जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था
अपनी पीठ थपथपा में लगी छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साहे सरकार कई तरह के ऐसे फरमान जारी करने लगी है जिसे लेकर चर्चा गर्म है ऐसा ही एक फरमान शिक्षा विभाग में भी जारी किया लगातार शिक्षा को लेकर और उसकी गुणवत्ता को लेकर जरजर स्कूल भवन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं उन सवालों से ध्यान भटकाने के लिए विष्णुदेव साय सरकार ने कई तरह के फरमान जारी किए हैं जिसमें से एक फरमान तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस का भी है जिसे लेकर अभी कई तरह के सवाल उठ ही रहे थे कि फिर एक बार नया फरमान जारी कर दिया गया है कि निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी पीटीएम होगी यानी पालक टीचर्स मीटिंग हो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के हाई कोर्ट ने स्वतः संजन लेकर शिक्षा सचिव को जवाब देने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जो जरजर स्कूल भवन है जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं वैसे स्कूलों के लिए सरकार क्या कर रही है लगातार छोटी-मोटी घटनाएं सामने आई है अभी तक गंभीर घटनाएं नहीं हुई कहीं छज्ज टूटकर बच्चों के ऊपर गिर रहा है तो कहीं रसोई में बच्चे जल रहे हैं और स्कूलों की साफ सफाई में बच्चों को नौकरों की तरह घसीटा जा रहा है ऐसे कई सवाल यही नहीं इन बारिश के दिनों में तो जिस तरह की तस्वीर सामने आई है वह छत्तीसगढ़ सरकार के मुंह पर काली पोतने वाली है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा किस तरीके से नौनिहालों को स्कूल जाने में संघर्ष करना पड़ रहा है उफनती नदी पार करनी पड़ रही है तो कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है ऐसी परिस्थिति में पीटीएम का आयोजन या पालक टीचर मीटिंग को लेकर दिशा निर्देश क्या साय सरकार का बेत का फरमान नहीं यदि आप प्रदेश की स्थिति देखेंगे तो चौक जाएंगे छत्तीसगढ़ की सरकार अपने तरफ से कुछ भी नहीं करना चाहती कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा क्योंकि पिछली सरकार ने सरकारी स्कूलों को सुधारने के लिए आत्मानंद स्कूल के नाम से एक योजना शुरू की थी जिसमें बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही थी स्कूल चकाचक किए जा रहे बैठक व्यवस्था जोरदार ढंग से बिल्कुल आधुनिकरण किए जा रहे थे उन स्कूलों को पीएम श्री योजना में शामिल कर लिया गया यानी वाहवाही लूटने का कोई मौका यह सरकार छोड़ना नहीं चाहती प्रदेश की यदि स्कूलों की बात किया जाए तो खुद विष्णुदेव साय सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश के 300 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है हज से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो एक शिक्षक के भरोसे हैं और शिक्षा विभाग में ही 1954 पद रिक्त है यह स्कूली शिक्षा विभाग का हाल है और हायर एजुकेशन में याने कॉलेज की शिक्षा उच्च शिक्षा में तो और भी बुरी स्थिति है अतिथि शिक्षकों के माध्यम से ले देकर पढ़ाई हो रही है और शोध कार्य विद्यालयों में एक ढंग से बंद है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा और ऐसे में शिक्षा विभाग का यह फरमान किस तरीके से ला हालांकि इसे लेकर लंबी चौड़ी योजनाएं बनाई गई है 12 बिंदु पर यह मीटिंग होगी जिसमें पालकों के सवालों का जवाब शिक्षक देंगे या उनसे बेहतर जो उपाय हो सकते हैं वह सलाह भी लेंगे और सबसे बड़ी बात है फरमान जारी होने के पाच छ दिन बाद यानी 6 अगस्त से इस योजना को अमली जामा पहनाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं कि सरकार का यह कहना है कि जो स्कूलों को लेकर जो योजना बनी है उनकी जानकारी पालकों को दी जाएगी जिससे पालक स्कूल विभाग के निर्देश से जो उनकी जो योजना है उसका फायदा उठा सकते हैं लेकिन आप सोचिए कि जड़ जर भवन का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है बच्चे कैसे स्कूल जा रहे हैं इसका भी कोई ठौर ठिकाना नहीं है यानी ट्रैफिक यातायात की अलग समस्या है किस तरीके से आए दिन यह सुनने में मिलता है कि स्कूली बच्चे स्कूल जाते समय या स्कूल से घर लौटते समय सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं किस तरीके से स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और ऐसी परिस्थिति में निजी स्कूलों की तर्ज पर यह इस फरमान को लेकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मचाए देखना है कि पीठ थपथपा नहीं वाली इस योजना कितने दिनों तक चलती है l
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