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सोमवार, 8 जुलाई 2024

होटल बेबीलोन से खौफ खाती है छत्तीसगढ पुलिस…!



 होटल बेबीलोन से खौफ खाती है छत्तीसगढ पुलिस…

वाणी- हत्याकांड का डरावना सच 


छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के बड़े होटलों में शुमार बेबीलान ग्रुप के होटलों की करतूत के आगे छत्तीसगढ़ पुलिस किस तरह नतमस्तक है,  यह वाणी हत्याकांड के मामले में सामने आ गया । वर्ना बेवीलान प्रबंधकों की धौंस के आगे पुलिस भी लावार है , इसका पता ही नहीं चलता ।

ज्ञात हो कि कल सुबह राजधानी के जेल रोड स्थित होटल बेबीलान इन कमरा नम्बर 410 में जिस वाणी गोयल नामक युवती की हत्या हुई लाश बरामद की गई । उस युवती की गुमशुदगी की  रिपोर्ट पर पुलिस जब जाँच के लिए पहुंची थी तो बेबीलान प्रबंधक ने अपनी पहुंच का धौंस दिखाते हुए दो-दो थानेदार और उसकी पूरी टीम को चलता कर दिया था।

दरअसल मामला प्रेम-प्रसंग से जुड़ा हुआ है। अम्बीकापुर के व्यवसायी परिवार की लड़‌की राजधानी में मारुति लाईफ़ स्टाईल में अपने चाचा  के घर में पढ़ाई करने के लिए रहती थी।और 7 जुलाई को जब वह शाम तक घर नहीं लौटी तो वाणी के रिश्तेदारों ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कर दी, चूँकि वाणी गोयल के चाचा बाबूलाल गोयल बीजेपी के ज़िला अध्यक्ष है इसलिए राजनैतिक दबाव में पुलिस तलाल सक्रिय हो गई। और वाणी के मोबाईल लोकेशन के आधार पर गंज थाना और सरस्वती नगर  थाना की पुलिस रात ११ बजे ही होटल बेबिलॉन पहुँच गई लेकिन वह होटल में जांच नहीं कर पाई।

कहा जाता है कि पुलिस को होटल में आये देख प्रबंधक ने अपनी पहुंच का ऐसा धौंस दिखाया तो पुलिस चुपचाप लौट आई । लेकिन जब वाणी के घरवालों का दबाव बढ़ा तो वह फिर जांच करने दोबारा पहुँची , लेकिन तब भी होटल प्रबंधकों ने पुलिस को चमका कर भगा दिया।

कहा जाता है कि होटल प्रबंधकों ने जाँच के लिए पहुंची पुलिस टीम को अपनी पहुंच का हवाला देते हुए वर्दी उतरवा देने या संस्पेंड करवा  देने की धमकी दी थी।

इधर इस मामले में नया मोड़ तब आया जब अचानक मोबाईल का लोकेशन नागपुर की तरफ़ जाते दिखाया गया और पुलिस तत्काल नागपुर पहुंचकर मोबाईल  ट्रेन के डिब्बे में लावारिस हालत में बरामद की।


वाणी के परिजनों के बढ़ते दबाव के चलते पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी जब होटल बेबीलान पहुंचे और एंट्री रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज देखे तो पता चला कि वाणी गोयल 7 जुलाई को दोपहर होटल पहुँची है और उसके साथ विशाल गर्ग नामक युवक था।


इसके बाद जब चौथी मंजिल के रूम नम्बर चार सौ दस को खुलवाया गया तो वाणी गोयल की हत्या हो जाने की खबर आई। और खबर  सामने आते ही वाणी ग़ोयल के परिजनों का गुासा होटल कर्मियों और होटल पर फूटने लगा ।होटल कर्मचारियों की पिराई होने लागी, तोड्‌फोड़ की गई। कर्मचारी डर कर  होटल छोड़ भागने लगे और कई देर तक यह हंगामा होता रहा।


