साय सरकार का कमाल, हर भट्टी के बाज़ू धमाल
एक तरफ डबल इंजन की सरकार यानी छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय की सरकार लोगों को यह समझारही है कि छत्तीसगढ़ में सुशासन है तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की स्थिति क्या है क्या सच मुच यहां सुशासन है सड़क दुर्घटनाओं को यदि आप छोड़ दे लगातार बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से प्रशासन चिंतित तो है लेकिन उसके कोई उपाय नहीं हो पा रहे हैं इसकी क्या बड़ी वजह शराब है क्योंकि भारतीय जनता पार्टी जब सत्ता में नहीं थी और भूपेश सरकार की सत्ता थी तब शराब बंदी को लेकर कई तरह के सवाल भारतीय जनता पार्टी उठा रही और सत्ता में आने के बाद जिस तरीके से अपराध को रोकने में सरकार पूरी तरीके से विफल रही है सवाल यह नहीं है कि शराब बंद किया जाना चाहिए या नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि इस दौर में यानी मोदी सत्ता की दौर में छत्तीसगढ़ के लोग सबसे ज्यादा परेशान रेलवे को लेकर भी रहे हैं आए दिन कभी भी ट्रेनें रद्द कर दी जाती है और जिसकी वजह से स्टेशनों की स्थिति किसी से छिपी नहीं जिस तरीके से मारामारी धक्का मुक्की के बाद किसी तरीके से सीट मिल पाती है उसके पहले स्टेशन में ही सिर्फ खड़ा होने या बैठने के लिए लोगों को किस तरीके से जद्दोजहद करना पड़ता है वह भी कम हैरान और परेशान करने वाला नहीं लेकिन सरकार का दावा है वह सुशासन चला रही है तब ऐसीपरिस्थिति में लगातार बढ़ रहे अपराध को लेकर क्या पुलिस विभाग कुछ नया ठोस कदम उठाएगी कहना मुश्किल है क्योंकि पुलिस बल की कमी का रोना हमेशा ही पुलिस प्रशासन करते रही और सरकार का अपना दावा है लगातार
अपराध बढ़ रहे हैं और उसे रोकने के लिए पुलिस ने नया तरीका इजाद किया लूटपाट हमला जैसी घटनाएं भी होने लगी है हत्या तक की घटनाएं होने लगी और बलात्कार के भी आंकड़े बढ़ने लगे तब पुलिस ने निर्णय लिया है कि अब वह ऐसे पुराने अपराधियों की जमानत रद्द करवाने के लिएन्यायालय में अर्जी लगाएगी जिनके खिलाफ चोरी हत्या जैसे कई मामले दर्ज है तो क्या इससे अपराध रुक जाएगा या रात को 11 बजे सारी दुकाने बंद करवा देने से अपराध रुक जाएगा कहना इसलिए बेहद कठिन है क्योंकि जिस तरीके से पुलिस के ही संरक्षण में अपराध फल फूल रहे हैं कहा जाए तो गलत नहीं सट्टा जुआ शराब की तस्करी अवैध शराबसब कुछ तो पुलिस के संरक्षण में होने की चर्चा होते रही है कितने ही अवैध शराब पुलिस ने पकड़ी है लेकिन जो मेन करता धरता है उसके पास तक क्या पुलिस पहुंच पाई नसीली टेबलेट को लेकर भी पुलिस ने बड़ी कारवाही की है लेकिन क्या मुख्य अपराधी तक पहुंचा जा सका तब ऐसे में शराब ही यदि सब बुराई जड़ मानती है सत्ता तो फिर शराब को नए सीरे से पैसे कमाने का जरिया नहीं बनाया जा रहा हैकल तक जिस भूपेश सरकार पर शराब बंदी को लेकर आरोप लगते थे अवैध अहाते भट्ठी और दुकानों के बाजू में शराब पीने पिलाने को लेकर सवा सवाल उठाए जाते थे वही विष्णुदेव सरकार यदि वैद तरीके से यानी सिस्टम में शामिल करके अहाता खोल ले और पुलिस सड़कों में शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच कर वसूली करें तो फिर इस स्थिति को क्या कहा जाए जंगल राज कहना यह गलत होगा।लेकिन शराब को लेकर जिस तरीके से बवाल मचा है छत्तीसगढ़ में आईएस अफसर से लेकर कई बड़े नेता जेल की सलाखों में महादेव ए सट्टा को लेकर भी कई आईपीएस संदेह के घेरे में बड़े-बड़े नाम है हम विस्तार से बताएंगे कि इस खेल में किस तरीके से आरिफ शेख आनंदछाबड़ा प्रशांत अग्रवाल जैसे आईपीएस संदिग्ध स्थिति में परिवहन कोयला घोटाले में दीपांशु काबरा जैसे सीनियर आईपीएस भी घेरे में है तब ऐसी परिस्थिति में एक तरफ जब अपराध बढ़ रहा है शराब को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं तब दूसरी तरफ प्रदेश सरकार यदि अहाता बनवा रही है शराब पीने और पिलाने के लिए और इस अहाता के ज पैसे कमाने में लगी 457 आहातो को मंजूरी दे दी गई और इस मंजूरी की वजह से सरकार को 103 करोड़ 54 लाख रुपए का फायदा हो रहा है और आने वाले दिनों में जो बाकी बचे दुकान है या भट्ठी उसके बाजू भी अहाते खुलवाए जा रहे हैंयानी आप सोचिए कि एक एक तरफ डॉक्टर रमन सिंह के जमाने में जब वे मुख्यमंत्री थे उस दौर में शराब बंदी कोलेकर कुछ नियम बनाए जा रहे थे और पहले चले जाएंगे तो दिग्विजय सिह के समय तो यहां तक कह दिया गया था कि किसी क्षेत्र की यदि आधी आबादी यानी महिलाओं का 50फीसद महिलाएं शराब भट्टी या शराब दुकान हटाने के लिए आवेदन देती हैं तो शराब दुकाने बंद कर दी जाएगी रमन सिंह ने भी दावा किया था कि उसने बहुत सारी दुकानें बंद कर दी है लेकिन भूपेश सरकार का एक दौर आया पूरा तरीके से विवादित रहा और अब विष्णुदेव साय सरकार केदौर को लेकर शराब को लेकर तो कम से कम यही कहा जा रहा है कि व्यवस्था वही है सिस्टम वही चल रहा है घोटाले वैसी हो रहे हैं सिर्फ फर्जी होलोग्राम को छोड़कर एक व्यक्ति के हाथ से दूसरे व्यक्ति के हाथ में चला गया वह व्यक्ति कौन है और एक दमदार मंत्री के भाई के द्वारा तीन जिलों के दुकानों का ठेका हासिल कर लेने का भीतर खाने से भी चर्चा है उस पर भी हम विस्तार से चर्चा करेंगे लेकिन आज हम बात कर रहे हैं आहते को लेकर और शहर में बढ़ते अपराधों को लेकर तो क्या इस मामले में सरकार फेल हो चुकी देखना होगा ।
