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शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

जब सत्ता ने झूठ बोलकर नफ़रत फैलाया, 70 सब के सब बरी

 जब सत्ता ने झूठ बोलकर 

नफ़रत फैलाया, 

70 सब के सब बरी…


जिन लोगों का पूरा संस्कार ही झूठ अफ़वाह और नफ़रत की राजनीति पर केंद्रित हो उनसे किसी अच्छाई की उम्मीद ही बेमानी है, वे देश का भला तो छोड़िये किसी का भला नहीं कर सकते, यहाँ तक कि वक्त पड़ने पर घर परिवार ही नहीं समाज को भी संकट में डाल सकते हैं। यह बात दिल्ली हाईकोर्ट के फ़ैसले ने साबित कर दिया कि कुर्सी के लिये सत्ता और उनसे जुड़े लोग किस हद तक गिर सकते हैं । आइये समझते है पूरा मामला…


मामला 2020 का है जब दिल्ली के निज़ामुद्दीन के तब्लीगी जमात के मरकज के विरुद्ध मीडिया ने कैसा माहौल बनाया था। लगता था जैसे सारा कोविड इन्ही के कारण फैला था। पूरे देश मे लोग इनके खिलाफ हो गए थे। 

दरअसल सारा झमेला इनकी निज़ामुद्दीन की एक धार्मिक सभा को लेकर उत्पन्न हुआ। इस आयोजन में देश-विदेश से हजारों लोग शामिल हुए थे। जब इस सभा में शामिल कुछ लोग कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए, तो सरकार और मीडिया के एक वर्ग ने तब्लीगी जमात पर लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने और कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगाया। 

दिल्ली पुलिस ने 70 भारतीय नागरिकों और 195 विदेशी नागरिकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए। आरोपों में शामिल था कि मरकज में लोगों ने सामाजिक दूरी और स्वच्छता नियमों का पालन नहीं किया, कुछ जगहों पर तब्लीगी सदस्यों द्वारा थूकने, नर्सों से बदतमीजी जैसे गंभीर आरोप भी लगे। जिन्हें मीडिया और सोशल मीडिया में इस तरह फैलाया गया जैसे हिंदुस्तान में कोरोना का इनसे बड़ा अपराधी कोई दूसरा नही। सोशल मीडिया पर #CoronaJihad जैसे हैशटैग भी ट्रेंड हुए, जिससे सामुदायिक तनाव बढ़ा।

लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 जुलाई 2025 को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में तब्लीगी जमात के 70 भारतीय नागरिकों के खिलाफ दर्ज 16 एफआईआर और चार्जशीट को रद्द कर दिया। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि कोई सबूत नहीं है कि इन लोगों ने लॉकडाउन का उल्लंघन किया या जानबूझकर वायरस फैलाया। 


कोर्ट ने पाया कि:

1, मरकज का आयोजन मार्च 2020 की शुरुआत में हुआ था, जब पूर्ण लॉकडाउन लागू नहीं हुआ था। लोग लॉकडाउन के कारण मरकज में फंस गए थे और उनके पास बाहर निकलने का कोई साधन नहीं था।

2, कोविड-19 से संक्रमण का कोई सबूत नहीं, न तो एफआईआर और न ही चार्जशीट से यह साबित हुआ कि वे कोविड-19 से संक्रमित थे या उन्होंने बीमारी फैलाई।

3, कोर्ट ने माना कि धारा 144 CrPC या अन्य कोविड नियमों का उल्लंघन सिद्ध नहीं हुआ।

याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करने वाली अधिवक्ता आशिमा मंडला ने तर्क दिया कि आरोप "बढ़ा-चढ़ाकर" और "निराधार" थे, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया।

कायदे से ये पूरा मामला एक समुदाय विशेष के खिलाफ पूर्वाग्रह और मीडिया के दुष्प्रचार का जीता जागता उदाहरण है। इससे भी बड़ी बात यहां के बहुसंख्यक वर्ग के मानसिक दिवालियेपन की भी है।

नफरत और वोटों की राजनीति देश को किस गर्त में धकेल रही है उसे समझने में भी ये वर्ग असफल है।(साभार)

शनिवार, 5 जुलाई 2025

राष्ट्रवाद के नाम पर घिनौना व्यापार…

 राष्ट्रवाद के नाम पर घिनौना व्यापार…


वैसे तो संघ के चीन के रिश्ते की कहानी नई नहीं है और न ही मोदी राज में चीन से व्यापारिक रिश्ते, कल तक जो लोग कांग्रेस सरकार में चीनी समानों को छाती पीट पीट कर कोस रहे थे वे भी चुप है और अब विदेश मंत्री जयशंकर प्रसाद के बेटे ध्रुव जयशंकर को मिले चीनी फंड पर भी चुप हैं तो उन्हें अपने भीतर की दोगलाई को परखना चाहिये…

