पिछले दिनों गायत्री परिवार के लोगों ने पत्रकारों को बताया कि वे जेल में बंदियों को गायत्री मंत्र सिखा रहे हैं और जेलों में वाचनालय स्थापित कर रहे हैं ताकि गलत कार्यों से लोगों का ध्यान हटे नि:संदेह गायत्री परिवार की यह कोशिश सराहनीय है। गायत्री परिवार के लोग शराब के खिलाफ भी जनजागरण अभियान चला रहे हैं इसी तरह का जनजागरण अन्य कई संस्थाएं भी चला रही है। इन संस्थाओं का मानना है कि उनके जनजागरण अभियान से लोग शराब पीना छोड़ देंगे। कुछ लोग छोड़ भी रहे होंगे। दरअसल इस तरह की संस्थाओं का आशावादी दृष्टिकोण आश्चर्यजनक है शराब के खिलाफ बरसों से इस तरह के जनजागरण चलाने वालों को इसका परिणाम तो पता है लेकिन वे फिर भी जनजागरण चला रहे हैं कुछ सरकारी अनुदान प्राप्त संस्था हैं तो कुछ लोग शराब के खिलाफ ऐसे अभियान के बहाने अपना नाम को प्रसिद्ध कर लेना चाहते हैं।
गायत्री परिवार किसी नाम का मोहताज नहीं है लेकिन उनके कार्यकर्ताओं को यह बात समझनी होगी कि सिर्फ जनजागरण से शराब बंदी हो जाती तो 50 सालों से चल रहे जनजागरण अभियान के बाद शराब पीने वालों की संख्या में हर साल ईजाफा नहीं होता। ऐसा ही अन्य संस्थाओं को भी यह बात समझनी होगी। दरअसल यह सारा खेल प्रदेश को मिलने वाले राजस्व का नहीं है बल्कि शराब दुकानों के खोलने में शराब ठेकेदारों द्वारा मंत्रियों-नेताओं से लेकर अधिकारी-कर्मचारियों को बांटे जाने वाले राजस्व का है। नेता-अधिकारी यह बात जानते हैं कि ऐसे जनजागरण से शराब बंद नहीं होगा इसलिए वे जनजागरण अभियान की दुहाई देते हैं जबकि यह सच्चाई है कि सरकार बेचना बंद करेगा तभी लोग पीना बंद करेंगे लेकिन वोट बैंक की राजनीति और पैसा कमाने की भूख ने इन विनाशकारी को जीवित रखा है।
सरकार शराब बेच रही है लोग जनजागरण चला रहे हैं आखिर यह कब तक चलेगा। इसलिए ऐसी संस्थाएं जो सचमुच शराब बंदी चाहते हैं वे यदि मुख्यमंत्री निवास का जमकर घेराव कर दे तो सरकार मजबूर हो सकती है। छत्तीसगढ़ में ही गायत्री परिवार के लाखों लोग हैं इसी तरह दूसरी संस्थाएं भी हैं यदि वे एक दिन तय करके संघर्ष की घोषणा कर दें तो सरकार जनजागरण की दुहाई देना बंद कर देगी। दरअसल सरकार ही नहीं चाहती कि शराब बंदी हो इसकी वजह वह राजस्व को बताते नहीं थकती लेकिन आम लोगों को यह समझना होगा कि राजस्व बहाना है असली वजह तो शराब ठेकेदारों से मिलने वाला कमीशन है जो राजस्व से कहीं ज्यादा नेताओं और अधिकारियों को मिलता है।
http://midiaparmidiaa.blogspot.in/
गुरुवार, 24 जून 2010
रविवार, 20 जून 2010
श्रीमद् भागवत गीता का अपमान!
ठाकुर की ठकुराई या मूणत की मुर्खताई
स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाली गीता वितरित
इसे सत्ता का दंभ कहें या व्यवस्था की मुर्खता लेकिन डॉ. रमन सिंह के पिताजी के तेरहवीं कार्यक्रम में जिस तरह से हिन्दुओं के पवित्र ग्रंथ ‘श्रीमद् भागवत गीता’ का अपमान किया गया उससे न केवल आम आदमी आक्रोशित है बल्कि उनकी टिप्पणी भी बेहद तीखी है। कोई इसे गीता का अपमान कह रहा है तो कोई इसे सत्ता का दंभ बता रहा है। मामले को तूल पकडऩे से रोकने सरकारी प्रयास भी जारी है। बावजूद इस करतूत की शिकायत नागपुर से लेकर दिल्ली तक की जा चुकी है।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब प्रदेश के मुखिया डॉ. रमन सिंह के पिताश्री स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह के तेरहवीं में 16 जून को कवर्धा में श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान श्रीमद् भागवत गीता बांटी गई। तेरहवीं कार्यक्रम में गीता का वितरण नया नहीं है लेकिन यहां जिस गीता का वितरण किया गया उसमें स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह जी की रंगीन तस्वीर छापी गई थी। दरअसल हिन्दुओं के लिए गीता का महत्व किसी से छीपा नहीं है और वे इसे अपने पूजा स्थल पर रखते हैं ऐसे में स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाली गीता कोई अपने पूजा स्थल पर क्यों रखेगा और जब पूजा स्थल पर नहीं रखा जाएगा तो फिर इस पवित्र ग्रंथ को रका कहां जाएगा। हमारे भरोसेमंद सूत्रों ने बताया कि तेरहवीं में वितरित किए जाने वाले श्रीमद् भागवत गीता में स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर छापने के पिछे स्वयं मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सहमति रही है जबकि सलाहकार के रुप में पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था करने वाले नगरीय निकाय मंत्री राजेश मूणत का नाम सामने आया है।
बताया जाता है कि यह तस्वीर मूणत आफसेट में छापी गई है और करीब डेढ़ लाख लोगों को यह किताब वितरित की गई है। आम लोगों की इस मामले में बेहद तीखी प्रतिक्रिया है और कई लोगों ने तो यहां तक कह डाला कि जो जितना बड़ा अधर्मी है आज वह उतना ही बड़ा धर्म का ठेकेदार हैं।
कई लोगों ने तो यहां तक कहा कि धर्म की राजनीति करने वाली भाजपा के नेताओं की ऐसी करतूतों के कारण ही देश में भाजपा को मुंह की खानी पड़ेगी और केन्द्रीय नेतृत्व ने यदि कड़े कदम नहीें उठाये तो छत्तीसगढ़ में भी भाजपा को मुंह की खानी पड़ सकती है। बहरहाल स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाले श्रीमद् भागवत गीता का मामला किस करवट बैठेगा यह तो वक्त ही बतायेगा लेकिन यह तय है कि इस मामले को लेकर पुजारियों और आम लोगों में बेहद आक्रोश है।
क्या करें इस ‘गीता’ का...
