क्या बिजली दरों में बढ़ोतरी अदानी को फ़ायदा पहुँचाने
छत्तीसगढ़ में एक तरफ देश के सबसे बड़े उद्योगपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र गौतम अदानी के काम को गति मिली है तेज विस्तार हो रहा है खासकर पावर सेक्टर को लेकर तो दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के लघु उद्योगों खासकर जो स्टील क्षेत्र के मैन्युफैक्चरिंग उद्योग है री रोलिंग मिल है इन पर बंद होने का खतरा मंडराता जा रहा है और तब सवाल यह है कि क्या इन दोनों खबरों में कोई तालमेल है यह सबसे बड़ा सवाल क्योंकि जिस तरीके से छत्तीसगढ़ की सरकार सत्ता में आते ही यानी डबल इंजन की सरकार बनते ही जिस तरीके से छत्तीसगढ़ में अडानी की भूमिका बढ़ गई है हसदेव काटे जाने लगे राजस्थान को बिजली देने के लिए जमकर कटाई हुई है और उसे लेकर जबरदस्त आंदोलन भी हुआ है तो पावर प्लांट के विस्तार के लिए भी जन सुनवाई में जो अफसरों की भूमिका है वह भी संदेह के घेरे में है किसान जमीन नहीं देना चाहते सरकार सरकारी जमीन दे दी लगातार विरोध हो रहा है रायपुर के तिल्दा ब्लॉक स्थित अडानी पावर प्लांट की बात हो या रायगढ़ में स्थित अडानी पावर प्लांट की बात तिल्दा का जो प्लांट था पहले जीएमआर ग्रुप के पास था उसे नी ने खरीद लिया अधिग्रहित कर लिया अब उसका विस्तार हो रहा है जिसे लेकर जो जन सुनवाई हुई उसमें जबरदस्त हंगामा मचा विरोध हुआ लेकिन सरकार का दावा है कि सब कुछ ठीक हो गया है और जन सुनवाई में अदानी के विस्तार को लेकर लोग खुश है हकीकत क्या है कहना बेहद मुश्किल है तो दूसरी तरफ सरकार ने बिजली के दरों में बढ़ोतरी की है आम आदमी को तो इससे दो चार होना पड़ ही रहा उन्हें ठीक से बिजली नहीं मिल रही है लगातार बिजली कटौती और अनियमित बिजली सप्लाई को लेकर कई जगह आंदोलन हुए हैं बिजली दफ्तर के कर्मचारियों को भागना तक पड़ा तो उद्योग समूह से जुड़े जो उद्योगपति हैं वे भी अचानक बढ़ोतरी को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं मुख्यमंत्री को ज्ञापन तक सौप गए हैं लेकिन अभी तक इस माम में कोई विचार नहीं होने से उद्योगपतियों में बेचैनी खबर यह भी है कि बिजली दर में बढ़ोतरी से परेशान कई उद्योगों ने अन्य विकल्पों की तलाश भी शुरू कर दी य विकल्प क्या हो सकते हैं सीधी सधी सी बात है कि जिन्हें उद्योग चलाना है वह सस्ती बिजली के लिए निजी जो कंपनियां है उनके पास जाएगी उनसे समझौता करेगी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में जो कंपनी है सरकारी वह बिजली दे रही है वह सब टैक्स मिलाकर ₹ 60 पैसे पर यूनिट उद्योगों को बिजली दे रही है इस बढ़ोतरी के बाद जबकि यही पर यूनिट बिजली निजी कंपनी से तमाम टैक्स के बाद भी रुप प्रति यूनिट में मिल रहा है तब क्या महंगी बिजली खरीदेंगे और उद्योग क्या निजी कंपनी की ओ नहीं जाएगा और यह निजी कंपनी कौन है स्वाभाविक रूप से गौतम अडानी की कंपनी है जिससे बातचीत चल रही है और उद्योगपतियों ने नाम लेकर कहा कि वे अडानी से बिजली लेने को मजबूर हो जाएंगे यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो तो क्या सरकार ने पिछले दरवाजे से अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए बिजली दर में बढ़ोतरी की है यह सबसे बड़ा सवाल और यह सवाल इसलिए उठ रहा है क् कि लगातार पूरे देश में जिस तरीके से अडानी को फायदा पहुंचाने के लिए मोदी सत्ता लगी रही हिडन बर्ग की रिपोर्ट आने के बाद भी किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई सेबी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे और मित्र प्रेम इस कदर हावी रहा कि संसद तक में हंगामा हुआ और आरोप तो यहां तक लगाया गया कि कई सदस्यों की सदस्यता सिर्फ इसलिए समाप्त कर दी गई क्योंकि अडानी को बचाना था तब ऐसी परिस्थिति में क्या छत्तीसगढ़ की सरकार अब पूरी तरीके से एक्सपोज हो गई है कि अडानी को वह किस हद तक मदद कर रही है सवाल सिर्फ हसदेव की कटाई का नहीं है सवाल राजस्थान को उजाला देकर छत्तीसगढ़ को अंधेरे में करने का भी है सवाल अदानी पावर प्लांट के विस्तार का नहीं है सवाल तो उस जन सुनवाई का है जो फर्जी करार दिया जाता है बाद में किसानों की सहमति के बगैर भूमि उद्योगों को सौंप दी जाती है दादागिरी के साथ उद्योग कब्जा कर लेते हैं कई सारे मामले हैं मोनेट वंदना कई कई लोगों पर इस तरह के आरोप लगते रहे कि उन्होंने जबरिया जमीन कब्जा की है सरकारी जमीन भी और निजी जमीन तब ऐसे में जो तब री रोलिंग मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी का कहना है कि एका एक बिजली की कीमत बढ़ा देने से लागत 300 से 500 रप टन बढ़ गया तो मिनी स्टील प्लांट के महासचिव मनीष धुप का कहना है कि य उद्योगों के लिए गंभीर मसला है और उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार करेगी उद्योग सीधा सरकार से बैल लेना नहीं चाहते इसलिए जब वह प्रेस के सामने बोलती है तो कुछ और बोलती क्योंकि इस दौर में जिसने भी अदानी समूह को फायदा पहुंचाने की सत्ता की कोशिश के खिलाफ आवाज बुलंद की है उसके खिलाफ क्या कुछ नहीं हुआ या किसी से छिपा नहीं इधर चर्चा इस बात की भी है कि निजी बिजली कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए ही यह सारा खेल खेला गया है रचा गया है और निजी कंपनी में अडानी ऐसा है जो यहां बिजली सप्लाई आसानी से करेगा ऐसे में सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि क्या उद्योगपतियों के पास जब अदानी से बिजली खरीदने के अलावा कोई चारा नहीं है तब 3स गढ़ की जो विद्युत कंपनी है जो बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन कर रही है उन बिजली को क्या दूसरे राज्यों में बेचा जाएगा किस तरीके का घोटाला डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल के दौरान सामने आया था जिंदल को लेकर और दूसरे राज्यों को बिजली देने को लेकर किस तरह के घोटाले थे उनकी कोई जांच वांच कभी नहीं हुई केवल आरोप तक सीमित होकर रह गए थे तब ऐसी परिस्थिति में जो स्थिति निर्मित हो रही है वह साफ संकेत दे रही है कि छत्तीसगढ़ में जो डबल इंजन की सरकार है वह अदानी के लिए सब कुछ कर लेना चाहती है !
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