जिस देश में ‘राष्ट्रवाद’ सुबह की चाय से लेकर रात की थाली तक परोसा जाता हो, वहां यह सुनना कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर के थिंक टैंक को चीन से 1.76 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली — यह न सिर्फ विस्फोटक है, बल्कि उस झूठ की तिजोरी खोलता है जिसमें पूरा राष्ट्र बंदी बना दिया गया है।

सवाल यह नहीं है कि ORF को चीनी दूतावास से पैसा क्यों मिला।

सवाल यह है कि जब यही आरोप कांग्रेस के राजीव गांधी फाउंडेशन पर लगे थे, तब पूरा सत्ता-वृत्त उसे 'देशद्रोह' की आड़ में लाठीचार्ज तक ले गया था।

और अब?


अब जब उसी भाजपा सरकार के विदेश मंत्री का बेटा एक ऐसे थिंक टैंक में कार्यरत है, जिसे खुद चीन ने फंड किया है — तो क्या वह पैसा 'देशहित' में गिना जाएगा?


क्या अब चीनी फंडिंग भी 'आत्मनिर्भर भारत' का हिस्सा है?


ORF यानी ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन — न सिर्फ भारत की विदेश नीति के विमर्श का एक प्रमुख केंद्र है, बल्कि सत्ता-तंत्र से उसका गहरा जुड़ाव है। 2016 में चीनी दूतावास, कोलकाता से 1.25 करोड़ रुपये और फिर 2017 में 50 लाख रुपये का दान — न यह छुपाया गया, न ही इसका कोई खंडन आया।


पर चुप्पी गूंज रही है।


ध्रुव जयशंकर ORF के US Initiative के डायरेक्टर हैं। उनके पिता एस. जयशंकर भारत के विदेश मंत्री हैं। भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच, इसी ORF को चीन से पैसा मिला — और इस बात पर कोई विशेष संसद समिति नहीं बैठती, न कोई न्यूज़ चैनल हेडलाइन बनाता है।


क्यों?


क्योंकि सत्ता को “राष्ट्रद्रोह” का प्रमाणपत्र बेचने में केवल वही चेहरे दिखते हैं जिनके नाम मुस्लिम, दलित या असहमति के ध्वजवाहक हों। उमर खालिद हो, नजीब हो, शरजील हो या फिर जीएन साईनाथ जैसे किसान पक्षधर पत्रकार — सबके लिए राष्ट्रवाद की कसौटी अलग है। मगर जब पूंजी, सत्ता, और विदेश नीति की गलियों में सत्ताधारी दल के बेटे को फंडिंग मिलती है — तब राष्ट्रवाद मौन साध लेता है।


यह केवल दोहरा मानदंड नहीं है। यह लोकतंत्र के गाल पर एक चुपचाप पड़ा तमाचा है।


और मज़ेदार विडंबना ये है कि उन्हीं दिनों भाजपा के प्रवक्ता कांग्रेस पर आरोप लगा रहे थे कि उन्होंने “चीन से पैसा लिया है” और “राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला” है।


भाजपा समर्थक थिंक टैंक ‘Vivekananda International Foundation’ के संदर्भ में भी फंडिंग का मुद्दा उठा, लेकिन वहाँ सब खामोश हैं। डोभाल जैसे एनएसए के संस्थापक रहते हुए, क्या उस फाउंडेशन को भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जुड़े “डोनेशन” नहीं मिले?


तो फिर कौन तय करेगा कि राष्ट्रभक्ति क्या है?

क्या उसकी परिभाषा अब यह है कि —

जब आप विपक्ष में हों तो विदेश से पैसे लेना देशद्रोह,

लेकिन सत्ता में हों तो वही विदेशी पैसा 'कूटनीतिक सहयोग'?


भारत को तय करना है:

राष्ट्रवाद को हम गाली बनायें या गहराई।

क्या राष्ट्र का अर्थ सिर्फ “हमारा झंडा” है, या “हमारा ज़मीर” भी?


