शनिवार, 28 फ़रवरी 2026

अब बच्चों को पढ़ाना भी बोझ लगने लगा सरकार को

अब बच्चों को पढ़ाना भी बोझ लगने लगा सरकार को 


 जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है उस ने क्या किया महंगाई बढ़ाकर मध्यम वर्ग और गरीबों की खुशिया छीन ली तो बेरोजगारी ने युवाओं की चैन उड़ा दी।चुनावी बांड के जरिए जिस तरीके से पैसे कमाए और पूरे देश में अपने 300 कार्यालयों को महल जैसे भव्य या थ्री स्टार फाइव स्टार जैसी सुविधाजनक बनाया इस दौर में दवा कंपनियां जिनकी दवाएं घटिया थी उनसे भी जांच रोकने के नाम पर पैसे वसूले गए तो सीबीआई ईडी भेजकरवसूली का आरोप भी मोदी सरकार पर है रुपए के मुकाबले डॉलर लगातार गिर रहा है और विदेशी कर्ज का यह आलम है कि 70 साल में विभिन्न सरकारों ने केवल 55 लाख करोड़ रुपए कर्जे लिए थे तो मोदी सरकार अकेले अपने 10 साल में 155 लाख करोड़ रुपए कर्जा ले लिया यानी विदेशी कर्ज 205 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया और अब मोदी सरकार की नई करतूत सामने आई जिसके तहत वंदे भारत चलाने के नाम पर आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया के तर्ज पर एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने में 19 लाख रुपए खर्च भी किए जाते रहे लेकिन हम इस विस्तार से आपको पूरी जानकारी देंगे 

लेकिन दूसरी तरफ अब मोदी सरकार क्या बच्चों की खुशिया भी छीन लेगी यानी लोगों की तकलीफ और बढ़ाने वाली है आने वाले दिनों के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं या संभावनाएं बताई जा रही है या आशंका व्यक्त की जा रही है उसके तहत तो आने वाले दिनों में ना केवल महंगाई बढ़ेगी बेरोजगारी बढ़ेगी बल्कि लोगों का जीवन बेहद ही मुश्किल होने वाला है ऐसी परिस्थिति में शिक्षा में जो वसूली हो रही है वह भी कम चौकाने वाला नहीं है एक आम आदमी अपने बच्चों को किस तरीके से पढ़ाए क्या सरकारी स्कूल भी अब लोगों के लिए आसरा नहीं रह गया 

