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शुक्रवार, 16 अगस्त 2024

चुनाव आयोग की घोषणा में सत्ता की बेशर्मी...

 चुनाव आयोग की घोषणा में सत्ता की बेशर्मी...


चुनाव आयोग ने हरियाणा और जम्मूकश्मीर में चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी, लेकिन इसी साल के अंत तक होने वाले दो अन्य राज्य महाराष्ट्र और झारखंड में भी विधानसमा के चुनाव होने है उसकी घोषणा कब होगी और राजनैतिक दलों को इन राज्यों में चुनाव प्रचार के लिए कितना समय दिया जायेगा अभी केवल अंदाजा ही लगाया जा सकता है। ऐसे में सवाल देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की उस दंभोक्ति का क्या जो एक देश-एक चुनाव को लेकर जनता में भ्रम पैदा करता रहा है।

यदि चार राज्यों के चुनाव की तारिखो  का एलान नहीं हो पा रहा है तो फिर एक राष्ट्र-एक चुनाव के सपने दिखाने का मतलब क्या निकाला जाना चाहिए।

दरअसल चुनाव आयोग की इस चुनावी एलान में मोदी सत्ता की बेशर्मी का वह खेल को उजागर कर दिया है जो राजनीति को अपने अनुकूल साधने में लगा है।

जम्मू कश्मीर में चुनाव दस साल बाद होंगे। वह भी सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख़ की वजह से। सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में चुनाव के लिए जो समय सीमा तय की थी , उसकी वजह से वहां चुनाव हो रहे हैं कहा जाय तो गलत नहीं होगा।

लेकिन हरियाणा और महाराष्ट्र में तो नवम्बर में हर हाल में नई सरकार का गठन हो जाना है तब सिर्फ हरियाणा में ही विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा क्या महाराष्ट्र में मोदी सत्ता को घोषणाओं के लिए समय देना नहीं है?

अब तक के रिकाई बताते हैं कि महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा एक साथ होते रही है और दोनों ही राज्यों में एनडीए या बीजेपी की सरकार भी है। तब एक ही साथ तारीख के एलान में इस बार क्या परेशानी हो गई। 

दोनों ही राज्यों में बीजेपी की हालत बेहद खराब होने का संकेत तो लोकसभा चुनाव के परिणाम ने दे दिया है तब क्या इस संकेत से डरी सत्ता ने यह खेल खेला है जिस पर चुनाव आयोग की मुहर लग गई है।

सवाल तो उठेंगे ही जब चुनाव आयोग लगातार सत्ता के अनुकुल तारीखों का एलान करेगा। हरियाणा में नवम्बर के पहले सप्ताह और महाराष्ट्र में नवम्बर  के आखरी सप्ताह में नई सरकार का गठन होना है?

जम्‍मू कश्‍मीर और हरियाणा में चुनावों का ऐलान कर दिया गया है. चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में जम्‍मू कश्‍मीर में तीन चरणों में 18 सितंबर से मतदान की घोषणा की है. वहीं हरियाणा में एक अक्‍टूबर को वोट डाले जाएंगे. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पहले चरण का मतदान 18 सितंबर को, दूसरे चरण का मतदान 25 सितंबर को और तीसरे चरण का मतदान एक अक्टूबर को होगा. वहीं मतगणना चार अक्टूबर को होगी. इसी तरह से हरियाणा में विधानसभा चुनाव के लिए एक अक्टूबर को मतदान और चार अक्टूबर को मतगणना होगी. 

मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त राजीव कुमार ने कहा कि जम्‍मू कश्‍मीर के लोग तस्‍वीर बदलना चाहते हैं. जम्‍मू कश्‍मीर के लोगों ने हिंसा को नकारा है. उन्‍होंने कहा कि 20 अगस्त को मतदाता लिस्ट जारी होगी. उन्‍होंने कहा कि चुनाव के लिए लोगों में ललक दिखी है. 


निर्वाचन आयोग को जम्मू-कश्मीर में 30 सितंबर से पहले विधानसभा चुनाव कराने थे. यह समय सीमा सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी. आयोग ने चुनाव संबंधी तैयारियों का जायजा लेने के लिए हाल में जम्मू-कश्मीर और हरियाणा का दौरा किया था. 

शुक्रवार, 12 जुलाई 2024

सगाई का खर्चा सरकारी खजाने से...

