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रविवार, 11 जुलाई 2021

कैसे निपटे जयचंद से...

 

छत्तीसगढ़ के चर्चित छापेमारी में जिस तरह से जयचंदों ने सरकार की मंशा को फेल किया है उसके बाद सरकार के माथे पर चिंता की लकीर साफ दिखाई देने लगा है। और वह फूंक-फूंक कर कदम उठा रही है।

निलंबित एडीजी जीपी सिंह के ठिकानों पर एंटी करप्शन ब्यूरों द्वारा की गई छापेमारी ही लिक नहीं हुई बल्कि राजद्रोह की धारा के तहत अपराध दर्ज करने की बात भी लिक हो गई। हालांकि सरकार ने जीपी सिंह को घेरने के लिए चौतरफा इंतजाम करते हुए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दायर कर दिया है लेकिन जिस तरह से जीपी सिंह ने सरकार की गोपनीयता की पोल खोल दी है वह सत्ता के लिए भविष्य में चुनौती साबित होगी।

पन्द्रह साल के रमन राज के बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस ने विपक्ष की भूमिका के दौरान सैकड़ों घपले घोटाले का आरोप लगाया था और सत्ता में आते ही कई घोटालों की जांच भी शुरु कर दी लेकिन जयचंदों की वजह से सरकार को कई मामलों में मुंह की खानी पड़ी है। चर्चित नान घोटाले हो या डीकेएस सुपर स्पेशलिटी का मामला हो सरकार अभी तक इन मामलों में ज्यादा कुछ नहीं कर पाई है।  इसी तरह के कई मामले में सरकार को अपने कदम पीछे हटाना पड़ा है।

हालांकि जीपी सिंह के छापेमारी की खबर लीक होने की खबर से सरकार सचेत हो गई है लेकिन जिस तरह से सत्ता के खिलाफ षडय़ंत्र के कागजात मिलने का दावा किया जा रहा है उसके बाद यह कहना कठिन नहीं है कि पंद्रह साल की सरकार में डॉ. रमन सिंह व अन्य भाजपाईयों की अधिकारियों-कर्मचारियों में गहरी घुसपैठ है और सरकार के हर कदम की जानकारी उसे अमलीजामा पहनाने के पहले ही विपक्ष को खबर लग जाती है।

हालांकि इस पूरे खेल को देखे तो जिस तरह से भाजपाई ठेकेदारों ने मंत्रियों को घेर रखा है वह भी सूचना लीक होने का माध्यम बनता जा रहा है। पंद्रह साल के निर्वासन के बाद मिली सत्ता में पैसों की भूख की वजह से भाजपाई ठेकेदारों का मंत्री बंगले में न केवल, बेरोकटोक आवाजाही है बल्कि कुछ तो मंत्रियों के कीचन केबिनेट का हिस्सा भी बन चुके हैं। तब सवाल यही है कि सत्ता इन जयचंदों से कैसे निपटेगी।

मंगलवार, 6 जुलाई 2021

एडीजी की ताकत के पीछे भ्रष्ट राजनीति...

 

एडीजी जीपी सिंह की कहानी को समझने से पहले सत्ता माफिया और अफसरों के गठजोड़ में पनप रहे अपराध को समझना होगा। सत्ता माफिया और अफसर के इस गठजोड़ ने छत्तीसगढ़ में नया इतिहास रचा है। और यह सब खुलासा एडीजी सिंह के यहां छापे से सामने आया है। 

सवाल यह नहीं है कि एडीजी सिंह के घर से क्या-क्या मिला क्योंकि छत्तीसगढ़ में ऐसे अफसरों की लंबी फेहरिश्त हैं जिन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अरबों-खरबों की संपत्ति अर्जित की और जिन्हें आज भी सत्ता का संरक्षण मिला हुआ है।  एसीबी यानी एंटी करप्शन ब्यूरों के पास अभी भी उन 90 अफसरों की सूची है जिनके पास अनुपातहीन संपत्ति जब्त की गई लेकिन वे आज भी महत्वपूर्ण और मलाईदार पदों पर विराजमान है तो यह सब सत्ता के संरक्षण के बगैर संभव नहीं है। 

ऐसे में एडीजी सिंह के खिलाफ भी कोई बड़ी कार्रवाई होगी या अंजाम सजा तक पहुंच पायेगा यह कहना मुश्किल है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय जब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के अफसरों का बंटवारा हुआ तो बहुत से भ्रष्ट अफसर छत्तीसगढ़ आ गये थे। उनमें वे अफसर भी थे जिनका मध्यप्रदेश के समय चर्चित घोटालों में नाम था उनमें से कई अफसर छत्तीसगढ़ में भी भ्रष्टाचार करते हुए मजे से नौकरी बजाते रिटायर्ड हो गए।

तीन साल की जोगी सत्ता में सत्ता, अफसर और माफिया के गठजोड़ के किस्से आज भी हवा में इसलिए तैर रहे हैं क्योंकि जिन डेढ़ दर्जन अफसरों को बर्खास्त करने, उनकी काली करतूत को  उजागर कर सजा दिलाने का दावा कर सत्ता में आई डॉ. रमन सिंह की सरकार में भी उन्हीं अफसरों का बोलबाला रहा। मुकेश गुप्ता, कल्लूरी तो पुलिस विभाग के हैं। आईएएस में आरपी मंडल से लेकर कितने ही नाम थे जो डॉ. रमन सिंह की सरकार में भी मजे से रहे।

डॉ. रमन सिंह की सरकार में एडीजी जीपी सिंह की गतिविधियों के लेकर सत्ता पर सवाल उठे लेकिन गठजोड़ ने सब ध्वस्त कर दिया, बिलासपुर के एसपी राहुल शर्मा के मर्डर केस जिसे आत्महत्या केस भी बताया जाता है उसका परिणाम कौन भूल सकता है। क्लोजर रिपोर्ट पर बवाल मचाने वाली कांग्रेस ने क्या कभी इस केस की फाईल फिर खुलवाई? नान घोटाले से लेकर कितने ही घोटाले का क्या हुआ।

भ्रष्ट अफसर नेता और माफिया का गठजोड़ क्या आज दिखाई नहीं दे रहा है कि वे सत्ता तक किस तरह पहुंच गए है। हाईकोर्ट ने 90 ऐसे  भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है लेकिन क्या सरकार में हिम्मत है कि वे ऐसे भ्रष्ट अफसरों को मलाईदार पद से हटा सके। बल्कि कई अफसर तो भूपेश सरकार की गोद में बैठे है। तब एडीजी जीपी सिंह को लेकर मचा बवाल का क्या अर्थ है जबकि अभी तक उसे निलंबित तक नहीं किया गया है।