हमने स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह की तस्वीर वाले ‘श्रीमद् भागवत गीता’ के उपयोग पर चर्चा की तो कई पंडितों ने कहा कि इसे नदी-तालाब में विसर्जित किया जाना ही सबसे उचित होगा क्योंकि यदि तस्वीर फाडक़र इसे पूजा स्थल पर रखेंगे तो ठाकुर साहब का अपमान होगा। भले ही तस्वीर छपाने वालों ने इस अपमान को नहीं समझा हो लेकिन आम आदमी को यह ध्यान रखना होगा कि उनकी हरकत से किसी का अपमान न हो।
कांग्रेसी अब क्या करेंगे
धर्म को लेकर हमेशा ही कांग्रेस पर हमला होता रहा है ऐसे में विपक्ष में बैठी कांग्रेस क्या रूख अख्तियार करती है इसे लेकर कई तरह की चर्चा है। खासकर उन कांग्रेसियों की दुकानदारी या ठेकेदारी बंद होने की बात कही जा रही है जो थोड़े बहुत लालच में अपने मुंह पर ताला जड़े हुए हैं।
अब कहां है हिन्दू संगठन...
छत्तीसगढ़ में हिन्दुओं के हित में बोलने वाले चार दर्जन से अधिक संगठन काम कर रहे हैं लकिन आश्चर्य का विषय तो यह है कि इतने बड़े मामले में अब तक कोई भी सामने नहीं आया है। हिन्दुत्व की दुहाई देने वाले सबसे बड़े संगठन आरएसएस हो या विश्वहिन्दू परिषद से लेकर बजरंग दल सभी ने खामोशी ओढ़ ली है बात-बात में मिशनरियों को ललकारने वाली धर्म सेना तो इस मामले में कुछ भी बोलने से कतराती रही जबकि छोटे-मोटे संगठनों ने हमें ही सलाह दे दिया कि इस मामले को तूल मत दो। हमारा भी इस मामले को तूल देने का ईरादा नहीं है लेकिन जिस हिसाब से हमें आम लोगों ने ‘गीता’ के अपमान को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हम उन्हें भावनाओं को सिर्फ शब्द दे रहे हैं।
धर्म की राजनीति करने वाले दिग्गज भी पहुंचे थे...
स्व. ठाकुर विघ्नहरण सिंह जी के तेरहवीं कार्यक्रम में वे लोग भी आए थे जिन्हें कट्टर हिन्दुवाद के रुप में जाने जाते हैं। लालकृष्ण आडवानी, उमा भारती तो कट्टर हिन्दूवादी चेहरे हैं। जबकि राजनाथ सिंह, सुंदरलाल पटवा, धर्मेन्द्र प्रधान, रविशंकर प्रसाद, प्रभात झा, उमाशंकर गुप्ता सहित अनेक लोगों का ध्यान भी इस ओर नहीं गया। क्या वे जानबूझकर चुप थे यह तो वहीं जाने।
धर्म ग्रन्थ किसी की जागीर नहीं
प्रतिक्रियाएं : आम लोगों में आक्रोश
महादेव घाट स्थित हटकेश्वर नाथ मंदिर के पुजारी श्री लोचन गिरी गोस्वामी जी हमारे धर्मग्रंथ के साथ छेड़छाड़ करना गलत बात है इस तरह से फोटो लगाना उचित नहीं है यह हक किसी को नहीं है ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
महादेवघाट स्थित काली मंदिर के महंत संतोष गिरी महाराज फोटो लगाने का अधिकार किसने दिया। ये तो बर्दाश्त के बाहर की बात है और इस पाप के लिए सजा जरूर मिलेगी।
श्री कमल गिरी जी महाराज- इन्होंने इस तरह से गीता के अपमान की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसके खिलाफ आवाज उठाने का आह्वान किया।
श्री डगेश्वर शर्मा जी महाराज ने कहा कि इस तरह का कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है और दंड भी तय होने चाहिए।
फायर ब्रिगेड चौक हनुमान मंदिर के पुजारी पं. भूषण शर्मा जी ने गीता में फोटो देखते ही आग बबूला हो उठे और इसे पाप करार देते हुए गीता के दुरुपयोग पर रोक लगाने की बात कही।
श्याम नगर स्थित शिव मंदिर के पुजारी पं. यदुवंशमणि त्रिपाठीजी ने इस ‘गीता’ को देखते ही कहा कि लगता है डॉ. रमन सिंह पर भी कलयुग का प्रभाव आ गया है और कहा कि जब राजा ही ऐसा अधर्म काम करे तो प्रजा क्या करेंगे। पद के प्रभाव में धार्मिक ग्रंथों का दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
आर्तेक जायसवाल अंबिकापुर- इन्होंने कहा कि पद का ऐसा दुरुपयोग कभी नहीं देखा इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
बल्ला महाराज- डंगनिया बम्लेश्वरी मंदिर के पुजारी ने भी कहा कि इस तरह का फोटो लगाना गलत है। धर्मग्रंथ के साथ छेड़छाड़ की ईजाजत किसी को नहीं दी जानी चाहिए। हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।
ट्रांसपोर्टर संजय पाण्डे रायपुरा ने कहा कि कोई हिन्दु ही कैसे अपने ग्रंथ का अपमान कर सकता है आज हिन्दु संगठन चुप रहा तो हिन्दुओं की रक्षा में कौन आगे आएगा।
पत्रकार दामू अम्बाडोरे ने कहा कि अब तो जो जितना बड़ा अधर्मी है उतना बड़ा धर्म का ठेकेदार हो गया है ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाना चाहिए।
कवर्धा निवासी शेषनारायण पाण्डे ने कहा कि यह तो पद का दंभ है और किसी को अपने परिवार का प्रचार करना है तो कम से कम धर्म ग्रंथों को तो बख्श दें।
कोण्डागांव निवासी इसरार अहमद गोलू ने कहा कि किसी भी धर्मग्रंथ का अपमान उचित नहीं है और ऐसे मामले में कार्रवाई तय हो। धर्मग्रंथ किसी की जागिर नहीं है जिसे तो चाहे जैसा उपयोग कर ले।
विजन पब्लिक स्कूल के संरक्षक श्री सभाजीत पाण्डेय ने गीता में तस्वीर देखते ही भडक़ उठे। उन्होंने कहा कि पद में बैठकर लोग धर्म को जागिर बनाना आम लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ है ऐसे लोगों को न केवल पद से निकालना चाहिए बल्कि कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
अजय दुबे संपादक खबर भूमि ने कहा कि भाजपा केवल धर्म की रक्षा की बात कर सत्त में आई है और उनके नेता इस तरह की हरकत कर रहे हैं ऐसे लोगों को पद पर बने रहने का एक दिन का भी हक नहीं है।
शुक्रवार, 18 जून 2010
निकम को फिर संविदा में रखने की कोशिश...
