शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का बुरा हाल

 छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का बुरा हाल 

 


छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन किस तरीके से बदहाली की कगार पर पहुँच गया है कि विधानसभा में भी मामला उठता रहा है। एक बार चार इंजीनियरों को सस्पेंड क्या कर दिया। बस उसी का राग अलापते रहते हैं कि भ्रष्टाचारियों को उल्टा लटका कर सीधा कर देंगे। लेकिन हकीकत तो यह है कि गांवगांव में जिस तरीके से जल जीवन मिशन का मामला सामने आ रहा है। कहीं टंकी बन गई है तो पानी नहीं है। कहीं पानी है तो पाइप लाइन टूटे फूटे हैं। तो कहीं गड्ढा खोदकर यूं ही छोड़ दिया गया है। ठेकेदार अधिकारियों और मंत्री बंगले के नेक्सेस ने क्या इस पूरे जलजीवन मिशन कार्यक्रम को बदहाल कर दिया? 

मोदी की गारंटी में भी शामिल है। निर्मल जल हर लोगों को 2000 25 में निर्मल जल घरघर पहुंच जाएंगे। यह मोदी की गारंटी है। विधानसभा चुनाव में याद कीजिए आप। लेकिन जिस रफ्तार से योजना चल रही है, जिस पैमाने पर भ्रष्टाचार चल रहा है, वह क्या 2025 में इस योजना को पूरा करने देगा?
राजधानी में यह स्थिति है कि दर्जनों वार्ड पानी टैंकर के भरोसे हैं। पाइप लाइन बिछ  चुकी है। पानी का फोर्स नहीं है। लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। लेकिन यहअमृत काल है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए और इस अमृत काल में कभी अमृत मिशन हो जाता है तो कभी जल जीवन मिशन हो जाता है। मिशन का अर्थ भी शायद अब भारतीय जनता पार्टी ने बदल दिया है। कहा जाए तो गलत नहीं होगा। और ऐसे में जो शिकायतें अब सीधे पीएमओ तक जाने लगी यानी प्रधानमंत्री तक जाने लगी है। क्या उसका असर अब दिखाई देने लगा है या फिर यह जांच के नाम पर नौटंकी कहना कठिन है। लेकिन जो खबर आ रही है उसके मुताबिक आने वाले दिनों में अरुण शाह के लिए मुसीबत बढ़ सकती है।क्योंकि लगातार आ रही शिकायत के बाद केंद्र सरकार ने जांच का खाका तैयार कर लिया है।

 हालांकि यह जांच का खाका पूरे देश भर के लिए एक साथ तैयार किया गया। देशभर के 159 गांव जांच के दायरे में है। जहां गड़बड़ियां हुई है जल जीवन मिशन में और उस 159 गांव में छत्तीसगढ़ के गांव भी शामिल है। छत्तीसगढ़ के तीन जिले को जांच के दायरे में लाया गया है और इसके लिए कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के डायरेक्टर अमित कुमार अग्रवाल को नोडल अधिकारी भी बना दिया गया। छत्तीसगढ़ के जिन जिलों में जांच होनी है उसमें जाजगीर, चांपा, रायगढ़, बेमतरा हालांकि शिकायतें इन तीनों जिलों से कहीं अधिक धमतरी, बलौदा बाजार, बस्तर के कई जिले और सरगुजा संभाग के जिले शामिल है।लेकिन केंद्र की अपनी कहानी है। उसने तीन जिले को चुना है जांच के ये जांजगीर, चांपा, रायगढ़ और बेमतरा के लिए और इन तीन जिलों में छह गांव को ही हो सकता है कि यह कोई पैमाना हो जांच का कि किस तरीके से सिर्फ तीन जिलों के छह गांव को ही चुना गया है। जिसमें रायगढ़ में 50 से अधिक अधूरा काम पड़ा है। बेमेंतरा में 485 पानी टंकी कानिर्माण स्वीकृत है और केवल 338 का निर्माण हुआ है। और जांजगीर चापा के अकलतरा ब्लॉक के वही दल आश्रित गांव में भी जांच टीम आएगी। जिन छह गांव में यहजांच होगी नोडल अधिकारी अमित कुमार अग्रवाल मौजूद रहेंगे। क्या यह एक रैंडम जांच है? यह बड़ा सवाल है और कहा जा रहा है कि इस जांच में यदि गड़बड़ी या जो शिकायतें सही पाई गई तो फिर आने वाले दिनों में क्या अरुण शाह के लिए कोई फरमान जारी हो सकता है। हालांकि अरुण शाह के पीडब्ल्यूडी विभाग में भी घपले घोटाले की अपनी कहानी है। हम फिर कभी विस्तार सेबताएंगे कि किस तरीके से ठेकेदारों को पैसा नहीं दिया जा रहा है और टेंडर पर टेंडर यानी पुराने काम का पैसा ही नहींदिया गया या पुराना काम अधूरा है। नए-नए टेंडर निकाले जा रहे कमीशन खोरी की भी जमकर चर्चा है। सड़क चौराहे पर यदि चर्चा का विषय बन जाए किसी सरकार का भ्रष्टाचार तो आप समझ सकते हैं कि आने वाले दिनों में इस सरकार के लिए या भारतीय जनता पार्टी के लिए किस तरह का मुसीबत खड़ा होने वाली है। लेकिन यदि कांग्रेस की माने तो यह सरकार तो रिमोट से चल रही है। रिमोट कुछ सेंट्रल के पास है तो कुछ यहां के अधिकारियों के पास है। अधिकारियों की मनमानी पर किसी तरह का लगाम नहीं है और शायद यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में माफिया राज हावी है हर सेक्टर में ऐसा कोई विभाग नहीं होगा जहां से भ्रष्टाचार की खबरें नहीं आ रही होगी। हालांकि अरुण साह के बारे में कहा जाता है कि वे जमीन से जुड़े नेता है। उनकी पृष्ठभूमि आरएसएस से हैं। वह तो राजनीतिक तिकड़म के चलते मुख्यमंत्री नहीं बन पाए। वरना जिस हिसाब से प्रदेश अध्यक्ष रहते उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ा गया था पहली दावेदारी या पहला हक उनका था। लेकिन अब शायद अरुण साहब ने भी समझ लिया है कि डिप्टी सीएम से ही काम चलाना है। बहुत कुछ मिलना नहीं है। तो क्या इस पूरे खेल में अब वे विभाग में जो अधिकारी खेल खेल रहे हैं उनके साथ हो गए हैं। कहना बड़ा मुश्किल है कि क्या कुछ होगा