यह सवाल हम इसलिए उठा रहे हैं क्योंकि मोदी सत्ता ने यह फैसला लिया है कि अब केंद्रीय विद्यालयों में भी सीटें घटा दी जाएंगी और वजह बताई जा रही है कि एक क्लास में 40 बच्चों को नहीं संभाला जा सकता उनकी पढ़ाई के स्तर को नहीं सुधारा जा सकता इसलिए हर क्लास में आठ बच्चे कम भर्ती किए जाएंगे यानी अब तक केंद्रीय विद्यालय में एक क्लास में 40 बच्चे होते थे अब 32 बच्चों का ही एडमिशन लिया जाएगा देश भर में694 केंद्रीय विद्यालय हैं सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 122केंद्रीय विद्यालय है तो उसके बाद दूसरे नंबर पर मध्य प्रदेश में 112 केंद्रीय विद्यालय उसके बाद राजस्थान का नंबर आता है जहां 770 केंद्रीय विद्यालय है तो महाराष्ट्र में 59 केंद्रीय विद्यालय बिहार 49 गुजरात और दिल्ली में 46 उत्तराखंड में 45 झारखंड में 41 हिमाचल प्रदेश में सबसे कम 25 और छत्तीसगढ़ और हरियाणा में 36 36 केंद्रीय विद्यालय यानी 694 केंद्रीय विद्यालयों में एक ही झटके में हजारों बच्चों की एडमिशन खत्म कर दी गई और ना केवल एडमिशन खत्म की गई बल्कि फीस बढ़ाने की भी चर्चा है केंद्रीय विद्यालय में सीबीएससी के माध्यम से पढ़ाई होती है और यहां पढ़ाना लोगों को सुविधाजनक है और सस्ता पड़ता है सरकारी स्कूल है लेकिन अब वहां सीट कम कर दी गई 40 की ज प्रत्येक क्लास में 32 सीटें ही भरी जाएंगी 15 अप्रैल तक एडमिशन होना है उसके बाद सूची निकलेगीज्यादातर केंद्रीय विद्यालयों में केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों के सुविधा के लिए इसे खोली गई थी लेकिन राज्य सरकार के भी बच्चे जो रिक्त सीट रह जाती थी उसमें राज्य सरकार के बच्चे और प्राइवेट नौकरी करने वालों के भी बच्चे ग्रामीण अंचल के किसान मजदूर किसी भीतरीके से सांसद से लिखवा करर एडमिशन करवा लेते थे वह परिपाटी भी बंद कर दी गई यानी आम आदमी के बच्चे यहां पढ़ ही ना पाए सांसद किसी के लिए सिफारिश कर ही नासके और अब 40 की जगह 32 सीटें कर दी गई और जोप्राइवेट नौकरी करने वालों को सुविधा थी कि यदि उनका ट्रांसफर हो जाता है तबादला हो जाता है तो वह सुविधा थी कि वह अपने बच्चों को इस केंद्रीय विद्यालय से निकालकर दूसरे केंद्रीय विद्यालय में भर्ती कर दे वह सुविधा भी समाप्त कर दी गई यानी आप सोचिए कि किस कदर इस दौर में जब महंगाई चरण पर है बेरोजगारी आसमान छूने लगा है लोगों के सामने जीवन जीने का संकट खड़ा है उस परिस्थिति में अब केंद्रीय विद्यालयों में ना केवल सीट कम कर दी गई बल्कि सुविधाएं भी घटा दी गई और फीस बढ़ाने की भी चर्चा है ऐसी परिस्थिति में क्या लोगों की खुशियां छीन लेना चाहती है मोदी सरकार क्या अब बच्चों की खुशियां भी बर्दाश्त नहीं हो रही है कितने ही सवाल उठे हैं उनके निजी जीवन को लेकर तो क्या सचमुच इस तरह का खेल एक परिवार वालों के साथ खेला जा सकता है यह सबसे बड़ा सवाल है और उनके समर्थकों को यह बात बुरी भी लग सकती है कि किस तरीके से किसी को अपमानितकिया जा रहा है लेकिन हकीकत तो यही है कि नकली दवा जहर जैसी दवा बनाने वाली कंपनियां पकड़ती है और उनकी जांच रोक देने की एवज में पैसे वसूले जाते हैं कोरोनिल का मामला क्या कुछ सुप्रीम कोर्ट में नहीं चला और किस तरीके से बाबा रामदेव सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करते रहे और अब सुप्रीम कोर्ट उनके खिलाफअवमानना का केस तक दर्ज करने को तैयार बैठा है तो दूसरी तरफ सत्ता हासिल करने के लिए झूठ की फेहरिस्त है विरोधियों को कुचलने के लिए क्या कुछ खेल नहीं खेला गया किस तरीके से तमाम भ्रष्टाचारियों को अपनी पार्टी में ले लिया गया जो सत्ता के अनुकूल थे और जो सत्ता के अनुकूल नहीं थे उन्हें जेल की सलाखों में भेज दिया गया यापरेशान किया जाने लगा सब कुछ इस देश ने देखा है लेकिन अब बच्चों को लेकर इस तरह के फैसले एक तरफ केंद्रीय विद्यालय में वैसे भी सीटें बढ़ाने की मांग हो रही थी आम आदमी के बच्चे यहां पढ़ सके इसके लिए मांगे उठाई जा रही थी और दूसरी तरफ सीट कम कर जा कर दी जा रही है यानी आप सोचिए कि 694 स्कूलों में यदि 40 की जगह 32 बच्चे ही लिए जा रहे हैं तो कितने बच्चों का भविष्य एक ही झटके में खराब कर दिया गया तो नहीं कहेंगे लेकिन उन बच्चों के पिता पर किस तरीके से बोझ डाल दिया गया है लेकिन शायद धर्म की पट्टी बांधे लोगों को यह शर्मनाक घटना भी दिखाई नहीं देती ना तो मौत बेचने वालों से पैसा खाना दिखाई देता है और ना ही बलात्कारी व्यभिचारी दुराचारी भ्रष्टाचारियों को पार्टी में लेने का खेल भी दिखा नहीं देता यानी आप सोचिए कि सत्ता हासिल करने के लिए और धन कमाने के लिए किस तरीके का खेल इस दौर में हुआ है और अब जब केंद्रीय विद्यालयों में सीट कम कर दी गई है कहीं चू चपड़ नहीं हो रहा है कोई आवाज उठाने को तैयार नहीं है कि आखिर मोदी सत्ता यह क्या कर रही है


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