मंगलवार, 17 मार्च 2026

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार

मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार





क्या इस देश में आम आदमी की जान की कीमत सिर्फ 5 लाख रुपये है? कल छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में बारूद फटा और गुजरात के राजकोट में गेम जोन जला। दोनों जगह एक बात कॉमन थी—मरने वाले बेगुनाह थे और बचाने वाले रसूखदार।"

2. बेमेतरा कांड: रसूख और लापरवाही (The Chhattisgarh Angle)

इतिहास: 1988 से शुरू हुई 'स्पेशल ब्लास्ट' फैक्ट्री का विवादों से पुराना नाता रहा है।

पहुंच: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा के रिश्तेदारों और कोल इंडिया के पूर्व विशेषज्ञों का मालिकाना हक।

बड़ा सवाल: जब पिछली सरकार ने सुरक्षा कारणों से इसे बंद किया था, तो यह दोबारा कैसे खुली? 800 मजदूरों की जान जोखिम में डालकर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों हुई?

दृश्य: दो मंजिला इमारत का मलबे में तब्दील होना और हादसे के 3 घंटे बाद पुलिस का पहुँचना प्रशासन की मुस्तैदी पर तमाचा है।

3. राजकोट: मनोरंजन के नाम पर 'डेथ ट्रैप' (The Gujarat Angle)

अमित शाह के करीबियों का नाम: युवराज सिंह सोलंकी जैसे संचालकों का रसूख।

क्रूरता: आग लगते ही जानकारी देने के बजाय संचालक का फरार हो जाना उनकी मानसिकता दर्शाता है।

समानता: दोनों घटनाओं में 'पॉलिटिकल अप्रोच' ने सुरक्षा नियमों को रद्दी का टुकड़ा बना दिया।

4. मुआवजे का झुनझुना (The Critique of Power)

• सरकार ने 5 लाख का मुआवजा घोषित कर दिया। लेकिन क्या पैसा किसी का पिता, भाई या बेटा वापस ला सकता है?

दंडाधिकारी जांच (Magisterial Inquiry): क्या यह सिर्फ मामले को ठंडा करने का तरीका है? पिछली कितनी जांचों की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई या दोषियों को सजा मिली?

5. तीखे सवाल (The Conclusion/CTA)

• क्या डायरेक्टरों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में एफआईआर होगी?

• क्या प्रशासन उन अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा जिन्होंने इन असुरक्षित जगहों को 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' (NOC) दिया?

अंतिम संदेश: "जब तक वोट और नोट के बदले जान की सौदागिरी बंद नहीं होगी, बेमेतरा और राजकोट जैसी खबरें आती रहेंगी। अब जागने का वक्त है।"

लगता है सत्ता सबक लेने तैयार नहीं इसलिए इसे एक बार फिर प्रकाशित किया जा रहा है ताकि लोगो को ध्यान रहे 