पुलिस ने जैसे तैसे इस पर काबू पाया।

इ‌धर के हत्या के बाद ट्रेन के आगे कूदकर विशाल गर्ग के द्वारा आत्महत्या कर लेने की खबर भी आ गई और पुलिस के लिए इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाना आसान हो गया।

ऐक्षा नहीं है के बेबीलोन होटल प्रबंधकों के धौंस के आगे शासन-प्रशासन पहली बार नतमस्तक हुआ है। इससे पहले वीआईपी रोड व्यत इसी ग्रुप के होटल बेबीलोन मैं पर नाले पर ही कब्जा कर पक्का निर्माण की बात सामने आई थी और इसे हराने में निगम के हाथ पाँव फूल गये थे।



सालों कब्जा रहा जब जलभराव से त्रस्त नागरिकों ने मोर्चा खोला तब कहीं जाकर आधा अधूरा कब्जा हटाया गया। 


देखना है इस मामले में अब पुलिस होटल प्रबंधकों पर कार्रवाई  करती है।या फिर कर्मचारियो को पकड़ कर ख़ानापूर्ति कर ली जायेगी।


शुक्रवार, 21 जून 2024

समस्या ग्रस्त साव

  समस्या ग्रस्त साव


छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव इन दिनों अपनी कार्यशैली ही नहीं बयानों को लेकर भी खूब सुर्खियां बटोर रहे है, तो मुख्यमंत्री खेमे के लोगों ने तो उनका नाम ही बद‌लकर समस्याग्रस्त साव रख दिया है और सामान्य बोलचाल की भाषा में इसी नाम का इस्तेमाल करते हैं।

उपमुख्यमंत्री साव की पीड़ा यह है कि वे मुख्यमंत्री नहीं बन पाये पार्टी अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने भरोसे की भैस को पानी में डाल दिया और पार्टी को सत्ता दिलाई, जबकि 2003 में पार्टी अध्यक्ष के बाद डॉ. रमन सिंह को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। 

कहा जाता है कि पहले ही मुख्यमंत्री नहीं बन पाने की पीड़ा को झेल रहे अरुण साव को दूसरा झटका तब लगा जब तोखन साहू को केंद्र में मंत्री बना दिया गया, यानी साहू समाज के बड़े नेता का तमगा भी हाथ से अब निकल - तब निकल की स्थिति में है।

यही वजह है कि योग दिवस पर उन्होंने कुछ अलग ही योग  कर दिया, शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल को छ माह  पद पर  बने रहने वाला बयान दे दिया, जबकि मोहन सेठ का इस्तीफ़ा स्वीकृत हो चुका था।

अब लोग इस बयान का अपने अपने ढंग से अर्थ निकाल रहे है और कह  रहे हैं कि मोहन सेठ के साथ हो रहे इस खेल के पीछे कहीं लोग ये न समझ ले कि यह सब अरुण साव करवा रहे हैं, इसलिए यह बयान दिया गया है, तो कोई इस बयान को उनके विभाग के खेल में मुख्यमंत्री की नजर पड़‌ जाने से जोड़ रहे हैं। अब विभाग में खेल होगा तो नजर तो पड़‌‌नी ही है और नजर मुख्यमंत्री की पड़े या न पड़े, अफसरों में चौधराहट चलाने वाले चौधरी की तो पड़ हो जायेगी। चौधरी यानी शाह…!



गुरुवार, 20 जून 2024

बलौदाबाज़ारकांड-बीजेपी की जाँच समिति क्यों बनी

  आख़िर बीजेपी ने जाँच समिति क्यों बनाई, सत्ता का कैसा खेल 

कांग्रेस की जाँच समिति तो समझ आता है लेकिन सत्ता में बैठी पार्टी का जाँच समिति बनाने का मतलब क्या बीजेपी में विवाद या कोई षड्यंत्र




