थैलीसीमिया एवं सिकलसेल की संयुक्त स्क्रीनिंग पर जोर
रायपुर।Koi Apna Sa Ho Kash Foundation द्वारा रायपुर में एक दिवसीय जागरूकता एवं रोकथाम अभियान का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य थैलेसीमिया एवं सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना तथा उनके समय पर परीक्षण, उचित उपचार और रोकथाम के उपायों पर विस्तृत चर्चा करना रहा।
कार्यक्रम में दिल्ली, मध्यप्रदेश एवं अन्य स्थानों से आए अनुभवी चिकित्सकों एवं मेडिकल विशेषज्ञों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने थैलेसीमिया एवं सिकल सेल एनीमिया के कारण, लक्षण, समय पर जांच (स्क्रीनिंग), गुणवत्तापूर्ण रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन), नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा रोगियों के बेहतर जीवन प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।
संस्था की संस्थापक काजल सुरेश सचदेव ने अपने संबोधन में कहा कि आज समाज में रक्त से संबंधित बीमारियों के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। समय रहते जांच और सही परामर्श से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
दिल्ली से पधारी थैलासीमिक इंडिया की सेक्रेटरी शोभा तुली ने बताया कि इन बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए प्रॉपर केयर मैनेजमेंट अत्यंत जरूरी है। साथ ही भविष्य में ऐसे बच्चों के जन्म को रोकने के लिए सामाजिक स्तर पर सिकल सेल एनीमिया एवं थैलेसीमिया की अनिवार्य स्क्रीनिंग निःशुल्क की जानी चाहिए। उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हम सब मिलकर “सिकल सेल एवं थैलेसीमिया मुक्त भारत 2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार के साथ समन्वय कर कार्य करें।
माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जी ने काश फाउंडेशन की इस पहल की सराहना करते हुए आश्वासन दिया है कि थैलीसीमिया स्क्रीनिंग की दिशा में अवश्य ही सरकार ठोस कदम उठाएगी। कार्यक्रम में पधारे स्वास्थ विभाग के IS रितेश अग्रवाल जी ने सारी बातों को सुना एवं इस पर गंभीरता से अमल किए जाने के लिए कहा।
संस्था के अध्यक्ष सुरेश सचदेव एवं सचिव संदीप कुकरेजा ने भी रोकथाम संबंधी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए नियमित जांच, जागरूकता अभियान और सामुदायिक सहभागिता को आवश्यक बताया। कार्यक्रम में उपस्थित इत्सा हॉस्पिटल के डा सचिन पितलवार,डा विकास गोयल, बिलासा ब्लड के संस्थापक स्वराज गौतम सब ने मिलकर हीमोग्लोबिनो पैथी पर हर तीन महीने में कार्यशाला पर जोर दिया , इन बच्चों के पैदा होने पर चिंता जताई। दिल्ली के डा राहुल भार्गव ने अन्य प्रदेशों के मॉडल से छत्तीसगढ़ को भी इस बीमारी को खत्म करने की सलाह दी
काश फाउंडेशन लगभग 15 सालों से थैलीसीमिया एवं सिकलसेल पर कार्य कर रहा है शादी से पहले लड़के और लड़की का HPLC टेस्ट करा लिया जाए तो ऐसे बच्चे जन्म ही नहीं लेंगे
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने और रक्त संबंधी बीमारियों के विरुद्ध अभियान को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
यह अभियान समाज को स्वस्थ और जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा ।