अगर सचमुच राष्ट्र सर्वोपरि है,

तो फिर ORF की फंडिंग पर वही सवाल पूछे जाने चाहिए जो RGF से पूछे गए थे।

नहीं तो यह राष्ट्रवाद नहीं — एक घिनौना व्यापार है।(साभार)

रविवार, 8 जून 2025

मंदिर-मंदिर घुमते मस्क की सच्चाई क्या हिंदू धर्म का अपमान नहीं…

 मंदिर-मंदिर घुमते मस्क की सच्चाई क्या हिंदू धर्म का अपमान नहीं…


एलन मस्क के पिता एरोल के भारत आ कर मंदिर मंदिर घुमते तस्वीर को लेकर कितने ही सवाल है और सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि जिस व्यक्ति का पूरा जीवन सनातन धर्म के विपरीत रहा है उसे लेकर न तो नफ़रती चिंटुओं की भावना आहत हो रही है न ही मंदिर के पुजारियों की। गौ मांस का सेवन करने वाले एरोल सिर्फ़ बिज़नेस के लिए भारत आये हैं और वे मंदिर मंदिर सिर्फ़ सरकार को खुश करने घुम रहे हैं इसके बाद भी यदि नफ़रती चिंटुओं को उनके साथ तस्वीर खिंचाने में मज़ा आ रहा है तो आप भी जान ले कि एलन मस्क के इस पिता एरोल की हक़ीक़त…

एरोल ग्राहम मस्क का जन्म वाल्टर और कोरा अमेलिया मस्क ( नीरॉबिन्सन) के घर 25 मई 1946 को प्रिटोरिया में हुआ था। उनके पिता दक्षिण अफ़्रीकी थे और उनकी माँ अंग्रेज़ थीं। उन्होंने क्लैफ़हम हाई स्कूल में पढ़ाई की, जहाँ उनका मेय हल्दमैन के साथ रिश्ता शुरू हुआ [ 3 ] जिनसे उन्होंने 1970 में शादी की। [ 4 ] परिवार प्रिटोरिया में रहता था , जहाँ मेय ने आहार विशेषज्ञ और एक मॉडल के रूप में काम किया। [ 3 ] उनके पहले बच्चे, एलोन रीव मस्क का जन्म 28 जून 1971 को हुआ, जिसका नाम मेय के दादा जे. एलोन हल्दमैन के नाम पर रखा गया, रीव उनकी नानी का पहला नाम था। [ 3 [ 1 ]

1979 में मस्क और उनकी पत्नी मेय का तलाक हो गया। [ 3 [ 23 ] अपने संस्मरण में मेय ने अपनी शादी को अपमानजनक बताया और आरोप लगाया कि एरोल हिंसक था। [ 24 ] वह अपने तलाक के दौरान एक समय को याद करती है जब उसने एक पड़ोसी के घर में शरण ली थी जब एरोल उसे ढूंढते हुए चाकू लेकर आया था। [ 12 ] तलाक के बाद, मस्क ने अपने बच्चों की कस्टडी के लिए अपनी पूर्व पत्नी पर बार-बार मुकदमा किया। [ 12 ]उन्होंने कुछ समय के लिए सू नाम की एक महिला से शादी की थी। [ 12 ]

1990 के दशक की शुरुआत में, एरोल ने, जो उस समय 45 वर्ष के थे, 25 वर्षीय हेइडे बेजुइडेनहौट से विवाह किया, जिसके बारे में उन्होंने कहा कि वह "मेरे जीवन में देखी गई सबसे सुंदर महिलाओं में से एक थी।" [ 25 ] बेजुइडेनहौट से उनकी दो बेटियाँ थीं। [ 26 ]

1992 में एरोल मस्क दक्षिण अफ्रीका में Heidi Bezuidenhout नाम की महिला से दूसरी शादी करते हैं ,


● Heidi को पहली शादी से चार साल की बेटी Jana थी...!


● Jana जब जवान होती है तब एरोल मस्क अपनी इस सौतेली बेटी को पेट से कर देता है अब तो वो दो बच्चों की माँ हैदोनों केबीच 42 वर्ष का अंतर है...!


 एलन मस्क अपने पिता की हरकत पर उन्हें EVIL कहा हैइस बात की सच्चाई इसकी ख़ुद की वेबसाइट विकिपीडिया पर भीमौजुद है...!


● अब ऐसे आदमी को एक राज्य में मंदिर दर्शन के नाम पर स्टेट गेस्ट का दर्जा दिया जा रहा है क्या यह उचित है...?

दूसरी अहम बात ये एलन मस्क का पिता तो गौ मांस भी खाता है,

इसे प्रभु श्री राम जी के मंदिर औऱ अयोध्या में इतनी इज़्ज़त क्यो दी जा रही है VHP Digital वालो...?

या अब RSS org हिंदू की भावनाओं को रुपए में बेचते हो...?

