लगता है छत्तीसगढ़ सरकार ने खनिज मामले में तय कर लिया है कि खदानों को लीज में देने की बजाय अवैध उत्खनन से पैसा कमाया जाए। तभी तो यहां लीज देने की प्रक्रिया इतना जटिल कर दिया है कि सालों से लीज देने का आवेदन लंबित है। यही नहीं आए दिन खनिज को लेकर नई-नई नीतियां बनाई जाती है ताकि खनिज की चोरी चलता रहे अधिकारियों की जेब गरम होते रहे। चूंकि यह विभाग स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के पास है इसलिए भी अधिकारियों की दादागिरी चरम पर है।
छत्तीसगढ़ में जिस तरह से लूट मची है उसमें खनिज विभाग के अधिकारी भी पीछे नहीं है। खनिज चोरी की बढ़ती घटना से चिंतित नजर आने वाले अधिकारियों की एफआईआर दर्ज कराने की घोषणा भी टांय-टांय फिस्स हो चुका है। एफआईआर कराने की बात तो दूर नई राजधानी जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र से भी खनिज चोरी को वह नहीं रोक पाई है।
ज्ञात हो कि नई राजधानी क्षेत्र व उससे लगे गांवों में मुरुम व गिट्टी उत्खनन पर प्रतिबंध है लेकिन आज भी सैकड़ों ट्रके मुरुम व गिट्टी शहर में बेधडक़ परिवहन किया जा रहा है। खनिज नाका तो अवैध उत्खनन को रोकने की बजाय वसूली व कमीशनखोरी का अड्डा बन चुका है। यही नहीं दुर्ग जिले के नंदनी अहिवारा क्षेत्र से भी प्रतिदिन सैकड़ों ट्रकें मुरुम व गिट्टी लेकर रायपुर आ रही है। चूंकि इन दोनों ही क्षेत्रों से आने वाले मुरुम-गिट्टी की कीमत अत्यंत कम है इसलिए भी सडक़ निर्माण से लेकर भवन निर्माण में इसका बेतहाशा उपयोग हो रहा है। आश्चर्य का विषय तो यह है कि कुम्हारी बीटीओ नाके में 100 रुपए टैक्स वसूलने के बाद भी रायपुर में सस्ते में कैसे आ रहा है यह जांच का विषय है।
इधर उड़ीसा व महासमुंद में खदान चलाने वाले एक व्यापारी का कहना है कि छत्तीसगढ़ में वही काम कर सकता है जो अवैध काम करेगा हमारे जैसे नियम में काम करने वालों के लिए जगह नहीं है। उन्होंने खदान लीज पर देने की प्रक्रिया को भी घुमावदार बताते हुए यहां तक कहा कि वे यहां की खदान को सिर्फ इसलिए चालू नहीं कर रहे हैं क्योंकि उनसे बेवजह पैसे मांगे जाते हैं। अवैध उत्खनन करने वालों से सांठगांठ की वजह से ही लीज देने की प्रक्रिया को जटिल किया गया है और लीज लेने का आवेदन देने वालों को आफिस का चक्कर लगवाया जा रहा है।
चर्चा तो यह है कि सैकड़ों एकड़ जमीन लीज पर लेने वालों के लिए पूरा अमला लग जाता है और निजी वन जमीनों तक को लीज पर दे दिया जाता है। इसका उदाहरण पलारी के पास स्थित गांव रिंगनी तथा चुआं, मालूकोना, देवरानी जेठानी नामक गांव तक को लीज पर दे दिया गया है और यह सब मंत्री से लेकर अधिकारियों तक से सांठगांठ कर की जाती है।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
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मंगलवार, 2 नवंबर 2010
शनिवार, 29 मई 2010
क्रेशरों को छूट, खदानों में लूट , स्क्वाड को भी जाता है महिना
रायपुर जिले में खनिज से लाखों रुपए के राजस्व का चूना लगा रहे खनिज अधिकारियों ने मंजीत, शर्मा, कुलदीप जैसे लोगों के चल रहे अवैध क्रेशरों के खिलाफ कार्रवाई की बजाय उनसे अवैध वसूली कर अपनी जेबें गरम कर रहे हैं जबकि अवैध कार्यों में लिप्त लोग यह दावा करते नहीं थकते कि उनके द्वारा स्क्वाड तक को पैसा दिया जाता है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विभाग की यह कहानी नई नहीं है। कहानी का नयापन यह है कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। खनिज विभाग में चल रहे लूट-खसोट को लेकर रोज नई कहानी सामने आने लगी है। सालों से राजधानी में पदस्थ अफसरों के वरदहस्त ने अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन करने वालों को इतना ताकतवार बना दिया है कि कई कर्मचारी तो कार्रवाई करने तक से डरते हैं।
