाभाविक दोस्त है और हर बार ईरान पाकिस्तान के साथ रहा है! 

जिओ पॉलिटिक्स की भी बात करें, तो चीन तुर्की जैसे देश जो खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़े थे वह ईरान के समर्थन में है ऐसे में पाकिस्तान अमेरिका के दबाव में ईरान पर हमले की इजाजत दे दे इस नरेटीव में दम नहीं लगता!

दूसरा बीजेपी के दावों की पोल अमेरिका ने फिर खोल दी , जब विदेश सचिव के वक्तव्य के 24 घंटे के पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर एक बार बयान दिया कि भारत पाक युद्ध को न्यूक्लियर व्यवहार से बचने के लिए उनकी मध्यस्थ की बहुत बड़ी भूमिका थी!

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है जिस फोन की बात की गई है , उसके संदर्भ में अमेरिका से किसी प्रकार की पुष्टि नहीं की गई है !

जब साहेब 35 मिनट तक लालआंख कर कर ट्रंप को धमका सकते हैं, तो क्या कारण है ट्रंप के एक बार फिर बयान देने के बाद प्रधानमंत्री भी खामोश है विदेश मंत्री भी और तथाकथित विशेषज्ञों के अनुसार भारत का सफलतम विदेश मंत्रालय भी!

अमेरिका की स्पष्ट डिप्लोमेसी है उसे साउथ एशिया में अपना अड्डों के लिए पाकिस्तान चाहिए और रूस की नाक में नकल डालने के लिए अफगानिस्तान में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के लिए बलूचिस्तान में अपनी मनमानी चाहिए! पाक अमेरिका को क्यों प्रिय है , क्योंकि वह अमेरिका के बि हाफ पर ही आतंकवादी गतिविधियों को मॉनिटर करता है! 

चीन के लिए पाकिस्तान व्यापारिक मजबूरी है क्योंकि पाकिस्तान से होकर उसके ट्रेड का एक बहुत बड़ा रास्ता गुजरता है और पाकिस्तान में लगभग सरेंडर की मुद्रा में उसे चीन को सौंप रखा है!

अमेरिका जानता है भारत और चीन के बीच में बहुत सारे विवाद है इसलिए हथियारों की होड़ में चीन भारत को मदद नहीं करेगा और रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा  होने के कारण वैसे ही निर्माण क्षमता में बहुत पीछे हो गया है ऐसे में अमेरिका ही एकमात्र ऐसा प्रतिद्वंदी है जिसे भारत में बाजार के अवसर प्राप्त हो सकते हैं भारत एक बहुत बड़ा उपभोक्ता बाजार है और हथियारों के बाजार के लिए एक उपयुक्त ग्राहक! इसलिए अमेरिका की नीति भारत को बैलेंस करने की भी है!

भाजपा का थिंक टैंक इस वक्त घबराया हुआ है, क्योंकि जिस तरह इन दिनों मोदी जी की वैश्विक छवि को डेंट लगा है विश्व गुरु की छवि आहत हुई है और सीज फायर करने के बाद , फिर ट्रंप के आगे घुटने देखने के बाद और सबसे बड़ी बात तो यह है पहलगाम और पुलवामा का आतंकवादियों पर साहेब के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलता! इन सब बातों ने उनके परसेप्शन की हवा निकाल दी है और बुरी तरह बेचैनी महसूस करती हुई उनके आई टी सेल इस तरह रोज नए-नए झूठ नरेटिव गढ़कर सोशल मीडिया और गोदी मीडिया के माध्यम से उस आभामंडल को बचाए रखने की कोशिश कर रही है!(साभार)

शुक्रवार, 23 मई 2025

स्वाभिमान और सिंदूर…

 स्वाभिमान और सिंदूर…


अमेरिका की दादागिरी किसी से छिपा नहीं है और ट्रंप ने दोबारा सत्ता सँभालते ही जिस तरह से अति मचाना शुरू किया है, उसके आगे मोदी सत्ता की चुप्पी भी कम हैरान करने वाली नहीं है

ऐसा शायद इतिहास में पहली बार हो रहा है कि ट्रंप की दादागिरी पर भारत ख़ामोश है और वह भारत की खामोशी का फ़ायदा उठाकर देश की बेइज्जति करने आमादा है

भारतीयों को हथकड़ी लगाने वाली बात को जायज़ ठहराने वाले शायद भारत-पाक के बीच सीजफ़ायर वाले ट्रंप के फ़ैसले को भी अपनी कुतर्कों से जायज़ ठहरा दे ?

