बुधवार, 27 अगस्त 2025

अमेरिकी दादागिरी की असली वजह क्या अदानी से जुड़ा है

 अमेरिकी दादागिरी की असली  वजह क्या अदानी से जुड़ा है…


मोदी सत्ता भी ग़ज़ब है कल तक नियम क़ानून को ताक पर रखकर अंबानी बंधुओं की मदद करते नहीं थकती थी , वह आज उन्हें जाँच एजेंसियों से डराने लगी है, इस छापेमारी को तो लोग जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े और तख्ता पलट की क़वायद से भी जोड़ रहे हैं तब अमेरिकी टैरिफ़ को लेकर चल रही लड़ाई क्या मोदी अदानी का कोई खेल है जिसका भारत को नुक़सान उठाना पड़ रहा है…

अमेरिकी टैरिफ़ का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह सब बताये उससे पहले बता देते हैं कि मोदी ने कभी दावा किया था कि ट्रंप उनके सबसे अच्छे मित्र है और सिर्फ़ दावा नहीं बल्कि उन्हें जीताने ज़मीन आसमान छान दिया था, 

ऐसे में अचानक यह सब क्या हो गया, कहा जाता है कि ट्रंप और अदानी के कुछ व्यापारिक ख़ून्नास या धोखाधड़ी का मामला है, तो क्या अदाणी ने ट्रंप के साथ चिटिंग की, 

ट्रंप के द्वारा अंबानी को तवज्जो देने की यही वजह बताई जा रही है तब अंबानी का धनखड़ के साथ खेल के पीछे क्या ट्रंप है और अब अंबानी धनखड़ के साथ निशाने पर है

यह सब चलता रहेगा तब अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ आज (बुधवार) से प्रभावी हो जाएगा। इस कदम का सीधा असर भारत के परिधान, टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, लैदर, कालीन और फर्नीचर जैसे श्रम आधारित उद्योगों पर पड़ेगा । 

अमेरिकी प्रशासन द्वारा इसे पहले जुलाई 2025 में 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ लगाया गया था। इसके बाद अब दूसरी बार 27 अगस्त 2025 लगाया जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि भारत रूस से लगातार तेल की खरीद कर रहा है जिससे रूस यूक्रेन  युद्ध में रूस को आर्थिक मजबूती मिल रही है इसलिए यह टैरिफ रूस यूक्रेन युद्ध रोकने के लिए जरूरी है जिस कारण से यह नया टैरिफ लगाया गया है।

इसके जवाब में गुजरात में प्रधानमंत्री ने एक रैली में अपने भाषण में अमेरिका और ट्रंप का नाम लिए बिना जो  कहा उसके कुछ अंश  

"दुनिया में आर्थिक स्वार्थ वाली राजनीति, सब कोई अपना करने में लगा है, उसे हम भलीभांति देख रहे है और में गांधी की धरती से बोल रहा हूं, दबाव कितना भी आए हम झेलने की अपनी ताकत बढ़ाते जाएंगे"

हालांकि एक तरफ आत्मनिर्भरता के दावे किए  जा रहे है और दूसरी तरफ दबाव को झेलते जाने के भाषण में शब्द एक विरोधाभास है आत्मनिर्भरता के प्रयास के तहत आज भारत में स्वदेशी निर्मित पहली मारुति इलेक्ट्रिक कार को हरी झंडी दिखाई गई यह एक कदम जरूर है लेकिन क्या यह पर्याप्त है जबकि अस्सी करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जाता है और बहुत बड़ी जनसंख्या वाले देश में मात्र कुछ फीसद लोग ही महंगी कार को खरीद सकते है ।

भारत को इस वैश्विक व्यापार असंतुलन के दौर में अन्य विकल्पों की तलाश कर अमेरिका की इस व्यापारिक आर्थिक दादागिरी को जवाब देना चाहिए साथ ही ऑपरेशन सिंदूर भारत पाक युद्ध सीजफायर के ट्रंप के दावे को स्पष्ट भाषा में जवाब देना चाहिए ताकि भारत की प्रभुसता अक्षुण्ण रहे । 140 करोड़ नागरिक और भारतीय संसद व्यापारिक और रणनीतिक मामलों में स्वयं निर्णय लेता है और किसी भी अन्य राष्ट्र की दखल को मंजूर नहीं करेगा । भारतीय लोकतंत्र संविधान निश्चित ही असंख्य संघर्षों बलिदानों से अर्जित किया गया है । इसके मूल्यों और संप्रभुता की रक्षा करना हर देशवासी नेता, प्रशासनिक अधिकारी  या नागरिक सबका फर्ज है । भले ही भारत को टैरिफ या सीजफायर के बयान या दबाव से ट्रंप कमजोर करने की कोशिश में है लेकिन भारत एक संप्रभु,लोकतांत्रिक गणराज्य है और गणतांत्रिक राष्ट्र रहेगा यह दुनिया जान ले ।

इसके साथ ही भारत को अपनी विदेश नीति और व्यापार नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत है क्योंकि अमेरिका इस द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध में अधिक झुकाव अपनी तरफ चाह रहा है इसके साथ ही ट्रंप के लिए किए गए प्रधानमंत्री मोदी के पूर्व चुनावी दावे और करोड़ों रुपयों के आयोजनों पर भी पुनर्विचार करना चाहिए । और व्यापारिक और रणनीतिक मामलों में नए विकल्पों को तलाशना चाहिए । आत्मनिर्भरता की सिर्फ नारेबाजी से नहीं जमीनी स्तर पर शोध और विकास के साथ कृषि, व्यापार, विज्ञान तकनीकी के साथ मानव संसाधन का सकारात्मक उपयोग कर नए रोजगार सृजन, शिक्षा स्वास्थ्य, सड़क, और  निर्माण क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नए आयाम तलाश कर आर्थिक मजबूती की तरफ कदम बढ़ाने चाहिए ।(साभार)