हमारे भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि जिले में दर्जनभर से अधिक क्रेशर अवैध ढंग से संचालित है और इन अवैध क्रेशरों के एवज में अधिकारियों को बड़ी रकम भी मिलती है। हालत यह है कि अवैध क्रेशर के संचालन से हर साल सरकार को लाखों-करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है इसके बाद भी इन अवैध क्रेशरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना आश्चर्यजनक है।
बताया जाता है कि खनिज विभाग में बैठे कई अधिकारियों के संरक्षण में हो रहे अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन से होने वाली अवैध कमाई इतनी यादा है कि ऊपर तक एक बड़ी रकम पहुंचाई जाती है इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही है। बहरहाल खनिज विभाग के लूट खसोट की शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद कार्रवाई नहीं होते देख कई लोग आश्चर्यचकित हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विभाग की यह कहानी नई नहीं है। कहानी का नयापन यह है कि इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद भी आज तक कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। खनिज विभाग में चल रहे लूट-खसोट को लेकर रोज नई कहानी सामने आने लगी है। सालों से राजधानी में पदस्थ अफसरों के वरदहस्त ने अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन करने वालों को इतना ताकतवार बना दिया है कि कई कर्मचारी तो कार्रवाई करने तक से डरते हैं।
हमारे भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि जिले में दर्जनभर से अधिक क्रेशर अवैध ढंग से संचालित है और इन अवैध क्रेशरों के एवज में अधिकारियों को बड़ी रकम भी मिलती है। हालत यह है कि अवैध क्रेशर के संचालन से हर साल सरकार को लाखों-करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है इसके बाद भी इन अवैध क्रेशरों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होना आश्चर्यजनक है।
बताया जाता है कि खनिज विभाग में बैठे कई अधिकारियों के संरक्षण में हो रहे अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन से होने वाली अवैध कमाई इतनी यादा है कि ऊपर तक एक बड़ी रकम पहुंचाई जाती है इसलिए कार्रवाई नहीं हो रही है। बहरहाल खनिज विभाग के लूट खसोट की शिकायत मुख्यमंत्री से किए जाने के बाद कार्रवाई नहीं होते देख कई लोग आश्चर्यचकित हैं।
शुक्रवार, 21 मई 2010
खनिज के चेक पोस्ट से हर माह होती है लाखों कमाई
डेढ़ सौ रुपए प्रति ट्रक में अवैध परिवहन
छत्तीसगढ़ में खनिज विभाग के अफसर इन दिनों अवैध परिवहन की आड़ में लाखों रुपए महिना कमा रहे हैं। इस विभाग के मंत्री डॉ. रमन सिंह को इस बात की फुरसत ही नहीं है कि अवैध परिवहन को रुकवाये। उल्टे अफसर उनके नाम से भी वसूली कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में मची राम नाम की लूट से खनिज विभाग के अफसर लाल हो रहे हैं और सरकार को करोड़ों-अरबों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। बेतरतीब अवैध उत्खनन से गांव वालों की नाराजगी अलग दिखलाई पड़ रही है। रायपुर जिले में अवैध उत्खनन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है इसमें मुख्य रुप से वर्मा बंधुओं और कुलजीत मंजीत जैसे नाम आम लोगों की जुबान पर चढने लगा है जो प्रति ट्रक डेढ़ सौ रुपए देकर अवैध परिवहन करते हैं और यह सब खेल रात के अंधेरे में किया जाता है।
