रविवार, 19 अप्रैल 2026

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

 

साय सरकार रिज़र्व फ़ारेस्ट भी नहीं बचा पा रही, भू-माफियाओं का सौ एकड़ पर नज़र…

अदानी के लिए हसदेव को दांव पर लगाने को लेकर बुरी तरीके से घिरी विष्णुदेव साय सरकार अब अंबिकापुर में भू माफियाओं के द्वारा 100 एकड़ जंगल काटे जाने को लेकर निशाने पर है कहा जा रहा है कि अंबिकापुर से सटे गांव बुधिया चुआ गांव का यही नाम है वहां भू माफिया लगातार जंगल काट रहे हैं और 100 एकड़ जंगल काट चुके हैं इसे लेकर पिछले दिनों जब लोगों ने छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ नेता टीएस बाबा के पास पहुंचे तो बाबा आग बबूला हो गए उन्होंने का दौरा भी किया और पत्रकारों से बताया से कहा कि लंबे अरसे से शासन से लगातार शिकायत की जा रही है कलेक्टर कर क्या रहे हैं आखिर इस पूरे घटनाक्रम में क्या शासन का संरक्षण है क्योंकि लगातार इस मामले को लेकर वहां गांव वाले आवाज उठाते रहे हैं शिकायत करते रहे लिखित में और इसकी वजह से पर्यावरण को नुकसान तो हो रहा है इस करोड़ों रुपए की जमीन का भी बंदर बांट हो रहा है टी एस बाबा ने विस्तार से यह सब बात कहते हुए धमकी भी दी कि ऐसी स्थिति  क्यों लाई जा रही है कि उन्हें भूख हड़ताल पर बैठना पड़े पहले बाबा ने क्या कुछ कहा वह सुन ली वो वहां तक ऐसे फैल के वो नीचे तक और लगभग गुमला नेशनल हाईवे तक जहां सिसोदिया जी का पेट्रोल पंप लोग बता रहे हैं उसके 500 मीटर तक का पूरा क्षेत्र एक के बाद एक काटा जा रहा है और आप स्वयं देख सकते हैं कि मेड़ के आकार भी दिख रहे हैं यहां कुछ नहीं है जोध कोट भी ऐसा नहीं दिख रहा है और मेड़ बना के लोगों ने क्षेत्र को आपस में बांट लिया है यह रिजर्व फॉरेस्ट है जो कलेक्टर ने 20161 में अन्य अधिकारियों के साथ सेटल भी किया उसके आदेश भी है और बावजूद उसके यह स्थिति बनी मैं बाहर था दिल्ली में था तो गांव से खबर आई कि बाबा यहां दिक्कत हो रही है कुछ वन अधिकार पत्र है वह हमको अभी तक नहीं मिले हैं आजादी के पहले से जो लोग काबिज हैं उनके वन अधिकार पत्र नहीं मिले हैं नए लोगों को कुछ वन अधिकार पत्र मिले हैं कुछ वह भी प्रक्रिया अधूरी है और कुछ लोग हैं जो खरीद बिक्री भी कर रहे हैं यह सारी बातें सामने कि जो वनाधिकार पत्र मिले हैं उनकी खरीद बिक्री उनके कब समझाए भी कि एक देखिए वनाधिकार पट्टा नहीं है यह वनाधिकार पत्र है पट्टा आपको अधिकार देता है खरीद बिक्री का भी वनाधिकार पत्र में बेचने के अधिकार नहीं है और यदि आप बेचते हैं तो यह जमीन वापस शासन को चली जाएगी तो प्रजातंत्र के इस चौथे स्तंभ के माध्यम से हम लोग चाहेंगे कि लोगों के सामने सच्चाई कम से कम पहु कदम अगला कदम इसको रोकने का होगा यह नौबत तो नहीं आनी चाहिए कि यहां के मैं भूख हड़ताल में बैठू यह तो अति हो जाएगी बैठूंगा यह तो अति हो जाएगी तो या हल्का पन है क्या हमारी व्यवस्था ऐसी है कि यह सब करना पड़ेगा तब एक जानकारी आए और अगर वह बात सही है पक्ष विपक्ष इसमें कुछ नहीं है नियम और कानून है नियम और कानून के विपरीत हो रहा है तो आप कारवाही करिए आखिरी में प्रजातंत्र में क्या होता है जनमत का संग्रह है तो वो तो बहुत ही हल्का पन हो जाएगा कि अगर यही नहीं गांव के जो उपसरपंच है उन्होंने भी पूरी बात विस्तार से मीडिया को बताया बड़ा-बड़ा पेड़ था सब कटाई हो गया और निरंतर गांव वाले से शिकायत करते रहे कलेक्टर को भी फॉरेस्ट को भी लेकिन इसमें कभी कब्जा नहीं रोका गया किसी प्रकार का गांव में आक्रोशित है कि हम लोग का नि स्तारी है और जंगल से निस्तार है और जंगल रहने पर हम लोग का आगे भविष्य में हर प्रकार का ऑक्सीजन मिलेगा और हम लोग का सुख सुविधा मिलेगा कहके सब सब लोग को आक्रोशित हो रहा है कि वह नष्ट हो रहा है तो यह तो बड़ी मतलब थोड़ा सा गौर करने की बात है और प्रशासन इस पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है लोग का कहना है जब इसको बराबर किया जा रहा था उस समय आप लोगों ने कोई उचित कम नहीं उस समय हम लोग जब से शुरुआत हुआ है तब से हम लोग इसका विरोध करते आ रहे हैं पूरे गांव के लोग विरोध करते आ रहे हैं मगर नियंत यानी आप सोचिए कि किस तरीके से शासन प्रशासन के पर जंगल की जमीन तक को लूटा जा रहा है और शिकायत के बाद भी यदि सत्ता खामोश है तो क्या इसका मतलब यह है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार भू माफियाओं से मिली हुई है और वह जानबूझकर कारवाही को टाल रही है जबकि वह अच्छी तरीके से जानती है कि इस 100 एकड़ जमीन में जो जंगल है गांव की निस्तार उस पर निर्भर है तब ऐसी परिस्थिति में देखना है कि शासन कुछ कारवाही करती है या फिर टीएस बाबा को भूख हड़ताल में बैठना पड़ेगा!


Vidio देखें 


https://youtu.be/3SlxCVTSQFg?si=Z9Quonkt0b75NYW-