छत्तीसगढ़ राय बीज एवं कृषि विकास निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार को नए अध्यक्ष श्याम बैस किस तरह काबू में करेंगे यह तो वही जाने लेकिन जिस जिला प्रबंधक के पद रहे एनसी निकम के पुन: नौकरी देने के प्रस्ताव को आईएएस डीएस मिश्रा ने खारिज कर दिया है उसी निकम को पुन: संविदा नियुक्ति देने की कोशिश चल रही है।
छत्तीसगढ राय बीज एवं कृषि विकास निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार चरम पर है और कहा जाता है कि जिला प्रबंधक जैसे पदों पर 20 लाख रुपए सालाना से अधिक आवक है। इसी परिपेक्ष्य में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि 30 जून 2010 को सेवानिवृत्त हुए एनसी निकम को पुन: संविदा नियुक्ति देने की तैयारी की जा रही है ताकि उच्चाधिकारियों के वसूली अधिकारी के रूप में चर्चित निकम के माध्यम से भ्रष्टाचार की मान्य परम्परा को कायम रखी जा सके।
हमारे भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने की कोशिश पहले भी हो चुकी है। जब आईएएस डीएस मिश्रा निगम के अध्यक्ष थे तब 30 मार्च 2010 को बोर्ड की बैठक हुई थी इस बैठक में एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन निकम के कारनामों से परिचित डीएस मिश्रा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि मिश्रा के हटते ही और श्याम बैस के अध्यक्ष बनते ही एक बार पुन: निगम में पदस्थ भ्रष्टाचारी चौकड़ी हाल ही में होने वाली बोर्ड की बैठक में पुन: एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव लाने की कोशिश में हैं।
सूत्रों ने बताया कि इसके लिए उच्चस्तरीय प्रयास और बड़ी राशि के लेन-देन की खबरें आने लगी है। बहरहाल बीज निगम में चल रहे नए खेल को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और यह भी कहा जा रहा है कि पुराने अध्यक्षों के कारनामों को लेकर नए अध्यक्ष श्याम बैस की भूमिका क्या होगी।
छत्तीसगढ राय बीज एवं कृषि विकास निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार चरम पर है और कहा जाता है कि जिला प्रबंधक जैसे पदों पर 20 लाख रुपए सालाना से अधिक आवक है। इसी परिपेक्ष्य में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि 30 जून 2010 को सेवानिवृत्त हुए एनसी निकम को पुन: संविदा नियुक्ति देने की तैयारी की जा रही है ताकि उच्चाधिकारियों के वसूली अधिकारी के रूप में चर्चित निकम के माध्यम से भ्रष्टाचार की मान्य परम्परा को कायम रखी जा सके।
हमारे भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने की कोशिश पहले भी हो चुकी है। जब आईएएस डीएस मिश्रा निगम के अध्यक्ष थे तब 30 मार्च 2010 को बोर्ड की बैठक हुई थी इस बैठक में एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव रखा गया था लेकिन निकम के कारनामों से परिचित डीएस मिश्रा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। सूत्रों ने बताया कि मिश्रा के हटते ही और श्याम बैस के अध्यक्ष बनते ही एक बार पुन: निगम में पदस्थ भ्रष्टाचारी चौकड़ी हाल ही में होने वाली बोर्ड की बैठक में पुन: एनसी निकम को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव लाने की कोशिश में हैं।
सूत्रों ने बताया कि इसके लिए उच्चस्तरीय प्रयास और बड़ी राशि के लेन-देन की खबरें आने लगी है। बहरहाल बीज निगम में चल रहे नए खेल को लेकर यहां कई तरह की चर्चा है और यह भी कहा जा रहा है कि पुराने अध्यक्षों के कारनामों को लेकर नए अध्यक्ष श्याम बैस की भूमिका क्या होगी।
गुरुवार, 17 जून 2010
किसने रोका अखबारों में खबर छपने से ?
मंत्री बृजमोहन अग्रवाल या पर्यटन अधिकारी
जिला कांग्रेस कमेटी ने सोचा भी नहीं रहा होगा कि जिस पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग के दो अधिकारियों के कारनामों पर जब वे पत्रकार वार्ता लेंगे तो यह खबर छप भी नहीं पायेंगी। यह पत्रकार वार्ता की खबरें किसने रुकवाई या विज्ञापन देने वाले पर्यटन मंडल की खबर खुद अखबारों ने रोकी यह जांच का विषय हो सकता है लेकिन खबर रुकने को लेकर पत्रकार वार्ता लेने वाले हैरान है।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल महामंत्री डॉ. निरंजन हरितवाल ने गुरुवार 10 जून को प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता लेकर पर्यटन मंडलके दो अधिकारियों एमजी श्रीवास्तव और अजय श्रीवास्तव पर न केवल गंभीर आरोप लगाए बल्कि पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को भी इसके लिए दोषी ठहराया। हमारे भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक वैसे तो इस पत्रकार वार्ता की सूचना के दौरान ही कई अखबारों में निर्देश जारी हो चुके थे। इधर गुरुवार को कुछ इलेक्ट्रानिक चैनलों में भी इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ खबरें प्रसारित होने लगी थी। लेकिन इस मामले में प्रिंट मीडिया की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जितनी मुंह उतनी बातें। कोई खबर रोकने के लिए मंत्री का दबाव बता रहे हैं तो कुछ पर्यटन अधिकारियों की दमदारी। हालांकि यह भी चर्चा है कि पर्यटन से मिलने वाले विज्ञापनों के मोह ने भी खबर को प्रसारित नहीं करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
पत्रकार वार्ता में वितरित सामग्री
प्रदेश के कद्दवार मंत्री कहे जाने वाली मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग पर्यटन मंडल को भ्रष्टाचार मंडल कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पर्यटन मंडल में पिछले कुछ वर्षों से एमजी श्रीवास्तव द्वारा महाप्रबंधक पद पर रहते हुए तथा अजय श्रीवास्तव जनसंपर्क अधिकारी एवं वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी जिन पर धारा 302, 201, 34 का आरोप है के द्वारा मनमाने ढंग से भ्रष्टाचार, घोटाले, तानाशाही रवैय्या अपनाया जा रहा है। उसके बाद भी श्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा इन पर कोई कार्रवाई न करना। यह अपने आप में संदेहस्पद है। उपरोक्त जानकारी शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल प्रभारी महामंत्री डा. निरंजन हरितवाल ने यहां एक पत्रकार वार्ता में दी। शहर