खनिज विभाग के सूत्रों के मुताबिक राजधानी में अवैध परिवहन रोकने मुख्यत: आठ पोस्ट है जिनमें जोरा, माना, पिरदा, उरला, मुरा, कचना मंदिर हसौद शामिल हैं राजधानी में मांग को देखते हुए खनिज विभाग ने अवैध परिवहन रोकने इन आठों स्थानों पर बकायदा सुरक्षा गार्ड बैठाये हैं लेकिन ये अवैध परिवहन रोकने की बजाय प्रति ट्रक डेढ़ सौ रुपए वसूल कर अवैध परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं।
बताया जाता है कि हर रोज रात के अंधेरे में डेढ़ दो सौ ट्रकों से अवैध परिवहन हो रहा है और खनिज अधिकारियों को इससे हो रही मोटी कमाई की वजह से कोई कुछ नहीं कर रहा है। हालत यह है कि यह बात सभी जानते हैं कि न वर्मा बंधुओं की खदानें हैं और न ही कुलजीत-मंजीत की ही खदाने हैं लेकिन इसके बाद भी इनके द्वारा बड़े पैमाने पर परिवहन कराया जा रहा है। सूत्रों की माने तो इस अवैध परिवहन से खनिज अफसरों को 25 से तीस लाख रुपए महीना मिलता है और इतनी बड़ी राशि के कारण ही अवैध परिवहन को अनुमति दी जाती है।
इधर खनिज विभाग की इस नीति से पट्टाधारी खदान वाले नाराज हैं लेकिन वे चाहकर भी खनिज विभाग के इस खेल का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। एक खदान मालिक का तो कहना है कि जितने बड़े पैमाने पर यहां भर्राशाही और लूट खसोट की जा रही है वैसा किसी विभाग में नहीं होता। यहीं नहीं खदान मालिकों को आए दिन तरह-तरह से प्रताड़ित किए जाते हैं जबकि अवैध रुप से खनिज बेचने वालों को संरक्षण दिया जाता है।बहरहाल मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विभाग में ही चल रहे लूट-खसोट को लेकर कई तरह की चर्चा है और ऊपर तक पैसा पहुंचाने की चर्चा ने उनकी छवि पर भी दाग लगाना शुरु कर दिया है और यही हाल रहा तो सरकार को कभी भी भारी मुसिबतों का सामना करना पड़ सकता है।
छत्तीसगढ़ में खनिज विभाग के अफसर इन दिनों अवैध परिवहन की आड़ में लाखों रुपए महिना कमा रहे हैं। इस विभाग के मंत्री डॉ. रमन सिंह को इस बात की फुरसत ही नहीं है कि अवैध परिवहन को रुकवाये। उल्टे अफसर उनके नाम से भी वसूली कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में मची राम नाम की लूट से खनिज विभाग के अफसर लाल हो रहे हैं और सरकार को करोड़ों-अरबों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। बेतरतीब अवैध उत्खनन से गांव वालों की नाराजगी अलग दिखलाई पड़ रही है। रायपुर जिले में अवैध उत्खनन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है इसमें मुख्य रुप से वर्मा बंधुओं और कुलजीत मंजीत जैसे नाम आम लोगों की जुबान पर चढने लगा है जो प्रति ट्रक डेढ़ सौ रुपए देकर अवैध परिवहन करते हैं और यह सब खेल रात के अंधेरे में किया जाता है।
खनिज विभाग के सूत्रों के मुताबिक राजधानी में अवैध परिवहन रोकने मुख्यत: आठ पोस्ट है जिनमें जोरा, माना, पिरदा, उरला, मुरा, कचना मंदिर हसौद शामिल हैं राजधानी में मांग को देखते हुए खनिज विभाग ने अवैध परिवहन रोकने इन आठों स्थानों पर बकायदा सुरक्षा गार्ड बैठाये हैं लेकिन ये अवैध परिवहन रोकने की बजाय प्रति ट्रक डेढ़ सौ रुपए वसूल कर अवैध परिवहन को बढ़ावा दे रहे हैं।
