ED की कार्रवाई पर सवाल: आईएएस अंदर, आईपीएस पर सिर्फ पूछताछ
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला परिवहन लेवी वसूली मामले में करीब दो साल से जेल में बंद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपसचिव (डिप्टी सेक्रेटरी) सौम्या चौरसिया को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है। सौम्या चौरसिया की इस जमानत के बाद छत्तीसगढ़ के सियासी गलियारों, खासकर कांग्रेस के भीतर हलचल तेज हो गई है। हालांकि, इस राहत के बाद भी एक बड़ा सवाल यह खड़ा है कि वे जेल से बाहर कब आ पाएंगी?
आय से अधिक संपत्ति का मामला बना बड़ी बाधा
कानूनी जानकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कोयला लेवी मामले में जमानत मिलने के बावजूद सौम्या चौरसिया की रिहाई तुरंत संभव नहीं दिख रही है। उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) का मामला भी चल रहा है, जिसके तहत उनकी गिरफ्तारी की गई थी। अब उन्हें इस दूसरे मामले में भी जमानत लेनी होगी, जिसमें लंबा वक्त लग सकता है।
राहत या टेंशन? कांग्रेस के भीतर चर्चाओं का बाजार गर्म
सौम्या चौरसिया को छत्तीसगढ़ की राजनीति को प्रभावित करने वाले सबसे शक्तिशाली चेहरों में से एक माना जाता रहा है। उनकी जमानत के बाद कांग्रेस का एक धड़ा, विशेषकर 'भूपेश बघेल खेमा' इसे बड़ी राहत के रूप में देख रहा है। कांग्रेस शुरू से ही इस पूरी कार्रवाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनकी सरकार को बदनाम करने की साजिश बताती रही है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी गंभीर चर्चा है कि जेल से बाहर आने के बाद सौम्या चौरसिया किसका टेंशन बढ़ाएंगी और किसके लिए सुकून की बात होंगी।
ईडी की कार्यप्रणाली और भेदभाव पर फिर उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भूमिका और उसकी जांच के तरीके पर सवाल खड़े होने लगे हैं। चर्चा यह भी है कि ईडी ने कार्रवाई के दौरान दोहरा मापदंड अपनाया। जहां रानू साहू और सौम्या चौरसिया जैसी आईएएस/राज्य सेवा की महिला अधिकारियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया, वहीं इस पूरे खेल में संदिग्ध भूमिका वाले आईपीएस अधिकारियों (पुलिस कप्तानों) से सिर्फ पूछताछ करके छोड़ दिया गया। यदि ईडी पूरी निष्पक्षता से जांच करती, तो कई बड़े पुलिस अफसरों पर भी गाज गिर सकती थी। इसके अलावा, लेवी वसूली और शराब घोटाले से जुड़े बड़े-बड़े उद्योगपतियों और रसूखदारों को भी हाथ नहीं लगाया गया, जो ईडी की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
फिलहाल, सौम्या चौरसिया की इस जमानत ने राज्य में घोटालों (कोयला, शराब, महादेव ऐप और पीएससी घोटाला) के दौर की यादें ताजा कर दी हैं और आने वाले दिनों में इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
Vidio देखें
https://youtu.be/ofDhi12e3RI?si=srjnelmFSxq4KZen

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें