आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया -ग़ज़ब कर रही सरकार
यह ना तो इतिहास के उस सनकी राजा की कहानी है जिन्हें एक दिन के लिए दिल्ली की गद्दी दे दी गई तो वे चमड़े का सिक्का चलाने लग गए चौसा के भिस्ती निजाम थे ये जिन्हें एक दिन के लिए दिल्ली की गद्दी दे दी गई थी, वे चमड़े का सिक्का चलाकर अपना नाम इतिहास में दर्ज कर लिए और ना ही यह किस्सा भगोड़ा डिफाल्टर विजय माल्या का ही है जो आमदनीअठन्नी खर्चा रुपैया की तर्ज पर वाहवाही लूटने के लिए क्या कुछ नहीं किया था किस तरीके से उन्होंने अंग्रेजों द्वारा ले गए तलवार भी वापस लाए थे तो किंग फिशर विमान के जरिए किस तरीके से बैंकों को चूना लगाया था और इस देश से भागना पड़ा
यह तो मोदी सत्ता का वह कारनामा है जो आपकी आंखें खोल देगी यकीन मानिए कि चुनावी बांड के बाद जिस तरीके से मोदी सत्ता की करतूत सामने आई या उससे पहले की बात करें यदि हिडन बर्ड की रिपोर्ट आने के बाद से ही मोदी सरकार की मुसीबत बढ़ते चले गई उनकी छवि इस कदर खराब होने लग गई कि आरएसएस को अपने मुख पत्र में भी कहना पड़ा कि मोदी के भरोसे चुनाव जीता नहीं जा सकता लेकिन अहंकार जब सर चढ़कर बोलता है तो वह किसी भी चेतावनी को कहां मानता है और शायद यही वजह है कि 400 पार का नारा दे दिया गया
इस दौर में जबकि स्थिति वह नहीं है जो दिखाने बताने की कोशिश की जा रही है और इस खेल में समूचा मीडिया भी शामिल है तब ऐसी परिस्थिति में जब रोज-रोज मोदी के नए नए कारनामे सामने आ रहे हैं सिर्फ चुनावी बांड की बात नहीं है जहां उन दवा कंपनियों से भी पैसे वसूल लिए गए जांच रोकने के नाम से जो जहर बनाने की कोशिश कर रहे थे या नकली दवाइयां बना रहे थे मानक स्तर से नीचे की घटिया दवाइयां बना रहे थे उनसे पैसे लेने की बात नहीं है और ना ही पैसा दो और धंधा लो की बात है यह बात तो वंदे भारत जैसे महत्वाकांक्षी योजना की याद कीजिए आप जब गुजरात से चलकर देश के प्रधानमंत्री के पद पर पहुंचे थे तब बुलेट ट्रेन की बात की जा रही थी रेलवे की अनियमितता की बात की जा रही थी रेलवे के घाटे को लेकर कसीदे गढ़े जा रहे थे हमले किए जा रहे थे कांग्रेस और उसके पूर्व की सरकारों पर लेकिन वंदे भारत जब शुरू हुआ तो उसका हकीकत यह है कि सुविधाओं को लेकर तो सवाल उठते ही हैं खाने पीने की घटिया स्थिति को लेकर भी कई वीडियो वायरल हुए लेकिन आज हम बात कर रहे हैं नरेंद्र मोदी के उस खेल का जो आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया की तर्ज पर किया जा रहा है इस दौर में जो आरटीआई से खुलासे हुए व बेहद ना केवल चौकाने वाले हैं बल्कि सत्ता की मनमानी का ऐसा नमूना है जो आपको देखने में कहीं नहीं मिलेगा यदि आप टिकट कैंसल को लेकर जो आरटीआई की रिपोर्ट आई है वह जी समझ ले तो आप हैरान हो जाएंगे कि ट्रेन तो ठीक से चल नहीं रही आए दिन ट्रेन रद्द कर दी जाती है केवल ढुलाई के लिए या दूसरे माल परिवहन के लिए यात्रियों को परेशानी में डाल दिया जाता है लेकिन इस दौर में शायद कांग्रेस भी आंदोलन करने की स्थिति में नहीं है इसलिए जनता को उसके हाल में छोड़ दिया गया लोग परेशान ट्रेनों की बात नहीं है जो समय पर नहीं चल रही है बल्कि कभी भी रद्द की जा रही है और कैंसल टिकट से यानी जो लोग लोग अपनी इच्छा से कैंसल करते हैं उससे ही रेलवे ने 1230 करोड़ रुपए की कमाई की है यानी कमाई का क्या जरिया बना के रख दिया गया इस दौर में और यही नहीं रेलवे बुजुर्ग यात्रियों को सीनियर सिटीजन के नाम से जो सुविधाएं द देती थी वह भी पूरी तरीके से बंद कर दिया गया लेकिन यह धार्मिक सत्ता है यह धर्म के अनुसार चलने वाली सत्ता है शायद इसलिए लोगों ने इसे ध्यान नहीं दिया कि इस देश में बुजुर्गों के साथ किस तरीके से खेल खेल दिया रेलवेने और इसी खेल से ही करोड़ों रुपए रेलवे ने कमा लिया
