सोमवार, 6 जुलाई 2026

नारी सम्मान पर उठे गंभीर

सियासी घमासान: भोरमदेव जंगल सफारी के निमंत्रण पत्र से महिला विधायक का नाम गायब, नारी सम्मान पर उठे गंभीर 


 कबीरधाम जिले के प्रतिष्ठित भोरमदेव जंगल सफारी के बहुप्रतीक्षित उद्घाटन कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र को लेकर प्रदेश की सियासत में एक नया उबाल आ गया है। इस पूरे आयोजन के आधिकारिक निमंत्रण पत्र (बैलेंस इनविटेशन कार्ड) से क्षेत्रीय महिला विधायक भावना बोहरा का नाम नदारद होने के बाद मामला बेहद गरमा गया है। इस चूक ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में 'नारी सम्मान' और महिला जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा को लेकर एक तीखी बहस छेड़ दी है।

प्रशासनिक चूक या सोची-समझी राजनीतिक साजिश?

स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर जनता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्षेत्र की एक बेहद सक्रिय और उत्कृष्ट महिला विधायक को इतने बड़े सरकारी और क्षेत्रीय गौरव के आयोजन से दूर रखने की कोशिश क्यों की गई? क्या यह वाकई में प्रशासनिक अधिकारियों की एक 'सामान्य' भूल थी, या फिर इसके पीछे अंदरूनी राजनीतिक खींचतान और किसी गहरी साजिश का हिस्सा था?

एक तरफ जहां देश और प्रदेश की सरकारें 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' और 'नारी शक्ति वंदन' जैसे नारों के साथ महिलाओं को मुख्यधारा और राजनीति में आगे लाने का दम भरती हैं, वहीं जमीन पर एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि को उनके ही क्षेत्र के सरकारी कार्यक्रम के आमंत्रण पत्र में जगह न मिलना इन दावों पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

नारी सम्मान को लेकर सुलग रहे हैं कई तीखे सवाल:

प्रिंट मीडिया और आम जनता के बीच इस वक्त कुछ सवाल बेहद पुरजोर तरीके से तैर रहे हैं:

1. प्रोटोकॉल की धज्जियां क्यों उड़ीं? सरकारी आयोजनों में स्थानीय विधायकों और जनप्रतिनिधियों का नाम प्रोटोकॉल के तहत सबसे ऊपर होना अनिवार्य है। ऐसे में कवर्धा जिले के इतने बड़े प्रोजेक्ट के निमंत्रण पत्र को अंतिम रूप देते समय प्रशासन ने इस बात पर ध्यान क्यों नहीं दिया?

2. आधी आबादी के प्रतिनिधित्व की उपेक्षा क्यों? क्या एक महिला विधायक होने के नाते उनकी सक्रियता और लोकप्रियता से किसी वर्ग को असुरक्षा महसूस हो रही थी, जिसके कारण जानबूझकर उनका नाम सूची से बाहर रखा गया?

3. जिम्मेदारी किसकी? इस बड़ी चूक के लिए जिम्मेदार विभाग के बड़े अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है? केवल 'मानवीय भूल' कहकर पल्ला झाड़ना क्या लोकतंत्र में उचित है?

क्षेत्र की जनता में भारी आक्रोश

भोरमदेव और पंडरिया क्षेत्र की जनता में इस बात को लेकर बेहद तीखी प्रतिक्रिया है। लोगों का कहना है कि विधायक भावना बोहरा ने हमेशा क्षेत्र के विकास और सांस्कृतिक धरोहरों (जैसे अमरकंटक से भोरमदेव तक की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा) को सहेजने के लिए समर्पण दिखाया है। उन्हें इस तरह एक सरकारी निमंत्रण पत्र से अदृश्य कर देना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं है, बल्कि उस पूरे क्षेत्र की जनता और महिला समाज का अपमान है जिसने उन्हें चुनकर विधानसभा भेजा है।

पर्दे के पीछे की राजनीति और अंदरूनी कलह का अंदेशा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक छपाई की गलती का नहीं है। सत्ता और संगठन के भीतर चलने वाली अंदरूनी कलह और क्रेडिट लेने की होड़ का नतीजा भी हो सकता है। जब-जब कोई महिला नेतृत्व अपनी कड़ी मेहनत के दम पर जनता के बीच पैठ बनाता है, तब-तब इस तरह के प्रशासनिक हथकंडों से उन्हें पीछे धकेलने की कोशिशें पहले भी देखी गई हैं।

अब देखना यह होगा कि इस तीखे विवाद के बाद प्रशासन अपनी गलती को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है, और 'नारी सम्मान' का ढोल पीटने वाले राजनीतिक दल इस गंभीर उपेक्षा पर क्या स्टैंड लेते हैं। यह मुद्दा आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है।


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