कांग्रेस के महामंत्री डा. निरंजन हरितवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंत्री को भ्रष्टाचार मंडल बनाने वाले मध्यप्रदेश पर्यटन से आए लेखाधिकारी मंदन गोपाल श्रीवास्तव के तानाशाही मनमानी बेखौफ निडरता का उदाहरण है कि पर्यटन मंडल में सीएसआईडीसी से कार्यपालन अभियंता के पद पर प्रतिनियुक्ति पर कार्य किए हुए अभियंता जी.एल. ठाकुर को कार्यपालन यंत्री के पद पर संविलियन करने का अनुमोदन एवं आदेश मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं प्रमुख सचिव द्वारा नोटशीट में आदेश सन् 2008 से 2010 तक अनेको बार निर्देश दिए गए है, किन्तु मदन गोपाल श्रीवास्तव जो उपसचिव भी है ने बखूबी फाईल को उलझाकर मंत्री महोदय के निर्देश की धाियां उड़ाकर अपने आप को प्रमुख सचिव एवं मंत्री से यादा पावरफुल समझता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि मंत्री महोदय बार-बार नोटशीट में पेज नं. 24 में दिए गए आदेश का पालन करें। लिखते है किन्तु कभी उन्होंने मदनगोपाल श्रीवास्तव से यह नहीं जानना चाहा कि अभी तक ठाकुर का आदेश क्यों नहीं निकाला? क्या यह महाप्रबंधक एमजी श्रीवास्तव एवं बृजमोजन अग्रवाल द्वारा जी.एल. ठाकुर को बहलाने की साजिश थी जबकि जीएल ठाकुर द्वारा अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ कई दिनों तक गोहार लगाते रहे। मंत्री एवं सचिव को अनेकों आवेदन 3 वर्षों में दिए। लेकिन इन्हें न्याय तो नहीं मिला, हां इस चिंता से उन्हें हृदयघात जरूर हुआ। श्री धाड़ीवाल, डा. हरितवाल ने आगे कहा कि भोपाली मदन गोपाल श्रीवास्तव के प्रताड़ना के फलस्वरुप जीएल ठाकुर इतने विवश हो गए कि वे अपने मूल विभाग सीएसआईडीसी में जाने के लिए मजबूर हो गए है। इन सब के पीछे मुख्य कारण यह है कि विभाग में समस्त निर्माण कार्य श्री ठाकुर द्वारा संभवत: नियमानुसार कराने से श्री श्रीवास्तव को भ्रष्टाचार करने का मौका नहीं मिलता। इस कारण श्री ठाकुर को इंजीनियरिंग सेक्शन के पूरे कार्य से हटाया जाकर स्वयं श्रीवास्तव जी इंजीनियर बन गए है और जहां बिल पास करने के लिए जीएल ठाकुर अधिकृत है वहां सर्विस प्रोबाइटर अभियंता से नाममात्र हस्ताक्षर करवाकर मोटलों एवं निर्माण कार्यों में खूब भ्रष्टाचार किया जा रहा है। श्री श्रीवास्तव एकाउंटेंट होते हुए भी महाप्रबंधक अभियंत्री की पर्यटन मंडल है तथा छत्तीसगढ़ शासन में उपसचिव पर्यटन है एवं होटल प्रबंध संस्थान में प्राचार्य है। ठेकेदारों के बिलों को बिना तकनीकी मापदंड एवं चेकिंग के डमी सर्विस प्रोपाइटर इंजीनियर से हस्ताक्षर कराकर कमीशन बटोरना ही इनका मुख्य कार्य है। श्री धाड़ीवाल, डॉ. हरितवाल ने कहा है कि एमजी श्रीवास्तव ने भ्रष्टाचार की चरमसीमा पार कर दी। इसका उदाहरण उनका ग्रीन सीटी विशाल नगर में आलीशान बंगला है। मध्यप्रदेश पर्यटन मंडल में भ्रष्टाचार के दस्तावेज भी इनके अतीत का भ्रष्टाचार प्रमाणित करता है।
इनकी कार्यशैली का एक उदाहरण यह है कि इनके जात भाई अजय श्रीवास्तव जो कि दुग्ध संघ में प्रतिनियुक्ति पर वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी के उच्च पद पर आए थे, उनका संविलियन उच्च पद पर भी किया गया है। जबकि जीएल ठाकुर को मंत्री एवं प्रमुख सचिव के अनुमोदन आदेश के विपरीत निम्न पद पर आदेश निकाला गया, जो कि मदन गोपाल श्रीवास्तव का शासन के मुंह पर तमाचा साबित हो चुका है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि अजय श्रीवास्तव वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी जिस पर सिमगा पुलिस रिकार्ड के अनुसार धारा 302 के तहत अपराध है तथा सिमगा पुलिस थाने से जनसूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी के अनुसार फरार घोषित किया गया है तथा शैक्षणिक योग्यता के अनुसार (टूरिम एवं होटल मैंनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा) वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी के लिए आवश्यक योग्यता नहीं होने के बाद भी ऐसे व्यक्ति का छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को बढ़ावा देने के लिए चयन किया जाना ही विभाग की विभागीय मंत्री जी के लिए प्रश्नचिन्ह है। 11 माह का मोटल निर्माण कार्य आज 5 वर्ष में भी पूर्ण नहीं किया गया और खंडहर की स्थिति में आ चुका है तथा नक्सली लोगों के रूकने का अड्डा बन चुका है। ठेकेदारों को लम्बी अवधि का भी भुगतान किया गया है। जिससे प्रत्येक मोटलों में 50 लाख का अतिरिक्त व्यय हुआ है। इस प्रकार मदन गोपाल श्रीवास्तव द्वारा 20 करोड़ रुपए का भुगतान एवं मोटी राशि लेकर किया गया है। इस तरह के और भी ना जाने इतने भ्रष्टाचार श्रीवास्तव बन्धुओं ने किए हैं, जिसकी जानकारी अभी आना बाकी है।
शहर अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल और महामंत्री डॉ. निरंजन हरितवाल ने पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से इस पूरे मामले की जांच कराया जाकर मदन गोपाल श्रीवास्तव एवं अजय श्रीवास्तव को तत्काल कार्य से निलंबित करने की मांग की है तथा कार्यवाही न होने पर 5 दिवस पश्चात पर्यटन मंडल कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया जाएगा तथा बृजमोहन अग्रवाल एवं मुख्यमंत्री से मिलकर कार्यवाही की भी मांग की जाएगी।
नई दुनिया में खबरें तो छपी लेकिन...
पत्रकारवार्ता की खभरें सब जगह रुक गई और थोड़ी दमदारी नई दुनिया ने दिखाई और खबरें तो छापी लेकिन किस तरह छापी है आप स्वयं देख लें....
