रविवार, 17 मई 2026

लोहारीडीह का खौफनाक सच, अब भी दहशत…

 लोहारीडीह का खौफनाक सच, अब भी दहशत…




छत्तीसगढ़ का लोहारी डीह कांड भला कौन भूल सकता है, भाजपा नेता की गुंडागर्दी से निजात पाने जब गांववालों का कानून से भरोसा उठ गया तो गांववालों ने ख़ुद ही इस दहशत से मुक्ति के लिए बीजेपी नेता को घर में बंद कर आग लगाकर मार डाला और इसके बाद सत्ता में बैठी बीजेपी सरकार की पुलिस का नंगा नाच ने मानवता को शर्मसार तो किया ही पूरे गांव को दहशत में भर दिया क्या गांववाले इस दहशत से उबर पाए, क्या उन्हें न्याय मिला, ऐसे कई सवालों के बीच यह रिपोर्ट जो बताती है तब क्या क्या हुआ 

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा के गृह क्षेत्र कवर्धा के रेंगाखार अंतर्गत आने वाले लोहारीडीह गांव का एक ऐसा भयावह सच सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस कस्टडी में प्रशांत साहू की मौत के बाद अब जो खुलासे हो रहे हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। राज्य महिला आयोग की टीम द्वारा जेल में बंद महिला बंदियों से मुलाकात के बाद यह साफ हो गया है कि कानून व्यवस्था को कायम करने के नाम पर पुलिस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दी थीं।

आधी रात का तांडव: खींचकर निकाला और पीटा

जेल का दौरा कर लौटीं राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष किरणमयी नायक ने बंद कमरे में महिला डॉक्टरों और तहसीलदार की मौजूदगी में महिला बंदियों के बयान दर्ज किए और उनकी चोटों की जांच की। उन्होंने बताया, "गांव में पुलिसिया बर्बरता चरम पर थी। 16 सितंबर की रात करीब 12 बजे पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों के घरों के दरवाजे तोड़ दिए। महिलाओं को घसीटते हुए बाहर निकाला गया और रेंगाखार थाने ले जाकर उन्हें डंडे, बेल्ट और पट्टों से बेरहमी से पीटा गया। छह दिन बीत जाने के बाद भी उनके शरीरों पर चोट और सूजन के गहरे निशान मौजूद हैं।" आयोग ने जेल डॉक्टरों को घुटनों और अन्य अंगों की सूजन की पुष्टि के लिए तत्काल एक्स-रे कराने के निर्देश दिए हैं।

रिश्तों की दुहाई भी न आई काम, पूरे-पूरे परिवार बंद

घटना के बाद पुलिस ने गांव से ताबड़तोड़ 69 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने बिना सोचे-समझे पूरे-पूरे परिवारों को जेल भेज दिया है। जेल में बंदियों की स्थिति बताते हुए महिला आयोग ने दर्ज किया कि कहीं सास-बहू एक साथ सलाखों के पीछे हैं, तो कहीं देवरानी-जेठानी को बंद कर दिया गया है। सबसे ज्यादा असंवेदनशीलता इस बात पर दिखी कि पुलिस कस्टडी में अपनी जान गंवाने वाले मृतक प्रशांत साहू की पीड़ित मां को भी पुलिस ने आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया है।

[विशेष बॉक्स 1] गांव में पसरा सन्नाटा, घरों में लटके ताले

पुलिसिया खौफ का आलम यह है कि आज लोहारीडीह गांव पूरी तरह से वीरान हो चुका है। कई घरों पर ताले लटके हुए हैं और ग्रामीण पुलिस के डर से अपने घर-बार, मवेशी छोड़कर जंगलों या सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग गए हैं। इस आधुनिक युग में भी किसी गांव का पुलिस के डर से खाली हो जाना शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है।

