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बुधवार, 24 नवंबर 2010

छत्तीसगढ़ में भी कई राजा

मंत्रियों-अधिकारियों व नेताओं की संपत्ति  कई गुणा हुई
 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में अंतत: केंद्रीय मंत्री राजा को इस्तीफा देना पड़ा लेकि छत्तीसगढ़ में भी कई मंत्री व अधिकारी हैं जिन्होंने रातों रात अपनी संपत्ति कई गुणा कर ली। पर्यटन में रोपवे घोटाले हो या पीडब्ल्यूडी में सड़क घोटाले, शिक्षा विभाग स्वास्थ्य, खनिज ऊर्जा में तो घोटाले की फेहरिस्त है लेकिन इस ओर न तो विपक्षी कांग्रेस का ही ध्यान है और न ही जांच एजेंसी की रूचि ही है।
छत्तीसगढ़ राय बनने के बाद यदि भाजपा द्वारा अजीत जोगी सरकार के घोटाले की फेहरिस्त उजागर की गई और सत्ता में आते ही इन घोटालों पर से पर्दा नहीं उठाया गया तो इसके पीछे भाजपा सरकार में मंत्रियों व अधिकारियों की करतूतें हैं जिन्होंने 5-7 सालों में ही अपनी संपत्ति कई गुणा बढ़ा ली। आश्चर्य का विषय तो यह है कि इन मामलों में कांग्रेस की भूमिका भी संदिग्ध होने लगी है। रमन सरकार के सर्वादिक चर्चित घोटाले में स्वास्थ्य विभाग का घोटाला है जिसके आरोपियों को सरकार संरक्षण दे रही है। करोड़ों रुपये के डाफ्टर खरीदी के अलावा पूर्व स्वास्थ्य सचिव बाबूलाल अग्रवाल के मामले में भी रमन सरकार कटघरे में है। आनन-फानन में बहाली की वजह सीए हाऊस पर लेन-देन का आरोप भी लग चुका है। यहां दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभागों मेंहुए घोटाले की कहानी को भी बेशर्मी से दबाई गई। बृजमोहन अग्रवाल जब गृहमंत्री थे तब तो उनके भाईयों पर कई गंभीर आरोप ही न लगे बल्कि आम चर्चा यह रही कि उनके भाईयों ने इस दौरान गृहमंत्री की भूमिका निभाते रहे हैं और शहर ही नहीं कई क्षेत्रों में विवादास्पद जमीनों की खरीदी भी की। कबाड़ कांड के हीरो रहे कैलाश अग्रवाल भी बृजमोहन के रिश्तेदार हैं और उन पर चोरी का लोहा और ट्रक गायब करने तक के आरोप लगे हैं। संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में तो बृजमोहन अग्रवाल के लाड़ले भाई योगेश अग्रवाल पर न केवल कलाकारों को बुलाने एवज में दलाली लेने बल्कि मनमानी चलानेका भी आरोप लगता रहा है। बृजमोहन के एक अन्य विभाग पर्यटन में तो विवादास्पद अफसरों को खोज खोज के दूसरे विभाग से लाया गया। अजय श्रीवास्तव पर तो सिमगां कांड तक के आरोप रहे हैं और उसे बृजमोहन अग्रवाल ने दुग्ध संघ से पुलिस और फिर पर्यटन में लाया। पर्यटन में सिर्फ विवादास्पद अधिकारयिों की नियुक्ति का ही मामल नहीं है यहां अरपों रुपये के घोटाले की फाइलें जांच के अभाव में धूल खा रही हैं। स्टेशनरी घोटाला हो या मोटल निर्माण में घोटाले की बात हो। मोटलों के बाउण्ड्री से लेकर खास घोटाले यहां सुर्खियों में रहे हैं। तिरथगढ़ में रोप वे बनाने के लिए कानून बनाने के लिए बगैर नाम पते के किसी शुक्ला को 2 करोड़ दे दिया गया और इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
बृजमोहन अग्रवाल के एक अन्य विभाग शिक्षा विभाग में तो भर्ती से लेकर तबादले और पदोन्नति में भी जमकर कमीशन खोरी की चर्चा रही। यही चर्चा पीडब्ल्यूडी में भी यह भी बृजमोहन अग्रवाल का ही विभाग है। सड़क निर्माण की इस एजेंसी में घटिया सड़क के एवज में करोड़ों रुपये खाये गये यही नहीं डामर घोटाले के आरोपी को भी बचा लिया गया। बृजमोहन ही नहीं अजय चंद्राकर पर भी करोड़ों रुपये अर्जित करने के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश सरकार के कई मंत्री व अधिकारी है जिन पर खुलेआम डंके की चोट पर भ्रष्टाचार करने के आरोप हैं।

