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शनिवार, 17 अगस्त 2024

बुरी तरह फँस गये विधायक...

 बुरी तरह फँस गये विधायक...


पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सबसे करीबी विधायक देवेंद्र यादव को छत्तीसगढ़ की पुलिस ने गिरफ़्तार कर ही लिया। उनकी गिरफ्तारी की आशंका तो उसी दिन जाहिर कर दी गई थी, जब डबल इंजन सरकार के तीन-तीन मंत्रियों ने बतौदाबाजार हिंसाकांड  के बाद कांग्रेस के नेताओ की तस्वीर  जारी करते हुए हिंसा फैलाने का आरोप लगाया था।

सतनामी समाज के जैतखंभ को काटे जाने के विरोध में बलौदाबाजार में समाज के प्रदर्शन के दौरान इस तरह लोग बेकाबू हो गये कि एसपी दफ़्तर। , कलेक्ट्रोरेट परिसर को फूंक दिया था। इसके बाद सरकार ने आनन फानन में बलौदाबाजार के कलेक्टर और एसपी को हटा दिया लेकिन जब मामला तूल पक‌ड़ने लगा तो एसपी - कलेक्टर को निलंबित करना पड़ा।

इसके बाद पुलिस ने प्रद‌र्शन में उपस्थित सतनामी समाज के नेताओकी गिर‌फ्तारी शुरु कर दी तो सर‌कार पर यह आरोप भी लगने लगा कि वह निर्दोष लोगों को न केवल गिरफ्तार कर रही है बल्कि मारपीट और  प्रताडित भी कर रही है।

प्रदर्शन में शामिल मिलाई के विधायक देवेन्द्र यादव पर तीन-तीन मंत्रियों ने प्रेसवार्ता ले कर गंभीर आरोप लगाये थे और इसके बाद जब पुलिस ने देवेन्द्र यादव को पूछताछ के लिए बुलाया तभी से उन पर गिफ्तारी की तलवार लटकने लगी थी।

कल सुबह 6 बजे अचानक पुलिस देवेन्द्र यादव के घर पहुंच गई, और पुलिस के पहुंचने की खबर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बेज सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता यादव के घर पहुंच गये । एक पुलिस अधिकारी ने इस बात की जानकारी दी। वहीं यादव ने भाजपा सरकार पर आगजनी मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फंसाने का आरोप लगाया।बलौदाबाजार के पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल ने बताया कि यादव को दुर्ग जिले में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस की कार्रवाई की खबर फैलने के बाद दुर्ग के भिलाई नगर इलाके में यादव के आवास के बाहर उनके कई समर्थक जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। पार्टी का प्रभावशाली युवा चेहरा यादव भिलाई नगर निर्वाचन क्षेत्र से दूसरी बार विधायक हैं।अग्रवाल ने बताया कि यादव को बलौदाबाजार आगजनी की घटना में कोतवाली पुलिस थाने में दर्ज मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है।

यह मामला भारतीय दंड संहिता की धाराओं 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र), 147 (दंगा करने की सजा), 186 (किसी लोक सेवक को अपने कर्तव्यों का पालन करने से स्वैच्छिक रूप से रोकना), 353 (लोक सेवक को अपने कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल का प्रयोग), 307 (हत्या का प्रयास) और अन्य तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 के तहत दर्ज किया गया था।अग्रवाल ने बताया कि यादव को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने यादव को बयान दर्ज करने के लिए कम से कम तीन बार बुलाया था, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

बलौदाबाजार से पुलिस के जवान दुर्ग पुलिस के साथ सुबह करीब 7 बजे यादव के घर पहुंचे। खबर फैलते ही यादव के समर्थकों ने विधायक को बचाने की कोशिश की और नारे लगाए। एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस शाम करीब 5 बजे यादव को अपने साथ ले जाने में कामयाब रही।

इस साल 15 और 16 मई की मध्य रात्रि को बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के गिरौदपुरी धाम में अमर गुफा के पास अज्ञात व्यक्तियों ने सतनामी समुदाय द्वारा पूजे जाने वाले पवित्र प्रतीक ‘जैतखाम’ (विजय स्तंभ) को तोड़ दिया था, जिसके बाद जून में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

10 जून को, बलौदाबाजार शहर में ‘विजय स्तंभ’ की कथित तोड़फोड़ के खिलाफ सतनामियों द्वारा विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ ने एक सरकारी कार्यालय भवन और 150 से अधिक वाहनों में आग लगा दी, जिसके कारण दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू कर दी गई।

यादव सहित कांग्रेस नेताओं ने कथित तौर पर दशहरा मैदान में सतनामियों द्वारा आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक सार्वजनिक बैठक में भाग लिया था। 10 जून की आगजनी के सिलसिले में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) और भीम “रेजिमेंट” के सदस्यों सहित लगभग 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।मध्यकालीन समाज सुधारक बाबा गुरु घासीदास द्वारा स्थापित प्रभावशाली सतनामी समुदाय, छत्तीसगढ़ में सबसे बड़े अनुसूचित जाति समूह का प्रतिनिधित्व करता है।

सत्तारूढ़ भाजपा की आलोचना करते हुए यादव ने कहा कि वह सरकार से नहीं डरते और जनता के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने भिलाई में कहा, “राज्य सरकार बलौदाबाजार आगजनी मामले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को फंसाने की कोशिश कर रही है। सतनामी समुदाय के युवाओं और निर्दोष लोगों के लिए आवाज उठाने पर सरकार ने मेरे खिलाफ कार्रवाई की। मैं सरकार से नहीं डरता और कानूनी लड़ाई लड़ रहूंगा।” यादव ने दावा किया कि वह पहले भी बलौदाबाजार पुलिस के समक्ष सम्मन मिलने पर उपस्थित हुए थे।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यादव की गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया और पुलिस से राजनीतिक दबाव में कार्रवाई नहीं करने को कहा।

बघेल ने आरोप लगाया, “पूरे घटनाक्रम में सरकार और पुलिस की भूमिका संदिग्ध है। भाजपा के किसी भी सदस्य से न तो पूछताछ की गई और न ही उन्हें गिरफ्तार किया गया, जबकि घटना में उसके पूर्व विधायक सनम जांगड़े की कथित भूमिका सामने आई थी।” सतनामी समुदाय के प्रदर्शन का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें यादव न तो मंच पर चढ़ते हैं और न ही वहां लंबे समय तक इंतजार करते हैं। उन्होंने कहा कि देवेंद्र यादव की गिरफ्तारी पूरी तरह से राजनीतिक द्वेष के कारण की गई है और हम इसका विरोध करते हैं।

बघेल ने कहा, “हम कानूनी सुझाव लेंगे और उसके अनुसार आगे की कार्रवाई तय करेंगे।” यादव, छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के सत्ता में रहने के दौरान सामने आए कथित कोयला लेवी घोटाले के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय और राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज मामलों में भी आरोपी हैं

सोमवार, 24 जून 2024

चला मुरारी हीरो बनने…

 मोहन सेठ की सीट पर राजीव सेठ की नजर...


हर विधानसभा चुनाव में रिकिट के लिए जी तोड़ कोशिश करने वाले भारतीय जनता पार्टी के राजीव सेठ की नजर अब मोहन सेठ की खाली हुई दक्षिण विधानसमा सीट पर लग गई है। यहां उपचुनाव होना है। वैसे तो इस सीट के लिए भाजपा के भीतर ही दर्जन भर दावेदार है और कहा जा रहा है कि जिस तरह से मोहन सेठ को किनारे लगाया गया है उसके बाद एक बात तो तय मानी जानी चाहिए कि यहाँ उसे टिकिट मिलेगी जो बृज‌मोहन अग्रवाल का विरोधी भले ही न हो कम से कम करीबी न हो यानी मोहन सेठ जिसे उँगली में न नचा पाये।

