गुरुवार, 28 अगस्त 2025

विपुल पांचोली और न्यायिक विश्वसनीयता…

 विपुल पांचोली और न्यायिक विश्वसनीयता…


सारी संस्थाओं को मुट्ठी में रखने की कोशिश का मतलब ही तानाशाही होता है, यदि सब कुछ सरकार के इशारे पर चले तो आपातकाल की घोषणा की जाय या नहीं कोई मायने नहीं रखता, तब संसद में आवाज़ भी नक्कार खाने की तूती की तरह हो गई है, संवैधानिक संस्थान ही नहीं देश के संसाधनों पर भी मित्रों के ज़रिये क़ब्ज़ा क्या तानाशाह नहीं है, लेकिन आज बात जस्टिस नागरत्ना की हिम्मत और गवई की लाचारी…

राहुल गांधी के दो साल सजा को बरकरार रखने वाले  जस्टिस विपुल पंचोली बने सुप्रीम कोर्ट में जज..!!

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस विपुल पंचोली के विवादास्पद क्रेडिबिलिटी के कारण उन्हें गुजरात से बिहार के पटना हाईकोर्ट में ट्रान्सफर किया गया था। किन्तु पिछले महीने 21जुलाई को वहां का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया,

और अब जस्ट एक ही महीने में आज उन्हें सुप्रीम कोर्ट का जज बना दिया गया है।

इनके नियुक्ति, न्यायिक इंटीग्रिटी, संवैधानिक एवं विधिक योग्यता पर मीडिया एवं सिविल सोसायटी में सवाल खड़े किए गए हैं।

इस मुद्दे पर 'कैम्पेन फॉर जुडिशियल अकाउंटेबिलिटी एंड रिफॉर्म्स'  नामक संस्था ने भी बयान जारी किया।

सीजेएआर ने कहा- सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों के कोलेजियम में जस्टिस पंचोली की नियुक्ति 4-1 के बहुमत से हुई, 

क्योंकि जस्टिस नागरत्ना ने असहमति जताई। और कहा कि इस नियुक्ति से न्याय प्रशासन एवं कोलेजियम प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठेगा।

सीजेएआर के मुताबिक जस्टिस पंचोली गुजरात से सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाले तीसरे जज हैं, जो गुजरात हाईकोर्ट के आकार की तुलना में असंतुलित प्रतिनिधित्व है। 

साथ ही वे हाईकोर्ट जजों की ऑल इंडिया सीनियरिटी लिस्ट में 57वें नंबर पर हैं।

पर अब इनसे 57 सीनियर जजों को दरकिनार करते हुए इन्हें जज बना दिया गया है। और 2031 में यही महान न्यायमूर्ति हमारे देश के मुख्य न्यायाधीश भी बनेंगे।

यह नियुक्ति जिस सीजेआई द्वारा की गई है वह बाबा साहब डॉ अम्बेडकर को अपना आदर्श मानते हैं, बौद्ध एवं दलित हैं। जिस सिस्टम में की गई है वह कोलेजियम है, जो पूर्ण स्वायत्त है। 

इसलिए सरकारी हस्तक्षेप के आरोप से मोदी सरकार टेक्निकली पूरी तरह बरी एवं फ्री है।(साभार)


Vishwajit Singh

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