लेकिन सवाल तब उठता है जब ट्रंप की दादागिरी पर चीन और फ़्रांस के नेता माकूल जवाब देकर ट्रंप को घुटने में ले आते है लेकिन मोदी सत्ता अब भी ख़ामोश है 

और अब तो साउथ अफ़्रीका जैसे देश भी ट्रंप को जवाब देने लग गये तब जो  फ़ेसबुक में चल रहा है… या सोशल मीडिया में सुर्ख़ी बटोरने वाले इन सवालों को समझे…

*दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति का स्वाभिमान और हमारे प्रधानमंत्री जी की रगों में दौड़ता सिंदूर*


★ कल "व्हाइट हाउस" में अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प और साउथ अफ़्रीक़ा के राष्ट्रपति रामाफोसा के बीच "जेलेन्सकी" वाली 'जूतम पैजार' हो गई..


★ ट्रंप Tv स्क्रीन लगा कर पूरी तैयारी के साथ बैठा था ताकि साउथ अफ़्रीक़ा के राष्ट्रपति की बे-'इज़्ज़ती की जाए..


★ ट्रंप ने रामाफोसा को साउथ अफ़्रीक़ा के कुछ VDO दिखाते हुए बोला कि तुम्हारे देश में काले लोग गोरों का क़त्ल कर रहे हैं..ट्रंप का ऐसा कहना ग़लत था


★ राष्ट्रपति रामाफोसा ने बोला कि VDO फ़र्ज़ी है..बल्कि साउथ अफ़्रीक़ा में काले लोगों का ही क़त्ल हुआ है..ट्रम्प को झूटा बोल दिया😃


◆ राष्ट्रपति रामाफोसा ने ट्रम्प को बोला कि मेरे पास आप को देने के लिए 3200 करोड़ का हवाई जहाज़ नहीं है..


◆ क़तर ने ट्रम्प को 3200 करोड़ का हवाई जहाज़ दिया था, यह उस पर तंज़ था🤣


◆ ट्रम्प एक बार सकपका गया था..संभलते हुए ट्रम्प ने राष्ट्रपति रामाफोसा को कहा कि अगर आप 3200 करोड़ का हवाई जहाज़ देंगे तो अमरीका क़ुबूल करेगा🔔🔔🔔


👉 राष्ट्रपति रामाफोसा साहब, हम भारतवासी आप को सलाम करते हैं..क्योंकि ट्रम्प जैसे बदतमीज़ को आप ने सही सबक़ सिखाया..


👉 राष्ट्रपति रामाफोसा साहब, आप ने अपने देश की 'इज़्ज़त, ग़ैरत और आज़ादी का समझौता नहीं किया


✋ भक्तों एक भारत के PM मोदी जी हैं ट्रम्प रोज़ मोदी जी को ज़लील करता है..पर मोदी जी के मुंह से एक लफ़्ज़ नहीं निकलता है..


👉 ख़ून में ख़ुद दारी दौड़नी चाहिए  ख़ून में सिंदूर नहीं दौड़ता... और हां व्यापार भी नहीं दौड़ना चाहिए;;;;;



इस तस्वीर से युद्ध नहीं चुनाव जीते जाते हैं

 इस तस्वीर से युद्ध नहीं चुनाव जीते जाते हैं


पाकिस्तान की पीठ पर सवार होकर अमेरिका ने जो सीजफ़ायर का एलान किया, उसे क्या कोई भुला पाएगा

चीन ने पाकिस्तान की संप्रभुता की आड़ लेकर भारत को धमकाया क्या उसे नज़र अन्दाज़ किया जा सकता है

लेकिन यदि खून की जगह ठंडा तासीर वाला सिंदूर बहे तब क्या किया जा सकता है 

ऐसे में अब यदि राम को लायें है कि तर्ज़ पर हर रेलवे की टिकिट पर और चौक चौराहों में सेना की वर्दी पहने मोदी दिखे तो इसका मतलब क्या है यह बताने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए 

ऐसे में राजेश जे जैन ने फ़ेसबुक में जो लिखा वह आप भी पढ़िए..

