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शनिवार, 16 फ़रवरी 2013

पुलक से पल्लवित होगा मूणत का खेल



सीतापुर तबादले में जाने के चार माह में ही वापसी
 एक तरफ जब पुरी भाजपा केन्द्र की कांग्रेस सरकार के भ्रष्टाचार पर हल्ला मचा रही है तो वहीं दूसरी तरफ प्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं । वैसे तो मुख्यमंत्री सहित सारे मंत्रियों पर भ्रष्ट अफसरों को बचाने का आरोप है लेकिन प्रदेश सरकार के मंत्री राजेश मूणत ने जिस तरह से चार महिने में ही पुलक भट्टाचार्य को वापस अपने विभाग में बुला लिया उससे सरकार की किरकिरी ही हो रही है ।
बेलगाम अफसर या प्रशासनिक आतंक की कहानी थमने का नाम ही नहीं ले रहा हैं । यही वजह है कि मंत्रियों की करतूत से जहां आम आदमी का बुरा हाल है वही भ्रष्ट अफसरों के मजे हैं । खासकर राजधानी में जमीन से जुड़े मामलों में मंत्रियों की रूचि देखते ही बन रही है । चौतरफा अंधेरगर्दी का आलाम यह है कि चहेते अफसरों के लिए नियम कानून तक ताक पर रखे जा रहे हे । यही वजह है कि चार महिने पहले नगर निगम रायपुर से सीतापुर भेजे गए तहसीलदार पुलक भट्टाचार्य की न केवल वापसी कर ली गई बल्कि कमल विहार जेसे महत्वपूर्ण योजना में बिठा दिया गया । कहां जाता है कि यह सारा खेल प्रदेश सरकार के मंत्री राजेश मूणत का है और उन्ही की रूचि के चलते पुल्लक भट्टाचार्य जैसे अफसर की चार महिने में ही वापसी हो गई ।
सूत्रों का कहना है कि पुलक भट्टाचार्य की वापसी के पीछे सिर्फ कमल विहार प्रोजेक्ट ही नहीं है बल्कि जमीन के दूसरे मामले भी है । दरअसल पुलक भट्टाचार्य पर यह भी आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान राजधानी व इसके आस पास की जमीनों का जबर दस्त खेल हुआ है । सरकारी जमीनों की बंदर बांट से लेकर कब्जे की कहानी में पुलक भट्टाचार्य का नाम है और पुलक की वापसी की वजह भी जमीन ही है । सूत्रों की माने तो पुलक के पास नामी-बेनामी जमीनों की भरपूर जानकारी है और मंत्रियों को खुश रखने में माहिर मूणत को चार माह पहले दबाव में जब सीतापुर तबादला किया गया था तभी से उनकी वापसी की चर्चा रही है । कहा जाता हे कि तबादले के बाद भी राजेश मूणत से उनकी नजदीकी की चर्चा होते रही है ।
बंगाली मूल के इस अफसर की करतूतों की वैसे तो कई तरह की चर्चा है और कहां जाता है कि मंत्रियों के शह पर उन पर बेहिसाब संपत्ति अर्जित करने का भी आरोप है । कहा जाता है कि पुलक भट्टाचार्य की करतूतों से पार्टी के कई कार्यकर्ता नाराज है और यही वजह है कि संगठन खेमें ने भी उनकी वापसी का विरोध किया था लेकिन राजेश मूणत के जिद के आगे किसी की नहीं चली । इधर पुलक भट्टाचार्य की वापसी को लेकर कई ऐसे बिल्डर भी खुश है जो अवैध कब्जे में माहिर है जबकि रायपुर विकास प्राधिकरण में इसका भारी विरोध है ।
बहरहाल पुलक की वापसी से राजेश मूणत का कितना भला होगा यह तो वही जाने लेकिन सरकार के इस रूख से भाजपा को जरूर नुकसान हो सकता है ।

रविवार, 5 सितंबर 2010

मंत्री ही नहीं मुख्यमंत्री के पीए से भी सेटिंग...

दंतेवाड़ा शिक्षा अधिकारी का कारनामा...
 मूल सेवा कही नहीं हो तब भी कोई व्यक्ति जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर कैसे बना रह सकता है यह डॉ. एच.आर. शर्मा से सीखा जा सकता है? कहा जाता है कि सेटिंग में माहिर डॉ.शर्मा की विभागीय मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ही नहीं विक्रम सिसोदिया से भी जबरदस्त सेटिंग है और इसी वजह से वह पद पर बना हुआ है।
दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में जिस दमदारी से भ्रष्टाचार हो रहा है और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिल रहा है वह दांतों तले ऊंगली दबाने जैसा है। पीडब्ल्यूडी से लेकर पर्यटन और शिक्षा विभाग में भी जिस तरह से दागदार और विवादास्पद व्यक्तियों को प्रमुख पदों पर बिठाया गया है वह शासन की मंशा को भी स्पष्ट करता है।
कवर्धा में मामूली असिस्टेंट प्रोफेसर रहे डॉ. हरे राम शर्मा ने जिस षडय़ंत्र के तहत दंतेवाड़ा शिक्षा अधिकारी के साथ साथ जिला समन्वयक परियोजना अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार लिया है वह अच्छे अच्छों का होश उड़ाने के लिए काफी है। बताया जाता है कि हाईकोर्ट द्वारा डॉ. शर्मा का संविलियन रद्द करने के बाद वे किसी भी विभाग में मूल सेवा में नहीं है लेकिन शासन स्तर पर उन्हें संविदा नियुक्ति दी गई। संविदा नियुक्ति किस आधार पर और जिस तरह से आनन-फानन में दी गई उसकी अलग ही कहानी है और कहा जाता है कि उच्च स्तर पर हुई सेटिंग से ही यह संभव हुआ है।
हमारे भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक संविलियन के लिए डॉ. शर्मा ने कवर्धा क्षेत्र के कांग्रेस विधायक के अलावा भाजपा की महिला सांसद का भी सहारा लिया था लेकिन मामला हाईकोर्ट जा पहुंचा और हाईकोर्ट ने उनके संविलियन को रद्द कर दिया। ऐसे में उन्होंने नौकरी से पृथक करने की बजाय उन्हें संविदा नियुक्ति देकर जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर किस उद्देश्य से बिठाया गया यह आसानी से समझा जा सकता है।
हालांकि शिक्षा विभाग में विवादास्पद लोगों को महत्वपूर्ण पद पर बिठाना नया नहीं है। बृजमोहन अग्रवाल के शिक्षामंत्री बनते ही तवारिस मैडम की बहाली हुई तो मैडल आर. बाम्बरा को जिला शिक्षा अधिकारी से नवाजा गया। लेकिन ये दोनों शिक्षा विभाग की सेवा में हैं लेकिन डॉ. एच.आर. शर्मा तो शिक्षा विभाग की सेवा में ही नहीं है और ऐसे में उन्हें दंतेवाड़ा की जिम्मेदारी देने की जांच हुई तो सीएम हाऊस पर भी विवाद के छींटे उड़ेंगे।
बहरहाल डॉ. एच.आर.शर्मा के क्रियाकलापों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं कहा जाता हैकि नक्सलियों की आड़ लेकर यहां बड़े पैमाने पर खपलेबाजी हो रही है खासकर परियोजना समन्वयक में तो भ्रष्टाचार के जबरदस्त चर्चे हैं।

