सर्किट हाउस के पुराने बिल्डिंग की जगह नए का खेल
छत्तीसगढ़ की राजधानी सुंदर हो यह कौन नहीं चाहेगा लेकिन विकास के नाम पर यदि उन बिल्डिंगों को गिरा दिया जाए जो वर्षों पुराने हैं हेरिटेज की श्रेणी में आते हैं जिसकी खूबसूरती को लोग आज भी आंख भर भर कर देखते हैं तब इसे सत्ता का कौन सा विकास कहा जाएगा और अब इस पर हो रहे नए निर्माण का ठेका भी उसी ठेकेदार ने हासिल कर लिया है जिसने इससे पहले नए सर्किट हाउस का निर्माण किया था और सेंट्रिंग गिरने के विवाद में फँसा था क्या है खेल , कौन अधिकारी रिटायर्ड होने के पहले दो पाँच करोड़ कमाना चाहता है यह हम फिर कभी बतायेंगे ।
लेकिन आज सिविल लाइन के उस सर्किट हाउस का है जिसकी बिल्डिंग बेहद पुरानी है कहा जा रहा है अंग्रेजों के जमाने की वह बिल्डिंग है और उस बिल्डिंग को इन दिनों गिराया जा चुका है हैरानी की बात तो यह है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ की सरकार मंत्रियों के बंगले अधिकारियों के बंगले सब कुछ नया रायपुर में शिफ्ट करने जा रही है अधिकारी भी लगातार एक-एक करके शिफ्ट होते जा रहे हैं लेकिन ऐसी परिस्थिति में जो हेरिटेज के रूप में माना जाता है उस बिल्डिंग को जमीन दोज कर देना क्या सरकार के मंसूबों पर सवाल नहीं उठाता है कहा तो यहां तक जा रहा है कि उस बिल्डिंग को गिराकर वहां पार्किंग बनाई जाएगी क्योंकि जो सर्किट हाउस की वर्तमान पार्किंग है कॉफी हाउस वहां है इस वजह से पार्किंग हच पच रहती है भीड़ बढ़ जाती है तब ऐसी परिस्थिति में क्या उस बिल्डिंग को गिराकर कोई नया खेल खेला जा रहा है किस तरीके से वहां कीमती फर्नीचर लग और इस सर्किट हाउस में लोग ठहर भी रहे थे यानी सब कुछ बहुत बढ़िया था ऐसा भी नहीं कि बिल्डिंग जड़ जड़ थी इसलिए गिरा दिया गया मजबूत बिल्डिंग थी पुराने जमाने की बनी यह बिल्डिंग डेढ़ फीट दीवार वाली बिल्डिंग थी मजबूती से खड़ी थी और हाल में ही इस पर लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके इसे सजाया भी गया था टाइ लगाई गई थी बिस्तर बदले गए थे दरवाजे भी नए स्टाइल में लगाए गए थे एसी सहित किचन सब कुछ नया बनाया गया था यानी करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद अब सरकार को लगने लगा है कि यह बिल्डिंग अब कोई काम की नहीं है क्योंकि सर्किट हाउस में पर्याप्त जगह है इसलिए इस बिल्डिंग को गिराया जाना चाहिए और वह गिरा रही है इस मामले में हमारी एक्टिविस्ट राकेश च से बात हुई है उनका क्या कहना है सुन लीजिए पुराना सर्किट हाउस सिविल लाइन को जो तोड़े जाने की अचानक निर्णय लिया गया वह निर्णय विधि विरुद्ध है और मुझे तो यह लग रहा है कि इसके तोड़े जाने के पीछे कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार का एक अमला काम करने के लिए एक सोची समझी साजिश के तहत कार्य प्रारंभ कर रही है जो नहीं होना चाहिए हमारे धरहर को बचाने के लिए हम लगातार संघर्ष करते रहते हैं ऐसे में ये बहुत ही प्राचीन और पुरानी धरोहर थी जिसको बचाया जाना चाहिए था और इसको रोकने के लिए सरकार को खुद आगे आना चाहिए था जो सरकार आगे आती दिखती नहीं क्योंकि इस वक्त नया रायपुर क्षेत्र में मुख्यमंत्री मंत्रियों के निवास बन चुके हैं ऐसे में इसे पार्किंग या अन्य किसी रूप में डेवलप करना फंड की बर्बादी है हमारे टैक्स के पेयर लोगों की पैसों की बर्बादी है इसे रोका जाना चाहिए अगर इसे रोका नहीं गया तो आने वाले समय में जिस विभाग का यह जुम्मा है उस विभाग के खिलाफ मामला न्यायालय में ले जाएंगे या संबंधित फोरम में जरूर शिकायत करेंगे क्योंकि मुझे तो लग रहा है कि यह नियम विरु कार्य को संचालन किया जा रहा है यानी सोचिए कि किस तरीके का खेल सरकार कर रही है किस तरीके से टैक्स पेरो की पैसे की बर्बादी की जा रही है और पहले ही नींद में सो चुके इस शहर को इन सब बातों से कोई मतलब नहीं है !
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