डिफॉल्टर
जब कांग्रेस नेता चरणदास महंत ने प्रधानमंत्री मोदी को डिफाल्टर कह दिया था तब भाजपाइयों ने जमकर हल्ला मचाया था
यह रिपोर्ट अचानक सामने आ गई तो सोचा एक बार फिर इसे पुनर्प्रकाशित किया जाए…
राजनीतिक दलो में बढ़ती तल्खी के चलते एक दूसरे के खिलाफ अमर्यादित शब्दों की बाढ सी आ गई है और हम इस के शब्दों को लेकर हमेशा चिंता व्यक्त करते रहे हैं आलोचना करते रहे हैं कि राजनीति में इस तरह के शब्दों का कहीं कोई स्थान नहींहोना चाहिए लेकिन यदि सत्ता पक्ष ही आक्रमक होकर विरोधियों के खिलाफ विषवमन करने लगे अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने लगे तो फिर विपक्ष के नेताओं से किस तरह की उम्मीद की जा सकती है
देश के मंत्री नरेंद्र मोदी ने जितने अमर्यादित शब्दों का उपयोग किया है जिसकी वजह से उनकी छवि बरी तरीके से बिगड़ गई है हालाकि यह छवि हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से ही बिगड़ गई थी और इसकी पुष्टि किसी और नहीं आरएसएस ने अपने मुख पत्र से ही कर दिया था कि इस छवि के भरो से चुनाव जीतना मुश्किल है लेकिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपनी ठसक है अपनी धमक है इसलिए वे अब भी यह मानते हैं कि उनकी छवि के भरोसे ही चुनाव जीता जा सकता है लेकिन जब चुनावी बांड का नतीजा सामने आया कि किस तरीके सेपैसा वसूलने के लिए हर वो काम किए गए जो अनैतिकता की श्रेणी में आते हैं या सत्ता यदि पैसा लेकर धंधा देने लगे सत्ता यदि पैसा लेकर जहर बेचने वालों को क्लीन देने लगे सत्ता यदि पैसा लेकर सरकारी गवाह बनाने लगे तो फिर ऐसी सत्ता पर सवाल तो उठेंगे ही और उनके मुखिया के खिलाफ विश वमन होगा हालांकि हम फिर कह रहे हैं कि हम इस तरह के अमर्यादित टिप्पणी के बिलकुल भी खिलाफ है क्योंकि जो टिप की गई है वह शब्द है डिफल्टर डिफल्टर आमतौर पर उन को कहा जाता है जो पैसों से दिवालिया हो जाते हैं जो कर्ज लेने के बाद पैसा नहीं पटाते हैं भागे भागे फिरते हैं इस में आपको याद होगा विजय माल मोदी चौसीकितने भ पता नहीं क्या क्या कहा जाता है तब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को डिफल्टर क्यों कहा गया व भी उस व्यक्ति के द्वारा जिसकी राजनीतिक जीवन में वा को लेकर संयम बरतने या उनकी छवि इस तरह की है कि कहा जाता है कि चरण दास महंत इस तरह के शब्दों का प्रयोग कभी नहीं करते हैं वह व्यक्ति यदि डिफाल्टर कह रहा है तोइसकी वजह क्या है हालांकि इसके पहले जब सर फोड़ने की बात कही थी तो वे खुद आकर यह बात बता गए थे कि यह सब छत्तीसगढ़ी में के रूप में या कहावत के रूप में लो के रूप में प्रयोग किया जाता है और भारतीय जनता पार्टी गलत ढंग से इस ले रही है लेकिन डिफाल्टर यि डिफाल्टर का मतलब हिंदी में समझा जाए तो इसके चार अर्थ बताए गए हैं डिशनरी में शब्द कोष में उसम से एक शब्द है दोष दूसरा दिवालिया तीसरा व्यक्ति क्रमी और चौथा चूक करने वाला इन् डिफल्टर कहा जाता है या हिंदी शब्दकोश के शब्द है जैसे ही चरण दस मने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोडिफल्टर कहा तो इसे अो टिप्प बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने पत्रकार वार्ता ले ली हालांकि अभी तक किसी भी भाजपाई ने इस स्लोन को अपने सीने से नहीं लगाया कि मैंभी डिफल्टर जिस तरीके से पहले लगाते रहे हैं विपक्षी अमर्यादित शब्दों को लेकर लेकिन आम चलन की भाषा में डिफल्टर किसे कहते हैं यह किसी से छिपा नहीं है या जो बात बात प झूठ बोलता है और वादा करके मुक जाता हैवादे कभी पूरा नहीं करता है उन्हे आमतौर पर बोलचाल की भाषा में छत्तीसगढ़ में तो कम से कम उ डिफाल्टर कहा जाता है इस तरह के लोगों को और कांग्रेस ने यही बात भारतीय जनता पार्टी के सवालों के जवाब में कहा है कांग्रेस ने भी तत्काल इस बयान का पक्ष लेते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री मोदी को डिफाल्टर कहने की वजह ये है किउन्होने जो भी वादा किया है उसे पूरा नहीं किया है चाहे दो करोड़ लोगों को हर साल रोजगार देने की बात हो या लाख रुप यही हर खाते में चले जाने की बात हो महगाई 100 दिन में कम करने की बात हो या फिर गैस सिलेंडर 00 में देने की बात हो कांग्रेस ने तो फेरिस गना दी मोदी के वादा खिलाफ का तो क्या डिफाल्टर इसलिए कहा गया क्या डिफल्टर कहा जा सकता है यह सवाल महत्वपूर्ण नहीं है कि यह शब्द कहना चाहिए या नहीं कहना चाहिए लेकिन अब यहमहत्त्वपूर्ण हो गया है कि पहले जिस तरीके से मोदी पर हमले होते थे और उसकी प्रतिक्रिया आम लोगों में सामने आती थी उस तरह की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आ रही क्यासचमुच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि लगातार बिगड़ते चली गई है इसलिए अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कोई भी कुछ भी कह रहे हैं कोई फर्क नहीं पड़ रहा है आम लोगों में कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है और इसकी एक बड़ी वजह चुनावी भांड भी है जिसके तहत पैसा लो धंधा दो का खेल शुरू किया गया जिसके तहत उ दवा कंपनियों से भी पैसे वसूल लिए गए जो नकली थे मापदंड से घटिया स्तर प थे जानी एक तरह से मरीजों के लिए व जहर काकाम कर सकता था ऐसी दवा कंपनियों की भी जांच रोक कर पैसे ले लेने की वजह से अब लोगों में मोदी की छवि बिगड़ चुकी या फिर विरोधियों को कुचलने का जो खेल खेला गया है या ने गांधी परिवार को के खिलाफ लगातारविमन होते देख जनता परेशान है या हैरान है या फिर नाखुश है क्या कहा जाए लेकिन एक बात तो तय है कि यदि सत्ता में सहि ना रहे सत्ता में शालीनता ना रहे तो फिर विरोधियों से किस तरह की उम्मीद की जा सकती है हालांकि हम अब भी कह रहे हैं कि हम किसी भी तरह के अमर्यादित शब्दों केखिलाफ है और इसे एक तरह से हिंसा मानते हैं लेकिन फिर वही बात की यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही अमरद इस शब्दों का प्रयोग करें तो फिर आने वाले दिनों में राजनीति किस तरह से आगे बढ़ेगी लोकतंत्र का क्या होगा अभी से कहना कुछ मुश्किल है
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