ये कैसा खून है जो समय के साथ बदल जाता है ? कभी ये धंधा बन जाता है ,कभी व्यापार और आज तो  ये सिंदूर बन गया !! ट्रम्प के सामने ठंडा पड़  जाता है ! चाइना का नाम आते ही सूख  जाता है। चलिए मान लेते है.  गरम सिंदूर बन गया तो बताए कि पहलगाम के पीड़ितों के लिए आपने क्या किया ? लफ्फबाजी ! किसी को दिलासा देने की कोशिश की ? उनसे मिलकर सांत्वना के दो शब्द कहे ? बिलकुल नहीं ! हाँ नितीश कुमार के साथ ठिलवाई जरूर की।

राहुल गांधी दुरुस्त कह रहे है कि आपके खून में केमिकल रिएक्शन ' कैमेरा ' देखकर ही होने लगता है। अन्यथा तो आप सर्वदलीय बैठक से ही कल्टी मार जाते है। अगर यह खून वाकई रिएक्शन करता तो 22 अप्रैल को ही उबल जाता , विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री की ट्रोलिंग पर आपकी नींद उड़ा देता , सोफिया कुरैशी और सेना के अपमान के जिम्मेदार दोनों मंत्रियों को सड़क पर ला देता। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से खून ने कोई हरकत नहीं की !

तो अब थोड़ा विश्राम कीजिये  श्रीमान।  बातों की जलेबियाँ तलना बंद कीजिये। एक काम कीजिये ,  अपना ये होर्डिंग भी  उतरवा लीजिये , लोग मजाक बना रहे है  , हंसा हंसा कर जान लेंगे क्या ? इस तरह के इवेंट से अब आपके अंधभक्तो को भी कोफ़्त होने लगी है , आते जाते लोग उन्हें मुस्कुराकर देखते है।  इससे उनका खून जरूर उबल जाता है।

डॉ पंकज यादव ने जो लिखा…

कथा: एक जाबांज की...

22 अप्रैल को हुये कायर आतंकियों के हमले में जान गंवाने वाले बेगुनाहों की मौत का बदला लेने को हमारा वो वीर योद्धा पल-पल व्याकुल था, देश के इंटेलीजेंस फेल्योर पर उठ रहे सवालों के बीच वो नापाक आतंकियों को सबक सिखाने को व्याकुल होता ही जा रहा था, हालांकि आतंकी घटना के बाद उसने बिहार में जंग के मैदान से शब्दभेदी बाण छोड़े, पर इंतकाम की आग उसे चैन नहीं लेने दे रही थी। 


आखिरकार 06-07 मई, 2025 की आधी रात को वो घड़ी आई जब रडार परास्त तकनीकी का इस्तेमाल करते हुये वो अकेला ही लड़ाकू विमान लेकर दुश्मन देश के आतंकी ठिकानों पर टूट पड़ा। खाकी वर्दी, काला चश्मा और कार्गो पहन हमारा वो वीर योद्धा उस रात एको एक आतंकी को नेस्तानाबूद कर देने को आतुर था, उसने पूरी ड्रेस पहन अपनी सभी जेबों में बम भर रखे थे, अपने पूरे विमान को गोला बारूद से फुल कर रखा था। दुश्मन खेमे में लड़ाकू विमान के घुसते ही उसने आतंकी ठिकानों पर बमबारी शुरु कर दी। धमाके पे धमाका, बूम-बूम की आवाज से दुश्मनों के होश उड़ गये, उन्होंने आकाश की ओर देखा तो वो जाबांज अकेला ही मोर्चे पर डटा था, कभी धाँय-धाँय, कभी धम-धम, कभी बूम-बूम करके जब उसने ब्लास्ट किये तो आतंकियों को सम्भलने का मौका भी नहीं मिला, एक-एक बम के धमाके के साथ सैकड़ों आतंकी ढेर हो रहे थे।


दुश्मनों ने भी अपने हथियार उठाये धाँय-धाँय, ठिचकियाऊँ-ठिचकियाऊँ करके एक के बाद कई प्रहार हमारे वीर योद्धा पर किये गये, लेकिन हमारे जाबांज ने उस दिन दुश्मनों की एक न चलने दी। सू-सांय, सू-सांय, घर्र-घर्र करते उसके लड़ाकू विमान ने दुश्मनों के हमले को फेल कर दिया। हमारे जाबांज योद्धा ने लगातार 2 घण्टे तक मौत बनकर दुश्मनों के सीने पर तांडव किया और फिर वो योद्धा आखिरकार 07 मई की अलसुबह अपने वतन वापस लौटा, लड़ाकू विमान स्टैंड पर खड़ा कर, हैलमेट हाथ में लेकर जब वो उतरा तो उसकी जाबांजी देखते ही बनती थी, तसवीर उसी वक्त की है। गौर से देख लो, हजारों सालों में एक बार पैदा होते हैं ऐसे वीर योद्धा। शत-शत नमन है हमारे देश के ऐसे वीर, जाबांज योध्दा को...