मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था

जब साय सरकार के बेतुका फ़रमान से हड़कंप मचा था 


 अपनी पीठ थपथपा में लगी छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साहे सरकार कई तरह के ऐसे फरमान जारी करने लगी है जिसे लेकर चर्चा गर्म है ऐसा ही एक फरमान शिक्षा विभाग में भी जारी किया लगातार शिक्षा को लेकर और उसकी गुणवत्ता को लेकर जरजर स्कूल भवन को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं उन सवालों से ध्यान भटकाने के लिए विष्णुदेव साय सरकार ने कई तरह के फरमान जारी किए हैं जिसमें से एक फरमान तो बायोमेट्रिक अटेंडेंस का भी है जिसे लेकर अभी कई तरह के सवाल उठ ही रहे थे कि फिर एक बार नया फरमान जारी कर दिया गया है कि निजी स्कूलों की तर्ज पर अब सरकारी स्कूलों में भी पीटीएम होगी यानी पालक टीचर्स मीटिंग हो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के हाई कोर्ट ने स्वतः संजन लेकर शिक्षा सचिव को जवाब देने कहा है कि छत्तीसगढ़ में जो जरजर स्कूल भवन है जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं वैसे स्कूलों के लिए सरकार क्या कर रही है लगातार छोटी-मोटी घटनाएं सामने आई है अभी तक गंभीर घटनाएं नहीं हुई कहीं छज्ज टूटकर बच्चों के ऊपर गिर रहा है तो कहीं रसोई में बच्चे जल रहे हैं और स्कूलों की साफ सफाई में बच्चों को नौकरों की तरह घसीटा जा रहा है ऐसे कई सवाल यही नहीं इन बारिश के दिनों में तो जिस तरह की तस्वीर सामने आई है वह छत्तीसगढ़ सरकार के मुंह पर काली पोतने वाली है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा किस तरीके से नौनिहालों को स्कूल जाने में संघर्ष करना पड़ रहा है उफनती नदी पार करनी पड़ रही है तो कीचड़ से होकर गुजरना पड़ रहा है ऐसी परिस्थिति में पीटीएम का आयोजन या पालक टीचर मीटिंग को लेकर दिशा निर्देश क्या साय सरकार का बेत का फरमान नहीं यदि आप प्रदेश की स्थिति देखेंगे तो चौक जाएंगे छत्तीसगढ़ की सरकार अपने तरफ से कुछ भी नहीं करना चाहती कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा क्योंकि पिछली सरकार ने सरकारी स्कूलों को सुधारने के लिए आत्मानंद स्कूल के नाम से एक योजना शुरू की थी जिसमें बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जा रही थी स्कूल चकाचक किए जा रहे बैठक व्यवस्था जोरदार ढंग से बिल्कुल आधुनिकरण किए जा रहे थे उन स्कूलों को पीएम श्री योजना में शामिल कर लिया गया यानी वाहवाही लूटने का कोई मौका यह सरकार छोड़ना नहीं चाहती प्रदेश की यदि स्कूलों की बात किया जाए तो खुद विष्णुदेव साय सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि प्रदेश के 300 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं है हज से अधिक स्कूल ऐसे हैं जो एक शिक्षक के भरोसे हैं और शिक्षा विभाग में ही 1954 पद रिक्त है यह स्कूली शिक्षा विभाग का हाल है और हायर एजुकेशन में याने कॉलेज की शिक्षा उच्च शिक्षा में तो और भी बुरी स्थिति है अतिथि शिक्षकों के माध्यम से ले देकर पढ़ाई हो रही है और शोध कार्य विद्यालयों में एक ढंग से बंद है कहा जाए तब भी गलत नहीं होगा और ऐसे में शिक्षा विभाग का यह फरमान किस तरीके से ला हालांकि इसे लेकर लंबी चौड़ी योजनाएं बनाई गई है 12 बिंदु पर यह मीटिंग होगी जिसमें पालकों के सवालों का जवाब शिक्षक देंगे या उनसे बेहतर जो उपाय हो सकते हैं वह सलाह भी लेंगे और सबसे बड़ी बात है फरमान जारी होने के पाच छ दिन बाद यानी 6 अगस्त से इस योजना को अमली जामा पहनाने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं कि सरकार का यह कहना है कि जो स्कूलों को लेकर जो योजना बनी है उनकी जानकारी पालकों को दी जाएगी जिससे पालक स्कूल विभाग के निर्देश से जो उनकी जो योजना है उसका फायदा उठा सकते हैं लेकिन आप सोचिए कि जड़ जर भवन का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है बच्चे कैसे स्कूल जा रहे हैं इसका भी कोई ठौर ठिकाना नहीं है यानी ट्रैफिक यातायात की अलग समस्या है किस तरीके से आए दिन यह सुनने में मिलता है कि स्कूली बच्चे स्कूल जाते समय या स्कूल से घर लौटते समय सड़क दुर्घटना का शिकार होते हैं किस तरीके से स्कूलों में शिक्षकों की कमी है और ऐसी परिस्थिति में निजी स्कूलों की तर्ज पर यह इस फरमान को लेकर शिक्षा विभाग में हड़कंप मचाए देखना है कि पीठ थपथपा नहीं वाली इस योजना कितने दिनों तक चलती है l


वीडियो देखें 

https://youtu.be/l8is3ihBSSM?si=fTwitiUbdWmvRE_T