पर्यटन मंडल के अफसरों पर भ्रष्टाचार का आरोप:- शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल और प्रभारी महामंत्री डा. निरंजन हरितवाल ने पर्यटन मंडल के दो अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, घोटाला और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ धारा 302, 201 व 24 का मामला दर्ज है। वे अपने आपको पावरफुल समझते हैं और उन्होंने सीएसआईडीसी के एक अभियंता की पर्यटन मंडल में संविलियन संबंधी फाइल को उलझा दिया है। मोटल निर्माण कार्य भी अधूरा है। ठेकेदारों को लंबी अवधि का भुगतान किया गया है। जिससे प्रत्येक मोटलों में 50-50 लाख का अतिरिक्त व्यय हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की जांच कराकर दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है। पांच दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर पर्यटन मंडल कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री रमन सिंह और पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
जिला कांग्रेस कमेटी ने सोचा भी नहीं रहा होगा कि जिस पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग के दो अधिकारियों के कारनामों पर जब वे पत्रकार वार्ता लेंगे तो यह खबर छप भी नहीं पायेंगी। यह पत्रकार वार्ता की खबरें किसने रुकवाई या विज्ञापन देने वाले पर्यटन मंडल की खबर खुद अखबारों ने रोकी यह जांच का विषय हो सकता है लेकिन खबर रुकने को लेकर पत्रकार वार्ता लेने वाले हैरान है।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल महामंत्री डॉ. निरंजन हरितवाल ने गुरुवार 10 जून को प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता लेकर पर्यटन मंडलके दो अधिकारियों एमजी श्रीवास्तव और अजय श्रीवास्तव पर न केवल गंभीर आरोप लगाए बल्कि पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को भी इसके लिए दोषी ठहराया। हमारे भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक वैसे तो इस पत्रकार वार्ता की सूचना के दौरान ही कई अखबारों में निर्देश जारी हो चुके थे। इधर गुरुवार को कुछ इलेक्ट्रानिक चैनलों में भी इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ खबरें प्रसारित होने लगी थी। लेकिन इस मामले में प्रिंट मीडिया की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। जितनी मुंह उतनी बातें। कोई खबर रोकने के लिए मंत्री का दबाव बता रहे हैं तो कुछ पर्यटन अधिकारियों की दमदारी। हालांकि यह भी चर्चा है कि पर्यटन से मिलने वाले विज्ञापनों के मोह ने भी खबर को प्रसारित नहीं करने में बड़ी भूमिका निभाई है।
पत्रकार वार्ता में वितरित सामग्री
प्रदेश के कद्दवार मंत्री कहे जाने वाली मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के विभाग पर्यटन मंडल को भ्रष्टाचार मंडल कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। पर्यटन मंडल में पिछले कुछ वर्षों से एमजी श्रीवास्तव द्वारा महाप्रबंधक पद पर रहते हुए तथा अजय श्रीवास्तव जनसंपर्क अधिकारी एवं वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी जिन पर धारा 302, 201, 34 का आरोप है के द्वारा मनमाने ढंग से भ्रष्टाचार, घोटाले, तानाशाही रवैय्या अपनाया जा रहा है। उसके बाद भी श्री बृजमोहन अग्रवाल द्वारा इन पर कोई कार्रवाई न करना। यह अपने आप में संदेहस्पद है। उपरोक्त जानकारी शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल प्रभारी महामंत्री डा. निरंजन हरितवाल ने यहां एक पत्रकार वार्ता में दी। शहर
कांग्रेस के महामंत्री डा. निरंजन हरितवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंत्री को भ्रष्टाचार मंडल बनाने वाले मध्यप्रदेश पर्यटन से आए लेखाधिकारी मंदन गोपाल श्रीवास्तव के तानाशाही मनमानी बेखौफ निडरता का उदाहरण है कि पर्यटन मंडल में सीएसआईडीसी से कार्यपालन अभियंता के पद पर प्रतिनियुक्ति पर कार्य किए हुए अभियंता जी.एल. ठाकुर को कार्यपालन यंत्री के पद पर संविलियन करने का अनुमोदन एवं आदेश मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं प्रमुख सचिव द्वारा नोटशीट में आदेश सन् 2008 से 2010 तक अनेको बार निर्देश दिए गए है, किन्तु मदन गोपाल श्रीवास्तव जो उपसचिव भी है ने बखूबी फाईल को उलझाकर मंत्री महोदय के निर्देश की धाियां उड़ाकर अपने आप को प्रमुख सचिव एवं मंत्री से यादा पावरफुल समझता है। आश्चर्य तो इस बात का है कि मंत्री महोदय बार-बार नोटशीट में पेज नं. 24 में दिए गए आदेश का पालन करें। लिखते है किन्तु कभी उन्होंने मदनगोपाल श्रीवास्तव से यह नहीं जानना चाहा कि अभी तक ठाकुर का आदेश क्यों नहीं निकाला? क्या यह महाप्रबंधक एमजी श्रीवास्तव एवं बृजमोजन अग्रवाल द्वारा जी.एल. ठाकुर को बहलाने की साजिश थी जबकि जीएल ठाकुर द्वारा अपने साथ हुए इस अन्याय के खिलाफ कई दिनों तक गोहार लगाते रहे। मंत्री एवं सचिव को अनेकों आवेदन 3 वर्षों में दिए। लेकिन इन्हें न्याय तो नहीं मिला, हां इस चिंता से उन्हें हृदयघात जरूर हुआ। श्री धाड़ीवाल, डा. हरितवाल ने आगे कहा कि भोपाली मदन गोपाल श्रीवास्तव के प्रताड़ना के फलस्वरुप जीएल ठाकुर इतने विवश हो गए कि वे अपने मूल विभाग सीएसआईडीसी में जाने के लिए मजबूर हो गए है। इन सब के पीछे मुख्य कारण यह है कि विभाग में समस्त निर्माण कार्य श्री ठाकुर द्वारा संभवत: नियमानुसार कराने से श्री श्रीवास्तव को भ्रष्टाचार करने का मौका नहीं मिलता। इस कारण श्री ठाकुर को इंजीनियरिंग सेक्शन के पूरे कार्य से हटाया जाकर स्वयं श्रीवास्तव जी इंजीनियर बन गए है और जहां बिल पास करने के लिए जीएल ठाकुर अधिकृत है वहां सर्विस प्रोबाइटर अभियंता से नाममात्र हस्ताक्षर करवाकर मोटलों एवं निर्माण कार्यों में खूब भ्रष्टाचार किया जा रहा है। श्री श्रीवास्तव एकाउंटेंट होते हुए भी महाप्रबंधक अभियंत्री की पर्यटन मंडल है तथा छत्तीसगढ़ शासन में उपसचिव पर्यटन है एवं होटल प्रबंध संस्थान में प्राचार्य है। ठेकेदारों के बिलों को बिना तकनीकी मापदंड एवं चेकिंग के डमी सर्विस प्रोपाइटर इंजीनियर से हस्ताक्षर कराकर कमीशन बटोरना ही इनका मुख्य कार्य है। श्री धाड़ीवाल, डॉ. हरितवाल ने कहा है कि एमजी श्रीवास्तव ने भ्रष्टाचार की चरमसीमा पार कर दी। इसका उदाहरण उनका ग्रीन सीटी विशाल नगर में आलीशान बंगला है। मध्यप्रदेश पर्यटन मंडल में भ्रष्टाचार के दस्तावेज भी इनके अतीत का भ्रष्टाचार प्रमाणित करता है।
