मंगलवार, 9 जून 2026

रिश्तों की बलि, करोड़ों का खेल!

 रिश्तों की बलि, करोड़ों का खेल!

 भारतमाला मुआवजा घोटाला: जब रसूख और रुपयों की हवस में अपनों के नाम और सिंदूर की मर्यादा भी दांव पर लग गई


 जिस देश और प्रदेश में एक आम किसान अपनी ही पुश्तैनी जमीन का जायज मुआवजा पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर अपनी चप्पलें घिस देता है, वहीं रसूखदारों के एक पूरे कुनबे ने कागजों पर जालसाजी का ऐसा शर्मनाक खेल खेला है जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए। यह सनसनीखेज कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'भारतमाला परियोजना' के तहत दुर्ग और राजनांदगांव के बीच (विशेषकर पाटन तहसील में) हुए भूमि अधिग्रहण मुआवजे की है। इस पूरे महाघोटाले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हो चुकी है, और जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उन्होंने न केवल कानून बल्कि सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की पवित्रता को भी तार-तार कर दिया है।

करोड़ों का लालच और रिश्तों का 'बदला हुआ' भूगोल

कहते हैं कि भारतीय समाज में विवाह के सात फेरे, सिंदूर की मर्यादा और पारिवारिक रिश्ते सबसे अनमोल होते हैं। लेकिन जब बात करोड़ों रुपये के सरकारी मुआवजे की आई, तो पूर्व मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कथित 'संस्कारों' की दुहाई देने वाले एक बड़े रसूखदार परिवार ने लाज-शर्म को ताक पर रख दिया।

मुआवजे का नियम कहता है कि जमीन के जितने टुकड़े होंगे और जितने अलग-अलग खातेदार होंगे, मुआवजा राशि उतनी ही मोटी और अलग-अलग हिस्सों में बढ़कर मिलेगी। बस, इसी कानूनी छिद्र का फायदा उठाने के लिए इस रसूखदार परिवार ने घर की महिलाओं को मोहरा बनाया या वे खुद इस खेल में शामिल हो गईं। एक ही नाम पर जमीन होने से मुआवजा सीमित रहता, इसलिए जमीन के टुकड़े किए गए और कागजों पर पतियों, पिताओं और ससुरों के नाम इस तरह बदले गए मानो आपस में कोई खून का रिश्ता ही न हो।

पैसे की भूख: किसी ने पति का नाम छुपाया, तो किसी ने बदला ससुर

इस पारिवारिक ड्रामे ने रातों-रात पूरे कुनबे को करोड़पति बना दिया। इस घोटाले की जद में पूर्व मंत्री के सगे भतीजे से लेकर बहुएं और भाभियां तक शामिल हैं। ईडी की जांच और राजस्व दस्तावेजों से जो प्रमुख नाम बेनकाब हुए हैं, वे इस प्रकार हैं:

1 रंजीता चंद्राकर (ग्राम कुरूद): इन्होंने मुआवजे की रकम को कई गुना बढ़ाने के लिए सरकारी कागजों में पति या पिता के नाम की जगह अपने 'ससुर' का नाम दर्ज करा दिया।

2 वाणी श्री चंद्राकर: इन्होंने तो हद ही कर दी; करोड़ों के फेर में शादी के पवित्र बंधन और पति के नाम को ही कागजों से गायब कर दिया और उसकी जगह अपने स्वर्गीय पिता का नाम दर्ज करा दिया।

3 अन्य संदेहास्पद नाम: इस पूरे खेल में पूर्व मंत्री के भतीजे सौरभ चंद्राकर, भाभी अरुणा चंद्राकर सहित परिवार के अन्य सदस्य—भरतलाल, मनोहर चंद्राकर, सुषमा चंद्राकर, विशाखा चंद्राकर, योगेश चंद्राकर, रेखा चंद्राकर और मीना चंद्राकर की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

यह छत्तीसगढ़ की उस पारिवारिक पृष्ठभूमि पर एक बड़ा तमाचा है जहां रिश्तों को रुपयों से ऊपर माना जाता है। सवाल यह उठता है कि क्या इन महिलाओं ने केवल पुरुषों के दबाव में आकर अपने सिंदूर और पहचान का सौदा किया, या फिर पैसे की हवस में वे खुद इस धोखाधड़ी की सूत्रधार थीं?