लेकिन आज हम बात कर रहे हैं वंदे भारत न की जो मोदी सत्ता की सबसे महत्वकांक्षी योजनाओं में से आप यकीन नहीं करेंगे कि बीबीसी ने जो आरटीआई लगाया था उससे जो खुलासा हुआ है उससे तो यह पता चल रहा है कि केवल झंडी दिखाने के लिए जब मोदी पहुंचते हैं वंदे भारत ट्रेन को तो उसके खर्चे 19 लाख रुपए एक ट्रेन को झंडी दिखाने का पड़ रहा है जबकि आप याद कीजिए कि इससे पहले प्रधानमंत्री कब कब ट्रेन को झंडी दिखाते थे एक से एक ट्रेन चले नई तकनीकी के साथ ट्रेन चले लेकिन वंदे भारत को लेकर रेलवे मंत्री कहां है दूसरे विभाग के मंत्री कहां हालत यह है कि कोई भी विभाग का काम देश के प्रधानमंत्री ही झंडी दिखाने पहुंच जाते हैं उद्घाटन करने पहुंच जाते हैं यानी लोग तो मजाक में यहां तक कहने लग गए कि नाली का भी उद्घाटन करने देश के प्रधानमंत्री यदि जाने लगे तो फिर क्या कुछ हो लेकिन 2019 में नई दिल्ली से वाराणसी के बीच पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत की गई थी और अब तक 100 वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा चुकी यदि एक ट्रेन को हरी झंडी दिखाने की कीमत 19 लाख रुपए तो आप अंदाजा लगाइए कि 100 नों को हरी झंडी दिखाने में कितने करोड़ रुपए फूक दिए गए हैं केवल तामझाम स्वयं को स्थापित करने के लिए स्वयं की छवि बनाने के लिए क्या कुछ खेल इस दौर में नहीं हुआ और किस तरीके से सरकारी धन या टैक्स पेयर के पैसों को बर्बाद किया गया है लेकिन अब वही टैक्स पेयर जो सब्सिडी को लेकर सवाल उठाते थे मुंह में ताला लगा लिए हैं या आंखों में धर्म की पट्टी बांध चुके और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि यह वंदे भारत ट्रेन घाटे में चल रही 1 अप्रैल जो सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मिली है उसके अनुसार 1 अप्रैल 2023 से 31 जनवरी 2024 तक ट्रेन का खर्चा इस ट्रेन को चलाने का खर्चा जो हुआ है वह 75 करोड़ 23 लाख रुपए खर्चा कर दिया गया और इससे जो पैसे मिले हैं वह केवल 30 करोड़ रुपए यानी डबल आमदनी अठन्नी खर्चा रुपैया वही दूसरी तरफ आप कहेंगे कि यह तो सभी यात्री ट्रेनों के साथ होता है क्योंकि रेलवे के जो महाप्रबंधक मल्होत्रा है जो प्रमुख है वे कहते हैं कि हमारा धे यात्रियों को सुविधा देना है ना कि आय करना है पैसा कमाना है हम हम तो पैसा माल ढुलाई में कमाते लेकिन क्या यह हकीकत हैयदि यह हकीकत है तो फिर वंदे भारत ट्रेन की टिकट की कीमत इतनी ज्यादा क्यों है कि आम आदमी सफर ना कर सके आमतौर पर यह कहा जाता था कि मध्यम वर्ग और उनसे गरीब वर्ग ही ट्रेनों की यात्रा करते हैं पैसे ले तो हवाई जहाज से उड़ जाते हैं या एसी में सफर करते हैं तब ऐसी परिस्थिति में वंदे भारत चलाई किसके लिए जा रही है और वह भी इस तरह घाटे से आप कहेंगे कि सभी यात्री ट्रेन घाटे में चलती होगी नहीं ऐसा नहीं बेंगलर राजधानी एक्सप्रेसशताब्दी ना तो इसके उद्घाटन में वह तामझाम आपको देखने को मिला होगा और ना ही उतने खर्चे हुए होंगे क्योंकि उस दौर में रेलवे अपने खर्चे से अपने प्रचार के माध्यम से उद्घाटन करवा दिया करता था इसकी सुविधाओं का प्रचार प्रसार वह जरूर करती थी लेकिन वंदे भारत का जो प्रचार प्रसार है वह आप हैरान हो जाएंगे कि किस स्तर पर हो रहा है और किस तरीके से टैक्स पेयर के पैसे बर्बाद किए जा रहे हैं केवल अपनी छवि बनाने के लिए तो बेंगलर राजधानी शताब्दी जो है वो उसे चलाने में 68 करोड़ रुपए खर्च हुए जबकि उस दौर में 143 करोड़ कीकमाई इसी तरीके से एमपी शताब्दी एक्सप्रेस 35 करोड़ रुपए ही खर्च हुए आमदा 42 करोड़ रुपए हुआ यानी आप सोचिए कि एक तरफ वह