शुक्रवार, 27 अगस्त 2010

बृजमोहन ने दी छूट और हरे राम ने की लूट

दंतेवाड़ा में नक्सलियों की आड़ में लूट
 यह प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की दमदारी नहीं तो और क्या है कि जिस व्यक्ति का किसी भी सरकारी विभाग में सेवा नहीं है और जिसके संविलियन को हाईकोर्ट तक ने अवैध करार दिया और पीएससी ने तीन बार टर्न कर दिया ऐसे व्यक्ति को न केवल दंतेवाड़ा जिला का शिक्षा अधिकारी बनाया गया है बल्कि शिक्षा मिशन का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। बात इतनी ही नहीं है यहां चल रहे लूट-खसोट का यह आलम है कि नक्सली भी शरमा जाए।
कहा जाता है कि शिक्षा विभाग देश का भावी पीढ़ी तैयार करता है और जब इस विभाग को ही जब भ्रष्टाचार का अड्डा बना दिया जाए तो भावी पीढ़ी कैसे होगी इसकी कल्पना से ही होश उड़ जाते है। वैसे इस विभाग में शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल जिस तरह से दमदारी दिखा रहे हैं और तमाम भ्रष्ट और विवादास्पद लोगों को प्रमुख पदों पर बिठाया जा रहा है वह आने वाले समय के लिए घातक माना जा रहा है। तवारिस और बाम्बरा जैसे लोगों को तवज्जों दिए जाने के बाद सिंह जैसों को अपने बंगले में बिठाने के लिए चर्चित शिक्षा विभाग इन दिनों दंतेवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी एचआर शर्मा की कारगुजारियों और मंत्री के संरक्षण के कारण चर्चा में है।
एचआर शर्मा को दंतेवाड़ा में शिक्षा अधिकारी के साथ-साथ शिक्षा मिशन में जिला परियोजना समन्वयक का प्रभार भी दिया गया है। वक्त पढऩे पर राजनैतिक निष्ठा बदलने के आरोपित एचआर शर्मा कभी कवर्धा में असिसेंट प्राध्यापक रहे हैं। बताया जाता है कि तब इनकी निष्ठा कांग्रेस के प्रति थी और इसी के चलते इनके संविलियन का प्रयास कांग्रेस विधायक ने की थी लेकिन यह हो नहीं पाया और सत्ता बदलते ही इनके संविलियन का प्रयास भाजपा की महिला पूर्व सांसद ने की और इस तात्कालिन सांसद के चुनाव के लिए फंड भी दिया गया। इस प्रयास के चलते ही शिक्षा विभाग के आवेदन पर पीएससी ने 3 सामान्य पद में से एक पद विलोपित कर दिया था। कहा जाता है कि खेल यही से शुरु हुआ और जब एचआर शर्मा यानी हरेराम शर्मा की फाईल पहुंची तो पता चला कि उनका संविलियन ही अवैध है और भर्ती नियम 1982 की कंडिका 4 की अनदेखी की गई है और संविलियन किया गया है।
बताया जाता है कि मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा तो हाईकोर्ट ने संविलियन रद्द कर दिया। इस सबके बाद भी वे दंतेवाड़ा में जिला शिक्षा अधिकारी बनाए गए। नागरिक आपूर्ति निगम से हकाले जाने की अपनी कहानी है। दंतेवाड़ा में जिस पैमाने पर घपलेबाजी हो रहे हैं उसे सूचना के अधिकार के तहत मांगे गए हैं जिसमें स्कूल भवन ढहाने से लेकर केश पेमेंट की लंबी दस्तान है। बताया जाता है कि इस सबकी शिकायत शिक्षा मंत्री से लेकर राज्यपाल तक की जाती रही है लेकिन नामालूम कारणों से कार्रवाई टलते रही है। बहरहाल दंतेवाड़ा शिक्षा और शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल इन मामलों में चर्चा में है देखना है मुख्यमंत्री इस मामले में क्या करते हैं?

मंगलवार, 10 अगस्त 2010

मोहन-मूणत की लड़ाई हाईकमान तक

 छत्तीसगढ़ के दो मंत्रियों बृजमोहन अग्रवाल और राजेश मूणत के बीच चल रही लड़ाई थमने का नाम ही नहीं ले रहा है और अब यह मामला हाईकमान के पास जा पहुंचा है। कहा जाता है कि कभी भी दोनों मंत्रियों की दिल्ली या नागपुर में पेशी हो सकती है।
ज्ञात हो कि दोनों के बीच राजनैतिक लड़ाई की खबर राय बनने से पहले से है और पिछले कार्यकाल में तो जब राजेश मूणत पीडब्ल्यूडी मंत्री थे तब नए सर्किट हाउस से लेकर कई मामले उठे थे और राजेश मूणत को घेरने की जबरदस्त कोशिश भी हुई थी। कहा जाता है कि विधानसभा चुनाव में भी राजेश मूणत को हराने भाजपा के बागी प्रत्याशी वीरेन्द्र पाण्डेय की मदद की गई थी। बताया जाता है कि इस बार टिकरापारा में तोड़फोड़ के बाद दोनों में दूरी बढ़ गई है और इसका नजारा हरियर छत्तीसगढ़ के कार्यक्रम में स्पष्ट रुप से दिखलाई पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक दोनों के बीच चल रही गुटबाजी से आम कार्यकर्ता बेहद नाराज है और गुटबाजी के चलते कार्यों में भी बाधा आई है। इस बढ़ती लडाई की शिकायत पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और संगठन मंत्री से लेकर प्रदेश प्रभारी तक की जा चुकी है। लेकिन किसी ने भी इस ओर जब ध्यान नहीं दिया तो पूरे मामले की अखबारों के कटिंग के साथ हाईकमान को शिकायत भेजी गई है।
शिकायत कर्ताओं ने कहा है कि दोनों मंत्रियों की लड़ाई की वजह से ही निगम चुनाव में भाजपा को अपने ही गढ़ में हार का मुंह देखना पड़ा है। यही नहीं गुटबाजी बढ़ गई है तथा आने वाले दिनों में इसका घातक असर होगा। सूत्रों के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल की शिकायत को हाईकमान ने गंभीरता से सुना है और 15 अगस्त के बाद कभी भी दोनों मंत्रियों की पेशी हो सकती है।