[विशेष बॉक्स 2] मजिस्टेरियल जांच पर भूपेश बघेल ने उठाए सवाल

इस पूरे घटनाक्रम पर सूबे की सियासत भी उबल पड़ी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार द्वारा गठित मजिस्टेरियल जांच समिति को 'लीपापोती' की कोशिश करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक छोटा प्रशासनिक अधिकारी (SDM) भला जिले के कलेक्टर और एसपी (SP) के खिलाफ कैसे निष्पक्ष जांच कर सकता है? इधर, साहू समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने ज्ञापन सौंपकर तत्कालीन एसपी अभिषेक पल्लव को तुरंत निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। विपक्षी दल अब सीधे गृह मंत्री विजय शर्मा के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए हैं।

राज्यपाल और चीफ जस्टिस को सौंपी जाएगी गोपनीय रिपोर्ट

महिला आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि चूंकि यह मामला बेहद संवेदनशील और कानूनी पेचीदगियों से जुड़ा है, इसलिए इसकी पूरी विस्तृत और तकनीकी रिपोर्ट राज्य के राज्यपाल और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को सौंपी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सभी पीड़ित महिलाओं की चोटों की फोटोग्राफी कराई जानी चाहिए ताकि पुलिसिया बर्बरता के पुख्ता सबूत कानूनी रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकें।


छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट भड़का: "राज्य में जंगलराज नहीं चलने देंगे!"



छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से एक बहुत बड़ी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। राज्य में त्योहारों की आड़ में होने वाले हुड़दंग, बेलगाम डीजे और ध्वनि प्रदूषण को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य में 'जंगलराज' नहीं चलने दिया जाएगा।"

[मुख्य मुद्दा: आत्महत्या का मामला]

"दरअसल, हाई कोर्ट में ध्वनि प्रदूषण को लेकर चल रही जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, हाल ही में हुई एक दुखद घटना का जिक्र आया। कोर्ट ने एक व्यक्ति द्वारा की गई आत्महत्या के मामले का संज्ञान लेते हुए इसे बेहद चिंताजनक (Alarming) और दर्दनाक बताया। 

[हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणियां और जजों के बयान]

कानून व्यवस्था पर सवाल: कोर्ट ने कहा, "अगर राज्य की कानून-व्यवस्था ऐसी हो जाएगी, तो आम नागरिक कैसे जिंदा रहेगा? एक आम आदमी का गरिमा के साथ जीना और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखना सबसे जरूरी है।" 

त्योहारों की आड़ में असामाजिक तत्व: कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि "त्योहारों की आड़ में लोग हर तरह की असामाजिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। लोग शराब और नशीली दवाओं के प्रभाव में हुड़दंग कर रहे हैं। कोर्ट ने किसी भी त्योहार को मनाने से नहीं रोका है, लेकिन त्योहार की आड़ में किसी की जान लेना या असामाजिक कृत्य करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" 

प्रशासन की लाचारी पर फटकार: जब महाधिवक्ता (Advocate General) ने कहा कि प्रशासन स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, तो कोर्ट ने कहा, "महाधिवक्ता जी, राज्य के मुखिया होने के नाते कानून-व्यवस्था बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है। आप इन तत्वों के सामने खुद को लाचार नहीं पा सकते। अगर राज्य सरकार कानून-व्यवस्था को नियंत्रित नहीं कर सकती, तो सरकार को सोचना होगा।" 

'जंगलराज' की चेतावनी: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन हर हाल में होना चाहिए। कुछ लोग प्रशासन को धमकी दे रहे हैं कि नियम कड़े हैं तो इन्हें वापस लो। कोर्ट ने कहा, "यह कोई 'जंगलराज' नहीं है। हम किसी की धमकी से प्रभावित होने वाले नहीं हैं। कानून का राज (Rule of Law) सर्वोच्च है।" 

[अदालत का अंतिम निर्देश]

"हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कोर्ट ने कभी भी लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन इसकी एक तय और वैध सीमा (Permissible Limit) होनी चाहिए, ताकि बीमार बुजुर्गों और पढ़ाई करने वाले छात्रों को परेशानी न हो। 

अदालत ने पुलिस अधीक्षक (SP) के हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में ध्वनि प्रदूषण की लगातार निगरानी (Monitoring) करने के निर्देश दिए हैं