बताया जाता है कि हर रोज रात के अंधेरे में डेढ़ दो सौ ट्रकों से अवैध परिवहन हो रहा है और खनिज अधिकारियों को इससे हो रही मोटी कमाई की वजह से कोई कुछ नहीं कर रहा है। हालत यह है कि यह बात सभी जानते हैं कि न वर्मा बंधुओं की खदानें हैं और न ही कुलजीत-मंजीत की ही खदाने हैं लेकिन इसके बाद भी इनके द्वारा बड़े पैमाने पर परिवहन कराया जा रहा है। सूत्रों की माने तो इस अवैध परिवहन से खनिज अफसरों को 25 से तीस लाख रुपए महीना मिलता है और इतनी बड़ी राशि के कारण ही अवैध परिवहन को अनुमति दी जाती है।
इधर खनिज विभाग की इस नीति से पट्टाधारी खदान वाले नाराज हैं लेकिन वे चाहकर भी खनिज विभाग के इस खेल का विरोध नहीं कर पा रहे हैं। एक खदान मालिक का तो कहना है कि जितने बड़े पैमाने पर यहां भर्राशाही और लूट खसोट की जा रही है वैसा किसी विभाग में नहीं होता। यहीं नहीं खदान मालिकों को आए दिन तरह-तरह से प्रताड़ित किए जाते हैं जबकि अवैध रुप से खनिज बेचने वालों को संरक्षण दिया जाता है।बहरहाल मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विभाग में ही चल रहे लूट-खसोट को लेकर कई तरह की चर्चा है और ऊपर तक पैसा पहुंचाने की चर्चा ने उनकी छवि पर भी दाग लगाना शुरु कर दिया है और यही हाल रहा तो सरकार को कभी भी भारी मुसिबतों का सामना करना पड़ सकता है।
रविवार, 9 मई 2010
खनिज में चल रहा है खेल, अवैध उत्खनन वालों से मेल

मुख्यमंत्री के विभाग में खुलेआम लेन-देन
प्रदेश के मुखिया डा. रमन सिंह का खनज विभाग इन दिनों सुर्खियों में हैं अवैध उत्खनन वालों से गलबहियां में मशगुल अधिकारी नियम कानून को ताक पर रखकर पैसा कमा रहे हैं। राजेश शर्मा, शेखर वर्मा और संतोष वर्मा को अवैध उत्खनन करने की छूट दिया गया है जबकि कागजात पूरा नहीं करने वाले अशोक मंजीत कुलदीप और महेश चांदी काट रहे हैं।
कहने को तो खनिज विभाग प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के पास है लेकिन वास्तव में इस विभाग में अधिकारियों के अलावा किसी की नहीं चलती। खुलेआम अवैध उत्खनन करने वालों को संरक्षण दिया जाता है और इसके एवज में मोटी रकम ली जाती है। यही नहीं मंत्रियों को भी कमीशन पहुंचाने की बात करते अधिकारी नहीं थकते जबकि इस विभाग के मंत्री डा. रमन सिंह है। खनिज विभाग में यह खेल नया नहीं है और हर आने वाला अधिकारी अपनी जेबें गरम करने के पीछे नहीं हटता। कभी सचिव तो कभी विभागीय मंत्री के नाम पर अवैध उत्खनन करने वालों को छूट दी जाती है।
ताजा मामला राजेश शर्मा, शेखर वर्मा और संतोष वर्मा सहित आधा दर्जन लोगों का है। बताया जाता है कि इनके पास कोई खदान लीज पर नहीं है इसके बावजूद इन्हें उत्खनन की छूट मिली हुई है और यह सब खुलेआम चल रहा है इनकी शिकायतें तक हो चुकी है लेकिन पैसा खिलाने में माहिर इन लोगों के आगे खनिज अफसरों को भी झूकना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि ऐसे अवैध उत्खनन खनिज अफसरों के इशारें पर चल रहे हैं जिससे पट्टा लेने वाले खदान मालिक बेहद नाराज हैं लेकिन वे चाहकर भी इसलिए कुछ नहीं करते क्योंकि यह सब खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
इसी तरह ऐसे और पट्टाधारियों को खनिज विभाग द्वारा सरंक्षण दिया जा रहा है जिन्होंने आश्यक कागजात तक पूरे नहीं किए हैं। न माईनिंग प्लान का पता है और न ही पर्यावरण विभाग का एनओसी ही इनके पास है और यह सब बात खनिज अधिकारी जानते भी हैं लेकिन यहां से मिल रहे मोटी रकम की वजह से वे खामोश है। बहरहाल मुख्यमंत्री के नाक के नीचे चल रहे इस भ्रष्टाचार के खेल की चर्चा यहां जोरों पर है और मुख्यमंत्री की खामोशी को दूसरे अर्थों में लिया जा रहा है।
बृजमोहन की भी यहां नहीं चलती...
प्रदेश के दमदार माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की भी खनिज विभाग में नहीं चलती। बताया जाता है कि 14 अप्रैल को ग्राम सुराज अभियान के तहत पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल जब दोंदेकला पहुंचे तो वहां उपस्थित ग्रामीणों ने दोंदेकला, मटिया, लालपुर और दोंदेखुर्द में अवैध उत्खनन एवं खनिज के अवैध परिवहन की शिकायत की तब मंत्री जी ने उपस्थित खनिज अधिकारियों को डांटे हुए तत्काल रोक लगाने कहा। इसके बाद उपसंचालक ने आदेश तो निकाल दिया लेकिन जिला खनिज के अधिकारी इस पर अमल करने की बजाय मंत्रीजी का ही मजाक उड़ाते नहीं थकते।
प्रदेश के मुखिया डा. रमन सिंह का खनज विभाग इन दिनों सुर्खियों में हैं अवैध उत्खनन वालों से गलबहियां में मशगुल अधिकारी नियम कानून को ताक पर रखकर पैसा कमा रहे हैं। राजेश शर्मा, शेखर वर्मा और संतोष वर्मा को अवैध उत्खनन करने की छूट दिया गया है जबकि कागजात पूरा नहीं करने वाले अशोक मंजीत कुलदीप और महेश चांदी काट रहे हैं।
कहने को तो खनिज विभाग प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के पास है लेकिन वास्तव में इस विभाग में अधिकारियों के अलावा किसी की नहीं चलती। खुलेआम अवैध उत्खनन करने वालों को संरक्षण दिया जाता है और इसके एवज में मोटी रकम ली जाती है। यही नहीं मंत्रियों को भी कमीशन पहुंचाने की बात करते अधिकारी नहीं थकते जबकि इस विभाग के मंत्री डा. रमन सिंह है। खनिज विभाग में यह खेल नया नहीं है और हर आने वाला अधिकारी अपनी जेबें गरम करने के पीछे नहीं हटता। कभी सचिव तो कभी विभागीय मंत्री के नाम पर अवैध उत्खनन करने वालों को छूट दी जाती है।
ताजा मामला राजेश शर्मा, शेखर वर्मा और संतोष वर्मा सहित आधा दर्जन लोगों का है। बताया जाता है कि इनके पास कोई खदान लीज पर नहीं है इसके बावजूद इन्हें उत्खनन की छूट मिली हुई है और यह सब खुलेआम चल रहा है इनकी शिकायतें तक हो चुकी है लेकिन पैसा खिलाने में माहिर इन लोगों के आगे खनिज अफसरों को भी झूकना पड़ता है। सूत्रों ने बताया कि ऐसे अवैध उत्खनन खनिज अफसरों के इशारें पर चल रहे हैं जिससे पट्टा लेने वाले खदान मालिक बेहद नाराज हैं लेकिन वे चाहकर भी इसलिए कुछ नहीं करते क्योंकि यह सब खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
इसी तरह ऐसे और पट्टाधारियों को खनिज विभाग द्वारा सरंक्षण दिया जा रहा है जिन्होंने आश्यक कागजात तक पूरे नहीं किए हैं। न माईनिंग प्लान का पता है और न ही पर्यावरण विभाग का एनओसी ही इनके पास है और यह सब बात खनिज अधिकारी जानते भी हैं लेकिन यहां से मिल रहे मोटी रकम की वजह से वे खामोश है। बहरहाल मुख्यमंत्री के नाक के नीचे चल रहे इस भ्रष्टाचार के खेल की चर्चा यहां जोरों पर है और मुख्यमंत्री की खामोशी को दूसरे अर्थों में लिया जा रहा है।
बृजमोहन की भी यहां नहीं चलती...