इनकी कार्यशैली का एक उदाहरण यह है कि इनके जात भाई अजय श्रीवास्तव जो कि दुग्ध संघ में प्रतिनियुक्ति पर वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी के उच्च पद पर आए थे, उनका संविलियन उच्च पद पर भी किया गया है। जबकि जीएल ठाकुर को मंत्री एवं प्रमुख सचिव के अनुमोदन आदेश के विपरीत निम्न पद पर आदेश निकाला गया, जो कि मदन गोपाल श्रीवास्तव का शासन के मुंह पर तमाचा साबित हो चुका है। कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि अजय श्रीवास्तव वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी जिस पर सिमगा पुलिस रिकार्ड के अनुसार धारा 302 के तहत अपराध है तथा सिमगा पुलिस थाने से जनसूचना के अधिकार के तहत निकाली गई जानकारी के अनुसार फरार घोषित किया गया है तथा शैक्षणिक योग्यता के अनुसार (टूरिम एवं होटल मैंनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट, डिप्लोमा) वरिष्ठ पर्यटन अधिकारी के लिए आवश्यक योग्यता नहीं होने के बाद भी ऐसे व्यक्ति का छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल को बढ़ावा देने के लिए चयन किया जाना ही विभाग की विभागीय मंत्री जी के लिए प्रश्नचिन्ह है। 11 माह का मोटल निर्माण कार्य आज 5 वर्ष में भी पूर्ण नहीं किया गया और खंडहर की स्थिति में आ चुका है तथा नक्सली लोगों के रूकने का अड्डा बन चुका है। ठेकेदारों को लम्बी अवधि का भी भुगतान किया गया है। जिससे प्रत्येक मोटलों में 50 लाख का अतिरिक्त व्यय हुआ है। इस प्रकार मदन गोपाल श्रीवास्तव द्वारा 20 करोड़ रुपए का भुगतान एवं मोटी राशि लेकर किया गया है। इस तरह के और भी ना जाने इतने भ्रष्टाचार श्रीवास्तव बन्धुओं ने किए हैं, जिसकी जानकारी अभी आना बाकी है।
शहर अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल और महामंत्री डॉ. निरंजन हरितवाल ने पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल एवं मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से इस पूरे मामले की जांच कराया जाकर मदन गोपाल श्रीवास्तव एवं अजय श्रीवास्तव को तत्काल कार्य से निलंबित करने की मांग की है तथा कार्यवाही न होने पर 5 दिवस पश्चात पर्यटन मंडल कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया जाएगा तथा बृजमोहन अग्रवाल एवं मुख्यमंत्री से मिलकर कार्यवाही की भी मांग की जाएगी।
नई दुनिया में खबरें तो छपी लेकिन...
पत्रकारवार्ता की खभरें सब जगह रुक गई और थोड़ी दमदारी नई दुनिया ने दिखाई और खबरें तो छापी लेकिन किस तरह छापी है आप स्वयं देख लें....
पर्यटन मंडल के अफसरों पर भ्रष्टाचार का आरोप:- शहर कांग्रेस अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल और प्रभारी महामंत्री डा. निरंजन हरितवाल ने पर्यटन मंडल के दो अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, घोटाला और तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने गुरुवार को पत्रकारवार्ता में बताया कि दोनों अधिकारियों के खिलाफ धारा 302, 201 व 24 का मामला दर्ज है। वे अपने आपको पावरफुल समझते हैं और उन्होंने सीएसआईडीसी के एक अभियंता की पर्यटन मंडल में संविलियन संबंधी फाइल को उलझा दिया है। मोटल निर्माण कार्य भी अधूरा है। ठेकेदारों को लंबी अवधि का भुगतान किया गया है। जिससे प्रत्येक मोटलों में 50-50 लाख का अतिरिक्त व्यय हुआ है। कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की जांच कराकर दोनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की है। पांच दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर पर्यटन मंडल कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। साथ ही मुख्यमंत्री रमन सिंह और पर्यटन मंत्री बृजमोहन अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों ने की करोड़ों रुपए की घोटाला
छात्र भटक रहे, सरकार खामोश
छत्तीसगढ़ के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की मनमानी पर छत्तीसगढ़ सरकार की चुप्पी से नाराज कांग्रेसियों ने बड़ा आंदोलन करने की घोषणा की है। निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों पर करीब 300 छात्रों की करोड़ों रुपए दबा लेने के मामले को लेकर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल और महामंत्री डॉ. निरंजन हरितवाल ने संचालनालय को ज्ञापन भी सौंपा है।
छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा तकनीकी, शिक्षा, जनशक्ति नियोजन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मंत्रालय दिनांक 19 मई 2005 के आदेशानुसार समस्त गैर अनुदान प्राप्त व्यवसायिक शैक्षणिक संस्थानों के लिए शैक्षणिक शुल्कों का निर्धारण किया गया जिसके मुताबिक निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों का वर्ष 2005-06 से कोर्स पूरा होते तक प्रतिवर्ष संलग्न प्रपत्र के अनुसार विभिन्न कालेजों को सूची के अनुसार 20 हजार से 30 हजार तक छात्र-छात्राओं से फीस लेने की पात्रता थी। इसके बाद पुन: दिनांक 19 मार्च 2010 को वर्ष 2008-09 में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राआें के लिए सलंग्न प्रपत्र के अनुसार प्रति सेमेस्टर फीस निर्धारित की गई। सभी निजी इंजीनियरिंग कालेजों द्वारा वर्ष 2008-09 में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए निर्धारित फीस का फायदा उठाते हुए उन समस्त छात्रों से भी जिन्होंने 2005-06, 2006-07, 2007-08 में प्रवेश लिया है से भी 2008-09 की बड़ी हुई फीस 20 हजार 150 रुपए से लेकर 24 हजार 150 रुपए प्रति सेमेस्टर के हिसाब से वसूल कर लिया। जबकि उन पुराने छात्रों पर बढ़ी हुई दर लागू नहीं है। वर्ष 2008-09 इस प्रकार संलग्न सूची में उल्लेखित 24 निजी इंजीनियरिंग कालेजों द्वारा 103 करोड़ रुपए की अधिक फीस छात्र-छात्राओं के साथ धोखाधड़ी कर नियम विरुध्द वसूल कर ली है। जिन्हें ब्याज सहित वापस दिलाए जावे।