सोमवार, 27 सितंबर 2010

मोहन ने ताकत दिखाई पर्यटन में फिर बुराई

अजय श्रीवास्तव हफ्तेभर में ही बहाल
 आईएफएस तपेश झा ने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस पर्यटन विभाग को वे सुधारने की कोशिश में लगे हैं वहां मंत्री के प्रभाव से जमें लोगों को हटाना आसान नहीं है तभी तो निलंबन के हफ्ता भर के भीतर ही अजय श्रीवास्तव बहाल कर दिए गए और कई लोगों ने अपना तबादला रुकवा लिया।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल में जिस तरह से भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है वह अंयंत्र देखने को नहीं मिलेगा। बदनाम व विवादास्पद अधिकारियों की करतूत और भाई-भतीजावाद ने पर्यटन मंडल को दिवालिये के कगार पर खड़ा कर दिया है। एक से बढक़र एक घोटाले ने पर्यटन विभाग के मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को भी कटघरे पर खड़ा कर दिया है।
यही वजह है कि जब यहां वन सेवा के अधिकारी तपेश झा को जब पर्यटन मंडल में लाया गया तो उन्होंने आते ही सबसे पहले पीआरओ अजय श्रीवास्तव को निलंबित किया वहीं सालों से जमें एमजी श्रीवास्तव को भी मंत्रालय चलता किया इसके अलावा आधा दर्जन लोगों के तबादले किए गए। अभी यह आदेश जारी ही हुआ था कि पर्यटन मंडल में हड़कम्प मच गया चूंकि अजय श्रीवास्तव को मंत्री का खास माना जाता है और दुग्ध संघ के मामूली कर्मचारी से पहले पुलिस और फिर पर्यटन में पीआरओं के पद पर नियुक्ति मंत्री के प्रभाव से ही माना जाता है इसलिए इस निलंबन आदेश से हड़कम्प मचना स्वाभाविक था। जबकि कई तरह के आरोपों से घिरे एमजी श्रीवास्तव को भी पर्यटन में हो रहे गड़बड़ झाले के लिए जिम्मेदार माना जाता है इसलिए भी यह माना जाने लगा कि पर्यटन मंडल को सुदृढ़ करने की दिशा में तपेश झा ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
बताया जाता है कि यह आदेश को जारी हुए एक हफ्ते भी नहीं बिता कि अजय श्रीवास्तव बहाल कर दिए गए जबकि कई लोगों के तबादले रोक दिए गए। सूत्रों के मुताबिक इस कार्रवाई में मंत्री की रुचि बताई जा रही है। इधर इस संबंध में जब तपेश झा से संपर्क किया गया तो उन्होंने इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार करते हुए कहा कि यह विभागीय मामला है। बहरहाल इस मामले से यह चर्चा है कि बृजमोहन अग्रवाल की रूचि के चलते पर्यटन मंडल में बदनाम व विवादास्पद लोगों का जमावड़ा है और जिस स्तर पर यहां घोटाले हो रहे हैं उससे पर्यटन मंडल दिवालिया होने के कगार पर पहुंच गया है।

