शनिवार, 11 अप्रैल 2026

एफ़आईआर दर्ज कराने महिला विधायक को थाने में घंटों बैठना पड़ा

 

जब एफ़आईआर दर्ज कराने महिला विधायक को थाने में घंटों बैठना पड़ा

छत्तीसगढ़ में बदहाल हो चुकी कानून व्यवस्था को लेकर अभी कांग्रेस के प्रदर्शन को लोग भूल भी नहीं पाए थे कि बालोद की विधायक संगीता सिन्हा को थाने में जाकर एफआईआर करानी पड़ी आप कल्पना कर सकते हैं कि विधायक को यदि धरना देना पड़े एक एफआईआर के लिए तो छत्तीसगढ़ में थानों की क्या स्थिति है आसानी से समझा जा सकता है भले ही गृह मंत्री विजय शर्मा कितना भी दावा कर ले आंकड़े कितनी भी पेश कर ले कि कानून व्यवस्था अच्छी है कांग्रेस सरकार से लेकिन हकीकत तो यह है कि आज भी एफआईआर करने के नाम पर थाने में लोगों को परेशान किया जाता है घुमाया जाता है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण कल तब देखने को मिला जब एक महिला के साथ बदतमीजी करने का जो मामला था उस पर पुलिस एफआईआर करने को तैयार नहीं थी क्यों आखिर पुलिस को एफआईआर करने में क्या दिक्कत थी और 12 जुलाई की इस घटना से वह महिला इतनी परेशान थी कि उसने अपनी व्यथा विधायक से कही संगीता सिन्हा से उसके बाद संगीता सिन्हा थाना पहुंचे और थाने में भी विधायक के जाने के बाद एफआईआर नहीं की गई उन्हें धरने पर बैठना पड़ा और सुबह से शाम होते होते जब उन्होंने आईजी से लेकर तमाम सीएसपी भी वहां पहुंच गई थी चित्रा वर्मा तमाम लोगों को उच्चाधिकारियों को फोन करने के बाद शाम को एफआईआर दर्ज की गई महिला से छेड़छाड़ करने वाला कोई और नहीं वहां की एक पार्षद है उसके दामाद है अनुराग जैन उनके खिलाफ एफआईआर कर दी गई है लेकिन आप सोच सकते हैं कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था और थानों की क्या स्थिति बन रही है याद कीजिए आपकी किस तरीके से गौ रक्षकों ने गुंडागर्दी करते हुए हमला किया था महानदी पूल पर जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी इस मामले को पुलिस ने मावली मानने से इंकार करते हुए अपने जो चालान पेश किए हैं आरोप पत्र जो कोर्ट में दाखिल किया है उसमें कह दिया है कि गौ रक्षकों की डर की वजह से वे जो तीनों लोग थे वो नदी में कूद गए और चट्टान में गिरने की वजह से उनकी मौत हो गई खुलेआम किस तरीके से चाकूबाजी की घटना हो रही है किस तरीके से हत्या की घटना अचानक बढ़ गई है चोरी का तो और भी बुरा हाल है यदि आप दो चार घंटों के लिए अपने मकान छोड़कर कहीं जाते हैं तो चोरी हो जाती है इस तरह की स्थिति कई कॉलोनियों में सुनाई देने लगी है खुलेआम अपराध हो रहे हैं ऐसी परिस्थिति में यदि विधायक को ही थाना जाना पड़े धरना देना पड़े एक एफआईआर के लिए तब आप कल्पना कर सकते हैं कि डबल इंजन की सरकार छत्तीसगढ़ में किस तरह से चल रही और गृह मंत्री अपना मंत्रालय किस तरीके से चला रहे हैं हालांकि अभी सरकार परेशान है सरकार परेशान इसलिए है क्योंकि वह दो मंत्रियों का विस्तार नहीं कर पाई दो मंत्री पद खाली पड़े हैं निगम मंडल और आयोग में नियुक्ति की सूची बन गई है उसे भी मोदी शाह शायद पास नहीं कर रहे हैं आगे नहीं बढ़ा रहे इसलिए नियुक्ति नहीं हो रही और नेताओं में असंतोष बढ़ता जा रहा है क्योंकि सरकार बने यदि आठ महीने हो गए हैं और मंत्रिमंडल का विस्तार करने के लिए यह निगम मंडल आयोग की नियुक्ति के लिए भी यदि मुख्यमंत्री को बार-बार दिल्ली का दरवाजा खटखटाना पड़े तब कांग्रेस को क्यों मौका नहीं लग जाता कि यह रिमोट कंट्रोल से चलने वाली सरकार है क्या सिर्फ महतारी वंदन योजना को लागू करके छत्तीसगढ़ में वोटों की राजनीति संभव है क्योंकि जिस तरीके से सरकार चल रही है उसे लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं और विधानसभा में असंतोष साफ तौर पर देखने को मिला जब सत्ता पक्ष के ही सीनियर विधायकों ने जो डॉक्टर रमन सिंह के कार्यकाल में मंत्री रहे वे लोग ही विष्णुदेव साय सरकार को सवालों की झड़ी लगाकर खेर रहे थे और मंत्री असहाय महसूस कर रहे थे वह तो डॉक्टर रमन सिंह जैसे स्पीकर है इसलिए मामले को संभाल ले रहे थे लेकिन कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ की जो सरकार है उसका परसेप्शन जो विधानसभा में बना है वह बेहद ही हैरान कर देने वाला है तब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था को लेकर यह सरकार क्या निर्णय लेती है !

वीडियो देखें 


https://youtu.be/Wbva0IyrPVs?si=pHy1pd4luVl-b9V1

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