बलौदाबाज़ार की घटना के बाद क्या सरकार  साँप गुजरने के बाद लकीर पीटने वाली कहावत को चरितार्थ कर रही है । यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इस मामले को लेकर जहां कांग्रेस हमलावर है वही विष्णुदेव सरकार बैकफ़ुट में आ  गई है और अब सरकार को बचाने बीजेपी सामने ए गई है 

बीजेपी ने जाँच समिति की घोषणा कर दी है जिसे लेकर कांग्रेस ने तो सवाल उठाये ही है , आम लोगो में भी चर्चा गरम है कि क्या बीजेपी को अपनी ही सरकार पर भरोसा नहीं है या यह किसी को बदनाम करने की साज़िश है ।

छत्तीसगढ़ की पहचान हमेशा से शांत जगहों के रूप में होती है, जीयो और जीने दो की संस्कृति से ओतप्रोत छत्तीसगढ़ में यह घटना हर किसी को हैरानी में डालने वाली है।'मनखे मनखे एक समान का संदेश देने वाले सतनाम समाज के   गुरु घासीदास के तपोभूमि क्षेत्र माने जाने वाले बलौदा बाजार जिले में अब तक जो भी घटनाएं हुई हैं उनमें बाहरी तत्वों का हाथ रहा है. यही वजह है कि प्रशासन सतनाम समाज के प्रदर्शन को उस रूप में नहीं लिया और प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़प और आगजनी हो गई.

जानकारी के मुताबिक, अब तक के जांच में ये सामने आया है कि इस घटना के पीछे भी बाहरी तत्वों का हाथ था. दरअसल, पुलिस ने लिखित कथन दिया है कि उत्पात मचाकर तोड़फोड़ और आगजनी भीम आर्मी, भीम रेजिमेंट और भीम कांतीवीर सेना के कार्यकर्ता, पदाधिकारियों ने किया है. 

सतनामी समाज के प्रवर्तक गुरु बाबा गुरु घासीदास की तपोभूमि गिरौधपुरी से लगे महकोनी गांव के अमर गुफा स्थित तीन जैतखाम को असामाजिक तत्वों ने 15-16 मई की रात आरी से कटकर गिरा दिया था. इस घटना की जानकारी पूजा करने वाले पुजारी ने समाज प्रमुखों को दी. जिसके बाद सतनामी समाज के लोग एफआईआर दर्ज कराने गिरौदपुरी पुलिस चौकी पहुंचे.

आरोप है कि घटना को पुलिस बहुत हल्के में लेते हुए एफआईआर दर्ज नहीं की. जैतखाम काटे जाने के कारण सतनामी समाज खुद को अपमानित महसूस कर रहे थे. यही वजह रही कि समाज के लोग वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए और देखते ही देखते मामला पूरे राज्य में गया. इसके बाद  इस मामले की शिकायत एसपी से की गई. वहीं उग्र प्रदर्शन की चेतावनी के बाद 17 मई को पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया.एफआईआर में देरी, आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी और पूरी कार्रवाई में पारदर्शिता का अभाव ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए. इतना ही नहीं बलौदा बाजार जिले में पुलिस द्वारा अपराधियों को बदले जाने की परंपरा ने इस मामले में भी संदेह पैदा किया. बिहार के जिन तीन मजदूरों को पुलिस सैड कम काटने के मामले में गिरफ्तार किया गया, उन्हें भी कुछ दिनों बाद जमानत मिल गई और वो छूटते ही प्रदेश से गायब हो गए और यही वजह थी सतनामी समाज में विद्रोह पैदा हो गया.

गिरोदपुरी धाम के अमरगुफा के जैतखाम को अज्ञात आरोपी ने 15-16 मई की रात तोड़फोड़ कर जैतखाम को नष्ट करने की कोशिश की. आरोपियों के खिलाफ गिरौदपुरी पुलिस चौकी में आईपीसी की धारा 295 के तहत मामला दर्ज किया गया. वहीं दूसरी ओर जैतखाम को अपमानित किए जाने के मामले में सतनाम समाज के लोगों के भीतर गुस्सा फूट पड़ा. बाबा गुरु घासीदास को मानने वाले तपोभूमि गिरौदपुरी आने वाले श्रद्धालु जैतखाम काटे जाने से अमरपुर की ओर जाने लगे और प्रदर्शन व कार्रवाई की मांग करते हुए पुलिस पर दबाव बनाने लगे।

इधर, पुलिस बढ़ते दबाव के बीच आरोपी की पतासाजी कर रही थी. पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान पता चला कि भोजराम अजगल्ले जो कि ठेकेदारी का काम करता है उसके द्वारा गांव महकोनी में नल जल मिशन के तहत पानी टंकी का निर्माण किया जा रहा था. जिसका ठेका उसने 4.50 लाख में आरोपियों को दिया था. शुरुआत में ठेकेदार ने 1 लाख रुपये ही भुगतान किया गया था, जबकि कार्य 90 फीसदी हो जाने पर भी बाकी रकम का भुगतान नहीं किया जा रहा था.पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कार्य का भुगतान मांगने पर ठेकेदार ने गाली गलौज दिया था. पुलिस अपने संपूर्ण जांच और विवेचना क्रम में ग्राम महकोनी में नल जल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण करने वाले 03 आरोपियों को दबोचा. जिनसे कड़ाई से पूछताछ पर तीनों आरोपियों ने अमर गुफा में स्थित जैतखाम को काटना और लोहे के गेट में तोड़फोड़ करना स्वीकार किया.आरोपियों से पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि सभी आरोपी ग्राम महकोनी में नल जल योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण ठेकेदार भोजराम अजगल्ले के माध्यम से ठेका राशि 4.50 लाख में कर रहे थे. जिसका काम लगभग 90 फीसदी पूरा होने के बाद भी भोजराम अजगल्ले ने बकाया राशि आरोपियों को नहीं दिया था. आरोपियों ने बार-बार बकाया रकम मांगा, लेकिन ठेकेदार रकम नहीं दी, जिसके कारण ठेकेदार से नाराज आरोपियों ने अमर गुफा में तोड़फोड़ करने की योजना बना डाली.

योजना के अनुसार, तीनों आरोपियों ने शराब का सेवन कर 15 मई 2024 की रात 11.30 बजे लगभग अपनी बजाज मोटरसाइकिल में बैठकर आरी और अन्य सामान लेकर अमर गुफा गए. तीनों ने गुस्से में आकर सतनामी समाज के प्रतीक जैतखाम को आरी से काट दिया और लोहे के गेट को उखाड़ कर तोड़फोड़ किया।पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों से घटना में प्रयुक्त आरी और मोटरसाइकिल जब्त किया है और तीनों आरोपियों को विधिवत्त गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश कर उन्हें जेल भेज दिया. गिरफ्तार किए गए आरोपियों में बिहार के सहरसा निवासी सल्टू कुमार, पिंटू कुमार और रघुनंदन कुमार हैं जो कि वर्तमान में ग्राम महकोनी पुलिस चौकी गिरौदपुरी में रह रहे थे।

बता दें कि पुलिस की बताई पैसे वाली कहानी से समाज में और गुस्सा बढ़ने लगा और समाज के लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करने लगे. पुलिस के द्वारा बताई गई बातों के बाद समाज ने सीबीआई जांच की मांग की.

अमर गुफा के तीन जैतखाम काटे जाने के अलावा पिछले कुछ अरसे और वर्षों में हुए सतनामी समाज से जुड़े मामले से भी समाज में गुस्सा था. बताया जा रहा है कि पूर्व में बिलासपुर के बोडसरा, कबीरधाम व अन्य जिलों में सतनामी समाज संबंधी विभिन्न मुद्दो को लेकर समाज के लोग व्यापक प्रदर्शन की तैयारी की. साथ ही 10 जून को दशहरा मैदान बलौदा बाजार में धरना स्थल के रूप में घोषित कर प्रदर्शन आयोजित किया.

https://youtu.be/YeiXWOoNCW4?si=GyxrkHHpx1Ug7a00