इस प्रकार 24 निजी इंजीनियरिंग कालेजों के सभी 300 छात्रों को इनसे 2 वर्षों तक की अधिक फीस वसूली गई है जो 60 हजार रुपए प्रति छात्र ब्याज सहित होती है, को 15 दिनों के अंदर वापस दिलाया जावे अन्यथा कांग्रेसजन, आपके एवं निजी इंजीनियरिंग कालेजों के विरुध्द आंदोलन प्रदर्शन एवं घेराव किया जावेगा। इसके अलावा लेट फीस के नाम पर 1 हजार रुपए तक छात्रों से वसूल किया गया है, जबकि नियमानुसार 25 रुपए प्रतिदिन से अधिक लेटफीस नहीं ली जा सकती है इस प्रकार लाखों रुपए लेटफीस के नाम से छात्रों से वसूला गया है जिसे भी जांचकर वापस दिलाया जाए।
इस प्रकार पुराने छात्रों से अभी तक 103 करोड़ 68 लाख रुपए अधिक फीस वसूली गई। इसके अतिरिक्त 2010-11 में इसी दर से अतिरिक्त फीस वसूल की जावेगी। जिस पर भी रोक लगाना आवश्यक है। अत: अनुरोध है कि उन समस्त पुराने छात्रों को जिन्होंने वर्ष 2005-06 से 2007-08 तक प्रवेश किया है उन समस्त छात्रों से जो 2009-10 तक उपरोक्तानुसार अधिक फीस वसूल की गई 24 हजार रुपए प्रतिवर्ष से 2 वर्ष की याने 48 हजार रुपए की दर से तथा उस पर दो वर्ष का ब्याज जो करीब 18 हजार रुपए 18 प्रतिशत वार्षिक दर से इस प्रकार प्रत्येक छात्रों को 60 हजार रुपए अधिक वसूल की गई फीस वापस की जावे।
छत्तीसगढ़ के निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों की मनमानी पर छत्तीसगढ़ सरकार की चुप्पी से नाराज कांग्रेसियों ने बड़ा आंदोलन करने की घोषणा की है। निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों पर करीब 300 छात्रों की करोड़ों रुपए दबा लेने के मामले को लेकर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष इंदरचंद धाड़ीवाल और महामंत्री डॉ. निरंजन हरितवाल ने संचालनालय को ज्ञापन भी सौंपा है।
छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा तकनीकी, शिक्षा, जनशक्ति नियोजन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग मंत्रालय दिनांक 19 मई 2005 के आदेशानुसार समस्त गैर अनुदान प्राप्त व्यवसायिक शैक्षणिक संस्थानों के लिए शैक्षणिक शुल्कों का निर्धारण किया गया जिसके मुताबिक निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों का वर्ष 2005-06 से कोर्स पूरा होते तक प्रतिवर्ष संलग्न प्रपत्र के अनुसार विभिन्न कालेजों को सूची के अनुसार 20 हजार से 30 हजार तक छात्र-छात्राओं से फीस लेने की पात्रता थी। इसके बाद पुन: दिनांक 19 मार्च 2010 को वर्ष 2008-09 में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राआें के लिए सलंग्न प्रपत्र के अनुसार प्रति सेमेस्टर फीस निर्धारित की गई। सभी निजी इंजीनियरिंग कालेजों द्वारा वर्ष 2008-09 में प्रवेश लेने वाले छात्रों के लिए निर्धारित फीस का फायदा उठाते हुए उन समस्त छात्रों से भी जिन्होंने 2005-06, 2006-07, 2007-08 में प्रवेश लिया है से भी 2008-09 की बड़ी हुई फीस 20 हजार 150 रुपए से लेकर 24 हजार 150 रुपए प्रति सेमेस्टर के हिसाब से वसूल कर लिया। जबकि उन पुराने छात्रों पर बढ़ी हुई दर लागू नहीं है। वर्ष 2008-09 इस प्रकार संलग्न सूची में उल्लेखित 24 निजी इंजीनियरिंग कालेजों द्वारा 103 करोड़ रुपए की अधिक फीस छात्र-छात्राओं के साथ धोखाधड़ी कर नियम विरुध्द वसूल कर ली है। जिन्हें ब्याज सहित वापस दिलाए जावे।
इस प्रकार 24 निजी इंजीनियरिंग कालेजों के सभी 300 छात्रों को इनसे 2 वर्षों तक की अधिक फीस वसूली गई है जो 60 हजार रुपए प्रति छात्र ब्याज सहित होती है, को 15 दिनों के अंदर वापस दिलाया जावे अन्यथा कांग्रेसजन, आपके एवं निजी इंजीनियरिंग कालेजों के विरुध्द आंदोलन प्रदर्शन एवं घेराव किया जावेगा। इसके अलावा लेट फीस के नाम पर 1 हजार रुपए तक छात्रों से वसूल किया गया है, जबकि नियमानुसार 25 रुपए प्रतिदिन से अधिक लेटफीस नहीं ली जा सकती है इस प्रकार लाखों रुपए लेटफीस के नाम से छात्रों से वसूला गया है जिसे भी जांचकर वापस दिलाया जाए।
इस प्रकार पुराने छात्रों से अभी तक 103 करोड़ 68 लाख रुपए अधिक फीस वसूली गई। इसके अतिरिक्त 2010-11 में इसी दर से अतिरिक्त फीस वसूल की जावेगी। जिस पर भी रोक लगाना आवश्यक है। अत: अनुरोध है कि उन समस्त पुराने छात्रों को जिन्होंने वर्ष 2005-06 से 2007-08 तक प्रवेश किया है उन समस्त छात्रों से जो 2009-10 तक उपरोक्तानुसार अधिक फीस वसूल की गई 24 हजार रुपए प्रतिवर्ष से 2 वर्ष की याने 48 हजार रुपए की दर से तथा उस पर दो वर्ष का ब्याज जो करीब 18 हजार रुपए 18 प्रतिशत वार्षिक दर से इस प्रकार प्रत्येक छात्रों को 60 हजार रुपए अधिक वसूल की गई फीस वापस की जावे।
बुधवार, 16 जून 2010
अखबार की जमीन पर बनते कॉम्पलेक्स
यह सरकारी भर्राशाही है या अखबार वालों की बेशर्मी यह तो आम लोग तय करे लेकिन कभी प्रेस काम्पलेक्स के नाम पर चर्चित रजबंधा मैदान में इन दिनों काम्पलेक्स खड़ा होने लगा है सरकार ने अखबारों की दादागिरी बर्दाश्त की तो हालत इंदौर जैसे हो जाएगी जहां कभी बारूद लगाकर अखबारों के बिल्डिंग उड़ाए गए थे।
अखबार वैसे तो एक मिशन के रूप में जाना जाता रहा है जिसका काम आम लोगों के हित साधना है लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में अब यह एक व्यवसाय का रुप ले चुका है और आम आदमी में भी अखबार के प्रति यही सोच बलवती होने लगी है तो इसकी वजह बड़े अखबारों का व्यवहार है जो अखबार के लिए दी गई सरकारी जमीन के उपयोग से सीधे परिलक्षित होती है। अमृत संदेश हो या नवभारत, देशबंधु हो या दैनिक भास्कर यहां तक कि तरुण छत्तीसगढ़ से लेकर छत्तीसगढ़ में यही हाल है। अखबार के दफ्तर कम काम्पलेक्स नजर आने वाले इन मीडिया वाले भले गलतफहमी पाल ले कि इससे आम लोग में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन जो लोग जानते हैं कि अखबार खोलने के नाम पर दी गई सरकारी जमीनों को दादागिरी के दम पर कैसे काम्पलेक्स में बदला जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों से भास्कर के 14 मॉले के काम्पलेक्स की राजधानी में जमकर चर्चा है और यह भी कहा जा रहा है कि इसके भूउपयोग से लेकर नक्शे तक की स्वीकृति में जमकर दादागिरी चली है और यह चर्चा सच है तो सरकार को भी सोचना चाहिए कि अब अखबारों को सस्ते दर पर जमीनें क्यों दी जाए।
और अंत में....