शुक्रवार, 6 अगस्त 2010

पर्यटन मंडल में एमजी के आगे मंत्री-सचिव भी बेबस

असली एमडी की भूमिका में श्रीवास्तव?
भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुके पर्यटन मंडल में जनरल मैनेजर एमजी श्रीवास्तव को ही असली एमडी माना जाता है। उनका रुतबा ऐसा है कि अच्छों-अच्छों की बोलती बंद हो जाए। एमडी से लेकर सचिवों तक को अपने ऊंगली में नचाने का दावा तो किया ही जाता है। चर्चा इस बात की भी है कि विभागीय मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की दमदारी भी पर्यटन मंडल में आकर खत्म हो जाता है।
पर्यटन मंडल में घपलेबाजी के किस्से नए नहीं है। पर्यटन के प्रचार-प्रसार में छत्तीसगढ़ सरकार ने इस विभाग को लम्बा-चौड़ा बजट भी दिया है और लम्बा-चौड़ा बजट होने के कारण यहां जबरदस्त भ्रष्टाचार हुआ। प्रचार-प्रसार सामग्री, स्टेशनरी घोटाले, मोटल निर्माण से लेकर घास लगाने की बात हो या बाउण्ड्री निर्माण सभी में जबरदस्त घोटाले हुए। कई मामलों के तो पुख्ता सबूत भी सामने आए लेकिन एमजी श्रीवास्तव पर किसी ने ऊंगली उठाने की हिमाकत नहीं की और जिन लोगों ने ऊंगली उठाने की कोशिश भी की तो उन्हें पर्यटन मंडल के बाहर का रास्ता दिखा दिया।
सेवाकाल से ही विवादों में रहे एमजी श्रीवास्तव के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने अकूत धन संपदा अर्जित की है और रायपुर में विशाल नगर स्थित उनका मकान तो सिर्फ छाया मात्र है। आर्थिक समायोजन में माहिर एमजी श्रीवास्तव को लेकर यह भी चर्चा रही कि भले ही मध्यप्रदेश के जमाने में वे नौसिखिया थे इसलिए फंस गए लेकिन अब आयकर विभाग भी उनका बाल बांका नहीं कर सकता।
अहमदाबाद से लेकर भुवनेश्वर और मुंबई में पर्यटन मंडल के इस कथित एमडी के जलवे की चर्चा थमने का नाम नहीं लेता। यही नहीं पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल जैसे दमदार माने जाने वाले मंत्री के नोटशीट की भी धाियां उड़ाने वाले एमजी श्रीवास्तव के खिलाफ कार्रवाई करने से पुलिस भी हिचकती है। बताया जाता है कि टूरिम बोर्ड में आर्किटेक्ट का काम करने वाले हितेन कोठारी ने पुलिस अधीक्षक को लिखित में शिकायत की थी कि पर्यटन मंडल के जनरल मैनेजर एमजी श्रीवास्तव ने उन्हें गोली से उड़ा देने की धमकी देते हुए गाली गलौज किया है। हितेन कोठारी ने तो एमजी श्रीवास्तव पर पेंचकस से भी हमला करने का आरोप लगाया है।
बताया जाता है कि पुलिस अधीक्षक को किए गए इस शिकायत में कार्रवाई तो दूर जांच नहीं की गई। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि एमजी श्रीवास्तव की दमदारी कितनी है और सचिव से लेकर मंत्री तक उनके कारनामों पर क्यों खामोश हैं।
बहरहाल एमजी श्रीवास्तव के हर मामले में साफ बच निकलने को लेकर कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि उनके कारनामों के चलते पर्यटन विकास की कई योजना अधर में लटक गई है।

शुक्रवार, 30 जुलाई 2010

अतिक्रमण तोड़ने का आदेश निकल गया लेकिन मंत्री ने रुकवा दी...

तालाब पर हुआ है अतिक्रमण
छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रियों की करतूतें थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ मुख्यमंत्री पानी बचाने आंदोलन का आगुआ बने हैं दूसरी तरफ उन्हीं के मंत्री तालाब पाटने वाले को बचा रहे हैं। मामला सरजूबांधा तालाब पाटने का है। इस पर हुए अतिक्रमण को तोड़ने का आदेश तक हो गया है लेकिन अतिक्रमणकारी नवल किशोर अग्रवाल की पहुंच दमदार मंत्री तक है इसलिए निगम भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक लोहार चौक निवासी नवल किशोर अग्रवाल के द्वारा टिकरापारा स्थित सरयूबांधा तालाब में कब्जा किया है। इनके द्वारा यहां किए लम्बे चौड़े कब्जे में प्रिटिंग प्रेस चलाने की भी खबर है। बताया जाता है कि जब इसकी खबर पार्षद सतनाम सिंह को हुई और लोगों ने पार्षद से शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की तो पार्षद ने इसकी शिकायत निगम आयुक्त से की।
इधर इस मामले में जोन 6 के तत्कालीन कमिश्नर ने 1 जून 2010 को पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर नवल किशोर अग्रवाल के कब्जे को हटाने पुलिस बल की मांग की। बताया जाता है कि जैसे ही अतिक्रमण हटाने की जानकारी नवल किशोर अग्रवाल को हुई उन्होंने दमदार मंत्री से एप्रोच किया और बताया जाता है कि दमदार मंत्री ने न केवल जोन कमिश्नर को हड़काया बल्कि पुलिस को भी फोन कर बल नहीं उपलब्ध कराने कह दिया।
इधर विभागीय मंत्री से भी नवलकिशोर अग्रवाल के संबंध की चर्चा है और लेन देन की चर्चा के बीच यह भी चर्चा है कि निगम ने अब इस अतिक्रमण को हटाने से पल्ला झाड़ लिया है। बताया जाता है कि इस मामले को लेकर टिकरापारा में जबरदस्त आक्रोश है। एक तरफ प्रदेश के मुखिया पानी बचाने की नाटकबाजी में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं शिवनाथ नदी का इंजीनियर की तरह हवाई सर्वेक्षण में लाखों रुपए फूंके जा रहे हैं और दूसरी तरफ राजधानी में तालाब पाटने में मंत्रियों की रूचि है। ज्ञात हो कि आमापारा स्थित कारी तााब को भी इसी दमदार मंत्री की वजह से पाटा जा रहा है जबकि तेलीबांधा से लेकर पुरानीबस्ती के तालाबों पर अतिक्रमण की अपनी कहानी है।
बहरहाल सरयूबांधा तालाब के कब्जे हटाने का मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय है। चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री पानी बचाने के लिए भाषणबाजी बंद कर अपने मंत्रियों की करतूतों पर लगाम लगाए तो राजधानी के कई तालाब व बगीचे बच सकते हैं।