अंधा तंत्र, गदगद अफसरशाही: पटवारी से लेकर एसडीएम तक मौन

यह घोटाला सिर्फ एक रसूखदार परिवार की चालाकी का नतीजा नहीं है। यह मुमकिन ही नहीं था कि इतना बड़ा पारिवारिक खेल बिना प्रशासनिक मिलीभगत के खेला जा सके। जब कागजों पर ससुर को पिता और पति को अजनबी बनाया जा रहा था, तब इलाके के पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम और लैंड एक्विजिशन (भूमि अधिग्रहण) ऑफिसर अपनी आंखें मूंदे बैठे थे।

आशंका जताई जा रही है कि या तो इन अधिकारियों के टेबल के नीचे नोटों की मोटी गड्डियां पहुंचाई गईं या फिर पूर्व मंत्री के रसूख और धौंस के आगे पूरा तंत्र नतमस्तक हो गया। राजनांदगांव और पाटन क्षेत्र से ऐसी भी खबरें हैं कि जो जमीनें एक्सप्रेसवे के मुख्य निर्माण से 100 मीटर से लेकर 1 किलोमीटर तक दूर थीं, उनका भी नियम विरुद्ध जाकर करोड़ों का मुआवजा बांट दिया गया।

आरएसएस के 'संस्कार' और दावों पर बड़ा सवाल

यह मामला इसलिए भी राजनीतिक गलियारों में गरमा गया है क्योंकि आरोपी कुनबा उस पार्टी और विचारधारा से ताल्लुक रखता है जो खुद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्कारों से पोषित बताती है। जो संगठन देश में सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक ताने-बाने को मजबूत करने का दावा करता है, उसी के एक पूर्व कद्दावर मंत्री का परिवार पैसों के लिए अपनी पहचान बदलने पर आमादा हो गया।

ED की एंट्री से हड़कंप, चेहरों से नकाब उतरना तय

भारतमाला परियोजना के इस 'मुआवजा घोटाले' की परतें अब तेजी से उखड़ रही हैं। ईडी की एंट्री के बाद से ही दोषी रसूखदारों और भ्रष्ट अधिकारियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। शुरुआती जांच ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि यह देश के विकास मॉडल की आड़ में रसूखदारों द्वारा अपने 'कुनबे के विकास' का एक घृणित और सुनियोजित प्रयास था।

आने वाले दिनों में ईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई सफेदपोशों और बड़े अधिकारियों की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है। देखना होगा कि कानून इन 'रिश्तों के सौदागरों' को उनके किए की क्या सजा देता है।

वीडियो देखें 

काले कोयले का 'मिस्टर इंडिया' खेल: लारा प्लांट के रास्ते से 573 टेलर गायब, कागजों पर बिका करोड़ों का कोयला!

 काले कोयले का 'मिस्टर इंडिया' खेल: लारा प्लांट के रास्ते से 573 टेलर गायब, कागजों पर बिका करोड़ों का कोयला!

तलाई पाली माइन से एनटीपीसी लारा प्लांट के बीच ₹200 करोड़ की 'महाडकैती'; राजनेता, अफसरशाह और ट्रांसपोर्टर सिंडिकेट के गठजोड़ पर अब सीबीआई की नजर।



छत्तीसगढ़ में कोयले के काले कारोबार का एक ऐसा जादुई खेल सामने आया है, जिसने देश के बड़े-बड़े जादूगरों और जांच एजेंसियों को हैरान कर दिया है। इसे केवल एक 'घोटाला' कहना इस पूरे घटनाक्रम के साथ न्याय नहीं होगा, बल्कि यह सीधे-सीधे समूचे तंत्र की मौजूदगी में की गई एक 'महाडकैती' है । मामला नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) के लारा प्लांट से जुड़ा है, जहां से प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक करीब ₹200 करोड़ का कोयला हवा में गायब कर दिया गया ।

क्या है पूरा 'लारा कांड'?

दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के अनुसार, रायगढ़ की तलाई पाली माइंस (Talaipali Mines) से एनटीपीसी के लारा प्लांट (Lara Plant) के लिए भारी मात्रा में कोयला रवाना किया गया था । कागजों पर बकायदा धर्म कांटे (वेब्रिज) में कोयले का वजन दर्ज हुआ, एंट्री की गई और गेट पास भी जारी हुए । लेकिन, तलाई पाली माइन से निकला कोयला लारा प्लांट पहुंचा ही नहीं ।

हैरतअंगेज बात यह है कि 573 भारी-भरकम टेलर (ट्रक) रास्ते से ही मिस्टर इंडिया की तरह गायब हो गए । रायगढ़ और उसौर के बीच के चंद किलोमीटर के सफर में हजारों टन कोयला लदे सैकड़ों ट्रक कहां विलीन हो गए, इसका जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है ।

बिना फिजिकल वेरिफिकेशन के हुआ भुगतान

खोजी कड़ियों को जोड़ने पर पता चलता है कि यह खेल बिना आंतरिक मिलीभगत के नामुमकिन था। तलाई पाली माइंस से फर्जी एंट्री और गेट पास के सहारे इन टेलरों को रवाना दिखाया गया । रास्ते में ही इस कोयले को किसी गुप्त स्थान पर डंप कर (उतार) दिया गया । सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि लारा प्लांट में बिना किसी 'फिजिकल वेरिफिकेशन' (भौतिक सत्यापन) के कागजों पर ही एंट्री कर ली गई कि माल सुरक्षित पहुंच चुका है और इसके आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान भी जारी कर दिया गया ।

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

 जब सैकड़ों ट्रक गायब हो रहे थे, तब वहां तैनात सुरक्षा बल (CISF) और माइनिंग विभाग क्या कर रहे थे? 

 इतने बड़े फर्जीवाड़े के बावजूद संबंधित ट्रांसपोर्टर के खिलाफ तत्काल कड़ा एक्शन क्यों नहीं लिया गया? 

सफेदपोश, अफसर और माफिया का 'सिंडिकेट'

इस खेल के पीछे किसी आम अपराधी का हाथ नहीं, बल्कि एक रसूखदार 'सिंडिकेट' काम कर रहा है, जिसमें सफेदपोश राजनेता, एनटीपीसी व तलाई पाली माइंस के उच्च अधिकारी, भ्रष्ट अफसरशाह और कोयला माफिया शामिल हैं । सूत्र बताते हैं कि कोयला लेवी के खेल के लिए पहले से चर्चित कुछ दिग्गज नेताओं और बड़े उद्योगपतियों ने अपने राजनीतिक रसूख के दम पर इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण दे रखा था।

सीबीआई के हाथ में कमान: क्या खुलेगा राज?

मामले की गंभीरता को देखते हुए इस 'कोयला परिवहन घोटाले' की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है और एफआईआर भी दर्ज हो चुकी है । सीबीआई के सामने अब सबसे बड़ी चुनौतियां हैं:

1 गायब हुआ हजारों टन कोयला आखिरकार किस जगह डंप किया गया?

2 उन 573 ट्रेलरों के असली मालिक कौन हैं, जिनके जरिए इस बेखौफ डकैती को अंजाम दिया गया? 

3 पर्दे के पीछे बैठे वे कौन से वीआईपी और सफेदपोश चेहरे हैं, जो इस सिंडिकेट की कमान संभाल रहे थे? 

छत्तीसगढ़ में कोयला घोटालों का पुराना इतिहास

छत्तीसगढ़ के लिए कोयला परिवहन और लेवी का यह विवाद नया नहीं है । पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान भी कोयला घोटाले को लेकर दिल्ली की संसद से लेकर छत्तीसगढ़ की गलियों तक सियासी पारा गर्म रहा था 。 उस दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई थी और सूर्यकांत तिवारी, अनिल टुटेजा समेत कई रसूखदार अधिकारियों और करीब आधा दर्जन आईपीएस (IPS) अफसरों से लंबी पूछताछ हुई थी, जिससे प्रदेश की राजनीति की दिशा ही बदल गई ।

अब जबकि राज्य में एक बार फिर नए सिरे से 'लारा कांड' के रूप में ₹200 करोड़ की कोयला डकैती सामने आई है जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें सीबीआई की कार्रवाई पर टिकी हैं  देखना दिलचस्प होगा कि इस जादुई सिंडिकेट के कौन-कौन से बड़े किरदार सलाखों के पीछे पहुंचते हैं !

वीडियो देखें 

https://youtu.be/G7BitLUQiGw?si=HT6cZtxYAC5ScEJC