ईडी ने वसूली तो छत्तीसगढ़ में भी की है...
कहाँ है रामगोपाल…
इलेक्ट्रोरल बांड ने मोदी ब्राण्ड को बुरी तरह बेनकाब कर दिया है, बेंगलुर की अदालत के द्वारा वित्त मंत्री निर्मला सितारमन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर के आदेश ने इस आरोप की पुष्टि कर दी है कि मोदी सरकार में ईडी का काम क्या था।
ऐसे में छत्तीसगढ़ में शराब घोटाला, कोयला परिवहन घोटाला, महादेव सट्टा एप सहित कई मामलों की जांच में भी क्या इडी ने वसूली की है। यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है, क्योंकि इडी की कार्रवाई पहली नजर में पक्षपात पूर्ण दिखाई देने लगी है।
ईडी की कार्रवाई मैं जो पहला पक्षपात दिखाई देता है वह आई एएस व आईपी एस अफसरों पर कार्रवाई को है और इसके बाद गिरफ्तारी की सूची में उन नामों का ग़ायब होना जिस पर सबसे ज्यादा संदेह था। उसके अलावा कुछ लोगों को फ़रार होने का मौका देना और इसके बाद ई ओ डब्ल्यू में एफआई आर की सूची।
छत्तीसगढ़ में इडी की वसूली की चर्चा में वे नाम सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में है जिसका नागपुर कनेक्शन है । और कहा जाता है कि ऐसे आईपीएस अफ़सरों से 15 से 25 करोड़ के बीच वसूली हुई है। कोयला परिवहन घोटाले से जुड़े इन अफसरों से पूछताछ तो हुई है लेकिन पैसा लेकर छोड़ देने का आरोप है और इन अफसरों की साय सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति भी कम चौंकाने वाला नहीं है।
इस पूरे मामले में सबसे चर्चित नाम तो आईएएस विवेक ढांड और कांग्रेस के कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल और उसके रिश्तेदार है। कहा जाता है कि रामगोपाल को सेंटिंग के तहत ही फरार होने का मौका दिया गया।
हुब इस खेल में क्या क्या हुआ और कौन कौन आरोपी बचा लिये गए है हम आपको बताते रहेंगे, आरोपों से घिरे अफसरों को साय सरकार ने कैसे सर माथे पर बिठाया है और उनका नागपुर कनेक्शन भी चर्चा में है।
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