बुधवार, 28 जुलाई 2010

सजायाफ्ता को बर्खास्त करने की बजाय बहाल कर दिया



ऐसी दमदारी तो सिर्फ
बृजमोहन के विभाग में ही
ऐसी दमदारी तो प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में ही हो सकती है। जिस व्यक्ति को घूस लेने के आरोप में सजा सुनाई गई हो उसे बर्खास्त करने की बजाय शिक्षा विभाग ने बहाल कर दिया और अब जब मामला मुख्यमंत्री के जिले का हो तो क्या कहना।
मामला जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर कवर्धा में रहे नेतराम वर्मा का है। नेतराम वर्मा को एंटी करप्शन ब्यूरो ने 31 जुलाई 2001 को दो हजार रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। नेतराम वर्मा ने नरेन्द्र कुमार मिश्रा को पदोन्नति देने पैसे की मांग की थी।
इस मामले में 21 जुलाई 2008 को कवर्धा के विशेष न्यायाधीश ने नेतराम वर्मा को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अलग-अलग घटनाओं के तहत दोषी पाते हुए क्रमश: 6 माह और एक साल के सश्रम कारावास और दस हजार रुपए की सजा सुनाई थी। यह सजा साथ-साथ चलना था। सजा के बाद एंटी करप्शन ब्यूरों ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर नेतराम वर्मा को बर्खास्त करने की गुजारिश की।
आश्चर्य का विषय तो यह है कि शिक्षा विभाग ने इस घूसखोर अधिकारी को बर्खास्त करने की बजाय इन्हें कोरिया जिले में प्राचार्य बना दिया। इस संबंध में जब संचालक लोक शिक्षण संचालनालय के.आर. पिस्दा से बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी बहाली का निर्णय शासन स्तर पर किया गया है। इस संबंध में जब पतासाजी की तो विभाग में उच्च स्तर पर लेन-देन की चर्चा सामने आई और मंत्री पर भी आरोप लगाए गए।
दुनिया में अपनी तरह का मिसाल कायम करने वाले इस कारनामें से शिक्षा जैसे पवित्र संस्थानों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। इस मामले में मंत्री बृजमोहन अग्रवाल से संपर्क की कोशिश की गई लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे।

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

मत्स्य में भी चम्पू की चौधराहट


हाईकोर्ट द्वारा खारिज करने के बाद भी पदोन्नति दी जा रही
यह सरकार की मनमानी है या विभागीय मंत्री चन्द्रशेखर साहू का दंभ यह तो आम लोग ही जाने लेकिन कलेक्टर से लेकर संचालक तक ने जिन्हें अनुभव प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया और हाईकोर्ट ने संविलियन की याचिका खारिज कर दी इन लोगों को न केवल परमानेंट नौकरी दी जा रही है बल्कि उन्हें प्रमोशन देने की तैयारी भी की जा रही है।
मामला मछली पालन विभाग का है। इस विभाग में चल रहे भ्रष्टाचार की कहानी तो अलग ही है लेकिन जिस तरह से उच्च स्तर पर यहां मनमानी चल रही है वह अंयंत्र कहीं देखने को नहीं मिलेगा। आश्चर्य का विषय तो यह है कि यहां चल रहे मनमानी को कृषि मंत्री चन्द्रशेखर साहू का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। बताया जाता है कि यहां एजेंसी के कर्मचारियों को जिस तरह से संविलियन किया गया वहीं से गड़बड़ी शुरू हुई।
सूत्रों के मुताबिक बी.के. शुक्ला और एम.डी. त्रिपाठी एजेंसी में मत्स्य पालन प्रसार कर्मचारी के रूप में पहले पदस्थ थे। इसके बाद जब एजेंसी बंद हुई तो इन्हें विभाग में संविदा कर्मी के रूप में रख लिया गया। इसके बाद इनका संविलियन का प्रयास हुआ और उच्च स्तर पर लेन-देन कर संविलियन कर दिया गया।
बताया जाता है कि लोकसेवा आयोग के द्वारा चयन के समय जब इन दोनों कर्मचारियों के नाम सामने आये तो कलेक्टर ने अनुभव प्रमाण पत्र देने से मना कर दिया चूंकि तब एजेंसी का चेयरमेन कलेक्टर होता है इसलिए अनुभव प्रमाण पत्र के अभाव में इनका चयन नहीं होना था। लेकिन सूत्रों के मुताबिक शुक्ला-त्रिपाठी की जोड़ी ने तब तत्कालीन संचालक एस.एन. चटर्जी से सांठ-गांठ कर अनुभव प्रमाण पत्र हासिल कर लिया और इस मामले में बड़ी रकम के लेन-देन की चर्चा है।
चूंकि एजेंसी के कर्मचारी मत्स्य विभाग का कर्मचारी नहीं हो सकता इसलिए संविलियन का मामला हाईकोर्ट चला गया और हाईकोर्ट ने 2242005 के द्वारा शुक्ला त्रिपाठी के संविलियन संबंधी मामला खारिज कर दिया। लेकिन इस मामले को छिपा दिया गया और इन्हें जानबूझकर शासन के कर्मचारियों को मिलने वाला समस्त लाभ दिया गया। इधर इतने लफड़े के बाद भी इन दोनों को पदोन्नति देने की तैयारी की जा रही है। बताया जाता है कि इस मामले में कृषि मंत्री की रूचि से रायपुर ही नहीं राजनांदगांव में भी जबरदस्त चर्चा है।
हमारे राजनांदगांव संवाददाता के मुताबिक एजेंसी के कर्मचारियों की संविलियन और पदोन्नति के मामले को लेकर यहां जबरदस्त चर्चा है और बताया जाता है कि कृषि मंत्री ने इन दोनों कर्मचारियों की शिकायत पर खामोशी ओढ़ ली है। बहरहाल मछली पालन विभाग में चल रहे इस घपले बाजी में मंत्री चन्द्रशेखर साहू का नाम सामने आने से जबरदस्त हड़कम्प है और आने वाले विधानसभा में भी यह मामला रंग ला सकता है।

गुरुवार, 22 जुलाई 2010

गार्डन की जमीन को हड़प लेना चाहता है मंत्री का भाई


कॉलोनीवासी भयभीत, कुछ कोर्ट गए
प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री का भाई की करतूत थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। हालत यह है कि उनकी इस करतूत की शिकायत मुख्यमंत्री से भी की गई। पहले ही विवादस्पद जमीन कौड़ी के मोल खरीदने के बाद भाई की पहुंच का फायदा उठाकर जमीन खाली कराने में माहिर इस मंत्री भाई की नजर इस बार गीताजंलि नगर के गार्डन के लिए छोड़ी जमीन पर है।
छत्तीसगढ़ में वैसे तो राम नाम की लूट नई नहीं है लेकिन मंत्रियों के रिश्तेदारों में जिस तरह से सत्ता का दुरुपयोग कर अनाप-शनाप काम किए जा रहे हैं किसी से छीपा नहीं है। बताया जाता है कि जब बृजमोहन अग्रवाल गृहमंत्री थे तब उनके परिवार वालों के कारनामों की वजह से ही उन्हें गृहविभाग छोड़ना पड़ा था। इसके बाद उनके रिश्तेदारों द्वारा चोरी का लोहा ट्रक के ट्रक गायब करके हजम करने को लेकर सरकार की मुसिबत बढ ग़ई थी। कैलाश अग्रवाल व उसके दामाद दिनेश अग्रवाल पर सरकार को मजबूरी में शिकंजा कसना पड़ा था।
इधर दमदार मंत्री के भाई की नाच नचैया के साथ-साथ जमीनी कारोबार में दिलचस्पी ने नया विवाद खड़ा किया है। इस मंत्री भाई पर दादागिरी और पहुंच के बल पर समता कॉलोनी में मोहबिया वकील की जमीन कब्जा करवाने के अलावा दिल्ली के किसी डॉ. मल्होत्रा की जमीन पर कब्जा करने का आरोप भी लग चुका है। ताजा मामला गीतांजलि नगर में गार्डन के लिए छोटी गई जमीन के कब्जे को लेकर है। कहा जाता है कि इस जमीन पर बकायदा गार्डन के लिए सुरक्षित बोर्ड लगाए गए थे और पिछले हफ्ते अचानक किसी ने यह बोर्ड हटाकर इस जमीन पर कब्जे की कोशिश की। बताया जाता है कि जब कॉलोनीवासियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें इसी दमदार मंत्री के भाई के नाम पर डराया-धमकाया गया।
इस संबंध में जब हमने डॉ. कबीर से संपर्क करना चाहा तो वे उपलब्ध नहीं हुए लेकिन कॉलोनीवासियों ने इस दमदार मंत्री के भाई की करतूत पर तीव्र नाराजगी जाहिर की दूसरी तरफ जब इस मामले में गीताजंलि सोसायटी के प्रकाश दावड़ा से संपर्क किया तब पता चला कि कब्जे को रोकने न्यायालय से स्थगनादेश लाने की तैयारी की गई है। बहरहाल दमदार मंत्री के भाई की जमीनी मामले में गुण्डागर्दी थमने का नाम नहीं ले रहा है और ऐसा ही चलता रहा तो किसी दिन सरकार को जवाब देना मुश्किल हो जाएगा।

