मंगलवार, 9 जून 2026

काले कोयले का 'मिस्टर इंडिया' खेल: लारा प्लांट के रास्ते से 573 टेलर गायब, कागजों पर बिका करोड़ों का कोयला!

 काले कोयले का 'मिस्टर इंडिया' खेल: लारा प्लांट के रास्ते से 573 टेलर गायब, कागजों पर बिका करोड़ों का कोयला!

तलाई पाली माइन से एनटीपीसी लारा प्लांट के बीच ₹200 करोड़ की 'महाडकैती'; राजनेता, अफसरशाह और ट्रांसपोर्टर सिंडिकेट के गठजोड़ पर अब सीबीआई की नजर।


छत्तीसगढ़ में कोयले के काले कारोबार का एक ऐसा जादुई खेल सामने आया है, जिसने देश के बड़े-बड़े जादूगरों और जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है। इसे केवल एक 'घोटाला' कहना इस पूरे घटनाक्रम के साथ न्याय नहीं होगा, बल्कि यह सीधे-सीधे समूचे तंत्र की मौजूदगी में की गई एक 'महाडकैती' है । मामला नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) के लारा प्लांट से जुड़ा है, जहां से प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक करीब ₹200 करोड़ का कोयला हवा में गायब कर दिया गया ।

क्या है पूरा 'लारा कांड'?

दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के अनुसार, रायगढ़ की तलाई पाली माइंस (Talaipali Mines) से एनटीपीसी के लारा प्लांट (Lara Plant) के लिए भारी मात्रा में कोयला रवाना किया गया था । कागजों पर बकायदा धर्म कांटे (वेब्रिज) में कोयले का वजन दर्ज हुआ, एंट्री की गई और गेट पास भी जारी हुए । लेकिन, तलाई पाली माइन से निकला कोयला लारा प्लांट पहुंचा ही नहीं ।

हैरतअंगेज बात यह है कि 573 भारी-भरकम टेलर (ट्रक) रास्ते से ही मिस्टर इंडिया की तरह गायब हो गए । रायगढ़ और उसौर के बीच के चंद किलोमीटर के सफर में हजारों टन कोयला लदे सैकड़ों ट्रक कहां विलीन हो गए, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है ।

बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के हुआ भुगतान

खोजी कड़ियों को जोड़ने पर पता चलता है कि यह खेल बिना आंतरिक मिलीभगत के नामुमकिन था। तलाई पाली माइंस से फर्जी एंट्री और गेट पास के सहारे इन टेलरों को रवाना दिखाया गया । रास्ते में ही इस कोयले को किसी गुप्त स्थान पर डंप कर (उतार) दिया गया । सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि लारा प्लांट में बिना किसी 'फिजिकल वेरिफिकेशन' (भौतिक सत्यापन) के कागजों पर ही एंट्री कर ली गई कि माल सुरक्षित पहुंच चुका है और इसके आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान भी जारी कर दिया गया ।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

 जब सैकड़ों ट्रक गायब हो रहे थे, तब वहां तैनात सुरक्षा बल (CISF) और माइनिंग विभाग क्या कर रहे थे? 

 इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद संबंधित ट्रांसपोर्टर के खिलाफ तत्काल कड़ा एक्शन क्यों नहीं लिया गया? 

सफेदपोश, अफसर और माफिया का 'सिंडिकेट'

इस खेल के पीछे किसी आम अपराधी का हाथ नहीं, बल्कि एक रसूखदार 'सिंडिकेट' काम कर रहा है, जिसमें सफेदपोश राजनेता, एनटीपीसी व तलाई पाली माइंस के उच्च अधिकारी, भ्रष्ट अफसरशाह और कोयला माफिया शामिल हैं । सूत्र बताते हैं कि कोयला लेवी के खेल के लिए पहले से चर्चित कुछ दिग्गज नेताओं और बड़े उद्योगपतियों ने अपने राजनीतिक रसूख के दम पर इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण दे रखा था।

सीबीआई के हाथ में कमान: क्या खुलेगा राज?

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस 'कोयला परिवहन घोटाले' की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है । सीबीआई के सामने अब सबसे बड़ी चुनौतियां हैं:

1 गायब हुआ हजारों टन कोयला आखिरकार किस जगह डंप किया गया?

2 उन 573 ट्रेलरों के असली मालिक कौन हैं, जिनके जरिए इस बेखौफ डकैती को अंजाम दिया गया? 

3 पर्दे के पीछे बैठे वे कौन से वीआईपी और सफेदपोश चेहरे हैं, जो इस सिंडिकेट की कमान संभाल रहे थे? 

छत्तीसगढ़ में कोयला घोटालों का पुराना इतिहास

छत्तीसगढ़ के लिए कोयला परिवहन और लेवी का यह विवाद नया नहीं है । पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान भी कोयला घोटाले को लेकर दिल्ली की संसद से लेकर छत्तीसगढ़ की गलियों तक सियासी पारा गर्म रहा था 。 उस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई थी और सूर्यकांत तिवारी, अनिल टुटेजा समेत कई रसूखदार अधिकारियों और करीब आधा दर्जन आईपीएस (IPS) अफसरों से लंबी पूछताछ हुई थी, जिससे प्रदेश की राजनीति की दिशा ही बदल गई ।

अब जबकि राज्य में एक बार फिर नए सिरे से 'लारा कांड' के रूप में ₹200 करोड़ की कोयला डकैती सामने आई है जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें सीबीआई की कार्रवाई पर टिकी हैं  देखना दिलचस्प होगा कि इस जादुई सिंडिकेट के कौन-कौन से बड़े किरदार सलाखों के पीछे पहुंचते हैं !

वीडियो देखें 

https://youtu.be/G7BitLUQiGw?si=HT6cZtxYAC5ScEJC