मंगलवार, 2 जून 2026

छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की 'पाइपलाइन' में लीकेज

 छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन की 'पाइपलाइन' में लीकेज: 'डबल इंजन' सरकार में भी ठेकेदारों की मनमानी, जनता त्रस्त



 देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक 'जल जीवन मिशन' छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में खुद प्यासी नजर आ रही है। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग और उपमुख्यमंत्री अरुण साव के कड़े बयानों और चेतावनियों के दावों के उलट, जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है । ग्रामीण इलाकों में योजना का काम या तो अधर में लटका हुआ है या फिर ठेकेदार काम बीच में ही छोड़कर रफूचक्कर हो चुके हैं। हालात यह हैं कि कई गांवों में आधी-अधूरी पाइपलाइन बिछाकर सड़कें खोद दी गई हैं, जिससे लोगों का चलना भी दूभर हो गया है ।

कागजों पर चेतावनी, जमीन पर 'गलबहियां'

पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पीएचई विभाग की बैठक लेकर लापरवाह ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी थी । इससे पहले छह इंजीनियरों को निलंबित भी किया जा चुका है लेकिन धरातल पर सख्त कार्रवाई की जगह ठेकेदारों और अधिकारियों के बीच 'गलबहियां' का खेल चल रहा है । सत्ता के गलियारों और मंत्री बंगले तक मजबूत पकड़ रखने वाले रसूखदार ठेकेदारों के आगे अधिकारी भी नतमस्तक नजर आ रहे हैं 

केस स्टडी: गरियाबंद के दही गांव में छह महीने से काम ठप

योजना में जारी इस खेल का सबसे ताजा और बड़ा उदाहरण गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक अंतर्गत आने वाले 'दही गांव' में देखने को मिला है । यहां घर-घर पानी पहुंचाने का जिम्मा 'देव साई ट्रेडर्स' नाम की एजेंसी को मिला है । ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले छह महीने से गांव में काम पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है । ग्रामीण लगातार इसकी शिकायत लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन 'देव साई ट्रेडर्स' का नाम सुनते ही अधिकारियों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस ठेकेदार की पहुंच सीधे मंत्री बंगले और सत्तारूढ़ दल के दिग्गज नेताओं तक है, जिसके कारण इसके खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से बच रहा है ।

विधानसभा में भी गूंजा मामला, घिरे विभागीय मंत्री

यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले विधानसभा सत्र के दौरान भी जल जीवन मिशन में हो रही गड़बड़ियों को लेकर विभागीय मंत्री अरुण साव विपक्ष के तीखे हमलों से बुरी तरह घिरे थे सदन में धमतरी जिले का मामला विशेष रूप से गूंजा था, जहां घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे । मंत्री के आश्वासन के बाद भी गरियाबंद, बलौदाबाजार, धमतरी और महासमुंद जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें आ रही हैं कि काम या तो बंद है या फिर बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है ।

विधायकों की भी सुनवाई नहीं!

सूत्रों का कहना है कि स्थिति इतनी बेकाबू हो चुकी है कि खुद सत्तापक्ष और विपक्ष के कई विधायक अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं को लेकर लगातार मंत्री बंगले और अधिकारियों को फोन कर रहे हैं । लेकिन शासन-प्रशासन और ठेकेदारों के बीच बनी कथित 'गिरोहबंदी' के कारण जनप्रतिनिधियों की बातों को भी अनसुना किया जा रहा है 

मुख्य बिंदु: क्यों फेल हो रहा है मिशन?

 रसूखदारों को शह: मंत्री बंगले और राजनीतिक रसूख के दम पर ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं ।

 घटिया सामग्री का उपयोग: कई जिलों में पाइपलाइन और टंकियों के निर्माण में स्तरहीन सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है ।

 अधिकारियों की लाचारी: कार्रवाई करने के बजाय पीएचई विभाग के अधिकारी रसूखदार एजेंसियों के सामने मौन हैं ।

 जनता की दोहरी मार: पानी तो मिला नहीं, उलटे पाइपलाइन के लिए खोदी गई सड़कों ने ग्रामीणों की मुसीबत दोगुनी कर दी है ।

निष्कर्ष: छत्तीसगढ़ में 'डबल इंजन' की सरकार होने के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की ऐसी दुर्दशा कई गंभीर सवाल खड़े करती है । यदि समय रहते इस 'सिंडिकेट' पर नकेल नहीं कसी गई, तो करोड़ों की यह योजना केवल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़कर रह जाएगी और ग्रामीणों का 'हर घर जल' का सपना सिर्फ सपना ही बना रहेगा।


Vidio देखें 


https://youtu.be/GYVzcgBej3U?si=mHGnFj7QTAuYejZW


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