बुधवार, 22 अप्रैल 2026

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली

मोदी के रेप का मुद्दा उठाते ही खुल गई कुंडली 


देश के प्रधानमंत्री से लेकर तमाम बीजेपी नेता बंगाल चुनाव में बलात्कार का मुद्दा उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ़ बलात्कारियों को सत्ता के संरक्षण का मामला भी गरमाने लगा है एक रिपोर्ट-

कोलकाता में जूनियर डॉक्टर के साथ हुए  रेप कांड ने एक बार फिर समूचे देश को झकझोर के रख दिया था  इसलिए देश भर के तमाम डॉक्टर सड़कों पर उतर आए थे, न्याय के लिए याद कीजिए आप 12 साल पहले जब निर्भया कांड हुआ था तब इसी तरीके से समूचा देश सड़कों पर था और उसके बाद सरकार ने कानून भी बनाए थे और लगने लगा था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह नहीं देख पाए कि सत्ता किस तरीके से बलात्कारियों का संरक्षक बनी बैठी है यदि एनसीआरबी के आंकड़े को देखें तो आप चौक जाएंगे कि हर रोज इस देश में 87 महिलाओं की युवतियों की बलात्कार होती है हर रोज इतनी बड़ी तादाद में यदि यौन उत्पीड़न से महिलाएं पीड़ित हैं तब यह हंगामा कलकाता रेप केस के बाद क्यों और उसके बाद भी क्या यह अपराध थम गया है याद कीजिए आप उत्तराखंड में किस तरीके से युवती के साथ बस चालकों ने बलात्कार किया और बिहार से खबर आई कि एक दलित छात्रा के साथ किस तरीके से विभ तरीके से बलात्कार किया नाबालिक छात्रा से यानी ना तो बलात्कार का सिलसिला रुक पा रहा है और रोज हो रहे बलात्कार के आंकड़े ही कम हो रहे हैं कि और ना ही राजनीतिक दलों का खेल सवाल यह नहीं है कि कलकाता कांड को लेकर डॉक्टर आज सड़कों पर है उनके साथ तमाम लोग जुड़े हुए हैं क्योंकि महिला उत्पीड़न का मामला है तब सवाल यह है कि क्या इस अपराध को रोका जाना चाहिए और को रोकने के लिए अब नए सीरे से इस देश को आंदोलन के लिए खड़ा होना चाहिए यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि लोगों ने आश्चर्यजनक ढंग से निर्भया के बाद चुप्पी ड़ ली थी गुस्सा बेहद है इस मामले को लेकर लेकिन किस पर करें गुस्सा उस सरकार पर जो खुलेआम बृजभूषण सरण सि जैसे लोगों को संरक्षण देती है या उस सरकार पर जो हर चुनाव के पहले राम रहीम जैसे बलात्कारियों को पैरोल पर छोड़ देती है एक दो बार नहीं दर्जन बार से अधिक राम रहीम को पैरोल पर छोड़ा जा चुका है या उस सरकार पर जो बिलकिस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर स्वागत समारोह में तालियां पीटती नजर आती है या तालियां पीटने वालों के साथ खड़ी होती क्या विनेश फोगाट साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जब सड़क पर उतरकर आंदोलन कर रहे थे उस छिछोरे बृजभूषण शरण सिंह को लेकर तब उन्हें छिनाल कह दिया गया था और यह लोग तमाम जो आज नारा लगाते घूम रहे हैं उठो द्रोपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएंगे पिछले एक हफ्ते से यह टैग लाइन चल रहा है सब तरफ उन लोगों ने खामोशी क्यों ड़ ली थी जब बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ वे महिला पहलवान रोती कलपी सड़कों पर घसीट जा रही थी या फिर वे लोग कहां चले जाते हैं जब राम रहीम जैसे बलात्कारियों को दर्जन भर बाद पैरोल में छोड़ा जाता क्या उनके खिलाफ सड़क पर नहीं उतरना चाहिए कि आखिर ऐसे बलात्कारी जिसकी सजा की पुष्टि हो चुकी है उन्हें कैसे पेरोल पर छोड़ सकती है कोई सरकार और एक दो बार नहीं दर्जन भर से अधिक और लोगों की खामोशी क्या सिर्फ राजनीतिक नफा नुकसान के साथ जुड़ गई है यह सवाल तो ब कि बानों के बलात्कारियों की रिहाई को लेकर भी उठनी चाहिए थी और सड़क पर लोगों को उतर जाना चाहिए था लेकिन अपनी बारी का इंतजार करते लोग यह भूल जाते हैं कि यदि कल किसी के साथ इस तरह की घटना हुई है तो अगली बारी उनकी अपनी है तब सवाल यह है कि क्या सिर्फ कलकाता रेप केस में हंगामा खड़ा कर देने से बलात्कार के मामले रुक जाएंगे क्योंकि हर रोज इस देश में 87 बलात्कार हो रहे हैं और इस घटना के बाद भी लगातार बलात्कार की घटनाएं सुनाई दे रही है वह भी विभ बलात्कार की घटनाएं उत्तराखंड की घटनाएं कम विभ नहीं है क्या कोलकात्ता कांड के साय तरे उसे छुपा लिया जाएगा या कल बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में हुई नाबालिक छात्रा के साथ की घटना को क्या कलकाता कांड के साथ छुपा लिया जाएगा ऐसे कई सवाल है आप खुद सोचिए कि आप किस तरीके से राजनीतिक फायदे नफा नुकसान को लेकर आंदोलन कर रहे हैं क्यों नहीं उठना चाहिए राम रहीम को पैरोल पे छोड़ने के खिलाफ सड़क की आवाज लोगों की आवाज क्यों नहीं उठनी चाहिए क्या राजनीति ने भी बलात्कार जैसे विवस मामले को बांट दिया है और लोग नफा नुकसान देखकर आंदोलन करते हैं ऐसे कई सवाल है लेकिन एक बड़ा सवाल है कि यदि जब तक राम रहीम या बृजभूषण शरण सिंह या बिल्किस बानों के बलात्कारियों की रिहाई पर या उन्हें बचा की कोशिश पर यह देश चुप्पी ड़ के बैठे रहेगा तब तक इस तरह की घटनाएं होते रहेगी और इन सब बातों के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले की प्राचीर से बलात्कार को लेकर भाषण बाजी करना अब समय की मांग है जिनको सजा होती है उसकी व्यापक चर्चा हो ताकि ऐसा पाप करने वालो र पैदा हो पाप करने की होती है फं पर ल पता है क्या आम लोगों का मुह चिढ़ाना नहीं है !

Vidio देखें 


https://youtu.be/HnBPdIp0Wys?si=5xFmgfsHNStQbMEw