एक अखबार वाले ने तो नई राजधानी में ही नए प्रेस काम्पलेक्स का प्रस्ताव बना लिया है जबकि शुक्ला पेट्रोल पम्प को दूसरे जगह जमीन देने पर बस स्टैण्ड की जमीन खाली करने की खबरें इसी के यहां सबसे यादा छपती रही है।
अखबार वैसे तो एक मिशन के रूप में जाना जाता रहा है जिसका काम आम लोगों के हित साधना है लेकिन बदली हुई परिस्थितियों में अब यह एक व्यवसाय का रुप ले चुका है और आम आदमी में भी अखबार के प्रति यही सोच बलवती होने लगी है तो इसकी वजह बड़े अखबारों का व्यवहार है जो अखबार के लिए दी गई सरकारी जमीन के उपयोग से सीधे परिलक्षित होती है। अमृत संदेश हो या नवभारत, देशबंधु हो या दैनिक भास्कर यहां तक कि तरुण छत्तीसगढ़ से लेकर छत्तीसगढ़ में यही हाल है। अखबार के दफ्तर कम काम्पलेक्स नजर आने वाले इन मीडिया वाले भले गलतफहमी पाल ले कि इससे आम लोग में कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा लेकिन जो लोग जानते हैं कि अखबार खोलने के नाम पर दी गई सरकारी जमीनों को दादागिरी के दम पर कैसे काम्पलेक्स में बदला जा रहा है।
पिछले कुछ दिनों से भास्कर के 14 मॉले के काम्पलेक्स की राजधानी में जमकर चर्चा है और यह भी कहा जा रहा है कि इसके भूउपयोग से लेकर नक्शे तक की स्वीकृति में जमकर दादागिरी चली है और यह चर्चा सच है तो सरकार को भी सोचना चाहिए कि अब अखबारों को सस्ते दर पर जमीनें क्यों दी जाए।
और अंत में....
एक अखबार वाले ने तो नई राजधानी में ही नए प्रेस काम्पलेक्स का प्रस्ताव बना लिया है जबकि शुक्ला पेट्रोल पम्प को दूसरे जगह जमीन देने पर बस स्टैण्ड की जमीन खाली करने की खबरें इसी के यहां सबसे यादा छपती रही है।
धनेन्द्र साहू के गांव में चंद्रशेखर की दमदारी
तोरला में अवैध कब्जे की बाढ क़ो संरक्षण
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू चुनाव क्या हारे उन्हें अपने गांव में ही चुनौती मिलने लगी है कहा जाता है कि कृषि मंत्री चन्द्रशेखर साहू ने यहां अपने समर्थकों की फौज खड़ी करना शुरू कर दिया है और तोरला में हो रहे बेतहाशा अवैध कब्जों को इसी राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में वैसे तो कई गांवों में अवैध कब्जों की शिकायत आने लगी है लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू के गृह ग्राम तोरला में जिस बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं उससे गांव वाले परेशान है। बताया जाता है कि सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत तहसीलदार पटवारी से भी कई गई है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा समर्थकों की फौज खड़ी करने पूरे विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की रणनीति बनाई गई है और इस कार्य में तहसीलदार व पटवारियों को भी मदद करने के मौखिक निर्देश दिए गए है।
हमारे सूत्रों ने बताया कि जिन गांवों में भाजपा समर्थित पंचायत पदाधिकारी है वहां रणनीति के तहत अवैध कब्जों को प्रश्रय दिया जा रहा है। इधर तोरला में ग्रामीणों ने कहा कि जिस स्तर पर यहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं उससे आने वाले दिनों में नई मुसिबतों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि अवैध कब्जों की शिकायत लिखित में पटवारियों व तहसीलदार से करते हुए कब्जे तोड़ने की मांग की गई है लेकिन राजनैतिक संरक्षण के चलते अधिकारी भी चुप है।
दूसरी तरफ तोरला में चल रहे अवैध कब्जों को राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है और कहा जा रहा है कि धनेन्द्र साहू के गढ़ में सेंध मारने नई टीम तैयार की जा रही है। बहरहाल अभनपुर क्षेत्र में बढ रहे अवैध कब्जों की शिकायतों पर अधिकारियों की खामोशी से मामला गंभीर होता जा रहा है और जिस हिसाब से नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं उससे रमन सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू चुनाव क्या हारे उन्हें अपने गांव में ही चुनौती मिलने लगी है कहा जाता है कि कृषि मंत्री चन्द्रशेखर साहू ने यहां अपने समर्थकों की फौज खड़ी करना शुरू कर दिया है और तोरला में हो रहे बेतहाशा अवैध कब्जों को इसी राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
अभनपुर विधानसभा क्षेत्र में वैसे तो कई गांवों में अवैध कब्जों की शिकायत आने लगी है लेकिन प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष धनेन्द्र साहू के गृह ग्राम तोरला में जिस बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं उससे गांव वाले परेशान है। बताया जाता है कि सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध निर्माण की शिकायत तहसीलदार पटवारी से भी कई गई है। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सूत्र बताते हैं कि भाजपा समर्थकों की फौज खड़ी करने पूरे विधानसभा क्षेत्र में इस तरह की रणनीति बनाई गई है और इस कार्य में तहसीलदार व पटवारियों को भी मदद करने के मौखिक निर्देश दिए गए है।
हमारे सूत्रों ने बताया कि जिन गांवों में भाजपा समर्थित पंचायत पदाधिकारी है वहां रणनीति के तहत अवैध कब्जों को प्रश्रय दिया जा रहा है। इधर तोरला में ग्रामीणों ने कहा कि जिस स्तर पर यहां सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे किए जा रहे हैं उससे आने वाले दिनों में नई मुसिबतों का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि अवैध कब्जों की शिकायत लिखित में पटवारियों व तहसीलदार से करते हुए कब्जे तोड़ने की मांग की गई है लेकिन राजनैतिक संरक्षण के चलते अधिकारी भी चुप है।
दूसरी तरफ तोरला में चल रहे अवैध कब्जों को राजनैतिक परिप्रेक्ष्य में भी देखा जा रहा है और कहा जा रहा है कि धनेन्द्र साहू के गढ़ में सेंध मारने नई टीम तैयार की जा रही है। बहरहाल अभनपुर क्षेत्र में बढ रहे अवैध कब्जों की शिकायतों पर अधिकारियों की खामोशी से मामला गंभीर होता जा रहा है और जिस हिसाब से नेताओं के नाम सामने आ रहे हैं उससे रमन सरकार की छवि पर असर पड़ सकता है।
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