जब रोती हुई इस छात्रा ने खोल दी सरकार की पोल
छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था किस कदर बदहाल है कि बच्चों को अपना भविष्य खराब नजर आने लगा है और क्या विष्णुदेव साय सरकार ने यह निर्णय ले लिया है कि जो भी बच्चे अब स्कूलों की बदहाली पर आवाज उठाएंगे उन्हें जेल में सड़ा देंगे क्या जिला शिक्षा अधिकारी खुद को मुख्यमंत्री समझने लगे हैं क्योंकि उनको लगता है कि मुख्यमंत्री से तो हर कोई मिल नहीं सकता तब उनकी मनमानी मुख्यमंत्री तक कैसे पहुंचे सवाल सिर्फ इस अहिवारा के बच्चों का नहीं है सवाल तो प्रदेश में बदहाल होती शिक्षा का है ऐसे सैकड़ों स्कूल है जहां के बच्चों को शिक्षक भी नहीं मिल पा रहा है और हालत यह है सरकार कोई व्यवस्था करना ही नहीं चाहती और क्या सत्ता ने अब जिला शिक्षा अधिकारियों को यह पावर दे रखा है कि वह अपनी मनमान चलाए और व्यवस्था को लेकर सवाल उठाने वाले बच्चों को जेल में सड़ा यह कई तरह के सवाल है जिसका जवाब ढूंढना बेहद मुश्किल है इतने बड़े मामले में कांग्रेस की भी चुप्पी हैरान कर देने वाली यानी आप सोचिए कि एक जिला शिक्षा अधिकारी की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वह अपने स्कूल की समस्या को लेकर शिक्षकों की कमी को लेकर आने वाले बच्चों को जेल में डाल देने की धमकी दे रहे हैं क्या जिला शिक्षा अधिकारी के ऊपर बैठे कलेक्टर भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं इतने ताकतवर हो गए जिला शिक्षाधिकारी ऐसे कई सारे सवाल है लेकिन जब आप इन बच्चों का पूरा वीडियो देखेंगे तो आपको समझ में आएगा कि किस हद तक छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था बदहाली की कगार पर पहुंच गया है और अधिकारियों की मनमानी किस हद तक पहुंच गई हम लोग कलेक्टर सर के पास गए थे तो उसने सर ने ना हम लोगों को डीओ साहब के पास भेजा कि हम लोग दो दिन में व्यवस्था करते हैं टीचर्स की लेकिन डीओ सर ने हमसे बदतमीजी से बात की बोलते हैं ऐसी बहस मत करो चलो जाओ यहां से क्या ये सब लिख एप्लीकेशन में कौन सिखाया तुम लोगों को लिखने के लिए जिी जेल का वो करोगे ना समझ जेल का वो करोगे ना समझ आ जाएगा ऐसे वैसे करके बोले हम लोगों को और हमारा जो क्या मांगने गए थे बेटा शिक्षक दो साल हो गए एक भी टीचर्स नहीं है तो हम लोग टीचर्स की मांग करने के लिए गए थे कितने टीचर नहीं है एक भी 11 12 पिछले साल से खुला है लेकिन 11 को जैसे तैसे करके हम लोग पास कर ले लेकिन 12थ हमारा बोर्ड है बोर्ड हमारा बेस है तो हम लोग कैसे फाइट करेंगे उसको तो हम लोग टीचर्स की मांग करने के लिए गए थे तो वैसे ही बोल दिया ओ आपके स्कूल का क्या नाम है कितने बच्चे हैं जिसमें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक नहीं है गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल लीवा से हैं हम लोग और चार टीचर्स बस है वो भी ना 10थ के लिए है 11 12थ के नहीं है वो सर मैम जो है वो 160 अभी क्या चाह रहे हो अभी हमारे पास टीचर आज ऐसे करके बोलने के लिए आए थे लेकिन ओ सर ने हमको ये सब बोल दिया ठीक आपका नाम बताओ आरती साहू बायो कहा जा रहा है कि यह स्थिति केवल अवारा की नहीं है अमूमन किसी भी जिले के शिक्षा अधिकारियों का रुतबा देखने को बनता है शिक्षक वर्ग भी उनसे परेशान रहते हैं कभी छुट्टी को लेकर तो कभी दूसरे मामले को लेकर य सरकार के आने के बाद बढ़ोतरी हुई है कहा जाए तो गलत नहीं होगा !
Vidio dekhen

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