सोमवार, 19 जुलाई 2010

स्टेट प्लेन से बृजमोहन ने की पारिवारिक यात्रा


प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के द्वारा राय सरकार की हवाई जहाज से की गई पारिवारिक यात्रा पर विवाद खड़ा होने लगा है। हालांकि कांग्रेस के किसी बड़े नेता ने फिलहाल इसमें कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है लेकिन इस मामले को विधानसभा में उठाए जाने की चर्चा है।
वैसे तो पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का विवादों से पुराना नाता है और इस बार वे पारिवारिक यात्रा में स्टेट प्लेन का उपयोग कर विवाद में आ गए है। हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक पीडब्ल्यूडी मंत्री ने गुरुवार को दोपहर करीब साढ़े 12 बजे स्टेट प्लेन लेकर परिवार सहित महाराष्ट्र गए थे जहां से वे शुक्रवार को दोपहर लगभग 2.30 बजे लौटे। उनके साथ उनकी धर्मपत्नी, पुत्र के अलावा भतीजे व बहनोई के साथ उनके पीए श्री साहू भी थे। हालांकि वे किस कार्यक्रम में और कहां गए थे यह पता नहीं चला है क्योंकि उनका ससुराल गोंदिया है जबकि उनके अकोला जाने की चर्चा है।
उल्लेखनीय है कि स्टेट प्लेन के दुरुपयोग की चर्चा काफी अरसे से रही है और अक्सर कोई न कोई सरकारी कार्यक्रम तय कर इस तरह की हवाई यात्रा की जाती है। इस संबंध में हमने संबंधित पक्षों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। बहरहाल स्टेट प्लेन से पारिवारिक यात्रा को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और कहा जा रहा है कि भ्रष्टाचार को लेकर सरकार बुरी तरह घिर चुकी है ऐसे में मंत्रियों की करतूतों से पार्टी की छवि पर भी बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

रविवार, 11 जुलाई 2010

खिलाफ छापा तो नोटिस भिजवाई

इस सरकार में नौकरशाह किस कदर हावी है और मंत्रियों का संरक्षण उन्हें किस तरह मिल रहा है यह पर्यटन विभाग में पदस्थ अजय श्रीवास्तव द्वारा बुलंद छत्तीसगढ़ को भिजवाई नोटिस से देखा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने विभाग से अनुमति ली है या नहीं यह जांच का विषय भी है।
ज्ञात हो कि बुलंद छत्तीसगढ़ ने दुग्ध संघ के इस कर्मचारी अजय श्रीवास्तव को प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा संरक्षण दिए जाने की खबर विस्तार से प्रकाशित की थी। खबर में सिमगा पुलिस द्वारा अजय श्रीवास्तव पर कालगर्ल की हत्या का अपराध भी दर्ज किया गया था। इसकी एफआईआर की कॉपी भी प्रकाशित की गई थी।
हमने यह भी बात प्रकाशित की थी। इस अजय श्रीवास्तव को जब बृजमोहन अग्रवाल गृहमंत्री थे तो पुलिस मुख्यालय में पदस्थ किए थे और जब पर्यटन मंत्री बने तो इन्हें पर्यटन विभाग में ले गए। अजय श्रीवास्तव की इस काबिलियत की हमें जानकारी नहीं थी कि वे इतने काबिल हैं कि जहां-जहां बृजमोहन अग्रवाल मंत्री बनेंगे वे उन विभागों में पदस्थ किए जाते रहेंगे। उन्होंने नोटिस में कहा है कि उच्च न्यायालय ने कालगर्ल मडर केस से अजय श्रीवास्तव का नाम हटा दिया है जबकि हमने इस खबर को छापने से पहले उनसे संपर्क की कोशिश भी की थी। बहरहाल यह एक उदाहरण है कि किस तरह से राजनैतिक पार्टियों के संरक्षण में शासकीय कर्मी काम कर रहे हैं बाबूलाल अग्रवाल की बहाली भी तो लोग अभी भूले नहीं है।

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

कहां हो मिस्टर मूणत...! फिर अवैध प्लांटिग हो रही है

मार्स कालोनाईजर का कारनामा!
अवैध प्लाटिंग के खिलाफ अभियान छेड़कर चर्चा में रहे नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत के नाक के नीचे बकायदा विज्ञापन निकालकर मास कालोनाईजर प्राईवेट लिमिटेड ने न केवल लोगों को धोखे में रखकर प्लाट बेच दी बल्कि उपर तक पैसा पहुंचाने का दावा करते शहर में घूम भी रहे हैं।
राजधानी के आसपास की जमीनों पर अवैध प्लाटिंग को लेकर राजेश मूणत ने न केवल अभियान चलाया था बल्कि कई परिवारों को छले जाने से भी बचाया था लेकिन कमल विहार योजना और गंज डबरी में मॉल बनाने के फेर में लगी सरकार की उदासीनता को लेकर फिर कई कालोनाईजरों ने अपने पैर पसारना शुरू कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक ताजा मामला मास कालोईनजर चला रहे आहूजा बंधुओं का है। मुजगहन में फेस टू बनाने के फेर में लगे आहूजा बंधुओं ने यहां बगैर ले आऊट पास किए साढ़े चार सौ रुपए फीट में प्लाट बेच दी वह भी बकायदा विज्ञापन निकालकर। प्लाट बेचने के मामले में ग्राहकों से धोखाधड़ी की चर्चा अब आम होने लगी है और प्लाट खरीदने वाले अब पछताने भी लगे हैं। यही नहीं टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से प्लाट स्वीकृत कराने भी घपलेबाजी की खबर है।
बताया जाता है कि इसकी शिकायत नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत से भी की गई है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि हमने इस मामले में सौदेबाजी की सच्चाई जानने मंत्री जी से फोन पर चर्चा करना चाहा लेकिन वे उपलब्ध नहीं थे। बहरहाल प्लेनेट सीटी के नाम पर लोगों को छले जाने और नगरीय निकाय मंत्री की भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चा है और देखना है कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।