ट्रेन है जो अपने समय के नईटेक्नोलॉजी के साथ शुरू की गई थी शताब्दी एक्सप्रेस हो दुरंतो एक्सप्रेस हो गरीब रत हो आपने इस तरह का तामझाम नहीं देखा होगा इस तरीके से ना तो झंडी दिखाने में खर्चा किया गया लेकिन यह दौर नए तरह का दौर है जहां बुजुर्गों को सुविधाएं भी नहीं दी जाएगी जहां दूसरी ट्रेनों को बंद करके केवल वंदे भारत को समय पर चलाने की कोशिशकरके लोगों की जेबें ढीली की जाएगी और इससे भी बड़ी बात तो यह है कि जो सोशल मीडिया में कहानी चल रही है वह भी कम हैरानी की बात नहीं एक व्यक्ति जो खुद सामने आकर कहता है कि उसने अपने परिवार के साथ वंदे भारत में टिकट बुक किया था वह कंफर्म नहीं हुआ था एक ही पीएनआर नंबर से टिकट बुक किया था उनकी कहानी जरा आप सुन लीजिए देखिए अज भाई बेसिकली मैंने दो टिकटलिया था ठीक है एक दोनों ही मतलब टिकट एक ही पीएनआर नंबर प था मतलब मेरा और एक मेरी फैमिली का यह आईआरसीटीसी क्या किया वेटिंग में टिकट था दोनों थोड़ा देर के बाद मैं रात में जब देखता हूं तो एक टिकट कंफर्म हो जाता है उसके बाद मेरे को लगा क्या कि ना कल चार्ट प्रीपेड होते होते दूसरा टिकट भी कंफर्म हो गया हो जाएगा लेकिन देख रहा हूं क्या कि दूसरा टिकट क्या किया इन लोगों ने वेटिंग में डाल दिया और एक टिकट का कंफर्म कर दिया अब मैं थोड़ा सा आईआरसीटी से ये पूछना चाहता हूं कि कोई भी उसका एडमिन कहीं पर जाता है तो क्या वोइसकी फैमिली और वो दोनों एक टिकट लेता है है और अगर बाय दुबे उसका जो एडमिन है मतलब जो मैनेजमेंट में है उसका टिकट कंफर्म हो जाता है और उसकी वाइफ का टिकट वेटिंग रह जाता है तो क्या वो अपनी वाइफ को छोड़ कर के वहां से वो भाग जाएगा या चला जाएगा मुझे समझ में नहीं आ रहा ये क्या चल रहा है यार मतलब अजीब है एक पीएन आर नंबर से जब दो टिकट लिया गया या तो कैंसिल होगा तो दोनों हो जाएगा भाई दोनों वेटिंग में डाल दो कोई दिक्कत नहीं है अगर या तो ये भी तो नहीं है कि आप बिना टिकट से ट्रेवल करो मतलब किस हिसाब से कोई बंदा उसकी जो फैमिली है वो उसको छोड़ कर के चला जाए येमुझे समझ में नहीं आ रहा है कि ये लोग का क्या किस तरह से मतलब इसका एल्गोरिथम यूज काम करता है हां अगर यह बोल रहे हैं कि नहीं मेरा एल्गोरिथम में कुछ इशू या तोसॉफ्टवेयर में कुछ तो भाई 11 बजे अगर 10 बजे अगर तत्काल टिकट बनना है ना तो 959 में टिकट नहीं बनता है तो फिर ये किस तरह से इसका वर्क कर रहा है मतलब आप लोग सोचिए गांव कार में जो ऑटो चलता है ना तो ऑटोवाला भी कभी ऐसा कर सकता है कि दो हस्बैंड वाइफ कहीं प जा रहा हो और हस्बैंड को बोल रहा हो कि भाई तू बैठ जा अपनी वाइफ को यहीं पर छोड़ द छोड़ जा मतलब एक ही सीट मेरा ऑटो में बचा हुआ है तो तू एक काम कर तू बैठ जा तेरी वाइफ को यहीं पर छोड़ दे ऐसा कभी साला एक ऑटो वाला नहीं कर रहा है मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि येआईआरसीटीसी का क्या ये नियम है और किस तरह से ओवरऑल मैंने टिकट छोड़ दिया मेरा जो मैंने टिकट में जो खर्चा हुआ था सेकंड एसी का टिकट था वो तो टिकट मेरा गया कुछ नहीं और कोई भी बंदा मेरे को नहीं लग रहा है किकोई भी बंदा इस तरह से कर सकता है कि उसका एक टिकट कंफर्म हो जाए तो वो अपना फैमिली को छोड़ कर के अपने से चला जाए ऐसा तो दुनिया में कोई नहीं हो सकतापता नहीं मैं इस बात को लेकर के मैं मेल भी किया हूं और आगे मैं कंजूमर कोर्ट में भी इस चीज का एप्लीकेशन डालू तो छवि चमकाने के लिए क्या कुछ खेल नहीं खेला जा रहा है किस तरीके से सरकारी पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है किस तरीके से अनियमित ट्रेनों ने लोगों का जीवन मुश्किलकर दिया है
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