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सोमवार, 10 मई 2010

गृहमंत्री के बंगले में घंटो युवक को जबरिया रखा गया...

चिरमिरी से उठाकर पुलिस लाई थी
कहते हैं पुलिस वालों से बड़ा गुण्डा कोई नहीं होता और ऐसे में जब गृहमंत्री का संरक्षण हो तो आम आदमी को क्या कुछ भुगतना पड़ सकता है यह चिरमिरी निवासी कुलदीप सलूजा की आपबीती से जाना जा सकता है। पुलिस उसे चिरमिरी से उठा लाती है गृहमंत्री के सरकारी आवास पर रखती है और फिर छोड़ देती है।
घटना 2 मई 2010 की शाम सात बजे की है जब चिरमिरी निवासी कुलदीप सलूजा अपने घर में था तब शाम सात बजे गृहमंत्री का खास कहने वाले जे. कौशिक ने टीआई लता चौरे और अन्य पुलिस कर्मियों के साथ कुलदीप सलूजा को पकड़कर रायपुर चलने की बात कही। कहा जाता है कि जे. कौशिक गृहमंत्री ननकीराम कंवर का खास आदमी है और उसने कुलदीप सलूजा पर चिरमिरी में डांस बाला बुलाने और स्थानीय पुलिस वालों को शराब पिलाने का आरोप लगाते हुए खूब चमकाया। उसके साथ लता चौरे और उपस्थित स्टॉफ ने भी उसे साथ चलने मजबूर किया।
एक तरफ पुलिस कुलदीप सलूजा को कोल माफिया बता रही है और उस पर कई तरह के आरोप लगा रही है वहीं दूसरी तरफ कुलदीप सलूजा का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे सारे आरोप बेबुनियाद है। उनका कहना है कि शादी समारोह में उत्तर प्रदेशवासियों द्वारा नाच गाने का आयोजन होता है और शादी में पुलिस वाले भी आए थे चूंकि दुल्हा पुलिस में है इसलिए भी पुलिस वाले थे। इधर लता चौरे की टीम पूछताछ करने के नाम पर कुलदीप सलूजा को चिरमिरी से शाम को ही लाया गया और रात बिलासपुर के गेस्ट हाउस में रुके और फिर सुबह किसी थाने में ले जाने की बजाय लता चौरे की टीम उसे गृहमंत्री के सरकारी बंगले में ले गई। जहां उन्हें रात आठ बजे तक रोक कर रखा गया और फिर बिना पूछताछ किए छोड़ दिया गया। गृहमंत्री के भी बंगले में मौजूद रहने की खबर है। इधर बताया जाता है कि गृहमंत्री की मंशा कोल माफियाओं पर शिकंजा कसने की है लेकिन जिस तरह से कुलदीप सलूजा को चिरमिरी से लाया गया और बगैर पूछताछ किए छोड़ा गया उसे लेकर कई तरह की चर्चा है।
हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कोल माफियाअओं के साथ जबरदस्त लेन-देन की चर्चा है जबकि यह भी कहा जा रहा है कि गृहमंत्री की आड़ में लेन देन का जबरदस्त खेल चल रहा है और कुलदीप सलूजा को इसी के चलते उठाया गया था। इधर हमारे चिरमिरी संवाददाता रतन जैन ने कहा कि जिस तरह से यहां कोल माफिया सक्रिय है उसकी शिकायत लगातार की जाती है और गृहमंत्री के स्टाफ की इस कार्रवाई से कोल माफियाओं में हड़कम्प मचा है। बहरहाल कुलदीप सलूजा को उठाने और बिना पूछताछ किए छोड़े जाने की यहां जबरदस्त चर्चा है और इससे गृहमंत्री की छवि पर भी प्रभाव पड़ने की बात कही जा रही है।

शुक्रवार, 26 मार्च 2010

बेवजह छेड़छाड़ के जुर्म में फंसा दिया

यह पुलिसिया गुण्डागर्दी का नमूना नहीं तो और क्या है। पुलिस ने सुभाष नगर निवासी नरेन्द्र साहू को गिरफ्तार कर एक रात जेल में गुजारने मजबूर कर दिया। अब युवक अपने खिलाफ लगे छेड़छाड़ के आरोप से मुक्त होने न्याय मांग रहा है लेकिन सरकार के मुखिया ने भी आंखे फेर ली है।
इस संबंध में सुभाष नगर निवासी नेरन्द्र साहू ने बताया कि मैं बी.ए. प्रथम वर्ष का छात्र हूं और 3 मई 2007 को दुर्ग पुलिस ने उसे किसी सुषमा वर्मा नामक युवती से छेड़छाड़ के जुर्म में गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया। हालांकि दूसरे दिन उसकी जमानत हो गई और 19 जुलाई 2007 को प्रकरण नस्तीबध्द भी हो गया।
नेरन्द्र साहू का कहना है कि उसने इस घटना के बाद सुषमा वर्मा की खोज की लेकिन न तो इस युवती का ही पता चला और न ही इस मामले का गवाह आनंद सेन का ही पता चला है। इस वजह से मेरी भारी बदनामी हुई और मुझे शर्मिन्दगी भी उठानी पड़ी। नरेन्द्र साहू का कहना है कि इस प्रकरण की जांच कर दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर मैने एसपी, कलेक्टर, गृहमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक को आवेदन दिया है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
एक सामान्य आदमी के जीवन के साथ खेलने वालों के खिलाफ सरकार की चुप्पी आश्चर्यजनक है। नरेन्द्र साहू का कहना है कि वे न्याय के लिए तब तक लड़ते रहेंगे जब क उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।