 छत्तीसगढ़ और गुजरात में जो घटना हुई वह हृदय विदारक घटना गुजरात में गेम जोन में लगी भीषण आग में 24 लोगों की मौत हो गई जिसमें 12 ब तो छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में स्थित बारूदी फैक्ट्री में हुए विस्फोट से एक दर्जन से अधिक लोगों के मरने की बात कही जा रही है दोनों ही घटनाओं में यदि कुछ कामन है तो वह आम लोगों की मौत या फिर उनके संचालकों का राजनैतिक पहुंच रखना आप हैरान हो जाएंगे कि किस तरीके से राजनीतिक पहुंच के चलते लापरवाही बढ़ती जाती है और लोगों की जान के साथ खिलवाड़ किया जाता है राजकोट में तो जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं वे गृह मंत्री अमित शाह के सबसे करीबी लोगों में से इस गेम जोन के संचालक युवराज सिंह सोलंकी ने घटना के बाद पुलिस या प्रशासन से इतल करने की बजाय फरार हो गए बेहद अफरातफरी का माहौल है और कहा जा रहा है कि कई लोग बेहद ही गंभीर हालत में अस्पताल में भरती है तो दूसरी तरफ बेमेतरा में जो बात सामने आई है कि इस फैक्ट्री को लेकर हमेशा ही लापरवाही की खबर आती रही है बारूद फैक्ट्री है यह और 1988 से इसका निर्माण शुरू हुआ और 1998 999 में इसने प्रोडक्शन शुरू किया कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश के धाकड़ नेता रहे सुंदरलाल पटवा के दामाद और उनके रिश्तेदारों की यह फैक्ट्री है डायरेक्टरों में जो नाम है वह अजय चौधरी चौधरी यह रिश्तेदार बताए जा रहे हैं इसके अलावा जो टेक्निकल सलाहकार है एसन सी यह कभी कोल इंडिया में रहे हैं और एक्सप्लोसिव और कोल के यह एक्सपर्ट माने जाते हैं तो एनआईटी से पास आउट आदेश जैन भी एक डायरेक्टर है इस स्पेशल ब्लास्ट नाम ही है इस कंपनी का स्पेशल ब्लास्ट तो सुंदरलाल पटवा के करीबी लोगों की इस फैक्ट्री में कल सुबह अचानक शनिवार को विस्फोट होता है दो मंजिला बिल्डिंग भरभरा कर गिर जाती है अफरातफरी का माहौल है और हैरानी की बात तो यह है कि घटना के तीन घंटे बाद पुलिस पहुंचती है तब तक वहां जो कर्मचारी तैनात थे सुरक्षा गार्ड थे कैशियर थे मैनेजर थे सब के सब फरार हो गए कहां है पुलिस ढूंढ रही है घटना क्यों हुई किस तरीके से हुई यह बताएं उससे पहले हम बता देते हैं कि इस फैक्ट्री को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा था सुरक्षा कारणों की अनदेखी पर कई सवाल उठते रहे हैं लेकिन कहा जाता है कि राजनैतिक अप्रोच के चलते इनके खिलाफ कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई यहां तक कि भूपेश सरकार में भी कई शिकायतें होने के बाद पिछले साल एक हफ्ते के लिए सुरक्षा कारणों से इसे बंद कर दिया गया था लेकिन अचानक फिर इसे कब चालू किया गया कोई नहीं जानता और तब से यहां सुरक्षा मापदंडों की अनदेखी की जा रही थी 800 के आसपास लोग यहां काम करते थे जिस बिल्डिंग में या जिस यूनिट में चार यूनिट थे लेकिन जिस यूनिट में विस्फोट हुआ वहां उस समय कितने लोग थे यह भी कोई बताने वाला नहीं है दो मंजिला बिल्डिंग जब बला में भरभरा कर गिरा तो मलम में भी कई लोगों की दबे होने की आशंका है और अभी तक राहत और बचाव का कार्य चल रहा है लोगों में आक्रोश है लेकिन इस आक्रोश का क्या करें सरकार हमेशा की तरह मृतकों को 5 लाख रुपए मुआवजा दे दे दी विष्णु देसाय की सरकारने और 00 रप इलाज के खर्चे के लिए घायलों को दे दी यानी राजनीति के इस गड़बड़ झाले में या घालमेल में किस तरह से लोगों की जान पे बन आई है और सत्ता मुआवजा बांटने में लगी है क्या डायरेक्टरों के खिलाफ एफआईआर नहीं होना चाहिए हालांकि कांग्रेस इस मामले में हमलावर है क्योंकि पिछले साल भूपेश सरकार के दौरानी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इसे एक सप्ताह के लिए बंद भी कर दिया गया था लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था नहीं सुधरी थी कहा जा रहा है तब फैक्ट्री कैसे चालू यह बड़ा सवाल है हालांकि इस परे दंडाधिकारी जांच के आदेश दे दिए हैं गए हैं लेकिन सब जानते हैं कि इन इस तरह की जांच का क्या मतलब होता है मामले को शांत करने के लिए इस तरह की जांच की घोषणा कर दी जाती है और उस दंडाधिकारी जांच का क्या होता है कितने ही जांच है जो रद्दी की टोकरी में फेंक दिए गए हैं तब ऐसे में सवाल यह है कि क्या राजनीतिक और पैसे के पहुंच के आगे सत्ता भी नतमस्तक है प्रशासन भी नतमस्तक है!

वीडियो देखें 

https://youtu.be/SAUufPl8cxs?si=0pR-GQCh1X-_j4JR

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