● ज्ञात हो एलन मस्क ऐरोल मस्क की पहली बीवी से पैदा हुवे हैं जिसे ऐरोल मस्क ने तलाक़ देकर दूसरी महिला के साथ सालों तकलिव इन रिलेशनशिप में थे लेक़िन उससे कोई संतान नही होने से उससे अलग होकर तीसरी शादी Heidi Bezuidenhout नाम कीमहिला से किये जिस महिला की उसके पहले तलाकशुदा पति से महज 4 साल की बेटी थीजिसका नाम Jana है अब इसी सौतेलीबेटी के जवान होने पर ऐरोल मस्क को 2 औलाद Jana से हुवे हैं , ऐसे चरित्रहीन (कैरेक्टर लेसको मंदिरों में घुमाना स्टेट गेस्ट बनाना कितना  उचित है...!

बुधवार, 18 सितंबर 2024

वाराणासी में क्यों पीटा गया सं‌धी ..


 वाराणासी में क्यों पीटा गया सं‌धी ..

पूरा वीडियो भी देखिए…


 सबसे ताकतवर होने का दम भरने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बुल्डोजर चलाकर रोब जमाने वाले योगी आदित्यनाथ के वाराणासी में यदि संघ के नेता की जमकर धुनाई हो जाये तो फिर इसे क्या आने वाले राजनीति के लिए कोई संकेत माना जाना चाहिए।

झूठ और अफवाह के आसरे नफरत की राजनीति में माहिर लोगों ने इस कदर जहर फैला रखा है कि अब उनके कुकर्म खुलकर सामने आने लगे हैं।

ऐसा ही मामला वाराणासी में तब सामने आया जब प्रेगनेंट कर देने की धमकी पर योगी की पुलिस इसलिए खामोश रह गई क्योंकि धमकी देने वाला संधी था। और इसके बाद युवती और उसके परिजनों  ने इस संघी राजेश सिंह की वह हाल कर दी कि आज पूरा देश इस संधी पर थू-थू कर रहा है। पूरे मामले का विडियो वायरल होते ही हिन्दू वादियों को साँप सूँघ गया है।


बुधवार, 11 सितंबर 2024

भाजपा का उजाला चार बीबी वाला...

 भाजपा का उजाला 

चार बीबी वाला...


जो किस भाजपा लव जिहाद और चार बीबी के मुद्दे को लेकर पूरे देश में हिन्दुओं का वोट हासिल करता हो, उसी भाजपा में यदि चार दो हिंदू औरतों के साथ चार बीबी वाला नत्थे खान पठान सालो से कद्‌द‌ावर नेता बना बैठा हो तब इसका मतलब क्या है।

यदि नत्थे खान पठान का होटल में गिलास की चुस्कियों के साथ एक महिला के अंतरंग वीडियो जारी नहीं होता तो न तो भाजपा उन्हें पद से हटाती और न ही भाजपा की इस करतूत का देश को पता ही चलता।

दरअसल पिछले दिनों भारतीय जनता पार्टी से चालीस साल से जुड़े कद्‌दावर नेता नत्थे ख़ान का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे गिलास से चुस्कियाँ लगाते एक महिला के साथ अश्लिलता  करते दिखाई दे रहे है। कहा जाता है कि यह विडियो खुद नत्थे ख़ान ने बनाकर वाट्‌सअप ग्रुप में डाला था। और कहा जाता है कि जब 'नशा टूटा तो उन्होंने विडियों डिलिट कर भी दिया लेकिन डिलिट करने में इतना देर हो गया कि विडियों देश भर में फैल गया। 

विडियो वायरल होते ही राजस्थान बीजेपी में भी हड़कम्प मच गया और नत्थे ख़ान को पार्टी  के सभी पदों से हटाने की घोषणा भी कर ही लेकिन अभी भी नत्थे खान को पार्टी से हटाया गया है या नहीं कहना मुश्किल है क्योंकि भाजपा में अभी भी इस तरह के लोगों की फ़ेहरिस्त है।

इधर नत्थे ख़ान  ने विडियों बयान जारी कर   बताया है कि जिस महिला के साथ विडियों है वह महिला उनकी चौथी पत्नी है जिससे 6 साल पहले शादी हुई है । यानी 64 के उम्र वाले नत्थे ख़ान ने 58 के उम्र में चौथी शादी की है।

नत्थे खान की यह चौथी बीबी है जिसमें से दो बीबी हिन्दू है।

एक देश-एक बीबी, लव जेहाद जैसे नारा लगाने वाली भाजपा में यदि नत्थे ख़ान सालों से है और राजस्थान भाजपा के कद्‌दावर नेता माने जाते है तो अब यह कहा ही जा सकता है कि भाजपा को चाल चेहरा सौर चरित्र की बात नहीं करनी चाहिए।