गुरुवार, 16 सितंबर 2010

पर्यटन में मोहन समर्थकों पर कहर

देर से ही सही पर्यटन विभाग में घोटालेबाजों और विवादास्पद अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी शुरु हो गई है। पर्यटन मंडल को करोडों रुपए चूना लगने के बाद अधिकारियों की नींद खुली है और कहा जाता है कि पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के दबाव के बाद भी एमजी श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव सहित आधा आधा दर्जन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है।
उल्लेखनीय है कि पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के कार्यकाल में पर्यटन मंडल में जबरदस्त घपलेबाजी का खेल खेला गया। रोप वे कानून के नाम पर बगैर नाम पता के किसी को दो करोड़ दे दिया गया तो मोटल निर्माण, बाउंड्री निर्माण और घास लगाने के ठेके में करोड़ों रुपए का व्यारा-न्यारा हुआ है। यही नहीं प्रचार-प्रसार और विज्ञापन के नाम पर भी पर्यटन में जबरदस्त घोटाले हुए हैं। बहुचर्चित स्टेशनरी घोटाले में तो आरोपी अफसर संजय सिंह पर रिकवरी निकालने के अलावा कोई कार्रवाई करने की बजाय उन्हें परिवहन जैसे कमाऊ विभाग में भेज दिया गया।
इसी तरह भौमिक, एमजी श्रीवास्तव और अजय श्रीवास्तव को पर्यटन मंत्री का खास होने की वजह से अब तक बचाए जाने की चर्चा रही है। सूत्रों की माने तो एमजी श्रीवास्तव नामक अधिकारी पर कई गंभीर आरोप भी लगे। चरित्र के अलावा धन कमाने जैसे चर्चे पर्यटन मंडल में आए दिन चलते रहे हैं। लेकिन उच्च स्तरीय दबाव के चलते कार्रवाई को टाला जाता रहा है।
बताया जाता है कि आईएफएस तपेश झा ने जब यहां कार्यभार संभाला तो उसके होश उड़ गए और उन्होंने बगैर किसी दबाव के भौमिक को सबसे पहले चलता किया फिर एमजी श्रीवास्तव को भी मंत्रालय भिजवा दिया। इसके बाद दुग्ध संघ से पुलिस होते पर्यटन मंडल पहुंचे अजय श्रीवास्तव को निलंबित किया गया। बताया जाता है कि बृजमोहन अग्रवाल के इस करीबी अजय श्रीवास्तव दुग्ध संघ में बाबू रहा है और बृजमोहन अग्रवाल उन्हें अपने विभागों में ले जाते रहे हैं। सिमगा कांड उछलने के बाद भी और उनके संविलियन गलत ढंग से किए जाने को लेकर भी अजय श्रीवास्तव पर किसी ने कार्रवाई की हिमाकत नहीं की थी।
यह अलग बात है कि तपेश झा के मोहन समर्थकों के खिलाफ की गई कार्रवाई से कुछ गलत भी हुआ है और कुछ एक को प्रमोशन मिल गया है लेकिन मोहन समर्थकों पर गिरी गाज को लेकर कई तरह की चर्चा है। बताया जाता है कि इस मामले से बृजमोहन अग्रवाल काफी रुष्ट भी है लेकिन वे अपने समर्थकों को यह आश्वस्त करने में सफल रहे हैं कि भटगांव चुनाव के बाद कुछ हो सकता है। बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के दम पर उचकने वाले दूसरे विभाग के अफसरों के लिए भी इसे चेतावनी के रुप में देखा जा रहा है और इसकी शहर में जबरदस्त चर्चा है।

शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

मदन गोपाल का खेल मंत्री मोहन भी फेल

कर्मचारी संगठनों से मिलकर षडयंत्र!
 छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के कथित एमडी मदन गोपाल श्रीवास्तव के कारनामों को लेकर अन्य अफसरों में भय व्याप्त होने की असली वजह यहां के कर्मचारी संगठन को बताया जाता है। जो श्रीवास्तव के इशारे पर न केवल अधिकारियों बल्कि मंत्री या अध्यक्ष तक से भिड़ने का माद्दा रखते हैं।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता को लेकर जबरदस्त चर्चा है और कहा जाता है कि जिस प्रबंधक मदन गोपाल श्रीवास्तव को पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का संरक्षण प्राप्त था वही मदन गोपाल अब भ्रष्टाचार की भूमिका में आ गए हैं और पर्यटन मंडल को कर्मचारी संगठन के कुछ पदाधिकारी के साथ मिलकर अपने हिसाब से न केवल चला रहे हैं बल्कि उनके कार्यों में बाधा डालने वालों को इसी संगठन के पदाधिकारियों के मार्फत मोर्चा खुलवा देते हैं।
सूत्रों के मुताबिक पर्यटन मंडल में घास घोटाले, बाउण्ड्री घोटाले, मोटल घोटाले, स्टेशनरी घोटाले के अलावा ऐसे कई घोटाले हैं जिन पर महालेखाकार नियंत्रक ने भी तीखी टिप्पणी की है। लेकिन मंत्री का वरदहस्त मदन गोपाल श्रीवास्तव के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई जबकि मदन गोपाल श्रीवास्तव के खिलाफ दो दर्जन से अधिक शिकायतें है। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होने की वजह मंत्री के संरक्षण के अलावा कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों की भूमिका की भी चर्चा है। सूत्रों ने बताया कि कर्मचारी संगठन को अपने कब्जे में रखने एम.जी. श्रीवास्तव द्वारा कई तरह के काम किए जाते हैं। पिछले माह गोल्डन टयूलिप जैसे महंगे होटल में कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों की बैठक को इसी रुप में देखा जा रहा है। सूत्रों का दावा है कि गोल्डन टयूलिप का खर्च भी उठाया गया।
कहा जाता है कि पर्यटन मंडल के वे कर्मचारी उन लोगों के खिलाफ मोर्चा खोलते हैं और शिकायत ज्ञापन देते हैं जो एमजी श्रीवास्तव के लिए बाधक बन सकते हैं। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि मंत्री पर भी अब दबाव बनाने कर्मचारी संगठन के कुछ पदाधिकारियों को इस्तेमाल करते हुए मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है। सूत्रों ने बताया कि पर्यटन मंडल में शराब-शबाब की जबरदस्त चर्चा है और इसे लेकर कई तरह की कहानियां भी सामने आने लगी हैं। इसकी शिकायत भी उच्च स्तर पर की गई लेकिन कार्रवाई तो दूर जांच तक नहीं हुई। बहरहाल पर्यटन मंडल को लेकर यह चर्चा गर्म है कि मंत्री का संरक्षण पाकर श्रीवास्तव जी भस्मासूर हो चुके हैं और इस पर शीघ्र ही विराम नहीं लगा तो आने वाले दिनों में मंत्री-सचिव और मंडल अध्यक्ष के लिए भी नई मुसिबत खड़ी हो सकती है।