प्रदेश के दमदार माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की भी खनिज विभाग में नहीं चलती। बताया जाता है कि 14 अप्रैल को ग्राम सुराज अभियान के तहत पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल जब दोंदेकला पहुंचे तो वहां उपस्थित ग्रामीणों ने दोंदेकला, मटिया, लालपुर और दोंदेखुर्द में अवैध उत्खनन एवं खनिज के अवैध परिवहन की शिकायत की तब मंत्री जी ने उपस्थित खनिज अधिकारियों को डांटे हुए तत्काल रोक लगाने कहा। इसके बाद उपसंचालक ने आदेश तो निकाल दिया लेकिन जिला खनिज के अधिकारी इस पर अमल करने की बजाय मंत्रीजी का ही मजाक उड़ाते नहीं थकते।
गुरुवार, 4 मार्च 2010
अधिकारियों के इशारे पर होते हैं अवैध उत्खनन,मंत्री के नाम पर कमीशन
यह तो जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का की कहावत को ही चरितार्थ करता है वरना छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर खनिजों का अवैध उत्खनन नहीं होता। कभी कार्रवाई हुई तो खानापूर्ति के लिए की जाती है और अवैध उत्खनन करने वालों से विभागीय मंत्री तक के नाम पर कमीशन लेने की परंपरा है जबकि इन दिनों खनिज विभाग मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के पास है।
छत्तीसगढ़ में खनिजों का अकूत भंडार है और लीज पर खदानें दी जाती है। सभी खदानों का निर्धारित रकबा है लेकिन निर्धारित रकबों के अलावा भी उत्खनन का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है। बताया जाता है कि अवैध उत्खनन तो सीधे अधिकारियों की जानकारी में होने लगा है। मंजीत सिंह ने बताया कि बगैर अधिकारियों की जानकारी के अवैध उत्खनन का काम हो ही नहीं सकता और इसके एवज में लाखों रुपया दिया जाता है।
एक अन्य लीज धारक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि अवैध उत्खनन के खिलाफ जो भी कार्रवाई होती है वह सब पूर्व निर्धारित और खानापूर्ति के लिए की जाती है। एक अन्य ठेकेदार ने बताया कि अकेले रायपुर जिले में हर साल दर्जनों मामले पकड़े जाते हैं और उन पर जुर्माना भी लगाया जाता है। नियमानुसार बार-बार पकड़ाये जाने वाले लीज धारकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है लेकिन कड़ी कार्रवाई तो दूर जुर्माना तक ठीक से नहीं वसूला जाता।
बताया जाता है कि अकेले रायपुर शहर में आधा दर्जन लोग हैं जो बार-बार अवैध उत्खनन करते पकड़ा चुके हैं। इनमें से कई तो प्रभावशाली है और खनिज अधिकारी तक इनसे बात करने से घबराते है ऐसे लोगों की लीज रद्द की जा सकती है लेकिन अधिकारियों को गले तक पैसा खाने की आदत की वजह से सरकार को हर साल लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान केवल रायपुर जिले में हो रहा है।
बहरहाल जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और विभागीय मंत्री अपने में मस्त हो तो प्रदेश की दुर्दशा स्वाभाविक है खनिज विभाग में इन दिनों यही सब हो रहा है अपने सीधे व सरल छवि के चक्कर में मुख्यमंत्री को फुरसत ही नहीं है कि वे अपने ही खनिज विभाग के अधिकारियों के कारनामों पर कार्रवाई करें। ऐसे में सरल और सीधे बने रहने के औचित्य पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
छत्तीसगढ़ में खनिजों का अकूत भंडार है और लीज पर खदानें दी जाती है। सभी खदानों का निर्धारित रकबा है लेकिन निर्धारित रकबों के अलावा भी उत्खनन का कार्य बड़े पैमाने पर चल रहा है। बताया जाता है कि अवैध उत्खनन तो सीधे अधिकारियों की जानकारी में होने लगा है। मंजीत सिंह ने बताया कि बगैर अधिकारियों की जानकारी के अवैध उत्खनन का काम हो ही नहीं सकता और इसके एवज में लाखों रुपया दिया जाता है।
एक अन्य लीज धारक ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा कि अवैध उत्खनन के खिलाफ जो भी कार्रवाई होती है वह सब पूर्व निर्धारित और खानापूर्ति के लिए की जाती है। एक अन्य ठेकेदार ने बताया कि अकेले रायपुर जिले में हर साल दर्जनों मामले पकड़े जाते हैं और उन पर जुर्माना भी लगाया जाता है। नियमानुसार बार-बार पकड़ाये जाने वाले लीज धारकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है लेकिन कड़ी कार्रवाई तो दूर जुर्माना तक ठीक से नहीं वसूला जाता।