सोमवार, 5 जुलाई 2010

मोहन की बांसुरी का सूर बेसुरा हुआ



चौतरफा भ्रष्टाचार से भाजपाई नाराज, सुषमा से शिकायत
हाय-हलो स्टाईल से आम लोगों की नजर में चढ़े प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में बड़े पैमाने पर चल रहे भ्रष्टाचार और विवादास्पद अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर आम लोगों में जबरदस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में चल रहे घपलेबाजी की शिकायत महंगाई वाले धरने में पहुंची वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज से भी की गई है।
आम लोगों में मिलनसार की छवि की वजह से रायपुर ही नहीं प्रदेश में दमदारी से नेतागिरी करने वाले बृजमोहन अग्रवाल से इन दिनों उनके दक्षिण विधानसभा के लोग ही नाराज होने लगे हैं। कहा जाता है कि पुराने समर्थक जहां घर बैठ गए हैं वही नए समर्थक भी किसी राजेन्द्र व प्रकाश नामक व्यक्ति की दलाली से परेशान हैं। संतोषी नगर में हुई तोड़फोड़ से लेकर आपराधिक लोगों के जमावड़े को लेकर उनके खिलाफ जबरदस्त आक्रोश पनपने लगा है और उनके विभाग में चल रहे घपलेबाजी ने रही सही कसर भी पूरी कर दी है।
सूत्रों की माने तो भ्रष्टाचार की वजह से पार्टी की खराब होती छवि को लेकर भाजपा के कुछ वरिष्ठ लोगों ने श्रीमती सुषमा स्वराज को बृजमोहन अग्रवाल की शिकायत करते हुए गोदिंया से लेकर छत्तीसगढ़ तक की न केवल कहानी सुनाई है बल्कि कुछ दस्तावेज भी दिए हैं यही नहीं शिक्षा, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन व संस्कृति में विवादास्पद नियुक्तियों व विवादास्पद अधिकारियों को संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाते हुए दस्तावेज श्रीमती स्वराज को सौंपे गए हैं। बताया जाता है कि श्रीमती स्वराज ने शिकायकर्ताओं को कार्रवाई का न केवल आश्वासन दिया है बल्कि मुख्यमंत्री से चर्चा करने की भी बात कही है।
हमारे सूत्रों के मुताबिक श्रीमती स्वराज को किए गए शिकायत में जमीन कारोबार के अलावा पर्यटन के अधिकारी एमजी श्रीवास्तव, अजय श्रीवास्तव, शिक्षा विभाग के मैडम तवारिस, मैडम आर. बाम्बरा, संस्कृति विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग के कुछ विवादास्पद अधिकारियों को मंत्री द्वारा संरक्षण दिए जाने का आरोप लगाया गया है। यहीं नहीं पीडब्ल्यूडी के सड़क व भवन निर्माण में बढ़ती कमीशन को लेकर भी सबूत दिए जाने की चर्चा है। कहा जाता है कि बिलासपुर के किसी राजेन्द्र व कवर्धा के किसी प्रकाश के द्वारा दलाली करने की शिकायत करते हुए शिकायकर्ताओं ने यहां तक कहा है कि कांग्रेसियों को यादा महत्व दिया जा रहा है।
बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ की गई शिकायत पर क्या कार्रवाई होगी यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन दक्षिण विधानसभा ही नहीं राजधानी में इस मामले की जबरदस्त चर्चा है।

शनिवार, 3 जुलाई 2010

हसदा पंचायत में निर्मित रंगमंच के नाम पर पैसा निकाला

चार माह पहले बन चुका है रंग मंच
कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के विधानसभा क्षेत्र के ग्राम हसदा में पूर्व सरपंच की करतूत से आम लोग हैरान है। कहा जाता है कि कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू के वरदहस्त होने के कारण यहां लोग हैरान है।
बताया जाता है कि चाह माह पहले लंकापारा ग्राम हसदा में रंगमंच भवन निर्माण हो चुका है जो कि माननीय कृषि मंत्री द्वारा रंगमंच निर्माण हेतु 1 लाख रुपया घोषणा किया गया था घोषणा के कुछ ही दिन बाद रंगमंच भवन का निर्माण कर दिया गया। इसका निर्माण पंचायत चुनाव के पहले पूर्व सरपंच के द्वारा जनवरी माह में करा दिया गया था। वर्तमान जून माह में सब इंजीनियर भार्गव के द्वारा लेआउट देकर जनपद पंचायत अभनपुर से पहली किश्त 40 हजार रुपया का चेक ग्राम पंचायत हसदा को भेज दिया गया जबकि उस भवन का निर्माण सब इंजीनियर के दिशा निर्देशन पर नहीं हुआ है और ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव पास नहीं होने के बाद 40 हजार रुपए का आहरण किया गया जनपद पंचायत में 16 जून को सामान्य सभा की मीटिंग में जनपद सदस्य शशि प्रकाश साहू के द्वारा रंगमंच निर्माण की बात रखा गया। जिसमें सब इंजीनियर भागर्व ने अपनी गलती स्वीकार किया शिकायत करने के बावजूद नहीं सचिव के ऊपर न ही सब इंजीनियर भार्गव के उपर कार्यवाही किया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि इसमें सचिव एवं सब इंजीनियर के साथ-साथ और बहुत से लोगों की मिलीभगत है। जनपद सदस्य शशि प्रकाश साहू एवं जनपद पंचायत उपाध्यक्ष चन्द्रहास साहू के साथ उपस्थित समस्त जनपद सदस्यों ने कार्यवाही अतिशीघ्र करने की मांग की है।

शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

दमदार मंत्री के विभाग में दमदारी से घोटाला...



छत्तीसगढ़ के दमदार मंत्री माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में घोटाले थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। दमदारी से घोटाले करने वाले अफसर अब किसी की परवाह भी नहीं करते तो इसकी वजह उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होना हैं।
हमारे सूत्रों के मुताबिक पीडब्ल्यूडी में सर्वाधिक घोटाले होने लगे हैं। यहां मंत्री को कमीशन पहुंचाने के नाम पर 20 प्रतिशत हिस्सा लिया जा रहा है। सड़कें घटिया बनाई जा रही है और अब बिलासपुर में नवनिर्मित हाईकोर्ट भवन पर भी सवाल उठाये जा रहे हैं।
पर्यटन विभाग में तो घोटाले की लंबी फेहरिश्त है यहां बगैर नाम पते के लाखों रुपए बांटे गए वहीं प्रचार व मोटल निर्माण के नाम पर भी घोटाले हुए हैं। यहीं नहीं जिस पर रिकवरी आदेश निकला वह अधिकारी संजय सिंह को परिवहन जैसे कमाउ विभाग में भेज दिया गया जबकि विवादास्पद रहे अजय श्रीवास्तव के संविलियन को लेकर मामला कोर्ट में जा पहुंचा है।
इधर शिक्षा विभाग में तो मैडम तवारिस और मैडम आर. बाम्बरा का मामला सुर्खियों में है लेकिन मंत्री की दमदारी की वजह से मुख्यमंत्री के पास भी शिकायतों को रद्दी की टोकरी में फेंका जा रहा है। बहरहाल बृजमोहन अग्रवाल के विभागों में बढ़ते भ्रष्टाचार की चर्चा अब चौक-चौराहों पर भी सुनी जा सकती है।

मंगलवार, 29 जून 2010

जब मुख्यमंत्री की खरी-खोटी पर मंत्री ने दलाल को निकाला!

