स्वास्थ विभाग में घपलेबाजी की जाँच करने कमेटी बनी, सप्लायरों की खैर नहीं
एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीबों को इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड योजना ला रहे हैं और आम लोगों को तकलीफ ना हो इसलिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में नए-नए काम करने का दावा किया जा रहा है लेकिन दूसरी छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग भ्रष्टाचार की दीमक का भेट चढ़ चुका है हर खरीदी में भ्रष्टाचार डॉक्टर रमन सिंह के जमाने में याद कीजिए डॉपलर से लेकर किस तरीके से मशीनों की खरीदी में जबरदस्त घोटाला हुआ था और अब भी लगातार घोटाला हो रहा है तो क्या इसके पीछे कोई माफिया का खेल चल रहा है किस तरीके से दवा कंपनी सप्लायर और विभागीय तंत्र इस पूरे खेल में शामिल होकर क्या सरकार को तो चुना लगा ही रहे हैं लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं पिछले दिनों विधानसभा में यह मामला गुंजा जिसमें दवाइयां मशीन रिएजेंट और ट्यूब खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का मामला उठा खूब हंगामा तीखी बहस भी हुई है मंत्री और सदस्यों के बीच अमर अग्रवाल बिलासपुर के विधायक हैं कभी रमन सरकार में वित्त मंत्री भी रहे उन्होंने इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जयसवाल को बुरी तरीके से खेल दिया और श्याम बिहारी जयसवाल ने इस मामले की जांच कराने की घोषणा तो कर दी है ध्यान आकर्षण सूचना के जरिए इस मामले को सबसे पहले बल्हा के विधायक धरमलाल कौशिक ने उठाया और उन्होंने बताया कि किस तरीके से बिना बिना डिमांड के ही करोड़ों रुपए की खरीदी की गई जिसमें रिएजेंट दवाएं उपकन स्वास्थ्य केंद्रों में भेजा गया उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि जिन अस्पतालों को जरूरत नहीं थी जिसकी मांग नहीं थी वहां भी जबरदस्ती यह ग्रिया भेजी गई जहां मशीन नहीं है वहां रिएजेंट की सप्लाई हो रही है ऐसी दवाओं की आपूर्ति कर दी गई है जिसका एक्सपायरी सितंबर और नवंबर 2024 में होना है सीएजी की रिपोर्ट में भी इसे इस इसे लेकर अनियमितता उजागर हो चुकी है ी में जो दवाई की खरीदी की गई है मशीन की खरीदी की गई है रिजेंट की खरीदी की गई है ट्यूब की खरीदी की गई है और उसमें जिस प्रकार से रेट तय किए हैं बाजार में उससे सस्ते में उपलब्ध है और उससे ज्यादा रेट में जो खरीदी की गई है इसको लेकर के मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है और इसमें मुख्य रूप से जो मोक्षित मेडिकेयर साथ ही ना इंडिया के द्वारा जो खरीदी की गई है इसमें डी ईडीटी ए ट्यूब साथ ही इसमें डी डाइमर फुली ऑटो एनालाइजर मशीन और उसके साथ में रिजेंट दवाइयां यह जो खरीदी की गई है निश्चित रूप से इसमें बड़ा करप्शन का मामला है भ्रष्टाचार का मामला है और यह महालेखा कार के उसमें भी आया है जिसका निर्णय अभी तक नहीं हुआ है यह कंपनी के द्वारा कर सीज के द्वारा कराई नहीं गई है साथ ही किसी प्र इसमें जांच जो होनी चाहिए हुई नहीं आज इस मामले को लेकर के उठाया गया और इसमें मंत्री जी के द्वारा सदन में घोषणा की गई है एसीएस के अध्यक्षता में दो आईएस और मिलाकर के तीन लोग की कमेटी में इसकी जांच की जाएगी और उसकी रिपोर्ट तीन महीने के अंदर जांच कमेटी के द्वारा प्रस्तुत की जाएगी जहां पर डिमांड नहीं है जहां पर मांग नहीं है वहां दवाई की सप्लाई जहां पर व मशीन नहीं है वहां पर रिजेंट के आपको जो सप्लाई करना और इस प्रकार से जो एक बड़े स्तर पर जो बिना डिमांड के जो उसमें सप्लाई की गई है और जिस प्रकार से उसमें मिली भगत के द्वारा जो टेंडर लगा कर के ठेकेदार के द्वारा जो उसमें डिमांड की गई तो एक बड़ा मामला इससे उजागर होगा और प्रदेश में प्रकार से जनता के बीच में जो यह लगातार मामले आते रहे हैं इस मामले पर जांच होने के बाद में उनके ऊपर शक्ति से शक्ति कारवाई हो इसके लिए हमने मांग किया था मंत्री जी ने जांच के आदेश दिए हैं यानी आप सोचिए कि किस तरीके से अपनी जेब भरने के लिए स्वास्थ जैसे महत्त्वपूर्ण विभाग में भी भ्रष्टाचार का दीमक पहुंच गया है आम लोगों के जीवन के साथ किस तरीके से खिलवाड़ किया जा रहा है एक्सपायरी डेट की दवाएं जो जल्दी एक्सपायरी होने वाली है ऐसी दवाओं की सप्लाई करके किस तरीके का खेल हो रहा है !

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