बताया जाता है कि अकेले रायपुर शहर में आधा दर्जन लोग हैं जो बार-बार अवैध उत्खनन करते पकड़ा चुके हैं। इनमें से कई तो प्रभावशाली है और खनिज अधिकारी तक इनसे बात करने से घबराते है ऐसे लोगों की लीज रद्द की जा सकती है लेकिन अधिकारियों को गले तक पैसा खाने की आदत की वजह से सरकार को हर साल लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान केवल रायपुर जिले में हो रहा है।
बहरहाल जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और विभागीय मंत्री अपने में मस्त हो तो प्रदेश की दुर्दशा स्वाभाविक है खनिज विभाग में इन दिनों यही सब हो रहा है अपने सीधे व सरल छवि के चक्कर में मुख्यमंत्री को फुरसत ही नहीं है कि वे अपने ही खनिज विभाग के अधिकारियों के कारनामों पर कार्रवाई करें। ऐसे में सरल और सीधे बने रहने के औचित्य पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
मंगलवार, 2 मार्च 2010
कलेक्टर द्वारा निरस्त खनिपट्टे को बहाल कराने गणितबाजी...,मुख्यमंत्री के विभाग में खुलेआम लेन-देन

छत्तीसगढ़ में खनिज विभाग में इन दिनों जबरदस्त घपले होने लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के विभाग होने के बावजूद यहां के अधिकारियों में डर भय नहीं है और वे नियम विरुध्द उन खनिपट्टों को बहाल करने आमदा है जिन्हें कलेक्टर ने निरस्त कर दिया है। इतना ही नहीं दर्जनभर खनिपट्टा धारकों से पैसा लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई रोकने का भी सनसनी खेज मामला सामने आया है।
छत्तीसगढ़ खनिज के मामले में धनी प्रदेश है। कमाऊ माने जाने वाले इस विभाग को हथियाने कईयों की नजर रही है इसलिए मुख्यमंत्री ने इस विभाग को अपने पास रखा है। राजस्व देने वाले इस विभाग में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम पर है। चहेतों को खदान देने की कोशिश के साथ अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन को संरक्षण देने के लिए यह विभाग सदैव चर्चा में रहा है। नियमों की अनदेखी कर जेबें गरम करने की परिपाटी ने अफसरों को बेलगाम कर दिया है और अब तो वह मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना तक करने लगे हैं।
ऐसा ही एक मामला दोदेंखुर्द के खनिपट्टा का है। यह पट्टा सबसे पहले मंत्री के एक चहेते को दिया गया था लेकिन उसने यह खदान चलाने की बजाय इसे मनीष डागा को बेच दिया। नियमानुसार हर पट्टाधारी को खनन के संबंध में हर तीन माह में रिपोर्ट देना होता है इसके अलावा हर 6 माह और एक साल में विस्तृत देनी होती है कि उसने कितना खनन किया और लेण्ड क्षतिपूर्ति की राशि भी देना होता है तथा हर पांच साल में माइनिंग क्लोजर जैसी रिपोर्ट देनी होती है। लेकिन बताया जाता है कि मनीष डागा ने कुछ भी नहीं किया।
बताया जाता है कि जांच में सही पाए जाने पर पिछले साल की 21 जुलाई को कलेक्टर ने इस पट्टे को निरस्त कर जमा राशि राजसात करने का प्रस्ताव सचिव को दे दिया। बताया जाता है कि दर्जनभर आरोप लगाकर यह कार्रवाई की गई है। इधर हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक अब इस कलेक्टर के आदेश को रद्द कराने उच्च स्तर पर प्रयास शुरु हो गए हैं और प्रदेश के एक दमदार भाजपा नेता के इशारे पर लेन-देन का खेल शुरु हो गया है।
बताया जाता है कि रायपुर जिले में ही ऐसे एक दर्जन से यादा खदानें है जहां नियमों की घोर अवहेलना हो रही है जिसके चलते पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है लेकिन ये लोग पहुंचवाले है इसलिए इनके खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय लेन देन कर मामला सुलझाया जा रहा है। खनिज अधिकारी ऐसे लोगों को खानापूर्ति के लिए नोटिस जारी करता है और लेन-देन कर मामला रफा-दफा कर दिया जाता है।
बहरहाल मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के विभाग में चल रहे खुले आम लेन-देन की भारी चर्चा है और कहा जा रहा है कि इसके चलते कभी भी कोई बड़ी घटना से मुख्यमंत्री की छवि पर असर पड़ सकता है।
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