विधायक ने पीड़ित को सीएम से रूबरू कराया
प्रदेश के दमदार माने जाने वाले मंत्री को अपने एक दलाल राजेन्द्र अग्रवाल को मन मसोस कर बंगले से निकालना पड़ा क्योंकि इस दलाल की दादागिरी की सीधी शिकायत विधायक ने की थी और मुख्यमंत्री ने मंत्री को जमकर खरी खोटी सुनाई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामला ठेकेदारी से संबंधित है। कहा जाता है कि मंत्री के लिए विभाग में वसूली का जिम्मा संभालने वाले राजेन्द्र अग्रवाल ने मुख्यमंत्री के गृह जिले के एक ठेकेदार को जमकर लताड़ लगाई और धमकी भी दी थी। ठेकेदार ने इसकी शिकायत विधायक से की और मामला मुख्यमंत्री तक जा पहुंचा। बताया जाता है कि विधायक ने ठेकेदार को सीधे मुख्यमंत्री के पास ले गया जहां ठेकेदार ने आपबीती सुनाई। यह सुनकर मुख्यमंत्री बेहद नाराज हुए।
बताया जाता है कि मुख्यमंत्री ने इस दमदार मंत्री को न केवल खरी खोटी सुनाई बल्कि निर्देश भी दिया कि यह राजेन्द्र अग्रवाल आपके बंगले में नहीं आना चाहिए ऐसे लोगों की करतूत से सरकार कभी भी मुसीबत में पड़ सकती है। बताया जाता है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए इस दमदार मंत्री की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई और उन्होंने तत्काल राजेन्द्र अग्रवाल को बुलाकर कहा कि वे बंगले में न आए।
सूत्रों के मुताबिक तब से राजेन्द्र अग्रवाल बिलासपुर और लौट गए हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि वे बंगले नहीं आ रहे हैं लेकिन अभी भी मंत्री के लिए काम कर रहे हैं। बताया जाता है कि पुस्तक सप्लाई के मामले में भी इस राजेन्द्र अग्रवाल की जबरदस्त भूमिका रही है और उनके द्वारा होटल मयूरा में रूके कुछ प्रकाशकों को रातो रात छत्तीसगढ़ से चले जाने की धमकी देते हुए गोली मारने की बात भी कह चुके हैं।
ऐसे ही एक प्रकाशक ने हमें दूरभाष पर बताया कि उन्हें काम करना है लेकिन लफड़े में नहीं पड़ना चाहते इसलिए पुलिस तक नहीं गए। बहरहाल राजेन्द्र अग्रवाल के कारनामों की यहां जबरदस्त चर्चा है और कहा जा रहा है कि अमर अग्रवाल के इस विरोधी ने बिलासपुर में भी कई गुल खिलाए हैं।

गुरुवार, 24 जून 2010

मंत्री का हठ या गैंदाराम की दमदारी , सामने आ रही राज्यपाल की लाचारी

बलौदाबाजार में जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ गैंदाराम चंद्राकर पर कार्रवाई करने प्रदेश के राज्य ने दो दर्जनभर से अधिक पत्र शासन को लिखा है लेकिन शासन ने हटाने की बजाय उसे मालदार पद पर बिठाने का उपक्रम किया।
छत्तीसगढ़ के दमदार माने जाने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग में चल रहे इस खेल की जानकारी मंत्री जी को भी हैं। गैंदाराम के खिलाफ दर्जनों शिकायतें हो चुकी है लेकिन पैसे और पहुंच के आगे मंत्री की दमदारी भी इस मामले में टांय-टांय फिस्स हो चुकी है। यहीं नहीं गैंदाराम के कारनामों को लेकर राज्यपाल तक से शिकायत की गई है और हर शिकायत के बाद राजभवन से शासन को पत्र भी लिखा जा चुका है लेकिन जिस गैंदाराम पर शिक्षा सचिव और लोकसेवा आयोग के सचिव की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं हुई हो तो राज्यपाल की अनुशंसा पर क्या कार्रवाई हुई होगी आसानी से समझा जा सकता है।
ज्ञात हो कि गैंदाराम चंद्राकर ने पीएससी में चयन होने कुटरचित दस्तावेज प्रस्तुत किए थे जिसकी पुष्टि पीएससी के सचिव श्री पंत और तत्कालीन शिक्षा सचिव नंदकुमार ने भी की है लेकिन गैंदाराम के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई उल्टे प्रमोशन दिया गया। बताया जाता है कि गैंदाराम चंद्राकर की उच्च स्तरीय पहुंच की वजह से ही उन पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई वहीं उनके द्वारा कार्रवाई से बचने बेतहाशा पैसा फेंके जाने की भी चर्चा है। इधर इस संबंध में यह भी पता चला है कि उन्हें शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का भी वरदहस्त प्राप्त है। हालांकि इस वरदहस्त के पीछे लेन देन की भी चर्चा है लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है।
बहरहाल गैंदाराम चंद्राकर के मामले में जिस तरह से शिक्षा मंत्री का रवैया रहा है उससे न केवल सरकारी की छवि पर असर पड़़ रहा है बल्कि भ्रष्टाचार की नई परम्परा को भी जन्म दिया है।
गैंदाराम का दुस्साहस
कहते हैं कि जब गैंदाराम चंद्राकर शिक्षा अधिकारी बनकर बलौदाबाजार पदस्थ हुए तो उन्होंने कई कारनामे किए। यहां तक कि प्रभारी मंत्री के अनुमोदन पर हुए तबादलों में से अपने करीबी लोगों का तबादला रोकने का आदेश जारी कर दिया जबकि तबादला रोकने का कार्य मुख्यमंत्री द्वारा गठित समवन्य समिति का है लेकिन गैंदाराम के इस दुस्साहस पर भी उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सका।

बुधवार, 16 जून 2010

धनेन्द्र साहू के गांव में चंद्रशेखर की दमदारी

तोरला में अवैध कब्जे की बाढ क़ो संरक्षण
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू चुनाव क्या हारे उन्हें अपने गांव में ही चुनौती मिलने लगी है कहा जाता है कि कृषि मंत्री चन्द्रशेखर साहू ने यहां अपने समर्थकों की फौज खड़ी करना शुरू कर दिया है और तोरला में हो रहे बेतहाशा अवैध कब्जों को इसी राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में वैसे तो कई गांवों में अवैध कब्जों की शिकायत आने लगी है लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू के गृह ग्राम तोरला में जिस बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं उससे गांव वाले परेशान है। बताया जाता है कि सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत तहसीलदार पटवारी से भी कई गई है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा समर्थकों की फौज खड़ी करने पूरे विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की रणनीति बनाई गई है और इस कार्य में तहसीलदार व पटवारियों को भी मदद करने के मौखिक निर्देश दिए गए है।
हमारे सूत्रों ने बताया कि जिन गांवों में भाजपा समर्थित पंचायत पदाधिकारी है वहां रणनीति के तहत अवैध कब्जों को प्रश्रय दिया जा रहा है। इधर तोरला में ग्रामीणों ने कहा कि जिस स्तर पर यहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं उससे आने वाले दिनों में नई मुसिबतों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि अवैध कब्जों की शिकायत लिखित में पटवारियों व तहसीलदार से करते हुए कब्जे तोड़ने की मांग की गई है लेकिन राजनैतिक संरक्षण के चलते अधिकारी भी चुप है।
दूसरी तरफ तोरला में चल रहे अवैध कब्जों को राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है और कहा जा रहा है कि धनेन्द्र साहू के गढ़ में सेंध मारने नई टीम तैयार की जा रही है। बहरहाल अभनपुर क्षेत्र में बढ रहे अवैध कब्जों की शिकायतों पर अधिकारियों की खामोशी से मामला गंभीर होता जा रहा है और जिस हिसाब से नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं उससे रमन सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है।

रविवार, 13 जून 2010

गेंदाराम चन्द्राकर के आगे स्कूली शिक्षा विभाग बेबस



जांच रिपोर्ट के बाद भी गेंदाराम पर कार्रवाई नहीं
मंत्री को महिना पहुंचाने की चर्चा?
क्या कोई कल्पना कर सकता है कि पीएससी में चयन के लिए दस्तावेजों में धोखाधड़ी करने के आरोप सिध्द होने के बाद भी कोई व्यक्ति पर कार्रवाई न हो। लेकिन प्रदेश के दमदार मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के इस विभाग में गेंदाराम चंद्राकर ने यह कारनामा दिखलाया है। तत्कालीन शिक्षा सचिव नंद कुमार और पीएससी के सचिव प्रदीप पंत के द्वारा अलग-अलग की गई जांच के बाद पेश रिपोर्ट में गेंदाराम चंद्राकर को दोषी तो पाया गया लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई नहीं होने की वजह उनके राजनैतिक पहुंच के अलावा ऊपर तक पैसा पहुंचाने को बताया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार में बैठे लोग किस तरह से भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और कैसे अपराधियों को बचा रहे हैं यह गेंदाराम चन्द्राकर के मामले में देखा जा सकता है। वैसे तो पीएससी ने जो परीक्षा ली थी उसके चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाये जाते रहे हैं और गेंदाराम चन्द्राकर का मामला तो सरकार के मुंह पर कालिख है। पीएससी में गेंदाराम चन्द्राकर को सर्वाधिक अंक दिए गए इसकी वजह भी उनके राजनैतिक एप्रोच और परीक्षा नियंत्रक रहे उनके सहपाठी बद्रीप्रसाद कश्यप को बताया जा रहा है।
दरअसल पीएससी की इस गड़बड़ी की जब शिकायत हुई तो सबसे पहले उनके चयन और उनके द्वारा चयन हेतु दिए गए दस्तावेज की जांच पीएससी ने ही की और पीएससी के सचिव प्रदीप पंत ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि गेंदाराम चन्द्राकर द्वारा कूट रचित दस्तावेज प्रस्तुत किया जाना एवं उसके आधार पर चयनित हो जाना परिलक्षित हुआ है और उन्होंने शिक्षा सचिव नंदकुमार को कार्रवाई करने पत्र लिखा। इस पत्र के शिक्षा विभाग में आते ही हड़कम्प मच गया और प्रकरण की जांच कराने के बाद शिक्षा सचिव नंदकुमार ने माना कि गेंदाराम चन्द्राकर ने पीएससी में चयनित होने दस्तावेजों में कूट रचना की है।
बताया जाता है कि जैसे ही गेंदाराम को अपने खिलाफ होने वाली कार्रवाई का पता चला उन्होंने अपनी पहुंच का इस्तेमाल किया। कहा तो यहां तक जाता है कि भाजपा के एक सांसद से लेकर विभागीय मंत्री तक पैसा पहुंचाया गया और फाईल दबा दी गई।
छत्तीसगढ शिक्षा विभाग का यह इकलौता कारनामा नहीं है और न ही गेंदाराम चन्द्राकर का यह इकलौता प्रकरण है। उच्च स्तरीय लेन-देन कर जिस तरह से शिक्षा विभाग में खेल चल रहा है यदि इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो कई लोग जेल के सलाखों तक पहुंच सकते हैं। बहरहाल गेंदाराम चन्द्राकर के मामले में सचिव स्तर के रिपोर्ट के बाद भी कार्रवाई नहीं होना अनेक संदेहों को जन्म देता है साथ ही सरकार की नियत पर भी सवालिया निशान लगाता है।

सोमवार, 7 जून 2010

न्याय-मंदिर को भी नहीं बख्शा!



घोटालों की कहानी चढी लोगों की जुबानी
प्रदेश के दमदार माने जाने वाले पीडब्ल्यूडी मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभागीय अफसरों ने बिलासपुर हाईकोर्ट के भवन निर्माण में भी लागत मूल्य बढाकर उच्च स्तर पर जमकर कमीशनखोरी की। मंत्री के संरक्षण में हुए इस काम में न्याय मंदिर को भी नहीं बख्शे जाने की चर्चा आम लोगों के जुबान पर है और इसे अतिवादी बताया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी विभाग में चल रहे कमीशनखोरी की कहानी अब आम लोगों तक पहुंच गई है। घोटाले से लेकर कमीशनखोरी से बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट भवन भी नहीं बच पाया है कहा जाता है कि जिस तरह से न्यू सर्किट हाउस को बनाने में घपलेबाजी की गई लगभग वही तरीका यहां भी अपनाया गया और ठेकेदारों से मिलीभगत कर शासन को करोड़ों रुपए का चुना लगाया गया है।
हमारे बेहद भरोसेमंद सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पीडब्ल्यूडी विभाग ने हाईकोर्ट भवन बनाने की लागत में लगातार वृध्दि होते रही और कहा जाता है कि लागत मूल्य बढ़ाने के पीछे सीधे-सीधे डकैती रही है। न्याय मंदिर के भवन निर्माण में हुए इस घपलेबाजी पर तो यहां तक कहा जाता है कि इस मामले में उच्चस्तरीय लेन-देन हुआ है और करोड़ों रुपए की इस घपलेबाजी की जांच हुई तो कई बड़े मगरमच्छ जेल की सलाखों में जाएंगे।
बताया जाता है कि छत्तीसगढ़ पीडब्ल्यूडी में जब से नए मंत्री ने पदभार संभाला है तभी से कमीशनखोरी बढ़ गई है और चहेते अफसरों को पदोन्नति देकर अनापशनाप काम कराया जाने लगा है। बताया जाता है कि प्राय: हर निर्माण का लागत मूल्य बढ़ाकर उच्च स्तर पर ठेकेदारों से मिलीभगत कर लाखों करोड़ों रुपए डकारे जा रहे हैं और इसी कड़ी में न्याय मंदिर के भवन निर्माण पर भी खूब जेबें गरम की गई है। बहरहाल न्याय मंदिर के निर्माण में हुए इस घपलेबाजी पर आम प्रतिक्रिया यह है कि राम को नहीं छोड़ने वाले लोगों से और क्या उम्मीद की जा सकती है।