शुक्रवार, 8 मई 2026

जब रोती हुई इस छात्रा ने खोल दी सरकार की पोल

जब रोती हुई इस छात्रा ने खोल दी सरकार की पोल 


 छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था किस कदर बदहाल है कि बच्चों को अपना भविष्य खराब नजर आने लगा है और क्या विष्णुदेव साय सरकार ने यह निर्णय ले लिया है कि जो भी बच्चे अब स्कूलों की बदहाली पर आवाज उठाएंगे उन्हें जेल में सड़ा देंगे क्या जिला शिक्षा अधिकारी खुद को मुख्यमंत्री समझने लगे हैं क्योंकि उनको लगता है कि मुख्यमंत्री से तो हर कोई मिल नहीं सकता तब उनकी मनमानी मुख्यमंत्री तक कैसे पहुंचे सवाल सिर्फ इस अहिवारा के बच्चों का नहीं है सवाल तो प्रदेश में बदहाल होती शिक्षा का है ऐसे सैकड़ों स्कूल है जहां के बच्चों को शिक्षक भी नहीं मिल पा रहा है और हालत यह है सरकार कोई व्यवस्था करना ही नहीं चाहती और क्या सत्ता ने अब जिला शिक्षा अधिकारियों को यह पावर दे रखा है कि वह अपनी मनमान चलाए और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने वाले बच्चों को जेल में सड़ा यह कई तरह के सवाल है जिसका जवाब ढूंढना बेहद मुश्किल है इतने बड़े मामले में कांग्रेस की भी चुप्पी हैरान कर देने वाली यानी आप सोचिए कि एक जिला शिक्षा अधिकारी की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वह अपने स्कूल की समस्या को लेकर शिक्षकों की कमी को लेकर आने वाले बच्चों को जेल में डाल देने की धमकी दे रहे हैं क्या जिला शिक्षा अधिकारी के ऊपर बैठे कलेक्टर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं इतने ताकतवर हो गए जिला शिक्षाधिकारी ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन जब आप इन बच्चों का पूरा वीडियो देखेंगे तो आपको समझ में आएगा कि किस हद तक छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था बदहाली की कगार पर पहुंच गया है और अधिकारियों की मनमानी किस हद तक पहुंच गई हम लोग कलेक्टर सर के पास गए थे तो उसने सर ने ना हम लोगों को डीओ साहब के पास भेजा कि हम लोग दो दिन में व्यवस्था करते हैं टीचर्स की लेकिन डीओ सर ने हमसे बदतमीजी से बात की बोलते हैं ऐसी बहस मत करो चलो जाओ यहां से क्या ये सब लिख एप्लीकेशन में कौन सिखाया तुम लोगों को लिखने के लिए जिी जेल का वो करोगे ना समझ जेल का वो करोगे ना समझ आ जाएगा ऐसे वैसे करके बोले हम लोगों को और हमारा जो क्या मांगने गए थे बेटा शिक्षक दो साल हो गए एक भी टीचर्स नहीं है तो हम लोग टीचर्स की मांग करने के लिए गए थे कितने टीचर नहीं है एक भी 11 12 पिछले साल से खुला है लेकिन 11 को जैसे तैसे करके हम लोग पास कर ले लेकिन 12थ हमारा बोर्ड है बोर्ड हमारा बेस है तो हम लोग कैसे फाइट करेंगे उसको तो हम लोग टीचर्स की मांग करने के लिए गए थे तो वैसे ही बोल दिया ओ आपके स्कूल का क्या नाम है कितने बच्चे हैं जिसमें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल लीवा से हैं हम लोग और चार टीचर्स बस है वो भी ना 10थ के लिए है 11 12थ के नहीं है वो सर मैम जो है वो 160 अभी क्या चाह रहे हो अभी हमारे पास टीचर आज ऐसे करके बोलने के लिए आए थे लेकिन ओ सर ने हमको ये सब बोल दिया ठीक आपका नाम बताओ आरती साहू बायो कहा जा रहा है कि यह स्थिति केवल अवारा की नहीं है अमूमन किसी भी जिले के शिक्षा अधिकारियों का रुतबा देखने को बनता है शिक्षक वर्ग भी उनसे परेशान रहते हैं कभी छुट्टी को लेकर तो कभी दूसरे मामले को लेकर य सरकार के आने के बाद बढ़ोतरी हुई है कहा जाए तो गलत नहीं होगा !

Vidio dekhen


https://youtu.be/hVkT305tI5Y?si=eYp2teVu_-FoW6P3

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