सालों से परेशान नटवरलाल कोर्ट पहुँचा, वजह जान आप भी हैरान हो जाएँगे…
इस देश के लोग या सरकार नटवर लालों से बेहद परेशान है लेकिन आज हम आपको एक ऐसी नटवर लाल की कहानी बताएंगे जो खुद इतना परेशान हुए कि उन्हें हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी दरअसल पिछले कई सालों से यह नटवन लाल बेहद परेशान है यानी परिवार के साथ जब फिल्में देखने बैठता है यह या टीवी देखने बैठता है तो उन्हें किस तरीके से मजाक का सामना करना पड़ता है दोस्तों के बीच खबरों में हर जगह नटवर लाल के टैग लाइन ने इस नटवर लाल को परेशान कर दिया उन्होंने हमसे बातचीत में बताया कि वह किस तरीके से परेशान है पहले उनकी पूरी बात सुन लीजिए आज से लगभग 58 59 साल पहले मेरे माता-पिता ने मेरा नाम नटवर लाल भगवान श्री कृष्ण के नाम नटवर के आधार पर रखा था तब उन्हें क्या पता था कि इसको 420 के साथ जोड़ दिया जाएगा नट लाल का नाम इससे हमारी धार्मिक भावनाएं आर्थिक मानसिक आहत होती है जिस नटवरलाल का नाम सबसे पहले जिस व्यक्ति के लिए जड़ा गया था उसका नाम भी मिथिलेश श्रीवास्तव था नटवरलाल नहीं था उसके बाद से एक परंपरा सी बन गई है 30 40 साल पहले जब लोग अपने बच्चों का नाम नटवरलाल रखा करते थे लेकिन जब से यह फ्रॉड के साथ में जोड़ना शुरू हुआ है तब से लोगों ने अपने बच्चों का नाम नटवरलाल रखना बंद कर दिया क्या लोग मजाक भी उड़ाते हैं इस मामले में आपके साथ स्वाभाविक क्रिया है कोई ऐसी घटना जो आप बता सके कि किस तरीके से आपको अपमानित होना पड़ा या आपको बड़ा पीड़ा पहुंचा ऐसी कोई घटना जब हम मालो बच्चों के साथ में टीवी देख रहे हैं और बैठे हैं परिवार के साथ में और जब य आता है कि नौरा फतेही और एक नटवरलाल के चक्कर में फसी तो एक मन में यह लगता है कि इसमें नटवरलाल का क्या कहा क्या क्या क्या लेना देना इस प्रकरण से सुकेश चंद्रशेखर का नाम सुकेश चंद्रशेखर लिया जाए ना ना कि टला क्या लगता है इस मामले में आपको न्याय मिलेगा माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ से हमने निवेदन किया है कि इस प्रथा को बंद किया जाए और मेरा सभी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया एव सोशल मीडिया वालों से निवेदन है कि नटवर लाल के नाम का दुरुपयोग बंद करें एक मजाक का पात्र तो होही जाता है कहीं ना कहीं क्योंकि चाहे मजाक में ही तो यह प्रथा मतलब कुल मिला करके कहेंगे तो गलत परंपरा ही तो प्रारंभ हो गई ना जैसे आजकल नया बंटी बबली वगैरह भी आ गया है तो यह क्या क्या मतलब है इस परंपरा का य कहां से शुरू हुई किसने शुरू की इसकी त में जाना भी एक मेरे हिसाब से उचित होगा कोई भी 420 प्रकरण अभी भी आप आए दिन देख लीजिए में न्यूज चैनल में सोशल मीडिया पर कोई भी पकड़ता है चिल्ला चिल्ला के बोलते और नटवरलाल इसमें पकड़ा गया एक और नटवरलाल पकड़ा गया बड़े बड़े नटवरलाल शर्मा जाए जबक इसमें मेरे हिसाब से कोई नटवरलाल का कोई रोल या कोई तुक नहीं हैसे तो आप सालों से गुजर रहे हैं तो क्या अब जाकर आप इस बात को हमारे द्वारा यह भी इंतजार किया गया चलो कोई बात नहीं हो गया चलिए कोई बात नहीं इसके बाद बंद हो जाएगा लेकिन ये तो रेगुलर आदत सी बन गई है बिल्कुल परंपरा सी बन गई है या घर परिवार में भी दिक्कत होती है दिक्कत का मतलब य है कि मेरा नाम को जो मेरे मां बाप ने भगवान श्री कृष्ण के नाम पर रखा था उसको फड के नाम से जोड़ना नटवरलाल किसी भी नलाल का नाम को उसम स्वाभाविक पीड़ा का कार्य है मे हिब से तो यह थे रायगढ़ के वासी नटवर लाल अग्रवाल किस किस तरीके से इन् परेशान होना पड़ा है अपमानित होना पड़ा है इसे लेकर अब वे हाई कोर्ट की शरण में जा पहुंचे हैं देखना है कि इस मामले में इस नटवन लाल अग्रवाल को क्या न्याय मिलेगा उ वो तो सीधे-सीधे कहते हैं धार्मिक भावना का तो उपहास उड़ाया ही जा रहा है भगवान के नाम का उपहास आया जा रहा है और इस पर रोक लगनी चाहिए !
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