सोमवार, 31 मई 2010

पर्यटन के नाम पर डकैती

मंत्री मेहरबान,अजय पहलवान
जिस व्यक्ति पर अपनी हवस के लिए कालगर्ल को कार से कुचलकर मार डालने का आरोप हो और जिसके दुग्ध संघ से पर्यटन मंडल में संविलियन को ही गलत माना जा रहा हो ऐसे अजय श्रीवास्तव का पर्यटन मंडल में पीआरओर बनना और मंत्री का करीबी कहलाना कहां तक उचित है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल में चल रहे घपलेबाजी को डकैती की संज्ञा दी जाए तो कम नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं है कि जब से बृजमोहन अग्रवाल ने पर्यटन विभाग संभाला है तभी से यह विभाग अपने कारनामों से सुर्खियों में रहा है। प्रचार प्रसार में माहिर पर्यटन मंडल में चल रहे डकैती की चर्चा तो अब आम हो चुकी है।
ऐसे में यहां हुई संविदा नियुक्ति की कहानी शर्मनाक है यही नहीं दुग्ध संघ के कर्मचारी अजय श्रीवास्तव को लेकर यह विभाग इन दिनों सुर्खियों में है। सुखर्िाें में रहने की वजह अजय श्रीवास्तव का पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का करीबी होना है और कहा जाता है कि मंत्री की रूचि की वजह से ही अजय श्रीवास्तव को असंवैधानिक रुप से पर्यटन मंडल में लाया गया जबकि जिस पद पर उनकी नियुक्ति की गई अजय श्रीवास्तव तब उस पद की योग्यता ही नहीं रखते थे। लेकिन उच्चस्तरीय दबाव में वे पर्यटन मंडल पर बने हुए है।
हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक अजय श्रीवास्तव की संविलियन को लेकर मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है जहां पर्यटन मंडल के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि अजय श्रीवास्तव का संविलियन गलत ढंग से किया गया है। दुग्ध संघ से पुलिस फिर पर्यटन मंडल में कार्य करने की कहानी यहां पूरे शहर में चर्चा है। चर्चा इस बात की भी है कि अय्याशी के लिए हत्या जैसे मामले के आरोपी को किस तरह से राजनैतिक संरक्षण दिया जा रहा है। हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक पर्यटन मंडल के इस पीआरओ की विभाग में तूती बोलती है और उच्च अधिकारी भी उनसे खौफ खाते हैं।
एक अधिकारी ने तो नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि इस सरकार में ऐसे कई मामले हैं जो उच्चस्तरीय राजनैतिक संरक्षण के कारण दबे हुए हैं। दूसरी तरफ इस मामले को लेकर आम लोगों में जो चर्चा है उससे सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है। बहरहाल पर्यटन मंडल के पीआरओ अजय श्रीवास्तव को लेकर पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल घेरे में हैं और इस संबंध में पर्यटन मंत्री से संपर्क की कोशिश की गई लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे।

