शनिवार, 30 मई 2026

राजस्व विभाग का 'जादू'

राजस्व विभाग का 'जादू'


छत्तीसगढ़ के राजस्व विभाग में इन दिनों 'सुशासन' का ऐसा अनूठा राग अलापा जा रहा है, जिसे सुनकर खुद यमराज भी अपने बही-खाते छुपा लें। हमारे 'पीए से प्रमोट होकर सीधे मंत्री' बने टंकराम वर्मा जी के विभाग में ऐसा 'तबादला एक्सप्रेस' दौड़ाया कि पटवारियों और तहसीलदारों को अपने घर का पता याद रखने के लिए गूगल मैप का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन अफसोस! इस एक्सप्रेस पर हाई कोर्ट ने ऐसा चेन-पुलिंग किया है कि पूरी ट्रेन स्टेशन आने से पहले ही डिरेल हो गई

**बंगले की परिक्रमा और 'मनचाही' प्रसादी**

विभाग में सुशासन का नया क्राइटेरिया (नियम) सामने आया है। नियम बड़ा सरल है—"जो मंत्री बंगले के सामने जितना लंबा साष्टांग दंडवत करेगा, उसे रायपुर-दुर्ग की मलाई उतनी ही जल्दी मिलेगी।" जिन्होंने शीश नवाया, वे रायपुर आ गए और जिन्होंने नियम-कायदे की बात की, उन्हें सीधे सुकमा और बलरामपुर के घने जंगलों में 'प्रकृति दर्शन' के लिए भेज दिया गया।

तहसीलदार संघ के अध्यक्ष नीलमणि दुबे ने जब इस 'ट्रांसफर-उद्योग' के ढोल को जोर से बजाया, तो सरकार ने सुशासन की लाज रखते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया। दुबे जी का कसूर सिर्फ इतना था कि उन्होंने पूछ लिया—"साहब, 2 साल में मेरा छठा ट्रांसफर है, क्या सरकार मुझे तहसीलदार मानती है या कोई टूरिस्ट?"

#### **हाई कोर्ट का 'स्टे' और सरकार का 'सन्नाटा'**

जब मंत्री जी के दरबार से न्याय नहीं मिला, तो 18 पीड़ित तहसीलदार 'तबादला चालीसा' पढ़ते हुए हाई कोर्ट पहुंच गए। कोर्ट ने जब ट्रांसफर की लिस्ट देखी, तो शायद वो भी मुस्कुरा दिए होंगे। जिन अधिकारियों का प्रमोशन होना था, उन्हें डिमोशन जैसी सजा दे दी गई। कोर्ट ने बिना देर किए सरकार की इस 'कलाकारी' पर 'स्टे' का ऐसा हथौड़ा मारा कि 18 के 18 तहसीलदार वापस अपनी पुरानी कुर्सियों पर चिपक गए। अब मंत्री जी सोच रहे होंगे कि ट्रांसफर की जो 'मेहनत' (अप्रत्यक्ष रूप से) की गई थी, उसका हिसाब-किताब कैसे बराबर होगा?

> **"सुशासन का ढोल अंदर से पोल है..."**

> यह हम नहीं कह रहे, यह तो खुद विभाग के सस्पेंडेड साहब कह गए। वैसे इस लिस्ट में बच्चों को जेल भेजने की धमकी देने वाली मशहूर तहसीलदार माया अंचल जी भी शामिल हैं। कोर्ट के स्टे के बाद अब देखना है कि वे बच्चों को जेल भेजती हैं या खुद अपनी पुरानी कुर्सी पर वापस बैठती हैं।

#### **हवा में उड़ते मंत्री जी और सीएम की 'ग्राउंडिंग'**

गलियारों में जोरों से चर्चा है कि इस पूरे ड्रामे से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इतने 'हैरान-परेशान' हुए कि उन्होंने टंकराम जी को बुलाकर साफ कह दिया—*"मंत्री जी, थोड़ा जमीन पर रहिए, हवा में उड़ना बंद कीजिए।"* इतना ही नहीं, नागपुर वाले 'संघ' के बड़े भाइयों ने भी मंत्री जी की ऐसी क्लास ली है, जैसी स्कूल में होमवर्क न करने वाले बच्चों की ली जाती है।

#### **ओपी चौधरी का 'कवच' और बीजेपी में 'दो-फाड़'**

इस पूरे सर्कस में एक और मजेदार मोड़ तब आया, जब पता चला कि वित्त मंत्री ओपी चौधरी जी इस पूरे खेल में टंकराम जी के पीछे 'ढाल' बनकर खड़े हैं। अब बीजेपी के भीतर ही दो गुट बन गए हैं—एक वो जो ट्रांसफर की मलाई से वंचित रह गए, और दूसरे वो जो चौधरी साहब के 'कवच' के भरोसे हैं।

**चलते-चलते:**

राजस्व विभाग के अधिकारी इस समय सरकार से इतने 'गदगद' (पढ़ें: नाराज) हैं कि आने वाले दिनों में सुशासन का यह ढोल और जोर से फटने वाला है। देखना दिलचस्प होगा कि ओपी चौधरी जी अपने 'खास' टंकराम जी को हाई कोर्ट और सीएम की फटकार से कैसे बचा पाते हैं!