 कहा जाता है कि वैसे तो सभी दावेदार अपने अपने ढंग से टिकिट के लिए जोर आजमाईश कर रहे है लेकिन इन दावेदारों में अशोका रतन वाले सेठ यानी राजीव अग्रवाल ने जोर आजमाईश में कोई कसर बाकी नहीं रखा है। खल्लारी से लेकर रायपुर ग्रामीण से पहले ही दावेदारी कर चुके राजीव सेठ ने संगठन का काम भी किया है और कहा जाता है कि पैसे के दम पर उन्होंने न केवल जिला भाजपा के अध्यक्ष बने बल्कि कई तरह के ज़मीन विवादों को भी निपटाया है। क्या है बिल्डर्स का खेल इस पर चर्चा लंबी है लेकिन उनकी टिकिट की गाड़ी कहां अटक जाती है यह शोध का विषय है। 

ऐसा भी नहीं है कि वे टिकिट के मामले में निरंक हो। पार्टी ने उन्हें दो-दो बार टिकिर दी है वह भी पार्षद का लेकिन वे कभी चुनाव नहीं जीत पाये।

दो बार पार्षद चुनाव नहीं जीत पाने वाले राजीव सेठ को लगता है कि पार्षद का चुनाव छोटा चुनाव है और वे हार इसलिए गये, क्योंकि वार्ड के लोग उन्हें इच्छी तरह से जानते है, और विधानसभा बड़ा चुनाव है दूसरे वार्ड वाले उन्हें कम जानते है इसलिए' 'कमल' के ज़रिए चुनाव जीत ही जायेंगे। 

अब ये अलग बात है कि अभी शहर इतना बड़ा भी नहीं हुआ है कि राजीव सेठ क्या हैं लोगों से छिपा हुआ रह जाये वे क्या बला है।हालाँकि इस बार वे निगम मंडल के लिये भी ताक़त लगाये हुए है लेकिन पार्टनर के कारण यह भी बाधित न हो जाये।


रविवार, 23 जून 2024

रामगोपाल की सेटिंग...

 रामगोपाल की सेटिंग...


छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल लगभग साल भर से फ़रार है, ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए रामगोपाल अग्रवाल फरार हो गये हैं। लेकिन उनके बारे में भाजपा भी बोलने के लिए तैयार नहीं है। और कांग्रेस ने तो इस फरार कोषाध्यक्ष के आसरे विधानसमा ही नहीं लोकसभा का चुनाव मी निपटा दिया, यह अलग बात है कि इन दोनों चुनाव में कांग्रेस भी निपट गई।

तब क्या दीपक बैज़ रामगोपाल की जगह किसी और को कोषाध्यक्ष बना पायेंगे या फिर अब रामगोपाल अग्रवाल के पद का फैसला कोई और ही करेंगे?  लेकिन यदि बग़ैर कोषाध्यक्ष के भी  कोग्रेस दो-दो चुनाव लड़ गई और खर्चा भी ठीक-ठाक चल रहा है, कांग्रेस भवन के कर्मचारियों के अलावा मीडिया मैनेजमेंट भी हो रहा है तो इसका मतलब क्या यह नहीं माना जाना चाहिए कि भले ही रामगोपाल ईडी या पुलिए की नजर में फरार हैं लेकिन उनका मैनेजमेट तगड़ा है और इस तगड़े मैनेजमेंट की वजह क्या मारूति वाले सूर्यकुमार हैं?

लेकिन रामगोपाल अग्रवाल का मैनेजमेंट सिर्फ कांग्रेस में ही नहीं चलता, भाजपा में भी उनका जबरदात मैनेजमेंट है तभी तो फरार कोषाध्यक्ष को लेकर भाजपा के नेता चूँ-चाँ नहीं कर रहें है ठीक वैसे ही जैसे मोहन सेठ के आगे कांग्रेसी चूं चाँ नहीं करते।

और शायद यह बात ईडी को भी मालूम है तभी तो रामगोपाल अग्रवाल के फरार होने की खबर के साथ सेटिंग की खबर भी बाहर आ गई थी। सेटिंग की खबर तो एक आईपीएस की भी जमकर हो रही है और दोनों ही सेटिंग का सूत्रधार एक ही व्यक्ति को बताया जा रहा है। 

तब ऐसे में कांग्रेस हो को डर भी नहीं है कि भाजपा कुछ बोलेगी तब रामगोपाल को पद से क्यों हटाया जाए।आख़िर रामगोपाल कोई ऐसे वैसे तो नेता है नहीं धमतरी से शुरू उनके राजनीतिक सफ़र का खेल कौन नहीं जानता।