मंगलवार, 4 मई 2010

मुंबई घुमने पर्यटन मंडल की कार का उपयोगलाखों रुपयों का चूना लगाया


लगता है मुंबई में पर्यटन मंडल ने जो कार्यालय खोला है वह पर्यटन के प्रचार प्रसार की बजाय मंत्रियों और अधिकारियों की मित्र मंडलियों का ऐशगाह बनकर रह गया है। इसका ताजा उदाहरण मुंबई पर्यटन मंडल द्वारा टेक्सियों का बकाया बिल है जो 25 लाख से उपर बताया जा रहा है।छत्तीगढ़ शासन ने पर्यटन को बढ़ावा देने प्रदेश के बाहर भी पर्यटन मंडल का कार्यालय खोल रखा है इसमें से एक कार्यालय मुंबई में स्थित है। बताया जाता है कि जब से मुंबई में पर्यटन मंडल ने कार्यालय खोला है तभी से सरकार में बैठे अधिकारियों व मंत्रियों के मित्रों की निकल पड़ी है। आए दिन मुंबई घुमने वालों की बढ़ती संख्या से पर्यटन मंडल के कई अधिकारी हैरान है।बताया जाता है कि मुंबई कार्यालय के बढ़ते खर्चे को लेकर इसे बंद किए जाने की भी चर्चा हो चुकी है। लेकिन कुछ अधिकारी व कुछ मंत्रियों की वजह से मुंबई कार्यालय बंद किए जाने का मामला आगे नहीं बढ़ पाया। सूत्रों के मुताबिक मुंबई पर्यटन मंडल द्वारा छत्तीसगढ़ से पहुंचने वालों के लिए किराए की टैक्सियों का इंतजाम करने लगा है और यही खर्चा ही लाखों-करोड़ों में होने लगा है। हालांकि खर्चे विभागीय कार्य के बताए जा रहे हैं लेकिन कार में घुमने वाले किसी न किसी मंत्री या अधिकारी के सिफारिश के साथ पहुंचते हैं।बताया जाता है कि पिछले माह एक अधिकारी के रिश्तेदार ने 15 दिनों तक मुंबई का सैर किया और इस किराये की टैक्सी का खर्च पर्यटन मंडल के जिम्मे चला गया। लेकिन इस मामले की लीपापोती कर दी गई। इधर इस मामले में मुंबई कार्यालय में संजय जैन से बात की गई तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। बहरहाल पर्यटन को बढ़ावा देने के नाम पर मुंबई में घुमने-फिरने वालों का खर्च उठाने का मामला तूल पकड़ने लगा है देखना है इस पर क्या कार्रवाई होती है।

बुधवार, 28 अप्रैल 2010

पूर्व मंत्री के कान्हा किसली का दौरा पर्यटन के जिम्में

साल में परिवार सहित दो दौरा
भाजपाई राजनीति को तार-तार कर कांग्रेस में मंत्री पद पाने वाले ब्राम्हण नेता भले ही भाजपाईयों के दुश्मन हो लेकिन पर्यटन मंत्री के दोस्ती का लाभ उन्हें गाहे-बगाहे अब भी मिल रहा है और साल में परिवार सहित कान्हा किसली यात्रा का खर्च पर्यटन विभाग उठाता है।
छत्तीसगढ क़ी भाजपाई राजनीति में तूफान मचा कर जोगी शासनकाल में मंत्री बन बैठे इस नेता को लेकर कांग्रेस ही नहीं भाजपा के लोग भी भद्दी गाली देते हैं। कभी राजधानी की राजनीति में एक क्षत्र राय करने वाले पूर्व मंत्री को इन दिनों राजनैतिक दुर्दिन का सामना करना पड़ा रहा है लेकिन उनके अब भी पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से मधुर संबंध है।
भले ही भाजपाई इस पूर्व मंत्री को पसंद नहीं करते लेकिन जीत हार की गणित समझने वाले बृजमोहन अग्रवाल को इससे कोई मतलब नहीं है इसलिए उनके इस पूर्व मंत्री से न केवल संबंध बने हुए हैं बल्कि उनके विभाग पर्यटन भी उनका पूरा ध्यान रखता है। बताया जाता है कि पूर्व मंत्री और उनका परिवार साल में दो बार कान्हा किसली की यात्रा करता है और कहा जाता है कि इस यात्रा का पूरा खर्च पर्यटन विभाग द्वारा किया जाता है।
इस मामले में जब पर्यटन विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने खामोशी ओढ़ ली लेकिन मीडिया से जुड़े एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि ऐसा तो यहां चलते रहता है यात्रा कोई करे बिल किसी के नाम पर एडजेस्ट कर दिया जाता है। सूत्रों के मुताबिक पर्यटन में भारी गड़बड़ी चल रही है निर्माण कार्य से लेकर प्रचार प्रसार में मनमाने गड़बड़ी से लोग हैरान है जबकि यहां के अधिकारियों पर कार्रवाई की बजाय रिकवरी निकालकर मामला रफा-दफा किया जाता है। बहरहाल मंत्री और पूर्व मंत्री की जोड़ी को लेकर पार्टी में भी चर्चा है लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा है।