 सगाई का खर्चा सरकारी खजाने से...

आठ हजार रुपये प्रति प्लेट का खाना खिलाया..


ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब संघ और भाजपा के संस्कारितों ने सरकारी खजाने पर लूट मचाई हो। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद - धर्म - राजनैतिक सुचिता नैतिकता और बेहतर संस्कार । यही तो संघ का ध्येय वाक्य है।

लेकिन यह सब तभी तक है जब तक सत्ता न मिली हो, कुर्सी न मिली हो। और कुर्सी मिलते ही पैसों की भूख किसी आवारा पशु की तरह दिखः जाता है।

इलेक्ट्रान बॉण्ड, पीएम केचर फंड, नोट बंदी और उ‌द्योगपतियों के कर्ज माफ करने या राईट ऑफ़  करने के नाम पर वसूली का खेल किस तरह खेला गया यह किसी से छिपा नहीं है।




तब जम्मू कश्मीर  के उपराज्यपाल मनोज सिंहा ने यदि बेटे की सगाई का खर्चा जम्मू कश्मीर के खजाने से भर दिया तो फिर उनकी राष्ट्र‌वादिता पर सवाल क्यों ।

दरअसल इसकी शिकायत अब पीएमओ में की गई है कि मनोज सिंहा ने अपने बेटे की सगाई दिल्ली में की है। इस सगाई समारोह में सौ से अधिक वीआईपी मेहमान थे। जिसका केटरिंग का बिल क़रीब ग्यारह  लाख रुपये आया। यानी लगभग आठ हजार रुपये प्लेट। ये बिल जम्मू कश्मीर सरकार से भरवा दिया गया।

 पीएमओ से की गई शिकायत में वैसे तो कई तरह की शिकायत है लेकिन  गाजीपुर से सांसद रहे मनोज सिंहा के बारे में कहा जाता है कि वे छात्र जीवन से ही संघ और भाजपा का संस्कार लेते रहे हैं, और इसके परिणाम स्वरूप वे केद्र मैं मंत्री भी रहे तो उन्हें जम्मू कश्मीर का उपराज्यपाल की बनाया गया ।

सवाल कई है ख़ासकर  धर्म का चश्मा पहनाकर लूट मचाने का लेकिन सवाल पूछने वाले को यदि देश द्रोही का तमगा मिलने लगे तो...।

आप तय कीजिए  कि धर्म का  आड़ में किस तरह का खेल चल रहा है और कैसे संस्कार मिला या सिखाया गया है।




द वायर की रिपोर्ट के अनुसार अब्दुल्ला ने कहा, "चाहे उनके लिए खरीदे गए वाहन हों, किराए पर लिए गए निजी जेट हों या उनके मेहमानों पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये हों, एलजी जम्मू-कश्मीर को अपनी निजी जागीर समझते हैं, जो इस बात से स्पष्ट है कि कैसे यातायात को 25-30 मिनट तक रोक दिया जाता है ताकि वह बिना देरी के यात्रा कर सकें।"

एलजी के तत्कालीन प्रधान सचिव नीतीश्वर कुमार को संबोधित और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए 6 अप्रैल, 2021 के एक कथित आधिकारिक संचार के अनुसार, नई दिल्ली में जम्मू और कश्मीर के रेजिडेंट कमिश्नर ने एलजी सिन्हा के कार्यालय के निर्देशों का पालन करते हुए 2 फरवरी, 2021 को 7 अकबर रोड पर दोपहर के भोजन, रात के खाने और सजावट की व्यवस्था की थी।

पत्र में कहा गया है, "इस निजी समारोह के लिए हमारे कार्यालय द्वारा कुल 10,71,605 रुपये का भुगतान किया गया। हम अनुरोध करते हैं कि इस मुद्दे को हल करने के लिए यह राशि राजकोष में जमा कर दी जाए।"

जम्मू-कश्मीर के पूर्व कानून सचिव अशरफ मीर ने इसकी आलोचना करते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश के प्रमुख द्वारा घोर उल्लंघन और सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बताया है।

मीर ने द वायर को बताया, "चूंकि जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए भारत की समेकित निधि से धन को संसद द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए और राज्य कल्याण या सार्वजनिक हित के उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। व्यक्तिगत कार्य इस श्रेणी में नहीं आते हैं।"